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	<title>Bharatkosh - सदस्य द्वारा योगदान [hi]</title>
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		<title>कृष्ण चन्द्र भट्टाचार्य</title>
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		<updated>2026-05-12T05:00:35Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;आशा चौधरी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा प्रसिद्ध व्यक्तित्व&lt;br /&gt;
|चित्र=Krishna-Chandra-Bhattacharya.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=कृष्ण चन्द्र भट्टाचार्य&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=कृष्ण चन्द्र भट्टाचार्य&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=&lt;br /&gt;
|जन्म=[[12 मई]], [[1875]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=सिरामपुर, [[पश्चिम बंगाल]] &lt;br /&gt;
|मृत्यु=[[11 दिसंबर]], [[1949]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=&lt;br /&gt;
|अभिभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|गुरु=&lt;br /&gt;
|कर्म भूमि=[[भारत]]&lt;br /&gt;
|कर्म-क्षेत्र=[[दर्शन]]&lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ=''Some aspects of Negation'' और ''The Jaina theory of Anekantavada''&amp;lt;ref&amp;gt;जो सम्भवत: उनके चिन्तन की प्रथम अवधि में लिखा गया था और द्वितीय अवधि के प्रारम्भ में प्रकाशित हुआ&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
|विषय=&lt;br /&gt;
|खोज=&lt;br /&gt;
|भाषा=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=दार्शनिक&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
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|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
'''कृष्ण चन्द्र भट्टाचार्य''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Krishna Chandra Bhattacharya'', जन्म: [[12 मई]], [[1875]] - मृत्यु: [[11 दिसंबर]], [[1949]]) [[कलकत्ता विश्वविद्यालय]] में दार्शनिक थे, जिन्होंने [[हिन्दू]] [[दर्शन]] पर अध्ययन किया। भट्टाचार्य का मानना था कि दर्शनशास्त्र को तर्क और आध्यात्मिक अनुभव दोनों से जुड़ना चाहिए। उनका मत था कि प्राचीन भारतीय चिंतन को आधुनिक सोच के साथ मिलाकर एक नए समाज का निर्माण किया जा सकता है। भट्टाचार्य ने अपनी संस्कृति और इतिहास को समझने पर जोर दिया। वे अपने एकात्म मानववाद के दर्शन के लिए सबसे ज्यादा जाने जाते हैं, जो मानव जीवन के आध्यात्मिक, सामाजिक और आर्थिक पहलुओं में सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास करता है। भट्टाचार्य का दर्शन मानव विकास के लिए एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान करता है और आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों के साथ भौतिक प्रगति को संतुलित करने के महत्व पर जोर देता है।&lt;br /&gt;
==जीवन परिचय==&lt;br /&gt;
कृष्णचन्द्र भट्टाचार्य का जन्म [[12 मई]], [[1875]] ई. को सिरामपुर [[पश्चिम बंगाल]] में हुआ था। वे बंगाल शिक्षा सेवा से बहाल होकर कई कॉलेजों में व्याख्याता रहे। [[1930]] में उन्होंने हुगली कॉलेज के स्थानापन्न प्रधानाचार्य के पद पर करते हुए अवकाश ग्रहण किया। अमलनेर के भारतीय दर्शन संस्थान के निदेशक के पद पर भी वे कुछ दिन रहे। [[1935]] में [[कलकत्ता विश्वविद्यालय]] के [[दर्शन शास्त्र]] के पंचम जॉर्ज प्रोफ़ेसर का पद उनको दिया गया।&lt;br /&gt;
==दर्शन के विकास की अवधियाँ==&lt;br /&gt;
कृष्णचन्द्र भट्टाचार्य के [[दर्शन]] के विकास को तीन सुस्पष्ट अवधियों में विभक्त किया जा सकता है- प्रथम अवधि [[1918]] तक, द्वितीय अवधि [[1925]] से [[1932]] तक, और तृतीय [[1934]] से [[1938]] तक।&lt;br /&gt;
====प्रथम अवधि====&lt;br /&gt;
प्रथम अवधि में जिस मुख्य विषय को उन्होंने लिया, वह 'निश्चित' और 'अनिश्चित' के स्वरूप तथा इन दोनों के मध्य संबंध की समस्या थी। निश्चित वह है जिसका अनुभव इतना सुस्पष्ट हो कि कम से कम अनुभव के समय तो उसके किसी एक पक्ष या पूरे के बारे में किसी भी तरह का कोई संदेह विद्यमान न हो। अनिश्चित ठीक इसके विपरीत है। इस अर्थ में इन्द्रियानुभववादियों के लिए जो कुछ भी [[इन्द्रियाँ|इन्द्रियों]] द्वारा प्राप्त है, वह निश्चित है। इसी तरह से तर्क बुद्धिवादियों के लिए विषय का तार्किक, संप्रत्ययात्मक और संबंधात्मक पक्ष निश्चित है। इन्द्रियानुभववादियों तथा तर्क बुद्धिवादियों, दोनों के ही अपने अपने 'निश्चित' हैं, जिनसे वे आरम्भ करते हैं तथा जो उनकी स्वीकृति के आधार स्तम्भ व अन्तिम मानदण्ड हैं। किन्तु फिर भी दोनों ही तत्संबंधी अनिश्चित से पूर्णतया मुक्त नहीं हो पाए हैं। हर एक ने जहाँ तक सम्भव हो सका है, अपने अनिश्चित की व्याख्या अपने निश्चित की भाषा में ही करने का प्रयास किया है, किन्तु फिर भी इसमें अनिश्चित का कुछ अंश सदा विद्यमान रहा है। उदाहरण के लिए, इन्द्रियानुभववादियों ने तर्कशास्त्र और संबंधों को 'इन्द्रियदत्त' के माध्यम से समझाने का प्रयास किया है। इसके विपरीत तर्क बुद्धिवादियों ने इस दत्त को अपूर्ण तर्कबुद्धि कहा और उसको ऐसी बाधा माना, जिससे छुटकारा पाना अत्यन्त आवश्यक है। उन्होंने इसे तर्कबुद्धि का अपने आप को नकारना तक कहा है। किन्तु इन्द्रियानुभववादियों के लिए यह एक समस्या है कि वे संबंधों को उन वास्तविक पदों से कैसे संबंधित करें, जो दत्त हैं, क्योंकि इस प्रक्रम में वही समस्या फिर उठ खड़ी होती है। इसके अतिरिक्त इन्द्रियानुभववादियों को तर्क शास्त्र की विभिन्न इन्द्रियानुभवपरक व्याख्याओं का तुलनात्मक मूल्यांकन भी करना है, जो कि तब तक सम्भव नहीं है, जब तक कि किसी आधारभूत अनिंद्रियानुभविक, फलत: अनिश्चित तर्क शास्त्र का, स्वीकार नहीं किया जाता। दूसरी ओर तर्कबुद्धिवादी भी इसी तरह दत्त से पूर्णतया मुक्त नहीं हो पाए हैं। उनको एक अंधकारमय पृष्ठभूमि या किसी अतार्किक तत्व को स्वीकार करने को बाध्य होना पड़ा है। हेगेलवादियों ने दत्त को तर्कबुद्धि का अपने आप को नकारना कहकर उससे छुटकारा पाने की कोशिश अवश्य की, पर इससे दत्त का ठोसपन जाता रहा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम शान्ति के साथ (वर्तमान संदर्भ में) निश्चित और अनिश्चित को-विचार और अनुभव को, मिला भी नहीं सकते। इसका कारण यह है कि ऐसा करने के लिए हमें संबंधों को संबंधियों से जोड़ने का असंभव कार्य करना होगा। वास्तव में इस तरह से दोनों को मिलाने की कोई आवश्यकता ही नहीं है, क्योंकि हर एक का यह दावा है कि वह अपने ही बल-बूते पर एक सांगोंपांग दर्शन प्रदान कर सकता है। चाहे इन्द्रियानुभववादी हों या तर्क बुद्धिवादी, दोनों के लिए [[दर्शन]], अनिश्चित को निश्चित में परिवर्तित करने, यानी अनुभव में जो भी अनिश्चित का अंश है, उसको निरन्तर निश्चित में परिवर्तित करने रहने का, सतत प्रयास है, भले ही वह कई चरणों में हो। तर्क बुद्धिवादियों के लिए सदैव असमाधेय बना रहने वाला दत्त हर स्थिति में वह अनिश्चित है, जो वहीं तक निश्चित में परिवर्तित हो सकता है, जहाँ तक विचार, जिसे अन्यथा तार्किक तत्व भी कहा जाता है, 'दत्त' से सतत मुक्त अनुभूत होता है। इसको दूसरे रूप में इस तरह भी कहा जा सकता है कि नीचे घोर इन्द्रियपरता के स्तर तक प्रत्येक चरण में दत्त का अनुभव स्वयं को प्रदान करने वाले विचार के रूप में होता है। विचार का मात्र स्वयं के रूप में ही नहीं, बल्कि जो दत्त नहीं है, उस रूप में भी 'अ' सही 'अ' केवल तभी है, जब वह न केवल 'अ' है, बल्कि वह अन्य सब चीजों का निषेध भी है। अपने परवर्ती चिंतन में भट्टाचार्य ने इसको दत्त का विभेदन करने वाला विचार कहा। केवल विचार को उन्होंने विच्छिन्न विचार कहा और बाद के चिंतन में विच्छेदन और विभेदन को मुक्ति के क्रमश: निषेधात्मक और विध्यात्मक रूप कहा।&lt;br /&gt;
==रचनाएँ==&lt;br /&gt;
अभी तक जो विवरण दिया गया है, वह भट्टाचार्य के एक लेख ''The place of indefinite in logic'' में उपलब्ध है। किन्तु भट्टाचार्य की यही विचारधारा उनके दो लेखों ''Some aspects of Negation'' और ''The Jaina theory of Anekantavada'' &amp;lt;ref&amp;gt;जो सम्भवत: उनके चिन्तन की प्रथम अवधि में लिखा गया था और द्वितीय अवधि के प्रारम्भ में प्रकाशित हुआ&amp;lt;/ref&amp;gt;, में दो भिन्न रूपों में विकसित हुई। प्रथम लेख में उन्होंने यह दिखाने का प्रयत्न किया है कि किस तरह से एक सरल अनेकात्मक स्थित 'अ' (और) 'ब' में, जिसमें 'अ' की 'ब' से भिन्नता 'अनिश्चित' मात्र है, निषेध का एक संबंधात्मक रूप (अ ब नहीं), जो अधिक निश्चित होता है, विकसित हो जाता है, इतना ही नहीं, भट्टाचार्य ने यह भी दिखा दिया है कि किस तरह से यह निषेध, जो कि स्वयं एक संबंध है और अन्य समस्त संबंधों का आधार है और अधिक निश्चित रूप से 'अ' के घटक के रूप में होता है। अपने दूसरे लेख, ''The Jaina theory of Anekantavada'' में भट्टाचार्य ने दिखाया है कि ठीक यही बात कुछ भिन्न रूप में [[जैन दर्शन]] के [[अनेकांतवाद]] के मूल में है।&lt;br /&gt;
====द्वितीय अवधि====&lt;br /&gt;
यहाँ तक यह बताया गया है कि तर्कबुद्धिवादी किस तरह से कई चरणों में (अनिश्चित) दत्त को निश्चित में परिवर्तित करता है। अपने चिंतन की द्वितीय अवधि में भट्टाचार्य इन्द्रियानुभववादियों को लेते हैं और यह दिखाते हैं कि &lt;br /&gt;
#दत्त में ऐसे पक्ष हैं, जिनको निश्चित में परिवर्तित करने की आवश्यकता होती है&lt;br /&gt;
#यद्यपि दत्त सदैव कोई वस्तु होता है जो कि मेरे लिए बाह्य है, फिर भी उसके इन पक्षों को किसी वस्तुपरक [[भाषा]] के माध्यम से निश्चित में परिवर्तित नहीं किया जा सकता&lt;br /&gt;
#इन पक्षों के निश्चितीकरण का एक मात्र तरीका उनकी विषयनिष्ठता से समीकरण है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अनुषंगत: पहली बार भट्टाचार्य ने इस बात को माना है कि वस्तु जहाँ तक मेरे लिए बाह्य है, वहाँ तक सदैव अनिश्चित ही रहेगी, क्योंकि बाह्य सदैव आपातिक होता है। मैं उसके बारे में कभी भी पूर्ण रूप से आश्वस्त नहीं हो सकता, हालांकि ऊपरी तौर से बिना किसी प्रश्न के मुझे उसको केवल इसलिए स्वीकार लेना पड़ता है कि उसने मेरे मन पर अधिकतम बाह्यकारी प्रभाव डाला है। इसके विपरीत, विषयनिष्ठ, जहाँ तक कि वह वास्तविक विषयनिष्ठता है, वास्तव में मैं स्वयं हूँ। अत: वह न केवल इसीलिए निश्चित है कि वस्तुओं से संबद्ध आपातिकता उससे पूर्णत: अलग हो गई है, बल्कि इसलिए भी कि वह समस्त वस्तुनिष्ठ विशेषताओं से विच्छिन्न है और उनका विभेदन करता है, वह स्वयं प्रकाश है : स्वत:सिद्ध विषयिनिष्ठता के रूप में अधिकाधिक अनुभव होता है और इसीलिए वह निश्चितता का सारतत्व है।&lt;br /&gt;
;दत्त के पक्ष&lt;br /&gt;
दत्त के पक्ष, जो इन्द्रियानुभववादियों के लिए समस्या और फलत: अनिश्चित हैं, कई प्रकार के हैं: &lt;br /&gt;
#तार्किक &lt;br /&gt;
#संबंधों के अलावा उनके अंतर्गत ये सब भी आते हैं&lt;br /&gt;
#वे मिथ्याभास जिनके मिथ्यात्व का ज्ञान हो चुका है&lt;br /&gt;
#जो कुछ इन्द्रियों के द्वारा गृहीत है, उसके वास्तविक होने का बोध यानी इन्द्रियानुभववाश्रित प्रतिज्ञप्तियों की सत्यता। इसके अतिरिक्त अपनी पुस्तक ''The subject as freedom'' में भट्टाचार्य ने इन्हें भी बार-बार दत्त के पक्ष बताया है : बाहर से दिखाई देने वाला अपना शरीर, अपने शरीर का आंतरिक अनुभव, अभाव के विभिन्न प्रकारों का ज्ञान और विभिन्न प्रकार के ज्ञात अभाव तथा बिंब प्रत्यय आदि।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपने लेखों, ''Sankara’s Doctrine of maya, correction of error as a logical process'' और ''The false and the subjective'' में भट्टाचार्य ने मिथ्या&amp;lt;ref&amp;gt;जिसके मिथ्यात्व का पता लग गया है&amp;lt;/ref&amp;gt; के संप्रत्यय में निहित वास्तविक समस्याओं का विस्तृत विवरण दिया है और यह बताया है कि इन समस्याओं का समाधान किस तरह से होना चाहिए और उसमें क्या-क्या बातें निहित हैं। सच्चाई के ज्ञान के पहले ऐसी मिथ्या वस्तु स्थान विशेष में प्रतीत होती थी, जिसमें अन्य वास्तविक वस्तुएं थीं। किन्तु सच्चाई के ज्ञान के बाद यह निश्चित रूप से ज्ञात हो जाता है कि न केवल वह वस्तु उस समय उस स्थान में नहीं थी, अपितु उसका इस स्थान में होना कभी संभव ही नहीं था। किन्तु इसके आधार पर तत्काल ही यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वह वस्तु कुछ नहीं है या कुछ नहीं थी। फिर भी, यह नहीं हो सकता कि वह वास्तविक दिक् में स्थित कोई वस्तु रही है। इस बात का तात्पर्य केवल यह है कि एक वस्तु के किसी स्थान में दिखाई देने के बाद अब यह दावा किया जाता है कि वह असल में विषयिता का एक प्रकार मात्र थी, पर वस्तु के रूप में प्रतीत हुई थी। प्रकाशन्तर से बात यह हुई कि उस चीज़ की प्रतीयमान विषयता का लोप होकर उसका विषयिता के रूप में किसी तरह अनुभव किया जाता है। भट्टाचार्य इस बात से अद्वैत वेदांत... के पक्ष में और भी निष्कर्ष निकालते हैं।&lt;br /&gt;
;दृष्टिकोण&lt;br /&gt;
अपने एक अन्य लेख ''Knowledge and Truth'' में भट्टाचार्य ने 'सत्यता' का भी लगभग इसी तरह से विवेचन किया है। उन्होंने ज्ञान और सत्यता (और उनके संबंधों) के साधारण संप्रत्ययों का विश्लेषण करके यह दिखाया है कि यद्यपि ज्ञान साधारणत: मानसिक अवस्था है, (और इसीलिए विषयनिष्ठ है), फिर भी, सर्वप्रथम ज्ञान की सत्यता का बोध ही हमें इस बात का अहसास कराता है कि ज्ञान अनिवार्यत:, शुद्ध विषयिनिष्ठता (एक शुद्ध विषयिनिष्ठ क्रिया) है तथा असल में ज्ञान की यह सत्यता इस अहसास का ही दूसरा नाम है। यह भी [[वेदांत]] का सिद्धांत है और इसी के आधार पर पहले की ही तरह भट्टाचार्य ने आगे के और भी तत्वमीमांसीय निष्कर्ष निकाले हैं। इसी लेख में भट्टाचार्य पहली बार कांट और वेदांत (अद्वैत) के मध्य संबंध की चर्चा करते हैं। उनका यह कहना है कि जहाँ कांट ने अपनी [[ज्ञानमीमांसा]] में शुद्ध अहंप्रत्यय (विषयिता का प्रत्यय) को स्पष्ट ज्ञान रूपी मानसिक स्थिति का प्रागनंभविक पूर्वालम्ब बताया है। वहाँ वेदांत ने इससे भी आगे जाकर सत्यता के अपने संप्रत्यय से सत्ता के बारे में एक सिद्धांत का विकास किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार दार्शनिक चिन्तन की इस द्वितीय अवधि में भट्टाचार्य का मुख्य उद्देश्य यह दिखाना था कि प्राकृतिक मनोवृत्ति के स्तर पर जिस चीज़ का भी अनुभव अनिश्चित (संदिग्ध) के रूप में होता है, अनन्त-यानी जब वह निश्चित में परिवर्तित हो जाती है-और कुछ नहीं बल्कि शुद्ध विषयिनिष्ठता ही है। यह बात न केवल मिथ्यात्व और सत्यता के संदर्भ में सही है, बल्कि संबंधों, और जो तर्कशास्त्र कहलाता है उसके, संदर्भ में सही है। जो अनिश्चित अपनी प्रथम अवस्था में निश्चित दत्त को घेरे हुए था और निश्चितीकरण की मांग कर रहा था, वह दूसरी अवस्था में शुद्ध विषयितामात्र के रूप में निश्चितीकरण योग्य सिद्ध हो गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जैसा कि पहले ही कहा जा चुका है, अपने [[ग्रन्थ]] ''The Subject as Freedom'' में अनुभव के विभिन्न स्तरों पर भट्टाचार्य ने ऐसे कई अनिश्चिती (विरोधाभासी घटनाओं) को लिया है और बहुत ही सूक्ष्म विश्लेषण के द्वारा यह दिखाया है कि प्रत्येक स्तर पर निश्चितिकरण के प्रयास में कोई शक्तिशाली दत्त, चाहे वह कोई बाह्य वस्तु हो, या बाहर से दिखने वाला व्यक्ति का अपना शरीर हो,&amp;lt;ref&amp;gt;जो शरीर के प्रत्यक्ष ही समानार्थक है&amp;lt;/ref&amp;gt; या अपने शरीर की ही आंतरिक अनुभूति हो, या चार प्रकार के अभाव या उनके अनुभव हों, या कोई भावात्मक मानसिक तथ्य हो, जैसे प्रतिमा या विचार (और इनके उपप्रकार), उसमें विलीन हो जाता है, जो संबंधित स्तर या उपस्तर पर अपेक्षाकृत विषयनिष्ठ है, अर्थात् विषयिनिष्ठता गुणों से विच्छिन्न कर देता है और ऐसी वस्तु का विभेदन करता है। यह सब भट्टाचार्य ने सविस्तार दिखाया है और फिर भी उनका यह दावा है कि उनका कार्य एक साधारण मनोवैज्ञानिक का नहीं है। साधारण मनोविज्ञान के लिए विषयिनिष्ठ केवल मानसिक तथ्य (स्थिति) है, जिसका अन्तनिरीक्षण द्वारा वस्तु के रूप में अनुभव किया जाता है। दूसरी ओर भट्टाचार्य विषयिनिष्ठता के दो और प्रकार बताते हैं- &lt;br /&gt;
#अव-मानसिक विषयिनिष्ठता &lt;br /&gt;
#अधि-मानसिक विषयिनिष्ठता। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अव-मानसिक का क्षेत्र प्रत्यक्ष से लेकर विभिन्न प्रकार के अभावों के अनुभव तक है। उसका अन्तनिरीक्षण द्वारा अनुभव संबंधित वस्तुओं से, अर्थात् स्वतंत्रता के क्रमिक रूपों- जैसे कि मानसिक तथ्य सदैव होते हैं, से विच्छिन्न कर किसी भी प्रकार नहीं नहीं किया जा सकता, हालांकि इसका भी वस्तुओं के रूप में अनुभव उन वस्तुओं के साथ किसी तरह से व्यतिकर होने के कारण होता है, जिनकी ओर इसका (मानसिक तथ्य) अन्तत: निर्देश होता है। दूसरी ओर, कोई ऐसी वस्तु होती ही नहीं, जिससे अधि मानसिक का विच्छेद करने की ज़रूरत हो और इसलिए उसका किसी वस्तु के साथ व्यतिकर होने का प्रश्न ही नहीं उठता। वह विषयिनिष्ठता का शुद्धतम रूप है, जिसे केवल अपना ही बोध होता है। यानी जो स्वयं प्रकाश्य है। इस अर्थ में अधिमानसिक विषयिनिष्ठता के दो रूप हैं- अविमर्शात्मक और विमर्शात्मक। अपने अविमर्शात्मक रूप में भट्टाचार्य के अनुसार यह 'भावना' है तथा विमर्शात्मक रूप में आत्मिक अन्तनिरीक्षण। इसके विपरीत, प्रत्येक मानसिक तथ्य चाहे वह किसी भी स्तर पर हो, एक अन्तनिरीक्षित&amp;lt;ref&amp;gt;कम से कम अन्तनिरीक्षणगम्य&amp;lt;/ref&amp;gt; वस्तु होती है और किसी तरह से उस अन्तनिरीक्षण से अभिन्न भी। वह उससे अभिन्न वहीं तक होता है, जहाँ तक कि वह प्रात्यक्षिक रूप में उस मानसिक अवस्था (ज्ञान) का विषय होती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
''The subject as Freedom'' में भट्टाचार्य आत्मिक अन्तनिरीक्षण से भी आगे की एक अवस्था को स्वीकार करते हैं। वास्तव में आत्मिक अन्तनिरीक्षण कांट का प्रागनुभविक अहंप्रत्यय ही है, जो सदैव एक क्रिया होता है, न कि कोई अस्तित्ववान वस्तु या और पीछे विद्यमान किसी द्रव्य का सूचक। कांट ने इस बात को भी कभी स्पष्ट नहीं किया कि उनका प्रागनुभविक अहंप्रत्यय (शुद्ध तर्कबुद्धि) वैयक्तिक (वैशेष्टिक) है या अति-वैयक्तिक। इसके विपरीत, भट्टाचार्य इन दोनों के ही बारे में पूर्णतया स्पष्ट हैं। आत्मिक अन्तनिरीक्षण यद्यपि असंदिग्ध रूप से वैयक्तिक उत्तम पुरुष 'मैं' है, तथापि नैतिक परिस्थिति में वह मध्यम पुरुष 'तुम' से और परीक्षत: अन्य पुरुष 'वह' तक से पारिवारिक सादृश्य रखता है तथा धार्मिक चेतना में वह अति-वैयक्तिक 'अहंता' के निषेध की मांग (जो कि अभी पूरी नहीं हुई है) झलकती है। दूसरे शब्दों में मांग यह है कि स्वानुभूत व्याष्टिक विषयनिष्ठता के इस निषेध द्वारा आगे के स्तर पर जिसकी प्राप्ति करनी है, वह है निरपेक्ष, जो भट्टाचार्य के अनुसार अब भी विषयिनिष्ठता अर्थात् स्वतंत्रता है, हालांकि अब उसका बोध वस्तुवत् मात्र होता है आत्मवत् नहीं। भट्टाचार्य के अनुसार स्वतंत्रता के रूप में परम विषयनिष्ठता है। अपने ग्रन्थ ''The Subject as Freedom'' के प्रारम्भ में भट्टाचार्य ने विषयी&amp;lt;ref&amp;gt;उत्तम, मध्यम और अन्य पुरुष-क्रमश: मैं, तुम और वह&amp;lt;/ref&amp;gt; और विषय&amp;lt;ref&amp;gt;सर्वनाम 'यह' के द्वारा संकेतित&amp;lt;/ref&amp;gt; के संप्रत्ययों का स्पष्ट विश्लेषण किया है।&lt;br /&gt;
====तृतीय अवधि====&lt;br /&gt;
परम तत्त्व या ब्रह्म के इसी प्रत्यय को भट्टाचार्य ने अपने चिन्तन की तृतीय अवधि में अपने लेख ''The concept of philosophy'' में, धैर्यपूर्व विकसित किया है। ब्रह्म वह सत्य है जिसकी सत्तात्मक स्थिति की मांग है। वह एक प्रतीकात्मक सत्य है, शाब्दिक सत्य नहीं। इस लेख की दो अन्य नई विशेषताएं हैं- &lt;br /&gt;
#भट्टाचार्य ने इस संप्रत्यय का विकास सोपानिक क्रम में इन तीन अन्य संप्रत्ययों के विस्तृत विश्लेषण के द्वारा किया है- (इन्द्रियानुभविक) तथ्य, स्वयंभू (वस्तु-सामान्य), और विषयिनिष्ठता (उत्तम पुरुष 'मैं') वास्तविकता के रूप में।&lt;br /&gt;
#जो लेख की विशेष रूप से उल्लेखनीय नई बात है, वह यह की भट्टाचार्य के अनुसार ब्रह्म को तीन वैकल्पिक रीतियों से प्रतीकात्मक रूप में सीचा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===='तथ्य'==== &lt;br /&gt;
#जिसके विषय में कुछ कहने की आवश्यकता तो नहीं होती, किन्तु फिर भी कहा जा सकता है, अर्थात् जो बिना कुछ कहे ही बोधगम्य है&lt;br /&gt;
#जिसे शाब्दिक अर्थ में सोचा जाता है&lt;br /&gt;
#जिसका या तो इन्द्रियों के माध्यम से प्रत्यक्ष होता है या फिर जिसके ऐसे प्रत्यक्ष की कल्पना की जाती है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इसके विपरीत, जो स्वयंभू (वस्तु) है, उसके बारे में ऐसा माना जाता है कि&lt;br /&gt;
#यदि उसके विषय में कहा जा जाये तो वह बोधगम्य नहीं होती, हालांकि वह व्यक्ति के द्वारा व्यक्त विश्वास से पूर्णतया स्वतंत्र होती है। यह कहना कि 'वहाँ पर कोई वस्तु है' या वस्तुओं के अमुक प्रकार हैं।&lt;br /&gt;
#वह शाब्दिक अर्थ में विचार का विषय है&lt;br /&gt;
#न तो उसका इन्द्रिय प्रत्यक्ष होता है और न उसके ऐसे प्रत्यक्ष की कल्पना ही की जाती है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ तक वास्तविकता&amp;lt;ref&amp;gt;उत्तम पुरुष 'मैं' जिसका स्वयं को साक्षात् ज्ञान होता है&amp;lt;/ref&amp;gt; का प्रश्न है, उसका भी स्वयंभू वस्तु की भांति ही बोध होता है। अन्तर केवल इतना होता है कि उसका बोध एक इन्द्रियानुभविक या तत्वमीमांससीय वस्तु के रूप में नहीं होता। ऐसी वास्तविकता का साक्षात ज्ञान होता है तथा इसका मेरे कहने से पृथक् रूप में अनुभव नहीं किया जाता। यद्यपि इसका श्रोता और वक्ता दोनों को ही समान बोध होता है, तथापि यह दोनों के द्वारा व्यक्त विश्वास से पूर्णतया स्वतंत्र होती है और इसकी अपनी सत्तात्मक स्थिति होती है। तथ्य, स्वयंभू वस्तु तथा विषयी के रूप में साक्षात रूप से ज्ञात वास्तविकता शाब्दिक अर्थ में विचार के विषय है, किन्तु ब्रह्म जो कि वास्तविकता से भी परे माना गया है,&amp;lt;ref&amp;gt;और जिसको भट्टाचार्य ने सत्यता कहा है&amp;lt;/ref&amp;gt; शाब्दिक अर्थ तक में विचार का विषय नहीं है। उसके संबंध में तो कही गई बात के निषेध द्वारा ही कुछ कहा जा सकता है। विचार के ये चारों प्रकार हैं। प्रत्येक का विषय एक विश्वास रहता है, जिसका कथन होता है, किन्तु अन्तिम में वह सदैव ज्ञेय के रूप में जाना जाता है।&amp;lt;ref&amp;gt;अज्ञेय के रूप में कदापि नहीं&amp;lt;/ref&amp;gt; इस प्रकार उसकी सत्ता का निषेध नहीं किया जाता।&lt;br /&gt;
====ब्रह्म के वैकल्पिक रूप====&lt;br /&gt;
इस ब्रह्म का तीन वैकल्पिक रूपों से ज्ञान हो सकता है-&lt;br /&gt;
#चरम सत्ता के रूप में, इस रूप में वह ऐसा सत्य है, जो अन्तिम आत्म-अभेद है, इस रूप में कि उसका अन्य किसी चीज़ से भेद नहीं किया जा सकता&lt;br /&gt;
#पूर्ण विच्छेद, पूर्ण स्वातंत्र्य के रूप में जिसमें विच्छेद की प्रक्रिया उच्चतम सीमा पर पहुँच गई हो और कोई ऐसी चीज़ शेष न रहे, जिससे अभी विच्छेद होना बाकी हो&lt;br /&gt;
#उक्त दोनों विकल्पों के अनियत क्रमांतरण के रूप में। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये तीनों विकल्प वक्ता के दृष्टिकोण से ब्रह्म के तीन वैकल्पिक वर्णन हैं, उसके यथार्थ चित्रण नहीं। इसके साथ ही तीनों विकल्प समान रूप से (किन्तु एक साथ नहीं) सत्य के कथन हैं। इन विकल्पों में से प्रथम अद्वैत वेदांत का है, दूसरा (माध्यमिक) [[बौद्ध दर्शन]] का, और तीसरा हेगेल तथा शैव मत का। यदि प्रत्यक्ष ब्रह्म को सत्य के रूप में मानता है और दूसरा स्वतंत्रता के रूप में तो तीसरा 'मूल्य' के रूप में मानता है, जो सत्ता के साथ साथ सतत विभेदन भी है। हेगेल सत्य और स्वतंत्रता के अनियत क्रमांतरण को नहीं समझ पाए और इसलिए इन दोनों की एकता की बात ग़लती से कर गए। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
:&amp;quot;परम ब्रह्म सत्य हो सकता है या वह जो सत्य नहीं है, अथवा वह इन दोनों की मात्र भिन्नता भी हो सकता है, जिसकी पृष्ठभूमि में कोई एकता नहीं है।&amp;quot; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ब्रह्म के इन वैकल्पिक संप्रत्ययों का भट्टाचार्य ने अपने लेख ''The concept of the Absolute and its alternative forms'' में अधिक विस्तार के साथ विकास किया है। लेख के आरम्भ में भट्टाचार्य, ज्ञान, भावना और संकल्प में, अंतर्वस्तु और चेतना के मध्य संबंध का विमर्शात्मक विश्लेषण करते हैं। भट्टाचार्य ने यह दावा दिखा दिया है कि ज्ञान, भावना व संकल्प ब्रह्म को क्रमश: सत्य, मूल्य और स्वतंत्रता (वास्तविकता) के रूप में कल्पित करते हैं। सत्य वह अंतर्वस्तु है, जिसको अंतत: अंतर्वस्तु के संदर्भ में मुक्त होना है और मूल्य एक तरह से अंतर्वस्तु और चेतना की मुक्त एकता है। ये तीनों इकट्ठे नहीं हैं, जो वास्तविक (स्वतंत्र) है, वह सत्य नहीं है, किन्तु सत्य वास्तविक हो सकता है, सत्य मूल्य नहीं है, किन्तु मूल्य असत्य नहीं है, और यद्यपि मूल्य के वास्तविक और सत्य विशेषण नहीं हो सकते, तथापि यह नहीं कहा जा सकता कि वास्तविकता (स्वतंत्रता) मूल्य नहीं है, परम तत्व या ब्रह्म को इसी अर्थ में सत्यता, मूल्य और वास्तविकता का क्रमान्तरण कहा जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मूल्य के संप्रत्यय का पूर्ण विवेचन भट्टाचार्य ने अपने ''The concept of value'' में किया है। उन्होंने इस लेख एक बार फिर यह दिखाया है कि भावना ज्ञान और संकल्प के क्या क्या कार्य हैं। उन्होंने भावना को मुख्य बताया है तथा ज्ञान और संकल्प को गौण।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार= |प्रारम्भिक=प्रारम्भिक3 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
{{cite book | last =भट्टाचार्य | first =प्रो. कालिदास | title =विश्व के प्रमुख दार्शनिक  | edition = | publisher =वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग, नई दिल्ली | location =भारतडिस्कवरी पुस्तकालय  | language =हिन्दी  | pages =359 | chapter =  | url = }}&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{दार्शनिक}}&lt;br /&gt;
[[Category:दार्शनिक]]&lt;br /&gt;
[[Category:दर्शन कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
	</entry>
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		<title>ज़ुबिन मेहता</title>
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		<updated>2026-05-09T07:59:56Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;आशा चौधरी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा कलाकार&lt;br /&gt;
|चित्र=ZubinMehtaMar11.jpg&lt;br /&gt;
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|अद्यतन={{अद्यतन|16:50, 6 अप्रॅल 2015 (IST)}}&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
'''ज़ुबिन मेहता''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Zubin Mehta'', जन्म: [[29 अप्रैल]] [[1936]]) एक प्रसिद्ध भारतीय संगीत निर्देशक हैं। ज़ुबिन मेहता को [[कला]] के क्षेत्र में [[भारत सरकार]] द्वारा सन [[1966]] में [[पद्म भूषण]] और [[2001]] में [[पद्म विभूषण]] से सम्मानित किया गया था। अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संगीतज्ञ जुबिन मेहता भारतीय संगीत के प्रबल समर्थक हैं।&lt;br /&gt;
==जीवन परिचय==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Zubin-Mehta.jpg|thumb|250px|ज़ुबिन मेहता|left]]&lt;br /&gt;
====जन्म====&lt;br /&gt;
ज़ुबिन मेहता का जन्म 29 अप्रैल 1936 को [[मुम्बई]] के [[पारसी]] परिवार में हुआ था। उनकी माता का नाम तेहमिना मेहता और पिता का नाम मेहलि मेहता था। ज़ुबिन मेहता के पिता बॉम्बे सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा में [[वायलिन]] वादक थे।  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====शिक्षा====&lt;br /&gt;
ज़ुबिन मेहता ने अपनी आरंम्भिक शिक्षा सेंट मैरी स्कूल से की थी और बाद में उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज से स्नातक किया।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Zubi. Mehta 1.jpeg|thumb|250px|ज़ुबिन मेहता|right]] &lt;br /&gt;
==कार्यकाल== &lt;br /&gt;
ज़ुबिन मेहता [[1962]] से [[1967]] तक एक साथ दो आर्केस्ट्रा 'मॉण्ट्रियल सिम्फेनी' तथा 'लॉस एंजिल्स फिल- हार्मोनिक' के संचालक रहे। साथ ही [[1978]] से [[1991]] तक 'न्यूयार्क फिलहार्मोनिक' तथा 'इजराइल फिलहार्मोनिक' के संचालक भी रहे। [[27 नवम्बर]], [[1994]] को इन्दिरा गाँधी स्टेडियम में इन्होंने इजराइल फिलहार्मोनिक का संचालन कर उपस्थित श्रोताओं का मन मोह लिया था। 'ए कंसर्ट फ़ॉर पीस' के तहत आयोजित इस कार्यक्रम को राष्ट्रपिता [[महात्मा गाँधी]] की 125वीं जयंती पर उनकी स्मृति को समर्पित किया गया था।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Zubin-Mehta.jpg|thumb|250px|ज़ुबिन मेहता|left]]&lt;br /&gt;
==सम्मान और पुरस्कार==&lt;br /&gt;
ज़ुबिन मेहता को सन 1966 में [[पद्मभूषण]] और [[2001]] में [[पद्म विभूषण]] से सम्मानित किया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
[http://www.zubinmehta.net/ ज़ुबिन मेहता]&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{संगीतकार}}{{पद्म विभूषण}}&lt;br /&gt;
[[Category:गायक]]&lt;br /&gt;
[[Category:सिनेमा]]&lt;br /&gt;
[[Category:सिनेमा कोश]] &lt;br /&gt;
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[[Category:संगीतकार]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
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		<title>ज़ुबिन मेहता</title>
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&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा कलाकार&lt;br /&gt;
|चित्र=ZubinMehtaMar11.jpg&lt;br /&gt;
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}}&lt;br /&gt;
'''ज़ुबिन मेहता''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Zubin Mehta'', जन्म: [[29 अप्रैल]] [[1936]]) एक प्रसिद्ध भारतीय संगीत निर्देशक हैं। ज़ुबिन मेहता को [[कला]] के क्षेत्र में [[भारत सरकार]] द्वारा सन [[1966]] में [[पद्म भूषण]] और [[2001]] में [[पद्म विभूषण]] से सम्मानित किया गया था। अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संगीतज्ञ जुबिन मेहता भारतीय संगीत के प्रबल समर्थक हैं।&lt;br /&gt;
==जीवन परिचय==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Zubin-Mehta.jpg|thumb|250px|ज़ुबिन मेहता|left]]&lt;br /&gt;
====जन्म====&lt;br /&gt;
ज़ुबिन मेहता का जन्म 29 अप्रैल 1936 को [[मुम्बई]] के [[पारसी]] परिवार में हुआ था। उनकी माता का नाम तेहमिना मेहता और पिता का नाम मेहलि मेहता था। ज़ुबिन मेहता के पिता बॉम्बे सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा में [[वायलिन]] वादक थे।  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====शिक्षा====&lt;br /&gt;
ज़ुबिन मेहता ने अपनी आरंम्भिक शिक्षा सेंट मैरी स्कूल से की थी और बाद में उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज से स्नातक किया।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Zubi. Mehta 1.jpeg|thumb|250px|ज़ुबिन मेहता|right]] &lt;br /&gt;
==कार्यकाल== &lt;br /&gt;
ज़ुबिन मेहता [[1962]] से [[1967]] तक एक साथ दो आर्केस्ट्रा 'मॉण्ट्रियल सिम्फेनी' तथा 'लॉस एंजिल्स फिल- हार्मोनिक' के संचालक रहे। साथ ही [[1978]] से [[1991]] तक 'न्यूयार्क फिलहार्मोनिक' तथा 'इजराइल फिलहार्मोनिक' के संचालक भी रहे। [[27 नवम्बर]], [[1994]] को इन्दिरा गाँधी स्टेडियम में इन्होंने इजराइल फिलहार्मोनिक का संचालन कर उपस्थित श्रोताओं का मन मोह लिया था। 'ए कंसर्ट फ़ॉर पीस' के तहत आयोजित इस कार्यक्रम को राष्ट्रपिता [[महात्मा गाँधी]] की 125वीं जयंती पर उनकी स्मृति को समर्पित किया गया था।&lt;br /&gt;
[[चित्र:ज़ुबिन मेहता.jpeg|thumb|250px|ज़ुबिन मेहता|left]]&lt;br /&gt;
==सम्मान और पुरस्कार==&lt;br /&gt;
ज़ुबिन मेहता को सन 1966 में [[पद्मभूषण]] और [[2001]] में [[पद्म विभूषण]] से सम्मानित किया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
[http://www.zubinmehta.net/ ज़ुबिन मेहता]&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{संगीतकार}}{{पद्म विभूषण}}&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
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		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
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		<title>ज़ुबिन मेहता</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;आशा चौधरी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा कलाकार&lt;br /&gt;
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|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=ज़ुबिन मेहता [[1962]] से [[1967]] तक एक साथ दो आर्केस्ट्रा 'मॉण्ट्रियल सिम्फेनी' तथा 'लॉस एंजिल्स फिल- हार्मोनिक' के संचालक रहे। &lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=[http://www.zubinmehta.net/ ज़ुबिन मेहता]&lt;br /&gt;
|अद्यतन={{अद्यतन|16:50, 6 अप्रॅल 2015 (IST)}}&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
'''ज़ुबिन मेहता''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Zubin Mehta'', जन्म: [[29 अप्रैल]] [[1936]]) एक प्रसिद्ध भारतीय संगीत निर्देशक हैं। ज़ुबिन मेहता को [[कला]] के क्षेत्र में [[भारत सरकार]] द्वारा सन [[1966]] में [[पद्म भूषण]] और [[2001]] में [[पद्म विभूषण]] से सम्मानित किया गया था। अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संगीतज्ञ जुबिन मेहता भारतीय संगीत के प्रबल समर्थक हैं।&lt;br /&gt;
==जीवन परिचय==&lt;br /&gt;
[[चित्र:ज़ुबिन मेहता.jpeg|thumb|250px|ज़ुबिन मेहता|left]]&lt;br /&gt;
====जन्म====&lt;br /&gt;
ज़ुबिन मेहता का जन्म 29 अप्रैल 1936 को [[मुम्बई]] के [[पारसी]] परिवार में हुआ था। उनकी माता का नाम तेहमिना मेहता और पिता का नाम मेहलि मेहता था। ज़ुबिन मेहता के पिता बॉम्बे सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा में [[वायलिन]] वादक थे।  &lt;br /&gt;
[[चित्र:Zubin-Mehta.jpg|thumb|250px|ज़ुबिन मेहता|right]]&lt;br /&gt;
====शिक्षा====&lt;br /&gt;
ज़ुबिन मेहता ने अपनी आरंम्भिक शिक्षा सेंट मैरी स्कूल से की थी और बाद में उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज से स्नातक किया।&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==कार्यकाल== &lt;br /&gt;
[[चित्र:Zubi. Mehta 1.jpeg|thumb|250px|ज़ुबिन मेहता|left]]&lt;br /&gt;
ज़ुबिन मेहता [[1962]] से [[1967]] तक एक साथ दो आर्केस्ट्रा 'मॉण्ट्रियल सिम्फेनी' तथा 'लॉस एंजिल्स फिल- हार्मोनिक' के संचालक रहे। साथ ही [[1978]] से [[1991]] तक 'न्यूयार्क फिलहार्मोनिक' तथा 'इजराइल फिलहार्मोनिक' के संचालक भी रहे। [[27 नवम्बर]], [[1994]] को इन्दिरा गाँधी स्टेडियम में इन्होंने इजराइल फिलहार्मोनिक का संचालन कर उपस्थित श्रोताओं का मन मोह लिया था। 'ए कंसर्ट फ़ॉर पीस' के तहत आयोजित इस कार्यक्रम को राष्ट्रपिता [[महात्मा गाँधी]] की 125वीं जयंती पर उनकी स्मृति को समर्पित किया गया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सम्मान और पुरस्कार==&lt;br /&gt;
ज़ुबिन मेहता को सन 1966 में [[पद्मभूषण]] और [[2001]] में [[पद्म विभूषण]] से सम्मानित किया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
[http://www.zubinmehta.net/ ज़ुबिन मेहता]&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{संगीतकार}}{{पद्म विभूषण}}&lt;br /&gt;
[[Category:गायक]]&lt;br /&gt;
[[Category:सिनेमा]]&lt;br /&gt;
[[Category:सिनेमा कोश]] &lt;br /&gt;
[[Category:कला कोश]] &lt;br /&gt;
[[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:पद्म विभूषण]]&lt;br /&gt;
[[Category:पद्म भूषण]]&lt;br /&gt;
[[Category:संगीतकार]]&lt;br /&gt;
[[Category:संगीत कोश]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
	</entry>
	<entry>
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		<title>चित्र:Zubi. Mehta 1.jpeg</title>
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		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
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		<title>हेमवती नंदन बहुगुणा</title>
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&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=Hemvati-Nandan-Bahuguna.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=हेमवती नंदन बहुगुणा&lt;br /&gt;
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[[5 मार्च]], [[1974]] से [[29 नवम्बर]], [[1975]] तक&lt;br /&gt;
|शिक्षा=बी.ए.&lt;br /&gt;
|भाषा=&lt;br /&gt;
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|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
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|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=वर्ष [[1952]] में हेमवती नंदन बहुगुणा सर्वप्रथम [[विधान सभा]] सदस्य निर्वाचित हुए। पुनः वर्ष [[1957]] से लगातार [[1969]] तक और [[1974]] से [[1977 ]]तक उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य रहे।&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''हेमवती नंदन बहुगुणा''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Hemvati Nandan Bahuguna'', जन्म- [[25 अप्रैल]], [[1919]]; मृत्यु- [[17 मार्च]], [[1989]]) [[उत्तर प्रदेश]] के दो बार [[मुख्यमंत्री]] रहने वाले जानेमाने राजनीतिज्ञ और राजनेता थे। वेसन्[[1971]], [[1977]] तथा [[1980]] में [[लोक सभा]] के सदस्य निर्वाचित हुए थे।सन्1977 में वे केंद्रीय मंत्रिमण्डल में पेट्रोलियम, रसायन तथा उर्वरक मंत्री रहे थे। जानीमानी राजनीतिज्ञ रीता बहुगुणा हेमवती नंदन जी की पुत्री हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==परिचय==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Hemwati Nandan Bahuguna 1.jpg|thumb|250px|हेमवती नंदन बहुगुणा|right]]&lt;br /&gt;
हेमवती नंदन बहुगुणा का जन्म [[उत्तराखंड]] के बुघाणी गांव में 25 अप्रैल, 1919 को हुआ था। वे अपने [[पिता]] रेवती नंदन बहुगुणा की दूसरी पत्नी की संतान थे। राजनीतिक तथा समाज सेवक हेमवती नंदन बहुगुणा ने [[इलाहाबाद विश्वविद्यालय]] से बी.ए. तक की शिक्षा प्राप्त की थी।&lt;br /&gt;
==राजनीतिक कॅरियर==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Hemwati Nandan Bahuguna 2018 stamp of India.jpg|thumb|250px|हेमवती नंदन बहुगुणा|left]]&lt;br /&gt;
*वर्ष [[1952]] में हेमवती नंदन बहुगुणा सर्वप्रथम [[विधान सभा]] सदस्य निर्वाचित हुए। पुनः वर्ष [[1957]] से लगातार [[1969]] तक और [[1974]] से [[1977 ]]तक उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य रहे।&lt;br /&gt;
*1952 में वे उत्तर प्रदेश कांग्रेस समिति तथा वर्ष [[1957]] से अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के सदस्य रहे।&lt;br /&gt;
*अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव रहे।&lt;br /&gt;
*वर्ष 1957 में हेमवती नंदन बहुगुणा डॉ. सम्पूर्णानन्द जी के मंत्रिमण्डल में सभासचिव रहे।&lt;br /&gt;
*सम्पूर्णानन्द मंत्रिमण्डल में श्रम तथा समाज कल्याण विभाग के पार्लियामेन्टरी सेक्रेटरी रहे।&lt;br /&gt;
*सन [[1958]] में उद्योग विभाग के उपमंत्री रहे।&lt;br /&gt;
*[[1962]] में श्रम विभाग के उपमंत्री बनाये गए।&lt;br /&gt;
*वर्ष [[1967]] में वित्त तथा परिवहन मंत्री रहे।&lt;br /&gt;
*वर्ष 1971, 1977 तथा 1980 में लोक सभा सदस्य निर्वाचित हुए।&lt;br /&gt;
*[[2 मई]], [[1971]] को केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में संचार राज्य मंत्री बने।&lt;br /&gt;
*पहली बार [[8 नवम्बर]], [[1973]] से [[4 मार्च]], [[1974]] तथा दूसरी बार [[5 मार्च]], [[1974]] से [[29 नवम्बर]], [[1975]] तक [[उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री]] रहे।&lt;br /&gt;
*सन [[1977]] में केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में पेट्रोलियम, रसायन तथा उर्वरक मंत्री रहे।&lt;br /&gt;
*वर्ष [[1979]] में केन्द्रीय वित्त मंत्री बने।&lt;br /&gt;
;विदेश यात्रा&lt;br /&gt;
हेमवती नंदन बहुगुणा ने [[इंग्लैण्ड]], [[जर्मनी]], [[इटली]], [[मिस्र]] आदि देशों की यात्राएं कीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मृत्यु==&lt;br /&gt;
[[17 मार्च]], [[1989]] को हेमवती नंदन बहुगुणा का निधन हो गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1|माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री}}{{पाँचवीं लोकसभा सांसद}}{{छठी लोकसभा सांसद}}{{सातवीं लोकसभा सांसद}}&lt;br /&gt;
[[Category:लोकसभा_सांसद]][[Category:राजनेता]][[Category:राजनीतिज्ञ]][[Category:लोकसभा]][[Category:मुख्यमंत्री]][[Category:उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री]][[Category:उत्तर प्रदेश_के_लोकसभा_सांसद]][[Category:राजनीति_कोश]][[Category:पाँचवीं लोकसभा सांसद]][[Category:छठी लोकसभा सांसद]][[Category:सातवीं लोकसभा सांसद]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
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&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=Hemvati-Nandan-Bahuguna.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=हेमवती नंदन बहुगुणा&lt;br /&gt;
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|कार्य काल=[[8 नवम्बर]], [[1973]] से [[4 मार्च]], [[1974]] तक&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[5 मार्च]], [[1974]] से [[29 नवम्बर]], [[1975]] तक&lt;br /&gt;
|शिक्षा=बी.ए.&lt;br /&gt;
|भाषा=&lt;br /&gt;
|विद्यालय=[[इलाहाबाद विश्वविद्यालय]]&lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=वर्ष [[1952]] में हेमवती नंदन बहुगुणा सर्वप्रथम [[विधान सभा]] सदस्य निर्वाचित हुए। पुनः वर्ष [[1957]] से लगातार [[1969]] तक और [[1974]] से [[1977 ]]तक उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य रहे।&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''हेमवती नंदन बहुगुणा''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Hemvati Nandan Bahuguna'', जन्म- [[25 अप्रैल]], [[1919]]; मृत्यु- [[17 मार्च]], [[1989]]) [[उत्तर प्रदेश]] के दो बार [[मुख्यमंत्री]] रहने वाले जानेमाने राजनीतिज्ञ और राजनेता थे। वेसन्[[1971]], [[1977]] तथा [[1980]] में [[लोक सभा]] के सदस्य निर्वाचित हुए थे।सन्1977 में वे केंद्रीय मंत्रिमण्डल में पेट्रोलियम, रसायन तथा उर्वरक मंत्री रहे थे। जानीमानी राजनीतिज्ञ रीता बहुगुणा हेमवती नंदन जी की पुत्री हैं।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Hemwati Nandan Bahuguna 1.jpg|thumb|250px|हेमवती नंदन बहुगुणा|left]]&lt;br /&gt;
==परिचय==&lt;br /&gt;
हेमवती नंदन बहुगुणा का जन्म [[उत्तराखंड]] के बुघाणी गांव में 25 अप्रैल, 1919 को हुआ था। वे अपने [[पिता]] रेवती नंदन बहुगुणा की दूसरी पत्नी की संतान थे। राजनीतिक तथा समाज सेवक हेमवती नंदन बहुगुणा ने [[इलाहाबाद विश्वविद्यालय]] से बी.ए. तक की शिक्षा प्राप्त की थी।&lt;br /&gt;
==राजनीतिक कॅरियर==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Hemwati Nandan Bahuguna 2018 stamp of India.jpg|thumb|250px|हेमवती नंदन बहुगुणा|left]]&lt;br /&gt;
*वर्ष [[1952]] में हेमवती नंदन बहुगुणा सर्वप्रथम [[विधान सभा]] सदस्य निर्वाचित हुए। पुनः वर्ष [[1957]] से लगातार [[1969]] तक और [[1974]] से [[1977 ]]तक उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य रहे।&lt;br /&gt;
*1952 में वे उत्तर प्रदेश कांग्रेस समिति तथा वर्ष [[1957]] से अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के सदस्य रहे।&lt;br /&gt;
*अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव रहे।&lt;br /&gt;
*वर्ष 1957 में हेमवती नंदन बहुगुणा डॉ. सम्पूर्णानन्द जी के मंत्रिमण्डल में सभासचिव रहे।&lt;br /&gt;
*सम्पूर्णानन्द मंत्रिमण्डल में श्रम तथा समाज कल्याण विभाग के पार्लियामेन्टरी सेक्रेटरी रहे।&lt;br /&gt;
*सन [[1958]] में उद्योग विभाग के उपमंत्री रहे।&lt;br /&gt;
*[[1962]] में श्रम विभाग के उपमंत्री बनाये गए।&lt;br /&gt;
*वर्ष [[1967]] में वित्त तथा परिवहन मंत्री रहे।&lt;br /&gt;
*वर्ष 1971, 1977 तथा 1980 में लोक सभा सदस्य निर्वाचित हुए।&lt;br /&gt;
*[[2 मई]], [[1971]] को केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में संचार राज्य मंत्री बने।&lt;br /&gt;
*पहली बार [[8 नवम्बर]], [[1973]] से [[4 मार्च]], [[1974]] तथा दूसरी बार [[5 मार्च]], [[1974]] से [[29 नवम्बर]], [[1975]] तक [[उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री]] रहे।&lt;br /&gt;
*सन [[1977]] में केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में पेट्रोलियम, रसायन तथा उर्वरक मंत्री रहे।&lt;br /&gt;
*वर्ष [[1979]] में केन्द्रीय वित्त मंत्री बने।&lt;br /&gt;
;विदेश यात्रा&lt;br /&gt;
हेमवती नंदन बहुगुणा ने [[इंग्लैण्ड]], [[जर्मनी]], [[इटली]], [[मिस्र]] आदि देशों की यात्राएं कीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मृत्यु==&lt;br /&gt;
[[17 मार्च]], [[1989]] को हेमवती नंदन बहुगुणा का निधन हो गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1|माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री}}{{पाँचवीं लोकसभा सांसद}}{{छठी लोकसभा सांसद}}{{सातवीं लोकसभा सांसद}}&lt;br /&gt;
[[Category:लोकसभा_सांसद]][[Category:राजनेता]][[Category:राजनीतिज्ञ]][[Category:लोकसभा]][[Category:मुख्यमंत्री]][[Category:उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री]][[Category:उत्तर प्रदेश_के_लोकसभा_सांसद]][[Category:राजनीति_कोश]][[Category:पाँचवीं लोकसभा सांसद]][[Category:छठी लोकसभा सांसद]][[Category:सातवीं लोकसभा सांसद]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
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		<title>हेमवती नंदन बहुगुणा</title>
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&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=Hemvati-Nandan-Bahuguna.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=हेमवती नंदन बहुगुणा&lt;br /&gt;
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|जन्म=[[25 अप्रैल]], [[1919]]&lt;br /&gt;
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|मृत्यु=[[17 मार्च]], [[1989]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|अभिभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]&lt;br /&gt;
|पद=दो बार [[मुख्यमंत्री]], [[उत्तर प्रदेश]]&lt;br /&gt;
|कार्य काल=[[8 नवम्बर]], [[1973]] से [[4 मार्च]], [[1974]] तक&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[5 मार्च]], [[1974]] से [[29 नवम्बर]], [[1975]] तक&lt;br /&gt;
|शिक्षा=बी.ए.&lt;br /&gt;
|भाषा=&lt;br /&gt;
|विद्यालय=[[इलाहाबाद विश्वविद्यालय]]&lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=वर्ष [[1952]] में हेमवती नंदन बहुगुणा सर्वप्रथम [[विधान सभा]] सदस्य निर्वाचित हुए। पुनः वर्ष [[1957]] से लगातार [[1969]] तक और [[1974]] से [[1977 ]]तक उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य रहे।&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
[[चित्र:Hemwati Nandan Bahuguna 1.jpg|thumb|250px|हेमवती नंदन बहुगुणा|left]]&lt;br /&gt;
'''हेमवती नंदन बहुगुणा''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Hemvati Nandan Bahuguna'', जन्म- [[25 अप्रैल]], [[1919]]; मृत्यु- [[17 मार्च]], [[1989]]) [[उत्तर प्रदेश]] के दो बार [[मुख्यमंत्री]] रहने वाले जानेमाने राजनीतिज्ञ और राजनेता थे। वेसन्[[1971]], [[1977]] तथा [[1980]] में [[लोक सभा]] के सदस्य निर्वाचित हुए थे।सन्1977 में वे केंद्रीय मंत्रिमण्डल में पेट्रोलियम, रसायन तथा उर्वरक मंत्री रहे थे। जानीमानी राजनीतिज्ञ रीता बहुगुणा हेमवती नंदन जी की पुत्री हैं।&lt;br /&gt;
==परिचय==&lt;br /&gt;
हेमवती नंदन बहुगुणा का जन्म [[उत्तराखंड]] के बुघाणी गांव में 25 अप्रैल, 1919 को हुआ था। वे अपने [[पिता]] रेवती नंदन बहुगुणा की दूसरी पत्नी की संतान थे। राजनीतिक तथा समाज सेवक हेमवती नंदन बहुगुणा ने [[इलाहाबाद विश्वविद्यालय]] से बी.ए. तक की शिक्षा प्राप्त की थी।&lt;br /&gt;
==राजनीतिक कॅरियर==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Hemwati Nandan Bahuguna 2018 stamp of India.jpg|thumb|250px|हेमवती नंदन बहुगुणा|left]]&lt;br /&gt;
*वर्ष [[1952]] में हेमवती नंदन बहुगुणा सर्वप्रथम [[विधान सभा]] सदस्य निर्वाचित हुए। पुनः वर्ष [[1957]] से लगातार [[1969]] तक और [[1974]] से [[1977 ]]तक उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य रहे।&lt;br /&gt;
*1952 में वे उत्तर प्रदेश कांग्रेस समिति तथा वर्ष [[1957]] से अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के सदस्य रहे।&lt;br /&gt;
*अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव रहे।&lt;br /&gt;
*वर्ष 1957 में हेमवती नंदन बहुगुणा डॉ. सम्पूर्णानन्द जी के मंत्रिमण्डल में सभासचिव रहे।&lt;br /&gt;
*सम्पूर्णानन्द मंत्रिमण्डल में श्रम तथा समाज कल्याण विभाग के पार्लियामेन्टरी सेक्रेटरी रहे।&lt;br /&gt;
*सन [[1958]] में उद्योग विभाग के उपमंत्री रहे।&lt;br /&gt;
*[[1962]] में श्रम विभाग के उपमंत्री बनाये गए।&lt;br /&gt;
*वर्ष [[1967]] में वित्त तथा परिवहन मंत्री रहे।&lt;br /&gt;
*वर्ष 1971, 1977 तथा 1980 में लोक सभा सदस्य निर्वाचित हुए।&lt;br /&gt;
*[[2 मई]], [[1971]] को केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में संचार राज्य मंत्री बने।&lt;br /&gt;
*पहली बार [[8 नवम्बर]], [[1973]] से [[4 मार्च]], [[1974]] तथा दूसरी बार [[5 मार्च]], [[1974]] से [[29 नवम्बर]], [[1975]] तक [[उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री]] रहे।&lt;br /&gt;
*सन [[1977]] में केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में पेट्रोलियम, रसायन तथा उर्वरक मंत्री रहे।&lt;br /&gt;
*वर्ष [[1979]] में केन्द्रीय वित्त मंत्री बने।&lt;br /&gt;
;विदेश यात्रा&lt;br /&gt;
हेमवती नंदन बहुगुणा ने [[इंग्लैण्ड]], [[जर्मनी]], [[इटली]], [[मिस्र]] आदि देशों की यात्राएं कीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मृत्यु==&lt;br /&gt;
[[17 मार्च]], [[1989]] को हेमवती नंदन बहुगुणा का निधन हो गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1|माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री}}{{पाँचवीं लोकसभा सांसद}}{{छठी लोकसभा सांसद}}{{सातवीं लोकसभा सांसद}}&lt;br /&gt;
[[Category:लोकसभा_सांसद]][[Category:राजनेता]][[Category:राजनीतिज्ञ]][[Category:लोकसभा]][[Category:मुख्यमंत्री]][[Category:उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री]][[Category:उत्तर प्रदेश_के_लोकसभा_सांसद]][[Category:राजनीति_कोश]][[Category:पाँचवीं लोकसभा सांसद]][[Category:छठी लोकसभा सांसद]][[Category:सातवीं लोकसभा सांसद]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
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		<title>हेमवती नंदन बहुगुणा</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;आशा चौधरी: /* राजनीतिक कॅरियर */&lt;/p&gt;
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&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=Hemvati-Nandan-Bahuguna.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=हेमवती नंदन बहुगुणा&lt;br /&gt;
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|कार्य काल=[[8 नवम्बर]], [[1973]] से [[4 मार्च]], [[1974]] तक&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[5 मार्च]], [[1974]] से [[29 नवम्बर]], [[1975]] तक&lt;br /&gt;
|शिक्षा=बी.ए.&lt;br /&gt;
|भाषा=&lt;br /&gt;
|विद्यालय=[[इलाहाबाद विश्वविद्यालय]]&lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=वर्ष [[1952]] में हेमवती नंदन बहुगुणा सर्वप्रथम [[विधान सभा]] सदस्य निर्वाचित हुए। पुनः वर्ष [[1957]] से लगातार [[1969]] तक और [[1974]] से [[1977 ]]तक उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य रहे।&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
'''हेमवती नंदन बहुगुणा''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Hemvati Nandan Bahuguna'', जन्म- [[25 अप्रैल]], [[1919]]; मृत्यु- [[17 मार्च]], [[1989]]) [[उत्तर प्रदेश]] के दो बार [[मुख्यमंत्री]] रहने वाले जानेमाने राजनीतिज्ञ और राजनेता थे। वेसन्[[1971]], [[1977]] तथा [[1980]] में [[लोक सभा]] के सदस्य निर्वाचित हुए थे।सन्1977 में वे केंद्रीय मंत्रिमण्डल में पेट्रोलियम, रसायन तथा उर्वरक मंत्री रहे थे। जानीमानी राजनीतिज्ञ रीता बहुगुणा हेमवती नंदन जी की पुत्री हैं।&lt;br /&gt;
==परिचय==&lt;br /&gt;
हेमवती नंदन बहुगुणा का जन्म [[उत्तराखंड]] के बुघाणी गांव में 25 अप्रैल, 1919 को हुआ था। वे अपने [[पिता]] रेवती नंदन बहुगुणा की दूसरी पत्नी की संतान थे। राजनीतिक तथा समाज सेवक हेमवती नंदन बहुगुणा ने [[इलाहाबाद विश्वविद्यालय]] से बी.ए. तक की शिक्षा प्राप्त की थी।&lt;br /&gt;
==राजनीतिक कॅरियर==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Hemwati Nandan Bahuguna 2018 stamp of India.jpg|thumb|250px|हेमवती नंदन बहुगुणा|left]]&lt;br /&gt;
*वर्ष [[1952]] में हेमवती नंदन बहुगुणा सर्वप्रथम [[विधान सभा]] सदस्य निर्वाचित हुए। पुनः वर्ष [[1957]] से लगातार [[1969]] तक और [[1974]] से [[1977 ]]तक उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य रहे।&lt;br /&gt;
*1952 में वे उत्तर प्रदेश कांग्रेस समिति तथा वर्ष [[1957]] से अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के सदस्य रहे।&lt;br /&gt;
*अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव रहे।&lt;br /&gt;
*वर्ष 1957 में हेमवती नंदन बहुगुणा डॉ. सम्पूर्णानन्द जी के मंत्रिमण्डल में सभासचिव रहे।&lt;br /&gt;
*सम्पूर्णानन्द मंत्रिमण्डल में श्रम तथा समाज कल्याण विभाग के पार्लियामेन्टरी सेक्रेटरी रहे।&lt;br /&gt;
*सन [[1958]] में उद्योग विभाग के उपमंत्री रहे।&lt;br /&gt;
*[[1962]] में श्रम विभाग के उपमंत्री बनाये गए।&lt;br /&gt;
*वर्ष [[1967]] में वित्त तथा परिवहन मंत्री रहे।&lt;br /&gt;
*वर्ष 1971, 1977 तथा 1980 में लोक सभा सदस्य निर्वाचित हुए।&lt;br /&gt;
*[[2 मई]], [[1971]] को केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में संचार राज्य मंत्री बने।&lt;br /&gt;
*पहली बार [[8 नवम्बर]], [[1973]] से [[4 मार्च]], [[1974]] तथा दूसरी बार [[5 मार्च]], [[1974]] से [[29 नवम्बर]], [[1975]] तक [[उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री]] रहे।&lt;br /&gt;
*सन [[1977]] में केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में पेट्रोलियम, रसायन तथा उर्वरक मंत्री रहे।&lt;br /&gt;
*वर्ष [[1979]] में केन्द्रीय वित्त मंत्री बने।&lt;br /&gt;
;विदेश यात्रा&lt;br /&gt;
हेमवती नंदन बहुगुणा ने [[इंग्लैण्ड]], [[जर्मनी]], [[इटली]], [[मिस्र]] आदि देशों की यात्राएं कीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मृत्यु==&lt;br /&gt;
[[17 मार्च]], [[1989]] को हेमवती नंदन बहुगुणा का निधन हो गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1|माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री}}{{पाँचवीं लोकसभा सांसद}}{{छठी लोकसभा सांसद}}{{सातवीं लोकसभा सांसद}}&lt;br /&gt;
[[Category:लोकसभा_सांसद]][[Category:राजनेता]][[Category:राजनीतिज्ञ]][[Category:लोकसभा]][[Category:मुख्यमंत्री]][[Category:उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री]][[Category:उत्तर प्रदेश_के_लोकसभा_सांसद]][[Category:राजनीति_कोश]][[Category:पाँचवीं लोकसभा सांसद]][[Category:छठी लोकसभा सांसद]][[Category:सातवीं लोकसभा सांसद]]&lt;br /&gt;
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		<title>वर्गीज़ कुरियन</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;आशा चौधरी: /* श्वेत क्रांति के जनक */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा प्रसिद्ध व्यक्तित्व&lt;br /&gt;
|चित्र=Verghese-Kurien.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=डॉ. वर्गीज़ कुरियन&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=डॉ. वर्गीज़ कुरियन&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=अमूल मैन, मिल्क मैन ऑफ़ इंडिया &lt;br /&gt;
|जन्म=[[26 नवंबर]], [[1921]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[मद्रास]] (अब [[चेन्नई]]) &lt;br /&gt;
|मृत्यु=[[9 सितम्बर]], [[2012]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[नाडियाड]], [[गुजरात]]&lt;br /&gt;
|अभिभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=मॉली कुरियन&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|गुरु=&lt;br /&gt;
|कर्म भूमि=[[भारत]]&lt;br /&gt;
|कर्म-क्षेत्र=&lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ=&lt;br /&gt;
|विषय=&lt;br /&gt;
|खोज=&lt;br /&gt;
|भाषा=&lt;br /&gt;
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|पुरस्कार-उपाधि='[[पद्म श्री]]', '[[पद्म भूषण]]', '[[पद्म विभूषण]]', '[[रेमन मैग्सेसे पुरस्कार]]'।&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=[[भारत]] में दुग्ध क्रान्ति, जिसे 'श्वेत क्रान्ति' भी कहा जाता है, के जनक माने जाते हैं।&lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय &lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
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|पाठ 4=&lt;br /&gt;
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|पाठ 5=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=वर्गीज़ कुरियन और [[श्याम बेनेगल]] ने मिलकर राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फ़िल्म 'मंथन' की [[कहानी]] भी लिखी, जिसे क़रीब 5 लाख किसानों ने वित्तीय सहायता दी। विश्व बैंक ने ग़रीबी उन्मूलन के लिए अमूल मॉडल को चिन्हित किया है। अमूल मॉडल को व्यापक और लोकप्रिय बनाने में वर्गीज़ की बड़ी भूमिका रही है।&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन= &lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
'''वर्गीज़ कुरियन''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Verghese Kurien'', जन्म: [[26 नवंबर]], [[1921]]; मृत्यु: [[9 सितम्बर]], [[2012]]) [[भारत]] में दुग्ध क्रान्ति, जिसे 'श्वेत क्रान्ति' भी कहा जाता है, के जनक माने जाते हैं। भारत को दुनिया का सर्वाधिक दुग्ध उत्पादक देश बनाने के लिए श्वेत क्रांति लाने वाले वर्गीज़ कुरियन को देश में सहकारी दुग्ध उद्योग के मॉडल की आधारशिला रखने का श्रेय जाता है।&lt;br /&gt;
==जीवन परिचय==&lt;br /&gt;
देश में 'श्वेत क्रांति के जनक' और 'मिल्कमैन' के नाम से मशहूर वर्गीज़ कुरियन की अथक मेहनत का ही नतीजा था कि [[दूध]] की कमी वाला यह देश दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक देशों में शुमार हुआ। 'श्वेत क्रांति' और दूध के क्षेत्र में सहकारी मॉडल के ज़रिये लाखों ग़रीब किसानों की ज़िंदगी संवारने वाली शख्सियत डॉ. वर्गीज़ कुरियन का जन्म 26 नवंबर, 1921 को [[मद्रास]] (अब [[चेन्नई]]) में हुआ। उनके [[परिवार]] में पत्नी मॉली कुरियन और एक बेटी है।&lt;br /&gt;
====शिक्षा====&lt;br /&gt;
[[जमशेदपुर]] स्थित 'टिस्को' में कुछ समय काम करने के बाद कुरियन को डेयरी इंजीनियरिंग में अध्ययन करने के लिए [[भारत सरकार]] की ओर से छात्रवृत्ति दी गई। [[बेंगलुरु]] के 'इंपीरियल इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हजबेंड्री एंड डेयरिंग' में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद कुरियन [[अमेरिका]] गए, जहां उन्होंने 'मिशीगन स्टेट यूनिवर्सिटी' से [[1948]] में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में अपनी मास्टर डिग्री हासिल की, जिसमें डेयरी इंजीनियरिंग भी एक विषय था। [[भारत]] लौटने पर कुरियन को अपने बांड की अवधि की सेवा पूरी करने के लिए [[गुजरात]] के आणंद स्थित सरकारी क्रीमरी में काम करने का मौका मिला। [[1949]] के अंत तक कुरियन को क्रीमरी से कार्यमुक्त करने का आदेश दे दिया गया।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://www.livehindustan.com/news/desh/national/article1-india-world-milk-39-39-260718.html |title=भारत में सहकारी दुग्ध उद्योग के जनक रहे कुरियन |accessmonthday=10 सितम्बर |accessyear=2012 |last= |first= |authorlink= |format=एच.टी.एम.एल |publisher=लाइव हिन्दुस्तान |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
====श्वेत क्रांति के जनक====&lt;br /&gt;
[[चित्र:श्वेत क्रांति .jpg|thumb|250px|श्वेत क्रांति|right]]&lt;br /&gt;
वर्गीज़ कुरियन ने [[1949]] में 'कैरा ज़िला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड' के अध्यक्ष [[त्रिभुवनदास कृषिभाई पटेल|त्रिभुवन दास पटेल]] के अनुरोध पर डेयरी का काम संभाला। [[सरदार वल्लभभाई पटेल]] की पहल पर इस डेयरी की स्थापना की गयी थी। वर्गीज़ कुरियन ने [[महाराष्ट्र]] के 60 लाख किसानों की 60 हज़ार कोऑपरेटिव सोसायटियाँ बनाईं, जो प्रतिदिन तीन लाख टन दूध सप्लाई करती हैं। इसी को श्वेत क्रान्ति और ‘ओपरेशन फ़्लड’ के नाम से भी पुकारा जाता है। इस महान् कार्य से जहाँ किसानों का भला हुआ, वहीं पर आम लोगों को [[दूध]] की उपलब्धि में भी सुविधा हुई। इन कार्यों के कारण इन्हें अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। डॉ. कुरियन ने [[साल]] [[1973]] में 'गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन' की स्थापना की और 34 साल तक इसके अध्यक्ष रहे। इसी कारण इन्हें''' श्वेत क्रांति का जनक''' कहा जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====अमूल मैन====&lt;br /&gt;
उन्होंने अपनी प्रतिभा के बल पर सरकारी छात्रवृति अर्जित करने के साथ-साथ [[अमेरिका]] के 'मिचिगन स्टेट विश्वविद्यालय' से [[1948]] में [[विज्ञान]] में स्नातकोत्तर की उपाद्यि ग्रहण की। इसके बाद [[अमेरिका]] से [[भारत]] वापस आने के बाद उन्होंने [[भारत सरकार]] के डेयरी विभाग में डेयरी इंजीनियर के पद पर [[गुजरात]] के आनन्द में [[1949]] आसीन हुए। 7 माह के सरकारी सेवा के बाद उनका मन वहां नहीं रमा। उनके दिलो-दिमाग में कुछ विशेष करने की लहरें रह रह कर उनको सरकारी बंधन से मुक्त होने के लिए उद्देल्लित कर रही थी। इसके बाद वे 'केडीसीएमपीयूल' के मैनेजर बन गये जो आज '''अमूल''' के नाम से विश्वविख्यात है।&lt;br /&gt;
====अमूल की सफलता====&lt;br /&gt;
[[भारत]] में कुरियन और उनकी टीम ने [[भैंस]] के दूध से मिल्क पाउडर और कंडेस्ड मिल्क बनाने की तकनीक विकसित की। इस तकनीक को अमूल की कामयाबी की प्रमुख वजहों में शुमार किया जाता है। कंपनी ने इसके बलबूते 'नेस्ले' जैसी शीर्ष कंपनी को कड़ी टक्कर दी, जो मिल्क पाउडर और कंडेस्ड मिल्क बनाने के लिए सिर्फ [[गाय]] के दूध का प्रयोग करती थी। [[यूरोप]] में गाय के दूध के विपरीत भारत में भैंस का दूध अधिक उपयोग होता है। अमूल ने [[वर्ष]] [[2011]] में दो अरब डॉलर का कुल कारोबार किया। जबकि उसने अपने 50 साल के [[इतिहास]] में कभी किसी सेलेब्रिटी को प्रचार में इस्तेमाल नहीं किया।&amp;lt;ref&amp;gt;आभार- हिन्दुस्तान (दैनिक समाचार पत्र), दिनांक- 10 सितम्बर 2012, पृ. 13 &amp;lt;/ref&amp;gt;  &lt;br /&gt;
====राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड====&lt;br /&gt;
अमूल की सफलता से अभिभूत होकर तत्कालीन [[प्रधानमंत्री]] [[लाल बहादुर शास्त्री]] ने 'राष्ट्रीय दुग्ध विकास बोर्ड' (एनडीडीबी) का गठन किया। जिससे पूरे देश में अमूल मॉडल को समझा और अपनाया गया। कुरियन को बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया। एनडीडीबी ने [[1970]] में ‘ऑपरेशन फ्लड’ की शुरूआत की जिससे भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बन गया। कुरियन ने [[1965]] से [[1998]] तक 33 साल एनडीडीबी के अध्यक्ष के तौर पर सेवाएं दीं। वे 'विकसित भारत फाउंडेशन' के प्रमुख रहे। उन्होंने असंगठित ग्रामीण भारत के दुग्ध उत्पादकों को जहां आर्थिक मजबूती दिला कर सम्मान दिलाया वहीं पूरे विश्व को एक दिशा दिखाई। &lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;60 के दशक में भारत में [[दूध]] की खपत जहाँ दो करोड़ टन थी वहीं [[2011]] में यह 12.2 करोड़ टन पहुंच गयी। कुरियन के निजी जीवन से जुड़ी एक रोचक और दिलचस्प बात यह है कि देश में ‘श्वेत क्रांति’ लाने वाला और ‘मिल्कमैन ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर यह शख़्स खुद [[दूध]] नहीं पीता था।&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
==सम्मान और पुरस्कार==&lt;br /&gt;
[[भारत सरकार]] ने वर्गीज़ कुरियन को [[पद्म श्री]] ([[1965]]), [[पद्म भूषण]] ([[1966]]), [[पद्म विभूषण]] ([[1999]]) से सम्मानित किया था। उन्हें सामुदायिक नेतृत्व के लिए [[रेमन मैग्सेसे पुरस्कार]] ([[1963]]), 'कार्नेगी वाटलर विश्व शांति पुरस्कार', 'वर्ल्ड फ़ूड प्राइज़' ([[1989]]),'विश्व खाद्य पुरस्कार' ([[1989]]), 'कृषि रत्न' ([[1986]]), और [[अमेरिका]] के 'इंटरनेशनल परसन ऑफ द ईयर सम्मान' से भी नवाजा गया। इसके अतिरिक्त 'मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी' और 'तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय' समेत कई संस्थानों ने डॉक्टरेट की उपाधि दी। &amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
वर्गीज़ कुरियन और [[श्याम बेनेगल]] ने मिलकर राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फ़िल्म 'मंथन' की [[कहानी]] भी लिखी, जिसे क़रीब 5 लाख किसानों ने वित्तीय सहायता दी। विश्व बैंक ने ग़रीबी उन्मूलन के लिए अमूल मॉडल को चिन्हित किया है। अमूल मॉडल को व्यापक और लोकप्रिय बनाने में वर्गीज़ की बड़ी भूमिका रही है। ‘अमूल’ के महत्त्व का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि स्वयं [[जवाहरलाल नेहरू]] इसके उद्घाटन के अवसर पर आए थे।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://days.jagranjunction.com/2014/11/26/indias-milkman-who-made-india-largest-producer-of-milk-in-the-world/ |title=सरकारी नौकरी छोड़ इसने भारत के हर घर में दूध पहुँचाया और बन गया दुग्ध-क्रांति का जनक |accessmonthday=1 फ़रवरी |accessyear=2015 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=जागरण जंक्शन |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
==निधन==&lt;br /&gt;
अरबों [[रुपए]] वाले ब्रांड ‘अमूल’ को जन्म देने वाले कुरियन का [[9 सितम्बर]] [[2012]] को सुबह 90 वर्ष की आयु में [[नाडियाड]], [[गुजरात]] में निधन हो गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक3|माध्यमिक=|पूर्णता=|शोध=}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://rmaward.asia/awardees/kurien-verghese/ Kurien, Verghese]&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{रेमन मैग्सेसे पुरस्कार}}{{पद्म विभूषण}}&lt;br /&gt;
[[Category:चरित कोश]][[Category:पद्म श्री]] [[Category:पद्म भूषण]]  [[Category:पद्म विभूषण]][[Category:रेमन मैग्सेसे पुरस्कार]][[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व]][[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
	</entry>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0:%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A4_%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%BF_.jpg&amp;diff=694771</id>
		<title>चित्र:श्वेत क्रांति .jpg</title>
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		<title>समर्थ रामदास</title>
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		<updated>2026-05-09T06:56:20Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;आशा चौधरी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा ऐतिहासिक पात्र&lt;br /&gt;
|चित्र=Samarth-Guru-Ramdas.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=समर्थ गुरु रामदास&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=नारायण सूर्याजीपंत कुलकर्णी&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=&lt;br /&gt;
|जन्म=[[शक संवत|शके]] 1530 (सन 1608)&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[औरंगाबाद ज़िला, महाराष्ट्र|औरंगाबाद ज़िला]], [[महाराष्ट्र]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु तिथि=शालिवाहन शक 1603 (सन 1682)&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[सज्जनगढ़ क़िला|सज्जनगढ़]], [[महाराष्ट्र]]&lt;br /&gt;
|पिता/माता=राणुबाई ([[माता]])&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|उपाधि=समर्थ&lt;br /&gt;
|शासन=&lt;br /&gt;
|धार्मिक मान्यता=&lt;br /&gt;
|राज्याभिषेक=&lt;br /&gt;
|युद्ध=&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=[[संत]]&lt;br /&gt;
|निर्माण=&lt;br /&gt;
|सुधार-परिवर्तन=&lt;br /&gt;
|राजधानी=&lt;br /&gt;
|पूर्वाधिकारी=&lt;br /&gt;
|राजघराना=&lt;br /&gt;
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|शासन काल=&lt;br /&gt;
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|संबंधित लेख=[[महाराष्ट्र]], [[शिवाजी]], [[मराठा]], [[मराठा साम्राज्य]]&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
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|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''समर्थ रामदास''' [[महाराष्ट्र]] के प्रसिद्ध [[सन्त]] थे। वे [[शिवाजी|छत्रपति शिवाजी]] के गुरु थे। उन्होंने 'दासबोध' नामक एक [[ग्रन्थ]] की रचना भी की थी, जो [[मराठी भाषा]] में है। '[[हिन्दू पद पादशाही]]' के संस्थापक शिवाजी के गुरु रामदासजी का नाम [[भारत]] के साधु-संतों व विद्वत समाज में सुविख्यात है। महाराष्ट्र तथा सम्पूर्ण [[दक्षिण भारत]] में तो प्रत्यक्ष [[हनुमान|भगवान हनुमान]] के [[अवतार]] के रूप में उनकी [[पूजा]] की जाती है।&lt;br /&gt;
==जन्म==&lt;br /&gt;
समर्थ रामदास का जन्म [[महाराष्ट्र]] के [[औरंगाबाद ज़िला, महाराष्ट्र|औरंगाबाद ज़िले]] के जांब नामक स्थान पर [[शक संवत|शके]] 1530 (सन 1608) में हुआ था। इनका मूल नाम 'नारायण सूर्याजीपंत कुलकर्णी' था।&lt;br /&gt;
====बाल्यकाल====&lt;br /&gt;
अपने बाल्यकाल में समर्थ रामदास बहुत शरारती हुआ करते थे। गाँव के लोग रोज़ उनकी शिकायत उनकी [[माता]] से आकर किया करते थे। एक दिन माता राणुबाई ने नारायण से कहा- &amp;quot;कुछ काम किया करो, तुम दिनभर शरारत करते हो। तुम्हारे बड़े भाई गंगाधर अपने [[परिवार]] की कितनी चिंता करते हैं।&amp;quot; यह बात नारायण के मन में लग गई। दो-तीन दिन बाद इन्होंने अपनी शरारत छोड़कर एक कमरे में [[ध्यान]] लगा लिया। दिनभर में नारायण नहीं दिखे तो माता ने बड़े बेटे से नारायण के बारे में पूछा। दोनों उन्हें खोजने निकल पड़े, किंतु उनका कोई पता नहीं चला। शाम के वक़्त माता ने कमरे में उन्हें ध्यान अवस्था में देखा तो उनसे पूछा- &amp;quot;नारायण, तुम यहाँ क्या कर रहे हो?&amp;quot; तब नारायण ने जवाब दिया- &amp;quot;मैं पूरे विश्व की चिंता कर रहा हूँ।&amp;quot;&lt;br /&gt;
==युवा वर्ग को प्रेरणा==&lt;br /&gt;
इस घटना के बाद नारायण की दिनचर्या बदल गई। उन्होंने समाज के युवा वर्ग को यह समझाया कि स्वस्थ एवं सुगठित शरीर के द्वारा ही राष्ट्र की उन्नति संभव है। इसलिए उन्होंने व्यायाम एवं कसरत करने की सलाह दी एवं शक्ति के उपासक [[राम|भगवान श्रीराम]] के [[भक्त]] [[हनुमान]] की मूर्ति की स्थापना की। समस्त [[भारत]] का उन्होंने पद-भ्रमण किया। जगह-जगह पर हनुमान जी की मूर्ति स्थापित की, जगह-जगह मठ एवं मठाधीश बनाए, ताकि पूरे राष्ट्र में नव-चेतना का निर्माण हो सके।&lt;br /&gt;
==जीवन का लक्ष्य==&lt;br /&gt;
[[चित्र:समर्थ रामदास .jpeg|thumb|250px|समर्थ गुरु रामदास|left]]&lt;br /&gt;
आख्यायिका है कि 12 [[वर्ष]] की अवस्था में अपने [[विवाह]] के समय &amp;quot;शुभमंगल सावधान&amp;quot; में &amp;quot;सावधान&amp;quot; शब्द सुनकर नारायण [[विवाह]] के मंडप से निकल गए और टाकली नामक स्थान पर [[रामचंद्र|श्री रामचंद्र]] की उपासना में संलग्न हो गए। उपासना में 12 वर्ष तक वे लीन रहे। यहीं उनका नाम रामदास पड़ा। इसके बाद 12 वर्ष तक वे [[भारतवर्ष]] का भ्रमण करते रहे। इस प्रवास में उन्होंने जनता की जो दुर्दशा देखी, उससे उनका [[हृदय]] संतप्त हो उठा। उन्होंने मोक्ष साधना के स्थान पर अपने जीवन का लक्ष्य स्वराज्य की स्थापना द्वारा आततायी शासकों के अत्याचारों से जनता को मुक्ति दिलाना बनाया। शासन के विरुद्ध जनता को संघटित होने का उपदेश देते हुए वे घूमने लगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[कश्मीर]] से [[कन्याकुमारी]] तक उन्होंने 1100 मठ तथा अखाड़े स्थापित कर स्वराज्य स्थापना के लिए जनता को तैयार करने का प्रयत्न किया। इसी प्रयत्न में उन्हें [[शिवाजी महाराज छत्रपति|छत्रपति श्री शिवाजी महाराज]] जैसे योग्य शिष्य का लाभ हुआ और स्वराज्य स्थापना के स्वप्न को साकार होते हुए देखने का सौभाग्य उन्हें अपने जीवनकाल में ही प्राप्त हो सका। उस समय [[महाराष्ट्र]] में [[मराठा साम्राज्य|मराठों]] का शासन था। शिवाजी महाराज रामदासजी के कार्य से बहुत प्रभावित हुए तथा जब इनका मिलन हुआ, तब शिवाजी महाराज ने अपना राज्य रामदासजी की झोली में डाल दिया। रामदास ने महाराज से कहा- &amp;quot;'यह राज्य न तुम्हारा है न मेरा। यह राज्य भगवान का है, हम सिर्फ़ न्यासी हैं।&amp;quot; शिवाजी समय-समय पर उनसे सलाह-मशविरा किया करते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रामदास स्वामी ने बहुत से [[ग्रंथ]] लिखे। इसमें 'दासबोध' प्रमुख है। इसी प्रकार उन्होंने हमारे मन को भी संस्कारित किया 'मनाचे श्लोक' द्वारा।&lt;br /&gt;
==व्यक्तित्व==&lt;br /&gt;
[[चित्र:समर्थ रामदास 1.jpeg|thumb|250px|समर्थ गुरु रामदास|right]]&lt;br /&gt;
समर्थ गुरु रामदास का व्यक्तित्व भक्ति ज्ञान वैराग्य से ओतप्रोत था। मुख मण्डल पर दाढ़ी तथा मस्तक पर जटाएं, भाल प्रदेश पर चन्दन का टीका लगा रहता था। उनके कंधे पर भिक्षा के लिए झोली रहती थी। एक हाथ में जपमाला और कमण्डलु तथा दूसरे हाथ में योगदण्ड रहती थी। पैरों में लकड़ी की पादुकाएँ धारण करते थे। योगशास्त्र के अनुसार उनकी भूचरी मुद्रा थी। मुख में सदैव रामनाम का जाप चलता था और बहुत कम बोलते थे। वे [[संगीत]] के उत्तम जानकार थे। उन्होनें अनेकों रागों में गायी जाने वाली रचनाएं की हैं। वे प्रतिदिन 1200 सूर्य नमस्कार लगाते थे। इस कारण शरीर अत्यंत बलवान था। जीवन के अंतिम कुछ वर्ष छोड़कर पूरे जीवम में वे कभी एक जगह पर नहीं रुके। उनका वास्तव्य दुर्गम गुफ़ारँ, पर्वत शिखर, नदी के किनारें तथा घने अरण्य में रहता था। ऐसा समकालीन ग्रंथ में उल्लेख है।&lt;br /&gt;
==अंतिम समय==&lt;br /&gt;
अपने जीवन का अंतिम समय समर्थ रामदास ने [[सतारा]] के पास परली के क़िले पर व्यतीत किया। बाद में इस क़िले का नाम [[सज्जनगढ़ क़िला|सज्जनगढ़]] पड़ा। [[तमिलनाडु]] के तंजावुर ग्राम में रहने वाले अरणिकर नाम के अंध कारीगर ने प्रभु रामचंद्र, माता सीता और लक्ष्मण की मूर्ति बनाकर सज्जनगढ़ को भेज दी। इसी मूर्ति के सामने समर्थ रामदान ने अंतिम पांच दिन निर्जल उपवास किया और पूर्वसूचना देकर माघ वद्य नवमी शालिवाहन शक 1603 (सन 1682) को 73 [[वर्ष]] की अवस्था में रामनाम का जाप करते हुए पद्मासन में बैठकर ब्रह्मलीन हो गए। [[महाराष्ट्र]] सज्जनगढ़ में उनकी समाधि स्थित है। यह समाधी दिवस 'दासनवमी' के नाम से जाना जाता हैं। प्रतिवर्ष समर्थ रामदास के भक्त [[भारत]] के विभिन्न प्रांतों में दो माह का दौरा निकालते हैं और दौरे में मिली भिक्षा से सज्जनगढ़ की व्यवस्था चलती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{भारत के संत}}&lt;br /&gt;
[[Category:हिन्दू धर्म प्रवर्तक और संत]][[Category:मराठा साम्राज्य]][[Category:शिवाजी]][[Category:हिन्दू धर्म कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
	</entry>
	<entry>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;आशा चौधरी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;आशा चौधरी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
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		<title>सर गंगा राम</title>
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		<updated>2026-05-09T06:50:19Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;आशा चौधरी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा प्रसिद्ध व्यक्तित्व&lt;br /&gt;
|चित्र=सर गंगा राम.jpeg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=सर गंगा राम&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=सर गंगा राम&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=आधुनिक लाहौर के पिता&lt;br /&gt;
|जन्म=[[22 अप्रैल]], 1851&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=शेखपुरा ज़िला, पश्चिमी पंजाब (अविभाजित भारत)&lt;br /&gt;
|मृत्यु=[[10 जुलाई]], [[1927]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[लंदन]]&lt;br /&gt;
|अभिभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|गुरु=&lt;br /&gt;
|कर्म भूमि=[[भारत]]&lt;br /&gt;
|कर्म-क्षेत्र=सिविल अभियंता&lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ=&lt;br /&gt;
|विषय=&lt;br /&gt;
|खोज=&lt;br /&gt;
|भाषा=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=इंजीनियरिंग &lt;br /&gt;
|विद्यालय=रुड़की कॉलेज&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 3=&lt;br /&gt;
|पाठ 3=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 4=&lt;br /&gt;
|पाठ 4=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 5=&lt;br /&gt;
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|अन्य जानकारी=सर गंगा राम ने 50 लाख रुपए से 'सर गंगा राम ट्रस्ट सोसाइटी' बनाई थी, जिसके अंतर्गत विधवा आश्रम, अपाहिज आश्रम, चिकित्सालय आदि संस्थाएं स्थापित की गईं। &lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
'''सर गंगा राम''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Sir Ganga Ram'', जन्म- [[22 अप्रैल]], 1851, [[पाकिस्तान]]; मृत्यु- [[10 जुलाई]], [[1927]], [[लंदन]]) प्रसिद्ध इंजीनियर, समाजसेवी और [[भारत]] में [[हरित क्रांति]] के नायक थे। उन्होंने 'सर गंगा राम ट्रस्ट सोसाइटी' बनाई, जिसके अंतर्गत विधवा आश्रम, अपाहिज आश्रम, चिकित्सालय आदि संस्थाओं की स्थापना की गई। &lt;br /&gt;
==परिचय==&lt;br /&gt;
प्रसिद्ध इंजीनियर और [[भारत]] में हरित क्रांति के प्रणेता सर गंगा राम का जन्म [[22 अप्रैल]], 1851 ई. को [[पश्चिमी पंजाब]] ([[पाकिस्तान]]) के शेखपुरा जिले के एक [[गांव]] में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा [[अमृतसर]] और [[लाहौर]] में हुई और इंजीनियरिंग की शिक्षा उन्होंने रुड़की कॉलेज से प्राप्त की। कुछ समय तक लाहौर, [[दिल्ली]] और नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे में नौकरी करने के बाद गंगा राम वाटर वर्क्स निर्माण का प्रशिक्षण लेने के लिए [[इंग्लैंड]] गए। भारत लौटने पर गंगा राम ने 12 वर्ष तक लाहौर में काम किया। वहां के प्रसिद्ध भवन, जलाशय आदि उन्हीं के नेतृत्व में बने। [[1930]] में सरकारी नौकरी से अवकाश ग्रहण करते ही उन्हें पटियाला रियासत ने बुला लिया।&amp;lt;ref&amp;gt;{{पुस्तक संदर्भ |पुस्तक का नाम=भारतीय चरित कोश|लेखक=लीलाधर शर्मा 'पर्वतीय'|अनुवादक=|आलोचक=|प्रकाशक=शिक्षा भारती, मदरसा रोड, कश्मीरी गेट, दिल्ली|संकलन= |संपादन=|पृष्ठ संख्या=899|url=}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
==योगदान==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Sir Gaga Ram.jpeg|thumb|250px|सर गंगा राम|left]]&lt;br /&gt;
सर गंगा राम ने प्रसिद्ध भवन, जलाशय, इंजीनियरिंग के अनेक नए उपकरणों के निर्माण आदि में बहुत ही योगदान दिया है। उनकी सेवाओं के उपलक्ष में ब्रिटिश सरकार ने उन्हें 'सर' की उपाधि से सम्मानित किया था। [[1930]] में सरकारी नौकरी से अवकाश ग्रहण करते ही पटियाला रियासत ने उन्हें बुला लिया। उनके प्रयासों से कुछ ही दिनों में पटियाला नगर की तस्वीर ही बदल गई थी। &lt;br /&gt;
==हरित क्रांति==&lt;br /&gt;
परंतु सर गंगा राम को इतने से संतोष नहीं हुआ। 60 वर्ष की उम्र में वे कृषि केंद्रों को देखने के लिए पुन: [[इंग्लैंड]] गये। लौटने पर उन्होंने [[1911]] के [[दिल्ली दरबार]] के समय भारतीय नरेशों को शिविर निर्माण में परामर्श दिया। [[काशी हिंदू विश्वविद्यालय]] के वे अवैतनिक मुख्य इंजीनियर थे। अब उन्होंने अपने कृषि संबंधी ज्ञान का प्रयोग करने का निश्चय किया। [[पंजाब]] की बहुत सी भूमि नदियों से ऊंची होने के कारण सिचाई से वंचित और बंजर पड़ी थी। सर गंगा राम ने सबसे पहले पानी को ऊपर उठाकर सिंचाई का प्रबंध किया। इस तकनीक से खेत लहलहा उठे। नहर का पानी ऊपर से गिरा कर जल विद्युत उत्पन्न करने का शुभारंभ करने का श्रेय गंगा राम को ही जाता है।&lt;br /&gt;
==समाज सेवा==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Sir Ganga Ram 1.jpeg|250px|सर गंगा राम|right]]&lt;br /&gt;
सर गंगा राम के अंदर जन सेवा की भावना बहुत थी। उन्होंने परिश्रम और योग्यता से बहुत धन अर्जित किया था। वे स्वयं गरीब घर में पैदा हुए थे और गरीबी के कष्ट को समझते थे। उस समय समाज में अनेक कुरीतियां प्रचलित थीं। छोटी उम्र में बच्चों का [[विवाह]] हो जाता था और विधवाओं की बड़ी दुर्दशा थी। एक सर्वेक्षण के अनुसार देश में [[1921]] ई. में 1 वर्ष से कम उम्र की लगभग 7500 विधवाएं थीं। इस स्थिति से दु:खी होकर उन्होंने 50 लाख रुपए से 'सर गंगा राम ट्रस्ट सोसाइटी' बनाई जिसके अंतर्गत विधवा आश्रम, अपाहिज आश्रम, चिकित्सालय आदि संस्थाएं स्थापित की गईं। उन्होंने लड़कियों के लिये हाईस्कूल और ट्रेनिंग कॉलेज खुलवाये और [[लाहौर]] में मेडिकल कॉलेज स्थापित कराया। उन्होंने बहुत से गुरुद्वारों के निर्माण में भी धन दिया। &lt;br /&gt;
==स्मरण==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Sir Gaga Ram 2.jpeg|thumb|250px|सर गंगा राम|left]]&lt;br /&gt;
सर गंगा राम की स्मृति में 'सर गंगा राम ट्रस्ट' ने [[दिल्ली]] में 'सर गंगा राम अस्पताल' की स्थापना की है जो इस प्रतिभाशाली और समाजसेवी व्यक्ति का स्मरण कराता है। उनके निधन पर [[गांधी जी]] ने गंगा राम को ठीक ही [[भारत]] का प्रतिष्ठित सपूत बताया था। देश के विभाजन के बाद सर गंगा राम की सब संपत्ति [[पाकिस्तान]] में ही रह गई थी। &lt;br /&gt;
==मृत्यु==&lt;br /&gt;
प्रसिद्ध इंजीनियर, समाज सेवी और भारत में हरित क्रांति के प्रणेता सर गंगा राम का [[10 जुलाई]], [[1927]] ई. को [[लंदन]] में निधन हो गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक= प्रारम्भिक1|माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:अभियन्ता]][[Category:समाज सेवक]][[Category:जीवनी साहित्य]][[Category:चरित कोश]][[Category:भारतीय चरित कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
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&lt;div&gt;[[चित्र:सी. के. नागराज राव.jpeg|thumb|250px|सी. के. नागराज राव|right]]&lt;br /&gt;
'''सी. के. नागराज राव''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''C K Nagraj Rao'', जन्म- [[12 जून]], [[1915]]; मृत्यु- [[10 अप्रॅल]], [[1998]]) [[कन्नड़ भाषा|कन्नड़]] लेखक, नाटककार, मंच कलाकार, निर्देशक, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता थे।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
*सन [[1983]] में सी. के. नागराज राव को '[[भारतीय ज्ञानपीठ]]' द्वारा उनकी प्रसिद्ध रचना 'पट्टमहादेवी शांतालदेवी' के लिए '[[मूर्ति देवी पुरस्कार]]' दिया गया था। वे इस पुरस्कार के पहले प्राप्तकर्ता थे।&lt;br /&gt;
*वर्ष [[1978]] में 'कर्नाटक साहित्य अकादमी' द्वारा उनकी उसी रचना को 'सर्वश्रेष्ठ रचनात्मक साहित्यिक कार्य' पुरस्कार मिला था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक= |माध्यमिक=माध्यमिक1 |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{मूर्ति देवी पुरस्कार}}{{साहित्यकार}}&lt;br /&gt;
[[Category:साहित्यकार]][[Category:लेखक]][[Category:आधुनिक लेखक]][[Category:मूर्ति देवी पुरस्कार]][[Category:चरित कोश]][[Category:साहित्य कोश]][[Category:आधुनिक साहित्यकार]][[Category:जीवनी साहित्य]][[Category:कन्नड़ साहित्यकार]]&lt;br /&gt;
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|चित्र=मोटूरि सत्यनारायण-2.webp&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=मोटूरि सत्यनारायण&lt;br /&gt;
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|कर्म-क्षेत्र=[[हिन्दी]] के प्रचार-प्रसार-विकास के युग-पुरुष&lt;br /&gt;
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|विषय=&lt;br /&gt;
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|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
'''मोटूरि सत्‍यनारायण''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Moturi Satyanarayana'', जन्म: [[2 फ़रवरी]], [[1902]]; मृत्यु:[[6 मार्च]], [[1995]]) [[दक्षिण भारत]] में [[हिन्दी]] प्रचार आन्दोलन के संगठक, हिन्दी के प्रचार-प्रसार-विकास के युग-पुरुष, गाँधी-दर्शन एवं जीवन मूल्यों के प्रतीक, हिन्दी को [[राजभाषा]] घोषित कराने और उसके स्वरूप का निर्धारण कराने वाले महत्त्वपूर्ण सदस्यों में से एक थे। मोटूरि सत्यनारायण [[केंद्रीय हिंदी संस्थान]], [[आगरा]] के संस्थापक थे।   &lt;br /&gt;
==जीवन परिचय==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Moturi Satyanarayana 1.jpg|thumb|250px|मोटूरि सत्‍यनारायण|left]]&lt;br /&gt;
मोटूरि सत्यनारायण का जन्म 2 फ़रवरी, 1902 को [[आंध्र प्रदेश]] में [[कृष्णा ज़िला|कृष्णा ज़िले]] के दोण्डपाडू नामक [[गांव]] में हुआ था। उनका मत था कि भाषा सार्वजनिक समाज की वस्तु है। अतः इसका विकास भी सामाजिक विकास के साथ-साथ ही चलना चाहिए और केंद्रीय हिदी संस्थान को भाषायी प्रयोजनात्मकता को अपने कार्य का केंद्रीय बिन्दु बनाकर आगे बढना चाहिए। आप प्रयोजनमूलक हिन्दी आन्दोलन के जन्मदाता थे।&amp;lt;ref name=&amp;quot;RchB&amp;quot;/&amp;gt; &lt;br /&gt;
====हिन्दी संस्थान की स्थापना====&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[केंद्रीय हिंदी संस्थान]] के जन्‍म का श्रेय मोटूरि सत्‍यनारायण जी को है। इस संस्‍था के निर्माण के पूर्व [[महात्मा गाँधी]] की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से स्‍थापित दक्षिण भारत हिन्‍दी प्रचार सभा के माध्‍यम से [[दक्षिण भारत]] में [[हिन्दी]] के प्रचार एवं प्रसार के क्षेत्र में अनुपम योगदान दिया। मोटूरि सत्‍यनारायण  ने हिन्‍दीतर राज्‍यों के सेवारत हिन्‍दी शिक्षकों को हिन्‍दी भाषा के सहज वातावरण में रखकर उन्‍हें हिन्‍दी भाषा, [[हिन्दी साहित्य]] एवं हिन्‍दी शिक्षण का विशेष प्रशिक्षण प्रदान करने की आवश्‍यकता का अनुभव किया। इसी उद्‌देश्‍य से परिषद्‌ ने सन्‌ 1952 में [[आगरा]] में हिन्‍दी विद्यालय की स्‍थापना की। सन्‌ 1958 में इसका नाम ‘‘अखिल भारतीय हिन्‍दी विद्यालय, आगरा' रखा गया। मोटूरि जी को चिन्‍ता थी कि हिन्‍दी कहीं केवल साहित्‍य की भाषा बनकर न रह जाए। उसे जीवन के विविध प्रकार्यों की अभिव्‍यक्‍ति में समर्थ होना चाहिए। उन्‍होंने कहा-&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;[[भारत]] एक बहुभाषी देश है। हमारे देश की प्रत्‍येक [[भाषा]] दूसरी भाषा जितनी ही महत्‍वपूर्ण है, अतएव उन्‍हें राष्‍ट्रीय भाषाओं की मान्‍यता दी गई। भारतीय राष्‍ट्रीयता को चाहिए कि वह अपने आपको इस बहुभाषीयता के लिए तैयार करे। भाषा-आधार का नवीनीकरण करती रहे। हिन्‍दी को देश के लिए किए जाने वाले विशिष्‍ट प्रकार्यों की अभिव्‍यक्‍ति का सशक्‍त माध्‍यम बनना है।&amp;lt;ref name=&amp;quot;RchB&amp;quot;&amp;gt;{{cite web |url=http://www.rachanakar.org/2009/07/blog-post_17.html |title=प्रयोजनमूलक हिन्‍दी की संकल्‍पना के प्रवर्तक मोटूरि सत्‍यनारायण |accessmonthday=26 दिसम्बर |accessyear=2011 |last=जैन |first=प्रो. महावीर सरन  |authorlink= |format=एच.टी.एम.एल |publisher=रचनाकार (ब्लॉग) |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
आपके द्वारा संस्थापित अन्य संस्थाएँ हैं-अखिल भारतीय हिन्दी परिषद, आगरा, भारतीय संस्कृति संगम, दिल्ली, तेलुगु भाषा समिति, मद्रास और हैदराबाद, हिन्दी विकास समिति, मद्रास एवं दिल्ली और [[हिंदुस्तानी प्रचार सभा, मुंबई|हिंदुस्तानी प्रचार सभा]], वर्धा आदि&amp;lt;ref name=&amp;quot;KHS&amp;quot;&amp;gt;{{cite web |url=http://hindisansthan.org/hi/ms.htm |title=मोटूरि सत्यनारायण जी का संक्षिप्त जीवन-परिचय|accessmonthday=26 दिसम्बर |accessyear=2011 |last=|first= |authorlink= |format=एच.टी.एम.एल |publisher=केन्द्रीय हिन्दी संस्थान |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[चित्र:मोटूरी सत्यनारायण.jpeg|thumb|250px|मोटूरि सत्‍यनारायण|right]]&lt;br /&gt;
==कार्य और पद==&lt;br /&gt;
मोटूरि सत्यनारायण केंद्रीय हिन्दी शिक्षण मंडल आगरा के अध्यक्ष रहे हैं। आप विभिन्न शैक्षिक, तकनीकी, सांस्कृतिक भाषा समिति, साहित्यिक एवं शैक्षिक संस्थाओं के सक्रिय सदस्य रहे हैं और इनकी उन्नति में आपका महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। संस्थान के अखिल भारतीय हिन्दी सेवा सम्मान योजना के अंतर्गत सन् 1989 में हिन्दी प्रचार-प्रसार एवं हिन्दी प्रशिक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए आपको गंगाशरण सिंह पुरस्कार से सम्मानित करके संस्थान स्वयं गौरवान्वित हुआ। इस योजना के अंतर्गत सन् 2002 से भारतीय मूल के विद्वान् को विदेशों में हिन्दी के प्रचार एवं प्रसार के उल्लेखनीय कार्य के लिए आपके नाम से पुरस्कृत किया गया है।&amp;lt;ref name=&amp;quot;KHS&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==निधन==&lt;br /&gt;
हिन्दी और हिन्दी के माध्यम से अनेकों विद्वानों को उँचाई तक पहुँचाने का श्रेय मोटूरि सत्यनारायण को जाता है। मोटूरि सत्यनारायण और हिन्दी सेवा एक दूसरे के पर्याय थे, हैं और रहेंगे। मोटूरि सत्यनारायण का [[6 मार्च]], [[1995]] को निधन हो गया।&lt;br /&gt;
==सम्मान और पुरस्कार==&lt;br /&gt;
* डी. लिट (मानद उपाधि) (आन्‍ध्र विश्वविद्यालय)&lt;br /&gt;
* [[पद्म श्री]]&lt;br /&gt;
* [[पद्म भूषण]] &lt;br /&gt;
* [[गंगाशरण सिंह पुरस्कार]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक2 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{साहित्यकार}}&lt;br /&gt;
[[Category:पद्म श्री]][[Category:पद्म भूषण]][[Category:आधुनिक साहित्यकार]][[Category:साहित्यकार]] [[Category:साहित्य कोश]] [[Category:चरित कोश]] &lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
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		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
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		<title>चित्र:मोटूरी सत्यनारायण.jpeg</title>
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		<title>चित्र:Moturi Satyanarayana 1.jpg</title>
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		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
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		<title>पौष पूर्णिमा</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AA%E0%A5%8C%E0%A4%B7_%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A3%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE&amp;diff=694756"/>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;आशा चौधरी: /* मंत जाप */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा संक्षिप्त परिचय&lt;br /&gt;
|चित्र=Paush-Purnima.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=पौष पूर्णिमा पर स्नान करते लोग&lt;br /&gt;
|विवरण='पौष पूर्णिमा' [[हिन्दू धर्म]] में मान्य पवित्र [[पूर्णिमा]] तिथियों में से एक है। इस दिन नदियों में [[स्नान]], दान तथा [[विष्णु|भगवान विष्णु]] का [[ध्यान]] और उनकी पूजा का विशेष महत्त्व है।&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=तिथि&lt;br /&gt;
|पाठ 1=[[पौष|पौष माह]], [[शुक्ल पक्ष]], [[पूर्णिमा]] (15वीं तिथि)&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=महत्त्व&lt;br /&gt;
|पाठ 2=इस दिन [[गंगा]]-[[यमुना]] जैसी पवित्र नदियों में स्नान, दान और [[सूर्य]] को अर्घ्य देने का विशेष महत्त्व है। माना जाता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से तन, मन और [[आत्मा]] तीनों नए हो जाते हैं।&lt;br /&gt;
|शीर्षक 3=&lt;br /&gt;
|पाठ 3=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 4=&lt;br /&gt;
|पाठ 4=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 5=&lt;br /&gt;
|पाठ 5=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 6=&lt;br /&gt;
|पाठ 6=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 7=&lt;br /&gt;
|पाठ 7=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 8=&lt;br /&gt;
|पाठ 8=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 9=&lt;br /&gt;
|पाठ 9=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 10=विशेष&lt;br /&gt;
|पाठ 10=[[जैन]] धर्मावलंबी इस दिन 'शाकंभरी जयंती' मनाते हैं तो वहीं, [[छत्तीसगढ़]] के ग्रामीण अंचलों में रहने वाली जनजातियां पौष पूर्णिमा के दिन बड़े ही धूमधाम से 'छेरता' पर्व मनाती हैं।&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=पौष पूर्णिमा से आरंभ होकर तीर्थराज [[प्रयाग]] में बहुत बड़े मेले का आयोजन होता है। इस मेले के अंतर्गत तीन बड़े स्नानों का विशेष महत्व बताया गया है। ये स्नान पौष पूर्णिमा, माघ अमावस्या और [[माघ पूर्णिमा]] के दिन आयोजित होते हैं।&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
'''पौष पूर्णिमा''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Paush Purnima'') [[विक्रम संवत]] के दसवें माह [[पौष]] के [[शुक्ल पक्ष]] की 15वीं तिथि है। ऐसी मान्यता है कि पौष मास के दौरान जो लोग पूरे [[महीने]] भगवान का [[ध्यान]] कर आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करते हैं, उसकी पूर्णता पौष पूर्णिमा के स्नान से हो जाती है। इस दिन [[काशी]], [[प्रयाग]] और [[हरिद्वार]] में [[स्नान]] का विशेष महत्व होता है। [[जैन]] धर्मावलंबी इस दिन 'शाकंभरी जयंती' मनाते हैं तो वहीं, [[छत्तीसगढ़]] के ग्रामीण अंचलों में रहने वाली जनजातियां पौष पूर्णिमा के दिन बड़े ही धूमधाम से 'छेरता' पर्व मनाती हैं।&amp;lt;ref name=&amp;quot;a&amp;quot;&amp;gt;{{cite web |url=http://navbharattimes.indiatimes.com/astro/astrological-predictions/paush-purnima-today-devotees-to-take-holy-dip-in-prayag/articleshow/50702702.cms |title=पौष पूर्णिमा पर लाखों ने लगाई आस्था की डुबकी |accessmonthday=23 नवम्बर |accessyear=2016 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=/navbharattimes.indiatimes.com |language= हिंदी}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
==महत्व==&lt;br /&gt;
[[चित्र:पौष पूर्णिमा.jpeg|thumb|250px|पौष पूर्णिमा|left]]&lt;br /&gt;
ज्योतिष तथा जानकारों का कहना है कि पौष महीने में [[सूर्य देव]] ग्यारह हजार रश्मियों के साथ तप करके सर्दी से राहत देते हैं। [[पौष]] के महीने में सूर्य देव की विशेष [[पूजा]], उपासना से मनुष्य जीवन-मरण के चक्कर से मुक्ति पा सकता है। पौष पूर्णिमा के दिन [[गंगा]]-[[यमुना]] जैसी पवित्र नदियों में स्नान, दान और [[सूर्य]] को अर्घ्य देने का विशेष महत्त्व है। माना जाता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से तन, मन और [[आत्मा]] तीनों नए हो जाते हैं। इसीलिए इस दिन [[संगम]] के तट पर [[स्नान]] के लिए लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। पौष का महीना सूर्य देव का महीना माना जाता है। [[पूर्णिमा]] की [[तिथि]] [[चन्द्रमा]] के अनुसार होती है। सूर्य-चन्द्रमा का यह अद्भुत संयोग केवल पौष पूर्णिमा को ही मिलता है। इस दिन सूर्य और चन्द्रमा दोनों की उपासना से पूरी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। ग्रहों की बाधा शांत होती है और [[मोक्ष]] का वरदान भी मिलता है।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://aajtak.intoday.in/story/importance-of-paush-purnima-in-hindi-religion-1-851631.html |title=भाग्य संवारेगा पौष पूर्णिमा का महास्नान |accessmonthday=23 नवम्बर |accessyear=2016 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=aajtak.intoday.in |language= हिंदी}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पूजा और स्नान==&lt;br /&gt;
पौष पूर्णिमा को सुबह स्नान के पहले संकल्प लेना चाहिए। पहले [[जल]] को सिर पर लगाकर प्रणाम करें, फिर स्नान करें। साफ कपड़े धारण करने के बाद और सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। फिर मंत्र जाप करके कुछ दान अवश्य करना चाहिए। इस दिन व्रत रखना और भी अच्छा रहता है।&lt;br /&gt;
====मंत्र जाप====&lt;br /&gt;
पौष पूर्णिमा पर स्नान के बाद कुछ विशेष मंत्रों के जाप से कष्टों से मुक्ति पाई जा सकती है। इसके लिए निम्न मंत्रों का जाप किया जा सकता है-&lt;br /&gt;
#ऊँ आदित्याय नमः&lt;br /&gt;
#ऊँ सोम सोमाय नमः&lt;br /&gt;
#ऊँ नमो नीलकंठाय&lt;br /&gt;
#ऊँ नमो नारायणाय&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पुराण उल्लेख==&lt;br /&gt;
[[पुराण|पुराणों]] के अनुसार [[पौष|पौष मास]] की [[पूर्णिमा]] से [[माघ|माघ मास]] की पूर्णिमा तक माघ मास में पवित्र नदी [[नर्मदा नदी|नर्मदा]], [[गंगा]], [[यमुना]], [[सरस्वती नदी|सरस्वती]], [[कावेरी नदी|कावेरी]] सहित अन्य जीवनदायिनी नदियों में स्नान करने से मनुष्य को समस्त पापों से छुटकारा मिलता है और मोक्ष का मार्ग खुल जाता है।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://hindi.webdunia.com/article/other-festivals/%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%9B%E0%A5%81%E0%A4%9F%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%98-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B8-113020700073_1.htm|title=समस्त पापों से छुटकारा दिलाता है माघ मास |accessmonthday=23 नवम्बर |accessyear=2016 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=hindi.webdunia.com |language= हिंदी}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
#[[महाभारत]] के एक दृष्टांत में उल्लेख करते हुए बताया गया है कि माघ माह के दिनों में अनेक तीर्थों का समागम होता है।&lt;br /&gt;
#[[पद्मपुराण]] में बताया गया है कि अन्य मास में जप, तप और दान से [[विष्णु|भगवान विष्णु]] उतने प्रसन्न नहीं होते, जितने कि माघ मास में नदी तथा तीर्थस्थलों पर स्नान करने से होते हैं। यही वजह है कि प्राचीन पुराणों में भगवान नारायण को पाने का सुगम मार्ग माघ मास के पुण्य स्नान को बतलाया गया है।&lt;br /&gt;
#[[मत्स्य पुराण]] के एक कथन के अनुसार माघ मास की पूर्णिमा में जो व्यक्ति [[ब्राह्मण]] को 'ब्रह्मावैवर्तपुराण' का दान करता है, उसे ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है। सदियों से माघ माह की विशेषता को लेकर [[भारत]] वर्ष में नर्मदा, गंगा, यमुना, सरस्वती, कावेरी सहित कई पवित्र नदियों के तट पर माघ मेला भी लगता है।&lt;br /&gt;
#निर्णय सिंधु में कहा गया है कि माघ मास के दौरान मनुष्य को कम से कम एक बार पवित्र नदी में [[स्नान]] करना चाहिए। भले पूरे माह स्नान के योग न बन सकें, लेकिन एक दिन के स्नान से श्रद्धालु स्वर्ग लोक का उत्तराधिकारी बन सकता है। इस बात का उदाहरण इस श्लोक से मिलता है-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&amp;quot;मासपर्यन्त स्नानासम्भवे तु त्रयहमेकाहं वा स्नायात्‌॥&amp;quot;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अर्थात् &amp;quot;जो लोग लंबे समय तक स्वर्ग लोक का आनंद लेना चाहते हैं, उन्हें माघ मास में [[सूर्य]] के [[मकर राशि]] में स्थित होने पर तीर्थ स्नान अवश्य ही करना चाहिए।&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*तीर्थ स्थान पर यह संकल्प लेना चाहिए-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&amp;lt;blockquote&amp;gt;&amp;quot;स्वर्गलोक चिरवासो येषां मनसि वर्तते।&lt;br /&gt;
यत्र काच्पि जलै जैस्तु स्नानव्यं मृगा भास्करे॥&amp;quot;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अर्थात् &amp;quot;माघ स्नान का संकल्प शास्त्रों के अनुसार पौष पूर्णिमा को ले लेना चाहिए। लेकिन अगर उस समय यह संकल्प नहीं लिया गया हो तो माघ में तीर्थ स्नान के दौरान यह संकल्प करके, भगवान विष्णु का पूजन-अर्चन करना चाहिए। साथ ही संभव हो तो एक समय भोजन का व्रत भी करना चाहिए। जिस प्रकार माघ मास में तीर्थ स्नान का बहुत महत्व है, उसी प्रकार दान का भी विशेष महत्व है। इन माह में दान में [[तिल]], गुड़ और कंबल या ऊनी वस्त्र दान देने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।&amp;quot;&lt;br /&gt;
==प्रयाग का महत्त्व==&lt;br /&gt;
पौष पूर्णिमा से आरंभ होकर तीर्थराज [[प्रयाग]] में बहुत बड़े मेले का आयोजन होता है। इस मेले के अंतर्गत तीन बड़े स्नानों का विशेष महत्व बताया गया है। ये स्नान पौष पूर्णिमा, माघ अमावस्या और [[माघ पूर्णिमा]] के दिन आयोजित होते हैं। इन तीनों ही अवसरों पर नदियों में लाखों लोग आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित करते हैं। माघ मास में प्रयागराज में स्नान का महत्व बताते हुए [[महाभारत]] के [[अनुशासन पर्व महाभारत|अनुशासन पर्व]] में कहा गया है&amp;lt;ref name=&amp;quot;a&amp;quot;/&amp;gt;-&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&amp;lt;blockquote&amp;gt;दशतीर्थ सहस्राणि, तिस्र: कोट्यस्तथापरा:,&lt;br /&gt;
समागच्छन्ति माघ्यां, तु प्रयागे भरतर्षभ।&lt;br /&gt;
माघमासं प्रयागे तु, नियत: संशयव्रत:,&lt;br /&gt;
स्नात्वा तु भरतश्रेष्ठ, निर्मल: स्वर्गमाप्नुयात्।।&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अर्थात् &amp;quot;माघ मास में [[प्रयाग|प्रयागराज]] में तीन करोड़ दस हजार तीर्थों का समागम होता है। इसलिए इस महीने में प्रयाग में रहकर स्नान करने वाले को स्वर्ग की प्राप्ति होती है। पौष पूर्णिमा के दिन व्रत रखने वाले को विशेष फल और पुण्य की प्राप्ति होती है।&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
माना जाता है कि [[माघ|माघ मास]] में पवित्र नदियों में स्नान करने से एक विशेष ऊर्जा की प्राप्ति होती है। वहीं [[पुराण|पुराणों]] में वर्णित है कि इस माह में पूजन-अर्चन व स्नान करने से नारायण को प्राप्त किया जा सकता है तथा स्वर्ग की प्राप्ति का मार्ग भी खुलता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक= प्रारम्भिक1|माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{पर्व और त्योहार}}{{व्रत और उत्सव}}&lt;br /&gt;
[[Category:व्रत और उत्सव]][[Category:संस्कृति कोश]][[Category:पर्व और त्योहार]][[Category:हिन्दू धर्म कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AA%E0%A5%8C%E0%A4%B7_%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A3%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE&amp;diff=694755</id>
		<title>पौष पूर्णिमा</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AA%E0%A5%8C%E0%A4%B7_%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A3%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE&amp;diff=694755"/>
		<updated>2026-05-09T06:29:40Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;आशा चौधरी: /* महत्व */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा संक्षिप्त परिचय&lt;br /&gt;
|चित्र=Paush-Purnima.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=पौष पूर्णिमा पर स्नान करते लोग&lt;br /&gt;
|विवरण='पौष पूर्णिमा' [[हिन्दू धर्म]] में मान्य पवित्र [[पूर्णिमा]] तिथियों में से एक है। इस दिन नदियों में [[स्नान]], दान तथा [[विष्णु|भगवान विष्णु]] का [[ध्यान]] और उनकी पूजा का विशेष महत्त्व है।&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=तिथि&lt;br /&gt;
|पाठ 1=[[पौष|पौष माह]], [[शुक्ल पक्ष]], [[पूर्णिमा]] (15वीं तिथि)&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=महत्त्व&lt;br /&gt;
|पाठ 2=इस दिन [[गंगा]]-[[यमुना]] जैसी पवित्र नदियों में स्नान, दान और [[सूर्य]] को अर्घ्य देने का विशेष महत्त्व है। माना जाता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से तन, मन और [[आत्मा]] तीनों नए हो जाते हैं।&lt;br /&gt;
|शीर्षक 3=&lt;br /&gt;
|पाठ 3=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 4=&lt;br /&gt;
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|शीर्षक 9=&lt;br /&gt;
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|शीर्षक 10=विशेष&lt;br /&gt;
|पाठ 10=[[जैन]] धर्मावलंबी इस दिन 'शाकंभरी जयंती' मनाते हैं तो वहीं, [[छत्तीसगढ़]] के ग्रामीण अंचलों में रहने वाली जनजातियां पौष पूर्णिमा के दिन बड़े ही धूमधाम से 'छेरता' पर्व मनाती हैं।&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=पौष पूर्णिमा से आरंभ होकर तीर्थराज [[प्रयाग]] में बहुत बड़े मेले का आयोजन होता है। इस मेले के अंतर्गत तीन बड़े स्नानों का विशेष महत्व बताया गया है। ये स्नान पौष पूर्णिमा, माघ अमावस्या और [[माघ पूर्णिमा]] के दिन आयोजित होते हैं।&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
'''पौष पूर्णिमा''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Paush Purnima'') [[विक्रम संवत]] के दसवें माह [[पौष]] के [[शुक्ल पक्ष]] की 15वीं तिथि है। ऐसी मान्यता है कि पौष मास के दौरान जो लोग पूरे [[महीने]] भगवान का [[ध्यान]] कर आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करते हैं, उसकी पूर्णता पौष पूर्णिमा के स्नान से हो जाती है। इस दिन [[काशी]], [[प्रयाग]] और [[हरिद्वार]] में [[स्नान]] का विशेष महत्व होता है। [[जैन]] धर्मावलंबी इस दिन 'शाकंभरी जयंती' मनाते हैं तो वहीं, [[छत्तीसगढ़]] के ग्रामीण अंचलों में रहने वाली जनजातियां पौष पूर्णिमा के दिन बड़े ही धूमधाम से 'छेरता' पर्व मनाती हैं।&amp;lt;ref name=&amp;quot;a&amp;quot;&amp;gt;{{cite web |url=http://navbharattimes.indiatimes.com/astro/astrological-predictions/paush-purnima-today-devotees-to-take-holy-dip-in-prayag/articleshow/50702702.cms |title=पौष पूर्णिमा पर लाखों ने लगाई आस्था की डुबकी |accessmonthday=23 नवम्बर |accessyear=2016 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=/navbharattimes.indiatimes.com |language= हिंदी}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
==महत्व==&lt;br /&gt;
[[चित्र:पौष पूर्णिमा.jpeg|thumb|250px|पौष पूर्णिमा|left]]&lt;br /&gt;
ज्योतिष तथा जानकारों का कहना है कि पौष महीने में [[सूर्य देव]] ग्यारह हजार रश्मियों के साथ तप करके सर्दी से राहत देते हैं। [[पौष]] के महीने में सूर्य देव की विशेष [[पूजा]], उपासना से मनुष्य जीवन-मरण के चक्कर से मुक्ति पा सकता है। पौष पूर्णिमा के दिन [[गंगा]]-[[यमुना]] जैसी पवित्र नदियों में स्नान, दान और [[सूर्य]] को अर्घ्य देने का विशेष महत्त्व है। माना जाता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से तन, मन और [[आत्मा]] तीनों नए हो जाते हैं। इसीलिए इस दिन [[संगम]] के तट पर [[स्नान]] के लिए लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। पौष का महीना सूर्य देव का महीना माना जाता है। [[पूर्णिमा]] की [[तिथि]] [[चन्द्रमा]] के अनुसार होती है। सूर्य-चन्द्रमा का यह अद्भुत संयोग केवल पौष पूर्णिमा को ही मिलता है। इस दिन सूर्य और चन्द्रमा दोनों की उपासना से पूरी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। ग्रहों की बाधा शांत होती है और [[मोक्ष]] का वरदान भी मिलता है।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://aajtak.intoday.in/story/importance-of-paush-purnima-in-hindi-religion-1-851631.html |title=भाग्य संवारेगा पौष पूर्णिमा का महास्नान |accessmonthday=23 नवम्बर |accessyear=2016 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=aajtak.intoday.in |language= हिंदी}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पूजा और स्नान==&lt;br /&gt;
पौष पूर्णिमा को सुबह स्नान के पहले संकल्प लेना चाहिए। पहले [[जल]] को सिर पर लगाकर प्रणाम करें, फिर स्नान करें। साफ कपड़े धारण करने के बाद और सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। फिर मंत्र जाप करके कुछ दान अवश्य करना चाहिए। इस दिन व्रत रखना और भी अच्छा रहता है।&lt;br /&gt;
====मंत जाप====&lt;br /&gt;
पौष पूर्णिमा पर स्नान के बाद कुछ विशेष मंत्रों के जाप से कष्टों से मुक्ति पाई जा सकती है। इसके लिए निम्न मंत्रों का जाप किया जा सकता है-&lt;br /&gt;
#ऊँ आदित्याय नमः&lt;br /&gt;
#ऊँ सोम सोमाय नमः&lt;br /&gt;
#ऊँ नमो नीलकंठाय&lt;br /&gt;
#ऊँ नमो नारायणाय&lt;br /&gt;
==पुराण उल्लेख==&lt;br /&gt;
[[पुराण|पुराणों]] के अनुसार [[पौष|पौष मास]] की [[पूर्णिमा]] से [[माघ|माघ मास]] की पूर्णिमा तक माघ मास में पवित्र नदी [[नर्मदा नदी|नर्मदा]], [[गंगा]], [[यमुना]], [[सरस्वती नदी|सरस्वती]], [[कावेरी नदी|कावेरी]] सहित अन्य जीवनदायिनी नदियों में स्नान करने से मनुष्य को समस्त पापों से छुटकारा मिलता है और मोक्ष का मार्ग खुल जाता है।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://hindi.webdunia.com/article/other-festivals/%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%9B%E0%A5%81%E0%A4%9F%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%98-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B8-113020700073_1.htm|title=समस्त पापों से छुटकारा दिलाता है माघ मास |accessmonthday=23 नवम्बर |accessyear=2016 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=hindi.webdunia.com |language= हिंदी}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
#[[महाभारत]] के एक दृष्टांत में उल्लेख करते हुए बताया गया है कि माघ माह के दिनों में अनेक तीर्थों का समागम होता है।&lt;br /&gt;
#[[पद्मपुराण]] में बताया गया है कि अन्य मास में जप, तप और दान से [[विष्णु|भगवान विष्णु]] उतने प्रसन्न नहीं होते, जितने कि माघ मास में नदी तथा तीर्थस्थलों पर स्नान करने से होते हैं। यही वजह है कि प्राचीन पुराणों में भगवान नारायण को पाने का सुगम मार्ग माघ मास के पुण्य स्नान को बतलाया गया है।&lt;br /&gt;
#[[मत्स्य पुराण]] के एक कथन के अनुसार माघ मास की पूर्णिमा में जो व्यक्ति [[ब्राह्मण]] को 'ब्रह्मावैवर्तपुराण' का दान करता है, उसे ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है। सदियों से माघ माह की विशेषता को लेकर [[भारत]] वर्ष में नर्मदा, गंगा, यमुना, सरस्वती, कावेरी सहित कई पवित्र नदियों के तट पर माघ मेला भी लगता है।&lt;br /&gt;
#निर्णय सिंधु में कहा गया है कि माघ मास के दौरान मनुष्य को कम से कम एक बार पवित्र नदी में [[स्नान]] करना चाहिए। भले पूरे माह स्नान के योग न बन सकें, लेकिन एक दिन के स्नान से श्रद्धालु स्वर्ग लोक का उत्तराधिकारी बन सकता है। इस बात का उदाहरण इस श्लोक से मिलता है-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&amp;quot;मासपर्यन्त स्नानासम्भवे तु त्रयहमेकाहं वा स्नायात्‌॥&amp;quot;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अर्थात् &amp;quot;जो लोग लंबे समय तक स्वर्ग लोक का आनंद लेना चाहते हैं, उन्हें माघ मास में [[सूर्य]] के [[मकर राशि]] में स्थित होने पर तीर्थ स्नान अवश्य ही करना चाहिए।&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*तीर्थ स्थान पर यह संकल्प लेना चाहिए-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&amp;lt;blockquote&amp;gt;&amp;quot;स्वर्गलोक चिरवासो येषां मनसि वर्तते।&lt;br /&gt;
यत्र काच्पि जलै जैस्तु स्नानव्यं मृगा भास्करे॥&amp;quot;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अर्थात् &amp;quot;माघ स्नान का संकल्प शास्त्रों के अनुसार पौष पूर्णिमा को ले लेना चाहिए। लेकिन अगर उस समय यह संकल्प नहीं लिया गया हो तो माघ में तीर्थ स्नान के दौरान यह संकल्प करके, भगवान विष्णु का पूजन-अर्चन करना चाहिए। साथ ही संभव हो तो एक समय भोजन का व्रत भी करना चाहिए। जिस प्रकार माघ मास में तीर्थ स्नान का बहुत महत्व है, उसी प्रकार दान का भी विशेष महत्व है। इन माह में दान में [[तिल]], गुड़ और कंबल या ऊनी वस्त्र दान देने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।&amp;quot;&lt;br /&gt;
==प्रयाग का महत्त्व==&lt;br /&gt;
पौष पूर्णिमा से आरंभ होकर तीर्थराज [[प्रयाग]] में बहुत बड़े मेले का आयोजन होता है। इस मेले के अंतर्गत तीन बड़े स्नानों का विशेष महत्व बताया गया है। ये स्नान पौष पूर्णिमा, माघ अमावस्या और [[माघ पूर्णिमा]] के दिन आयोजित होते हैं। इन तीनों ही अवसरों पर नदियों में लाखों लोग आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित करते हैं। माघ मास में प्रयागराज में स्नान का महत्व बताते हुए [[महाभारत]] के [[अनुशासन पर्व महाभारत|अनुशासन पर्व]] में कहा गया है&amp;lt;ref name=&amp;quot;a&amp;quot;/&amp;gt;-&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&amp;lt;blockquote&amp;gt;दशतीर्थ सहस्राणि, तिस्र: कोट्यस्तथापरा:,&lt;br /&gt;
समागच्छन्ति माघ्यां, तु प्रयागे भरतर्षभ।&lt;br /&gt;
माघमासं प्रयागे तु, नियत: संशयव्रत:,&lt;br /&gt;
स्नात्वा तु भरतश्रेष्ठ, निर्मल: स्वर्गमाप्नुयात्।।&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अर्थात् &amp;quot;माघ मास में [[प्रयाग|प्रयागराज]] में तीन करोड़ दस हजार तीर्थों का समागम होता है। इसलिए इस महीने में प्रयाग में रहकर स्नान करने वाले को स्वर्ग की प्राप्ति होती है। पौष पूर्णिमा के दिन व्रत रखने वाले को विशेष फल और पुण्य की प्राप्ति होती है।&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
माना जाता है कि [[माघ|माघ मास]] में पवित्र नदियों में स्नान करने से एक विशेष ऊर्जा की प्राप्ति होती है। वहीं [[पुराण|पुराणों]] में वर्णित है कि इस माह में पूजन-अर्चन व स्नान करने से नारायण को प्राप्त किया जा सकता है तथा स्वर्ग की प्राप्ति का मार्ग भी खुलता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक= प्रारम्भिक1|माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{पर्व और त्योहार}}{{व्रत और उत्सव}}&lt;br /&gt;
[[Category:व्रत और उत्सव]][[Category:संस्कृति कोश]][[Category:पर्व और त्योहार]][[Category:हिन्दू धर्म कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0:%E0%A4%AA%E0%A5%8C%E0%A4%B7_%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A3%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE.jpeg&amp;diff=694754</id>
		<title>चित्र:पौष पूर्णिमा.jpeg</title>
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&lt;hr /&gt;
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		<title>ललिता सखी</title>
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		<updated>2026-05-09T06:26:36Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;आशा चौधरी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[चित्र:ललिता सखी.jpeg|thumb|250px|ललिता। सखी|right]]&lt;br /&gt;
'''ललिता''' [[राधा|राधाजी]] की [[अष्टसखी|अष्टसखियों]] में से एक थीं। इन्हें सभी सखियों में प्रधान स्थान प्राप्त था। ये [[राधा]]-[[कृष्ण]] की निकुंज लीलाओं की भी साक्षी थीं। ललिता राधा को सुख प्रदान कराने वाली प्रमुख सखी और उनकी विविध लीलाओं में सहगामी थीं। स्वंय [[शिव|भगवान शिव]] ने भी ललिता से सखीभाव की दीक्षा प्राप्त की थी।&lt;br /&gt;
==सूरदास का उल्लेख==&lt;br /&gt;
[[सूरदास]] ने राधाजी के अतिरिक्त ललिता का विशेष रूप से उल्लेख किया है और साथ ही चन्द्रावली का भी। ललिता को राधा की परम प्रिय, घनिष्ठ सखियों के रूप में 'मान' और 'खण्डिता' के प्रकरणों में चित्रित किया गया है। 'खण्डिता' प्रकरणों में इन दो के अतिरिक्त सूरदास ने 'शीला', 'सुखमा', 'कामा', 'वृन्दा', 'कुमुदा' और 'प्रमदा' का भी उल्लेख किया है। गोपियों में कृष्ण के प्रेम की अधिकारिणी इन्हें ही माना गया है। परन्तु इनमें से किसी का राधा से ईर्ष्याभाव नहीं था। नित्य बिहारी राधा-कृष्ण की ललिता अभिन्न सहचरी हैं।&lt;br /&gt;
==अवतार==&lt;br /&gt;
सखीभाव की उपासना में उसके व्यक्तित्व को आदर्श रूप में स्वीकार किया गया है। माना जाता है कि आज से लगभग पांच शताब्दी पूर्व राधारानी की सखी ललिता ने [[स्वामी हरिदास]] के रूप में [[अवतार]] लिया था। स्वामी हरिदास [[वृन्दावन]] के [[निधिवन वृन्दावन|निधिवन]] के एकांत में अपने दिव्य [[संगीत]] से प्रिया-प्रियतम ([[राधा]]-[[कृष्ण]]) को रिझाते थे।&lt;br /&gt;
==अन्य सखियाँ==&lt;br /&gt;
राधाजी की परमश्रेष्ठ सखियाँ आठ मानी गयी हैं, जिनके नाम निम्नलिखित हैं-&lt;br /&gt;
#[[ललिता]]&lt;br /&gt;
#[[विशाखा सखी|विशाखा]]&lt;br /&gt;
#[[चम्पकलता सखी|चम्पकलता]]&lt;br /&gt;
#[[चित्रा सखी|चित्रा]]&lt;br /&gt;
#[[तुंगविद्या सखी|तुंगविद्या]]&lt;br /&gt;
#[[इन्दुलेखा सखी|इन्दुलेखा]]&lt;br /&gt;
#[[रंगदेवी सखी|रंगदेवी]]&lt;br /&gt;
#[[सुदेवी सखी|सुदेवी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*उपरोक्त सखियों में से 'चित्रा', 'सुदेवी', 'तुंगविद्या' और 'इन्दुलेखा' के स्थान पर 'सुमित्रा', 'सुन्दरी', 'तुंगदेवी' और 'इन्दुरेखा' नाम भी मिलते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक= प्रारम्भिक1|माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{कृष्ण2}}{{पौराणिक चरित्र}}&lt;br /&gt;
[[Category:कृष्ण]][[Category:पौराणिक चरित्र]][[Category:प्रसिद्ध चरित्र और मिथक कोश]][[Category:कृष्ण काल]][[Category:पौराणिक कोश]][[Category:चरित कोश]][[Category:हिन्दू धर्म कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0:%E0%A4%B2%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BE_%E0%A4%B8%E0%A4%96%E0%A5%80.jpeg&amp;diff=694752</id>
		<title>चित्र:ललिता सखी.jpeg</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;आशा चौधरी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
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		<title>माघ पूर्णिमा</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%98_%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A3%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE&amp;diff=694751"/>
		<updated>2026-05-09T06:21:26Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;आशा चौधरी: /* धार्मिक मान्यता */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा संक्षिप्त परिचय&lt;br /&gt;
|चित्र=Kumbh-Vrindavan-Mathura-11.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=माघ में कुम्भ स्नान&lt;br /&gt;
|विवरण='माघ पूर्णिमा' [[हिन्दू धर्म]] में धार्मिक दृष्टि से बहुत ही पवित्र मानी गई है। इस दिन किए गए [[यज्ञ]], तप तथा दान का विशेष महत्त्व होता है।&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=अन्य नाम&lt;br /&gt;
|पाठ 1=माघी पूर्णिमा, बत्तीस पूर्णिमा&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=तिथि&lt;br /&gt;
|पाठ 2=[[माघ|माघ माह]] की [[पूर्णिमा]]&lt;br /&gt;
|शीर्षक 3=धार्मिक मान्यता&lt;br /&gt;
|पाठ 3=इस दिन [[संगम]] की रेत पर [[स्नान]]-[[ध्यान]] करने से मनोकामनाएं पूर्ण तो होती ही हैं, साथ ही मोक्ष की प्राप्ति भी होती है।&lt;br /&gt;
|शीर्षक 4=&lt;br /&gt;
|पाठ 4=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 5=&lt;br /&gt;
|पाठ 5=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 6=&lt;br /&gt;
|पाठ 6=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 7=&lt;br /&gt;
|पाठ 7=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 8=&lt;br /&gt;
|पाठ 8=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 9=विशेष&lt;br /&gt;
|पाठ 9=माघ माह के बारे में कहते हैं कि इन दिनों [[देवता]] [[पृथ्वी]] पर आते हैं। [[प्रयाग]] में [[स्नान]]-दान आदि करते हैं। देवता मनुष्य रूप धारण करके भजन-सत्संग आदि करते हैं।&lt;br /&gt;
|शीर्षक 10=देव पूजन&lt;br /&gt;
|पाठ 10=इस [[सत्यनारायण जी की आरती|भगवान सत्यनारायण जी]] कि [[कथा]] की जाती है। भगवान विष्णु की [[पूजा]] में [[केला|केले]] के पत्ते व [[फल]], [[पंचामृत]], सुपारी, [[पान]], [[तिल]],  मोली, रोली, कुमकुम, [[दूर्वा]] का उपयोग किया जाता है।&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=[[माघ स्नान]], [[माघ मेला]], [[कुम्भ मेला]], [[कल्पवास]]&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=[[हिन्दू धर्म]] की मान्यताओं के अनुसार महाकुंभ में माघ पूर्णिमा का [[स्नान]] इसलिए भी अति महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस [[तिथि]] पर [[चंद्रमा]] अपने पूर्ण यौवन पर होता है।&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''माघ पूर्णिमा''' या '''माघी पूर्णिमा''' का [[हिन्दू धर्म]] में बड़ा ही धार्मिक महत्त्व बताया गया है। वैसे तो हर [[पूर्णिमा]] का अपना अलग-अलग माहात्म्य होता है, लेकिन माघ पूर्णिमा की बात सबसे अलग है। इस दिन [[संगम]] ([[प्रयाग]]) की रेत पर [[स्नान]]-[[ध्यान]] करने से मनोकामनाएं पूर्ण तो होती ही हैं, साथ ही मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। [[मघा नक्षत्र]] के नाम पर 'माघ पूर्णिमा' की उत्पत्ति होती है। [[माघ|माघ माह]] में [[देवता]] पितरगण सदृश होते हैं। पितृगणों की श्रेष्ठता की अवधारणा और श्रेष्ठता सर्वविदित है। [[पितर|पितरों]] के लिए [[तर्पण (श्राद्ध)|तर्पण]] भी हज़ारों साल से चला आ रहा है।&amp;lt;ref name=&amp;quot;bb&amp;quot;&amp;gt;{{cite web |url= http://www.jagran.com/spiritual/mukhye-dharmik-sthal-11047.html|title= पुण्य प्रदायिनी माघ पूर्णिमा|accessmonthday=30 जनवरी|accessyear= 2015|last= |first= |authorlink= |format= |publisher= जागरण|language= हिन्दी}}&amp;lt;/ref&amp;gt; इस दिन [[स्वर्ण]], [[तिल]], कम्बल, पुस्तकें, पंचांग, [[कपास]] के वस्त्र और अन्नादि दान करने से सुकृत्य मिलता है।&lt;br /&gt;
==धार्मिक मान्यता==&lt;br /&gt;
[[चित्र:माघ पूर्णिमा.jpeg|thumb|250px|माघ पूर्णिमा|left]]&lt;br /&gt;
माघ माह के बारे में कहते हैं कि इन दिनों [[देवता]] [[पृथ्वी]] पर आते हैं। [[प्रयाग]] में [[स्नान]]-दान आदि करते हैं। [[सूर्य]] [[मकर राशि]] में आ जाता है। देवता मनुष्य रूप धारण करके भजन-सत्संग आदि करते हैं। माघ पूर्णिमा के दिन सभी देवी-देवता अंतिम बार स्नान करके अपने लोकों को प्रस्थान करते हैं। नतीजतन इसी दिन से [[संगम (इलाहाबाद)|संगम]] तट पर [[गंगा]], [[यमुना]] एवं [[सरस्वती नदी|सरस्वती]] की जलराशियों का स्तर कम होने लगता है। मान्यता है कि इस दिन अनेकों [[तीर्थ]], नदी-[[समुद्र]] आदि में प्रातः स्नान, सूर्य अर्घ्य, जप-तप, दान आदि से सभी दैहिक, दैविक एवं भौतिक तापों से मुक्ति मिल जाती है। शास्त्र कहते हैं कि यदि माघ पूर्णिमा के दिन [[पुष्य नक्षत्र]] हो तो इस दिन का पुण्य अक्षुण हो जाता है।&amp;lt;ref name=&amp;quot;aa&amp;quot;&amp;gt;{{cite web |url= http://www.amarujala.com/news/spirituality/religion-festivals/magh-poornima-importance-hindi-rj/|title= पुष्य नक्षत्र के साथ माघ पूर्णिमा का संयोग जानिए महत्व|accessmonthday=30 जनवरी|accessyear= 2015|last= |first= |authorlink= |format= |publisher= अमर उजाला.कॉम|language= हिन्दी}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पौराणिक प्रसंग==&lt;br /&gt;
शास्त्रों में एक प्रसंग है कि &amp;quot;[[भरत (दशरथ पुत्र)|भरत]] ने [[कौशल्या]] से कहा कि 'यदि [[राम]] को वन भेजे जाने में उनकी किंचितमात्र भी सम्मति रही हो तो [[वैशाख]], [[कार्तिक]] और माघ पूर्णिमा के [[स्नान]] सुख से वो वंचित रहें। उन्हें निम्न गति प्राप्त हो।' यह सुनते ही कौशल्या ने भरत को गले से लगा लिया।&amp;quot; इस तथ्य से ही इन अक्षुण पुण्यदायक पर्व का लाभ उठाने का महत्त्व पता चलता है।&amp;lt;ref name=&amp;quot;aa&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
====संक्षिप्त कथा====&lt;br /&gt;
माघ माह की [[पूर्णिमा]] को 'बत्तीस पूर्णिमा' भी कहते हैं। पुत्र और सौभाग्य को प्राप्त करने के लिए मध्याह्न में शिवोपासना की जाती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक पौराणिक [[कथा]] के अनुसार- &amp;quot;कांतिका नगरी में धनेश्वर नामक एक ब्राह्मण रहता था। वह नि:संतान था। बहुत उपाय किया, लेकिन उसकी पत्नी रूपमती से कोई संतान नहीं हुई। ब्राह्मण दान आदि मांगने भी जाता था। एक व्यक्ति ने ब्राह्मण दंपत्ति को दान देने से इसलिए मना कर दिया कि वह नि:संतान दंपत्ति को दान नहीं करता है। लेकिन उसने उस नि:संतान दंपत्ति को एक सलाह दी कि चंद्रिका देवी की वे आराधना करें। इसके पश्चात् ब्राह्मण दंपत्ति ने माँ काली की घनघोर आराधना की। 16 दिन उपवास करने के पश्चात् माँ काली प्रकट हुईं। माँ बोलीं कि &amp;quot;तुमको संतान की प्राप्ति अवश्य होगी। अपनी शक्ति के अनुसार आटे से बना दीप जलाओं और उसमें एक-एक दीप की वृद्धि करते रहना। यह कर्क पूर्णिमा के दिन तक 22 दीपों को जलाने की हो जानी चाहिए।&amp;quot; देवी के कथनानुसार ब्राह्मण ने [[आम]] के वृक्ष से एक आम तोड़ कर पूजन हेतु अपनी पत्नी को दे दिया। पत्नी इसके बाद गर्भवती हो गयी। देवी के आशीर्वाद से देवदास नाम का पुत्र पैदा हुआ। देवदास पढ़ने के लिए [[काशी]] गया, उसका मामा भी साथ गया। रास्ते में घटना हुई। प्रपंचवश उसे विवाह करना पड़ा। देवदास ने जबकि साफ-साफ बता दिया था कि वह अल्पायु है, लेकिन विधि के चक्र के चलते उसे मजबूरन विवाह करना पड़ा। उधर, काशी में एक रात उसे दबोचने के लिए काल आया, लेकिन व्रत के प्रताप से देवदास जीवित हो गया।&amp;lt;ref name=&amp;quot;bb&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==कल्पवास की पूर्णता==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Kalpvas.jpg|thumb|250px|[[कल्पवास]] के दौरान रहने का स्थान]]&lt;br /&gt;
'माघ पूर्णिमा' [[कल्पवास]] की पूर्णता का पर्व है। एक माह की तपस्या इस [[तिथि]] को समाप्त हो जाती है। कल्पवासी अपने घरों को लौट जाते हैं। स्वाभाविक है कि संकल्प की संपूर्ति का संतोष एवं परिजनों से मिलने की उत्सुकता उनके [[हृदय]] के उत्साह का संचार है। इसीलिये यह स्नान पर्व आनंद और उत्साह का पर्व बन जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{seealso|कल्पवास|कुम्भ मेला}}&lt;br /&gt;
==माघ स्नान की महिमा==&lt;br /&gt;
[[संगम]] में माघ पूर्णिमा का [[स्नान]] एक प्रमुख स्नान है। इस दिन सूर्योदय से पूर्व [[जल]] में भगवान का तेज रहता है, जो पाप का शमन करता है। '[[निर्णयसिन्धु]]' में कहा गया है कि माघ मास के दौरान मनुष्य को कम से कम एक बार पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। भले पूरे माह स्नान के योग न बन सकें, लेकिन माघ पूर्णिमा के स्नान से स्वर्गलोक का उत्तराधिकारी बना जा सकता है। इस बात का उदाहरण इस [[श्लोक]] से मिलता है-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;मासपर्यन्त स्नानासम्भवे तु त्रयहमेकाहं वा स्नायात्‌।&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अर्थात् &amp;quot;जो लोग लंबे समय तक स्वर्गलोक का आनंद लेना चाहते हैं, उन्हें माघ मास में [[सूर्य]] के [[मकर राशि]] में स्थित होने पर अवश्य तीर्थ स्नान करना चाहिए।&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[हिन्दू धर्म]] की मान्यताओं के अनुसार महाकुंभ में माघ पूर्णिमा का स्नान इसलिए भी अति महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस [[तिथि]] पर [[चंद्रमा]] अपने पूर्ण यौवन पर होता है। [[साधु]]-संतों का कहना है कि [[पूर्णिमा]] पर चंद्रमा की किरणें पूरी लौकिकता के साथ [[पृथ्वी]] पर पड़ती हैं। स्नान के बाद [[मानव शरीर]] पर उन किरणों के पड़ने से शांति की अनुभूति होती है और इसीलिए पूर्णिमा का स्नान महत्वपूर्ण है। माघ स्नान वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। [[माघ]] में ठंड खत्म होने की ओर रहती है तथा इसके साथ ही [[शिशिर ऋतु|शिशिर]] की शुरुआत होती है। [[ऋतु]] के बदलाव का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर नहीं पड़े, इसलिए प्रतिदिन सुबह स्नान करने से शरीर को मजबूती मिलती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'[[ब्रह्मवैवर्तपुराण]]' में उल्लेख है कि माघी पूर्णिमा पर [[विष्णु|भगवान विष्णु]] [[गंगाजल]] में निवास करते हैं, अत: इस पावन समय गंगाजल का स्पर्शमात्र भी स्वर्ग की प्राप्ति देता है। इसी प्रकार [[पुराण|पुराणों]] में मान्यता है कि भगवान विष्णु व्रत, उपवास, दान से भी उतने प्रसन्न नहीं होते, जितना अधिक प्रसन्न माघ स्नान करने से होते हैं। [[महाभारत]] में एक जगह इस बात का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इन दिनों में अनेक तीर्थों का समागम होता है। वहीं '[[पद्मपुराण]]' में कहा गया है कि अन्य मास में जप, तप और दान से भगवान विष्णु उतने प्रसन्न नहीं होते, जितने कि वे माघ मास में स्नान करने से होते हैं। यही वजह है कि प्राचीन ग्रंथों में नारायण को पाने का आसान रास्ता माघ पूर्णिमा के पुण्य स्नान को बताया गया है। [[भृगु|भृगु ऋषि]] के सुझाव पर व्याघ्रमुख वाले विद्याधर और [[गौतम ऋषि]] द्वारा अभिशप्त [[इन्द्र]] भी माघ स्नान के सत्व द्वारा ही श्राप से मुक्त हुए थे। 'पद्मपुराण' के अनुसार माघ-स्नान से मनुष्य के शरीर में स्थित उपाताप जलकर भस्म हो जाते हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url= https://vinayakvaastutimes.wordpress.com/tag/%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%98-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A3%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE/|title= जानिए की क्या हैं माघ पूर्णिमा और माघ पूर्णिमा का महत्व..???|accessmonthday= 30 जनवरी|accessyear= 2015|last= |first= |authorlink= |format= |publisher= विनायक वास्तु टाइम्स|language= हिन्दी}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{seealso|माघ स्नान|माघ मेला}}&lt;br /&gt;
==यज्ञ, तप तथा दान का महत्त्व==&lt;br /&gt;
इस दिन किए गए [[यज्ञ]], तप तथा दान का विशेष महत्त्व होता है। भगवान विष्णु की [[पूजा]] कि जाती है। भोजन, वस्त्र, गुड़, [[कपास]], [[घी]], लड्डु, [[फल]], अन्न आदि का दान करना पुण्यदायक माना जाता है। माघ पूर्णिमा में प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी या घर पर ही स्नान करके भगवान मधुसूदन की पूजा करनी चाहिए। माघ मास में काले तिलों से हवन और पितरों का तर्पण करना चाहिए। [[तिल]] के दान का इस [[माह]] में विशेष महत्त्व माना गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'[[मत्स्य पुराण]]' के अनुसार-&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&amp;lt;poem&amp;gt;पुराणं ब्रह्म वैवर्तं यो दद्यान्माघर्मासि च,&lt;br /&gt;
पौर्णमास्यां शुभदिने ब्रह्मलोके महीयते।&amp;lt;/poem&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'मत्स्य पुराण' का कथन है कि माघ मास की [[पूर्णिमा]] में जो व्यक्ति [[ब्राह्मण]] को दान करता है, उसे ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है। यह त्यौहार बहुत हीं पवित्र त्यौहार माना जाता हैं। स्नान आदि से निवृत होकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। ग़रीबो को भोजन, वस्त्र, गुड़, कपास, घी, लड्डु, फल, अन्न आदि का दान करना पुण्यदायक होता है। माघ पूर्णिमा को 'माघी पूर्णिमा' के नाम से भी संबोधित किया जाता है। माघ [[शुक्ल पक्ष]] की [[अष्टमी]] '[[भीमाष्टमी]]' के नाम से प्रसिद्ध है। इस तिथि को [[भीष्म पितामह]] ने सूर्य के उत्तरायण होने पर अपने नश्वर शरीर का त्याग किया था। उन्हीं की पावन स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है। माघी पूर्णिमा को एक मास का कल्पवास पूर्ण हो जाता है। इस दिन सत्यनारायण कथा और दान-पुण्य को अति फलदायी माना गया है। इस अवसर पर [[गंगा]] में स्नान करने से पाप एवं संताप का नाश होता है तथा मन एवं [[आत्मा]] को शुद्वता प्राप्त होती है। किसी भी व्यक्ति द्वारा इस दिन किया गया महास्नान समस्त रोगों को शांत करने वाला है। 'ओम नमः भगवते वासुदेवाय नमः' का जाप करते हुए स्नान व दान करना चाहिए। इस दिन से ही [[होली]] का डांडा गाड़ा जाता है।&lt;br /&gt;
====पूजन====&lt;br /&gt;
माघ पूर्णिमा के अवसर पर [[सत्यनारायण जी की आरती|भगवान सत्यनारायण जी]] कि [[कथा]] की जाती है। भगवान विष्णु की पूजा में [[केला|केले]] के पत्ते व [[फल]], पंचामृत, सुपारी, [[पान]], [[तिल]],  मोली, रोली, कुमकुम, [[दूर्वा]] का उपयोग किया जाता है। सत्यनारायण की पूजा के लिए [[दूध]], [[शहद]], केला, [[गंगाजल]], [[तुलसी]] का पत्ता, मेवा मिलाकर पंचामृत तैयार किया जाता है। इसके साथ ही साथ आटे को भून कर उसमें चीनी मिलाकर चूरमे का प्रसाद बनाया जाता है और इस का भोग लगता है। सत्यनारायण की कथा के बाद उनका पूजन होता है। इसके बाद [[लक्ष्मी|देवी लक्ष्मी]], [[महादेव]] और [[ब्रह्मा|ब्रह्मा जी]] की आरती कि जाती है और चरणामृत लेकर प्रसाद सभी को दिया जाता है।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url= http://astrobix.com/hindumarg/329-%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A8_%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%95%E0%A5%80_%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%98_%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A3%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE__Magnificence_of_Magh_Purnima__Magh_Purnima_2015.html|title= दान-पुण्य की माघ पूर्णिमा|accessmonthday= 30 जनवरी|accessyear= 2015|last= |first= |authorlink= |format= |publisher=हिन्दुमार्ग|language= हिन्दी}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[चित्र:Magh-Mela.JPG|thumb|250px|[[माघ मेला|माघ मेले]] का एक दृश्य]]&lt;br /&gt;
==मेलों का आयोजन==&lt;br /&gt;
प्रतिवर्ष [[माघ|माघ माह]] के समय [[प्रयाग]] ([[इलाहाबाद]]) में मेला लगता है, जो '[[कल्पवास]]' कहलाता है। प्रयाग में इस अवधि में कल्पवास बिताने की परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसका समापन माघी पूर्णिमा के स्नान के साथ होता है। इस दौरान देश के सभी भागों से आए अनेक श्रद्धालु यहां संगम क्षेत्र में स्नान कर [[धर्म]], कर्म के कार्य करते हैं। यह कल्पवास पूरे माघ माह तक चलता है, जो माघ माह की पूर्णिमा को संपन्न होता है। माघ पूर्णिमा के दिन श्रद्धालु [[स्नान]], दान, [[पूजा]]-पाठ, [[यज्ञ]] आदि करते हैं। माघ पूर्णिमा के दिन स्नान करने वाले पर भगवान विष्णु कि असीम कृपा रहती है। सुख-सौभाग्य, धन-संतान कि प्राप्ति होती है। माघ स्नान पुण्यशाली होता है।&lt;br /&gt;
==माघ पूर्णिमा-2015==&lt;br /&gt;
[[वर्ष]] 2015 में [[3 फ़रवरी]] के दिन पड़ने वाली 'माघ पूर्णिमा' को दुर्लभ संयोग बन रहा है। छह साल बाद फिर से माघ पूर्णिमा पर [[पुष्य नक्षत्र]] और रवि योग का त्रिवेणी संयोग बना है। इस दिन लाखों लोग [[तीर्थ|तीर्थ स्थलों]] पर पवित्र नदियों में डुबकियाँ लगाएंगे। 'ललिता' और '[[रैदास|रविदास जयंती]]' भी होगी और [[होली]] के एक [[माह]] पहले ही होली का डांडा गली, चौराहों पर गाड़ा जाएगा। ज्योतिषियों के अनुसार 3 फ़रवरी, [[मंगलवार]] को माघ पूर्णिमा दिवस पर्यंत रहेगी। पुष्य नक्षत्र सुबह 7 से रात 8 बजे तक 13 घंटे रहेगा। मंगलकारी रवि योग भी सूर्योदय से दोपहर 12.37 तक होगा। इस दिन '[[माघ स्नान]]' का समापन होता है। मान्यता है कि इस दिन [[देवता]] भी [[स्नान]] के लिए धरती पर आते हैं। माघ पू्‌र्णिमा, पुष्य नक्षत्र और रवि योग का त्रिवेणी संयोग 6 साल बाद बन रहा है। इससे पहले यह संयोग [[2009]] में बना था। माघ पूर्णिमा के दिन पुष्य नक्षत्र का आना मंगलकारी योग है। पुष्य नक्षत्र में [[चंद्रमा]] [[कर्क राशि]] में स्थित होता है। इस दिन किए गए कार्य में सफलता प्राप्त होती है।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url= http://www.palpalindia.com/2015/01/29/indore-mp-magh-purnima-special-occasion-astrologically-news-hindi-84324.html|title= तीन फ़रवरी माघ पूर्णिमा पर बन रहा दुर्लभ संयोग|accessmonthday= 30 जनवरी|accessyear= 2015|last= |first= |authorlink= |format= |publisher=पल-पल इण्डिया|language= हिन्दी}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक= प्रारम्भिक1|माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{पर्व और त्योहार}}{{व्रत और उत्सव}}&lt;br /&gt;
[[Category:व्रत और उत्सव]][[Category:संस्कृति कोश]] [[Category:पर्व और त्योहार]][[Category:हिन्दू धर्म कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
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		<title>चित्र:माघ पूर्णिमा.jpeg</title>
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		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
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		<title>बी. आर. चोपड़ा</title>
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		<updated>2026-05-09T06:16:47Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;आशा चौधरी: /* फ़िल्म निर्माण */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा कलाकार&lt;br /&gt;
|चित्र=B.R.-Chopra.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=बी. आर. चोपड़ा&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=बल्देव राज चोपड़ा&lt;br /&gt;
|प्रसिद्ध नाम=&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=&lt;br /&gt;
|जन्म=[[22 अप्रैल]], [[1914]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[लुधियाना]], [[पंजाब]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु=[[5 नवम्बर]], [[2008]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[मुंबई]], [[महाराष्ट्र]]&lt;br /&gt;
|अभिभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|कर्म भूमि=[[मुंबई]]&lt;br /&gt;
|कर्म-क्षेत्र=फ़िल्म निर्माता-निर्देशक&lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ=&lt;br /&gt;
|मुख्य फ़िल्में='[[नया दौर]]' ([[1957]]), साधना ([[1958]]), 'धूल का फूल' ([[1959]]), 'क़ानून' ([[1960]]), 'गुमराह' ([[1963]]), 'हमराज' ([[1967]]), 'इंसाफ का तराजू' ([[1980]]), 'निकाह' ([[1928]])&lt;br /&gt;
|विषय= &lt;br /&gt;
|शिक्षा=[[अंग्रेज़ी साहित्य]] में स्नातकोत्तर&lt;br /&gt;
|विद्यालय=गवर्नमेंट कॉलेज, [[लाहौर]]&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=सुप्रसिद्ध पार्श्वगायिका [[आशा भोंसले]] को भी कामयाबी के शिखर पर ले जाने में बी. आर. चोपड़ा की फ़िल्मों का अहम योगदान था।&lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=अपने कैरियर की शुरूआत बतौर फ़िल्म पत्रकार के रूप में की थी। फ़िल्मी पत्रिका 'सिने हेराल्ड' में आप फ़िल्मों की समीक्षा लिखा करते थे।&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
'''बल्देव राज चोपड़ा''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Baldev Raj Chopra'', जन्म- [[22 अप्रैल]], [[1914]], [[लुधियाना]], [[पंजाब]]; मृत्यु- [[5 नवम्बर]], [[2008]], [[मुंबई]], [[महाराष्ट्र]]) भारतीय सिनेमा जगत् में 'बी. आर. चोपड़ा' के नाम से प्रसिद्ध हैं। उन्हें एक ऐसे फ़िल्मकार के रूप में याद किया जाता रहेगा, जिन्होंने पारिवारिक, सामाजिक और साफ-सुथरी फ़िल्में बनाकर लगभग पाँच दशक तक सिने प्रेमियों के दिलों में अपनी ख़ास पहचान बनाई। '[[नया दौर]]', 'वक़्त', 'हमराज', 'बाबुल' और 'बागवान' जैसी जीवन में रची-बसी कहानियों को दर्शाती बी. आर. चोपड़ा की फ़िल्में आज भी सिने प्रेमियों के दिल और दिमाग पर अमिट छाप छोड़ती हैं। उन्होंने विधवा पुनर्विवाह और वेश्यावृत्ति जैसी सामाजिक समस्या को अपनी फ़िल्मों का विषय बनाया। उनकी ज़्यादातर फ़िल्में किसी न किसी सामाजिक मुद्दे पर आधारित रहती थीं। फ़िल्म जगत् में दिए गए उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें फ़िल्मों के सबसे बड़े सम्मान '[[दादा साहब फाल्के पुरस्कार]]' देकर सम्मानित किया।&lt;br /&gt;
==जन्म तथा शिक्षा==&lt;br /&gt;
बी. आर. चोपड़ा का जन्म 22 अप्रैल, 1914 को तत्कालीन पंजाब राज्य के लुधियाना शहर में हुआ था। उन्होंने [[अंग्रेज़ी साहित्य]] में अपनी स्नातकोत्तर की शिक्षा [[लाहौर]] के मशहूर 'गवर्नमेंट कॉलेज' में पूरी की थी। इस कॉलेज ने फ़िल्म और [[साहित्य]] जगत् को '[[बलराज साहनी]]', '[[देवानंद]]', 'चेतन आनंद' और '[[खुशवंत सिंह]]' जैसी शख्सियतें दी हैं। बी. आर. चोपड़ा बचपन के दिनों से ही फ़िल्म में काम कर शोहरत की बुलंदियों पर पहुँचना चाहते थे। देश के विभाजन के पश्चात् उनका परिवार [[दिल्ली]] आ गया, लेकिन कुछ दिन के बाद बी. आर. चोपड़ा का मन वहाँ नहीं लगा और वह अपने सपनों को साकार करने के लिए दिल्ली से [[मुम्बई]] आ गए।&lt;br /&gt;
====व्यवसाय की शुरुआत====&lt;br /&gt;
बी. आर. चोपड़ा ने अपने कैरियर की शुरूआत फ़िल्म पत्रकार के रूप में की थी। फ़िल्मी पत्रिका 'सिने हेराल्ड' में वह फ़िल्मों की समीक्षा लिखा करते थे। कुछ ही समय में बी. आर. चोपड़ा ने इस पत्रिका का सारा भार स्वयं उठा लिया और [[1947]] तक इसे निरंतर चलाया। इसी [[वर्ष]] उन्होंने आई. एस. जौहर के साथ मिलकर फ़िल्म 'चांदनी चौक' का निर्माण शुरू किया, लेकिन लाहौर में दंगे भड़कने के कारण उन्हें इस फ़िल्म को बीच में ही बंद करना पड़ा।&amp;lt;ref name=&amp;quot;mcc&amp;quot;&amp;gt;{{cite web |url=http://www.livehindustan.com/news/entertainment/entertainmentnews/article1-story-28-28-145014.html |title=युगपुरुष बी.आर. चोपड़ा|accessmonthday=29 सितम्बर|accessyear=2012|last= |first= |authorlink= |format= |publisher= |language=[[हिन्दी]]}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
==फ़िल्म निर्माण==&lt;br /&gt;
[[चित्र:बी. आर. चोपड़ा stamp.jpeg|thumb|250px|बी. आर. चोपड़ा|left]]&lt;br /&gt;
वर्ष [[1949]] में फ़िल्म 'करवट' से उन्होंने फ़िल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा, लेकिन दुर्भाग्य से यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह असफल हुई। [[1951]] में [[अशोक कुमार]] अभिनीत फ़िल्म 'अफ़साना' को बी. आर. चोपड़ा ने निर्देशित किया। फ़िल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अपने पच्चीस सप्ताह पूरे किए और '[[रजत जयंती]]' (सिल्वर जुबली) मनाई। इस फ़िल्म की सफलता के बाद बी. आर. चोपड़ा फ़िल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में सफल हो गए। वर्ष [[1955]] में उन्होंने 'बी. आर. फ़िल्मस बैनर' का निर्माण किया। इस बैनर तले उन्होंने सबसे पहले फ़िल्म 'नया दौर' का निर्माण किया। फ़िल्म नया दौर के माध्यम से बी. आर. चोपड़ा ने आधुनिक युग और ग्रामीण संस्कृति के बीच टकराव को रूपहले पर्दे पर पेश किया, जो दर्शकों को काफ़ी पसंद आया। फ़िल्म 'नया दौर' ने सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए और बी. आर. चोपड़ा को आकाश की बुलन्दियों पर पहुँचा दिया।&lt;br /&gt;
====सामाजिक फ़िल्में====&lt;br /&gt;
अपनी इस सफलता के बाद बी. आर. चोपड़ा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक से बढ़कर एक फ़िल्मों का निर्माण कर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। इन फ़िल्मों में 'साधना' ([[1958]]), 'क़ानून' ([[1960]]), 'गुमराह' ([[1963]]) और 'हमराज़' ([[1967]]) जैसी सुपरहिट फ़िल्में शामिल हैं। बी. आर. चोपड़ा के बैनर तले निर्मित फ़िल्में समाज को संदेश देने वाली होती थीं। साठ के दशक के दौर में निर्मित फ़िल्में [[संगीत]] प्रधान हुआ करती थीं। लेकिन बी. आर. चोपड़ा अपने दर्शकों को हर बार कुछ नया देना चाहते थे। इसी बात का ध्यान रखते [[1960]] में उन्होंने 'क़ानून' जैसी प्रयोगात्मक फ़िल्म का निर्माण किया था। यह फ़िल्म इंडस्ट्री में किया गया एक नया प्रयोग था। जब फ़िल्म का निर्माण बगैर गानों के भी किया गया।&amp;lt;ref name=&amp;quot;mcc&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==योगदान==&lt;br /&gt;
बी. आर. चोपड़ा ने अपने भाई और जाने माने फ़िल्म निर्माता-निर्देशक [[यश चोपड़ा]] को भी शोहरत की बुलंदियों पर पहुँचाने में अहम योगदान दिया था। [[1959]] में प्रदर्शित फ़िल्म 'धूल का फूल', 'वक़्त' और 'इत्तफ़ाक' जैसी फ़िल्मों की सफलता के बाद ही यश चोपड़ा फ़िल्म इंडस्ट्री में एक निर्देशक के रूप में स्थापित हुए थे। सुप्रसिद्ध पार्श्वगायिका [[आशा भोंसले]] को भी कामयाबी के शिखर पर ले जाने में निर्माता और निर्देशक बी. आर. चोपड़ा की फ़िल्मों का अहम योगदान था। पचास के दशक में जब आशा भोंसले को केवल बी और सी ग्रेड की फ़िल्मों मे ही गाने का मौका मिला करता था, उस समय बी. आर. चोपड़ा ने ही आशा भोंसले की प्रतिभा को पहचाना और अपनी फ़िल्म 'नया दौर' में गाने का मौका दिया। यह फ़िल्म आशा भोंसले के सिने कैरियर की पहली सुपरहिट फ़िल्म साबित हुई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस फ़िल्म में [[मोहम्मद रफी]] और आशा भोंसले के गाए युगल गीत बहुत लोकप्रिय हुए, जिनमें 'मांग के साथ तुम्हारा', 'उड़े जब जब जुल्फे तेरी' आदि गीत शामिल हैं। फ़िल्म 'नया दौर' की कामयाबी के बाद ही आशा जी को अपनी मंज़िल प्राप्त हुई थी। इसके बाद बी. आर. चोपड़ा ने आशा जी को अपनी और भी कई फ़िल्मों में गाने का मौका दिया। इन फ़िल्मों में 'वक़्त' 'गुमराह', 'हमराज', 'आदमी और इंसान', और 'धुंध' प्रमुख हैं। आशा भोंसले के अलावा [[पार्श्वगायक]] [[महेन्द्र कपूर]] को भी [[हिन्दी]] फ़िल्म इंडस्ट्री में स्थापित करने में बी. आर.चोपड़ा की अहम भूमिका रही है।&amp;lt;ref name=&amp;quot;mcc&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
====महाभारत सीरियल का निर्माण====&lt;br /&gt;
स्वास्थ्य खराब रहने के कारण अस्सी के दशक में बी. आर. चोपड़ा ने फ़िल्मों का निर्माण करना कुछ कम कर दिया। इस दौरान [[1980]] में उन्होंने 'इंसाफ का तराजू' और 'निकाह' [[1982]] का निर्माण किया। वर्ष [[1985]] में बी. आर .चोपड़ा ने दर्शकों की रग को पहचानते हुए छोटे पर्दे की ओर भी रुख़कर लिया। [[दूरदर्शन]] के [[इतिहास]] में अब तक सबसे ज़्यादा कामयाब रहे सीरियल 'महाभारत' के निर्माण का श्रेय भी बी. आर. चोपड़ा को ही जाता है। 96 प्रतिशत दर्शकों तक पहुँचने के साथ ही इस सीरियल ने अपना नाम 'गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड' में भी दर्ज कराया। बी. आर. चोपड़ा के लिए यह एक महान् उपलब्धि थी।&lt;br /&gt;
==पुरस्कार व सम्मान==&lt;br /&gt;
बी. आर. चोपड़ा को प्राप्त हुए सम्मान पर यदि गौर किया जाए तो उन्हें [[1998]] में [[हिन्दी]] सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान '[[दादा साहब फाल्के पुरस्कार]]' से सम्मानित किया गया। इसके अलावा [[1960]] में प्रदर्शित फ़िल्म 'क़ानून' के लिए वह सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के रूप में 'फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार' से सम्मानित किए गए थे। बहुमुखी प्रतिभा के धनी बी. आर. चोपड़ा ने फ़िल्म निर्माण के अलावा 'बागवान' और 'बाबुल' की कहानी भी लिखी।&amp;lt;ref name=&amp;quot;mcc&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
====निधन====&lt;br /&gt;
अपनी निर्मित फ़िल्मों से दर्शको के बीच विशिष्ट पहचान बनाने वाले फ़िल्मकार बी. आर. चोपड़ा ने [[5 नवम्बर]], [[2008]] को इस दुनिया को अलविदा कर दिया।&lt;br /&gt;
==फ़िल्म 'नया दौर'==&lt;br /&gt;
{{main|नया दौर}}&lt;br /&gt;
[[चित्र:Naya-Daur.jpg|thumb|250px|नया दौर]]&lt;br /&gt;
फ़िल्म 'नया दौर' के निर्माण की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। इस फ़िल्म की कहानी अख़्तर मिर्ज़ा जी ने लिखी थी। इस बेहद हट के कहानी को [[महबूब ख़ान]], एस. मुख़र्जी और एस. एस. वासन जैसे निर्देशकों ने सिरे से नकार दिया था। इस विषय में उनकी राय थी कि यह एक बढ़िया डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म तो बन सकती है, पर एक फ़ीचर फ़िल्म कभी नहीं बन सकती। तब बी. आर. चोपड़ा ने इसी कहानी पर काम करने का फैसला किया। लेकिन जब उन्होंने [[दिलीप कुमार]] के साथ इस फ़िल्म की चर्चा की तो उन्होंने कहानी सुनने से ही इन्कार कर दिया। बी. आर. चोपड़ा की अगली पसंद [[अशोक कुमार]] थे। वे उनके पास पहुँचे। अशोक कुमार का मानना था कि उनका छवि शहरी है और वे इस गाँव के किरदार के लिए नहीं जमेंगें, लेकिन उन्होंने बी. आर. चोपड़ा की ओर से दिलीप कुमार से एक बार फिर बात की। इस बार दिलीप कुमार राजी हो गए। आधुनिकता की दौड़ में पिसने वाले एक आम ग्रामीण की कहानी को फ़िल्म के परदे पर लेकर आना आसान नहीं था। कुछ हफ्तों तक कारदार स्टूडियो में शूट करने के बाद लगभग 100 लोगों की टीम को कूच करना था। आउटडोर लोकेशन के लिए, जो की [[भोपाल]] के आस-पास था, वहीं शूटिंग होनी थी। उन दिनों [[मधुबाला]] और दिलीप कुमार के प्रेम के चर्चे इंडस्ट्री में मशहूर थे, तो फ़िल्म की नायिका मधुबाला के [[पिता]] ने मधुबाला को शूट पर भेजने से इन्कार कर दिया। बी. आर. चोपड़ा ने कोर्ट में मुकदमा लड़ा, अपील में तर्क दिया कि फ़िल्म की कहानी के लिए यह आउट डोर बहुत ज़रूरी है। दिलीप कुमार ने बी. आर. के पक्ष में गवाही दी।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://podcast.hindyugm.com/2008/11/path-breaking-filmmaker-b-r-chopra.html |title=बी. आर. चोपड़ा |accessmonthday=29 सितम्बर|accessyear=2012|last= |first= |authorlink= |format= |publisher= |language=[[हिन्दी]]}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुकदमा तो उन्होंने जीत लिया, पर [[मधुबाला]] को क़ानूनी दांव पेचों से बचने के लिए केस वापस लेना पड़ा, और इस तरह फ़िल्म में मधुबाला के स्थान पर [[वैजयंती माला]] का आगमन हुआ। महबूब ख़ान की '[[मदर इंडिया]]' के लिए लिबर्टी सिनेमा 10 हफ्तों के लिए बुक था। पर फ़िल्म तैयार न हो पाने के कारण उन्होंने बी. आर. चोपड़ा की 'नया दौर' को अपने बुक किए हुए 10 हफ्ते दे दिए, साथ में हिदायत भी दी कि चाहो तो 5 हफ्तों के लिए ले लो, तुम्हारी इस 'ताँगे वाले की कहानी' को पता नहीं दर्शक मिलें भी या नहीं। बाद में यही [[महबूब ख़ान]] थे, जिन्होंने जब फ़िल्म 'नया दौर' ने अपनी [[रजत जयंती]] मनाई तो बी. आर. चोपड़ा को उनकी फ़िल्म के प्रीमियर के लिए मुख्य अतिथि होने का आग्रह किया। बी. आर. चोपड़ा उन निर्देशकों में थे, जिन्हें अपने चुनाव और अपने फैसलों पर हमेशा पूरा विश्वास था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1|माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{फ़िल्म निर्माता और निर्देशक}}{{दादा साहब फाल्के पुरस्कार}}&lt;br /&gt;
[[Category:फ़िल्म निर्देशक]][[Category:सिनेमा]][[Category:फ़िल्म निर्माता]][[Category:सिनेमा कोश]][[Category:कला कोश]][[Category:दादा साहब फाल्के पुरस्कार]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
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		<title>कमाल अमरोही</title>
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		<updated>2026-05-09T06:10:16Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;आशा चौधरी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा कलाकार&lt;br /&gt;
|चित्र=Kamal-amrohi.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=कमाल अमरोही &lt;br /&gt;
|पूरा नाम=सैयद आमिर हैदर कमाल अमरोही &lt;br /&gt;
|प्रसिद्ध नाम=कमाल अमरोही &lt;br /&gt;
|अन्य नाम=&lt;br /&gt;
|जन्म= [[17 जनवरी]], [[1918]] &lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[अमरोहा]], [[उत्तर प्रदेश]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु=[[11 फरवरी]], [[1993]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=&lt;br /&gt;
|अभिभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=तीन (बानो, महमूदी, [[मीना कुमारी]])&lt;br /&gt;
|संतान=शानदार, ताज़दार और रुख़सार&lt;br /&gt;
|कर्म भूमि=[[भारत]]&lt;br /&gt;
|कर्म-क्षेत्र=गीतकार, पटकथा और संवाद लेखक तथा निर्माता एवं निर्देशक&lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ=&lt;br /&gt;
|मुख्य फ़िल्में='महल', 'पाकीज़ा' और 'रज़िया सुल्तान' आदि।&lt;br /&gt;
|विषय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ संवाद पुरस्कार: [[मुग़ल-ए-आजम]]&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=कमाल अमरोही ने [[1953]] में 'कमाल पिक्चर्स' और [[1958]] में [[कमालिस्तान स्टूडियो]] की स्थापना की।&lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
'''कमाल अमरोही''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Kamal Amrohi'', जन्म: [[17 जनवरी]], [[1918]] - मृत्यु: [[11 फ़रवरी]], [[1993]]) महल, पाकीज़ा और रज़िया सुल्तान जैसी भव्य कलात्मक फ़िल्मों को परदे पर काव्य की रचना करने वाले निर्माता-निर्देशक थे। कमाल अमरोही ने बेहतरीन गीतकार, पटकथा और संवाद लेखक तथा निर्माता एवं निर्देशक के रूप में भारतीय सिनेमा पर अपनी अमिट छाप छोड़ी और उसे एक दिशा देने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। पाकीज़ा उनकी ज़िंदगी का ड्रीम प्रोजेक्ट थी। अपने फ़िल्मी जीवन के आखिरी दौर में वह 'अंतिम मुग़ल' नाम से फ़िल्म बनाना चाहते थे, लेकिन उनका यह ख्वाब अधूरा ही रह गया।&lt;br /&gt;
==परिचय==&lt;br /&gt;
[[चित्र:कमाल अमरोही .jpeg|thumb|250px|कमाल अमरोही|left]]&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही का मूल नाम 'सैयद आमिर हैदर' था। [[17 जनवरी]] [[1918]] को [[उत्तर प्रदेश]] के [[अमरोहा]] के ज़मींदार [[परिवार]] में जन्मे कमाल अमरोही के [[मुम्बई]] तक पहुँचने और फिर सफलता का इतिहास रचने की कहानी किसी फ़िल्मी कहानी की भाँति है। बचपन में अपनी शरारतों से वह पूरे गाँव को परेशान करते थे। एक बार अपनी अम्मी के डाँटने पर उन्होंने वादा किया कि वह एक दिन मशहूर होंगे और उनके पल्लू को [[चाँदी]] के सिक्कों से भर देंगे। उनकी शरारतों से तंग होकर एक दिन उनके बड़े भाई ने उन्हें गुस्से में थप्पड़ रसीद कर दिया तो कमाल अमरोही नाराज़गी में घर से भागकर [[लाहौर]] पहुँच गए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही के लिए लाहौर उनके जीवन की दिशा बदलने वाला साबित हुआ। वहाँ उन्होंने 'प्राच्य भाषाओं' में मास्टर की डिग्री हासिल की और फिर एक [[उर्दू]] [[समाचार पत्र]] में मात्र 18 [[वर्ष]] की आयु में ही नियमित रूप से स्तम्भ लिखने लगे। उनकी प्रतिभा का सम्मान करते हुए अख़बार के सम्पादक ने उनका वेतन बढाकर 300 रुपए मासिक कर दिया, जो उस समय क़ाफी बड़ी रकम थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==कलकत्ता में==&lt;br /&gt;
अख़बार में कुछ समय तक काम करने के बाद वह [[कलकत्ता]] चले गए और फिर वहाँ से [[मुम्बई]] आ गए। लाहौर में उनकी मुलाक़ात प्रसिद्ध [[कुन्दनलाल सहगल|गायक, अभिनेता कुन्दनलाल सहगल]] से हुई थी, जो उनकी प्रतिभा को पहचानकर उन्हें फ़िल्मों में काम करने के लिए 'मिनर्वा मूवीटोन' के मालिक निर्माता-निर्देशक [[सोहराब मोदी]] के पास ले गये। इसी समय उनकी एक लघु कथा ‘सपनों का महल’ से निर्माता-निर्देशक और कहानीकार '[[ख़्वाजा अहमद अब्बास]]' प्रभावित हुए।&lt;br /&gt;
==वैवाहिक जीवन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Meena Kumari Kamal Amrohi 3.jpg|thumb|250px|कमाल अमरोही-मीना कुमारी|right]]&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही ने तीन शादियां कीं। उनकी पहली बीवी का नाम 'बानो' था, जो [[नर्गिस]] की माँ जद्दनबाई की नौकरानी थी। बानो की अस्थमा से मौत होने के बाद उन्होंने 'महमूदी' से निकाह किया। कमाल अमरोही ने तीसरी [[शादी]] [[अभिनेत्री]] [[मीना कुमारी]] से की जो उनसे उम्र में लगभग पंद्रह [[साल]] छोटी थीं। दोनों की मुलाकात एक फ़िल्म के सेट पर हुई थी और उनके बीच प्यार हो गया। उस समय कमाल अमरोही 34 साल के थे जबकि मीना कुमारी की उम्र 19 साल थी। [[1952]] में दोनों ने विवाह कर लिया लेकिन यह संबंध ज्यादा दिन तक नहीं चल पाया और उनका अलगाव हो गया। मीना कुमारी के प्रति कमाल अमरोही का प्रेम शायद आखिर तक बरकरार रहा तभी तो उन्हें मौत के बाद क़ब्रिस्तान में मीना कुमारी की क़ब्र के बगल में दफनाया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सवांद और गीतकार==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Kamal Amrohi 3.jpeg|thumb|250px|कमाल अमरोही, मीना कुमारी|right]]&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही को पता चला कि [[सोहराब मोदी]] को एक कहानी की तलाश है। उनकी कहानी पर आधारित फ़िल्म ‘पुकार’ (1939) सुपर हिट रही। '[[नसीम बानो]]' और 'चंद्रमोहन' अभिनीत इस फ़िल्म के लिए उन्होंने चार गीत लिखे- &lt;br /&gt;
#धोया महोबे घाट हे हो धोबिया रे.., &lt;br /&gt;
#दिल में तू आँखों में तू मेनका.., &lt;br /&gt;
#गीत सुनो वाह गीत सैयां.., &lt;br /&gt;
#काहे को मोहे छेड़े रे बेईमनवा.. &lt;br /&gt;
इसके बाद तो फ़िल्मों के लिए कहानी, पटकथा और संवाद लिखने का उनका सिलसिला चल पड़ा और उन्होंने जेलर ([[1938]]), मैं हारी ([[1940]]), भरोसा ([[1940]]), मज़ाक ([[1943]]), फूल ([[1945]]), शाहजहां ([[1946]]), महल ([[1949]]), दायरा ([[1953]]), दिल अपना और प्रीत पराई ([[1960]]), [[मुग़ले आजम]] ([[1960]]), पाकीज़ा ([[1971]]), शंकर हुसैन ([[1977]]) और रज़िया सुल्तान ([[1983]]), भरोसा ([[1940]]) जैसी फ़िल्मों के लिए कहानी, पटकथा और संवाद लिखने का काम किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही ने बेहद चुनिंदा फ़िल्मों के लिए काम किया लेकिन जो भी काम किया पूरी तबीयत और जुनून के साथ किया। उनके काम पर उनके व्यक्तित्व की छाप रहती थी। यही वजह है कि फ़िल्में बनाने की उनकी रफ़्तार काफ़ी धीमी रहती थी और उन्हें इसके लिए आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ता था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==महल (फ़िल्म)==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Mahal.jpeg|thumb|250px|महल (फ़िल्म)|right]]&lt;br /&gt;
निर्माता [[अशोक कुमार]] की फ़िल्म 'महल' कमाल अमरोही के कैरियर का महत्त्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। इस फ़िल्म के निर्देशन का जिम्मा उन्हें सौंपा गया। रहस्य और रोमांस के ताने-बाने से बुनी मधुर गीत-संगीत और ध्वनि के कल्पनामय इस्तेमाल से बनी यह फ़िल्म सुपरहिट रही और इसी के साथ बॉलीवुड में हॉरर और सस्पेंस फ़िल्मों के निर्माण का सिलसिला चल पड़ा। फ़िल्म की जबरदस्त कामयाबी ने नायिका [[मधुबाला]] और गायिका [[लता मंगेशकर]] को फ़िल्म इंडस्ट्री में स्थापित कर दिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==कमालिस्तान स्टूडियो की स्थापना==&lt;br /&gt;
महल फ़िल्म की कामयाबी के बाद कमाल अमरोही ने 1953 में 'कमाल पिक्चर्स' और 1958 में [[कमालिस्तान स्टूडियो]] की स्थापना की। कमाल पिक्चर्स के बैनर तले उन्होंने अभिनेत्री पत्नी मीना कुमारी को लेकर 'दायरा' फ़िल्म का निर्माण किया लेकिन [[भारत]] की कला फ़िल्मों में मानी जाने वाली यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं चल पाई। इसी दौरान निर्माता-निर्देशक [[के.आसिफ]] अपनी महत्वाकांक्षी फ़िल्म [[मुग़ल-ए-आजम]] के निर्माण में व्यस्त थे। इस फ़िल्म के लिए वजाहत मिर्जा संवाद लिख रहे थे लेकिन आसिफ को लगा कि एक ऐसे संवाद लेखक की ज़रूरत है जिसके लिखे डायलॉग दर्शकों के दिमाग से बरसों बरस नहीं निकल पाएं और इसके लिए उन्हें कमाल अमरोही से ज्यादा उपयुक्त व्यक्ति कोई नहीं लगा। उन्होंने उन्हें अपने चार संवाद लेखकों में शामिल कर लिया। उनके [[उर्दू भाषा]] में लिखे डायलॉग इतने मशहूर हुए कि उस दौरान प्रेमी और प्रेमिकाएं प्रेमपत्रों में मुग़ले आजम के संवादों के माध्यम से अपनी मोहब्बत का इजहार करने लगे थे। इस फ़िल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखक का फ़िल्म फेयर पुरस्कार दिया गया।&lt;br /&gt;
==पाकीज़ा (फ़िल्म)==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Pakeeza.jpeg|thumb|250px|पाकीज़ा|left]]&lt;br /&gt;
पाकीज़ा कमाल अमरोही का ड्रीम प्रोजेक्ट थी जिस पर उन्होंने [[1958]] में काम करना शुरू किया था। उस समय यह ब्लैक एंड व्हाइट में बनने वाली थी। कुछ समय बाद जब [[भारत]] में सिनेमास्कोप का प्रचलन शुरू हो गया तो उन्होंने [[1961]] में इसे सिनेमास्कोप रूप में बनाना शुरू किया लेकिन कमाल अमरोही का अपनी तीसरी पत्नी मीना कुमारी से अलगाव हो जाने के कारण फ़िल्म का निर्माण 1961-69 तक बंद रहा। बाद में किसी तरह उन्होंने मीना कुमारी को फ़िल्म में काम करने के लिए राज़ी कर लिया और आखिरकार 1971 में जाकर यह फ़िल्म पूरी हुई तथा फरवरी 1972 को रिलीज हुई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बेहतरीन संवाद, गीत-संगीत, दृश्यांकन और अभिनय से सजी इस फ़िल्म ने रिकार्डतोड़ कामयाबी हासिल की और आज यह फ़िल्म इतिहास की क्लासिक फ़िल्मों में गिनी जाती है। उन्होंने इस फ़िल्म के लिए एक गीत मौसम है आशिकाना.. भी लिखा था। जो बेहद मकबूल हुआ था। इस फ़िल्म के बाद कमाल अमरोही का फ़िल्मों से कुछ समय तक नाता टूटा रहा। [[1983]] में उन्होंने फिर फ़िल्म इंडस्ट्री का रुख़ किया और रज़िया सुल्तान फ़िल्म से अपनी निर्देशन क्षमता का लोहा मनवाया।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Kamal Amrohi stamp.jpeg|thumb|250px|कमाल अमरोही|right]]&lt;br /&gt;
==निधन==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपने कमाल से दर्शकों को बांध देने वाली यह अजीम शख़्सियत [[11 फरवरी]] [[1993]] को इस दुनिया को अलविदा कह गयी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==फ़िल्में==&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;bharattable-purple&amp;quot; width=&amp;quot;70%&amp;quot; align=&amp;quot;left&amp;quot;&lt;br /&gt;
|+ कमाल अमरोही की फ़िल्में &amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://www.imdb.com/name/nm0025399/|title=Kamal Amrohi|accessmonthday=21 मार्च|accessyear=2012 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher= |language=अंग्रेज़ी}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
! क्रमांक &lt;br /&gt;
! सन &lt;br /&gt;
! फ़िल्म&lt;br /&gt;
! कार्य&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 1. &lt;br /&gt;
|1938  		 &lt;br /&gt;
| जेलर   &lt;br /&gt;
|कहानी &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 2. &lt;br /&gt;
| 1939  		 &lt;br /&gt;
| पुकार&lt;br /&gt;
| लेखन &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 3. &lt;br /&gt;
| 1940	 	              &lt;br /&gt;
| मैं हारी &lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 4. &lt;br /&gt;
|1940	             &lt;br /&gt;
|भरोसा&lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 5. &lt;br /&gt;
| 1943 &lt;br /&gt;
| मज़ाक	             &lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 6.&lt;br /&gt;
|1945             &lt;br /&gt;
| फूल&lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 7. &lt;br /&gt;
| 1946 	 	              &lt;br /&gt;
| शाहजहाँ&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 8.&lt;br /&gt;
|1949              &lt;br /&gt;
| महल&lt;br /&gt;
| निर्देशन&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 9.&lt;br /&gt;
|1953            &lt;br /&gt;
| दायरा&lt;br /&gt;
| लेखन, निर्देशन&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 10.&lt;br /&gt;
|1960           &lt;br /&gt;
| [[मुग़ले आजम]]&lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 11.&lt;br /&gt;
|1972       &lt;br /&gt;
| पाकीज़ा&lt;br /&gt;
| लेखन, निर्देशन&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 12.&lt;br /&gt;
|1977             &lt;br /&gt;
| शंकर हुसैन&lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 13.&lt;br /&gt;
|1979             &lt;br /&gt;
| मजनूं&lt;br /&gt;
| निर्देशन&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 14.&lt;br /&gt;
|1983             &lt;br /&gt;
| रज़िया सुल्तान&lt;br /&gt;
| लेखन, निर्देशन&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार= |प्रारम्भिक=प्रारम्भिक3 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.imdb.com/name/nm0025399/  कमाल अमरोही]&lt;br /&gt;
*[http://hindi.webdunia.com/%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%87%E0%A4%95-%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AC/%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%87%E0%A4%95-%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AC-%E0%A4%B8%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%96%E0%A4%BE-%E0%A4%A5%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A5%8B-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%A8-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%86-1090211048_1.htm  कमाल अमरोही : इक ख्वाब-सा देखा था जो पूरा न हुआ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/cinemaaza/cinema/memories/201_201_8201.html पाकीज़ा थी कमाल अमरोही की ड्रीम प्रोजेक्ट]&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{फ़िल्म निर्माता और निर्देशक}}&lt;br /&gt;
[[Category:सिनेमा]][[Category:कला कोश]][[Category:फ़िल्म निर्माता]][[Category:फ़िल्म निर्देशक]][[Category:सिनेमा कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
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		<title>कमाल अमरोही</title>
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		<updated>2026-05-09T06:07:29Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;आशा चौधरी: /* निधन */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा कलाकार&lt;br /&gt;
|चित्र=Kamal-amrohi.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=कमाल अमरोही &lt;br /&gt;
|पूरा नाम=सैयद आमिर हैदर कमाल अमरोही &lt;br /&gt;
|प्रसिद्ध नाम=कमाल अमरोही &lt;br /&gt;
|अन्य नाम=&lt;br /&gt;
|जन्म= [[17 जनवरी]], [[1918]] &lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[अमरोहा]], [[उत्तर प्रदेश]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु=[[11 फरवरी]], [[1993]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=&lt;br /&gt;
|अभिभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=तीन (बानो, महमूदी, [[मीना कुमारी]])&lt;br /&gt;
|संतान=शानदार, ताज़दार और रुख़सार&lt;br /&gt;
|कर्म भूमि=[[भारत]]&lt;br /&gt;
|कर्म-क्षेत्र=गीतकार, पटकथा और संवाद लेखक तथा निर्माता एवं निर्देशक&lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ=&lt;br /&gt;
|मुख्य फ़िल्में='महल', 'पाकीज़ा' और 'रज़िया सुल्तान' आदि।&lt;br /&gt;
|विषय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ संवाद पुरस्कार: [[मुग़ल-ए-आजम]]&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=कमाल अमरोही ने [[1953]] में 'कमाल पिक्चर्स' और [[1958]] में [[कमालिस्तान स्टूडियो]] की स्थापना की।&lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
'''कमाल अमरोही''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Kamal Amrohi'', जन्म: [[17 जनवरी]], [[1918]] - मृत्यु: [[11 फ़रवरी]], [[1993]]) महल, पाकीज़ा और रज़िया सुल्तान जैसी भव्य कलात्मक फ़िल्मों को परदे पर काव्य की रचना करने वाले निर्माता-निर्देशक थे। कमाल अमरोही ने बेहतरीन गीतकार, पटकथा और संवाद लेखक तथा निर्माता एवं निर्देशक के रूप में भारतीय सिनेमा पर अपनी अमिट छाप छोड़ी और उसे एक दिशा देने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। पाकीज़ा उनकी ज़िंदगी का ड्रीम प्रोजेक्ट थी। अपने फ़िल्मी जीवन के आखिरी दौर में वह 'अंतिम मुग़ल' नाम से फ़िल्म बनाना चाहते थे, लेकिन उनका यह ख्वाब अधूरा ही रह गया।&lt;br /&gt;
==परिचय==&lt;br /&gt;
[[चित्र:कमाल अमरोही .jpeg|thumb|250px|कमाल अमरोही|left]]&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही का मूल नाम 'सैयद आमिर हैदर' था। [[17 जनवरी]] [[1918]] को [[उत्तर प्रदेश]] के [[अमरोहा]] के ज़मींदार [[परिवार]] में जन्मे कमाल अमरोही के [[मुम्बई]] तक पहुँचने और फिर सफलता का इतिहास रचने की कहानी किसी फ़िल्मी कहानी की भाँति है। बचपन में अपनी शरारतों से वह पूरे गाँव को परेशान करते थे। एक बार अपनी अम्मी के डाँटने पर उन्होंने वादा किया कि वह एक दिन मशहूर होंगे और उनके पल्लू को [[चाँदी]] के सिक्कों से भर देंगे। उनकी शरारतों से तंग होकर एक दिन उनके बड़े भाई ने उन्हें गुस्से में थप्पड़ रसीद कर दिया तो कमाल अमरोही नाराज़गी में घर से भागकर [[लाहौर]] पहुँच गए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही के लिए लाहौर उनके जीवन की दिशा बदलने वाला साबित हुआ। वहाँ उन्होंने 'प्राच्य भाषाओं' में मास्टर की डिग्री हासिल की और फिर एक [[उर्दू]] [[समाचार पत्र]] में मात्र 18 [[वर्ष]] की आयु में ही नियमित रूप से स्तम्भ लिखने लगे। उनकी प्रतिभा का सम्मान करते हुए अख़बार के सम्पादक ने उनका वेतन बढाकर 300 रुपए मासिक कर दिया, जो उस समय क़ाफी बड़ी रकम थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==कलकत्ता में==&lt;br /&gt;
अख़बार में कुछ समय तक काम करने के बाद वह [[कलकत्ता]] चले गए और फिर वहाँ से [[मुम्बई]] आ गए। लाहौर में उनकी मुलाक़ात प्रसिद्ध [[कुन्दनलाल सहगल|गायक, अभिनेता कुन्दनलाल सहगल]] से हुई थी, जो उनकी प्रतिभा को पहचानकर उन्हें फ़िल्मों में काम करने के लिए 'मिनर्वा मूवीटोन' के मालिक निर्माता-निर्देशक [[सोहराब मोदी]] के पास ले गये। इसी समय उनकी एक लघु कथा ‘सपनों का महल’ से निर्माता-निर्देशक और कहानीकार '[[ख़्वाजा अहमद अब्बास]]' प्रभावित हुए।&lt;br /&gt;
==वैवाहिक जीवन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Meena Kumari Kamal Amrohi 3.jpg|thumb|250px|कमाल अमरोही-मीना कुमारी|right]]&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही ने तीन शादियां कीं। उनकी पहली बीवी का नाम 'बानो' था, जो [[नर्गिस]] की माँ जद्दनबाई की नौकरानी थी। बानो की अस्थमा से मौत होने के बाद उन्होंने 'महमूदी' से निकाह किया। कमाल अमरोही ने तीसरी [[शादी]] [[अभिनेत्री]] [[मीना कुमारी]] से की जो उनसे उम्र में लगभग पंद्रह [[साल]] छोटी थीं। दोनों की मुलाकात एक फ़िल्म के सेट पर हुई थी और उनके बीच प्यार हो गया। उस समय कमाल अमरोही 34 साल के थे जबकि मीना कुमारी की उम्र 19 साल थी। [[1952]] में दोनों ने विवाह कर लिया लेकिन यह संबंध ज्यादा दिन तक नहीं चल पाया और उनका अलगाव हो गया। मीना कुमारी के प्रति कमाल अमरोही का प्रेम शायद आखिर तक बरकरार रहा तभी तो उन्हें मौत के बाद क़ब्रिस्तान में मीना कुमारी की क़ब्र के बगल में दफनाया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सवांद और गीतकार==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Kamal Amrohi 3.jpeg|thumb|250px|कमाल अमरोही, मीना कुमारी|right]]&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही को पता चला कि [[सोहराब मोदी]] को एक कहानी की तलाश है। उनकी कहानी पर आधारित फ़िल्म ‘पुकार’ (1939) सुपर हिट रही। '[[नसीम बानो]]' और 'चंद्रमोहन' अभिनीत इस फ़िल्म के लिए उन्होंने चार गीत लिखे- &lt;br /&gt;
#धोया महोबे घाट हे हो धोबिया रे.., &lt;br /&gt;
#दिल में तू आँखों में तू मेनका.., &lt;br /&gt;
#गीत सुनो वाह गीत सैयां.., &lt;br /&gt;
#काहे को मोहे छेड़े रे बेईमनवा.. &lt;br /&gt;
इसके बाद तो फ़िल्मों के लिए कहानी, पटकथा और संवाद लिखने का उनका सिलसिला चल पड़ा और उन्होंने जेलर ([[1938]]), मैं हारी ([[1940]]), भरोसा ([[1940]]), मज़ाक ([[1943]]), फूल ([[1945]]), शाहजहां ([[1946]]), महल ([[1949]]), दायरा ([[1953]]), दिल अपना और प्रीत पराई ([[1960]]), [[मुग़ले आजम]] ([[1960]]), पाकीज़ा ([[1971]]), शंकर हुसैन ([[1977]]) और रज़िया सुल्तान ([[1983]]), भरोसा ([[1940]]) जैसी फ़िल्मों के लिए कहानी, पटकथा और संवाद लिखने का काम किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही ने बेहद चुनिंदा फ़िल्मों के लिए काम किया लेकिन जो भी काम किया पूरी तबीयत और जुनून के साथ किया। उनके काम पर उनके व्यक्तित्व की छाप रहती थी। यही वजह है कि फ़िल्में बनाने की उनकी रफ़्तार काफ़ी धीमी रहती थी और उन्हें इसके लिए आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ता था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==महल (फ़िल्म)==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Mahal.jpeg|thumb|250px|महल (फ़िल्म)|right]]&lt;br /&gt;
निर्माता [[अशोक कुमार]] की फ़िल्म 'महल' कमाल अमरोही के कैरियर का महत्त्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। इस फ़िल्म के निर्देशन का जिम्मा उन्हें सौंपा गया। रहस्य और रोमांस के ताने-बाने से बुनी मधुर गीत-संगीत और ध्वनि के कल्पनामय इस्तेमाल से बनी यह फ़िल्म सुपरहिट रही और इसी के साथ बॉलीवुड में हॉरर और सस्पेंस फ़िल्मों के निर्माण का सिलसिला चल पड़ा। फ़िल्म की जबरदस्त कामयाबी ने नायिका [[मधुबाला]] और गायिका [[लता मंगेशकर]] को फ़िल्म इंडस्ट्री में स्थापित कर दिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==कमालिस्तान स्टूडियो की स्थापना==&lt;br /&gt;
महल फ़िल्म की कामयाबी के बाद कमाल अमरोही ने 1953 में 'कमाल पिक्चर्स' और 1958 में [[कमालिस्तान स्टूडियो]] की स्थापना की। कमाल पिक्चर्स के बैनर तले उन्होंने अभिनेत्री पत्नी मीना कुमारी को लेकर 'दायरा' फ़िल्म का निर्माण किया लेकिन [[भारत]] की कला फ़िल्मों में मानी जाने वाली यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं चल पाई। इसी दौरान निर्माता-निर्देशक [[के.आसिफ]] अपनी महत्वाकांक्षी फ़िल्म [[मुग़ल-ए-आजम]] के निर्माण में व्यस्त थे। इस फ़िल्म के लिए वजाहत मिर्जा संवाद लिख रहे थे लेकिन आसिफ को लगा कि एक ऐसे संवाद लेखक की ज़रूरत है जिसके लिखे डायलॉग दर्शकों के दिमाग से बरसों बरस नहीं निकल पाएं और इसके लिए उन्हें कमाल अमरोही से ज्यादा उपयुक्त व्यक्ति कोई नहीं लगा। उन्होंने उन्हें अपने चार संवाद लेखकों में शामिल कर लिया। उनके [[उर्दू भाषा]] में लिखे डायलॉग इतने मशहूर हुए कि उस दौरान प्रेमी और प्रेमिकाएं प्रेमपत्रों में मुग़ले आजम के संवादों के माध्यम से अपनी मोहब्बत का इजहार करने लगे थे। इस फ़िल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखक का फ़िल्म फेयर पुरस्कार दिया गया।&lt;br /&gt;
==पाकीज़ा (फ़िल्म)==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Pakeeza.jpeg|thumb|250px|पाकीज़ा|left]]&lt;br /&gt;
पाकीज़ा कमाल अमरोही का ड्रीम प्रोजेक्ट थी जिस पर उन्होंने [[1958]] में काम करना शुरू किया था। उस समय यह ब्लैक एंड व्हाइट में बनने वाली थी। कुछ समय बाद जब [[भारत]] में सिनेमास्कोप का प्रचलन शुरू हो गया तो उन्होंने [[1961]] में इसे सिनेमास्कोप रूप में बनाना शुरू किया लेकिन कमाल अमरोही का अपनी तीसरी पत्नी मीना कुमारी से अलगाव हो जाने के कारण फ़िल्म का निर्माण 1961-69 तक बंद रहा। बाद में किसी तरह उन्होंने मीना कुमारी को फ़िल्म में काम करने के लिए राज़ी कर लिया और आखिरकार 1971 में जाकर यह फ़िल्म पूरी हुई तथा फरवरी 1972 को रिलीज हुई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बेहतरीन संवाद, गीत-संगीत, दृश्यांकन और अभिनय से सजी इस फ़िल्म ने रिकार्डतोड़ कामयाबी हासिल की और आज यह फ़िल्म इतिहास की क्लासिक फ़िल्मों में गिनी जाती है। उन्होंने इस फ़िल्म के लिए एक गीत मौसम है आशिकाना.. भी लिखा था। जो बेहद मकबूल हुआ था। इस फ़िल्म के बाद कमाल अमरोही का फ़िल्मों से कुछ समय तक नाता टूटा रहा। [[1983]] में उन्होंने फिर फ़िल्म इंडस्ट्री का रुख़ किया और रज़िया सुल्तान फ़िल्म से अपनी निर्देशन क्षमता का लोहा मनवाया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==निधन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Kamal Amrohi stamp.jpeg|thumb|250px|कमाल अमरोही|left]]&lt;br /&gt;
अपने कमाल से दर्शकों को बांध देने वाली यह अजीम शख़्सियत [[11 फरवरी]] [[1993]] को इस दुनिया को अलविदा कह गयी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==फ़िल्में==&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;bharattable-purple&amp;quot; width=&amp;quot;70%&amp;quot; align=&amp;quot;left&amp;quot;&lt;br /&gt;
|+ कमाल अमरोही की फ़िल्में &amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://www.imdb.com/name/nm0025399/|title=Kamal Amrohi|accessmonthday=21 मार्च|accessyear=2012 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher= |language=अंग्रेज़ी}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
! क्रमांक &lt;br /&gt;
! सन &lt;br /&gt;
! फ़िल्म&lt;br /&gt;
! कार्य&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 1. &lt;br /&gt;
|1938  		 &lt;br /&gt;
| जेलर   &lt;br /&gt;
|कहानी &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 2. &lt;br /&gt;
| 1939  		 &lt;br /&gt;
| पुकार&lt;br /&gt;
| लेखन &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 3. &lt;br /&gt;
| 1940	 	              &lt;br /&gt;
| मैं हारी &lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 4. &lt;br /&gt;
|1940	             &lt;br /&gt;
|भरोसा&lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 5. &lt;br /&gt;
| 1943 &lt;br /&gt;
| मज़ाक	             &lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 6.&lt;br /&gt;
|1945             &lt;br /&gt;
| फूल&lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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| 1946 	 	              &lt;br /&gt;
| शाहजहाँ&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|-&lt;br /&gt;
| 9.&lt;br /&gt;
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| लेखन, निर्देशन&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 10.&lt;br /&gt;
|1960           &lt;br /&gt;
| [[मुग़ले आजम]]&lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 11.&lt;br /&gt;
|1972       &lt;br /&gt;
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| लेखन, निर्देशन&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 12.&lt;br /&gt;
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| शंकर हुसैन&lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 13.&lt;br /&gt;
|1979             &lt;br /&gt;
| मजनूं&lt;br /&gt;
| निर्देशन&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 14.&lt;br /&gt;
|1983             &lt;br /&gt;
| रज़िया सुल्तान&lt;br /&gt;
| लेखन, निर्देशन&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार= |प्रारम्भिक=प्रारम्भिक3 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.imdb.com/name/nm0025399/  कमाल अमरोही]&lt;br /&gt;
*[http://hindi.webdunia.com/%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%87%E0%A4%95-%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AC/%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%87%E0%A4%95-%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AC-%E0%A4%B8%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%96%E0%A4%BE-%E0%A4%A5%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A5%8B-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%A8-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%86-1090211048_1.htm  कमाल अमरोही : इक ख्वाब-सा देखा था जो पूरा न हुआ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/cinemaaza/cinema/memories/201_201_8201.html पाकीज़ा थी कमाल अमरोही की ड्रीम प्रोजेक्ट]&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{फ़िल्म निर्माता और निर्देशक}}&lt;br /&gt;
[[Category:सिनेमा]][[Category:कला कोश]][[Category:फ़िल्म निर्माता]][[Category:फ़िल्म निर्देशक]][[Category:सिनेमा कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
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		<updated>2026-05-09T06:06:20Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;आशा चौधरी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
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		<title>कमाल अमरोही</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2_%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A5%80&amp;diff=694744"/>
		<updated>2026-05-09T06:05:26Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;आशा चौधरी: /* सवांद और गीतकार */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा कलाकार&lt;br /&gt;
|चित्र=Kamal-amrohi.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=कमाल अमरोही &lt;br /&gt;
|पूरा नाम=सैयद आमिर हैदर कमाल अमरोही &lt;br /&gt;
|प्रसिद्ध नाम=कमाल अमरोही &lt;br /&gt;
|अन्य नाम=&lt;br /&gt;
|जन्म= [[17 जनवरी]], [[1918]] &lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[अमरोहा]], [[उत्तर प्रदेश]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु=[[11 फरवरी]], [[1993]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=&lt;br /&gt;
|अभिभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=तीन (बानो, महमूदी, [[मीना कुमारी]])&lt;br /&gt;
|संतान=शानदार, ताज़दार और रुख़सार&lt;br /&gt;
|कर्म भूमि=[[भारत]]&lt;br /&gt;
|कर्म-क्षेत्र=गीतकार, पटकथा और संवाद लेखक तथा निर्माता एवं निर्देशक&lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ=&lt;br /&gt;
|मुख्य फ़िल्में='महल', 'पाकीज़ा' और 'रज़िया सुल्तान' आदि।&lt;br /&gt;
|विषय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ संवाद पुरस्कार: [[मुग़ल-ए-आजम]]&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=कमाल अमरोही ने [[1953]] में 'कमाल पिक्चर्स' और [[1958]] में [[कमालिस्तान स्टूडियो]] की स्थापना की।&lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
'''कमाल अमरोही''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Kamal Amrohi'', जन्म: [[17 जनवरी]], [[1918]] - मृत्यु: [[11 फ़रवरी]], [[1993]]) महल, पाकीज़ा और रज़िया सुल्तान जैसी भव्य कलात्मक फ़िल्मों को परदे पर काव्य की रचना करने वाले निर्माता-निर्देशक थे। कमाल अमरोही ने बेहतरीन गीतकार, पटकथा और संवाद लेखक तथा निर्माता एवं निर्देशक के रूप में भारतीय सिनेमा पर अपनी अमिट छाप छोड़ी और उसे एक दिशा देने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। पाकीज़ा उनकी ज़िंदगी का ड्रीम प्रोजेक्ट थी। अपने फ़िल्मी जीवन के आखिरी दौर में वह 'अंतिम मुग़ल' नाम से फ़िल्म बनाना चाहते थे, लेकिन उनका यह ख्वाब अधूरा ही रह गया।&lt;br /&gt;
==परिचय==&lt;br /&gt;
[[चित्र:कमाल अमरोही .jpeg|thumb|250px|कमाल अमरोही|left]]&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही का मूल नाम 'सैयद आमिर हैदर' था। [[17 जनवरी]] [[1918]] को [[उत्तर प्रदेश]] के [[अमरोहा]] के ज़मींदार [[परिवार]] में जन्मे कमाल अमरोही के [[मुम्बई]] तक पहुँचने और फिर सफलता का इतिहास रचने की कहानी किसी फ़िल्मी कहानी की भाँति है। बचपन में अपनी शरारतों से वह पूरे गाँव को परेशान करते थे। एक बार अपनी अम्मी के डाँटने पर उन्होंने वादा किया कि वह एक दिन मशहूर होंगे और उनके पल्लू को [[चाँदी]] के सिक्कों से भर देंगे। उनकी शरारतों से तंग होकर एक दिन उनके बड़े भाई ने उन्हें गुस्से में थप्पड़ रसीद कर दिया तो कमाल अमरोही नाराज़गी में घर से भागकर [[लाहौर]] पहुँच गए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही के लिए लाहौर उनके जीवन की दिशा बदलने वाला साबित हुआ। वहाँ उन्होंने 'प्राच्य भाषाओं' में मास्टर की डिग्री हासिल की और फिर एक [[उर्दू]] [[समाचार पत्र]] में मात्र 18 [[वर्ष]] की आयु में ही नियमित रूप से स्तम्भ लिखने लगे। उनकी प्रतिभा का सम्मान करते हुए अख़बार के सम्पादक ने उनका वेतन बढाकर 300 रुपए मासिक कर दिया, जो उस समय क़ाफी बड़ी रकम थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==कलकत्ता में==&lt;br /&gt;
अख़बार में कुछ समय तक काम करने के बाद वह [[कलकत्ता]] चले गए और फिर वहाँ से [[मुम्बई]] आ गए। लाहौर में उनकी मुलाक़ात प्रसिद्ध [[कुन्दनलाल सहगल|गायक, अभिनेता कुन्दनलाल सहगल]] से हुई थी, जो उनकी प्रतिभा को पहचानकर उन्हें फ़िल्मों में काम करने के लिए 'मिनर्वा मूवीटोन' के मालिक निर्माता-निर्देशक [[सोहराब मोदी]] के पास ले गये। इसी समय उनकी एक लघु कथा ‘सपनों का महल’ से निर्माता-निर्देशक और कहानीकार '[[ख़्वाजा अहमद अब्बास]]' प्रभावित हुए।&lt;br /&gt;
==वैवाहिक जीवन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Meena Kumari Kamal Amrohi 3.jpg|thumb|250px|कमाल अमरोही-मीना कुमारी|right]]&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही ने तीन शादियां कीं। उनकी पहली बीवी का नाम 'बानो' था, जो [[नर्गिस]] की माँ जद्दनबाई की नौकरानी थी। बानो की अस्थमा से मौत होने के बाद उन्होंने 'महमूदी' से निकाह किया। कमाल अमरोही ने तीसरी [[शादी]] [[अभिनेत्री]] [[मीना कुमारी]] से की जो उनसे उम्र में लगभग पंद्रह [[साल]] छोटी थीं। दोनों की मुलाकात एक फ़िल्म के सेट पर हुई थी और उनके बीच प्यार हो गया। उस समय कमाल अमरोही 34 साल के थे जबकि मीना कुमारी की उम्र 19 साल थी। [[1952]] में दोनों ने विवाह कर लिया लेकिन यह संबंध ज्यादा दिन तक नहीं चल पाया और उनका अलगाव हो गया। मीना कुमारी के प्रति कमाल अमरोही का प्रेम शायद आखिर तक बरकरार रहा तभी तो उन्हें मौत के बाद क़ब्रिस्तान में मीना कुमारी की क़ब्र के बगल में दफनाया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सवांद और गीतकार==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Kamal Amrohi 3.jpeg|thumb|250px|कमाल अमरोही, मीना कुमारी|right]]&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही को पता चला कि [[सोहराब मोदी]] को एक कहानी की तलाश है। उनकी कहानी पर आधारित फ़िल्म ‘पुकार’ (1939) सुपर हिट रही। '[[नसीम बानो]]' और 'चंद्रमोहन' अभिनीत इस फ़िल्म के लिए उन्होंने चार गीत लिखे- &lt;br /&gt;
#धोया महोबे घाट हे हो धोबिया रे.., &lt;br /&gt;
#दिल में तू आँखों में तू मेनका.., &lt;br /&gt;
#गीत सुनो वाह गीत सैयां.., &lt;br /&gt;
#काहे को मोहे छेड़े रे बेईमनवा.. &lt;br /&gt;
इसके बाद तो फ़िल्मों के लिए कहानी, पटकथा और संवाद लिखने का उनका सिलसिला चल पड़ा और उन्होंने जेलर ([[1938]]), मैं हारी ([[1940]]), भरोसा ([[1940]]), मज़ाक ([[1943]]), फूल ([[1945]]), शाहजहां ([[1946]]), महल ([[1949]]), दायरा ([[1953]]), दिल अपना और प्रीत पराई ([[1960]]), [[मुग़ले आजम]] ([[1960]]), पाकीज़ा ([[1971]]), शंकर हुसैन ([[1977]]) और रज़िया सुल्तान ([[1983]]), भरोसा ([[1940]]) जैसी फ़िल्मों के लिए कहानी, पटकथा और संवाद लिखने का काम किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही ने बेहद चुनिंदा फ़िल्मों के लिए काम किया लेकिन जो भी काम किया पूरी तबीयत और जुनून के साथ किया। उनके काम पर उनके व्यक्तित्व की छाप रहती थी। यही वजह है कि फ़िल्में बनाने की उनकी रफ़्तार काफ़ी धीमी रहती थी और उन्हें इसके लिए आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ता था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==महल (फ़िल्म)==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Mahal.jpeg|thumb|250px|महल (फ़िल्म)|right]]&lt;br /&gt;
निर्माता [[अशोक कुमार]] की फ़िल्म 'महल' कमाल अमरोही के कैरियर का महत्त्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। इस फ़िल्म के निर्देशन का जिम्मा उन्हें सौंपा गया। रहस्य और रोमांस के ताने-बाने से बुनी मधुर गीत-संगीत और ध्वनि के कल्पनामय इस्तेमाल से बनी यह फ़िल्म सुपरहिट रही और इसी के साथ बॉलीवुड में हॉरर और सस्पेंस फ़िल्मों के निर्माण का सिलसिला चल पड़ा। फ़िल्म की जबरदस्त कामयाबी ने नायिका [[मधुबाला]] और गायिका [[लता मंगेशकर]] को फ़िल्म इंडस्ट्री में स्थापित कर दिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==कमालिस्तान स्टूडियो की स्थापना==&lt;br /&gt;
महल फ़िल्म की कामयाबी के बाद कमाल अमरोही ने 1953 में 'कमाल पिक्चर्स' और 1958 में [[कमालिस्तान स्टूडियो]] की स्थापना की। कमाल पिक्चर्स के बैनर तले उन्होंने अभिनेत्री पत्नी मीना कुमारी को लेकर 'दायरा' फ़िल्म का निर्माण किया लेकिन [[भारत]] की कला फ़िल्मों में मानी जाने वाली यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं चल पाई। इसी दौरान निर्माता-निर्देशक [[के.आसिफ]] अपनी महत्वाकांक्षी फ़िल्म [[मुग़ल-ए-आजम]] के निर्माण में व्यस्त थे। इस फ़िल्म के लिए वजाहत मिर्जा संवाद लिख रहे थे लेकिन आसिफ को लगा कि एक ऐसे संवाद लेखक की ज़रूरत है जिसके लिखे डायलॉग दर्शकों के दिमाग से बरसों बरस नहीं निकल पाएं और इसके लिए उन्हें कमाल अमरोही से ज्यादा उपयुक्त व्यक्ति कोई नहीं लगा। उन्होंने उन्हें अपने चार संवाद लेखकों में शामिल कर लिया। उनके [[उर्दू भाषा]] में लिखे डायलॉग इतने मशहूर हुए कि उस दौरान प्रेमी और प्रेमिकाएं प्रेमपत्रों में मुग़ले आजम के संवादों के माध्यम से अपनी मोहब्बत का इजहार करने लगे थे। इस फ़िल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखक का फ़िल्म फेयर पुरस्कार दिया गया।&lt;br /&gt;
==पाकीज़ा (फ़िल्म)==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Pakeeza.jpeg|thumb|250px|पाकीज़ा|left]]&lt;br /&gt;
पाकीज़ा कमाल अमरोही का ड्रीम प्रोजेक्ट थी जिस पर उन्होंने [[1958]] में काम करना शुरू किया था। उस समय यह ब्लैक एंड व्हाइट में बनने वाली थी। कुछ समय बाद जब [[भारत]] में सिनेमास्कोप का प्रचलन शुरू हो गया तो उन्होंने [[1961]] में इसे सिनेमास्कोप रूप में बनाना शुरू किया लेकिन कमाल अमरोही का अपनी तीसरी पत्नी मीना कुमारी से अलगाव हो जाने के कारण फ़िल्म का निर्माण 1961-69 तक बंद रहा। बाद में किसी तरह उन्होंने मीना कुमारी को फ़िल्म में काम करने के लिए राज़ी कर लिया और आखिरकार 1971 में जाकर यह फ़िल्म पूरी हुई तथा फरवरी 1972 को रिलीज हुई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बेहतरीन संवाद, गीत-संगीत, दृश्यांकन और अभिनय से सजी इस फ़िल्म ने रिकार्डतोड़ कामयाबी हासिल की और आज यह फ़िल्म इतिहास की क्लासिक फ़िल्मों में गिनी जाती है। उन्होंने इस फ़िल्म के लिए एक गीत मौसम है आशिकाना.. भी लिखा था। जो बेहद मकबूल हुआ था। इस फ़िल्म के बाद कमाल अमरोही का फ़िल्मों से कुछ समय तक नाता टूटा रहा। [[1983]] में उन्होंने फिर फ़िल्म इंडस्ट्री का रुख़ किया और रज़िया सुल्तान फ़िल्म से अपनी निर्देशन क्षमता का लोहा मनवाया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==निधन==&lt;br /&gt;
अपने कमाल से दर्शकों को बांध देने वाली यह अजीम शख़्सियत [[11 फरवरी]] [[1993]] को इस दुनिया को अलविदा कह गयी।&lt;br /&gt;
==फ़िल्में==&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;bharattable-purple&amp;quot; width=&amp;quot;70%&amp;quot; align=&amp;quot;left&amp;quot;&lt;br /&gt;
|+ कमाल अमरोही की फ़िल्में &amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://www.imdb.com/name/nm0025399/|title=Kamal Amrohi|accessmonthday=21 मार्च|accessyear=2012 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher= |language=अंग्रेज़ी}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
! क्रमांक &lt;br /&gt;
! सन &lt;br /&gt;
! फ़िल्म&lt;br /&gt;
! कार्य&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 1. &lt;br /&gt;
|1938  		 &lt;br /&gt;
| जेलर   &lt;br /&gt;
|कहानी &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 2. &lt;br /&gt;
| 1939  		 &lt;br /&gt;
| पुकार&lt;br /&gt;
| लेखन &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 3. &lt;br /&gt;
| 1940	 	              &lt;br /&gt;
| मैं हारी &lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 4. &lt;br /&gt;
|1940	             &lt;br /&gt;
|भरोसा&lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 5. &lt;br /&gt;
| 1943 &lt;br /&gt;
| मज़ाक	             &lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 6.&lt;br /&gt;
|1945             &lt;br /&gt;
| फूल&lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 7. &lt;br /&gt;
| 1946 	 	              &lt;br /&gt;
| शाहजहाँ&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 8.&lt;br /&gt;
|1949              &lt;br /&gt;
| महल&lt;br /&gt;
| निर्देशन&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 9.&lt;br /&gt;
|1953            &lt;br /&gt;
| दायरा&lt;br /&gt;
| लेखन, निर्देशन&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 10.&lt;br /&gt;
|1960           &lt;br /&gt;
| [[मुग़ले आजम]]&lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 11.&lt;br /&gt;
|1972       &lt;br /&gt;
| पाकीज़ा&lt;br /&gt;
| लेखन, निर्देशन&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 12.&lt;br /&gt;
|1977             &lt;br /&gt;
| शंकर हुसैन&lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 13.&lt;br /&gt;
|1979             &lt;br /&gt;
| मजनूं&lt;br /&gt;
| निर्देशन&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 14.&lt;br /&gt;
|1983             &lt;br /&gt;
| रज़िया सुल्तान&lt;br /&gt;
| लेखन, निर्देशन&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार= |प्रारम्भिक=प्रारम्भिक3 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.imdb.com/name/nm0025399/  कमाल अमरोही]&lt;br /&gt;
*[http://hindi.webdunia.com/%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%87%E0%A4%95-%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AC/%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%87%E0%A4%95-%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AC-%E0%A4%B8%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%96%E0%A4%BE-%E0%A4%A5%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A5%8B-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%A8-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%86-1090211048_1.htm  कमाल अमरोही : इक ख्वाब-सा देखा था जो पूरा न हुआ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/cinemaaza/cinema/memories/201_201_8201.html पाकीज़ा थी कमाल अमरोही की ड्रीम प्रोजेक्ट]&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{फ़िल्म निर्माता और निर्देशक}}&lt;br /&gt;
[[Category:सिनेमा]][[Category:कला कोश]][[Category:फ़िल्म निर्माता]][[Category:फ़िल्म निर्देशक]][[Category:सिनेमा कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
	</entry>
	<entry>
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		<title>चित्र:Kamal Amrohi 3.jpeg</title>
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		<updated>2026-05-09T06:04:07Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;आशा चौधरी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
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	<entry>
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		<title>कमाल अमरोही</title>
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		<updated>2026-05-09T06:02:53Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;आशा चौधरी: /* महल (फ़िल्म) */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा कलाकार&lt;br /&gt;
|चित्र=Kamal-amrohi.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=कमाल अमरोही &lt;br /&gt;
|पूरा नाम=सैयद आमिर हैदर कमाल अमरोही &lt;br /&gt;
|प्रसिद्ध नाम=कमाल अमरोही &lt;br /&gt;
|अन्य नाम=&lt;br /&gt;
|जन्म= [[17 जनवरी]], [[1918]] &lt;br /&gt;
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|अभिभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=तीन (बानो, महमूदी, [[मीना कुमारी]])&lt;br /&gt;
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|कर्म भूमि=[[भारत]]&lt;br /&gt;
|कर्म-क्षेत्र=गीतकार, पटकथा और संवाद लेखक तथा निर्माता एवं निर्देशक&lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ=&lt;br /&gt;
|मुख्य फ़िल्में='महल', 'पाकीज़ा' और 'रज़िया सुल्तान' आदि।&lt;br /&gt;
|विषय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ संवाद पुरस्कार: [[मुग़ल-ए-आजम]]&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=कमाल अमरोही ने [[1953]] में 'कमाल पिक्चर्स' और [[1958]] में [[कमालिस्तान स्टूडियो]] की स्थापना की।&lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
'''कमाल अमरोही''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Kamal Amrohi'', जन्म: [[17 जनवरी]], [[1918]] - मृत्यु: [[11 फ़रवरी]], [[1993]]) महल, पाकीज़ा और रज़िया सुल्तान जैसी भव्य कलात्मक फ़िल्मों को परदे पर काव्य की रचना करने वाले निर्माता-निर्देशक थे। कमाल अमरोही ने बेहतरीन गीतकार, पटकथा और संवाद लेखक तथा निर्माता एवं निर्देशक के रूप में भारतीय सिनेमा पर अपनी अमिट छाप छोड़ी और उसे एक दिशा देने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। पाकीज़ा उनकी ज़िंदगी का ड्रीम प्रोजेक्ट थी। अपने फ़िल्मी जीवन के आखिरी दौर में वह 'अंतिम मुग़ल' नाम से फ़िल्म बनाना चाहते थे, लेकिन उनका यह ख्वाब अधूरा ही रह गया।&lt;br /&gt;
==परिचय==&lt;br /&gt;
[[चित्र:कमाल अमरोही .jpeg|thumb|250px|कमाल अमरोही|left]]&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही का मूल नाम 'सैयद आमिर हैदर' था। [[17 जनवरी]] [[1918]] को [[उत्तर प्रदेश]] के [[अमरोहा]] के ज़मींदार [[परिवार]] में जन्मे कमाल अमरोही के [[मुम्बई]] तक पहुँचने और फिर सफलता का इतिहास रचने की कहानी किसी फ़िल्मी कहानी की भाँति है। बचपन में अपनी शरारतों से वह पूरे गाँव को परेशान करते थे। एक बार अपनी अम्मी के डाँटने पर उन्होंने वादा किया कि वह एक दिन मशहूर होंगे और उनके पल्लू को [[चाँदी]] के सिक्कों से भर देंगे। उनकी शरारतों से तंग होकर एक दिन उनके बड़े भाई ने उन्हें गुस्से में थप्पड़ रसीद कर दिया तो कमाल अमरोही नाराज़गी में घर से भागकर [[लाहौर]] पहुँच गए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही के लिए लाहौर उनके जीवन की दिशा बदलने वाला साबित हुआ। वहाँ उन्होंने 'प्राच्य भाषाओं' में मास्टर की डिग्री हासिल की और फिर एक [[उर्दू]] [[समाचार पत्र]] में मात्र 18 [[वर्ष]] की आयु में ही नियमित रूप से स्तम्भ लिखने लगे। उनकी प्रतिभा का सम्मान करते हुए अख़बार के सम्पादक ने उनका वेतन बढाकर 300 रुपए मासिक कर दिया, जो उस समय क़ाफी बड़ी रकम थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==कलकत्ता में==&lt;br /&gt;
अख़बार में कुछ समय तक काम करने के बाद वह [[कलकत्ता]] चले गए और फिर वहाँ से [[मुम्बई]] आ गए। लाहौर में उनकी मुलाक़ात प्रसिद्ध [[कुन्दनलाल सहगल|गायक, अभिनेता कुन्दनलाल सहगल]] से हुई थी, जो उनकी प्रतिभा को पहचानकर उन्हें फ़िल्मों में काम करने के लिए 'मिनर्वा मूवीटोन' के मालिक निर्माता-निर्देशक [[सोहराब मोदी]] के पास ले गये। इसी समय उनकी एक लघु कथा ‘सपनों का महल’ से निर्माता-निर्देशक और कहानीकार '[[ख़्वाजा अहमद अब्बास]]' प्रभावित हुए।&lt;br /&gt;
==वैवाहिक जीवन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Meena Kumari Kamal Amrohi 3.jpg|thumb|250px|कमाल अमरोही-मीना कुमारी|right]]&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही ने तीन शादियां कीं। उनकी पहली बीवी का नाम 'बानो' था, जो [[नर्गिस]] की माँ जद्दनबाई की नौकरानी थी। बानो की अस्थमा से मौत होने के बाद उन्होंने 'महमूदी' से निकाह किया। कमाल अमरोही ने तीसरी [[शादी]] [[अभिनेत्री]] [[मीना कुमारी]] से की जो उनसे उम्र में लगभग पंद्रह [[साल]] छोटी थीं। दोनों की मुलाकात एक फ़िल्म के सेट पर हुई थी और उनके बीच प्यार हो गया। उस समय कमाल अमरोही 34 साल के थे जबकि मीना कुमारी की उम्र 19 साल थी। [[1952]] में दोनों ने विवाह कर लिया लेकिन यह संबंध ज्यादा दिन तक नहीं चल पाया और उनका अलगाव हो गया। मीना कुमारी के प्रति कमाल अमरोही का प्रेम शायद आखिर तक बरकरार रहा तभी तो उन्हें मौत के बाद क़ब्रिस्तान में मीना कुमारी की क़ब्र के बगल में दफनाया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सवांद और गीतकार==&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही को पता चला कि [[सोहराब मोदी]] को एक कहानी की तलाश है। उनकी कहानी पर आधारित फ़िल्म ‘पुकार’ (1939) सुपर हिट रही। '[[नसीम बानो]]' और 'चंद्रमोहन' अभिनीत इस फ़िल्म के लिए उन्होंने चार गीत लिखे- &lt;br /&gt;
#धोया महोबे घाट हे हो धोबिया रे.., &lt;br /&gt;
#दिल में तू आँखों में तू मेनका.., &lt;br /&gt;
#गीत सुनो वाह गीत सैयां.., &lt;br /&gt;
#काहे को मोहे छेड़े रे बेईमनवा.. &lt;br /&gt;
इसके बाद तो फ़िल्मों के लिए कहानी, पटकथा और संवाद लिखने का उनका सिलसिला चल पड़ा और उन्होंने जेलर ([[1938]]), मैं हारी ([[1940]]), भरोसा ([[1940]]), मज़ाक ([[1943]]), फूल ([[1945]]), शाहजहां ([[1946]]), महल ([[1949]]), दायरा ([[1953]]), दिल अपना और प्रीत पराई ([[1960]]), [[मुग़ले आजम]] ([[1960]]), पाकीज़ा ([[1971]]), शंकर हुसैन ([[1977]]) और रज़िया सुल्तान ([[1983]]), भरोसा ([[1940]]) जैसी फ़िल्मों के लिए कहानी, पटकथा और संवाद लिखने का काम किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही ने बेहद चुनिंदा फ़िल्मों के लिए काम किया लेकिन जो भी काम किया पूरी तबीयत और जुनून के साथ किया। उनके काम पर उनके व्यक्तित्व की छाप रहती थी। यही वजह है कि फ़िल्में बनाने की उनकी रफ़्तार काफ़ी धीमी रहती थी और उन्हें इसके लिए आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ता था।&lt;br /&gt;
==महल (फ़िल्म)==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Mahal.jpeg|thumb|250px|महल (फ़िल्म)|right]]&lt;br /&gt;
निर्माता [[अशोक कुमार]] की फ़िल्म 'महल' कमाल अमरोही के कैरियर का महत्त्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। इस फ़िल्म के निर्देशन का जिम्मा उन्हें सौंपा गया। रहस्य और रोमांस के ताने-बाने से बुनी मधुर गीत-संगीत और ध्वनि के कल्पनामय इस्तेमाल से बनी यह फ़िल्म सुपरहिट रही और इसी के साथ बॉलीवुड में हॉरर और सस्पेंस फ़िल्मों के निर्माण का सिलसिला चल पड़ा। फ़िल्म की जबरदस्त कामयाबी ने नायिका [[मधुबाला]] और गायिका [[लता मंगेशकर]] को फ़िल्म इंडस्ट्री में स्थापित कर दिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==कमालिस्तान स्टूडियो की स्थापना==&lt;br /&gt;
महल फ़िल्म की कामयाबी के बाद कमाल अमरोही ने 1953 में 'कमाल पिक्चर्स' और 1958 में [[कमालिस्तान स्टूडियो]] की स्थापना की। कमाल पिक्चर्स के बैनर तले उन्होंने अभिनेत्री पत्नी मीना कुमारी को लेकर 'दायरा' फ़िल्म का निर्माण किया लेकिन [[भारत]] की कला फ़िल्मों में मानी जाने वाली यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं चल पाई। इसी दौरान निर्माता-निर्देशक [[के.आसिफ]] अपनी महत्वाकांक्षी फ़िल्म [[मुग़ल-ए-आजम]] के निर्माण में व्यस्त थे। इस फ़िल्म के लिए वजाहत मिर्जा संवाद लिख रहे थे लेकिन आसिफ को लगा कि एक ऐसे संवाद लेखक की ज़रूरत है जिसके लिखे डायलॉग दर्शकों के दिमाग से बरसों बरस नहीं निकल पाएं और इसके लिए उन्हें कमाल अमरोही से ज्यादा उपयुक्त व्यक्ति कोई नहीं लगा। उन्होंने उन्हें अपने चार संवाद लेखकों में शामिल कर लिया। उनके [[उर्दू भाषा]] में लिखे डायलॉग इतने मशहूर हुए कि उस दौरान प्रेमी और प्रेमिकाएं प्रेमपत्रों में मुग़ले आजम के संवादों के माध्यम से अपनी मोहब्बत का इजहार करने लगे थे। इस फ़िल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखक का फ़िल्म फेयर पुरस्कार दिया गया।&lt;br /&gt;
==पाकीज़ा (फ़िल्म)==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Pakeeza.jpeg|thumb|250px|पाकीज़ा|left]]&lt;br /&gt;
पाकीज़ा कमाल अमरोही का ड्रीम प्रोजेक्ट थी जिस पर उन्होंने [[1958]] में काम करना शुरू किया था। उस समय यह ब्लैक एंड व्हाइट में बनने वाली थी। कुछ समय बाद जब [[भारत]] में सिनेमास्कोप का प्रचलन शुरू हो गया तो उन्होंने [[1961]] में इसे सिनेमास्कोप रूप में बनाना शुरू किया लेकिन कमाल अमरोही का अपनी तीसरी पत्नी मीना कुमारी से अलगाव हो जाने के कारण फ़िल्म का निर्माण 1961-69 तक बंद रहा। बाद में किसी तरह उन्होंने मीना कुमारी को फ़िल्म में काम करने के लिए राज़ी कर लिया और आखिरकार 1971 में जाकर यह फ़िल्म पूरी हुई तथा फरवरी 1972 को रिलीज हुई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बेहतरीन संवाद, गीत-संगीत, दृश्यांकन और अभिनय से सजी इस फ़िल्म ने रिकार्डतोड़ कामयाबी हासिल की और आज यह फ़िल्म इतिहास की क्लासिक फ़िल्मों में गिनी जाती है। उन्होंने इस फ़िल्म के लिए एक गीत मौसम है आशिकाना.. भी लिखा था। जो बेहद मकबूल हुआ था। इस फ़िल्म के बाद कमाल अमरोही का फ़िल्मों से कुछ समय तक नाता टूटा रहा। [[1983]] में उन्होंने फिर फ़िल्म इंडस्ट्री का रुख़ किया और रज़िया सुल्तान फ़िल्म से अपनी निर्देशन क्षमता का लोहा मनवाया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==निधन==&lt;br /&gt;
अपने कमाल से दर्शकों को बांध देने वाली यह अजीम शख़्सियत [[11 फरवरी]] [[1993]] को इस दुनिया को अलविदा कह गयी।&lt;br /&gt;
==फ़िल्में==&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;bharattable-purple&amp;quot; width=&amp;quot;70%&amp;quot; align=&amp;quot;left&amp;quot;&lt;br /&gt;
|+ कमाल अमरोही की फ़िल्में &amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://www.imdb.com/name/nm0025399/|title=Kamal Amrohi|accessmonthday=21 मार्च|accessyear=2012 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher= |language=अंग्रेज़ी}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
! क्रमांक &lt;br /&gt;
! सन &lt;br /&gt;
! फ़िल्म&lt;br /&gt;
! कार्य&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 1. &lt;br /&gt;
|1938  		 &lt;br /&gt;
| जेलर   &lt;br /&gt;
|कहानी &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 2. &lt;br /&gt;
| 1939  		 &lt;br /&gt;
| पुकार&lt;br /&gt;
| लेखन &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 3. &lt;br /&gt;
| 1940	 	              &lt;br /&gt;
| मैं हारी &lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 4. &lt;br /&gt;
|1940	             &lt;br /&gt;
|भरोसा&lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 5. &lt;br /&gt;
| 1943 &lt;br /&gt;
| मज़ाक	             &lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 6.&lt;br /&gt;
|1945             &lt;br /&gt;
| फूल&lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 7. &lt;br /&gt;
| 1946 	 	              &lt;br /&gt;
| शाहजहाँ&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 8.&lt;br /&gt;
|1949              &lt;br /&gt;
| महल&lt;br /&gt;
| निर्देशन&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 9.&lt;br /&gt;
|1953            &lt;br /&gt;
| दायरा&lt;br /&gt;
| लेखन, निर्देशन&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 10.&lt;br /&gt;
|1960           &lt;br /&gt;
| [[मुग़ले आजम]]&lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 11.&lt;br /&gt;
|1972       &lt;br /&gt;
| पाकीज़ा&lt;br /&gt;
| लेखन, निर्देशन&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 12.&lt;br /&gt;
|1977             &lt;br /&gt;
| शंकर हुसैन&lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 13.&lt;br /&gt;
|1979             &lt;br /&gt;
| मजनूं&lt;br /&gt;
| निर्देशन&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 14.&lt;br /&gt;
|1983             &lt;br /&gt;
| रज़िया सुल्तान&lt;br /&gt;
| लेखन, निर्देशन&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार= |प्रारम्भिक=प्रारम्भिक3 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.imdb.com/name/nm0025399/  कमाल अमरोही]&lt;br /&gt;
*[http://hindi.webdunia.com/%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%87%E0%A4%95-%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AC/%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%87%E0%A4%95-%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AC-%E0%A4%B8%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%96%E0%A4%BE-%E0%A4%A5%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A5%8B-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%A8-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%86-1090211048_1.htm  कमाल अमरोही : इक ख्वाब-सा देखा था जो पूरा न हुआ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/cinemaaza/cinema/memories/201_201_8201.html पाकीज़ा थी कमाल अमरोही की ड्रीम प्रोजेक्ट]&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{फ़िल्म निर्माता और निर्देशक}}&lt;br /&gt;
[[Category:सिनेमा]][[Category:कला कोश]][[Category:फ़िल्म निर्माता]][[Category:फ़िल्म निर्देशक]][[Category:सिनेमा कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0:Mahal.jpeg&amp;diff=694741</id>
		<title>चित्र:Mahal.jpeg</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;आशा चौधरी: &lt;/p&gt;
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		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
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		<title>कमाल अमरोही</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2_%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A5%80&amp;diff=694740"/>
		<updated>2026-05-09T05:58:47Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;आशा चौधरी: /* पाकीज़ा (फ़िल्म) */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा कलाकार&lt;br /&gt;
|चित्र=Kamal-amrohi.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=कमाल अमरोही &lt;br /&gt;
|पूरा नाम=सैयद आमिर हैदर कमाल अमरोही &lt;br /&gt;
|प्रसिद्ध नाम=कमाल अमरोही &lt;br /&gt;
|अन्य नाम=&lt;br /&gt;
|जन्म= [[17 जनवरी]], [[1918]] &lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[अमरोहा]], [[उत्तर प्रदेश]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु=[[11 फरवरी]], [[1993]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=&lt;br /&gt;
|अभिभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=तीन (बानो, महमूदी, [[मीना कुमारी]])&lt;br /&gt;
|संतान=शानदार, ताज़दार और रुख़सार&lt;br /&gt;
|कर्म भूमि=[[भारत]]&lt;br /&gt;
|कर्म-क्षेत्र=गीतकार, पटकथा और संवाद लेखक तथा निर्माता एवं निर्देशक&lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ=&lt;br /&gt;
|मुख्य फ़िल्में='महल', 'पाकीज़ा' और 'रज़िया सुल्तान' आदि।&lt;br /&gt;
|विषय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ संवाद पुरस्कार: [[मुग़ल-ए-आजम]]&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=कमाल अमरोही ने [[1953]] में 'कमाल पिक्चर्स' और [[1958]] में [[कमालिस्तान स्टूडियो]] की स्थापना की।&lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
'''कमाल अमरोही''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Kamal Amrohi'', जन्म: [[17 जनवरी]], [[1918]] - मृत्यु: [[11 फ़रवरी]], [[1993]]) महल, पाकीज़ा और रज़िया सुल्तान जैसी भव्य कलात्मक फ़िल्मों को परदे पर काव्य की रचना करने वाले निर्माता-निर्देशक थे। कमाल अमरोही ने बेहतरीन गीतकार, पटकथा और संवाद लेखक तथा निर्माता एवं निर्देशक के रूप में भारतीय सिनेमा पर अपनी अमिट छाप छोड़ी और उसे एक दिशा देने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। पाकीज़ा उनकी ज़िंदगी का ड्रीम प्रोजेक्ट थी। अपने फ़िल्मी जीवन के आखिरी दौर में वह 'अंतिम मुग़ल' नाम से फ़िल्म बनाना चाहते थे, लेकिन उनका यह ख्वाब अधूरा ही रह गया।&lt;br /&gt;
==परिचय==&lt;br /&gt;
[[चित्र:कमाल अमरोही .jpeg|thumb|250px|कमाल अमरोही|left]]&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही का मूल नाम 'सैयद आमिर हैदर' था। [[17 जनवरी]] [[1918]] को [[उत्तर प्रदेश]] के [[अमरोहा]] के ज़मींदार [[परिवार]] में जन्मे कमाल अमरोही के [[मुम्बई]] तक पहुँचने और फिर सफलता का इतिहास रचने की कहानी किसी फ़िल्मी कहानी की भाँति है। बचपन में अपनी शरारतों से वह पूरे गाँव को परेशान करते थे। एक बार अपनी अम्मी के डाँटने पर उन्होंने वादा किया कि वह एक दिन मशहूर होंगे और उनके पल्लू को [[चाँदी]] के सिक्कों से भर देंगे। उनकी शरारतों से तंग होकर एक दिन उनके बड़े भाई ने उन्हें गुस्से में थप्पड़ रसीद कर दिया तो कमाल अमरोही नाराज़गी में घर से भागकर [[लाहौर]] पहुँच गए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही के लिए लाहौर उनके जीवन की दिशा बदलने वाला साबित हुआ। वहाँ उन्होंने 'प्राच्य भाषाओं' में मास्टर की डिग्री हासिल की और फिर एक [[उर्दू]] [[समाचार पत्र]] में मात्र 18 [[वर्ष]] की आयु में ही नियमित रूप से स्तम्भ लिखने लगे। उनकी प्रतिभा का सम्मान करते हुए अख़बार के सम्पादक ने उनका वेतन बढाकर 300 रुपए मासिक कर दिया, जो उस समय क़ाफी बड़ी रकम थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==कलकत्ता में==&lt;br /&gt;
अख़बार में कुछ समय तक काम करने के बाद वह [[कलकत्ता]] चले गए और फिर वहाँ से [[मुम्बई]] आ गए। लाहौर में उनकी मुलाक़ात प्रसिद्ध [[कुन्दनलाल सहगल|गायक, अभिनेता कुन्दनलाल सहगल]] से हुई थी, जो उनकी प्रतिभा को पहचानकर उन्हें फ़िल्मों में काम करने के लिए 'मिनर्वा मूवीटोन' के मालिक निर्माता-निर्देशक [[सोहराब मोदी]] के पास ले गये। इसी समय उनकी एक लघु कथा ‘सपनों का महल’ से निर्माता-निर्देशक और कहानीकार '[[ख़्वाजा अहमद अब्बास]]' प्रभावित हुए।&lt;br /&gt;
==वैवाहिक जीवन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Meena Kumari Kamal Amrohi 3.jpg|thumb|250px|कमाल अमरोही-मीना कुमारी|right]]&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही ने तीन शादियां कीं। उनकी पहली बीवी का नाम 'बानो' था, जो [[नर्गिस]] की माँ जद्दनबाई की नौकरानी थी। बानो की अस्थमा से मौत होने के बाद उन्होंने 'महमूदी' से निकाह किया। कमाल अमरोही ने तीसरी [[शादी]] [[अभिनेत्री]] [[मीना कुमारी]] से की जो उनसे उम्र में लगभग पंद्रह [[साल]] छोटी थीं। दोनों की मुलाकात एक फ़िल्म के सेट पर हुई थी और उनके बीच प्यार हो गया। उस समय कमाल अमरोही 34 साल के थे जबकि मीना कुमारी की उम्र 19 साल थी। [[1952]] में दोनों ने विवाह कर लिया लेकिन यह संबंध ज्यादा दिन तक नहीं चल पाया और उनका अलगाव हो गया। मीना कुमारी के प्रति कमाल अमरोही का प्रेम शायद आखिर तक बरकरार रहा तभी तो उन्हें मौत के बाद क़ब्रिस्तान में मीना कुमारी की क़ब्र के बगल में दफनाया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सवांद और गीतकार==&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही को पता चला कि [[सोहराब मोदी]] को एक कहानी की तलाश है। उनकी कहानी पर आधारित फ़िल्म ‘पुकार’ (1939) सुपर हिट रही। '[[नसीम बानो]]' और 'चंद्रमोहन' अभिनीत इस फ़िल्म के लिए उन्होंने चार गीत लिखे- &lt;br /&gt;
#धोया महोबे घाट हे हो धोबिया रे.., &lt;br /&gt;
#दिल में तू आँखों में तू मेनका.., &lt;br /&gt;
#गीत सुनो वाह गीत सैयां.., &lt;br /&gt;
#काहे को मोहे छेड़े रे बेईमनवा.. &lt;br /&gt;
इसके बाद तो फ़िल्मों के लिए कहानी, पटकथा और संवाद लिखने का उनका सिलसिला चल पड़ा और उन्होंने जेलर ([[1938]]), मैं हारी ([[1940]]), भरोसा ([[1940]]), मज़ाक ([[1943]]), फूल ([[1945]]), शाहजहां ([[1946]]), महल ([[1949]]), दायरा ([[1953]]), दिल अपना और प्रीत पराई ([[1960]]), [[मुग़ले आजम]] ([[1960]]), पाकीज़ा ([[1971]]), शंकर हुसैन ([[1977]]) और रज़िया सुल्तान ([[1983]]), भरोसा ([[1940]]) जैसी फ़िल्मों के लिए कहानी, पटकथा और संवाद लिखने का काम किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही ने बेहद चुनिंदा फ़िल्मों के लिए काम किया लेकिन जो भी काम किया पूरी तबीयत और जुनून के साथ किया। उनके काम पर उनके व्यक्तित्व की छाप रहती थी। यही वजह है कि फ़िल्में बनाने की उनकी रफ़्तार काफ़ी धीमी रहती थी और उन्हें इसके लिए आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ता था।&lt;br /&gt;
==महल (फ़िल्म)==&lt;br /&gt;
निर्माता [[अशोक कुमार]] की फ़िल्म 'महल' कमाल अमरोही के कैरियर का महत्त्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। इस फ़िल्म के निर्देशन का जिम्मा उन्हें सौंपा गया। रहस्य और रोमांस के ताने-बाने से बुनी मधुर गीत-संगीत और ध्वनि के कल्पनामय इस्तेमाल से बनी यह फ़िल्म सुपरहिट रही और इसी के साथ बॉलीवुड में हॉरर और सस्पेंस फ़िल्मों के निर्माण का सिलसिला चल पड़ा। फ़िल्म की जबरदस्त कामयाबी ने नायिका [[मधुबाला]] और गायिका [[लता मंगेशकर]] को फ़िल्म इंडस्ट्री में स्थापित कर दिया।&lt;br /&gt;
==कमालिस्तान स्टूडियो की स्थापना==&lt;br /&gt;
महल फ़िल्म की कामयाबी के बाद कमाल अमरोही ने 1953 में 'कमाल पिक्चर्स' और 1958 में [[कमालिस्तान स्टूडियो]] की स्थापना की। कमाल पिक्चर्स के बैनर तले उन्होंने अभिनेत्री पत्नी मीना कुमारी को लेकर 'दायरा' फ़िल्म का निर्माण किया लेकिन [[भारत]] की कला फ़िल्मों में मानी जाने वाली यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं चल पाई। इसी दौरान निर्माता-निर्देशक [[के.आसिफ]] अपनी महत्वाकांक्षी फ़िल्म [[मुग़ल-ए-आजम]] के निर्माण में व्यस्त थे। इस फ़िल्म के लिए वजाहत मिर्जा संवाद लिख रहे थे लेकिन आसिफ को लगा कि एक ऐसे संवाद लेखक की ज़रूरत है जिसके लिखे डायलॉग दर्शकों के दिमाग से बरसों बरस नहीं निकल पाएं और इसके लिए उन्हें कमाल अमरोही से ज्यादा उपयुक्त व्यक्ति कोई नहीं लगा। उन्होंने उन्हें अपने चार संवाद लेखकों में शामिल कर लिया। उनके [[उर्दू भाषा]] में लिखे डायलॉग इतने मशहूर हुए कि उस दौरान प्रेमी और प्रेमिकाएं प्रेमपत्रों में मुग़ले आजम के संवादों के माध्यम से अपनी मोहब्बत का इजहार करने लगे थे। इस फ़िल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखक का फ़िल्म फेयर पुरस्कार दिया गया।&lt;br /&gt;
==पाकीज़ा (फ़िल्म)==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Pakeeza.jpeg|thumb|250px|पाकीज़ा|left]]&lt;br /&gt;
पाकीज़ा कमाल अमरोही का ड्रीम प्रोजेक्ट थी जिस पर उन्होंने [[1958]] में काम करना शुरू किया था। उस समय यह ब्लैक एंड व्हाइट में बनने वाली थी। कुछ समय बाद जब [[भारत]] में सिनेमास्कोप का प्रचलन शुरू हो गया तो उन्होंने [[1961]] में इसे सिनेमास्कोप रूप में बनाना शुरू किया लेकिन कमाल अमरोही का अपनी तीसरी पत्नी मीना कुमारी से अलगाव हो जाने के कारण फ़िल्म का निर्माण 1961-69 तक बंद रहा। बाद में किसी तरह उन्होंने मीना कुमारी को फ़िल्म में काम करने के लिए राज़ी कर लिया और आखिरकार 1971 में जाकर यह फ़िल्म पूरी हुई तथा फरवरी 1972 को रिलीज हुई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बेहतरीन संवाद, गीत-संगीत, दृश्यांकन और अभिनय से सजी इस फ़िल्म ने रिकार्डतोड़ कामयाबी हासिल की और आज यह फ़िल्म इतिहास की क्लासिक फ़िल्मों में गिनी जाती है। उन्होंने इस फ़िल्म के लिए एक गीत मौसम है आशिकाना.. भी लिखा था। जो बेहद मकबूल हुआ था। इस फ़िल्म के बाद कमाल अमरोही का फ़िल्मों से कुछ समय तक नाता टूटा रहा। [[1983]] में उन्होंने फिर फ़िल्म इंडस्ट्री का रुख़ किया और रज़िया सुल्तान फ़िल्म से अपनी निर्देशन क्षमता का लोहा मनवाया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==निधन==&lt;br /&gt;
अपने कमाल से दर्शकों को बांध देने वाली यह अजीम शख़्सियत [[11 फरवरी]] [[1993]] को इस दुनिया को अलविदा कह गयी।&lt;br /&gt;
==फ़िल्में==&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;bharattable-purple&amp;quot; width=&amp;quot;70%&amp;quot; align=&amp;quot;left&amp;quot;&lt;br /&gt;
|+ कमाल अमरोही की फ़िल्में &amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://www.imdb.com/name/nm0025399/|title=Kamal Amrohi|accessmonthday=21 मार्च|accessyear=2012 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher= |language=अंग्रेज़ी}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
! क्रमांक &lt;br /&gt;
! सन &lt;br /&gt;
! फ़िल्म&lt;br /&gt;
! कार्य&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 1. &lt;br /&gt;
|1938  		 &lt;br /&gt;
| जेलर   &lt;br /&gt;
|कहानी &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 2. &lt;br /&gt;
| 1939  		 &lt;br /&gt;
| पुकार&lt;br /&gt;
| लेखन &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 3. &lt;br /&gt;
| 1940	 	              &lt;br /&gt;
| मैं हारी &lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 4. &lt;br /&gt;
|1940	             &lt;br /&gt;
|भरोसा&lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 5. &lt;br /&gt;
| 1943 &lt;br /&gt;
| मज़ाक	             &lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 6.&lt;br /&gt;
|1945             &lt;br /&gt;
| फूल&lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 7. &lt;br /&gt;
| 1946 	 	              &lt;br /&gt;
| शाहजहाँ&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 8.&lt;br /&gt;
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| दायरा&lt;br /&gt;
| लेखन, निर्देशन&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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| [[मुग़ले आजम]]&lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|1972       &lt;br /&gt;
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|-&lt;br /&gt;
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| शंकर हुसैन&lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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| निर्देशन&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 14.&lt;br /&gt;
|1983             &lt;br /&gt;
| रज़िया सुल्तान&lt;br /&gt;
| लेखन, निर्देशन&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार= |प्रारम्भिक=प्रारम्भिक3 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.imdb.com/name/nm0025399/  कमाल अमरोही]&lt;br /&gt;
*[http://hindi.webdunia.com/%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%87%E0%A4%95-%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AC/%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%87%E0%A4%95-%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AC-%E0%A4%B8%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%96%E0%A4%BE-%E0%A4%A5%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A5%8B-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%A8-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%86-1090211048_1.htm  कमाल अमरोही : इक ख्वाब-सा देखा था जो पूरा न हुआ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/cinemaaza/cinema/memories/201_201_8201.html पाकीज़ा थी कमाल अमरोही की ड्रीम प्रोजेक्ट]&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{फ़िल्म निर्माता और निर्देशक}}&lt;br /&gt;
[[Category:सिनेमा]][[Category:कला कोश]][[Category:फ़िल्म निर्माता]][[Category:फ़िल्म निर्देशक]][[Category:सिनेमा कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;आशा चौधरी: /* वैवाहिक जीवन */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा कलाकार&lt;br /&gt;
|चित्र=Kamal-amrohi.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=कमाल अमरोही &lt;br /&gt;
|पूरा नाम=सैयद आमिर हैदर कमाल अमरोही &lt;br /&gt;
|प्रसिद्ध नाम=कमाल अमरोही &lt;br /&gt;
|अन्य नाम=&lt;br /&gt;
|जन्म= [[17 जनवरी]], [[1918]] &lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[अमरोहा]], [[उत्तर प्रदेश]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु=[[11 फरवरी]], [[1993]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=&lt;br /&gt;
|अभिभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=तीन (बानो, महमूदी, [[मीना कुमारी]])&lt;br /&gt;
|संतान=शानदार, ताज़दार और रुख़सार&lt;br /&gt;
|कर्म भूमि=[[भारत]]&lt;br /&gt;
|कर्म-क्षेत्र=गीतकार, पटकथा और संवाद लेखक तथा निर्माता एवं निर्देशक&lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ=&lt;br /&gt;
|मुख्य फ़िल्में='महल', 'पाकीज़ा' और 'रज़िया सुल्तान' आदि।&lt;br /&gt;
|विषय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ संवाद पुरस्कार: [[मुग़ल-ए-आजम]]&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=कमाल अमरोही ने [[1953]] में 'कमाल पिक्चर्स' और [[1958]] में [[कमालिस्तान स्टूडियो]] की स्थापना की।&lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
'''कमाल अमरोही''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Kamal Amrohi'', जन्म: [[17 जनवरी]], [[1918]] - मृत्यु: [[11 फ़रवरी]], [[1993]]) महल, पाकीज़ा और रज़िया सुल्तान जैसी भव्य कलात्मक फ़िल्मों को परदे पर काव्य की रचना करने वाले निर्माता-निर्देशक थे। कमाल अमरोही ने बेहतरीन गीतकार, पटकथा और संवाद लेखक तथा निर्माता एवं निर्देशक के रूप में भारतीय सिनेमा पर अपनी अमिट छाप छोड़ी और उसे एक दिशा देने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। पाकीज़ा उनकी ज़िंदगी का ड्रीम प्रोजेक्ट थी। अपने फ़िल्मी जीवन के आखिरी दौर में वह 'अंतिम मुग़ल' नाम से फ़िल्म बनाना चाहते थे, लेकिन उनका यह ख्वाब अधूरा ही रह गया।&lt;br /&gt;
==परिचय==&lt;br /&gt;
[[चित्र:कमाल अमरोही .jpeg|thumb|250px|कमाल अमरोही|left]]&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही का मूल नाम 'सैयद आमिर हैदर' था। [[17 जनवरी]] [[1918]] को [[उत्तर प्रदेश]] के [[अमरोहा]] के ज़मींदार [[परिवार]] में जन्मे कमाल अमरोही के [[मुम्बई]] तक पहुँचने और फिर सफलता का इतिहास रचने की कहानी किसी फ़िल्मी कहानी की भाँति है। बचपन में अपनी शरारतों से वह पूरे गाँव को परेशान करते थे। एक बार अपनी अम्मी के डाँटने पर उन्होंने वादा किया कि वह एक दिन मशहूर होंगे और उनके पल्लू को [[चाँदी]] के सिक्कों से भर देंगे। उनकी शरारतों से तंग होकर एक दिन उनके बड़े भाई ने उन्हें गुस्से में थप्पड़ रसीद कर दिया तो कमाल अमरोही नाराज़गी में घर से भागकर [[लाहौर]] पहुँच गए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही के लिए लाहौर उनके जीवन की दिशा बदलने वाला साबित हुआ। वहाँ उन्होंने 'प्राच्य भाषाओं' में मास्टर की डिग्री हासिल की और फिर एक [[उर्दू]] [[समाचार पत्र]] में मात्र 18 [[वर्ष]] की आयु में ही नियमित रूप से स्तम्भ लिखने लगे। उनकी प्रतिभा का सम्मान करते हुए अख़बार के सम्पादक ने उनका वेतन बढाकर 300 रुपए मासिक कर दिया, जो उस समय क़ाफी बड़ी रकम थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==कलकत्ता में==&lt;br /&gt;
अख़बार में कुछ समय तक काम करने के बाद वह [[कलकत्ता]] चले गए और फिर वहाँ से [[मुम्बई]] आ गए। लाहौर में उनकी मुलाक़ात प्रसिद्ध [[कुन्दनलाल सहगल|गायक, अभिनेता कुन्दनलाल सहगल]] से हुई थी, जो उनकी प्रतिभा को पहचानकर उन्हें फ़िल्मों में काम करने के लिए 'मिनर्वा मूवीटोन' के मालिक निर्माता-निर्देशक [[सोहराब मोदी]] के पास ले गये। इसी समय उनकी एक लघु कथा ‘सपनों का महल’ से निर्माता-निर्देशक और कहानीकार '[[ख़्वाजा अहमद अब्बास]]' प्रभावित हुए।&lt;br /&gt;
==वैवाहिक जीवन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Meena Kumari Kamal Amrohi 3.jpg|thumb|250px|कमाल अमरोही-मीना कुमारी|right]]&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही ने तीन शादियां कीं। उनकी पहली बीवी का नाम 'बानो' था, जो [[नर्गिस]] की माँ जद्दनबाई की नौकरानी थी। बानो की अस्थमा से मौत होने के बाद उन्होंने 'महमूदी' से निकाह किया। कमाल अमरोही ने तीसरी [[शादी]] [[अभिनेत्री]] [[मीना कुमारी]] से की जो उनसे उम्र में लगभग पंद्रह [[साल]] छोटी थीं। दोनों की मुलाकात एक फ़िल्म के सेट पर हुई थी और उनके बीच प्यार हो गया। उस समय कमाल अमरोही 34 साल के थे जबकि मीना कुमारी की उम्र 19 साल थी। [[1952]] में दोनों ने विवाह कर लिया लेकिन यह संबंध ज्यादा दिन तक नहीं चल पाया और उनका अलगाव हो गया। मीना कुमारी के प्रति कमाल अमरोही का प्रेम शायद आखिर तक बरकरार रहा तभी तो उन्हें मौत के बाद क़ब्रिस्तान में मीना कुमारी की क़ब्र के बगल में दफनाया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सवांद और गीतकार==&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही को पता चला कि [[सोहराब मोदी]] को एक कहानी की तलाश है। उनकी कहानी पर आधारित फ़िल्म ‘पुकार’ (1939) सुपर हिट रही। '[[नसीम बानो]]' और 'चंद्रमोहन' अभिनीत इस फ़िल्म के लिए उन्होंने चार गीत लिखे- &lt;br /&gt;
#धोया महोबे घाट हे हो धोबिया रे.., &lt;br /&gt;
#दिल में तू आँखों में तू मेनका.., &lt;br /&gt;
#गीत सुनो वाह गीत सैयां.., &lt;br /&gt;
#काहे को मोहे छेड़े रे बेईमनवा.. &lt;br /&gt;
इसके बाद तो फ़िल्मों के लिए कहानी, पटकथा और संवाद लिखने का उनका सिलसिला चल पड़ा और उन्होंने जेलर ([[1938]]), मैं हारी ([[1940]]), भरोसा ([[1940]]), मज़ाक ([[1943]]), फूल ([[1945]]), शाहजहां ([[1946]]), महल ([[1949]]), दायरा ([[1953]]), दिल अपना और प्रीत पराई ([[1960]]), [[मुग़ले आजम]] ([[1960]]), पाकीज़ा ([[1971]]), शंकर हुसैन ([[1977]]) और रज़िया सुल्तान ([[1983]]), भरोसा ([[1940]]) जैसी फ़िल्मों के लिए कहानी, पटकथा और संवाद लिखने का काम किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही ने बेहद चुनिंदा फ़िल्मों के लिए काम किया लेकिन जो भी काम किया पूरी तबीयत और जुनून के साथ किया। उनके काम पर उनके व्यक्तित्व की छाप रहती थी। यही वजह है कि फ़िल्में बनाने की उनकी रफ़्तार काफ़ी धीमी रहती थी और उन्हें इसके लिए आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ता था।&lt;br /&gt;
==महल (फ़िल्म)==&lt;br /&gt;
निर्माता [[अशोक कुमार]] की फ़िल्म 'महल' कमाल अमरोही के कैरियर का महत्त्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। इस फ़िल्म के निर्देशन का जिम्मा उन्हें सौंपा गया। रहस्य और रोमांस के ताने-बाने से बुनी मधुर गीत-संगीत और ध्वनि के कल्पनामय इस्तेमाल से बनी यह फ़िल्म सुपरहिट रही और इसी के साथ बॉलीवुड में हॉरर और सस्पेंस फ़िल्मों के निर्माण का सिलसिला चल पड़ा। फ़िल्म की जबरदस्त कामयाबी ने नायिका [[मधुबाला]] और गायिका [[लता मंगेशकर]] को फ़िल्म इंडस्ट्री में स्थापित कर दिया।&lt;br /&gt;
==कमालिस्तान स्टूडियो की स्थापना==&lt;br /&gt;
महल फ़िल्म की कामयाबी के बाद कमाल अमरोही ने 1953 में 'कमाल पिक्चर्स' और 1958 में [[कमालिस्तान स्टूडियो]] की स्थापना की। कमाल पिक्चर्स के बैनर तले उन्होंने अभिनेत्री पत्नी मीना कुमारी को लेकर 'दायरा' फ़िल्म का निर्माण किया लेकिन [[भारत]] की कला फ़िल्मों में मानी जाने वाली यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं चल पाई। इसी दौरान निर्माता-निर्देशक [[के.आसिफ]] अपनी महत्वाकांक्षी फ़िल्म [[मुग़ल-ए-आजम]] के निर्माण में व्यस्त थे। इस फ़िल्म के लिए वजाहत मिर्जा संवाद लिख रहे थे लेकिन आसिफ को लगा कि एक ऐसे संवाद लेखक की ज़रूरत है जिसके लिखे डायलॉग दर्शकों के दिमाग से बरसों बरस नहीं निकल पाएं और इसके लिए उन्हें कमाल अमरोही से ज्यादा उपयुक्त व्यक्ति कोई नहीं लगा। उन्होंने उन्हें अपने चार संवाद लेखकों में शामिल कर लिया। उनके [[उर्दू भाषा]] में लिखे डायलॉग इतने मशहूर हुए कि उस दौरान प्रेमी और प्रेमिकाएं प्रेमपत्रों में मुग़ले आजम के संवादों के माध्यम से अपनी मोहब्बत का इजहार करने लगे थे। इस फ़िल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखक का फ़िल्म फेयर पुरस्कार दिया गया।&lt;br /&gt;
==पाकीज़ा (फ़िल्म)==&lt;br /&gt;
पाकीज़ा कमाल अमरोही का ड्रीम प्रोजेक्ट थी जिस पर उन्होंने [[1958]] में काम करना शुरू किया था। उस समय यह ब्लैक एंड व्हाइट में बनने वाली थी। कुछ समय बाद जब [[भारत]] में सिनेमास्कोप का प्रचलन शुरू हो गया तो उन्होंने [[1961]] में इसे सिनेमास्कोप रूप में बनाना शुरू किया लेकिन कमाल अमरोही का अपनी तीसरी पत्नी मीना कुमारी से अलगाव हो जाने के कारण फ़िल्म का निर्माण 1961-69 तक बंद रहा। बाद में किसी तरह उन्होंने मीना कुमारी को फ़िल्म में काम करने के लिए राज़ी कर लिया और आखिरकार 1971 में जाकर यह फ़िल्म पूरी हुई तथा फरवरी 1972 को रिलीज हुई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बेहतरीन संवाद, गीत-संगीत, दृश्यांकन और अभिनय से सजी इस फ़िल्म ने रिकार्डतोड़ कामयाबी हासिल की और आज यह फ़िल्म इतिहास की क्लासिक फ़िल्मों में गिनी जाती है। उन्होंने इस फ़िल्म के लिए एक गीत मौसम है आशिकाना.. भी लिखा था। जो बेहद मकबूल हुआ था। इस फ़िल्म के बाद कमाल अमरोही का फ़िल्मों से कुछ समय तक नाता टूटा रहा। [[1983]] में उन्होंने फिर फ़िल्म इंडस्ट्री का रुख़ किया और रज़िया सुल्तान फ़िल्म से अपनी निर्देशन क्षमता का लोहा मनवाया।&lt;br /&gt;
==निधन==&lt;br /&gt;
अपने कमाल से दर्शकों को बांध देने वाली यह अजीम शख़्सियत [[11 फरवरी]] [[1993]] को इस दुनिया को अलविदा कह गयी।&lt;br /&gt;
==फ़िल्में==&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;bharattable-purple&amp;quot; width=&amp;quot;70%&amp;quot; align=&amp;quot;left&amp;quot;&lt;br /&gt;
|+ कमाल अमरोही की फ़िल्में &amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://www.imdb.com/name/nm0025399/|title=Kamal Amrohi|accessmonthday=21 मार्च|accessyear=2012 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher= |language=अंग्रेज़ी}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
! क्रमांक &lt;br /&gt;
! सन &lt;br /&gt;
! फ़िल्म&lt;br /&gt;
! कार्य&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 1. &lt;br /&gt;
|1938  		 &lt;br /&gt;
| जेलर   &lt;br /&gt;
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|-&lt;br /&gt;
| 2. &lt;br /&gt;
| 1939  		 &lt;br /&gt;
| पुकार&lt;br /&gt;
| लेखन &lt;br /&gt;
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| 1940	 	              &lt;br /&gt;
| मैं हारी &lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
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| 4. &lt;br /&gt;
|1940	             &lt;br /&gt;
|भरोसा&lt;br /&gt;
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| 1943 &lt;br /&gt;
| मज़ाक	             &lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
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| 6.&lt;br /&gt;
|1945             &lt;br /&gt;
| फूल&lt;br /&gt;
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| 1946 	 	              &lt;br /&gt;
| शाहजहाँ&lt;br /&gt;
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| 8.&lt;br /&gt;
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| निर्देशन&lt;br /&gt;
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| 10.&lt;br /&gt;
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| [[मुग़ले आजम]]&lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
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|-&lt;br /&gt;
| 12.&lt;br /&gt;
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| शंकर हुसैन&lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 13.&lt;br /&gt;
|1979             &lt;br /&gt;
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| रज़िया सुल्तान&lt;br /&gt;
| लेखन, निर्देशन&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
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{{लेख प्रगति|आधार= |प्रारम्भिक=प्रारम्भिक3 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.imdb.com/name/nm0025399/  कमाल अमरोही]&lt;br /&gt;
*[http://hindi.webdunia.com/%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%87%E0%A4%95-%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AC/%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%87%E0%A4%95-%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AC-%E0%A4%B8%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%96%E0%A4%BE-%E0%A4%A5%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A5%8B-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%A8-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%86-1090211048_1.htm  कमाल अमरोही : इक ख्वाब-सा देखा था जो पूरा न हुआ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/cinemaaza/cinema/memories/201_201_8201.html पाकीज़ा थी कमाल अमरोही की ड्रीम प्रोजेक्ट]&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{फ़िल्म निर्माता और निर्देशक}}&lt;br /&gt;
[[Category:सिनेमा]][[Category:कला कोश]][[Category:फ़िल्म निर्माता]][[Category:फ़िल्म निर्देशक]][[Category:सिनेमा कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
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		<title>कमाल अमरोही</title>
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		<updated>2026-05-09T05:45:36Z</updated>

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&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा कलाकार&lt;br /&gt;
|चित्र=Kamal-amrohi.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=कमाल अमरोही &lt;br /&gt;
|पूरा नाम=सैयद आमिर हैदर कमाल अमरोही &lt;br /&gt;
|प्रसिद्ध नाम=कमाल अमरोही &lt;br /&gt;
|अन्य नाम=&lt;br /&gt;
|जन्म= [[17 जनवरी]], [[1918]] &lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[अमरोहा]], [[उत्तर प्रदेश]]&lt;br /&gt;
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|मृत्यु स्थान=&lt;br /&gt;
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|संतान=शानदार, ताज़दार और रुख़सार&lt;br /&gt;
|कर्म भूमि=[[भारत]]&lt;br /&gt;
|कर्म-क्षेत्र=गीतकार, पटकथा और संवाद लेखक तथा निर्माता एवं निर्देशक&lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ=&lt;br /&gt;
|मुख्य फ़िल्में='महल', 'पाकीज़ा' और 'रज़िया सुल्तान' आदि।&lt;br /&gt;
|विषय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ संवाद पुरस्कार: [[मुग़ल-ए-आजम]]&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=कमाल अमरोही ने [[1953]] में 'कमाल पिक्चर्स' और [[1958]] में [[कमालिस्तान स्टूडियो]] की स्थापना की।&lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
'''कमाल अमरोही''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Kamal Amrohi'', जन्म: [[17 जनवरी]], [[1918]] - मृत्यु: [[11 फ़रवरी]], [[1993]]) महल, पाकीज़ा और रज़िया सुल्तान जैसी भव्य कलात्मक फ़िल्मों को परदे पर काव्य की रचना करने वाले निर्माता-निर्देशक थे। कमाल अमरोही ने बेहतरीन गीतकार, पटकथा और संवाद लेखक तथा निर्माता एवं निर्देशक के रूप में भारतीय सिनेमा पर अपनी अमिट छाप छोड़ी और उसे एक दिशा देने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। पाकीज़ा उनकी ज़िंदगी का ड्रीम प्रोजेक्ट थी। अपने फ़िल्मी जीवन के आखिरी दौर में वह 'अंतिम मुग़ल' नाम से फ़िल्म बनाना चाहते थे, लेकिन उनका यह ख्वाब अधूरा ही रह गया।&lt;br /&gt;
==परिचय==&lt;br /&gt;
[[चित्र:कमाल अमरोही .jpeg|thumb|250px|कमाल अमरोही|left]]&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही का मूल नाम 'सैयद आमिर हैदर' था। [[17 जनवरी]] [[1918]] को [[उत्तर प्रदेश]] के [[अमरोहा]] के ज़मींदार [[परिवार]] में जन्मे कमाल अमरोही के [[मुम्बई]] तक पहुँचने और फिर सफलता का इतिहास रचने की कहानी किसी फ़िल्मी कहानी की भाँति है। बचपन में अपनी शरारतों से वह पूरे गाँव को परेशान करते थे। एक बार अपनी अम्मी के डाँटने पर उन्होंने वादा किया कि वह एक दिन मशहूर होंगे और उनके पल्लू को [[चाँदी]] के सिक्कों से भर देंगे। उनकी शरारतों से तंग होकर एक दिन उनके बड़े भाई ने उन्हें गुस्से में थप्पड़ रसीद कर दिया तो कमाल अमरोही नाराज़गी में घर से भागकर [[लाहौर]] पहुँच गए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही के लिए लाहौर उनके जीवन की दिशा बदलने वाला साबित हुआ। वहाँ उन्होंने 'प्राच्य भाषाओं' में मास्टर की डिग्री हासिल की और फिर एक [[उर्दू]] [[समाचार पत्र]] में मात्र 18 [[वर्ष]] की आयु में ही नियमित रूप से स्तम्भ लिखने लगे। उनकी प्रतिभा का सम्मान करते हुए अख़बार के सम्पादक ने उनका वेतन बढाकर 300 रुपए मासिक कर दिया, जो उस समय क़ाफी बड़ी रकम थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==कलकत्ता में==&lt;br /&gt;
अख़बार में कुछ समय तक काम करने के बाद वह [[कलकत्ता]] चले गए और फिर वहाँ से [[मुम्बई]] आ गए। लाहौर में उनकी मुलाक़ात प्रसिद्ध [[कुन्दनलाल सहगल|गायक, अभिनेता कुन्दनलाल सहगल]] से हुई थी, जो उनकी प्रतिभा को पहचानकर उन्हें फ़िल्मों में काम करने के लिए 'मिनर्वा मूवीटोन' के मालिक निर्माता-निर्देशक [[सोहराब मोदी]] के पास ले गये। इसी समय उनकी एक लघु कथा ‘सपनों का महल’ से निर्माता-निर्देशक और कहानीकार '[[ख़्वाजा अहमद अब्बास]]' प्रभावित हुए।&lt;br /&gt;
==वैवाहिक जीवन==&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही ने तीन शादियां कीं। उनकी पहली बीवी का नाम 'बानो' था, जो [[नर्गिस]] की माँ जद्दनबाई की नौकरानी थी। बानो की अस्थमा से मौत होने के बाद उन्होंने 'महमूदी' से निकाह किया। कमाल अमरोही ने तीसरी [[शादी]] [[अभिनेत्री]] [[मीना कुमारी]] से की जो उनसे उम्र में लगभग पंद्रह [[साल]] छोटी थीं। दोनों की मुलाकात एक फ़िल्म के सेट पर हुई थी और उनके बीच प्यार हो गया। उस समय कमाल अमरोही 34 साल के थे जबकि मीना कुमारी की उम्र 19 साल थी। [[1952]] में दोनों ने विवाह कर लिया लेकिन यह संबंध ज्यादा दिन तक नहीं चल पाया और उनका अलगाव हो गया। मीना कुमारी के प्रति कमाल अमरोही का प्रेम शायद आखिर तक बरकरार रहा तभी तो उन्हें मौत के बाद क़ब्रिस्तान में मीना कुमारी की क़ब्र के बगल में दफनाया गया। &lt;br /&gt;
==सवांद और गीतकार==&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही को पता चला कि [[सोहराब मोदी]] को एक कहानी की तलाश है। उनकी कहानी पर आधारित फ़िल्म ‘पुकार’ (1939) सुपर हिट रही। '[[नसीम बानो]]' और 'चंद्रमोहन' अभिनीत इस फ़िल्म के लिए उन्होंने चार गीत लिखे- &lt;br /&gt;
#धोया महोबे घाट हे हो धोबिया रे.., &lt;br /&gt;
#दिल में तू आँखों में तू मेनका.., &lt;br /&gt;
#गीत सुनो वाह गीत सैयां.., &lt;br /&gt;
#काहे को मोहे छेड़े रे बेईमनवा.. &lt;br /&gt;
इसके बाद तो फ़िल्मों के लिए कहानी, पटकथा और संवाद लिखने का उनका सिलसिला चल पड़ा और उन्होंने जेलर ([[1938]]), मैं हारी ([[1940]]), भरोसा ([[1940]]), मज़ाक ([[1943]]), फूल ([[1945]]), शाहजहां ([[1946]]), महल ([[1949]]), दायरा ([[1953]]), दिल अपना और प्रीत पराई ([[1960]]), [[मुग़ले आजम]] ([[1960]]), पाकीज़ा ([[1971]]), शंकर हुसैन ([[1977]]) और रज़िया सुल्तान ([[1983]]), भरोसा ([[1940]]) जैसी फ़िल्मों के लिए कहानी, पटकथा और संवाद लिखने का काम किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कमाल अमरोही ने बेहद चुनिंदा फ़िल्मों के लिए काम किया लेकिन जो भी काम किया पूरी तबीयत और जुनून के साथ किया। उनके काम पर उनके व्यक्तित्व की छाप रहती थी। यही वजह है कि फ़िल्में बनाने की उनकी रफ़्तार काफ़ी धीमी रहती थी और उन्हें इसके लिए आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ता था।&lt;br /&gt;
==महल (फ़िल्म)==&lt;br /&gt;
निर्माता [[अशोक कुमार]] की फ़िल्म 'महल' कमाल अमरोही के कैरियर का महत्त्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। इस फ़िल्म के निर्देशन का जिम्मा उन्हें सौंपा गया। रहस्य और रोमांस के ताने-बाने से बुनी मधुर गीत-संगीत और ध्वनि के कल्पनामय इस्तेमाल से बनी यह फ़िल्म सुपरहिट रही और इसी के साथ बॉलीवुड में हॉरर और सस्पेंस फ़िल्मों के निर्माण का सिलसिला चल पड़ा। फ़िल्म की जबरदस्त कामयाबी ने नायिका [[मधुबाला]] और गायिका [[लता मंगेशकर]] को फ़िल्म इंडस्ट्री में स्थापित कर दिया।&lt;br /&gt;
==कमालिस्तान स्टूडियो की स्थापना==&lt;br /&gt;
महल फ़िल्म की कामयाबी के बाद कमाल अमरोही ने 1953 में 'कमाल पिक्चर्स' और 1958 में [[कमालिस्तान स्टूडियो]] की स्थापना की। कमाल पिक्चर्स के बैनर तले उन्होंने अभिनेत्री पत्नी मीना कुमारी को लेकर 'दायरा' फ़िल्म का निर्माण किया लेकिन [[भारत]] की कला फ़िल्मों में मानी जाने वाली यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं चल पाई। इसी दौरान निर्माता-निर्देशक [[के.आसिफ]] अपनी महत्वाकांक्षी फ़िल्म [[मुग़ल-ए-आजम]] के निर्माण में व्यस्त थे। इस फ़िल्म के लिए वजाहत मिर्जा संवाद लिख रहे थे लेकिन आसिफ को लगा कि एक ऐसे संवाद लेखक की ज़रूरत है जिसके लिखे डायलॉग दर्शकों के दिमाग से बरसों बरस नहीं निकल पाएं और इसके लिए उन्हें कमाल अमरोही से ज्यादा उपयुक्त व्यक्ति कोई नहीं लगा। उन्होंने उन्हें अपने चार संवाद लेखकों में शामिल कर लिया। उनके [[उर्दू भाषा]] में लिखे डायलॉग इतने मशहूर हुए कि उस दौरान प्रेमी और प्रेमिकाएं प्रेमपत्रों में मुग़ले आजम के संवादों के माध्यम से अपनी मोहब्बत का इजहार करने लगे थे। इस फ़िल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखक का फ़िल्म फेयर पुरस्कार दिया गया।&lt;br /&gt;
==पाकीज़ा (फ़िल्म)==&lt;br /&gt;
पाकीज़ा कमाल अमरोही का ड्रीम प्रोजेक्ट थी जिस पर उन्होंने [[1958]] में काम करना शुरू किया था। उस समय यह ब्लैक एंड व्हाइट में बनने वाली थी। कुछ समय बाद जब [[भारत]] में सिनेमास्कोप का प्रचलन शुरू हो गया तो उन्होंने [[1961]] में इसे सिनेमास्कोप रूप में बनाना शुरू किया लेकिन कमाल अमरोही का अपनी तीसरी पत्नी मीना कुमारी से अलगाव हो जाने के कारण फ़िल्म का निर्माण 1961-69 तक बंद रहा। बाद में किसी तरह उन्होंने मीना कुमारी को फ़िल्म में काम करने के लिए राज़ी कर लिया और आखिरकार 1971 में जाकर यह फ़िल्म पूरी हुई तथा फरवरी 1972 को रिलीज हुई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बेहतरीन संवाद, गीत-संगीत, दृश्यांकन और अभिनय से सजी इस फ़िल्म ने रिकार्डतोड़ कामयाबी हासिल की और आज यह फ़िल्म इतिहास की क्लासिक फ़िल्मों में गिनी जाती है। उन्होंने इस फ़िल्म के लिए एक गीत मौसम है आशिकाना.. भी लिखा था। जो बेहद मकबूल हुआ था। इस फ़िल्म के बाद कमाल अमरोही का फ़िल्मों से कुछ समय तक नाता टूटा रहा। [[1983]] में उन्होंने फिर फ़िल्म इंडस्ट्री का रुख़ किया और रज़िया सुल्तान फ़िल्म से अपनी निर्देशन क्षमता का लोहा मनवाया।&lt;br /&gt;
==निधन==&lt;br /&gt;
अपने कमाल से दर्शकों को बांध देने वाली यह अजीम शख़्सियत [[11 फरवरी]] [[1993]] को इस दुनिया को अलविदा कह गयी।&lt;br /&gt;
==फ़िल्में==&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;bharattable-purple&amp;quot; width=&amp;quot;70%&amp;quot; align=&amp;quot;left&amp;quot;&lt;br /&gt;
|+ कमाल अमरोही की फ़िल्में &amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://www.imdb.com/name/nm0025399/|title=Kamal Amrohi|accessmonthday=21 मार्च|accessyear=2012 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher= |language=अंग्रेज़ी}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
! क्रमांक &lt;br /&gt;
! सन &lt;br /&gt;
! फ़िल्म&lt;br /&gt;
! कार्य&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 1. &lt;br /&gt;
|1938  		 &lt;br /&gt;
| जेलर   &lt;br /&gt;
|कहानी &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 2. &lt;br /&gt;
| 1939  		 &lt;br /&gt;
| पुकार&lt;br /&gt;
| लेखन &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 3. &lt;br /&gt;
| 1940	 	              &lt;br /&gt;
| मैं हारी &lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 4. &lt;br /&gt;
|1940	             &lt;br /&gt;
|भरोसा&lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 5. &lt;br /&gt;
| 1943 &lt;br /&gt;
| मज़ाक	             &lt;br /&gt;
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| 6.&lt;br /&gt;
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| फूल&lt;br /&gt;
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| 8.&lt;br /&gt;
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| महल&lt;br /&gt;
| निर्देशन&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 9.&lt;br /&gt;
|1953            &lt;br /&gt;
| दायरा&lt;br /&gt;
| लेखन, निर्देशन&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 10.&lt;br /&gt;
|1960           &lt;br /&gt;
| [[मुग़ले आजम]]&lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 11.&lt;br /&gt;
|1972       &lt;br /&gt;
| पाकीज़ा&lt;br /&gt;
| लेखन, निर्देशन&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 12.&lt;br /&gt;
|1977             &lt;br /&gt;
| शंकर हुसैन&lt;br /&gt;
| संवाद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 13.&lt;br /&gt;
|1979             &lt;br /&gt;
| मजनूं&lt;br /&gt;
| निर्देशन&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 14.&lt;br /&gt;
|1983             &lt;br /&gt;
| रज़िया सुल्तान&lt;br /&gt;
| लेखन, निर्देशन&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार= |प्रारम्भिक=प्रारम्भिक3 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.imdb.com/name/nm0025399/  कमाल अमरोही]&lt;br /&gt;
*[http://hindi.webdunia.com/%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%87%E0%A4%95-%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AC/%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%87%E0%A4%95-%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AC-%E0%A4%B8%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%96%E0%A4%BE-%E0%A4%A5%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A5%8B-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%A8-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%86-1090211048_1.htm  कमाल अमरोही : इक ख्वाब-सा देखा था जो पूरा न हुआ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/cinemaaza/cinema/memories/201_201_8201.html पाकीज़ा थी कमाल अमरोही की ड्रीम प्रोजेक्ट]&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{फ़िल्म निर्माता और निर्देशक}}&lt;br /&gt;
[[Category:सिनेमा]][[Category:कला कोश]][[Category:फ़िल्म निर्माता]][[Category:फ़िल्म निर्देशक]][[Category:सिनेमा कोश]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>आशा चौधरी</name></author>
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