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	<title>Bharatkosh - सदस्य द्वारा योगदान [hi]</title>
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		<title>सदस्य वार्ता:गोविन्द राम</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* पेज देखें */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;__TOC__&lt;br /&gt;
== सिल्क रूट ==&lt;br /&gt;
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'सिल्क रूट'  ('रेशम मार्ग') का लेख तैयार करें देखें [[समरकन्द]] [[चित्र:Admin-logo.jpg|प्रशासक|link=User:आदित्य चौधरी]] [[User:आदित्य चौधरी|आदित्य चौधरी &amp;lt;sub style=&amp;quot;color:#8f30f1&amp;quot;&amp;gt;प्रशासक&amp;lt;/sub&amp;gt;]] '''.''' &amp;lt;sub&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:आदित्य चौधरी/2|वार्ता]]&amp;lt;/sub&amp;gt; 17:18, 2 अप्रॅल 2012 (IST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== शाह शुजा ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'शाह शुजा' बहुविकल्पी बनेगा। देखें: [[खजुहा]] , [[शाहशुजा]] [[चित्र:Admin-logo.jpg|प्रशासक|link=User:आदित्य चौधरी]] [[User:आदित्य चौधरी|आदित्य चौधरी &amp;lt;sub style=&amp;quot;color:#8f30f1&amp;quot;&amp;gt;प्रशासक&amp;lt;/sub&amp;gt;]] '''.''' &amp;lt;sub&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:आदित्य चौधरी/2|वार्ता]]&amp;lt;/sub&amp;gt; 20:34, 2 अप्रॅल 2012 (IST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== नया लेख ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शास्त्रीय गायक पं. कुमार गंधर्व का लेख तैयार करें [[चित्र:Admin-logo.jpg|प्रशासक|link=User:आदित्य चौधरी]] [[User:आदित्य चौधरी|आदित्य चौधरी &amp;lt;sub style=&amp;quot;color:#8f30f1&amp;quot;&amp;gt;प्रशासक&amp;lt;/sub&amp;gt;]] '''.''' &amp;lt;sub&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:आदित्य चौधरी/2|वार्ता]]&amp;lt;/sub&amp;gt; 21:57, 2 अप्रॅल 2012 (IST)&lt;br /&gt;
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== पेज देखें ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[सदस्य:प्रीति चौधरी/अभ्यास पन्ना2]], [[सदस्य:प्रीति चौधरी/अभ्यास पन्ना3]], [[सदस्य:प्रीति चौधरी/अभ्यास पन्ना5]] पेज देखें।[[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:प्रीति चौधरी]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:प्रीति चौधरी|प्रीति चौधरी]] . &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:प्रीति चौधरी|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  11:09, 27 अप्रॅल 2012 (IST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== पेज देखें ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पेज [[नागार्जुन बौद्धाचार्य]], [[निम्बार्काचार्य]], [[वात्स्यायन]], [[अरबिंदो घोष]], [[रघुनाथ शिरोमणि]], [[अभिनवगुप्त]], [[अकलंकदेव]] देखें।[[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:प्रीति चौधरी]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:प्रीति चौधरी|प्रीति चौधरी]] . &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:प्रीति चौधरी|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  11:07, 1 मई 2012 (IST)&lt;br /&gt;
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== पन्ने देखें==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कृपया [[इबने अरबी]], [[उदयन दार्शनिक|उदयन]], [[उद्योतकर]], [[सर्वपल्ली राधाकृष्णन का दर्शन]], [[कुमारिल भट्ट]], [[चाणक्य]], [[माणिक्यनन्दि]], [[गंगेशोपाध्याय]], [[कृष्णचन्द्र भट्टाचार्य]], [[पतंजलि (महाभाष्यकार)]], [[मध्वाचार्य]], [[गौडपाद]], [[चैतन्य महाप्रभु]], [[जैमिनि]], [[रामानुज]] आदि पन्ने देखें। [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:फ़ौज़िया ख़ान]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:फ़ौज़िया ख़ान|फ़ौज़िया ख़ान]] . &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:फ़ौज़िया ख़ान|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  17:08, 1 मई 2012 (IST)&lt;br /&gt;
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== पेज देखें ==&lt;br /&gt;
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[[पतंजलि (योगसूत्रकार)]], [[प्रभाकर मिश्र]], [[पाणिनि]], [[धर्मकीर्ति बौद्धाचार्य]] पेज देखें।[[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:प्रीति चौधरी]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:प्रीति चौधरी|प्रीति चौधरी]] . &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:प्रीति चौधरी|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  11:08, 3 मई 2012 (IST)&lt;br /&gt;
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== Help upload photo ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
Hello, I'm new user. How do I upload a photo? Please help. --[[सदस्य:Neonlight|Neonlight]] 09:51, 4 मई 2012 (IST)&lt;br /&gt;
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== सूचना बक्सा देखें ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कृपया [[चाचा नेहरू बाल संग्रहालय तिरुअनंतपुरम]], [[गुड़ियों का संग्रहालय दिल्ली]], [[केलकर संग्रहालय]], [[केंद्रीय संग्रहालय इन्दौर]], [[कालीबंगा संग्रहालय]], [[आनंद भवन]] के पन्नों में सूचना बक्सा देखें। [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:फ़ौज़िया ख़ान]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:फ़ौज़िया ख़ान|फ़ौज़िया ख़ान]] . &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:फ़ौज़िया ख़ान|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  18:23, 8 मई 2012 (IST)&lt;br /&gt;
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== सूचना बक्सा देखें  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कृपया [[हस्त शिल्पकला संग्रहालय दिल्ली]], [[राष्ट्रीय संग्रहालय दिल्ली]], [[राष्ट्रीय रेल संग्रहालय दिल्ली]], [[राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय]], [[रणजीत सिंह संग्रहालय]], [[द प्रिंस ऑफ़ वेल्स संग्रहालय, [[सारनाथ संग्रहालय]], [[राजकीय संग्रहालय त्रिपुरा]], [[पटना संग्रहालय]] के पन्नों में सूचना बक्सा देखें। [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:फ़ौज़िया ख़ान]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:फ़ौज़िया ख़ान|फ़ौज़िया ख़ान]] . &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:फ़ौज़िया ख़ान|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  18:31, 9 मई 2012 (IST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सामान्य ज्ञान ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[सदस्य:प्रीति चौधरी/अभ्यास पन्ना]] और [[सदस्य:रविन्द्र प्रसाद/अभ्यास]] की जाँच कर लें।[[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:रविन्द्र प्रसाद]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:रविन्द्र प्रसाद|रविन्द्र   प्रसाद]] . &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:रविन्द्र प्रसाद|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt; 17:09, 20 मई 2012 (IST)&lt;br /&gt;
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== सूचना बक्सा देखें   ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[क़ुर्रतुलऐन हैदर]], [[नागार्जुन]], [[यू. आर. अनंतमूर्ति]] सूचना बक्सा देखें।[[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:प्रीति चौधरी]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:प्रीति चौधरी|प्रीति चौधरी]] . &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:प्रीति चौधरी|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  18:11, 29 मई 2012 (IST)&lt;br /&gt;
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[[घाट]], [[तेलुगु साहित्य]], [[केकड़ा]] पेज देखें।[[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:प्रीति चौधरी]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:प्रीति चौधरी|प्रीति चौधरी]] . &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:प्रीति चौधरी|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  18:14, 29 मई 2012 (IST)&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
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		<title>सदस्य वार्ता:गोविन्द राम</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* सूचना बक्सा देखें   */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;__TOC__&lt;br /&gt;
== सिल्क रूट ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'सिल्क रूट'  ('रेशम मार्ग') का लेख तैयार करें देखें [[समरकन्द]] [[चित्र:Admin-logo.jpg|प्रशासक|link=User:आदित्य चौधरी]] [[User:आदित्य चौधरी|आदित्य चौधरी &amp;lt;sub style=&amp;quot;color:#8f30f1&amp;quot;&amp;gt;प्रशासक&amp;lt;/sub&amp;gt;]] '''.''' &amp;lt;sub&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:आदित्य चौधरी/2|वार्ता]]&amp;lt;/sub&amp;gt; 17:18, 2 अप्रॅल 2012 (IST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== शाह शुजा ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'शाह शुजा' बहुविकल्पी बनेगा। देखें: [[खजुहा]] , [[शाहशुजा]] [[चित्र:Admin-logo.jpg|प्रशासक|link=User:आदित्य चौधरी]] [[User:आदित्य चौधरी|आदित्य चौधरी &amp;lt;sub style=&amp;quot;color:#8f30f1&amp;quot;&amp;gt;प्रशासक&amp;lt;/sub&amp;gt;]] '''.''' &amp;lt;sub&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:आदित्य चौधरी/2|वार्ता]]&amp;lt;/sub&amp;gt; 20:34, 2 अप्रॅल 2012 (IST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== नया लेख ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शास्त्रीय गायक पं. कुमार गंधर्व का लेख तैयार करें [[चित्र:Admin-logo.jpg|प्रशासक|link=User:आदित्य चौधरी]] [[User:आदित्य चौधरी|आदित्य चौधरी &amp;lt;sub style=&amp;quot;color:#8f30f1&amp;quot;&amp;gt;प्रशासक&amp;lt;/sub&amp;gt;]] '''.''' &amp;lt;sub&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:आदित्य चौधरी/2|वार्ता]]&amp;lt;/sub&amp;gt; 21:57, 2 अप्रॅल 2012 (IST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== पेज देखें ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[सदस्य:प्रीति चौधरी/अभ्यास पन्ना2]], [[सदस्य:प्रीति चौधरी/अभ्यास पन्ना3]], [[सदस्य:प्रीति चौधरी/अभ्यास पन्ना5]] पेज देखें।[[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:प्रीति चौधरी]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:प्रीति चौधरी|प्रीति चौधरी]] . &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:प्रीति चौधरी|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  11:09, 27 अप्रॅल 2012 (IST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== पेज देखें ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पेज [[नागार्जुन बौद्धाचार्य]], [[निम्बार्काचार्य]], [[वात्स्यायन]], [[अरबिंदो घोष]], [[रघुनाथ शिरोमणि]], [[अभिनवगुप्त]], [[अकलंकदेव]] देखें।[[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:प्रीति चौधरी]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:प्रीति चौधरी|प्रीति चौधरी]] . &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:प्रीति चौधरी|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  11:07, 1 मई 2012 (IST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== पन्ने देखें==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कृपया [[इबने अरबी]], [[उदयन दार्शनिक|उदयन]], [[उद्योतकर]], [[सर्वपल्ली राधाकृष्णन का दर्शन]], [[कुमारिल भट्ट]], [[चाणक्य]], [[माणिक्यनन्दि]], [[गंगेशोपाध्याय]], [[कृष्णचन्द्र भट्टाचार्य]], [[पतंजलि (महाभाष्यकार)]], [[मध्वाचार्य]], [[गौडपाद]], [[चैतन्य महाप्रभु]], [[जैमिनि]], [[रामानुज]] आदि पन्ने देखें। [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:फ़ौज़िया ख़ान]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:फ़ौज़िया ख़ान|फ़ौज़िया ख़ान]] . &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:फ़ौज़िया ख़ान|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  17:08, 1 मई 2012 (IST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== पेज देखें ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[पतंजलि (योगसूत्रकार)]], [[प्रभाकर मिश्र]], [[पाणिनि]], [[धर्मकीर्ति बौद्धाचार्य]] पेज देखें।[[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:प्रीति चौधरी]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:प्रीति चौधरी|प्रीति चौधरी]] . &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:प्रीति चौधरी|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  11:08, 3 मई 2012 (IST)&lt;br /&gt;
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== Help upload photo ==&lt;br /&gt;
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== सूचना बक्सा देखें ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कृपया [[चाचा नेहरू बाल संग्रहालय तिरुअनंतपुरम]], [[गुड़ियों का संग्रहालय दिल्ली]], [[केलकर संग्रहालय]], [[केंद्रीय संग्रहालय इन्दौर]], [[कालीबंगा संग्रहालय]], [[आनंद भवन]] के पन्नों में सूचना बक्सा देखें। [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:फ़ौज़िया ख़ान]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:फ़ौज़िया ख़ान|फ़ौज़िया ख़ान]] . &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:फ़ौज़िया ख़ान|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  18:23, 8 मई 2012 (IST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सूचना बक्सा देखें  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कृपया [[हस्त शिल्पकला संग्रहालय दिल्ली]], [[राष्ट्रीय संग्रहालय दिल्ली]], [[राष्ट्रीय रेल संग्रहालय दिल्ली]], [[राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय]], [[रणजीत सिंह संग्रहालय]], [[द प्रिंस ऑफ़ वेल्स संग्रहालय, [[सारनाथ संग्रहालय]], [[राजकीय संग्रहालय त्रिपुरा]], [[पटना संग्रहालय]] के पन्नों में सूचना बक्सा देखें। [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:फ़ौज़िया ख़ान]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:फ़ौज़िया ख़ान|फ़ौज़िया ख़ान]] . &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:फ़ौज़िया ख़ान|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  18:31, 9 मई 2012 (IST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सामान्य ज्ञान ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[सदस्य:प्रीति चौधरी/अभ्यास पन्ना]] और [[सदस्य:रविन्द्र प्रसाद/अभ्यास]] की जाँच कर लें।[[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:रविन्द्र प्रसाद]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:रविन्द्र प्रसाद|रविन्द्र   प्रसाद]] . &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:रविन्द्र प्रसाद|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt; 17:09, 20 मई 2012 (IST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सूचना बक्सा देखें   ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[क़ुर्रतुलऐन हैदर]], [[नागार्जुन]], [[यू. आर. अनंतमूर्ति]] सूचना बक्सा देखें।[[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:प्रीति चौधरी]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:प्रीति चौधरी|प्रीति चौधरी]] . &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:प्रीति चौधरी|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  18:11, 29 मई 2012 (IST)&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
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		<title>21 अगस्त</title>
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		<updated>2012-05-29T12:39:22Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* 21 अगस्त को हुए निधन */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{कैलंडर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ग्रेगोरी कैलंडर]] के अनुसार 21 अगस्त [[वर्ष]] का 233 वाँ ([[लीप वर्ष]] में यह 234 वाँ) दिन है। साल में अभी और 132 दिन शेष हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==21 अगस्त की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ==&lt;br /&gt;
* [[1931]] - [[पंडित विष्णु दिगंबर]] का निधन&lt;br /&gt;
* [[1972]] - [[भारत]] में [[वन्य जीव संरक्षण अधिनियम]] पारित।&lt;br /&gt;
* [[1983]] - फिलीपींस के विपक्षी नेता बेनिग्रो एस. एक्विनो की स्वैच्छिक निर्वासन के पश्चात् वापसी, भूमि पर क़दम रखते ही गोली मारकर उनकी हत्या। &lt;br /&gt;
* [[1988]] - [[भारत]] [[नेपाल]] सीमा पर आये तीव्र [[भूकंप]] से एक हज़ार लोगों की मौत।&lt;br /&gt;
* [[1991]] - सोवियत संघ में राष्ट्रपति गोर्बाचोव अपदस्थ, मास्को में कर्फ़्यू, क्रान्ति विफल एवं गोर्बाचोव पुन: सत्ता में। &lt;br /&gt;
* [[1993]] - राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने रूसी संसद भंग किया। &lt;br /&gt;
* [[2000]] - दक्षिण-पूर्वी आर्देक प्रान्त में लगी आग से 1600 हेक्टेयर क्षेत्र में खड़े वन नष्ट, रूसी पनडुब्बी के सभी 118 सदस्यों के मारे जाने की पुष्टि। &lt;br /&gt;
* [[2003]] - संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने इराक में संयुक्त शांति सेना भेजने का प्रस्ताव खारिज किया। &lt;br /&gt;
* [[2005]] - बांग्लादेश और भारत की सीमा सुरक्षा बल के जवानों के बीच संघर्ष विराम का समझौता सम्पन्न। &lt;br /&gt;
* [[2006]] - इराक के अपदस्थ राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने नरसंहार ट्रायल में भाग लेने से इन्कार किया। &lt;br /&gt;
* [[2008]] - &lt;br /&gt;
**[[श्रीनगर]] और [[पाकिस्तान|पाक]] अधीकृत [[कश्मीर]] की राजधानी [[मुजफ्फराबाद]] के बीच चलने वाली कारवां-ए-अमन बस सेवा पुनः प्रारम्भ। &lt;br /&gt;
**मून मिशन पर [[भारत]] ने नासा से हाथ मिलाया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==21 अगस्त को जन्मे व्यक्ति==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==21 अगस्त को हुए निधन==&lt;br /&gt;
* [[2006]] - [[शहनाई]] वादक [[उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ाँन]] &lt;br /&gt;
* [[2007]] - [[क़ुर्रतुलऐन हैदर]] - [[उर्दू भाषा|उर्दू]] की प्रसिद्ध लेखिका थी।&lt;br /&gt;
* [[1978]] - [[भूमिका चावला]] - भारतीय अभिनेत्री&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==21 अगस्त के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
{{कैलंडर बाहरी कड़ियाँ}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{कैलंडर2}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%95%E0%A4%BC%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%90%E0%A4%A8_%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%A6%E0%A4%B0&amp;diff=276809</id>
		<title>क़ुर्रतुलऐन हैदर</title>
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		<updated>2012-05-29T12:36:46Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा साहित्यकार&lt;br /&gt;
|चित्र=Qurratulain-Hyder.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=क़ुर्रतुलऐन हैदर&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=क़ुर्रतुलऐन हैदर&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=ऐनी आपा&lt;br /&gt;
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|अविभावक=सज्जाद हैदर यलदरम, नज़र सज्जाद हैदर&lt;br /&gt;
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|मुख्य रचनाएँ=मेरे भी सनमख़ाने [[1949]], सफ़ीना–ए–गमे दिल, जलावतन, यह दाग़-दाग़ उजाला, लंदन कहानियाँ&lt;br /&gt;
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|भाषा=[[उर्दू भाषा|उर्दू]]&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=[[साहित्य अकादमी पुरस्कार हिन्दी|साहित्य अकादमी पुरस्कार]] ([[1967]]), सोवियत लैंड़ नेहरु पुरस्कार ([[1969]]), ग़ालिब अवार्ड ([[1985]]), इक़बाल सम्मान ([[1987]]), [[ज्ञानपीठ पुरस्कार]] ([[1991]])&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=लेखिका &lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
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|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन={{अद्यतन|18:04, 29 मई 2012 (IST)}}&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''क़ुर्रतुलऐन हैदर''' का जन्म [[20 जनवरी]] [[1926]] ई. [[अलीगढ़]], [[उत्तर प्रदेश]] में हुआ था। यह [[ज्ञानपीठ पुरस्कार]] से सम्मानित [[उर्दू]] की प्रसिद्ध लेखिका थी।&lt;br /&gt;
==जीवन परिचय==&lt;br /&gt;
क़ुर्रतुलऐन हैदर के पिता सज्जाद हैदर यिल्दिरम [[अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय]] में रजिस्ट्रार थे। क़ुर्रतुलऐन हैदर के परिवार में तीन पीढ़ियों से लिखने की परंपरा रही। क़ुर्रतुलऐन हैदर के पिता की गणना उर्दू के प्रतिष्ठित कथाकारों में होती थी। क़ुर्रतुलऐन हैदर की माँ नज़र सज्जाद हैदर ‘उर्दू’ की 'जेन ऑस्टिन’ कहलाती थीं। क़ुर्रतुलऐन को बचपन से ही लिखने का शौक़ रहा, प्रारंभ में उन्होंने बच्चों के लिए कुछ कहानियाँ लिखीं। क़ुर्रतुलऐन की पहली मौलिक कहानी प्रसिद्ध साहित्यिक पत्रिका साक़ी में प्रकाशित हुई। संपादकीय में इसकी प्रशंसा विशेष उल्लेख के साथ की गई थी। इस कहानी से क़ुर्रतुलऐन हैदर को काफ़ी प्रोत्साहन मिला और वह निरंतर लिखती चली गईं। अपने लेखन में उन्होंने कभी किसी के अनुकरण का प्रयास नहीं किया, जो कुछ भी लिखा अपने जीवनानुभव, कल्पना और चिंतन के आधार पर ही लिखा। &lt;br /&gt;
==शिक्षा==&lt;br /&gt;
[[1947]] में क़ुर्रतुलऐन ने [[लखनऊ]] विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी साहित्य में एम.ए.किया। इसी वर्ष क़ुर्रतुलऐन हैदर की कहानियों का पहला संग्रह 'सितारों के आगे' प्रकाशित हुआ। इसमे संकलित लगभग सभी कहानियाँ [[उर्दू भाषा|उर्दू]] में हैं। क़ुर्रतुलऐन हैदर ने घटनाओं की अपेक्षा उनसे जन्म लेने वाली अनुभूतियों और संवेदनाओ को विशेष महत्त्व दिया। इन कहानियों द्वारा पाठक के सम्मुख एक अपरिचित सी दुनिया प्रस्तुत की गई, जिसमें जीवन की अर्थहीनता का संकेत था, हर तरफ छाई हुई धुंध थी। एक मनोग्राही शायराना उदासी थी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क़ुर्रतुलऐन हैदर [[1950]] से [[1960]] के मध्य लंदन में रही। [[भारत]] लोटने के बाद उन्होंने [[बम्बई]] में इम्प्रिंट के प्रबंध संपादक का पद संभाला। उसके बाद लगभग सात वर्ष वह 'इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ़ इंडिया' के संपादन विभाग के सबंद्ध में रहीं। कथा लेखन के अलावा ललित कलाओं, ख़ासकर [[संगीत]] और [[चित्रकला]] में भी उनकी गहरी रुचि थी। गर्दिशे रंगे चमन में उनके रेखांकन प्रकाशित हुए हैं।&lt;br /&gt;
==उपन्यास==&lt;br /&gt;
क़ुर्रतुलऐन हैदर का पहला उपन्यास 'मेरे भी सनमख़ाने' [[1949]] में प्रकाशित हुआ। यह उपन्यास भारत की समन्वित [[संस्कृति]] के माध्यम से मानवता की त्रासदी प्रस्तुत करता है। भारत की वह सामाजिक संस्कृति, जो यहाँ रहने वाले [[हिन्दू]] [[मुसलमान|मुस्लिम]] समुदायों के लिए एकता और प्रेम का प्रसाद और गौरव का प्रतीक थी, देश-विभाजन के बाद वह खंडित हो गई। यह पीड़ा मेरे भी सनमख़ाने में [[लखनऊ]] के कुछ आदर्शवादी अल्हड़ एवं जीवंत लड़के-लड़कियों की सामूहिक व्यथा–कथा के माध्यम से बड़े ही मार्मिक रुप में दर्शाई गई है।&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
[[1952]] में क़ुर्रतुलऐन हैदर का दूसरा उपन्यास 'सफ़ीना–ए–गमे दिल' और दूसरा कहानी संकलन 'शीशे के घर' प्रकाशित हुआ। इस संकलन में 'जलावतन', 'यह दाग़-दाग़ उजाला' और 'लंदन कहानियाँ' विशेष उल्लेखनीय हैं।&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
दिसंबर [[1959]] में क़ुर्रतुलऐन हैदर का सुप्रसिद्ध उपन्यास 'आग का दरिया' प्रकाशित हुआ, जिसने साहित्य जगत में तहलका मचा दिया। यह उपन्यास अपनी भाषा शैली, रचना-शिल्प, विषय–वस्तु और चिंतन, हर [[दृष्टि]] से एक नई पंरपरा का सूत्रपात करता है। 'कारे-जहाँ-दराज़' उपन्यास के बाद क़ुर्रतुलऐन हैदर के तीन और उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं। एक [[उपन्यासकार]] के रूप में क़ुर्रतुलऐन हैदर की गणना उर्दू के महान साहित्यकारों में की जाती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''उनके प्रमुख उपन्यास निम्नलिखित हैं'''-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*मेरे भी सनमख़ाने ([[1949]])&lt;br /&gt;
*सफ़ीना-ए-ग़मे-दिल ([[1952]])&lt;br /&gt;
*आग का दरिया ([[1959]])&lt;br /&gt;
*आख़िरी शब के हमसफ़र ([[1979]])&lt;br /&gt;
*गर्दिशे–रंगे-चमन ([[1987]])&lt;br /&gt;
*चांदनी बेगम ([[1990]])&lt;br /&gt;
*कारे-जहाँ-दराज़ है। ([[1978]]-[[1979|79]])&lt;br /&gt;
*शीशे के घर ([[1952]])&lt;br /&gt;
*पतझर की आवाज़ ([[1967]]) &lt;br /&gt;
*रोशनी की रफ़्तार ([[1982]])&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पुरस्कार==&lt;br /&gt;
क़ुर्रतुलऐन हैदर को [[साहित्य अकादमी पुरस्कार हिन्दी|साहित्य अकादमी पुरस्कार]] ([[1967]])  सोवियत लैंड़ नेहरु पुरस्कार ([[1969]]), ग़ालिब अवार्ड ([[1985]]), इक़बाल सम्मान ([[1987]]), और [[ज्ञानपीठ पुरस्कार]]  ([[1991]]) से सम्मानित किया गया है।&lt;br /&gt;
==मृत्यु== &lt;br /&gt;
क़ुर्रतुलऐन हैदर की मृत्यु [[21 अगस्त]] [[2007]] को नोएडा, उत्तर प्रदेश में हुआ था।&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति&lt;br /&gt;
|आधार=&lt;br /&gt;
|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1&lt;br /&gt;
|माध्यमिक=&lt;br /&gt;
|पूर्णता=&lt;br /&gt;
|शोध=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{साहित्यकार}}&lt;br /&gt;
[[Category:लेखक]][[Category:आधुनिक लेखक]][[Category:उपन्यासकार]]&lt;br /&gt;
[[Category:साहित्यकार]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:आधुनिक साहित्यकार]][[Category:आधुनिक कवि]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
	</entry>
	<entry>
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		<title>क़ुर्रतुलऐन हैदर</title>
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		<updated>2012-05-29T12:34:53Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा साहित्यकार&lt;br /&gt;
|चित्र=Qurratulain-Hyder.jpg&lt;br /&gt;
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}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''क़ुर्रतुलऐन हैदर''' का जन्म [[20 जनवरी]] [[1928]] ई. [[अलीगढ़]], [[उत्तर प्रदेश]] में हुआ था। यह [[ज्ञानपीठ पुरस्कार]] से सम्मानित [[उर्दू]] की प्रसिद्ध लेखिका थी।&lt;br /&gt;
==जीवन परिचय==&lt;br /&gt;
क़ुर्रतुलऐन हैदर के पिता सज्जाद हैदर यिल्दिरम [[अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय]] में रजिस्ट्रार थे। क़ुर्रतुलऐन हैदर के परिवार में तीन पीढ़ियों से लिखने की परंपरा रही। क़ुर्रतुलऐन हैदर के पिता की गणना उर्दू के प्रतिष्ठित कथाकारों में होती थी। क़ुर्रतुलऐन हैदर की माँ नज़र सज्जाद हैदर ‘उर्दू’ की 'जेन ऑस्टिन’ कहलाती थीं। क़ुर्रतुलऐन को बचपन से ही लिखने का शौक़ रहा, प्रारंभ में उन्होंने बच्चों के लिए कुछ कहानियाँ लिखीं। क़ुर्रतुलऐन की पहली मौलिक कहानी प्रसिद्ध साहित्यिक पत्रिका साक़ी में प्रकाशित हुई। संपादकीय में इसकी प्रशंसा विशेष उल्लेख के साथ की गई थी। इस कहानी से क़ुर्रतुलऐन हैदर को काफ़ी प्रोत्साहन मिला और वह निरंतर लिखती चली गईं। अपने लेखन में उन्होंने कभी किसी के अनुकरण का प्रयास नहीं किया, जो कुछ भी लिखा अपने जीवनानुभव, कल्पना और चिंतन के आधार पर ही लिखा। &lt;br /&gt;
==शिक्षा==&lt;br /&gt;
[[1947]] में क़ुर्रतुलऐन ने [[लखनऊ]] विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी साहित्य में एम.ए.किया। इसी वर्ष क़ुर्रतुलऐन हैदर की कहानियों का पहला संग्रह 'सितारों के आगे' प्रकाशित हुआ। इसमे संकलित लगभग सभी कहानियाँ [[उर्दू भाषा|उर्दू]] में हैं। क़ुर्रतुलऐन हैदर ने घटनाओं की अपेक्षा उनसे जन्म लेने वाली अनुभूतियों और संवेदनाओ को विशेष महत्त्व दिया। इन कहानियों द्वारा पाठक के सम्मुख एक अपरिचित सी दुनिया प्रस्तुत की गई, जिसमें जीवन की अर्थहीनता का संकेत था, हर तरफ छाई हुई धुंध थी। एक मनोग्राही शायराना उदासी थी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क़ुर्रतुलऐन हैदर [[1950]] से [[1960]] के मध्य लंदन में रही। [[भारत]] लोटने के बाद उन्होंने [[बम्बई]] में इम्प्रिंट के प्रबंध संपादक का पद संभाला। उसके बाद लगभग सात वर्ष वह 'इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ़ इंडिया' के संपादन विभाग के सबंद्ध में रहीं। कथा लेखन के अलावा ललित कलाओं, ख़ासकर [[संगीत]] और [[चित्रकला]] में भी उनकी गहरी रुचि थी। गर्दिशे रंगे चमन में उनके रेखांकन प्रकाशित हुए हैं।&lt;br /&gt;
==उपन्यास==&lt;br /&gt;
क़ुर्रतुलऐन हैदर का पहला उपन्यास 'मेरे भी सनमख़ाने' [[1949]] में प्रकाशित हुआ। यह उपन्यास भारत की समन्वित [[संस्कृति]] के माध्यम से मानवता की त्रासदी प्रस्तुत करता है। भारत की वह सामाजिक संस्कृति, जो यहाँ रहने वाले [[हिन्दू]] [[मुसलमान|मुस्लिम]] समुदायों के लिए एकता और प्रेम का प्रसाद और गौरव का प्रतीक थी, देश-विभाजन के बाद वह खंडित हो गई। यह पीड़ा मेरे भी सनमख़ाने में [[लखनऊ]] के कुछ आदर्शवादी अल्हड़ एवं जीवंत लड़के-लड़कियों की सामूहिक व्यथा–कथा के माध्यम से बड़े ही मार्मिक रुप में दर्शाई गई है।&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
[[1952]] में क़ुर्रतुलऐन हैदर का दूसरा उपन्यास 'सफ़ीना–ए–गमे दिल' और दूसरा कहानी संकलन 'शीशे के घर' प्रकाशित हुआ। इस संकलन में 'जलावतन', 'यह दाग़-दाग़ उजाला' और 'लंदन कहानियाँ' विशेष उल्लेखनीय हैं।&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
दिसंबर [[1959]] में क़ुर्रतुलऐन हैदर का सुप्रसिद्ध उपन्यास 'आग का दरिया' प्रकाशित हुआ, जिसने साहित्य जगत में तहलका मचा दिया। यह उपन्यास अपनी भाषा शैली, रचना-शिल्प, विषय–वस्तु और चिंतन, हर [[दृष्टि]] से एक नई पंरपरा का सूत्रपात करता है। 'कारे-जहाँ-दराज़' उपन्यास के बाद क़ुर्रतुलऐन हैदर के तीन और उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं। एक [[उपन्यासकार]] के रूप में क़ुर्रतुलऐन हैदर की गणना उर्दू के महान साहित्यकारों में की जाती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''उनके प्रमुख उपन्यास निम्नलिखित हैं'''-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*मेरे भी सनमख़ाने ([[1949]])&lt;br /&gt;
*सफ़ीना-ए-ग़मे-दिल ([[1952]])&lt;br /&gt;
*आग का दरिया ([[1959]])&lt;br /&gt;
*आख़िरी शब के हमसफ़र ([[1979]])&lt;br /&gt;
*गर्दिशे–रंगे-चमन ([[1987]])&lt;br /&gt;
*चांदनी बेगम ([[1990]])&lt;br /&gt;
*कारे-जहाँ-दराज़ है। ([[1978]]-[[1979|79]])&lt;br /&gt;
*शीशे के घर ([[1952]])&lt;br /&gt;
*पतझर की आवाज़ ([[1967]]) &lt;br /&gt;
*रोशनी की रफ़्तार ([[1982]])&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पुरस्कार==&lt;br /&gt;
क़ुर्रतुलऐन हैदर को [[साहित्य अकादमी पुरस्कार हिन्दी|साहित्य अकादमी पुरस्कार]] ([[1967]])  सोवियत लैंड़ नेहरु पुरस्कार ([[1969]]), ग़ालिब अवार्ड ([[1985]]), इक़बाल सम्मान ([[1987]]), और [[ज्ञानपीठ पुरस्कार]]  ([[1991]]) से सम्मानित किया गया है।&lt;br /&gt;
==मृत्यु== &lt;br /&gt;
क़ुर्रतुलऐन हैदर की मृत्यु [[21 अगस्त]] [[2007]] को नोएडा, उत्तर प्रदेश में हुआ था।&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति&lt;br /&gt;
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|शोध=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{साहित्यकार}}&lt;br /&gt;
[[Category:लेखक]][[Category:आधुनिक लेखक]][[Category:उपन्यासकार]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
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		<title>5 जून</title>
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		<updated>2012-05-29T11:37:59Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* 5 जून को जन्मे व्यक्ति */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{कैलंडर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ग्रेगोरी कैलंडर]] के अनुसार 5 जून [[वर्ष]] का 156 वाँ ([[लीप वर्ष]] में यह 157 वाँ) दिन है। साल में अभी और 209 दिन शेष हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==5 जून की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ==&lt;br /&gt;
* विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है।&lt;br /&gt;
* [[1989]] - [[ईरान]] के धार्मिक नेता अयातुल्लाह रोहेल्लाह खुमैनी का देहांत। &lt;br /&gt;
* [[2001]] - शाही हत्याकांड जांच आयोग के एक सदस्य माधवन के इस्तीफ़ से नेपाल में शाही परिवार की जांच का कार्य अवरुद्ध। &lt;br /&gt;
* [[2002]] - भारत की सीमा पर साझा गश्त के प्रस्ताव को पाकिस्तान ने खारिज किया। &lt;br /&gt;
* [[2005]] - ताइवान ने अपनी पहली क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया। &lt;br /&gt;
* [[2008]] - &lt;br /&gt;
**[[इलाहाबाद]] उच्च न्यायालय ने [[उत्तर प्रदेश]] पुलिस भर्ती घोटाले की जाँच सीबीआई से कराने का [[भारत]] सरकार को निर्देश दिया। एलेन परेरा ने बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र के अध्यक्ष एवं प्रबन्ध निदेशक का कार्यभार सम्भाला। &lt;br /&gt;
**अमेरिका ने भारत व चीन को निगरानी सूची में डाला।&lt;br /&gt;
==5 जून को जन्मे व्यक्ति==&lt;br /&gt;
* [[1901]] - [[गोविंद शंकर कुरुप]] ([[ज्ञानपीठ पुरस्कार]] से सम्मानित [[मलयाली भाषा]] के एक प्रसिद्ध साहित्यकार)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==5 जून को हुए निधन==&lt;br /&gt;
*[[1942]] - [[मास्टर मदन]] - प्रतिभाशाली ग़ज़ल और गीत गायक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==5 जून के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव==&lt;br /&gt;
* विश्व पर्यावरण दिवस&lt;br /&gt;
* समग्र क्रान्ति दिवस&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
{{कैलंडर बाहरी कड़ियाँ}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{कैलंडर2}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
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		<title>गोविंद शंकर कुरुप</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6_%E0%A4%B6%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%B0_%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%AA&amp;diff=276806"/>
		<updated>2012-05-29T11:31:23Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[चित्र:Govind-shankar-kurup.png|thumb|गोविंद शंकर कुरुप]]&lt;br /&gt;
'''गोविंद शंकर कुरुप''' (जन्म: [[5 जून]], [[1901]], नायत्तोट, [[केरल]] - मृत्यु: [[2 फ़रवरी]], [[1978]]) [[ज्ञानपीठ पुरस्कार]] से सम्मानित [[मलयाली भाषा]] के एक प्रसिद्ध साहित्यकार थे। &lt;br /&gt;
==व्यक्तिगत जीवन==&lt;br /&gt;
{{tocright}}&lt;br /&gt;
'''अपने मामा ‘गोविंद’ के नाम पर ही''' उनका नाम गोविंद शंकर कुरूप पड़ा और परिवार में वंश परंपरा मातृकुल से चलने की प्रथा होने के कारण कुलनाम भी कुरुप हुआ। संयोग से उन्ही दिनों नायत्तोट में एक प्राथमिक पाठशाला की स्थापना हुई। बालक कुरुप को वहाँ भर्ती करा दिया गया। गोविंद शंकर ने वहाँ जाकर अनुभव किया कि प्रकृति दृश्य–छवियों को देखकर उनके भीतर स्वत: स्फूर्त एक अरुप और विचित्र सा आलोड़न होता है, जिसका अब उसे ज्ञान होने लगा। गोविंद शंकर के जीवन में दो घटनाएं भी उसी समय घटीं, जो यूं तो सामान्य थीं, पर कवि शंकर कुरुप की काव्य–चेतना के प्रथम अंकुर फूटने में परोक्ष रूप से सहायक सिद्ध हुई। एक थी उस युग के वरिष्ठ मलयालम कवि कुंजीकुट्टन तंपुरान का नायत्तोट आना और दूसरी थी, नौका से तोट्टवाय देवालय जाते हुए उगते [[सूर्य]] के प्रथम स्पर्श से लहरियों के नर्तन का दर्शन।  &lt;br /&gt;
==शिक्षा==&lt;br /&gt;
'''बचपन में ही गोविंद के पिता की''' आशीष-छाया सिर से उठ जाने के बाद उनकी देखरेख और शिक्षा आदि का दायित्व उनके मामा गोविंद कुरुप ने निभाया। गांव की उस प्राथमिक पाठशाला में शिक्षा का प्रबंध तीसरी कक्षा तक ही था। फिर किसी प्रकार व्यवस्था करके बालक कुरुप को सात मील दूर स्थित [[पेरुंपावूर]] के मलयालम मिडिल स्कूल भेजा गया। पेरुंपावूर में छात्रावास के जीवन में एक मुक्त वातावरण मिला, जो कवि शंकर की अस्फुट प्रतिभा के जागृत होने में विशेष प्रेरक व सहायक हुआ। वहाँ एक सघंन वन था, जहाँ लता-कुंजों से घिरा भगवती वनदेवी का एक अर्द्धभग्न मंदिर था। नाना पक्षियों का कलरव–कूजन निरंतर चलता रहता था। प्रकृति `की उस उन्नमुक्त शोभाराशि से मुग्ध हुए शंकर घंटों-घंटों वहाँ बैठे रहते और प्राय: [[संस्कृत]] [[छंद|छंदों]] में फुटकर श्लोकों की रचना करते। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''सातवीं कक्षा के बाद वह मूवाट्टुपुषा''' मलयालम हाई स्कूल पहुंचे। वहाँ दो वर्ष रहे, पर ये दो वर्ष उनके विकास की [[दृष्टि]] से अत्यंत महत्त्वपूर्ण और एक प्रकार से दिशा निर्णायक हुए। शंकर कुरुप ने [[कोचीन]] राज्य की ‘पंडित’ परीक्षा पास करके अध्यापन की योग्यता प्राप्त की। दो वर्ष वह यहाँ-वहाँ अध्यापन करते रहे। उनके कविता संग्रह, [[साहित्य]] कौतुकम् के पहले भाग की कुछ कविताएं इसी काल की हैं। पर अपना अभीष्ट उन्हें तब प्राप्त हुआ, जब वह [[तिरूविल्वामला]] हाई स्कूल में अध्यापक नियुक्त हुए। [[1921]] से [[1925]] तक शंकर कुरुप तिरूविल्वामला में रहें। प्रकृति के प्रति प्रारंभ में जो एक सहज आकर्षण भाव था, उसने इन चार वर्षो में अन्नय उपासक की भावना का रूप ले लिया। तिरूविल्वामला से कुरुप 1925 में [[चालाकुटि]] हाई स्कूल पहुंचे। उसी वर्ष साहित्य कौतुकम का दूसरा भाग प्रकाशित हुआ। [[1931]] में नालें शीर्षक कविता के प्रकाशन ने साहित्य जगत में एक हलचल सी मचा दी। कुछ लोगों ने उसे राजद्रोहात्मक तक कहा और उसके कारण महाराजा कॉलेज [[एर्णाकुलम]] में प्राध्यापक पद पर उनकी नियुक्ति में भी एक बार बाधा आई। [[1937]] से [[1956]] में सेवानिवृत्त होने तक इस कॉलेज में वह मलयालम के प्राध्यापक रहे। यहाँ अवकाश प्राप्त कर लेने के उपरांत वह आकाशवाणी के [[त्रिवेंद्रम]] केंद्र में प्रोड्यूसर रहे।&lt;br /&gt;
==काव्य कृति==&lt;br /&gt;
'''काव्य कृति ओट्क्कुषठ का प्रथम संस्करण''' [[1950]] में प्रकाशित हुआ था। इसके मूल रुप में 60 कविताएं थीं। वर्तमान रुप में 58 हैं। इन कविताओं के माध्यम से कवि के विभिन्न रूप भावों का परिचय मिलता है। कवि प्रकृति और उसकी [[शिव]] सुंदर रहस्यमयता की अनुभूति में प्रकृति के कण-कण और क्षण-क्षण की मुग्धकारी सौंदर्य छवि में परा चेतनशक्ति का आभास प्राप्त करता है। उसे जैसे साक्षात प्रतीति होती है, कि विराट प्रकृति और वह स्वयं एक अनादि व अनंत चैतन्य के अंश है। कई उत्कृष्ट प्रेम कविताएं इसमें सम्मिलित है। लेकिन यह प्रेम भी नर–नारी का नहीं प्रकृति और निखिल ब्रह्म–चेतना का है, जिसका यह संपूर्ण सृष्टिचक्र प्रतिफलन है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''महाकवि गोविंद शंकर कुरुप की''' 40 से अधिक मौलिक और अनूदित कृतियाँ प्रकाशित है। &amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
====कविता संग्रह==== &lt;br /&gt;
*साहित्य कौतुकम, &lt;br /&gt;
*चार खंड ([[1923]]-[[1929]]) &lt;br /&gt;
*सूर्यकांति ([[1932]]) &lt;br /&gt;
*ओट्क्कुषठ ([[1950]]) &lt;br /&gt;
*अंतर्दाह ([[1953]])&lt;br /&gt;
*विश्वदर्शनम ([[1960]]) &lt;br /&gt;
*जीवनसंगीतम् ([[1964]]) &lt;br /&gt;
*पाथेयम ([[1961]]) &lt;br /&gt;
*गद्य-गद्योपहारम् ([[1940]]) &lt;br /&gt;
*लेखमाल ([[1943]])&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====नाटक====&lt;br /&gt;
*संध्य ([[1944]]), &lt;br /&gt;
*इरूट्टिनु मुंपु ([[1935]])&lt;br /&gt;
==सम्मान==&lt;br /&gt;
'''गोविंद शंकर कुरुप''' को साहित्य अकादमी पुरस्कार ([[1963]]) और [[ज्ञानपीठ पुरस्कार]] ([[1965]]) से सम्मानित किया गया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति&lt;br /&gt;
|आधार=&lt;br /&gt;
|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक2&lt;br /&gt;
|माध्यमिक=&lt;br /&gt;
|पूर्णता=&lt;br /&gt;
|शोध=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{साहित्यकार}}&lt;br /&gt;
[[Category:कवि]][[Category:साहित्यकार]][[Category:आधुनिक साहित्यकार]][[Category:साहित्य कोश]] &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
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		<title>वार्ता:तेलुगु साहित्य</title>
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		<updated>2012-05-29T11:26:02Z</updated>

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&lt;hr /&gt;
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		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
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		<title>तेलुगु साहित्य</title>
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		<updated>2012-05-29T11:12:40Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: '{{पुनरीक्षण}}  '''तेलुगु साहित्य''' का विकास आरंभिक 16वीं [[...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{पुनरीक्षण}} &lt;br /&gt;
'''तेलुगु साहित्य''' का विकास आरंभिक 16वीं [[शताब्दी]] में [[विजयनगर साम्राज्य]] में हुआ, जिसमें तेलुगु दरबारी भाषा थी। &lt;br /&gt;
*[[आंध्र प्रदेश]] राज्य में बोली जाने वाली द्रविड़ भाषा [[तेलुगु भाषा|तेलुगु]] का रचना संसार है।  &lt;br /&gt;
*19वीं शताब्दी से इस भाषा में उपन्यास जैसे पश्चिमी साहित्यिक स्वरूपों में भी प्रयोग किए गए।&lt;br /&gt;
*10वीं या 11वीं शताब्दी से रचित इस साहित्य में मुख्यतः काव्य और धार्मनिरपेक्ष व धार्मिक महाकाव्य हैं, जिनमें शतक (100 छंद) एक अत्यंत लोकप्रिय स्वरूप है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
[[Category:भाषा और लिपि]] &lt;br /&gt;
[[Category:भाषा कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना मई-2012]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
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		<title>19 मार्च</title>
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		<updated>2012-05-29T11:00:26Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* 19 मार्च को जन्मे व्यक्ति */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{कैलंडर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ग्रेगोरी कैलंडर]] के अनुसार 19 मार्च [[वर्ष]] का 78 वाँ ([[लीप वर्ष]] में यह 79 वाँ) दिन है। साल में अभी और 287 दिन शेष हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==19 मार्च की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ==&lt;br /&gt;
* [[1972]] - [[भारत]] और [[बांग्लादेश]] के बीच में मित्रता संधि पर हस्ताक्षर किया।&lt;br /&gt;
* [[1982]] - [[ब्रिटेन]] एवं बेटिकन में 400 वर्षों के अंतराल के बाद राजनयिक संबंध स्थापित। &lt;br /&gt;
* [[1996]] - बोस्निया हर्जेगोविना की राजधानी सरायेवो का पुन: एकीकरण। &lt;br /&gt;
* [[1999]] - यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष जैकस सांटर का अपने पद से इस्तीफ़ा। &lt;br /&gt;
* [[2001]] - तालिबान द्वारा 100 गायों की बलि, ब्रिटेन के उच्च सदन ने संगीतकार नदीम के प्रत्यर्पण का प्रस्ताव ठुकराया। &lt;br /&gt;
* [[2004]] - अमेरिका ने विश्व व्यापार संगठन में पहली बार चीन पर मुकदमा ठोका। &lt;br /&gt;
* [[2005]] - पाकिस्तान ने शाहीन-II प्रक्षेपास्त्र का सफल परीक्षण किया। &lt;br /&gt;
* [[2007]] - पाकिस्तान की मुख्तारन माई को यूरोपीय परिषद का मानवाधिकार सम्मान प्रदान किया गया। &lt;br /&gt;
* [[2008]] - &lt;br /&gt;
**डोनकुपर रॉय ने [[मेघालय]] के नये मुख्यमंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली।&lt;br /&gt;
**पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ़ ने सबरजीत की फ़ांसी 30 अप्रैल, 2008 तक रोकी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार पर बने नये मसौदे को भारत सहित अधिकतर देशों ने खारिज किया। &lt;br /&gt;
* [[2009]] - डालर के मुक़ाबले में रुपया 93 पैसे की लम्बी छलांग लगाकर तीन सप्ताह के उच्चतर स्तर पर पहुँचा।&lt;br /&gt;
==19 मार्च को जन्मे व्यक्ति==&lt;br /&gt;
* [[1911]] - [[अगरचन्द नाहटा]], [[जैन साहित्य]] के विशेषज्ञ तथा अनुसन्धानपूर्ण लेखक थे।&lt;br /&gt;
* [[1954]] - इंदु शाहानी, भारतीय शिक्षाविद।&lt;br /&gt;
* [[1984]] - [[तनुश्री दत्ता]], भारतीय अभिनेत्री।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==19 मार्च को हुए निधन==&lt;br /&gt;
* [[1998]] - ईलमकुलम मनक्कल शंकरन नंबूदिरीपाद, भारतीय कम्युनिस्ट नेता और [[केरल]] के पूर्व मुख्यमंत्री।&lt;br /&gt;
* [[2011]] - नवीन निश्चल - बालीवुड अभिनेता, 'ग़रीबों के राजेश खन्ना' कहा जाता था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==19 मार्च के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
{{कैलंडर बाहरी कड़ियाँ}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{कैलंडर2}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
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		<title>अगरचन्द नाहटा</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6_%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%9F%E0%A4%BE&amp;diff=276799"/>
		<updated>2012-05-29T10:55:43Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;'''अगरचंद नाहटा''' का जन्म [[19 मार्च]], [[1911]] ई. को [[बीकानेर]] में हुआ और इनकी मृत्यु [[1983]] ई. में हुई। &lt;br /&gt;
*अगरचंद नाहटा लिपियों के विद्वान थे। &lt;br /&gt;
*यह [[जैन साहित्य]] के विशेषज्ञ तथा अनुसन्धानपूर्ण लेखक थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति&lt;br /&gt;
|आधार=&lt;br /&gt;
|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1&lt;br /&gt;
|माध्यमिक=&lt;br /&gt;
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}}&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{साहित्यकार}}&lt;br /&gt;
[[Category:साहित्यकार]][[Category:साहित्य_कोश]][[Category:लेखक]][[Category:आधुनिक लेखक]]&lt;br /&gt;
[[Category:जैन धर्म कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:आधुनिक साहित्यकार]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
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		<title>विष्णु प्रभाकर</title>
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		<updated>2012-05-29T10:48:32Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा साहित्यकार&lt;br /&gt;
|चित्र=Vishnu-Prabhakar.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=विष्णु प्रभाकर&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=विष्णु दयाल&lt;br /&gt;
|जन्म=[[21 जून]], सन [[1912]] &lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=मीरापुर, ज़िला मुज़फ़्फ़रनगर, [[उत्तर प्रदेश]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु=[[11 अप्रैल]], [[2009]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[नई दिल्ली]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=दुर्गा प्रसाद (पिता), महादेवी (माता)&lt;br /&gt;
|पालक माता-पिता=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=सुशीला&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|कर्म भूमि=&lt;br /&gt;
|कर्म-क्षेत्र=उपन्यासकार और लेखन&lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ='अर्द्धनारीश्वर', 'आवारा मसीहा', 'क्षमादान' तथा 'पंखहीन' (आत्मकथा) आदि।&lt;br /&gt;
|विषय=&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिन्दी]], [[अंग्रेज़ी]]&lt;br /&gt;
|विद्यालय=चंदूलाल एंग्लो-वैदिक हाई स्कूल, [[हिसार]]; पंजाब विश्वविद्यालय।&lt;br /&gt;
|शिक्षा='प्रभाकर' और 'भूषण' आदि उपाधियाँ तथा बी.ए.&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि='पाब्लो नेरूदा सम्मान', 'सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार', 'मूर्तिदेवी पुरस्कार' और 'शलाका सम्मान'।&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''विष्णु प्रभाकर''' (जन्म- [[21 जून]], [[1912]] और मृत्यु- [[11 अप्रैल]], [[2009]]) अपने [[साहित्य]] में भारतीय वाग्मिता और अस्मिता को व्यंजित करने के लिये प्रसिद्ध रहे हैं। विष्णु प्रभाकर जी ने कहानी, उपन्यास, नाटक, जीवनी, निबंध, एकांकी, यात्रा-वृत्तांत और कविता आदि प्रमुख विधाओं में अपनी बहुमूल्य रचनाएँ की हैं। प्रभाकर जी ने आकाशवाणी, दूरदर्शन, पत्र-पत्रिकाओं तथा प्रकाशन संबंधी मीडिया के प्रत्येक क्षेत्र में ख्याति प्राप्त की थी। देश-विदेश की अनेक यात्राएँ करने वाले विष्णुजी जीवन-पर्यन्त पूर्णकालिक मसिजीवी रचनाकार के रूप में साहित्य साधना में लीन रहे थे।&lt;br /&gt;
==जीवन परिचय==&lt;br /&gt;
विष्णु प्रभाकर का जन्म 21 जून, सन 1912 को मीरापुर, ज़िला मुज़फ़्फ़रनगर ([[उत्तर प्रदेश]]) में हुआ था। इन्हें इनके एक अन्य नाम 'विष्णु दयाल' से भी जाना जाता है। इनके पिता का नाम दुर्गा प्रसाद था, जो धार्मिक विचारधारा वाले व्यक्तित्व के धनी थे। प्रभाकर जी की माता महादेवी पढ़ी-लिखी महिला थीं, जिन्होंने अपने समय में पर्दाप्रथा का घोर विरोध किया था। प्रभाकर जी की पत्नी का नाम सुशीला था। &lt;br /&gt;
====शिक्षा====&lt;br /&gt;
विष्णु प्रभाकर की आरंभिक शिक्षा मीरापुर में हुई थी। उन्होंने सन [[1929]] में चंदूलाल एंग्लो-वैदिक हाई स्कूल, [[हिसार]] से मैट्रिक की परीक्षा पास की। इसके उपरांत नौकरी करते हुए पंजाब विश्वविद्यालय से 'भूषण', 'प्राज्ञ', 'विशारद' और 'प्रभाकर' आदि की [[हिंदी]]-[[संस्कृत]] परीक्षाएँ भी उत्तीर्ण कीं। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से ही बी.ए. की डिग्री भी प्राप्त की थी।&lt;br /&gt;
====व्यवसाय====&lt;br /&gt;
प्रभाकर जी के घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। यही कारण था कि उन्हें काफ़ी कठिनाइयों और समस्याओं का सामना करना पड़ा था। वे अपनी शिक्षा भली प्रकार से प्राप्त नहीं कर पाये थे। अपनी घर की परेशानियों और ज़िम्मेदारियों के बोझ से उन्होंने स्वयं को मजबूत बना लिया। उन्होंने चतुर्थ श्रेणी की एक सरकारी नौकरी प्राप्त की। इस नौकरी के जरिए पारिश्रमिक रूप में उन्हें मात्र 18 रुपये प्रतिमाह का वेतन प्राप्त होता था। विष्णु प्रभाकर जी ने जो डिग्रियाँ और उच्च शिक्षा प्राप्त की, तथा अपने घर-परिवार की ज़िम्मेदारियों को पूरी तरह निभाया, वह उनके अथक प्रयासों का ही परिणाम था।&lt;br /&gt;
==लेखन कार्य==&lt;br /&gt;
प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी [[महात्मा गाँधी]] जी के जीवन आदर्शों से प्रेम के कारण प्रभाकर जी का रुझान [[कांग्रेस]] की तरफ़ हो गया। वे आज़ादी के दौर में बजते राजनीतिक बिगुल में उनकी लेखनी का भी एक उद्देश्य बन गया था, जो आज़ादी के लिए संघर्षरत थी। अपने लेखन के दौर में वे [[प्रेमचंद]], [[यशपाल]] और [[अज्ञेय]] जैसे महारथियों के सहयात्री भी रहे, किन्तु रचना के क्षेत्र में उनकी अपनी एक अलग पहचान बन चुकी थी। [[1931]] में [[हिन्दी]] मिलाप में पहली कहानी [[दीपावली|दीवाली]] के दिन छपने के साथ ही उनके लेखन का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह आज आठ दशकों तक निरंतर सक्रिय है। नाथूराम शर्मा प्रेम के कहने से वे शरतचन्द्र की जीवनी 'आवारा मसीहा' लिखने के लिए प्रेरित हुए, जिसके लिए वे शरतचन्द्र को जानने के लिये लगभग सभी स्रोतों और जगहों तक गए। उन्होंने [[बांग्ला भाषा]] भी सीखी और जब यह जीवनी छपी, तो [[साहित्य]] में विष्णु जी की धूम मच गयी। कहानी, उपन्यास, नाटक, एकांकी, संस्मरण, बाल साहित्य सभी विधाओं में प्रचुर साहित्य लिखने के बावजूद 'आवारा मसीहा' उनकी पहचान का पर्याय बन गयी। इसके बाद में 'अ‌र्द्धनारीश्वर' पर उन्हें बेशक [[साहित्य अकादमी पुरस्कार हिन्दी]] प्राप्त हुआ, लेकिन 'आवारा मसीहा' ने साहित्य में उनकी एक अलग ही पहचान पुख्ता कर दी।&lt;br /&gt;
====प्रथम नाटक रचना====&lt;br /&gt;
विष्णु प्रभाकर जी ने अपना पहला नाटक 'हत्या के बाद' लिखा और [[हिसार]] में एक नाटक मंडली के साथ भी कार्यरत हो गये। इसके पश्चात प्रभाकर जी ने लेखन को ही अपनी जीविका बना लिया। आज़ादी के बाद वे [[नई दिल्ली]] आ गये और सितम्बर [[1955]] में आकाशवाणी में नाट्यनिर्देशक नियुक्त हो गये, जहाँ उन्होंने [[1957]] तक अपनी सेवाएँ प्रदान की थीं। इसके बाद वे तब सुर्खियों में आए, जब [[राष्ट्रपति भवन]] में दुर्व्यवाहर के विरोधस्वरूप उन्होंने '[[पद्मभूषण]]' की उपाधि वापस करने घोषणा कर दी। विष्णु प्रभाकर जी आकाशवाणी, दूरदर्शन, पत्र-पत्रिकाओं तथा प्रकाशन संबंधी मीडिया के विविध क्षेत्रों में पर्याप्त लोकप्रिय रहे। देश-विदेश की अनेक यात्राएँ करने वाले विष्णुजी जीवनपर्यंत पूर्णकालिक मसिजीवी रचनाकार के रूप में साहित्य की साधना में लिप्त रहे थे।&lt;br /&gt;
====कृतियाँ====&lt;br /&gt;
विष्णु प्रभाकर जी की प्रमुख कृतियाँ निम्नलिखित हैं-&lt;br /&gt;
#'''कहानी संग्रह''' - 'संघर्ष के बाद'&lt;br /&gt;
#'''उपन्यास''' - 'ढलती रात', 'स्वप्नमयी'&lt;br /&gt;
#'''उपन्यास''' - 'आवारा मसीहा', 'अर्धनारीश्वर', 'धरती अब भी घूम रही है', 'क्षमादान' और 'पंखहीन' नाम से उनकी आत्मकथा 3 भागों में प्रकाशित हो चुकी है।&lt;br /&gt;
#'''नाटक''' - 'हत्या के बाद', 'नवप्रभात', 'डॉक्टर', 'प्रकाश और परछाइयाँ', 'बारह एकांकी' और 'अशोक'&lt;br /&gt;
==पुरस्कार व सम्मान==&lt;br /&gt;
विष्णु प्रभाकर जी की प्रमुख रचना 'आवारा मसीहा' सर्वाधिक चर्चित जीवनी है। इस जीवनी रचना के लिए इन्हें 'पाब्लो नेरूदा सम्मान', 'सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार' जैसे कई विदेशी पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। इनका लिखा प्रसिद्ध नाटक 'सत्ता के आर-पार' पर उन्हें [[भारतीय ज्ञानपीठ]] द्वारा 'मूर्तिदेवी पुरस्कार' प्रदान किया गया [[हिंदी अकादमी]], [[दिल्ली]] द्वारा प्रभाकर जी को 'शलाका सम्मान' भी मिल चुका है।&lt;br /&gt;
====निधन====&lt;br /&gt;
[[भारत]] के प्रसिद्ध [[हिन्दी]] साहित्यकारों में से एक विष्णु प्रभाकर जी का निधन 96 वर्ष की उम्र में 11 अप्रैल, 2009 को [[नई दिल्ली]] में हो गया। [[हिन्दी साहित्य]] के इस अमूल्य मोती के चले जाने से साहित्य के एक अद्भुत सूरज का अंत हो गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1|माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध=}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://kavyanchal.com/parichay/?p=480 विष्णु प्रभाकर]&lt;br /&gt;
*[http://www.abhivyakti-hindi.org/lekhak/v/vishnu_prabhakar.htm श्री विष्णु प्रभाकर]&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{साहित्यकार}}&lt;br /&gt;
[[Category:साहित्यकार]]&lt;br /&gt;
[[Category:उपन्यासकार]]&lt;br /&gt;
[[Category:लेखक]]&lt;br /&gt;
[[Category:आधुनिक लेखक]]&lt;br /&gt;
[[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=14_%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%B0&amp;diff=276794</id>
		<title>14 दिसंबर</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=14_%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%B0&amp;diff=276794"/>
		<updated>2012-05-29T10:34:13Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* 14 दिसंबर को जन्मे व्यक्ति */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{कैलंडर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ग्रेगोरी कैलंडर]] के अनुसार 14 दिसंबर [[वर्ष]] का 348 वाँ ([[लीप वर्ष]] में यह 349 वाँ) दिन है। साल में अभी और 17 दिन शेष हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==14 दिसंबर की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ==&lt;br /&gt;
* [[1911]] - अमुंडसेन की दक्षिणी ध्रुव की यात्रा।&lt;br /&gt;
* [[1982]] - ब्रिटिश उपनिवेश जिब्राल्टर एवं स्पेन के बीच स्थित विशाल ग्रीन गेट 13 वर्षों के बाद पुन: खोला गया।&lt;br /&gt;
* [[2000]] - जार्ज डब्ल्यू बुश अमेरिका के 43 वें राष्ट्रपति निर्वाचित। &lt;br /&gt;
* [[2002]] - पाकिस्तान ने दक्षिण अफ़्रीका को हराकर नेत्रहीनों का विश्वकप जीता। &lt;br /&gt;
* [[2003]] - अमेरिकी गठबंधन सैनिकों ने इराक के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को तिकरित में गिरफ़्तार किया। &lt;br /&gt;
* [[2007]] - बाली समझौते के प्रारूप से विवादित प्रावधान अलग किये गए। &lt;br /&gt;
* [[2008]] - [[भारत]] ने अर्जेन्टीना के ख़िलाफ़ अंडर-21 हॉकी टेस्ट सीरीज के आख़िरी मैच 4-4 से ड्रा खेला।&lt;br /&gt;
==14 दिसंबर को जन्मे व्यक्ति==&lt;br /&gt;
* [[1910]] - [[उपेन्द्रनाथ अश्क]]- निबन्धकार, लेखक, कहानीकार हैं।&lt;br /&gt;
* [[1924]] - [[राज कपूर]]- भारतीय [[अभिनेता]]&lt;br /&gt;
* [[1953]] - [[विजय अमृतराज]]- भारत के पूर्व टेनिस खिलाड़ी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==14 दिसंबर को हुए निधन==&lt;br /&gt;
* [[1966]] - [[शैलेन्द्र]]- गीतकार&lt;br /&gt;
==14 दिसंबर के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव==&lt;br /&gt;
* हवाई सुरक्षा दिवस (सप्ताह)&lt;br /&gt;
* राष्ट्रीय ऊर्जा संवर्द्धन दिवस&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
{{कैलंडर बाहरी कड़ियाँ}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{कैलंडर2}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
	</entry>
	<entry>
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		<title>नागार्जुन</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9C%E0%A5%81%E0%A4%A8&amp;diff=276793"/>
		<updated>2012-05-29T10:26:58Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा साहित्यकार&lt;br /&gt;
|चित्र=Nagarjun.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=नागार्जुन&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=वैद्यनाथ मिश्र&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=नागार्जुन, यात्री&lt;br /&gt;
|जन्म=[[30 जून]], [[1911]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[दरभंगा ज़िला]], [[बिहार]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु=[[5 नवंबर]], [[1998]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=दरभंगा ज़िला, बिहार&lt;br /&gt;
|अविभावक=गोकुल मिश्र &lt;br /&gt;
|पालक माता-पिता=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=अपराजिता देवी&lt;br /&gt;
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|कर्म भूमि=&lt;br /&gt;
|कर्म-क्षेत्र=&lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ=रतिनाथ की चाची ([[1948]] ई.), बलचनमा ([[1952]] ई.), नयी पौध ([[1953]] ई.), बाबा वटेश्वरनाथ ([[1954]] ई.), दुखमोचन ([[1957]] ई.), वरुण के बेटे (1957 ई.)&lt;br /&gt;
|विषय=&lt;br /&gt;
|भाषा=&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=[[1969]] [[साहित्य अकादमी पुरस्कार हिन्दी|साहित्य अकादमी पुरस्कार]], [[1994]] साहित्य अकादमी फैलोशिप&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=लेखक और कवि&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय &lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=नागार्जुन की भाषा लोक भाषा के निकट है। कुछ कविताओं में संस्कृत के क्लिष्ट-तत्सम शब्दों का प्रयोग अधिक मात्रा में किया गया है। &lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन={{अद्यतन|15:56, 29 मई 2012 (IST)}}&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
'''नागार्जुन''' (जन्म- [[30 जून]], [[1911]], [[दरभंगा ज़िला]], [[बिहार]], -  मृत्यु- [[5 नवंबर]], [[1998]], दरभंगा ज़िला, बिहार) प्रगतिवादी विचारधारा के लेखक और कवि हैं। नागार्जुन ने [[1945]] ई. के आसपास साहित्य सेवा के क्षेत्र में क़दम रखा।   &lt;br /&gt;
==जीवन परिचय==&lt;br /&gt;
शून्यवाद के रूप में नागार्जुन का नाम विशेष उल्लेखनीय है। नागार्जुन का असली नाम वैद्यनाथ मिश्र था। हिन्दी साहित्य में उन्होंने 'नागार्जुन' तथा मैथिली में 'यात्री' उपनाम से रचनाएँ कीं। &lt;br /&gt;
==कृतियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रकाशित कृतियों में पहला वर्ग उपन्यासों का है।&lt;br /&gt;
====&amp;lt;u&amp;gt;उपन्यास&amp;lt;/u&amp;gt;====&lt;br /&gt;
*'रतिनाथ की चाची' ([[1948]] ई.)&lt;br /&gt;
*'बलचनमा' ([[1952]] ई.)&lt;br /&gt;
*'नयी पौध' ([[1953]] ई.)&lt;br /&gt;
*'बाबा वटेश्वरनाथ' ([[1954]] ई.)&lt;br /&gt;
*'दुखमोचन' ([[1957]] ई.)&lt;br /&gt;
*'वरुण के बेटे' (1957 ई.)&lt;br /&gt;
इन औपन्यासिक कृतियों में नागार्जुन सामाजिक समस्याओं के सधे हुए लेखक के रूप में सामने आते हैं। जनपदीय संस्कृति और लोक जीवन उनकी कथा-सृष्टि का चौड़ा फलक है। उन्होंने कहीं तो आंचलिक परिवेश में किसी ग्रामीण परिवेश के सुख-दु:ख की कहानी कही हैं, कहीं मार्क्सवादी सिद्धान्तो की झलक देते हुए सामाजिक आन्दोलनों का समर्थन किया है और कहीं-कहीं समाज में व्याप्त शोषण वृत्ति एवं धार्मिक सामाजिक कृतियों पर कुठाराघात किया है। इन सन्दर्भों में नागार्जुन की 'बाबा वटेश्वरनाथ' रचना उल्लेखनीय एवं परिपुष्ट कृति है। इसमें ज़मींदारी उन्मूलन के बाद की सामाजिक समस्याओं एवं ग्रामीण परिस्थितियों का अंकन हुआ है। और निदान रूप में समाजवादी संगठन द्वारा व्यापक संघर्ष की परिकल्पा की गई है। कथा के प्रस्तुतीकरण के लिए व्यवहृत किये जाने तक एक अभिनव रोचक शिल्प की दृष्टि से भी नागार्जुन का यह उपन्यास महत्त्वपूर्ण है।&lt;br /&gt;
====&amp;lt;u&amp;gt;कविता&amp;lt;/u&amp;gt;====&lt;br /&gt;
नागार्जुन की प्रकाशित रचनाओं का दूसरा वर्ग कविताओं का है। उनकी अनेक कविताएँ पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। 'युगधारा' (1952) उनका प्रारम्भिक काव्य संकलन है। इधर की कविताओं का एक संग्रह 'सतरंगे पंखोंवाली' प्रकाशित हुआ है। कवि की हैसियत से नागार्जुन प्रगतिशील और एक हद तक प्रयोगशील भी हैं। उनकी अनेक कविताएँ प्रगति और प्रयोग के मणिकांचन संयोग के कारण इस प्रकार के सहज भाव सौंदर्य से दीप्त हो उठी हैं। आधुनिक हिन्दी कविता में शिष्ट गम्भीर तथा सूक्ष्म चुटीले व्यंग्य की दृष्टि से भी नागार्जुन की कुछ रचनाएँ अपनी एक अलग पहचान रखती हैं। इन्होंने कहीं-कहीं सरस मार्मिक प्रकृति चित्रण भी किया है। &lt;br /&gt;
==भाषा==&lt;br /&gt;
नागार्जुन की भाषा लोक भाषा के निकट है। कुछ कविताओं में संस्कृत के क्लिष्ट-तत्सम शब्दों का प्रयोग अधिक मात्रा में किया गया है। किन्तु अधिकतर कविताओं और उपन्यासों की भाषा सरल है। तदभव तथा ग्रामीण शब्दों के प्रयोग के कारण इसमें एक विचित्र प्रकार की मिठास आ गई है।&lt;br /&gt;
==शैली==&lt;br /&gt;
नागार्जुन की शैलीगत विशेषता भी यही है। वे लोकमुख की वाणी बोलना चाहते हैं।&lt;br /&gt;
==मृत्यु==&lt;br /&gt;
नागार्जुन की मृत्यु [[5 नवंबर]], [[1998]] ई. को [[ख्वाजा सराय]], [[दरभंगा]], बिहार, भारत में हुई थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति&lt;br /&gt;
|आधार=&lt;br /&gt;
|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1&lt;br /&gt;
|माध्यमिक=&lt;br /&gt;
|पूर्णता=&lt;br /&gt;
|शोध=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{साहित्यकार}}{{भारत के कवि}}&lt;br /&gt;
[[Category:लेखक]][[Category:आधुनिक लेखक]]&lt;br /&gt;
[[Category:कवि]]&lt;br /&gt;
[[Category:साहित्यकार]][[Category:साहित्य_कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%81%E0%A4%9A%E0%A4%BE:%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B5_%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%81&amp;diff=276782</id>
		<title>साँचा:जीव जन्तु</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%81%E0%A4%9A%E0%A4%BE:%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B5_%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%81&amp;diff=276782"/>
		<updated>2012-05-29T09:27:00Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{Navbox&lt;br /&gt;
|name=जीव जन्तु&lt;br /&gt;
|title =जीव जन्तु जगत&lt;br /&gt;
|titlestyle = background:#b0c47f&lt;br /&gt;
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		<title>5 नवंबर</title>
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		<updated>2012-05-29T08:59:22Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* 5 नवंबर को हुए निधन */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{कैलंडर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ग्रेगोरी कैलंडर]] के अनुसार 5 नवंबर [[वर्ष]] का 309 वाँ ([[लीप वर्ष]] में यह 310 वाँ) दिन है। साल में अभी और 56 दिन शेष हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==5 नवंबर की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ==&lt;br /&gt;
* [[1914]] - [[इंग्लैंड]] एवं [[फ्रांस]] द्वारा तुर्की के विरुद्ध युद्ध की घोषणा। &lt;br /&gt;
* [[1985]] - 24 वर्ष तक शासन करने के बाद तंजानिया के राष्ट्रपति जूलियस न्येरेरे द्वारा पदत्याग। &lt;br /&gt;
* [[1995]] - इस्रायल के प्रधानमंत्री यित्जाक रॉबिन की गोली मारकर नृशंस हत्या। &lt;br /&gt;
* [[1999]] - वेस्टइंडीज के महानतम तेज गेंदबाज़ मैल्कम मार्शल का निधन। &lt;br /&gt;
* [[2001]] - [[भारत]] तथा [[रूस]] ने अफ़ग़ान सरकार में तालिबान की भागीदारी नामंजूर की। &lt;br /&gt;
* [[2002]] - ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खुमैनी ने जेल में बंद देश के शीर्ष असंतुष्ट नेता अब्दुल्ला नूरी को आम माफी दी। &lt;br /&gt;
* [[2004]] - गाजा पट्टी और पश्चिमी तट की चार बस्तियों को खाली करने संबंधी प्रधानमंत्री एरियल शैरोन की योजना को इस्रायली संसद ने मंजूरी दी। &lt;br /&gt;
* [[2006]] - इराक के उच्चाधिकार न्यायाधिकरण ने देश के अपदस्थ राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को मानवता के ख़िलाफ़ अपराध का दोषी पाते हुए फांसी की सज़ा सुनाई। &lt;br /&gt;
==5 नवंबर को जन्मे व्यक्ति==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==5 नवंबर को हुए निधन==&lt;br /&gt;
* [[1998]] - [[नागार्जुन]] रगतिवादी विचारधारा के लेखक और कवि&lt;br /&gt;
* [[2008]] - प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता [[बी. आर. चोपड़ा]] का निधन।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==5 नवंबर के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव==&lt;br /&gt;
* अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रास दिवस (सप्ताह)&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
{{कैलंडर बाहरी कड़ियाँ}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{कैलंडर2}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
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		<title>वार्ता:केकड़ा</title>
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&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{वार्ता}}&lt;/div&gt;</summary>
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		<title>केकड़ा</title>
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		<updated>2012-05-29T08:51:12Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: '{{पुनरीक्षण}} {{tocright}} '''केकड़ा''' क्रस्टेशिया वर्ग का डेका...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{पुनरीक्षण}}&lt;br /&gt;
{{tocright}}&lt;br /&gt;
'''केकड़ा''' क्रस्टेशिया वर्ग का डेकापोडा गण के छोटी पूंछ वाले जंतु होते हैं, विशेषकर बैकियूरा या असली केकड़ा, लेकिन एनोम्युरा जैसे अन्य जीव भी, जो दिखने और आदतों में इनसे मिलते-जुलते हो सकते हैं। सभी माहासागरों, मीठे पानी और जमीन पर केकड़ों की लगभग 4,500 प्रजातियाँ पाई जाती हैं।&lt;br /&gt;
डेकोपोडा गण के अन्य जंतुओं &amp;lt;ref&amp;gt;उदाहरणार्थ, झींगा, लॉबस्टर, क्रेफ़िश&amp;lt;/ref&amp;gt; से भिन्न केकड़े की पूंछ वक्ष या शरीर के मध्यखंड के नीचे मुडी हुई होती है। इसका ऊपरी कवच सामान्यतः चौड़ा होता है। पैरों का अगला जोड़ा पंजे या चिमटी में रूपांतरित रहता है।&lt;br /&gt;
==विस्तार और क़िस्में==&lt;br /&gt;
अधिकांश केकड़े [[समुद्र]] में रहते हैं; यहाँ तक कि उष्णकटिबंधीय देशों में बहुतायत में पाए जाने वाले भूमिचर केकड़े भी सामान्यतः कई बार समुद्र में जाते हैं और अपने जीवन का प्रारंभिक काल वहाँ व्यतीत करते हैं। दक्षिणी [[यूरोप]] की नदियों में पाया जाने वाला लेंटेन केकड़ा (पोटामॉन फ़्लूविएटाईल) दुनिया के अधिकांश गर्म इलाक़ों में मीठे पानी के केकड़ों की बहुतायत का एक उदाहरण है, आमतौर पर केकड़े गलफड़ों से सांस लेते हैं, जो ऊपरी खोल की बग़लों के नीचे दो छिद्रों में होते हैं, लेकिन असली भूमिचर केकड़ों में ये छिद्र बड़े होकर हवा में सांस लेने के लिए फेफड़ों की भूमिका निभाते हैं। &lt;br /&gt;
इनके गमन का सामान्य तरीक़ा चलना या रेंगना है, और सामान्य तटीय केकड़े का दाईं या बाईं ओर सरकना आमतौर पर इस समूह के सभी सदस्यों का लक्षण है। पार्ट्यूनिडी परिवार और कुछ अन्य परिवारों के केकड़े अपने चपटे चप्पूनुमा पैरों की मदद से निपुणतापूर्वक तैरते हैं।&lt;br /&gt;
====हरमिट केकड़ा====&lt;br /&gt;
हरमिट केकड़े (पैग्यूरिडी और कोएनबिटिडी) एनोम्युर केकड़ों की मशहूर जाति है, जो उदरपादीय कवचधारी प्राणियों के खाली कवचों में रहते हैं ओर उन्हें अपने सचल आवास की तरह अपने साथ लिए चलते हैं। जैसे-जैसे केकड़े का आकार बढ़ता है, यह अपना आवास समय-समय पर बदलता रहता है। उष्णकटिबंधीय देशों में कोएनबिटिडी परिवार के हरमिट केकड़े समुद्र में जाते हैं। हिंद-प्रशांत द्वीपों पर पाया जाने वाला बड़ा लुटेरा या नारियल केकड़ा (ब्राइग्रस लेट्रो), जो इसी परिवार का सदस्य है, ने सचल आवास साथ लिए चलने की आदत छोड़ दी है और इसके उदर का ऊपरी भाग कवची पट्टिकाओं से ढका रहता है।&lt;br /&gt;
====क्रस्टेशिया वर्ग====&lt;br /&gt;
कई अन्य क्रस्टेशिया वर्ग के प्राणियों की तरह केकड़े भी सर्वभक्षी होते हैं और सफ़ाईकर्मियों की भूमिका निभाते हैं, लेकिन कई केकड़े शिकार करते हैं और कुछ शाकाहारी होते है।&lt;br /&gt;
हालांकि कोई भी केकड़ा वस्तुतः परजीवी नहीं होता है, कुछ केकड़े अन्य प्राणियों के साथ मेल-मिलाप से रहते है। इसका उदाहरण छोटा पी केकड़ा (पिनाथेरेडी) है, जो सीपियों और अन्य कई कवचधारी प्राणियों के खोलों, कीट नलियों और अकिनोडर्म प्राणियो के भीतर रहता हुआ अपने मेज़बान के भोजन में हिस्सेदारी करता है; एक अन्य उदाहरण कोरल-गॉल केकड़ा (हैप्लोकार्सिनिडी) है, जो कुछ मूंगों के बढ़ने वाले किनारों को इस प्रकार छोड़ता है कि वे यों बढ़े कि मादा उसमें क़ैद हो जाई। धीमी गति से चलने वाले मकड़ी केकड़ों (मजिडी) में से कई अपने खोल को समुद्री घास, स्पंज और उद्भिद प्राणियों से ढक लेते हैं और सफल छद्मवेश बना लेते हैं। जापान का विशालकाय केकड़ा (मैक्रोचेरिया कैंफेरी) और तस्मानियाई केकड़ा दो सबसे बड़े ज्ञात क्रस्टेशियन प्राणी हैं। जापानी केकड़े के फैले हुए पैरों की नोक से ऊपरी नोक तक की लंबाई चार मीटर तक हो सकती है। तस्मानियाई केकड़ा, जिसका वज़न 9 किग्रा से अधिक हो सकता है, के पंजे छोटे और सुदृढ़ होते हैं; इनमें से बड़े वयस्क की लंबाई 43 सेमी हो सकती है; किसी और बड़े नमूने का शरीर या ऊपरी कवच 46 सेमी का हो सकता हैं। दूसरी ओर काफ़ी छोटे केकड़े पाए जाते हैं, जो ऊपरी वयस्क होने पर भी एक या दो सेमी लंबे होते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधिकांश क्रस्टेशियन प्राणियों की तरह लगभग सभी केकड़ों में अंडों से निकलने वाले बच्चे अपने माता-पिता से काफ़ी अलग दिखते हैं। लार्वा चरण में, जिसे जोइआ भी कहते हैं, यह एक सूक्ष्म पारदर्शी पादाहित  गोल शरीर वाला प्राणी होता है, जो समुद्र की सतह पर तैरता रहता है। कई बार त्वचा छोड़ने के बाद बढ़ता हुआ केकड़ा मेगालॉप्स चरण से गुज़रता है, जिसमें शरीर और पैर केकड़ों की भांति हो जाते हैं, लेकिन उदर काफ़ी बड़ा होता है और मुड़ा हुआ नहीं होता} एक बार और आकार बदलने के बाद यह जंतु व्यस्कों के समान आकार ग्रहण कर लेता है। कई केकड़े, विशेषकर मीठे पानी में पाए जाने वाले, इस रूपांतरण से नहीं गुज़रते, बल्कि सीधे वयस्क के लघु रूप में ही बाहर आते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==आर्थिक महत्त्व==&lt;br /&gt;
खाद्य पदार्थ के रूप में कई केकड़ों की मांग बहुत ज्यादा है। इनमें सबसे महत्त्वपूर्ण और बहुमूल्य खाद्य केकड़े ब्रिटिश और यूरोपीय तट के केकड़े (कैंसर पैग्यूरस), [[उत्तरी अमेरिका]] में अटलांटिक तट के [[नीला रंग|नीले]] केकड़े (कैलिनेक्टेस सैपिडस) और प्रशांत तट के डंगेनेस केकड़े (कैंसर मैगिस्टर) है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में तैरने वाले केकड़े, साइला और पॉर्ट्यूनस, जो अमेरिकी नीले केकड़े से संबंधित हैं, समुद्री खाद्य पदार्थ के सबसे महत्त्वपूर्ण स्रोत हैं। एनोम्पूरा श्रेणी के लिथोडिड (शाब्दिक अर्थ, पत्थर) केकड़े वाणिज्यिक दृष्टि से मूल्यवान हैं, जिनमें [[जापान]] से परे बेरिंग सागर में अलास्का के जलीय क्षेत्र में पाया जाने वाला तथाकथित किंग केकड़ा (पेरालिथोडेस कैम्टशैटिका) सबसे महत्त्वपूर्ण है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{जीव जन्तु}}&lt;br /&gt;
[[Category:प्राणि विज्ञान]] &lt;br /&gt;
[[Category:जलचर]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्राणि विज्ञान कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना मई-2012]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
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		<title>25 मार्च</title>
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		<updated>2012-05-29T08:38:59Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* 25 मार्च को हुए निधन */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{कैलंडर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ग्रेगोरी कैलंडर]] के अनुसार 25 मार्च [[वर्ष]] का 84 वाँ ([[लीप वर्ष]] में यह 85 वाँ) दिन है। साल में अभी और 281 दिन शेष हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==25 मार्च की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ==&lt;br /&gt;
* [[1987]] - दक्षेस (सार्क) देशों का स्थायी सचिवालय नेपाल की राजधानी काठमांडू में खोला गया। &lt;br /&gt;
* [[1999]] - भारत द्वारा पाकिस्तानी नागरिकों के आठ वर्गों को वीसा मामले में छूट देने की घोषणा। &lt;br /&gt;
* [[2003]] - सद्दाम नहर और फरात पुल पर इराक का कब्ज़ा। पहले पोर्टेबल कम्प्यूटर बनाने वाले एडम ओस्बोर्न का देहांत। &lt;br /&gt;
* [[2005]] - संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सूडान के लिए शांति सेना की मंजूरी दी। &lt;br /&gt;
* [[2007]] - टीम इंडिया विश्वकप क्रिकेट से बाहर। &lt;br /&gt;
* [[2008]] - &lt;br /&gt;
**टाटा ग्रुप की [[पुणे]] स्थित फर्म 'कम्यूटेशन रिसर्च लैबरटरीज' ने इंटरनेशनल फर्म 'याहू' से गठजोड़ किया।&lt;br /&gt;
**अंतरिक्ष यान एंडेवर सफलतापूर्वक अपने मिशन को अंजाम देने के बाद अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से रवाना हुआ। &lt;br /&gt;
==25 मार्च को जन्मे व्यक्ति==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==25 मार्च को हुए निधन==&lt;br /&gt;
* [[1975]] - देइवा ज़िवारात्तीनम, भारतीय राजनीतिज्ञ।&lt;br /&gt;
* [[1931]] - [[गणेशशंकर विद्यार्थी]] - स्वाधीनता संग्राम में गणेशशंकर विद्यार्थी का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==25 मार्च के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव==&lt;br /&gt;
* गणेश शंकर विद्यार्थी का बलिदान दिवस&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
{{कैलंडर बाहरी कड़ियाँ}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{कैलंडर2}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
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	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=26_%E0%A4%85%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%82%E0%A4%AC%E0%A4%B0&amp;diff=276777</id>
		<title>26 अक्टूबर</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=26_%E0%A4%85%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%82%E0%A4%AC%E0%A4%B0&amp;diff=276777"/>
		<updated>2012-05-29T08:35:16Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* 26 अक्टूबर को जन्मे व्यक्ति */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{कैलंडर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ग्रेगोरी कैलंडर]] के अनुसार 26 अक्टूबर [[वर्ष]] का 299 वाँ ([[लीप वर्ष]] में यह 300 वाँ) दिन है। साल में अभी और 66 दिन शेष हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==26 अक्टूबर की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ==&lt;br /&gt;
* [[1994]] - इस्रायल और जार्डन के बीच अरावा क्रासिंग पर बहुप्रतीक्षित शांति संधि सम्पन्न। &lt;br /&gt;
* [[2001]] - [[जापान]] ने [[भारत]] और [[पाकिस्तान]] के ख़िलाफ़ लगे प्रतिबंधों को हटाने की घोषणा की। &lt;br /&gt;
* [[2005]] - वर्ष 2006 को भारत-चीन मैत्री वर्ष के रूप में मनाने का फैसला। &lt;br /&gt;
* [[2006]] - इस्रायल में एक मंत्री ने भारत से बराक सौदे पर जांच की मांग की।&lt;br /&gt;
* [[2007]] - अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का महत्त्वपूर्ण यान डिस्कवरी अंतर्राष्ट्रीय स्पेश स्टेशन पर सफलतापूर्वक उतरा। अमेरिका ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स तथा वहाँ के बैंकों पर प्रतिबन्ध लगाया। &lt;br /&gt;
==26 अक्टूबर को जन्मे व्यक्ति==&lt;br /&gt;
*1775 - बहादुरशाह ज़फ़र - [[भारत]] में मुग़लों का अंतिम सम्राट।&lt;br /&gt;
*[[1890]] - [[गणेशशंकर विद्यार्थी]] - स्वाधीनता संग्राम में गणेशशंकर विद्यार्थी का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==26 अक्टूबर को हुए निधन==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==26 अक्टूबर के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
{{कैलंडर बाहरी कड़ियाँ}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{कैलंडर2}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=23_%E0%A4%AB%E0%A4%BC%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%80&amp;diff=276772</id>
		<title>23 फ़रवरी</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=23_%E0%A4%AB%E0%A4%BC%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%80&amp;diff=276772"/>
		<updated>2012-05-29T08:25:30Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* 23 फ़रवरी को हुए निधन */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{कैलंडर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ग्रेगोरी कैलंडर]] के अनुसार 23 फ़रवरी [[वर्ष]] का 54 वाँ दिन है। साल में अभी और 311 दिन शेष हैं। ([[लीप वर्ष]] में 312 दिन)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==23 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ==&lt;br /&gt;
* [[1998]] - जैविक एवं रासायनिक हथियारों की जांच को लेकर हुए गतिरोध को समाप्त करने के लिए सं.रा. महासचिव कोफी अन्नान व इराकी उपप्रधानमंत्री तारिक अजीज के बीच ऐतिहासिक समझौता सम्पन्न, विश्व में पहली बार बछड़े की प्रतिकृति क्लोन सं.रा. अमेरिका में तैयार। &lt;br /&gt;
* [[2001]] - अमेरिकी सीनेट द्वारा सीटीबीटी खारिज, प्रक्षेपास्त्र रक्षा प्रणाली जारी रखने की घोषणा। &lt;br /&gt;
* [[2003]] - कनाडा के डेविसन ने विश्वकप का सबसे तेज़ शतक लगाकर 1983 में बनाये गये कपिलदेव का रिकार्ड तोड़ा। &lt;br /&gt;
* [[2005]] - अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई तीन दिवसीय यात्रा पर भारत पहुँचे। &lt;br /&gt;
* [[2006]] - ईराक में जातीय हिंसा में 159 लोग मारे गये। &lt;br /&gt;
* [[2007]] - पाकिस्तान ने शाहीन-2 का परीक्षण किया। &lt;br /&gt;
* [[2008]]- &lt;br /&gt;
**10 साल बाद चुनार सीमेण्ट फैक्ट्री में उत्पादन शुरू हुआ। सक्षामंत्री ए.के. एंटनी ने जेट ट्रेनर हॉक विमान को देश के बेड़े में शामिल करने की औपचारिक घोशणा की।&lt;br /&gt;
**कोलंबो में हुए एक विस्फोट में 18 लोग घायल हुए। &lt;br /&gt;
* [[2009]]- भारतीय तीरंदाज थाईलैंड की राजधानी [[बैंकॉक]] में एशियाई ग्रां प्री तीरंदाजी चैम्पियनशिप में टीम स्पर्धा में तीन रजत पदक जीते।&lt;br /&gt;
* [[2010]]-&lt;br /&gt;
** 2962वें वन डे में बनाए गए पहला दोहरा शतक बनाने वाले सचिन की बदौलत [[भारत]] ने दक्षिण अफ्रिका से [[ग्वालियर]] के कैप्टन रूपसिंह स्टेडियम में खेला गया एकदिवसीय मैच 153 रनों से जीत लिया। 402 रनों के लक्ष्य के जबाब में दक्षिण अफ्रीका की पूरी टीम 43वें ओवर में 248 रन बनाकर आउट हो गई। इसके साथ ही [[भारत]] ने तीन मैचों की श्रृंखला में 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली।&lt;br /&gt;
** [[भारत]] के मशहूर चित्रकार [[एम.एफ. हुसैन]] को कतर की नागरिकता प्रदान कर दी गई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==23 फ़रवरी को जन्मे व्यक्ति==&lt;br /&gt;
* [[1969]] - [[भाग्यश्री]]&lt;br /&gt;
* [[1982]] - कर्ण सिंह, भारतीय [[राजनेता]]&lt;br /&gt;
* [[1983]] - अज़ीज़ अंसारी, भारतीय/अमेरिकन हास्य [[अभिनेता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==23 फ़रवरी को हुए निधन==&lt;br /&gt;
* [[1969]] - [[वृंदावनलाल वर्मा]]&lt;br /&gt;
* [[1969]] - [[मधुबाला]] (जन्म [[1933]])&lt;br /&gt;
* [[1990]] - [[अमृतलाल नागर]], साहित्य जगत में उपन्यासकार के रूप में सर्वाधिक ख्याति प्राप्त हुई&lt;br /&gt;
* [[2004]] - [[विजय आनन्द]] (जन्म [[1934]])&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==23 फ़रवरी के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
{{कैलंडर बाहरी कड़ियाँ}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{कैलंडर2}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=21_%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%B0&amp;diff=276770</id>
		<title>21 दिसंबर</title>
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		<updated>2012-05-29T08:18:50Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* 21 दिसंबर को हुए निधन */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{कैलंडर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ग्रेगोरी कैलंडर]] के अनुसार 21 दिसंबर [[वर्ष]] का 355 वाँ ([[लीप वर्ष]] में यह 356 वाँ) दिन है। साल में अभी और 10 दिन शेष हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==21 दिसंबर की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ==&lt;br /&gt;
* [[1991]] - कजाकिस्तान की राजधानी अल्मा अता में 11 सोवियत गणराज्यों द्वारा राष्ट्रमंडल का गठन। &lt;br /&gt;
* [[1998]] - नेपाली प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला का इस्तीफ़ा। &lt;br /&gt;
* [[2002]] - [[ब्रिटेन]] ने धमकी के बाद बोगोटा का दूतावास बंद किया। &lt;br /&gt;
* [[2007]] - चीन के दक्षिणी यूनैन प्रान्त के कुनमिंग मिलिट्री एकेडमी में भारत व चीन के बीच पहला साझा अभ्यास शुरू। &lt;br /&gt;
* [[2008]]- कांग्रेस अध्यक्ष [[सोनिया गांधी]] व बॉलीवुड स्टार [[शाहरुख ख़ान]] को अमेरिका पत्रिका न्यूज बीक ने दुनिया के 50 शक्तिशाली लोगों की सूची में शामिल किया। &lt;br /&gt;
==21 दिसंबर को जन्मे व्यक्ति==&lt;br /&gt;
* [[1932]] - [[यू. आर. अनंतमूर्ति]], [[कन्नड़ भाषा]] के प्रसिद्ध रचनाकार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==21 दिसंबर को हुए निधन==&lt;br /&gt;
* [[1938]] - [[महावीर प्रसाद द्विवेदी]], हिन्दी गद्य साहित्य के महान साहित्यकार, पत्रकार एवं युगविधायक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==21 दिसंबर के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
{{कैलंडर बाहरी कड़ियाँ}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{कैलंडर2}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=9_%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%B0&amp;diff=276765</id>
		<title>9 दिसंबर</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=9_%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%B0&amp;diff=276765"/>
		<updated>2012-05-29T07:41:47Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* 9 दिसंबर को हुए निधन */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{कैलंडर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ग्रेगोरी कैलंडर]] के अनुसार 9 दिसंबर [[वर्ष]] का 343 वाँ ([[लीप वर्ष]] में यह 344 वाँ) दिन है। साल में अभी और 22 दिन शेष हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==9 दिसंबर की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ==&lt;br /&gt;
* [[1998]] - [[रूस]] द्वारा आर्कटिक सागर में अपक्रांतिक परमाणु परीक्षण किया गया, आस्ट्रेलियाई क्रिकेट खिलाड़ियों शेन वार्न और मार्क वॉ ने एक भारतीय सट्टेबाज़ से 1994 में पाकिस्तान दौदे पर रिश्वत लेने की बात स्वीकारी। &lt;br /&gt;
* [[2000]] - दक्षिण कोरिया का दर्जा विकासशील देश से बढ़कर विकसित देश किया गया। &lt;br /&gt;
* [[2001]] - यूनाइटेड नेशनल पार्टी के नेता रानिल विक्रमसिंघे ने श्रीलंका के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली; तालिबान में नार्दन एलांयस का विमान दुर्घटनाग्रस्त, 21 मरे। &lt;br /&gt;
* [[2002]] - जॉन स्नो अमेरिका के नये वित्तमंत्री बने। &lt;br /&gt;
* [[2006]] - पाकिस्तान ने परमाणु क्षमता युक्त मध्यम दूरी के प्रक्षेपास्त्र 'हत्फ़-3 ग़ज़नवी' का परीक्षण किया। &lt;br /&gt;
* [[2007]] - पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो ने पाकिस्तानी सरकार के साथ अपने सभी सम्बन्ध समाप्त करने की घोषणा की। &lt;br /&gt;
* [[2008]]- इसरो ने [[यूरोप]] के प्रसिद्ध उपग्रह प्रणाली विशेषज्ञ ईएडीएम एस्ट्रीयस के लिए सेटेलाइट का निर्माण किया। &lt;br /&gt;
==9 दिसंबर को जन्मे व्यक्ति==&lt;br /&gt;
* [[1929]] - [[रघुवीर सहाय]], [[हिन्दी]] के साहित्यकार व पत्रकार&lt;br /&gt;
==9 दिसंबर को हुए निधन==&lt;br /&gt;
* [[1997]] - [[शिवराम कारंत|के शिवराम कारंत]] [[कन्नड़ भाषा]] के विख्यात साहित्यकार &lt;br /&gt;
* [[2009]] - [[उस्ताद हनीफ मोहम्मद खाँ]], भारतीय [[तबला]] वादक।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==9 दिसंबर के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव==&lt;br /&gt;
* बालिका दिवस (भारत)&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
{{कैलंडर बाहरी कड़ियाँ}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{कैलंडर2}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B2%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%82_%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%9C%E0%A5%80&amp;diff=276764</id>
		<title>लल्लू लालजी</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B2%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%82_%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%9C%E0%A5%80&amp;diff=276764"/>
		<updated>2012-05-29T07:33:47Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;'''लल्लू जी लाल''' [[भारत]] के [[उत्तर प्रदेश]] प्रदेश के [[आगरा]] ज़िले के रहने वाले थे। लल्लू जी लाल को लालचंद, लल्लूजी या लाल कवि के नाम से भी जाना जाता है। &lt;br /&gt;
*[[ब्रितानी शासन]] के दौरान लल्लू जी '[[फोर्ट विलियम कॉलेज]]' [[कोलकाता]] में अध्यापक थे। &lt;br /&gt;
*उनका काम ब्रिटिश राज के कर्मचारियों के लिए पाठय सामग्री तैयार करना था। &lt;br /&gt;
*साहित्यकार के रूप में लल्लूजी किस पायदान पर हैं, इसका मूल्यांकन करना तो आलोचकों का काम है, लेकिन यह सब मानते हैं कि [[हिन्दी]] के विकास में उनका योगदान है। &lt;br /&gt;
*1804 से 1810 के बीच लिखी गई कृति '[[प्रेमसागर]]' [[कृष्ण]] की लीलाओं व [[भागवत पुराण]] के दसवें अध्याय पर आधारित थी। &lt;br /&gt;
*डब्लू. होलिंग्स ने सन् 1848 में [[अंग्रेज़ी]] में 'प्रेमसागर' का अनुवाद किया। &lt;br /&gt;
*47वीं रेजीमेंट [[लखनऊ]] में कैप्टन हाँलिंग्स ने प्रस्तावना में लिखा था, '[[हिन्दी भाषा]] का ज्ञान [[भारत|हिन्दुस्तान]](तत्कालीन भारत) में रहने वाले सभी सरकारी अफ़सरों के लिए ज़रूरी है, क्योंकि यह देश के ज़्यादातर हिस्से में बोली जाती है।' &lt;br /&gt;
*प्राइस ने 'प्रेमसागर' के कठिन शब्दों का हिन्दी-अंग्रेज़ी कोष तैयार किया था।  &lt;br /&gt;
*कहा जाता है कि [[आगरा]] के लल्लू जी लाल शहर की 'सुनार गली' में ही कहीं रहते थे। &lt;br /&gt;
*आगरा की 'नागरी प्रचारिणी सभा' में भी उनका विवरण नहीं है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति&lt;br /&gt;
|आधार=&lt;br /&gt;
|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1&lt;br /&gt;
|माध्यमिक=&lt;br /&gt;
|पूर्णता=&lt;br /&gt;
|शोध=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{साहित्यकार}}&lt;br /&gt;
[[Category:कवि]]&lt;br /&gt;
[[Category:लेखक]][[Category:आधुनिक लेखक]][[Category:साहित्य_कोश]][[Category:साहित्यकार]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=6_%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%80&amp;diff=276763</id>
		<title>6 जनवरी</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=6_%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%80&amp;diff=276763"/>
		<updated>2012-05-29T07:24:51Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* 6 जनवरी को हुए निधन */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{कैलंडर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ग्रेगोरी कैलंडर]] के अनुसार 6 जनवरी [[वर्ष]] का 6 वाँ दिन है। साल में अभी और 359 दिन शेष हैं। ([[लीप वर्ष]] में 360 दिन)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==6 जनवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ==&lt;br /&gt;
* [[2002]] - [[भारत]] ने सीमा में घुस आया [[पाकिस्तान]] का जासूसी विमान मार गिराया, दक्षेस शिखर सम्मेलन सम्पन्न, काठमाण्डू घोषणा-पत्र में आतंकवाद के खात्में पर ज़ोर, भारत की राजनीतिक सफलता, ब्रिटेन के [[प्रधानमंत्री]] टोनी ब्लेयर व भारतीय प्रधानमंत्री [[अटल बिहारी वाजपेयी]] की बातचीत के बाद दिल्ली घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर, [[बांग्लादेश]] की मुद्रा से शेख़ मुजीब का चित्र हटाया गया, [[संयुक्त राज्य अमेरीका]] में एक और विमान भवन से टकराया। &lt;br /&gt;
* [[2003]] - [[रूस]] ने संयुक्त राष्ट्र से बिना अनुमति लिये इराक के ख़िलाफ़ सैनिक कार्रवाई पर अमेरिका को चेतावनी दी। &lt;br /&gt;
* [[2007]] - [[उत्तर प्रदेश]] का हिन्दी संस्थान की ओर से साहित्य के क्षेत्र में दिये जाने वाले वार्षिक पुरस्कारों के अंतर्गत वर्ष 2007 के भारत भारती सम्मान केदारनाथ सिंह को प्रदान करने की घोषणा हुई। &lt;br /&gt;
* [[2008]] - &lt;br /&gt;
**[[राज्यसभा]] सदस्य और [[बंगलुरू]] के उद्यमी तथा पूंजी और निवेश कंपनी जूपिटर कैपिटल के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजीव चन्द्रशेखर को फिक्की का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।&lt;br /&gt;
**अमेरिका के पश्चिमी तटीय क्षेत्र में आए तूफ़ान से भारी तबाही। &lt;br /&gt;
* [[2010]]- [[नई दिल्ली]] में यमुना बैंक-आनंद विहार सेक्शन की [[मेट्रो रेल|मेट्रो रेलों]] का परिचालन आरंभ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==6 जनवरी को जन्मे व्यक्ति==&lt;br /&gt;
* [[1910]] - [[जी. एन. बालासुब्रमनियम]], भारतीय कर्नाटक संगीतकार &lt;br /&gt;
* [[1932]] - [[कमलेश्वर]] - [[हिन्दी]] के प्रसिद्ध साहित्यकार&lt;br /&gt;
* [[1959]] - [[कपिल देव]], भारतीय [[क्रिकेट]] टीम के पूर्व कप्तान &lt;br /&gt;
* [[1966]] - [[ए आर रहमान]], [[ऑस्कर]] विजेता भारतीय संगीतकार&lt;br /&gt;
* [[1996]]-  किशन श्रीकांत, फ़िल्म निर्देशक, [[अभिनेता]] &lt;br /&gt;
==6 जनवरी को हुए निधन==&lt;br /&gt;
* 1847 - [[त्यागराज]], भारतीय कर्नाटक शास्त्रीय संगीतकार&lt;br /&gt;
* [[1885]] - [[भारतेन्दु हरिश्चंद्र]], आधुनिक [[हिन्दी साहित्य]] के प्रवर्तक, जिन्होंने हरिश्चंद्र मैगजीन, कविवचन सुधा जैसी पत्रिका निकाली तथा अंधेरनगरी और [[भारत]] दुर्दशा आदि अनेक नाटक लिखा।&lt;br /&gt;
* [[2009]]- जी.एम. शाह, [[जम्मू-कश्मीर]] के पूर्व मुख्यमंत्री&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==6 जनवरी के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव==&lt;br /&gt;
* राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह।&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
{{कैलंडर बाहरी कड़ियाँ}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{कैलंडर2}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=13_%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%80&amp;diff=276762</id>
		<title>13 जनवरी</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=13_%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%80&amp;diff=276762"/>
		<updated>2012-05-29T07:12:53Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* 13 जनवरी को हुए निधन */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{कैलंडर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ग्रेगोरी कैलंडर]] के अनुसार 13 जनवरी [[वर्ष]] का 13 वाँ दिन है। साल मे अभी और 352 दिन शेष हैं। ([[लीप वर्ष]] में 353 दिन)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==13 जनवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ==&lt;br /&gt;
* 1607 - स्पेन में राष्ट्रीय दिवालिएपन की घोषणा के बाद 'बैंक ऑफ जेनेवा' का पतन हुआ।&lt;br /&gt;
* 1709- [[मुग़ल]] शासक [[बहादुर शाह प्रथम]] ने सत्ता संघर्ष में अपने तीसरे भाई [[कमबख्श]] को [[हैदराबाद]] में पराजित किया।&lt;br /&gt;
* 1818- [[उदयपुर]] के राणा ने [[मेवाड़]] के संरक्षण के लिये अंग्रेज़ों के साथ संधि की।&lt;br /&gt;
* 1842 - ब्रिटिश [[ईस्ट इंडिया कम्पनी]] की सेना के अधिकारी डॉ. विलियम ब्राइडन 'आंग्ल अफ़गान युद्ध' में जिंदा बचे रहने वाले इकलौते ब्रिटिश सदस्य रहे।&lt;br /&gt;
* 1849 - द्वितीय आंग्ल सिख युद्ध के दौरान चिलियांवाला की प्रसिद्ध लड़ाई शुरू हुई।&lt;br /&gt;
* [[1889]]- [[असम]] के युवाओं ने अपनी साहित्यिक पत्रिका '[[जोनाकी]]' का प्रकाशन शुरू किया।&lt;br /&gt;
* [[1910]] - न्यूयॉर्क शहर में दुनिया का पहला सार्वजनिक रेडियो प्रसारण प्रारम्भ हुआ। &lt;br /&gt;
* [[1948]]- राष्ट्रपिता [[महात्मा गांधी]] ने [[हिन्दू]]-[[मुस्लिम]] एकता बनाये रखने के लिये [[आमरण अनशन]] शुरू किया।&lt;br /&gt;
* [[1988]] - चीन के राष्ट्रपति चिंग चियांग कुमो का निधन। &lt;br /&gt;
* [[1995]] - बेलारूस नाटो का 24वाँ सदस्य देश बना। &lt;br /&gt;
* [[1999]] - नूर सुल्तान नजरवायेव पुन: कजाकिस्तान के राष्ट्रपति चुने गए। &lt;br /&gt;
* [[2002]] - पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ़ के संदेश को भारत ने सकारात्मक बताया, चीनी प्रधानमंत्री झू रोंगजी 6 दिवसीय यात्रा पर भारत पहुँचे। &lt;br /&gt;
* [[2006]] - परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान पर सैन्य आक्रमण से ब्रिटेन ने इन्कार किया। &lt;br /&gt;
* [[2007]] - महिलाओं के प्रति भेदभाव दूर करने के लिए संयुक्त राष्ट्र का 37वाँ अधिवेशन न्यूयार्क में शुरू। &lt;br /&gt;
* [[2008]] - &lt;br /&gt;
**[[चाय]] निर्माण कंपीन मारवल [[चाय]] को संयुक्त अरब अमीरात से एक लाख किलोग्राम [[चाय]] के निर्माण का आर्डर मिला।&lt;br /&gt;
**मैसिडोनिया में सैन्य विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से 11 लोग मरे। &lt;br /&gt;
* [[2009]] - [[जम्मू-कश्मीर]] के पूर्व [[मुख्यमंत्री]] फ़ारुख़ अब्दुल्ला नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष बनाए गए।&lt;br /&gt;
==13 जनवरी को जन्मे व्यक्ति==&lt;br /&gt;
* [[1911]] - [[शमशेर बहादुर सिंह]], हिन्दी कवि&lt;br /&gt;
* [[1949]] - [[राकेश शर्मा]], पहले भारतीय और 138 अंतरिक्ष यात्रियों में से एक&lt;br /&gt;
* [[1978]] - [[अश्मित पटेल]], भारतीय अभिनेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==13 जनवरी को हुए निधन==&lt;br /&gt;
* [[1988]] - [[अखिलंदम पी. वी.]] - सुविख्यात साहित्यकार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==13 जनवरी के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव==&lt;br /&gt;
* अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म समारोह दिवस (10 दिवसीय)। &lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
{{कैलंडर बाहरी कड़ियाँ}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{कैलंडर2}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
	</entry>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=7_%E0%A4%AB%E0%A4%BC%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%80&amp;diff=276761</id>
		<title>7 फ़रवरी</title>
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		<updated>2012-05-29T07:12:37Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* 7 फ़रवरी को जन्मे व्यक्ति */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{कैलंडर}}&lt;br /&gt;
[[ग्रेगोरी कैलंडर]] के अनुसार 7 फ़रवरी [[वर्ष]] का 38 वाँ दिन है। साल में अभी और 327 दिन शेष हैं। ([[लीप वर्ष]] में 328 दिन)&lt;br /&gt;
==7 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ==&lt;br /&gt;
* 1792 - आस्ट्रेलिया एवं प्रुशिया ने फ़्रांस के ख़िलाफ़ एक समझौते पर हस्ताक्षर किये।&lt;br /&gt;
* 1831 - बेल्जियम में संविधान लागू।&lt;br /&gt;
* 1856 - नवाब [[वाजिद अली शाह]] द्वारा [[अवध]] राज्य का [[ईस्ट इण्डिया कम्पनी|ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी]] में शांतिपूर्ण विलयन।&lt;br /&gt;
* [[1915]] - चलती ट्रेन से पहली बार भेजा गया वायरलेस संदेश रेलवे स्टेशन को प्राप्त हुआ।&lt;br /&gt;
* [[1962]] - &lt;br /&gt;
**अमेरिका ने क्यूबा से सभी तरह के आयात पर रोक लगाई।&lt;br /&gt;
**जर्मनी की एक कोयला खदान में विस्फोट से 298 मजदूरों की मौत।&lt;br /&gt;
* [[1983]] - कोलकाता में ईस्टर्न न्यूज एजेंसी की स्थापना।&lt;br /&gt;
* [[1987]] - जापान द्वारा अफ़्रीकन नेशनल कांग्रेस (ए.एन.सी) को मान्यता। &lt;br /&gt;
* [[1992]] - स्वदेशी तकनीक से निर्मित पहली पनडुब्बी (आईएनएस शाल्की) को नौसेना में शामिल किया गया।&lt;br /&gt;
* [[1997]] - सं.रा. अमेरिका के स्टीफ़न स्क्यूवैल अगले तीन वर्ष हेतु अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के अध्यक्ष चुने गये। &lt;br /&gt;
* [[1999]] - जार्डन के शाह हुसैन की मृत्यु, अब्दुला नये शाह बने। &lt;br /&gt;
* [[2000]] - भारत व सं.रा. अमेरिका के बीच गठित संयुक्त आतंकवाद विरोधी दल की प्रथम बैठक वाशिंगटन में शुरू। &lt;br /&gt;
* [[2001]] - इस्रायल के प्रधानमंत्री एहुद बराक चुनाव में पराजित, एरियल शेरोन नए प्रधानमंत्री बने। &lt;br /&gt;
* [[2003]] - फ़्रांस के प्रधानमंत्री ज्यां पियरे रैफ़रिन भारत यात्रा पर नई दिल्ली पहुँचे। &lt;br /&gt;
* [[2006]] - नेपाल में स्थानीय निकायों हेतु मतदान सम्पन्न। &lt;br /&gt;
* [[2008]] - &lt;br /&gt;
**केन्द्र सरकार ने सिमी पर प्रतिबन्ध की अवधि को बढ़ाया।&lt;br /&gt;
**इक्वेडोर का तंगुराही ज्वालामुखी फटा। &lt;br /&gt;
* [[2009]] - राष्ट्रपति [[प्रतिभा पाटिल]] को [[महाराष्ट्र]] के राज्यपाल एससी जमीर ने डी॰ लिट् की उपाधि से नवाजा। &lt;br /&gt;
* [[2010]]- [[दिल्ली]] के [[प्रगति मैदान]] में आयोजित 19वाँ अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला समाप्त हो गया। नौ दिनों तक चले इस पुस्तक मेले में लगभग दो हज़ार प्रकाशकों ने भाग लिया।&lt;br /&gt;
==7 फ़रवरी को जन्मे व्यक्ति==&lt;br /&gt;
* [[1923]] - [[अखिलंदम पी. वी.]] - सुविख्यात साहित्यकार&lt;br /&gt;
* [[1938]] - [[एस. रामचंद्रन पिल्लै]] - मार्क्सवादी नेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==7 फ़रवरी को हुए निधन==&lt;br /&gt;
* [[2010]] - डा. टी आर विनोद, [[पंजाबी भाषा|पंजाबी]] के प्रसिद्ध आलोचक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==7 फ़रवरी के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव==&lt;br /&gt;
* वन अग्नि सुरक्षा दिवस (सप्ताह)।&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
{{कैलंडर बाहरी कड़ियाँ}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{कैलंडर2}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=7_%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%85%E0%A4%B2&amp;diff=276759</id>
		<title>7 अप्रॅल</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=7_%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%85%E0%A4%B2&amp;diff=276759"/>
		<updated>2012-05-29T06:46:46Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* 7 अप्रॅल को हुए निधन */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{कैलंडर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ग्रेगोरी कैलंडर]] के अनुसार 7 अप्रॅल [[वर्ष]] का 97 वाँ ([[लीप वर्ष]] में यह 98 वाँ) दिन है। साल में अभी और 268 दिन शेष हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==7 अप्रॅल की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ==&lt;br /&gt;
* [[1994]] - रवांडा के राष्ट्रपति जुवेनल हेव्यारिमाना एवं बुरुंडी के राष्ट्रपति सिप्रियन न्तायमिटा का किगाली हवाई अड्डे पर राकेट हमले में निधन। &lt;br /&gt;
* [[1998]] - [[विश्व स्वास्थ्य दिवस]] को महिला चिकित्सा दिवस के रूप में मनाने का विश्व स्वास्थ्य संगठन की घोषणा। &lt;br /&gt;
* [[2000]] - ब्राजील से विश्व के सबसे छोटे अख़बार 'योर आनर' का प्रकाशन प्रारम्भ। &lt;br /&gt;
* [[2001]] - [[चीन]] ने संयुक्त राज्य अमेरिका से खेद के बजाय माफी मांगने के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका व भारत के मध्य रक्षा सहयोग समझौता, प्रोटोकोल के विपरीत राष्ट्रपति बुश की भारतीय रक्षा मंत्री जसवंत सिंह से भेंट, मंगल ग्रह के लिए नासा का ओडिसी यान रवाना। &lt;br /&gt;
* [[2004]] - एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा जारी रिपोर्ट में मौत की सज़ा देने में चीन, ईरान व अमेरिका को सबसे आगे बताया गया है। क्वालालंमपुर में म्यांमार दूतावास के शरणार्थियों को आग के हवाले किया। &lt;br /&gt;
* [[2006]] - बगदाद में बम विस्फोट में 79 लोग मारे गये।&lt;br /&gt;
* [[2008]] - &lt;br /&gt;
**[[असम]] में प्रतिअबंधित उग्रवादी संगठन 'उल्फा' ने अपना 30वाँ स्थापना दिवस मनाया। दो दिवसीय [[भारत]]-[[अफ्रीका]] पहली शिखर बैठक नई दिल्ली में प्ररम्भ।&lt;br /&gt;
**पेरिस में रिले दौड़ के दौरान भारी हंगामे व विरोध प्रदर्शन के बीच ओलम्पिक खेलों की मशाल पांच बार बुझानी पड़ी। &lt;br /&gt;
* [[2010]] - [[पटना]] की विशेष अदालत के न्यायाधीश विजय प्रकाश मिश्र ने [[बिहार]] में तेरह साल पहले [[1 दिसंबर]] 1997 को प्रतिबंधित संगठन रणवीर सेना द्वारा [[अरवल ज़िला|अरवल ज़िले]] के [[लक्ष्मणपुर]] और बाथे गांवों में 58 दलितों के किये गये नरसंहार के मामले में 16 दोषियों को फाँसी और 10 को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई। आजीवन कारावास की सज़ा पाने वाले सभी दोषियों को 50-50 हज़ार रुपए का जुर्माना भरने का भी आदेश दिया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==7 अप्रॅल को जन्मे व्यक्ति==&lt;br /&gt;
* [[1920]] - [[रवि शंकर|पंडित रवि शंकर]] प्रसिद्ध [[सितार]] वादक।&lt;br /&gt;
* [[1942]] - [[जितेन्द्र]] भारतीय फ़िल्म [[अभिनेता]]&lt;br /&gt;
* [[1980]] - [[संजोय दत्त]] भारतीय अमरीकी [[कुश्ती]] खिलाडी़।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==7 अप्रॅल को हुए निधन==&lt;br /&gt;
* [[2011]] - [[जानकी वल्लभ शास्त्री]] - प्रसिद्ध कवि&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==7 अप्रॅल के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव==&lt;br /&gt;
* विश्व स्वास्थ्य दिवस&lt;br /&gt;
* महिला चिकित्सा दिवस&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
{{कैलंडर बाहरी कड़ियाँ}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{कैलंडर2}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
	</entry>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=5_%E0%A4%AB%E0%A4%BC%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%80&amp;diff=276758</id>
		<title>5 फ़रवरी</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=5_%E0%A4%AB%E0%A4%BC%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%80&amp;diff=276758"/>
		<updated>2012-05-29T06:42:08Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* 5 फ़रवरी को जन्मे व्यक्ति */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{कैलंडर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ग्रेगोरी कैलंडर]] के अनुसार 5 फ़रवरी [[वर्ष]] का 36 वाँ दिन है। साल में अभी और 329 दिन शेष हैं। ([[लीप वर्ष]] में 330 दिन)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==5 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ==&lt;br /&gt;
* [[2004]] - [[पाकिस्तान]] के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ़ ने परमाणु प्रौद्योगिकी के गलत इस्तेमाल के मामले में परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल कादिर ख़ान को माफी दी। &lt;br /&gt;
* [[2006]] - ईरान ने यूरेनियम संवर्धन शुरू किया। &lt;br /&gt;
* [[2007]] - भारतीय मूल की सुनीता अंतरिक्ष में सबसे अधिक समय बिताने वाली महिला बनीं। &lt;br /&gt;
* [[2008]] - &lt;br /&gt;
**[[पंजाब]] में [[पटियाला]] की विशेष अदालत ने [[कंधार]] विमान अपहरण मामले में तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई। केनरा व इलाहाबाद बैंक ने गृह ॠण पर ब्याज दरें 0.4-0.5 प्रतिशता घटायी।&lt;br /&gt;
**पाकिस्तान के विवादास्पद परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल कादिर ख़ान को सरकार ने अपने क़रीबी मित्रों से मिलने की अनुमति दी। &lt;br /&gt;
* [[2009]] - मायावती ने प्रदेश के पाँच महानगरों [[लखनऊ]], फ़ैज़ाबाद, [[अयोध्या]], [[कानपुर]], [[बिठूर]], [[इलाहाबाद]] और [[मेरठ]] के विकास के लिए 5056 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया। प्रेम जनमेजय को व्यंग्यश्री सम्मान देने की घोषणा की गयी। &lt;br /&gt;
* [[2010]] - भारतीय निशानेबाज अभिनव बिंद्रा ने नीदरलैंड इंटरनेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में 600 में से 596 अंक हासिल कर स्वर्ण पदक जीत लिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==5 फ़रवरी को जन्मे व्यक्ति==&lt;br /&gt;
* [[1916]] - [[जानकी वल्लभ शास्त्री]] - प्रसिद्ध कवि &lt;br /&gt;
* [[1976]] - [[अभिषेक बच्चन]] - फ़िल्म [[अभिनेता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==5 फ़रवरी को हुए निधन==&lt;br /&gt;
* [[1927]] - इनायत ख़ान - भारतीय सूफ़ी संत&lt;br /&gt;
* [[2008]] - महर्षि महेश योगी - भारतीय आत्मिक योगी&lt;br /&gt;
* [[2010]]- सुजीत कुमार - फ़िल्म अभिनेता और निर्माता&lt;br /&gt;
==5 फ़रवरी के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव==&lt;br /&gt;
* वन अग्नि सुरक्षा दिवस (सप्ताह)।&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
{{कैलंडर बाहरी कड़ियाँ}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{कैलंडर2}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AF%E0%A5%82._%E0%A4%86%E0%A4%B0._%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%AE%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF&amp;diff=276757</id>
		<title>यू. आर. अनंतमूर्ति</title>
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		<updated>2012-05-29T06:31:36Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा साहित्यकार&lt;br /&gt;
|चित्र=U-R-Ananthmurthy.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=यू. आर. अनंतमूर्ति&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=उडुपी राजगोपालाचार्य अनंतमूर्ति &lt;br /&gt;
|अन्य नाम=यू. आर. अनंतमूर्ति&lt;br /&gt;
|जन्म=[[21 दिसम्बर]] [[1932]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=मेलिगे, [[कर्नाटक]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु=&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पालक माता-पिता=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|कर्म भूमि=&lt;br /&gt;
|कर्म-क्षेत्र=प्राध्यापक&lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ=संस्कार, एंदेन्दु मुगियद, बावली, सन्निवेश आदि&lt;br /&gt;
|विषय=&lt;br /&gt;
|भाषा=[[कन्नड़ भाषा|कन्नड़]] &lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=[[1994]] [[ज्ञानपीठ पुरस्कार]], [[1998]] [[पद्म भूषण]] &lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=लेखक&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=कोयट्टम में 'महात्मा गांधी विश्वविद्यालय' के कुलपति, [[नेशनल बुक ट्रस्ट]] के चेयरमैन और [[साहित्य अकादमी|केंद्रीय साहित्य अकादमी]], [[नई दिल्ली]] के अध्यक्ष भी रहे हैं।&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन={{अद्यतन|12:01, 29 मई 2012 (IST)}}&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
'''यू. आर. अनंतमूर्ति''' (जन्म [[21 दिसम्बर]] [[1932]], मेलिगे, [[कर्नाटक]]) [[ज्ञानपीठ पुरस्कार]] से सम्नानित [[कन्नड़ भाषा]] के प्रसिद्ध रचनाकार हैं। आधुनिक कन्नड़ साहित्य की गौरवशाली परंपरा के निर्माण में दो परस्पर विरोधी समानांतर मत साथ सक्रिय रहे हैं- &lt;br /&gt;
#वैज्ञानिक बुद्धिवाद व रहस्यात्मक अंत: प्रज्ञावाद &lt;br /&gt;
#आक्रामक अतिवाद व मानवतावादी रूढ़िवाद। &lt;br /&gt;
इन विरोधी दृष्टिकोणों के जटिल सह-अस्तित्व का उदाहरण अनंतमूर्ति लेखक के सृजनात्मक काल में एक बड़ी परंपरा के सार-रूप में देखा जा सकता है। किसी भी परम में विश्वास न करनेवाले अनंतमूर्ति ने इस परंपरा को उसकी पूरी महिमा और तनाव के साथ ग्रहण किया है। अनंतमूर्ति की संपूर्ण सृजनात्मक यात्रा एक क्रुद्ध विद्रोही युवा से प्रारंभ होकर पारंपरिक रूढ़ियों से मुक्त मानवतावादी लेखक तक की महान रचनात्मक यात्रा है। &lt;br /&gt;
==जीवन परिचय== &lt;br /&gt;
कर्नाटक के मेलिज गांव में 1932 में जन्मे डॉ. अनन्तमूर्ति ने अपनी शिक्षा दूरवासपुरा में एक पारंपरिक 'संस्कृत विद्यालय' से शुरू की, बाद में उन्होंने [[अंग्रेजी]] और तुलनात्मक साहित्य की शिक्षा [[मैसूर]], [[भारत]] और बर्मिंघम, [[इंग्लैंड]] में पूरी की। &lt;br /&gt;
==लेखन कार्य==&lt;br /&gt;
अनंतमूर्ति के लेखन कार्य को दो पक्षों में विभाजित किया जा सकता है- &lt;br /&gt;
*'''पहला अतिवादी पक्ष''', जिसके अंतर्गत उनके दो उपन्यास- संस्कार (1965), भारतीपुर (1973); दो कहानी संग्रह- प्रश्न (1962), मौनी (1972); तथा साहित्यिक और सांस्कृतिक आलोचना की दो पुस्तकें 'प्रज्ञे मत्तु परिसर' (1974) और 'सन्निवेश' (1974) आते हैं। इस दौर का उनका लेखक सिद्धांतत: [[राममनोहर लोहिया]] की समाजवादी विचारधारा से बहुत प्रभावित रहा, जिसमें जाति और लिंग के आधार पर होने वाले विभाजन की प्रखर आलोचना मुखर है; लेकिन इसी के समानांतर उनके लेखक का सार्त्र और लॉरेंस के सौंदर्यबोध सहित अन्य [[दर्शन|दर्शनों]] के साथ भी अद्भुत और दृढ़ संबंध बना रहा। &lt;br /&gt;
*'''उनके लेखन के दूसरे पक्ष को स्व-चिंतन या आत्मान्वेषण''' कहा जा सकता है। अनुमानत: इसका प्रारंभ उनके तीसरे उपन्यास- अवस्थ (1978) से हुआ और अपने चरम पर यह सूर्यना कुदुरे (1989) नामक कहानी में पहुँचा। इस अवधि में आधुनिकता को मात्र प्रदर्शन मानने के प्रति अनंतमूर्ति की गंभीर असहमति पूरे वैचारिक साहस के साथ दिखाई पड़ती है और इसके लिए उन्होंने विशेष रूप से [[गांधी जी|गांधी]] का सहारा लिया है।&lt;br /&gt;
==यथार्थ की अभिव्यक्ति==&lt;br /&gt;
अनंतमूर्ति के लिए लेखन कर्म सदैव वास्तविक यथार्थ को अभिव्यक्त करने की प्रक्रिया रहा है। प्रश्नों के घेरे में स्वयं को तलाश करने का भी यही उनका तरीका है। उनके पास जीवन के दुखद एवं त्रासद अनुभवों के माध्यम से रूपक रचने का जादुई कौशल है। सांस्कृतिक विवेचना के दौरान जीवन और दर्शन संबंधी मुद्दों पर उन्होंने अपने विचार बड़ी निर्भीकता और साहस के साथ प्रस्तुत किए हैं। अपनी सैद्धांतिक हिचकिचाहट के बावजूद उनका सांस्कृतिक आलोचनात्मक लेखन, सुस्पष्टता, सुंदरता और अभिव्यक्ति की गहनता का उत्कृष्ट उदाहरण है। लेकिन जब वह समस्याओं पर अपने सृजनात्मक कथा साहित्य के माध्यम से विचार करते हैं, तब उनके भीतर के सामाजिक दर्शनशास्त्री का कठोर आग्रह समाप्त हो जाता है और उसकी जगह ज्ञानमीमांसक जटिल और एक बहुआयामी छवि आकार ले लेती है। यही प्रक्रिया उनकी रचनाओं में परिलक्षित होती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उनका उपन्यास संस्कार भी इसी तरह के अनेकार्थक जटिल रूपकों से परिपूर्ण है, हालांकि इस उपन्यास की संरचना जिस दार्शनिक दृष्टि से की गई है, वह ब्राह्मणवादी मूल्यों और सामाजिक व्यवस्था की भर्त्सना करती है। &lt;br /&gt;
;आधुनिक लेखक&lt;br /&gt;
अनंतमूर्ति सही अर्थों में एक आधुनिक लेखक हैं, जो विभिन्न विधागत रूढ़ियों को समाप्त करना चाहते हैं। यही कारण है कि उनके कथा साहित्य का 'गद्य' उनके 'पद्य' के साथ घुलमिल जाना चाहता है।&lt;br /&gt;
==इग्नू==&lt;br /&gt;
प्रसिद्ध कन्नड़ लेखक और आलोचक डॉ. यू.आर. अनंतमूर्ति को [[इग्नू]] के 'भारतीय साहित्य टैगोर पीठ' का मानद अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। टैगोर पीठ मानविकी विद्यापीठ में अवस्थित है, जो कि भारतीय साहित्य पर संगोष्ठी, सेमिनार और शोध अध्ययन आयोजित करने के लिए स्थापित किया गया है। पीठ की गतिविधियों में [[भाषा]], [[साहित्य]] और [[संस्कृति]] अध्ययन पर एक द्विभाषी पत्रिका का संपादन भी शामिल है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपने सामाजिक प्रतिबद्धताओं और कन्नड़ साहित्य में नव आंदोलन के प्रतिनिधि के तौर पर देशभर में प्रतिष्ठित डॉ. अनन्तमूर्ति ने इस अवसर पर कहा कि 'मैं बेहद सम्मानित महसूस कर रहा हूं और खुश हूं। टैगोर पीठ मुझे भारतीय भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में कई सार्थक काम करने का अवसर देगा। इस नई जिम्मेदारी के माध्यम से मैं भारतीय भाषाओं, खासकर क्षेत्रीय भाषाओं को मजबूत बनाने के [[रवीन्द्रनाथ टैगोर]] के विचारों पर काम करना चाहता हूं।' &lt;br /&gt;
==कार्य ==&lt;br /&gt;
अनंतमूर्ति कई वर्षों तक [[मैसूर विश्वविद्यालय]] में [[अंग्रेजी]] के प्रोफेसर रहे। बाद में कोयट्टम में 'महात्मा गांधी विश्वविद्यालय' के कुलपति, [[नेशनल बुक ट्रस्ट]] के चेयरमैन और [[साहित्य अकादमी|केंद्रीय साहित्य अकादमी]], [[नई दिल्ली]] के अध्यक्ष रहे। इस समय वे दूसरी बार 'फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, [[पुणे]] के चेयरमैन हैं। डॉ. अनंतमूर्ति ने अपना साहित्यिक जीवन कथा संग्रह 'इंडेनढ़िगु मुघियाडा कथे' से शुरू किया। तब से उनके पांच उपन्यास, एक नाटक, छह कथा संग्रह, चार कविता संग्रह&amp;lt;ref&amp;gt; ताओ, यीट्स, रिल्के और ब्रेख़्त के अनुवाद शामिल&amp;lt;/ref&amp;gt;और दस निबंध संग्रह कन्नड़ में प्रकाशित हो चुके हैं और अंग्रेजी साहित्य में भी उन्होंने कुछ काम किया है। उनका साहित्य कई भारतीय और यूरोपीय भाषाओं में अनूदित हो चुका है &lt;br /&gt;
==प्रमुख रचनाएं==&lt;br /&gt;
*उपन्यास- संस्कार&amp;lt;ref&amp;gt; [[1965]]&amp;lt;/ref&amp;gt;, अवस्थ &amp;lt;ref&amp;gt;[[1978]]&amp;lt;/ref&amp;gt; और भव&amp;lt;ref&amp;gt; [[1994]]&amp;lt;/ref&amp;gt;; &lt;br /&gt;
*कहानी- एंदेन्दु मुगियद कथे&amp;lt;ref&amp;gt; [[1955]]&amp;lt;/ref&amp;gt; और मौनी &amp;lt;ref&amp;gt;[[1967]]&amp;lt;/ref&amp;gt;; &lt;br /&gt;
*कविता- बावली&amp;lt;ref&amp;gt;[[1963]]&amp;lt;/ref&amp;gt;, मिथुन&amp;lt;ref&amp;gt; [[1967]]&amp;lt;/ref&amp;gt;; &lt;br /&gt;
*नाटक- सन्निवेश&amp;lt;ref&amp;gt; [[1974]]&amp;lt;/ref&amp;gt;, प्रज्ञे मत्तु परिसर&amp;lt;ref&amp;gt; [[1974]]&amp;lt;/ref&amp;gt;, पूर्वापर &amp;lt;ref&amp;gt;[[1990]]&amp;lt;/ref&amp;gt;, आवाहने &amp;lt;ref&amp;gt;[[1971]]&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पुरस्कार==&lt;br /&gt;
अनंतमूर्ति को कई साहित्यिक सम्मानों से नवाजा जा चुका है।  [[1994]] में उन्हें [[ज्ञानपीठ सम्मान]] से सम्मानित किया गया। भारत सरकार ने उन्हें [[1998]] में [[पद्म भूषण]] सम्मान से भी सम्मानित किया गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=आधार1|प्रारम्भिक= |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{साहित्यकार}}&lt;br /&gt;
[[Category:कवि]]&lt;br /&gt;
[[Category:लेखक]][[Category:आधुनिक लेखक]]&lt;br /&gt;
[[Category:साहित्यकार]]&lt;br /&gt;
[[Category:उपन्यासकार]]&lt;br /&gt;
[[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:आधुनिक साहित्यकार]][[Category:आधुनिक कवि]]&lt;br /&gt;
[[Category:पद्म भूषण]]&lt;br /&gt;
[[Category:कन्नड़ साहित्यकार]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0:U-R-Ananthmurthy.jpg&amp;diff=276756</id>
		<title>चित्र:U-R-Ananthmurthy.jpg</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{चित्र सूचना&lt;br /&gt;
|विवरण=[[यू. आर. अनंतमूर्ति]]&lt;br /&gt;
|चित्रांकन=&lt;br /&gt;
|दिनांक=&lt;br /&gt;
|स्रोत=&lt;br /&gt;
|प्रयोग अनुमति=&lt;br /&gt;
|चित्रकार=&lt;br /&gt;
|उपलब्ध=&lt;br /&gt;
|प्राप्ति स्थान=&lt;br /&gt;
|समय-काल=&lt;br /&gt;
|संग्रहालय क्रम संख्या=&lt;br /&gt;
|आभार=&lt;br /&gt;
|आकार=&lt;br /&gt;
|अन्य विवरण=[[कर्नाटक]] के मेलिज गांव में 1932 में जन्मे डॉ. अनन्तमूर्ति ने अपनी शिक्षा दूरवासपुरा में एक पारंपरिक 'संस्कृत विद्यालय' से शुरू की, बाद में उन्होंने [[अंग्रेजी]] और तुलनात्मक साहित्य की शिक्षा [[मैसूर]], [[भारत]] और बर्मिंघम, [[इंग्लैंड]] में पूरी की। &lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
{{Nil}}&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
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		<title>चित्र:U-R-Ananthmurthy.jpg</title>
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		<title>21 दिसंबर</title>
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		<updated>2012-05-29T05:35:04Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* 21 दिसंबर को जन्मे व्यक्ति */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{कैलंडर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ग्रेगोरी कैलंडर]] के अनुसार 21 दिसंबर [[वर्ष]] का 355 वाँ ([[लीप वर्ष]] में यह 356 वाँ) दिन है। साल में अभी और 10 दिन शेष हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==21 दिसंबर की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ==&lt;br /&gt;
* [[1991]] - कजाकिस्तान की राजधानी अल्मा अता में 11 सोवियत गणराज्यों द्वारा राष्ट्रमंडल का गठन। &lt;br /&gt;
* [[1998]] - नेपाली प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला का इस्तीफ़ा। &lt;br /&gt;
* [[2002]] - [[ब्रिटेन]] ने धमकी के बाद बोगोटा का दूतावास बंद किया। &lt;br /&gt;
* [[2007]] - चीन के दक्षिणी यूनैन प्रान्त के कुनमिंग मिलिट्री एकेडमी में भारत व चीन के बीच पहला साझा अभ्यास शुरू। &lt;br /&gt;
* [[2008]]- कांग्रेस अध्यक्ष [[सोनिया गांधी]] व बॉलीवुड स्टार [[शाहरुख ख़ान]] को अमेरिका पत्रिका न्यूज बीक ने दुनिया के 50 शक्तिशाली लोगों की सूची में शामिल किया। &lt;br /&gt;
==21 दिसंबर को जन्मे व्यक्ति==&lt;br /&gt;
* [[1932]] - [[यू. आर. अनंतमूर्ति]], [[कन्नड़ भाषा]] के प्रसिद्ध रचनाकार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==21 दिसंबर को हुए निधन==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==21 दिसंबर के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
{{कैलंडर बाहरी कड़ियाँ}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{कैलंडर2}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
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		<title>13 जुलाई</title>
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		<updated>2012-05-29T05:30:26Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* 13 जुलाई को हुए निधन */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{कैलंडर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ग्रेगोरी कैलंडर]] के अनुसार 13 जुलाई [[वर्ष]] का 194 वाँ ([[लीप वर्ष]] में यह 195 वाँ) दिन है। साल में अभी और 171 दिन शेष हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==13 जुलाई की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ==&lt;br /&gt;
* 1803- [[राजा राम मोहन राय]] और अलैकजेंडर डफ ने पांच छात्रों के साथ स्कॉटिश चर्च कॉलेज शुरू किया था।&lt;br /&gt;
* [[1905]]- [[कलकत्ता]] के साप्ताहिक समाचार पत्र 'संजीवनी' ने ब्रिटिश सामानों के बहिष्कार का सर्वप्रथम सुझाव दिया था।&lt;br /&gt;
* [[1929]]- क्रांतिकारी जतिंद्रनाथ ने अपनी ऐतिहासिक भूख हड़ताल शुरू की। &lt;br /&gt;
* [[1977]]- [[भारत]] सरकार ने [[भारत रत्न]] सहित अन्य नागरिक सम्मानों को वापस लेने की घोषणा की थी।&lt;br /&gt;
* [[1998]] - भारत के लिएंडर पेस ने हॉल आफ़ फ़ेम टेनिस चैंपियनशिप में अपने जीवन का प्रथम ए.टी.पी. ख़िताब जीता, ब्राजील ने सी.टी.बी.टी. एवं एन.पी.टी. पर हस्ताक्षर किया। &lt;br /&gt;
* [[2000]] - फिजी में महेन्द्र चौधरी समेत 18 बंधक रिहा। &lt;br /&gt;
* [[2001]] - वर्ष 2008 के ओलम्पिक खेलों की मेजबानी चीन (बीजिंग) को सौंपी गयी। &lt;br /&gt;
* [[2004]] - रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने साइबेरिया और देश के सुदूर पूर्ववर्ती इलाकों के विकास के लिए भारत से और मजबूत संबंधों की इच्छा जताई। &lt;br /&gt;
* [[2006]] - परमाणु बम निर्माण सम्बन्धी ईरान मसला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को सुपुर्द। &lt;br /&gt;
* [[2008]] - अमेरिका में ग्रीन पार्टी ने राष्ट्रपति चुनाव में पूर्व डेमोक्रेट सिंथिया मैक्किनी को अपना उम्मीदवार बनाया। &lt;br /&gt;
==13 जुलाई को जन्मे व्यक्ति==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==13 जुलाई को हुए निधन==&lt;br /&gt;
* [[1995]] - [[आशापूर्णा देवी]], [[उपन्यासकार]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==13 जुलाई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
{{कैलंडर बाहरी कड़ियाँ}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{कैलंडर2}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=8_%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%80&amp;diff=276752</id>
		<title>8 जनवरी</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=8_%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%80&amp;diff=276752"/>
		<updated>2012-05-29T05:29:15Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{कैलंडर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ग्रेगोरी कैलंडर]] के अनुसार 8 जनवरी [[वर्ष]] का 8 वाँ दिन है। साल में अभी और 357 दिन शेष हैं। ([[लीप वर्ष]] में 358 दिन)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==8 जनवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ==&lt;br /&gt;
* [[1996]] - [[फ़्रांस]] के पूर्व [[राष्ट्रपति]] फ़्रांस्वा मितरां का 79 वर्ष की आयु में पेरिस में देहान्त। &lt;br /&gt;
* [[2001]] - आइवरी कोस्ट में विद्रोह विफल, भारतीय प्रधानमंत्री [[अटल बिहारी वाजपेयी]] वियतनाम व इंडोनेशिया की सात दिवसीय यात्रा पर वियतनाम पहुँचे, भारत-वियतनाम ने कई समझौतों पर हस्ताक्षर किये, घाना में जैसी रालिंग्स का दो दशक पुराना शासन समाप्त, जॉन कुफारे राष्ट्रपति बने।&lt;br /&gt;
* [[2003]] - श्रीलंका सरकार और लिट्टे के बीच नकोर्न पथोम (थाइलैंड) में वार्ता शुरू। &lt;br /&gt;
* [[2008]] - &lt;br /&gt;
**केन्द्र सरकार ने अरुण रामनाथन को वित्तीय क्षेत्र का सचिव नियुक्त किया। [[प्रधानमंत्री]] [[मनमोहन सिंह]] ने 6ठे प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का उद्घाटन किया।&lt;br /&gt;
**उपन्यासकार व पत्रकार मैक्डोनाल्ड फ़्रेजर का निधन। &lt;br /&gt;
* [[2009]] -  पूर्व [[उपराष्ट्रपति]] भैरोसिंह शेखावत ने [[लोकसभा]] चुनाव लड़ने की घोषणा की।&lt;br /&gt;
==8 जनवरी को जन्मे व्यक्ति==&lt;br /&gt;
* [[1909]] - [[आशापूर्णा देवी]], [[उपन्यासकार]]&lt;br /&gt;
* [[1925]] - [[मोहन राकेश]], [[साहित्यकार]]&lt;br /&gt;
* [[1926]] - [[केलुचरण महापात्र]], भारतीय ओडिसी नृत्यांगना&lt;br /&gt;
* [[1929]] - [[सईद जाफ़री]], भारतीय [[अभिनेता]]&lt;br /&gt;
* [[1975]] - [[हैरिस जयराज]], भारतीय संगीतकार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==8 जनवरी को हुए निधन==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==8 जनवरी के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव==&lt;br /&gt;
* राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह।&lt;br /&gt;
* अफ़्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस स्थापना दिवस।&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
{{कैलंडर बाहरी कड़ियाँ}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{कैलंडर2}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
	</entry>
	<entry>
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		<title>वार्ता:घाट</title>
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		<updated>2012-05-29T05:27:10Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: '{{वार्ता}}' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{वार्ता}}&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
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		<title>घाट</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%98%E0%A4%BE%E0%A4%9F&amp;diff=276750"/>
		<updated>2012-05-29T05:26:25Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: '{{पुनरीक्षण}}  {{tocright}} '''घाट''' का अर्थ नदी किनारे बनी सीढ़ि...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{पुनरीक्षण}} &lt;br /&gt;
{{tocright}}&lt;br /&gt;
'''घाट''' का अर्थ नदी किनारे बनी सीढ़ियाँ या पर्वतीय दर्रा होता है। [[भारत]] में [[प्रायद्वीप]] के दक्कन के पठार के दोनों किनारों पर बने [[पर्वत|पर्वतों]] को भी पूर्वी घाट और पश्चिमी घाट कहते हैं। इसके बहुवचन रूप को [[अंग्रेज़ी भाषा]] में पूरे पर्वत को समाहित करने के लिए अपना लिया गया है। इस शब्द से नदी किनारे धार्मिक उद्देश्य से स्नान के लिए निर्मित सीढ़ीदार संरचना और नौका के आवागमन स्थल का भी संदर्भ मिलता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये दो पर्वत श्रृंखलाएँ क्रमश: [[बंगाल की खाड़ी]] और [[अरब सागर]] के समुद्री तट के लगभग समानांतर हैं, जिनसे ये एक समतल तटीय भूमि द्वारा अलग हैं। पूर्वी घाट में कई असमरूपीय व असंबद्ध पर्वतखंड शामिल हैं, जिनकी औसत ऊँचाई लगभग 600 मीटर है और शिखरों की ऊँचाई 1,200 मीटर या इससे अधिक है। इस श्रृंखला में 160 किमी चौड़ा एक दर्रा भी है, जिससे होकर [[कृष्णा नदी|कृष्णा]] और [[गोदावरी नदी|गोदावरी]] नदियाँ तट तक पहुंचती हैं। पर्वतीय ढलानों विरल वन हैं, जिनसे बहुमूल्य लकड़ी प्राप्त होती है। &lt;br /&gt;
==पूर्वी घाट==&lt;br /&gt;
पूर्वोत्तर से दक्षिण-पश्चिम की ओर पूर्वी घाट में कई असतत निचली श्रृंखलाएँ सामान्यत: बंगाल की खाड़ी के समानांतर हैं, [[महानदी]] और गोदावरी नदियों के बीच के दंडकारण्य क्षेत्र में एक विशाल पर्वत इकाई है, जो क्षरित होकर पुन: कायाकल्प हुए एक प्राचीन पर्वत श्रृंखला का [[अवशेष]] है। इस संकरी पर्वत श्रृंखला में एक केंद्रीय [[कटक]] है, जिसका उच्चतम शिखर, अर्माकोंडा (1,680 मीटर), [[आंध्र प्रदेश]] में है। आगे दक्षिण-पश्चिम की ओर पहाड़ियाँ ओझल होती जाती हैं, जहाँ गोदावरी नदी 64 किमी लंबे एक महाखड्ड से होकर इन पहाड़ियों के चारों ओर घूमती है। दक्षिण-पश्चिम दिशा में और आगे कृष्णा नदी के पार पूर्वी घाट [[एरामला पर्वतमाला|एरामला]], नल्लामला, वेलिकोंडा और [[पालकोंडा पहाड़ी|पालकोंडा]] सहित छोटी पहाड़ियों की एक श्रृंखला प्रतीत होता है। [[चेन्नई]] ([[मद्रास]]) के दक्षिण-पश्चिम में पूर्वी घाट से मिल जाता है। &lt;br /&gt;
==पश्चिमी घाट==&lt;br /&gt;
पश्चिम घाट, जो संभवत: भ्रश कगार हैं, दक्कन पठार के पश्चिमी सिरे के शिखर हैं। उनकी समुद्रवती तीखी ढलान जलधाराओं व खड्ड जैसी घाटियों द्वारा गहराई से विभक्त हैं, लेकिन भूमि की ओर की ढलान कम ढालू हैं और चौड़ी परिपक्व घाटियों के लिए मार्ग बनाती हैं। यह श्रृंखला उत्तर की ओर [[ताप्ती नदी]] तक हुई है और दक्षिण की ओर बिंदु कुमारी अंतरीप तक फैली हुई है। पहाड़ियों की ऊँचाई उत्तर में 914 मीटर से 1,524 मीटर तक और [[गोवा]] के दक्षिणी क्षेत्र में 914 मीटर से कम है तथा सुदूर दक्षिण में ये फिर से ऊँची होती चली जाती हैं व [[डोड्डाबेट्टा चोटी]] पर ऊँचाई 2,637 मीटर है। पालघाट (पालक्काड) दर्रा मुख्य पश्चिमी घाट को उसके दक्षिणवर्ती विस्तार से अलग करता है, जो दक्षिणी घाट के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि पश्चिमी घाट में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून से काफ़ी बारिश होती है। यह एक मुख्य जलविभाजक का निर्माण करता है; [[पठार]] के अंदरूनी भूतल पर अपेक्षाकृत हल्की बारिश होती है। अधिक [[वर्षा]] के कारण समुद्रवर्ती ढलानों पर सघन वन हैं, जिनमें [[बाँस]], सागौन और अन्य कई बहुमुल्य वृक्ष शामिल हैं। पश्चिमी घाट की कुछ नदियों पर विद्युत उत्पादन के लिए बाँध बनाए गए हैं। पहाड़ों पर कई पर्वतीय आरामगाह स्थित हैं।   &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना मई-2012]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
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		<title>हार्मोन</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%A8&amp;diff=276749"/>
		<updated>2012-05-29T05:04:56Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* संबंधित लेख */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{पुनरीक्षण}}&lt;br /&gt;
{{tocright}}&lt;br /&gt;
'''हार्मोन''' [[मानव शरीर]] की अंत:स्रावी ग्रंथियाँ विभिन्न प्रकार के उद्दीपन में ऐसे [[पदार्थ|पदार्थों]] का स्राव करती हैं जिनसे शरीर में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं। ये स्राव [[रुधिर वाहिनियाँ|रुधिर वाहिनियों]] द्वारा अंतकोंशिका [[ऊतक]] [[द्रव]] से बहकर लक्ष्य अंगों तक पहुँचते है। अत: इन ग्रंथियों को वाहिनी ग्रंथि कहते हैं। सर्वप्रथम 1905 ई. में स्टलिंग ने सेक्रेटिंग स्राव के संबंध में हार्मोन शब्द का प्रयोग किया था। हार्मोन शब्द का अर्थ होता है उद्दीपन करने वाला अथवा गति का प्रारंभ करने वाला। शरीर में अम्लकृत भोजन जब [[आमाशय]] से आगे पहुँचता है तब ड्युओडिनल श्लेष्मकला की [[कोशिका|कोशिकाओं]] से सेक्रेटिन का स्राव होता है। [[रुधिर]] परिवहन द्वारा यह पदार्थ [[अग्न्याशय]] में पहुंचकर अग्न्याशयी वाहिनी से मुक्त होने वाले अग्न्याशयी रस के स्राव का उद्दीपन करता है। इससे यह निश्चित हो गया कि [[तन्त्रिका तन्त्र]] के सहयोग बिना भी शरीर में रासायनिक साम्यावस्था संभव है। हार्मोन के प्रभाव से शरीर में उद्दीपन एवं अवरोध दोनों ही होते हैं। हार्मोन के प्रभाव से शरीर में आधारभूत उपापचयी रूपांतरण का प्रारंभ नहीं किया जा सकता पर उपापचयी रूपांतरण की गति में परिवर्तन लाया जा सकता है। आधुनिक परिभाषा के अनुसार वाहिनी अथवा अंत:स्रावी ग्रंथियों द्वारा उन्मुक्त स्राव को हार्मोन कहते हैं। ये स्राव शरीर में विभिन्न क्रियाओं के बीच रासायनिक साम्यवास्था स्थापित करते हैं, अत: सीमित अर्थ में रासायनिक संतुलन के स्थान में योगदान करते हैं। वनस्पतिजगत्‌ में ऐसे अनेक रासायनिक संतुलनकारी पदार्थ पाए जाते हैं। उन्हें हार्मोन माना जाए या नहीं यह विवादस्पद है। इससे हार्मोन की परिभाषा बहुत व्यापक हो जाती है।  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्राणियों के शरीर का आंतरिक वातावरण स्वायत्त [[तन्त्रिका तन्त्र]] तथा [[अन्तःस्रावी तन्त्र]] द्वारा साम्यावस्था में बना रहता है। अंतःस्त्रावी तंत्र जटिल संरचनाओं वाले रासायनिक यौगिकों द्वारा रासायनिक समंवयन स्थापित रखता है। इन रासायनिक यौगिकों को हार्मोन कहते हैं। यह तंत्र मन्द गति से कार्य करता है। भोजन के [[पाचन]], [[पोषण]], उपापचय, [[श्वसन]], उत्सर्जन, वृद्धि एवं प्रजनन आदि जैविक क्रियाओं का नियंत्रण इसी के द्वारा किया जाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==अंतः स्त्रावी तंत्र की कार्यप्रणाली==&lt;br /&gt;
अंतःस्त्रावी तंत्र की सम्पूर्ण क्रियाविधि के निम्नलिखित तीन प्रमुख चरण होते हैं-&lt;br /&gt;
#शरीर की अंतःस्त्रावी ग्रंथियों की की कोशिकाएँ हार्मोन नामक [[पदार्थ|पदार्थों]] का संश्लेषण करके इन्हें ऊतक द्रव्य में स्त्रावित करती रहती हैं। ये हार्मोन संकेत सूचनाओं का वहन करते हैं। ऊतक द्रव्य से ये हार्मोंस [[रुधिर]] में चले जाते हैं। &lt;br /&gt;
#ये हार्मोन रुधिर के माध्यम से सम्पूर्ण शरीर में संचारित होते रहते हैं। &lt;br /&gt;
#कुछ हार्मोन को शरीर की समस्त [[कोशिका|कोशिकाएँ]] रुधिर से ग्रहण कर सकती हैं। शेष हार्मोन में से प्रत्येक को कुछ निर्दिष्ट ऊतकों की कोशिकाएँ ही रुधिर से ग्रहण कर सकती हैं। इन निर्दिष्ट कोशिकाओं की लक्ष्य कोशिकाएँ कहते हैं। इन कोशिकाओं ग्रहण किए गए हार्मोन इनकी कोशिकाकला या प्लाजा झिल्ली की पारगम्यता एवं उपापचयी एंजाइम्स का नियंत्रण करके इनकी उपापचयी प्रक्रियाओं की दरों को परिवर्तित कर देते हैं। इसके फलस्वरुप, शरीर में होने वाली अनेक सतत् क्रियाओं जैसे-उपापचयी, वृद्धि, ह्रदय स्पंदन, [[रक्तचाप]], [[आहारनाल]] की क्रमाकुंचन गति, स्त्रावण, लैंगिक परिपक्वन, प्रजनन, पुनरुद्भवन, प्रतिरक्षण, आचार-व्यवहार आदि तथा विभिन्न प्रतिक्रियाओं का नियमन होता है। इस प्रकार, हार्मोन आजीवन 'जीवन की गति' को बनाए रखने का महत्त्वपूर्ण कार्य करते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ग्रंथियाँ और उनके प्रकार==&lt;br /&gt;
ग्रंथियाँ ऐसे [[ऊतक]], [[अंग]] या कोशिका होती हैं जिनसे निकलने वाला स्त्राव शरीर में विभिन्न कार्यों के लिए प्रयोग किया जाता है। ग्रंथियाँ प्रायः एपिथीलियम ऊतक के वलन से बनी होती हैं। ये शरीर के अन्दर अंगो में या शरीर में मिलने वाली ग्रंथियाँ प्रायः तीन प्रकार की होती हैं-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====बहिः स्त्रावी ग्रंथियाँ====&lt;br /&gt;
इन ग्रंथियों में सँकरी नलिकाएँ एवं वाहिकाएँ होती हैं, जिनके द्वारा इनमें बनने वाले स्त्रावित पदार्थ शरीर के किसी निश्चित अंग या शरीर की सतह पर पहुँचाए जाते हैं। ऐसी ग्रंथियों को बहिःस्त्रावी ग्रंथियाँ या नलिकायुक्त या प्रणाल ग्रंथियाँ।&lt;br /&gt;
;उदाहरण&lt;br /&gt;
[[यकृत]], स्तानियों की स्वेद ग्रंथियाँ, तैल ग्रंथियाँ, लार ग्रंथियाँ, अश्रु ग्रंथियाँ, दुग्ध ग्रंथियाँ आदि। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====अंतः स्त्रावी ग्रंथियाँ====&lt;br /&gt;
इन ग्रंथियों में स्त्रावित पदार्थ के परिवहन के लिए नलिकाओं या वाहिकाओं का अभाव होता है। अतः इनके द्वारा स्त्रावित पदार्थ, ऊतक द्रव्य के माध्यम से, सीधे रुधिर में मुक्त होकर शरीर के विभिन्न अंगों में पहुँच जाता है। नलिका न होने के कारण इन ग्रंथियों को नलिकाविहीन या अप्रणाल ग्रंथियाँ भी कहते हैं। इन ग्रंथियों के स्त्रावों को हार्मोन कहते हैं। ऐसी ग्रंथियाँ में रुधिर वाहिनियाँ अपेक्षाकृत अधिक होती हैं। &lt;br /&gt;
;उदाहरण&lt;br /&gt;
पीयूष ग्रंथि, थाइरॉइड ग्रंथि, अधिवृक्क ग्रंथि आदि। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====मिश्रित ग्रंथियाँ====&lt;br /&gt;
ये मुख्यतः वाहिकायुक्त होती हैं किन्तु इनके अन्दर कुछ विशेष कोशिकाएँ समूह में पाई जाती हैं जो अंतः स्त्रावी ग्रंथियों का कार्य करती हैं। इनसे स्त्रावित हार्मोन सीधे ही रुधिर में युक्त हो जाते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
;उदाहरण&lt;br /&gt;
[[अग्न्याशय]]- इनका बहिःस्त्रावी भाग अग्न्याशयिक रस उत्पन्न करता है और अंतः स्त्रावी भाग-लैंगरहैंस की द्वीपिकाएँ [[इंसुलिन]] तथा ग्लूकागोन नामक हार्मोन का स्त्रावित करती हैं जो सीधे रुधिर में मुक्त हो जाते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==हार्मोन की विशेषताएँ==&lt;br /&gt;
*अधिकांश हार्मोन के [[अणु]] छोटे होते हैं और इनका [[अणुभार]] भी कम होता है। &lt;br /&gt;
*ये [[जल]] में घुलनशील (विलेय) होते हैं। ये ऊतकों में सरलतापूर्वक विसरणशील होते हैं। &lt;br /&gt;
*बहुत ही सक्रिय पदार्थ होने के कारण इनका स्त्रावण बहुत ही सूक्ष्म मात्रा में होता है। &lt;br /&gt;
*कम अणुभार के कारण ये कोशिका की प्लाज्मा झिल्ली से होकर गुजर सकते हैं। &lt;br /&gt;
*ये कोशिकाओं की प्लाज्मा झिल्ली की पारगम्यता बढ़ा देते हैं। &lt;br /&gt;
*ये रासायनिक उत्प्रेरक की भाँति कार्य करते हैं। अतः ये शरीर की क्रियाओं को प्रेरित करके उनकी [[गति]] को बढ़ा देते हैं या फिर घटा देते हैं। &lt;br /&gt;
*क्रियाओं के समय ये विघटित अथवा नष्ट हो जाते हैं। इसलिए इनका अंतःस्त्रावी ग्रन्थियों से निरंतर स्त्रावण होता है। &lt;br /&gt;
*हार्मोन [[मानव शरीर|शरीर]] में संचय नहीं होता है। ये बनते रहते हैं और प्रयुक्त होते रहते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==हार्मोन के कार्य==&lt;br /&gt;
*हार्मोन शरीर की [[कोशिका|कोशिकाओं]] के उपापचय का नियंत्रण करके शरीर की कार्यक्षमता को बनाए रखता है।&lt;br /&gt;
*ये शरीर की वृद्धि एवं विकास, सुरक्षा एवं आचरण, लैंगिक लक्षणों एवं प्रजनन आदि का नियंत्रण करते हैं। &lt;br /&gt;
*हार्मोन बाहरी वातावरण की बदलती हुई परिस्थियों में शरीर के अंतः वातावरण को अखण्ड बनाए रखने&amp;lt;ref&amp;gt;होमिओस्टैसिस&amp;lt;/ref&amp;gt; का महत्त्वपूर्ण कार्य करते हैं। चूँकि शरीर की कोशिकाएँ अपना-अपना सामान्य कार्य तभी कर सकती हैं जब शरीर का अंतः वातावरण अखण्ड बना रहे, और शरीर का 'एक जीव' के रूप में अस्तित्व तभी बना रह सकता है जब विभिन्न भागों की कोशिकाओं की क्रियाओं में सामंजस्य बना रहे। &lt;br /&gt;
*हार्मोन की गड़बड़ियों (असंतुलन) से शरीर में कार्यात्मक रोग हो जाते हैं। ये गड़बड़ियाँ दो प्रकार की हो सकती हैं- हार्मोन का आवश्यक मात्रा से कम स्त्रावण अथवा अधिक स्त्रावण। &lt;br /&gt;
==हार्मोन की क्रियाविधि==&lt;br /&gt;
हार्मोन निम्न प्रकार से जैविक क्रियाओं को प्रभावित करते हैं-&lt;br /&gt;
* कुछ [[प्रोटीन]] हार्मोन प्लाज्मा कला की पारगम्यता को परिवर्तित कर देते हैं। जिससे कोशिका की क्रियाओं के लिए आवश्यक पदार्थ कोशिका के भीतर प्रवेश करने लगते हैं या उनका प्रवेश रुक जाता है; जैसे- वृद्धि हॉर्मोंन, [[इंसुलिन]] आदि। &lt;br /&gt;
* कुछ प्रोटीन हार्मोन कोशिका कला में उपस्थित एंजाइम एडीनाइलेटसाइक्लेज को सक्रिय कर देते हैं। यह एंजाइम कोशिकाद्रव्य में उपस्थित A. T. P. को चक्रिक एडिनोसीन मोनोफॉस्फेट में बदल देता है। उदाहरण थायरॉक्सिन, एड्रीनैलिन आदि। &lt;br /&gt;
* स्टीरॉएड हार्मोन सीधे कोशिका में पहुँचकर जीन की क्रिया को प्रभावित करते हैं। ये आवश्यकतानुसार सक्रिय जीन को निष्क्रिय या सुप्त जीन को सक्रिय कर देते हैं। इससे प्रोटीन संश्लेषण प्रभावित होता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
;मनुष्य के शरीर में पाई जाने वाली अंतःस्त्रावी ग्रंथियाँ&lt;br /&gt;
मनुष्य के शरीर के हार्मोन का स्त्रावण करने वाली रचनाओं को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है- &lt;br /&gt;
====अंतःस्त्रावी ग्रंथियाँ और उनकी स्थिति====&lt;br /&gt;
#थाइरॉइड : गले में &lt;br /&gt;
#पैराथाइरॉइड : गले में &lt;br /&gt;
#थाइमस : [[वक्ष]] में &lt;br /&gt;
#पीयूष ग्रंथि : [[मस्तिष्क]] में &lt;br /&gt;
#पीनियल काय : मस्तिष्क में &lt;br /&gt;
#अधिवृक्क : उदय में। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====मिश्रित ग्रंथियाँ====&lt;br /&gt;
#[[अग्न्याशय]] : उदय में &lt;br /&gt;
#आमाशय तथा आंत्रीय श्लेष्मिका : उदय में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====अन्य अंग====&lt;br /&gt;
#हाइपोथैलेमस : मस्तिष्क में &lt;br /&gt;
#जनद : पुरुष में वृषण तथा स्त्रियों में अण्डाशय &lt;br /&gt;
#[[वृक्क]] : उदय में &lt;br /&gt;
#अपरा या ऑवल : गर्भशय तथा भ्रूण के बीच &lt;br /&gt;
#[[त्वचा]] : शरीर का आवरण। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार= |प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
[[Category:हार्मोन]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीव विज्ञान]][[Category:प्राणि विज्ञान ]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्राणि विज्ञान कोश]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%81&amp;diff=276748</id>
		<title>गुरु</title>
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		<updated>2012-05-29T05:04:50Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{पुनरीक्षण}}&lt;br /&gt;
{{tocright}}&lt;br /&gt;
'''गुरु''' [[हिंदू धर्म]] में एक व्यक्तिगत आध्यात्मिक शिक्षक या निर्देशक होते हैं, जिन्होंने आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि प्राप्त कर ली हो। कम से कम उपनिषदों के समय से [[भारत]] में धार्मिक शिक्षा में [[गुरुकुल]] पद्धति पर ज़ोर दिया जाता रहा है। पारंपरिक रूप से पुरुष शिष्य गुरुओं के आश्रम में रहते थे और भक्ति तथा आज्ञाकारिता से उनकी सेवा करते थे। [[भक्ति आंदोलन]] के उत्थान के साथ, जो ईष्ट देवता के प्रति भक्ति पर ज़ोर देता है, गुरु और भी अधिक महत्तवपूर्ण चरित्र बन गए। किसी संप्रदाय के प्रमुख या संस्थापक के रूप में गुरु श्रद्धा के पात्र थे और उन्हें आध्यात्मिक सत्य का मूर्तिमान जीवित रूप माना जाता था। इस प्रकार उन्हें [[देवता]] के जैसा सम्मान प्राप्त था। गुरु के प्रति सेवा भाव और आज्ञाकारिता की परंपरा अब भी विद्यमान है। &lt;br /&gt;
==गुरु की परिभाषा==&lt;br /&gt;
गुरु उसको कहते हैं जो वेद-शास्त्रों का गृणन (उपदेश) करता है अथवा स्तुत होता है। &amp;lt;ref&amp;gt;गृणाति उपदिशति वेद- शास्त्राणि यद्वा गीर्यते स्तूयते शिष्यवर्गे:&amp;lt;/ref&amp;gt; [[मनुस्मृति]] &amp;lt;ref&amp;gt;[[मनुस्मृति]] 2.142&amp;lt;/ref&amp;gt; में गुरु की परिभाषा निम्नांकित है:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;निषेकादीनि कार्माणि य: करोति यथाविधि।&lt;br /&gt;
सम्भावयति चान्नेन स विप्रो गुरुरुच्यते।&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो विप्र निषक &amp;lt;ref&amp;gt;गर्भाधान &amp;lt;/ref&amp;gt;आदि संस्कारों को यथा विधि करता है और अन्न से पोषण करता है वह गुरु कहलाता है। इस परिभाषा से पिता प्रथम गुरु है, तत्पश्चात पुरोहित, शिक्षक आदि। मंत्रदाता को भी गुरु कहते हैं। गुरुत्व के लिए वर्जित पुरुषों की सूची कालिकापुराण &amp;lt;ref&amp;gt;कालिकापुराण अध्याय 54&amp;lt;/ref&amp;gt; में इस प्रकार दी हुई है:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अभिशप्तमपुत्रच्ञ सन्नद्धं कितवं तथा। &lt;br /&gt;
क्रियाहीनं कल्पाग्ड़ वामनं गुरुनिन्दकम्॥&lt;br /&gt;
सदा मत्सरसंयुक्तं गुरुंत्रेषु वर्जयेत।&lt;br /&gt;
गुरुर्मन्त्रस्य मूलं स्यात मूलशद्धौ सदा शुभम्॥&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[कूर्मपुराण]] &amp;lt;ref&amp;gt;[[कूर्मपुराण]] उपविभाग, अध्याय 11&amp;lt;/ref&amp;gt; में गुरुवर्ग की एक लम्बी सूची मिलती है:&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
उपाध्याय: पिता ज्येष्ठभ्राता चैव महीपति:। &lt;br /&gt;
मातुल: श्वशुरस्त्राता मातामहपितामहौ॥ &lt;br /&gt;
बंधुर्ज्येष्ठ: पितृव्यश्च पुंस्येते गुरव: स्मृता:॥&lt;br /&gt;
मातामही मातुलानी तथा मातुश्च सोदरा॥ &lt;br /&gt;
श्वश्रू: पितामही ज्येष्ठा धात्री च गुरव: स्त्रीषु। &lt;br /&gt;
इत्युत्को गुरुवर्गोयं मातृत: पितृतो द्विजा:॥&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इनका श्षटाचार, आदर और सेवा करने का विधान है। युत्किकल्पतरु में अच्छे गुरु के लक्षण निम्नांकित कहे गये हैं:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;सदाचार: कुशलधी: सर्वशास्त्रार्थापारग:। &lt;br /&gt;
नित्यनैमित्तिकानाञ्च कार्याणां कारक: शुचि:॥ &lt;br /&gt;
अपर्वमैथुनपुर: पितृदेवार्चने रत:।&lt;br /&gt;
गुरुभक्तोजितक्रोधो विप्राणां हितकृत सदा॥ &lt;br /&gt;
दयावान शीलसम्पन्न: सत्कुलीनो महामति:।&lt;br /&gt;
परदारेषु विमुखो दृढसंकल्पको द्विज:॥&lt;br /&gt;
अन्यैश्च वैदिकगुणैगुणैर्युक्त: कार्यो गुरुर्नृपै:।&lt;br /&gt;
एतैरेव गुणैर्युक्त: पुरोधा: स्यान्महीर्भुजाम्॥ &lt;br /&gt;
मंत्रगुरु के विशेष लक्षण बतलाये गये हैं:&lt;br /&gt;
शांतो दांत: कुलीनश्च विनीत: शुद्धवेशवान्।&lt;br /&gt;
शुद्धाचार: सुप्रतिष्ठ: शुचिर्दक्ष: सुबुद्धिमान॥ &lt;br /&gt;
आश्रामी ध्याननिष्ठश्च मंत्र-तंत्र-विशारद:।&lt;br /&gt;
निग्रहानुग्रहे शक्तो गुरुरित्यभिधीयते॥&lt;br /&gt;
उद्धर्तुच्ञै व संहतुँ समर्थो ब्राह्माणोत्तम:।&lt;br /&gt;
तपस्वी सत्यवादी च गृहस्थो गुरुच्यते॥&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
सामान्यत: द्विजाति का गुरु अग्नि, वर्णों का गुरु ब्राह्मण, स्त्रियों का गुरु पति और सबका गुरु अतिथि होता है: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;गुरुग्निद्विजातीनां वर्णानां बाह्मणो गुरु:।&lt;br /&gt;
पतिरेको गुरु: स्त्रीणां सर्वेषामतिथिर्गुरु:॥&amp;lt;ref&amp;gt;चाणक्य्नीति&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उपनयनपूर्वक आचार सिखाने वाला तथा वेदाध्ययन कराने वाला आचार्य ही यथार्थत: गुरु है: &lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
उपनीय गुरु: शिष्यं शिक्षयेच्छौचमादित:। &lt;br /&gt;
आचारमग्निकार्यञ्चसंध्योपासनमेब च॥ &lt;br /&gt;
अल्पं वा बहु वा यस्त श्रुतस्योपकरोति य:।&lt;br /&gt;
तमपीह गुरुं विद्याच्छु तोपक्रिययातया॥&lt;br /&gt;
षटर्त्रिशदाब्दिकं चर्य्यं गुरौ त्रैवेदिकं व्रतम्।&lt;br /&gt;
तदर्द्धिकं पादिक वा ग्रहणांतिकमेव वा॥ &amp;lt;ref&amp;gt;मनु. 2.69;2.149;3.1&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==गुरु का चुनाव==&lt;br /&gt;
वीर शैवों में यह है कि प्रत्येक लिग्डायत गाँव में एक मठ होता है जो प्रत्येक पाँच प्रारम्भिक मठों से सम्बंधित रहता है। प्रत्येक लिग्डायत किसी न किसी मठ से सम्बंधित होता है। प्रत्येक का एक गुरु होता है। जग्डम इनकी एक जाति है जिसके सदस्य लिग्डायतों वे गुरु होते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब लिग्डायत अपने गुरु का चुनाव करता है तब एक उत्सव होता है, जिसमें पाँच मठों के महंतों के प्रतिनिधि के रूप में, रखे जाते हैं। चार पात्र वर्गाकार आकृति में एवं एक केंद्र में रखा जाता है। यह केंद्र का पात्र उस लिग्डायत के घर जाता है, उस अवसर पर 'पादोदक' संस्कार &amp;lt;ref&amp;gt;गुरु के चरण धोना&amp;lt;/ref&amp;gt; होता है, जिसमें सारा परिवार तथा मित्रमण्डली उपस्थित रहती है। गृहस्वामी द्वारा गुरु की षोडशोपचार पूर्वक पूजा की जाती है। &lt;br /&gt;
==गुरु का सम्मान== &lt;br /&gt;
धार्मिक गुरु के प्रति भक्ति की परम्परा [[भारत]] में अति प्राचीन है। प्राचीन काल में गुरु की आज्ञा का पालन करना शिष्य का परम [[धर्म]] होता था।  [[प्राचीन भारत]] की शिक्षा प्रणाली में [[वेद|वेदों]] का ज्ञान व्यक्तिगत रूप से गुरुओं द्वारा मौखिक शिक्षा के माध्यम से शिष्यों को दिया जाता था। गुरु शिष्य का दूसरा पिता माना जाता था एवं प्राकृतिक पिता से भी अधिक आदरणीय था। [[आधुनिक काल]] में गुरुसंभान और भी अधिक बताई गई है। [[नानक]], [[दादू]], राधास्वामी आदि संतों के अनुयायी जिसे एक बार गुरु ग्रहण करते हैं, उसकी बातों को ईश्वरवचन मानते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिना गुरु की आज्ञा के कोई [[हिंदु]] किसी सम्प्रदाय का सदस्य नहीं हो सकता। प्रथम वह एक जिज्ञासु बनता है। बाद में गुरु उसके कान में एक शुभ बेला में दीक्षा-मंज्ञ पढ़ता है और फिर वह सदस्य बन जाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
[[Category:सिक्ख_धर्म_कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:हिन्दू_धर्म_कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना मई-2012]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%A5%E0%A5%80&amp;diff=276747</id>
		<title>हाथी</title>
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		<updated>2012-05-29T05:04:03Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* संबंधित लेख */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{हाथी विषय सूची}}&lt;br /&gt;
{{सूचना बक्सा जीव जन्तु&lt;br /&gt;
|चित्र=Indian-Elephant-3.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=भारतीय हाथी&lt;br /&gt;
|जगत=जीव - जन्तु&lt;br /&gt;
|संघ=कॉर्डेटा (Chordata)&lt;br /&gt;
|वर्ग=स्तनपायी (Mammalia)&lt;br /&gt;
|उप-वर्ग=&lt;br /&gt;
|गण= प्रोबोसिडिया (Proboscidea)&lt;br /&gt;
|उपगण=&lt;br /&gt;
|अधिकुल=&lt;br /&gt;
|कुल=एलिफ़ैंटिडी (Elephantidae)&lt;br /&gt;
|प्रजाति=एलिफ़स (Elephas)&lt;br /&gt;
|जाति=मैक्सीमस (maximus) &lt;br /&gt;
|द्विपद नाम=एलिफ़स मैक्सिमस इंडिकस (Elephas maximus indicus)&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=भारतीय हाथी एशियाई हाथियों की ही उपजाति हैं। भारतीय हाथियों के अफ़्रीकी हाथियों के मुक़ाबले कान छोटे होते हैं, और माथा चौड़ा होता है। मादा के हाथीदाँत नहीं होते हैं।&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन={{अद्यतन|14:39, 25 सितम्बर 2011 (IST)}}&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''हाथी''', आधुनिक मानव के समय का [[पृथ्वी ग्रह|पृथ्वी]] पर विचरण करने वाला, सबसे विशालकाय स्तनपायी जीव है। इसकी दो प्रजातियों, एशियाई हाथी (एलिफ़स मैक्सीमस) और अफ़्रीकी हाथी (लॉक्सोडोंटा अफ़्रीकाना) में से एक, दोनों ही एलिफ़ैंटिडी परिवार गण, कुल के हैं, जिनका विशिष्ट लक्षण उनका बड़ा आकार, लंबी सूंड़ (विस्तारित नाक), स्तंभाकार पैर, विशाल कान (विशेषकर एल अफ़्रीकाना में) और बड़ा सिर है। एलिफ़ैस मैक्सीमस भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण-पूर्वी [[एशिया]] में पाया जाता है; जबकि एल. अफ़्रीकाना, अफ़्रीका के उपसहारा क्षेत्र में पाया जाता है। दोनों ही प्रजातियाँ घने जंगलों से लेकर सवाना (घास के खुले मैदान) तक में रहती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==एशियाई हाथी==&lt;br /&gt;
एशियाई हाथी अब पहले के मुक़ाबले सीमित क्षेत्र में ही पाए जाते हैं। पहले यह क्षेत्र पश्चिम एशिया के टिग्रिस-यूफ़्रेटस बेसिन से पूर्व की ओर उत्तरी [[चीन]] तक फैला हुआ था। इसमें वर्तमान [[इराक़]] और पड़ोसी देश, दक्षिण [[ईरान]], [[पाकिस्तान]], [[हिमालय]] के दक्षिण में समूचा भारतीय उपमहाद्वीप, [[एशिया महाद्वीप]] का दक्षिण-पूर्वी हिस्सा, चीन का एक बड़ा हिस्सा और [[श्रीलंका]] , सुमात्रा तथा संभवतः जावा के क्षेत्र शामिल हैं। आमतौर पर हाथी स्लेटी भूरे रंग का होता है। कुछ हाथी सफेद होते हैं। इन्हें 'एल्बिनो' कहते हैं। [[म्याँमार]] आदि देशों में ऐसे हाथी पवित्र माने जाते हैं और इनसे कोई काम नहीं लिया जाता।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीवाश्मों से पता चलता है कि किसी समय बोर्नियों में भी हाथी थे, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि वे वहाँ के मूल निवासी थे या 1750 के दशक में वहाँ लाकर छोड़े गए बंदी हाथियों के वंशज हैं। अभी मुख्य रूप से हाथी सबाह ([[मलेशिया]]) और कालिमंतन ([[इंडोनेशिया]]) के एक छोटे क्षेत्र तक सीमित हैं। हाथी पश्चिम एशिया, भारतीय महाद्वीप के अधिकांश हिस्से, दक्षिण-पूर्व एशिया के काफ़ी हिस्से और लगभग समूचे चीन (युन्नान प्रांत के दक्षिणी क्षेत्रों को छोड़कर) से विलुप्त हो चुके हैं। इसके क्षेत्र के पश्चिमी हिस्सों की शुष्कता, पालतू बनाए जाने के लिए बड़े पैमाने पर बंदी बनाने (जो लगभग 4,000 साल पाहले [[सिंधु घाटी]] में शुरू हुआ था), मानव आबादी के लगातार बढ़ने से इनके पर्यावास में कमी और इनका शिकार, इनके क्षेत्र व संख्या में कमी के प्रमुख कारण हैं।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Asian-Elephant.jpg|left|एशियाई हाथी|thumb|300px]]&lt;br /&gt;
एक गणना के अनुसार, जंगली एशियाई हाथियों की संख्या 37 से 57 हज़ार के बीच है; इनका पर्यावास लगभग 5,00,000 वर्ग किमी में फ़ैला हुआ है। हाथी कंटीले झाड़ीदार जंगलों से लेकर सदाबहार वनों तक, दलदली क्षेत्र से लेकर घास के मैदानों तक और शुष्क एवं नम पर्णपाती वनों जैसे भिन्न पर्यावासों में पाए जाते हैं। पूर्वी हिमालय में हाथी 3,000 मीटर की ऊँचाई तक रहने में सक्षम है। 15 हज़ार हाथी बंदी अवस्था में हैं। [[भारत]] में लगभग 22 हज़ार जंगली और 3,000 पालतू हाथी हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====भारतीय हाथी====&lt;br /&gt;
भारतीय हाथी एशियाई हाथियों की ही उपजाति हैं, अतः इनमें कोई विशेष अन्तर नहीं है। भारतीय हाथियों के अफ़्रीकी हाथियों के मुक़ाबले कान छोटे होते हैं, और माथा चौड़ा होता है। मादा के हाथीदाँत नहीं होते हैं। नर मादा से ज़्यादा बड़े होते हैं। सूँड अफ़्रीकी हाथी से ज़्यादा बड़ी होती है। पंजे बड़े व चौड़े होते हैं। पैर के नाख़ून ज़्यादा बड़े नहीं होते हैं। अफ़्रीकी पड़ोसियों के मुक़ाबले इनका पेट शरीर के वज़न के अनुपात में ही होता है, लेकिन अफ़्रीकी हाथी का सिर के अनुपात में पेट बड़ा होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारतीय हाथी लंबाई में 6.4 मीटर (21 फ़ुट) तक पहुँच सकता है; यह थाईलैंड के एशियाई हाथी से लंबा व पतला होता है। सबसे लंबा ज्ञात भारतीय हाथी 26 फ़ुट (7.88 मी) का था, पीठ के मेहराब के स्थान पर इसकी ऊँचाई 11 फुट (3.4 मीटर), 9 इंच (3.61 मीटर) थी और इसका वज़न 8 टन (17935 पौंड) था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==हाथी का पारिवारिक जीवन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:African-Elephant.jpg|thumb|300px|अफ़्रीकी हाथी]]&lt;br /&gt;
[[अफ़्रीका|अफ़्रीकी]] हाथी ज़मीन पर पाया जाने वाला सबसे बड़ा जीवित जानवर है, जिसका वजन 7,500 किलोग्राम तक होता है और कंधे तक ऊँचाई 3 से 4 मीटर होती है। भारतीय हाथी का वज़न लगभग 5,500 किलोग्राम और कंधे तह ऊँचाई 3 मीटर होती है; इसके कान अफ़्रीकी हाथी की तुलना में काफ़ी छोटे होते हैं। हाथियों में चर्वणक दाँत एक साथ ही पैदा नहीं होते; बल्कि पुराने दाँत के घिस जाने पर नया पैदा हो जाता है, लगभग 40 वर्ष की आयु में चर्वणक दाँतों का छठा और अंतिम जोड़ा निकलता है, इसलिए बहुत कम हाथी इससे अधिक आयु तक जीवित रह पाते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हाथी की औसत आयु 60 वर्ष की होती है, यद्यपि कुछ हाथी 70 वर्ष तक जीते पाए गए हैं। जन्म के समय बच्चा 1 मीटर ऊँचा और 90 किलोग्राम भार का होता है। तीन चार वर्षों तक हथिनी बच्चे को दूध पिलाती है और सिंह, बाघ, चीते आदि से बड़ी सर्तकता से उसकी रक्षा करती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जंगलों में हाथी वरिष्ठ हथिनी के नेतृत्व में छोटे पारिवारिक समूहों में रहते हैं। जहाँ भरपूर भोजन उपलब्ध होता है, वहाँ झुंड बड़े भी हो सकते हैं। अधिकांश नर मादाओं से अलग झुंड में रहते हैं। भोजन और पानी की उपलब्धता के अनुसार, हाथी मौसमी प्रवास करते हैं। वे कई घंटे भोजन करने में बिताते है और एक दिन में 225 किलोग्राम घास और अन्य वनस्पति खा सकते हैं। एशियाई हाथी अफ़्रीकी हाथी की तुलना में छोटा होता है और उसके शरीर का उच्चतम बिंदु कंधे के बजाय सिर होते हैं, सामने के पैरों पर नाख़ून जैसी पांच संरचनाएं और पिछले पैरों पर चार संरचनाएँ होती हैं। हाथी के पैर स्तंभ की भाँति सीधे होते हैं। खड़ा रहने के लिए इसे बहुत कम पेशी शक्ति की आवश्यकता पड़ती है। जब तक बीमार न पड़े या घायल न हो, तब तक अफ़्रीकी हाथी कदाचित्‌ ही लेटता है। भारतीय हाथी प्राय: लेटते हुए पाए जाते हैं। हाथी की अँगुलियाँ त्वचा की गद्दी में धँसी रहती हैं। गद्दी के बीच में चर्बी की एक गद्दी होती है, जो शरीर के भार पड़ने पर फैल जाती और पैर ऊपर उठाने पर सिकुड़ जाती है। हाथी की त्वचा एक इंच मोटी पर पर्याप्त संवेदनशील होती है। त्वचा पर एक-एक इंच की दूरी पर बाल होते हैं। इसकी खाल खोल के सदृश और झुर्रीदार होती है। खाल का भार एक टन तक का हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आमतौर पर सिर्फ़ नरों के ही गजदंत होते हैं, जबकि अफ़्रीकी हाथियों में नर और मादा, दोनों में गजदंत पाए जाते हैं। हाथियों में घ्राणशाक्ति अत्यंत विकसित होती है और इसके ज़रिये वे ख़तरों का पता लगाते हैं तथा बांस के घने झुंडों में नरम कॉपल जैसे मनपसंद आहार ढूंढते हैं। खाते समय हाथी इस प्रकार खड़े होते है कि सबसे बड़ी हथिनी हवा की दिशा में खड़ी हो और बच्चे उसे ढूंढ सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एशियाई हाथी किसी भी समय भोजन कर सकते हैं, लेकिन 24 घंटों में दो मुख्य भोजनकाल होते हैं। वयस्कों की गतिविधियों का 72 से 90 प्रतिशत हिस्सा भोजन ढूंढने और उसे खाने में बीतता है। &lt;br /&gt;
==शारीरिक विलक्षणता==&lt;br /&gt;
हाथी कुछ-कुछ स्लेटी से भूरे रंग के होते है और उनके शरीर के बाल बिखरे हुए तथा रूखे होते हैं। दोनों प्रजातियों में दो ऊपरी कृंतक दंत हाथीदाँत के रूप में विकसित होते हैं, लेकिन भारतीय हाथियों में यह आमतौर पर नहीं पाए जाते। नथुने, मांसल सूंड के छोर पर स्थित होते हैं, जो सांस लेने, खाने और पीने में उपयोगी होते हैं। [[चित्र:Elephant-5.jpg|thumb|300px|left|जंगल में लकड़ी ढ़ोता गजराज]] हाथी सूंड के ज़रिये पानी खींचकर अपने मुंह में डालते हैं।&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाथी की सूँड लगभग 2 मीटर लंबी और प्राय: 136 किलोग्राम भार की चमड़ी और अंतर्ग्रथित स्नायु और पेशियों की बनी होती है। यह अस्थिहीन, लचीली और असाधारण मज़बूत होती है। इससे वह सूंघता, पानी पीता, भोजन प्राप्त करता और उसे मुँह में डालता तथा अपने जोड़े और बच्चे को सहलाकर प्रेम प्रदर्शन आदि काम करता है। हाथी अपनी सूंड के छोर से घास, पत्तियाँ और [[भारत के फल|फल]] तोड़कर अपने मुंह में डालते हैं। हाथी अपनी सूँड से भारी से भारी भी और छोटे सी छोटी यहाँ तक की मूँगफली सदृश वस्तुओं को भी उठा सकता है। हाथी की नासिका छोटी और खोपड़ी बहुत बड़ी होती है। हाथी अपनी सूंड के छोर से घास, पत्तियाँ और [[भारत के फल|फल]] तोड़कर अपने मुंह में डालते हैं। किसी किसी भारतीय नर हाथी के गजदंत नहीं होता। ऐसे हाथी को 'मखना' हाथी कहते हैं। मखना का शरीर असाधारण बड़ा होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हाथी स्नान करने में बड़ा नियमित होता है। अपने बच्चों को नियमित रूप से स्नान कराता है। यह अच्छा तैराक होता हैं। सारे शरीर को पानी में डूबोकर, केवल साँस के लिए सूँड़ को बाहर निकाले रख सकता है। यह किसी निश्चित स्थान पर पानी पीता, और एक स्थान पर जाकर विश्राम करता है। धूप से बचने के लिए घने जंगलों की छाया में सोता है। हाथी खड़ा खड़ा ही विश्राम करता है, अथवा करवट लेटता है। विश्राम के समय बिल्कुल शांत रहता है, केवल कान की फड़फड़ाहट या शरीर के डालने से उसकी उपस्थिति जानी जाती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जंगली हाथी दल बनाकर रहता है। दल में साधारणतया 30-40 बच्चे, बूढ़े, जवान, नर और मादा रहते हैं। किसी किसी दल में 300-400 तक रह सकते हैं। प्रस्थान करने पर ये एक कतार में श्रेणीबद्ध चलते हैं। बच्चे आगे आगे और शेष पीछे चलते हैं। आक्रमण के समय यह क्रम बदल जाता है और छोटी छोटी टुकड़ियाँ बनाकर वे विभिन्न दिशाओं में खिसक जाते हैं। आक्रमण की सूचना सूँड़ की गति से देते हैं। कुछ हाथी दल के नियमों का पालन नहीं करते। वे तब 'शैतान' या 'आवारा' कह जाते हैं और उन्हें दल से निकाल दिया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ऐसा कहा जाता है कि हाथी कुशाग्रबुद्धि होता है। कुशाग्रता के प्राणियों में पहला स्थान मनुष्य का, दूसरा चिम्पॅज़ी का, तीसरा औरांग ऊटांग का और चौथा हाथी का माना जाता है। डॉल्फ़िन पानी के भीतर सबसे बुद्धिमान है। ऐसा कहा जाता है कि हाथी की दृष्टि कमज़ोर होती है और वह 75 मीटर से अधिक दूरी पर खड़े किसी मनुष्य को पहचान नहीं सकता। इसकी श्रवणशक्ति अच्छी तथा घ्राण शक्ति और भी अच्छी होती है।&lt;br /&gt;
==भोजन==&lt;br /&gt;
विशालकाय जंगली हाथी की ख़ुराक भी उसके शरीर के अनुसार होती है। एक सामान्य वयस्क हाथी आराम के दिनों में 75 किलोग्राम तक भोजन एक दिन में खाता है। यह भोजन विभिन्न वनस्पतियों के रूप में होता है. लेकिन, लंबी यात्रा और श्रम करने वाला हाथी एक दिन में 150 किलोग्राम चारा यानी घास, पत्ती, वनस्पति और फल-फूल खा लेता है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली हथनी तो 200 किलोग्राम तक भोजन कर लेती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक वयस्क हाथी एक घंटे में सात किलोग्राम भोजन ग्रहण कर सकता है और वे प्रतिदिन 18 घंटे भोजन करते हैं, इस प्रकार वे प्रतिदिन 150 किलोग्राम वनस्पति सामग्री (आर्द्र वज़न) का भक्षण करते हैं। दक्षिण भारत में एक अध्ययन से पाया गया कि हाथी पौधों की कम से कम 112 किस्म की प्रजातियाँ खाते हैं, लेकिन उनके आहार का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा मॉलवेल्स गण और लेगुमिनसी, पाल्मे, साइपरेसी और ग्रामिनी परिवार की सिर्फ़ 25 प्रजातियों पर आधारित है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अध्ययन से पता चला कि आर्द्र मौसम की शुरुआत में ये [[प्रोटीन]] युक्त घास खाते है और जब शुष्क मौसम में घास बड़ी हो जाती है, तब आहार में कोपलों  की प्रधानता रहती है। चूंकि खेत में पैदा होने वाले खाद्यान्न तथा मिलेट फ़सलों में जंगली  घास की अपेक्षा अधिक प्रोटीन, [[कैल्शियम]] और [[सोडियम]] होता है, इसलिए वे प्रायः खेतों पर भी धावा बोल देते हैं, लेकिन चाहे खेत जंगलों के पास स्थित क्यों न हों, सभी हाथी फ़सलों में घुसपैठ नहीं करते। हाथी, मिट्टी से सोडियम और पेड़ की छालों से भी कैल्शियम प्राप्त करते हैं। ये दिन में कम से कम एक बार पानी अवश्य पीते हैं और ताज़े पानी के स्थायी स्रोतों से कभी बहुत दूर नहीं जाते। दिन के गर्म समय में इनके लिए छांव अनिवार्य है। हाथी अपने कानों के ज़रिये [[ऊष्मा]] का विकिरण करते है और इनके कानों के फड़फड़ाने की दर हवा के [[वेग]], परिवेश के [[तापमान]] तथा बादलों की स्थिति के अनुसार बदलती रहती है।&lt;br /&gt;
==वितरण==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Indian-Elephant.jpg|thumb|300px|भारतीय हाथी]]&lt;br /&gt;
वर्तमान समय में हाथी अपेक्षाकृत छोटे टेपिरनुमा स्तनधारी जंतु के वंशज हैं, जो कम से कम 4.50 करोड़ वर्ष पहले पाए जाते थे। इनके अवशेष [[मिस्र]] में मोएरिस झील के पास पाए गए हैं। इसी आधार पर इन्हें मोएरिथेरियम नाम दिया गया। इनके दोनों जबड़ों में दो-दो बड़े कृंतक दाँत प्राथमिक गजदंतों के रूप में विकसित हो चुके थे। मोएरिथेरियम की एक प्रशाखा प्रिमिलेफ़स से वृहद परिवार एलिफ़ैंटोइडी का विकास हुआ, जिसके तहत नवीनतम प्रोबोसीडियन परिवार भी आते हैं। ये परिवार होमो सेपियंस (मानव जाति) के प्रादुर्भाव के एकमात्र साक्षी हैं।  विकास क्रम में इनके कई रूपों की उत्पत्ति और विलुप्ति हुई। 10 हज़ार साल पहले तक इस परिवार में सित्ग रोएंदार मैमथ (मैमथस प्रिमीजीनियस), इसके निकट संबंधी एशियाई हाथी (एलिफ़ैस मैक्सीमस), और इससे भिन्न अफ़्रीकी हाथी (लॉक्सोडोंटा अफ़्रीकाना) ही बचे थे। लगभग 5,000 साल पहले रोएंदार मैमथ समाप्त हो गए। जलवायु के गर्म होने से इनके विलुप्त होने की प्रक्रिया शुरू हुई, क्योंकि उससे इनका चारा जलमग्न को गया। मानव द्वारा शिकार से भी इनके विलुप्त होने की गति तेज़ हुई।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Tusker-Elephant.jpg|thumb|250px|left|हाथी के दाँत]]&lt;br /&gt;
कई शताब्दियों से भारतीय हाथी, समारोहों और बोझा ढोने के काम के लिए महत्त्वपूर्ण रहे हैं। अपने महावत के नियंत्रण में हाथी पेड़ों की कटाई के अपरिहार्य अंग हैं। अफ़्रीकी हाथी का भी इस्तेमाल बोझा ढोने के लिए होता है, लेकिन यह अपेक्षाकृत बहुत व्यापक नहीं है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पारिवारिक इकाई==&lt;br /&gt;
हाथी की दोनों ही प्रजातियों में उसी झुंड में रहने की प्रवृति होती है, जिसमें उनका जन्म हुआ हो। हाथियों के सामाजिक संगठन की आधारभूत इकाई पारिवारिक समूह है, जिसमें दो से आठ हाथी हो सकते हैं। कई समूह मिलकर एक झुंड या कुल का निर्माण करते हैं तथा कई कुलों से किसी क्षेत्र में हाथियों की संख्या का निर्धारण होता है। झुंड मातृवंशीय आधार पर संगठित होता है और सबसे बड़ी व अनुभवी मादा इसके संचालन की देखरेख करती है। लेकिन सबसे मज़बूत बंधन मादा और उसके नवजात बच्चे का होती है। चार वर्ष की आयु में वे झुंड की मादाओं के साथ कम समय व्यतीत करते हैं तथा अपनी उम्र के या अपने से बड़े नरों के साथ अस्थायी रूप से संपर्क स्थापित करते हैं। एशियाई नर हाथियों के सबसे बड़े झुंड में सात सदस्य होते हैं। नर 14 से 15 वर्ष की आयु में यौन परिपक्वता हासिल कर लेते हैं और मादाएँ 15 या 16 वर्ष की आयु में पहले बच्चे को जन्म देती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वयस्क नर तब तक किसी झुंड से संबद्ध नहीं होता है, जब तक झुंड में मैथुन के लिए तैयार कोई हथिनी मौज़ूद न हो। दिखावटी संघर्ष और अन्य सामान्य मुक़ाबलों से नर एक-दूसरे की शक्ति का अनुमान लगाते हैं, इसलिए मादाओं के लिए गंभीर संघर्ष शायद ही कभी होते हैं। 20 वर्ष की अवस्था में नर के शरीर का पूर्ण विकास हो जाता है। परिपक्व हाथी हर साल एक बार मद की स्थिति में आता है, जिसके दौरान उसकी आँखों के पीछे स्थित ग्रंथियों से स्राव होता है। वे आक्रामक हो जाते हैं और मादाओं के साथ रहने लगते हैं, जिसके बाद सहवास होता है। मद की तुलना अन्य खुरदार पशुओं के मैथुन काल से की जा सकती है। नर हाथी कभी भी सहवास कर सकते हैं, लेकिन मदकाल में उनकी यौन उत्तेजना बढ़ जाती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हथिनियों में गर्भावस्था 18 से 22 महीने तक की होती है। अंतिम चरण को छोड़कर अन्य समय में गर्भ का बाहर से पता नहीं चलता है। गर्भावधि के अंत में स्तनों में सूजन आ जाती है, थन फूल जाते है और उनसे पानी जैसे [[द्रव]] का रिसाव भी हो सकता है। प्रसव पीड़ा कम समय से लेकर कई घंटों की हो सकती है, लेकिन प्रसव लगभग पाँच मिनट में ही हो जाता है। मादा आमतौर पर प्रसव के समय निकलने वाले पदार्थों को खा जाती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====बच्चों का जन्म====&lt;br /&gt;
[[चित्र:Elephant-7.jpg|thumb|300px|हाथी]]&lt;br /&gt;
बच्चों का जन्म साल के किसी भी मौसम में हो सकता है, लेकिन अधिकांश बच्चे वर्षा ॠतु के अंतिम दिनों में पैदा होते हैं। आमतौर पर एक ही बच्चा जन्म लेता है और कभी-कभार ही जुड़वाँ या तीन बच्चों का जन्म होता है। अनुकूल पर्यावास में दो बच्चों के बीच का अंतर 2.5-4 वर्ष होता है। कम अनुकूल क्षेत्रों में यह अंतराल 5 से 8 वर्ष तक का हो सकता है। नवजात का वज़न 100 किलोग्राम (80 से 110 किलोग्राम तक) और कंधे तक ऊँचाई 75 से 90 सेमी होती है। वयस्कों के मुक़ाबले बच्चों के शरीर पर काफ़ी बाल होते हैं। शिशु प्रायः माता की सहायता से सीधे थन पर मुंह लगाकर (सूंड के ज़रिये नहीं) दूध पीते हैं, और अपनी माँ या अन्य दुग्धपान करा सकने वाली मादाओं का दूध पीते हैं। डेढ महीने से बच्चे ठोस आहार लेना शुरू कर देते हैं और वे वयस्कों से उचित भोजन के बारे में सीखते हैं। प्रायः बच्चे अपनी माँ की लीद भी खा लेते हैं, जिससे सेल्युलोज़ पचाने में सहायक सहजीवी [[बैक्टीरिया]] उनके जठरांत्र में पहुँच जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मृत्यु==&lt;br /&gt;
हाथियों की मृत्यु छोटी अवस्था में अन्य पशुओं द्वारा उन्हें मारकर खाने, रोग और परजीवी, दुर्घटनाओं, सूखा, तनाव, शिकार, वृद्धावस्था और आपसी संघर्ष के कारण होती है। जब हाथी की छह चर्वणक दंतावलियों में से अंतिम दंतावली भी घिस जाती है, तो वह भूख से मर जाता है। जीवन भर सेलखड़ी और घास के पौष्टिक आहार और कई प्रकार की रसदार वनस्पतियों के आहार के बाद के बाद भी हाथी आमतौर पर 50 वर्ष से 65 वर्ष के बीच ऐसा भोगते हैं।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Elephant-6.jpg|thumb|हाथी|300px|left]]&lt;br /&gt;
==जन-जीवन का विनाश== &lt;br /&gt;
झुंड तथा नरों का गृहक्षेत्र 60 से 500 वर्ग किलोमीटर तक होता है, इसलिए इनके संरक्षण के सफल उपाय के लिए विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों और पर्याप्त स्वच्छ जल वाले विशाम क्षेत्र की आवश्यकता होती है। हाथियों के पर्यावास के अंदर और उसके किनारे पर मानव आबादी के फलस्वरूप हाथी और मनुष्यों में संघर्ष से हाथी व मनुष्य, दोनों की ही जानों का नुक़सान होता है। भारत में प्रतिवर्ष लगभग 300 लोग हाथियों द्वारा मारे जाते हैं और 200 हाथी अवैध शिकार, फ़सल रक्षा और दुर्घटनाओं के कारण मरते हैं।&lt;br /&gt;
==संकट ग्रस्त प्रजाति का संरक्षण==&lt;br /&gt;
हाथी अपने पर्यावास के विनाश और मनुष्यों द्वारा शोषण के कारण गहरे संकट में है। भारतीय हाथी को विलुप्तप्राय प्रजाति माना गया है और अफ़्रीकी हाथी संकटग्रस्त वर्ग में है। अफ़्रीकी हाथी को प्रमुख ख़तरा हाथीदाँत के व्यापार के कारण होने वाले अवैध शिकार से है। चूंकि मादा एशियाई हाथी के गजदंत नहीं होते और सिर्फ़ मांस के लिए शिकार आमतौर पर नहीं होता, इसलिए वे सुरक्षित हैं। लेकिन हाथीदाँत के लिए नर एशियाई हाथियों के शिकार के कारण दक्षिण भारत के कई इलाकों में वयस्कों का लैंगिक अनुपात बिगड़ गया है। कुछ इलाक़ों में गजदंत वाले नर की अनुपस्थिति में गजदंतहीन नर (जिसे मखना कहा जाता है) प्रजनन कर सकता है। [[चित्र:Skull-Of-Elephant.jpg|thumb|250px|1894 में जिस ज़ख्मी भीमकाय से रेलगाड़ी टकराई थी यह उसकी खोपड़ी है]] लेकिन कुछ इलाक़ों में बहुत कम गजदाँतहीन नर हैं, इसलिए अंततः स्थिति यह है कि सभी मादाओं के साथ सहवास के लिए किसी भी प्रकार के नरों की संख्या काफ़ी नहीं है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
1999 में दक्षिण भारत के सबसे अधिक अवैध शिकार प्रभावित पेरियार व्याघ्र अभयारण्य में यह लिंग अनुपात 100 मादाओं पर एक नर का था। दूसरी तरफ़ [[हिमालय]] के निचले क्षेत्रों के राजाजी कॉर्बेट अभयारण्य में यह अनुपात 2.5 मादाओं पर एक हाथी का है और वहाँ 90 प्रतिशत से अधिक वयस्क मादाओं के साथ 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे थे। भारत सरकार द्वारा 1992 में शुरू की गई हाथी परियोजना उनके पर्यावास विखंडन, पर्यावास क्षरण, शिकार-चोरी और हाथी-मानव संघर्ष जैसे समस्याओं को दूर करने का एक प्रयास है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वन्यजीव अभयारण्यों में हाथियों की संख्या आवश्यकता से अधिक भी हो सकती है, जिससे उनके पर्यावास को और नुक़सान हो सकता है। इसलिए सीमित संख्या में उन्हें मार डालने की भी ज़रूरत होती है। संरक्षण के उपायों में अवैध शिकारियों से सुरक्षा और प्रमुख प्रवासी मार्ग की रक्षा के लिए पगडंडियों समेत बड़े अभयारण्यों की स्थापना भी शामिल है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==हाथी के अन्य संदर्भ==&lt;br /&gt;
====गुलाबी हाथी====&lt;br /&gt;
अभी तक काले और सफ़ेद हाथी के बारे में ही सुना जाता था, पर हाल ही में एक फ़ोटोग्राफर ने अफ़्रीका के जंगल में गुलाबी हाथी के बच्चे को कैद किया है। बोत्सवाना के जंगल में देखे गए इस हाथी के बच्चे को लेकर विशेषज्ञों को काफ़ी आशंकाएँ हैं। उनका मानना है कि यह एल्बिनो नस्ल का हाथी रहा होगा, जिसके बचने की संभावना काफ़ी कम है। [[चित्र:Indian-Elephant-1.jpg|thumb|250px|left|भारतीय हाथी &amp;lt;br /&amp;gt; Indian Elephant]] उनका मानना है कि अफ़्रीका के जंगलों में चिलचिलाती सूरज की किरणों की वजह से उसे अंधापन और चमड़े की बीमारी हो सकती है। बीबीसी वाइल्ड लाइफ प्रोग्राम के लिए फ़िल्म की शूटिंग कर रहे माइक होल्डिंग ने ओकावेंगो नदी के पास 80 हाथियों के समूह में एक [[गुलाबी रंग]] के हाथी बच्चे को जाते देखा और उन्होंने इस दृश्य को कैमरे में कैद करने में तनिक भी देरी नहीं की।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://navbharattimes.indiatimes.com/rssarticleshow/4295725.cms?prtpage=1 |title=अफ्रीका के जंगल में दिखा गुलाबी हाथी |accessmonthday=[[7 मई]] |accessyear=[[2010]] |last= |first= |authorlink= |format=एच.टी.एम.एल |publisher=नवभारत टाइम्स |language=[[हिन्दी]] }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====हिंसक हाथी====&lt;br /&gt;
[[चित्र:Leg-Elephant.jpg|thumb|हाथी का पैर]]&lt;br /&gt;
हाथियों ने पिछले दो दशकों के दौरान [[छत्तीसगढ़]] में 120 से ज़्यादा मनुष्यों की जान ली है। आंकड़ों की यह सच्चाई बताती है कि विकास के नाम पर जंगलों के कटने और वनस्पतियों के अभाव के कारण पर्यावरण को कितना नुक़सान हो रहा है। अपने ठिकानों पर क़ब्ज़ा होते देखकर जानवर शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन कर रहे हैं। इसी आपाधापी में वे हिंसक भी होते जा रहे हैं। राज्य सरकारें केवल मुआवज़ा वितरित कर अपने कर्तव्य की इतिश्री मान लेती हैं, जबकि समस्या का हल केवल पर्यावरण एवं वन संरक्षण के ज़रिए ही संभव है। ज्ञान-[[विज्ञान]] एवं तकनीक में लगातार समृद्ध हो रहे मानव समाज ने वनों और प्राकृतिक पर्यावरण से जिस प्रकार छेड़छाड़ की है, उससे अब वन्य प्राणियों में अपने अस्तित्व के लिए जंग लड़ने की भावना पैदा हो गई है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आए दिन वन्य प्राणियों के गांवों एवं शहरों में प्रवेश, खेती-पालतू पशुओं को नुक़सान पहुँचाने और मनुष्यों पर घातक हमला करने की घटनाएँ [[मध्य प्रदेश]] में भी बढ़ रही हैं। मनुष्य ने वनों पर क़ब्ज़ा कर लिया है। इसलिए वन्य प्राणियों के सामने सुरक्षित निवास और भोजन की समस्या पैदा हो गई है। पेट की आग बुझाने के लिए वे मौक़ा पाते ही गांवों और शहरों की तरफ दौड़ते हैं तथा मनचाहा भोजन छीन लेते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सरगुजा ज़िले में [[2000]] से [[सितंबर]] [[2009]] तक हाथियों के हमलों से 20 लोग मारे गए, जिनके परिवारजनों को 17 लाख 90 हज़ार रुपये का मुआवज़ा दिया गया। 19 घायलों को 27000 रुपये और फ़सल-मकान उजाड़ने के 8263 मामलों में सात करोड़ 13 लाख रुपये का मुआवज़ा दिया गया। मुआवज़ा वितरण, मनुष्यों के मारे जाने और घायल होने के आँकड़े इस अंचल में हाथियों एवं मनुष्यों के बीच चल रही जंग के सबूत हैं। इसके बावज़ूद सरकार हाथियों के लिए सुरक्षित निवास और आरक्षित वन क्षेत्र देने में आनाकानी कर रही है। सरकार मान चुकी है कि छत्तीसगढ़ में हाथियों की रक्षा के लिए एक अभयारण्य और एक सुरक्षित हरा-भरा वनक्षेत्र होना चाहिए।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://www.chauthiduniya.com/2010/01/hathi-hinshak-kyon-ho-rahe-hai.html |title=हाथी हिंसक क्यों हो रहे हैं? |accessmonthday=[[18 फ़रवरी]] |accessyear=[[2011]] |last= |first= |authorlink= |format=एच.टी.एम.एल |publisher=चौथी दुनिया |language=[[हिन्दी]] }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Panorama&lt;br /&gt;
|image =चित्र:Elephants-Panorama.jpg&lt;br /&gt;
|height =250&lt;br /&gt;
|alt =हाथियों का विहंगम दृश्य&lt;br /&gt;
|caption=	हाथियों का विहंगम दृश्य&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==भारतीय संस्कृति का प्रतीक हाथी==&lt;br /&gt;
[[हिन्दू धर्म]] में हाथी को पवित्र प्राणी माना गया है। अश्विन मास की [[पूर्णिमा]] के दिन '''गजपूजाविधि व्रत''' रखा जाता है। सुख समृद्धि की इच्छा रखने वाले उस दिन हाथी की पूजा करते हैं। [[गणेश]] जी का मुख हाथी का होने के कारण उनके गजतुंड, गजानन आदि नाम हैं। &lt;br /&gt;
'''गजेन्द्र मोक्ष कथा''' में गजेन्द्र ने मगर के ग्राह से छूटने के लिए [[विष्णु|श्री हरि]] की स्तुति की थी। श्री हरि ने गजेन्द्र को मगर के ग्राह से छुड़ाया था। '''गजेन्द्र मोक्ष स्रोत''' का स्थान [[गीता]] में है। गीता में [[श्री कृष्ण]] ने हाथियों में '''ऐरावत''' को अपनी विभूति बताया है। हाथी शुभ शकुन वाला और [[लक्ष्मी]] दाता माना जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==समाचार==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Indian-Elephant-2.jpg|thumb|300px|हाथियों के अस्तित्व पर भीषण संकट]]&lt;br /&gt;
====रविवार, 12 सितंबर, 2010====&lt;br /&gt;
'''हाथी राष्ट्रीय धरोहर प्राणी घोषित होगा'''&lt;br /&gt;
केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने गजराज यानी हाथी को राष्ट्रीय धरोहर प्राणी घोषित किया है। इसके संरक्षण हेतु [[बाघ]] संरक्षण प्राधिकरण की तर्ज़ पर गजराज संरक्षण प्राधिकरण बनाया जायेगा व विशेष टॉस्क फोर्स का गठन किया जायेगा। यही नहीं, 12वीं पंचवर्षीय योजना में इसके लिए 600 करोड़ की राशि दी जायेगी। इसका कारण यह है कि आज हाथियों के अस्तित्व पर भीषण संकट है। हाथी-दाँत के कारोबार के चलते आये दिन शिकारियों द्वारा हाथियों की हत्याएँ की जा रही हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है.... &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====समाचार को विभिन्न स्रोतों पर पढ़ें====&lt;br /&gt;
*[http://dainiktribuneonline.com/2010/09/%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%9F-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%97%E0%A4%9C%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C/ दैनिक ट्रिब्यून]&lt;br /&gt;
*[http://www.mediaclubofindia.com/profiles/blogs/4335940:BlogPost:76486 मीडिया क्लब ऑफ़ इंडिया]&lt;br /&gt;
*[http://hindi.webdunia.com/news/news/national/1009/09/1100909031_1.htm वेबदुनिया]&lt;br /&gt;
*[http://khabar.ibnlive.in.com/news/38857/1 आई बी एन खबर]&lt;br /&gt;
*[http://www.bhaskar.com/article/ABH-now-gajraj-important-initiative-to-protect-1486310.html दैनिक भास्कर]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====शुक्रवार, 15 अक्टूबर, 2010====&lt;br /&gt;
'''हाथी राष्ट्रीय विरासत पशु घोषित'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पर्यावरण मंत्रालय ने हाथियों के संरक्षण की दिशा में क़दम उठाते हुए उन्हें राष्ट्रीय धरोहर पशु घोषित कर दिया। राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) की स्थाई समिति की [[13 अक्टूबर]], [[2010]] को हुई बैठक में हाथियों को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद पर्यावरण मंत्रालय ने [[15 अक्टूबर]], 2010 को इस सम्बंध में अधिसूचना जारी की। ... &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====समाचार को विभिन्न स्रोतों पर पढ़ें====&lt;br /&gt;
*[http://www.khaskhabar.com/elephant-declared-national-heritage-animal-102010221039282276.html ख़ास ख़बर]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/national/general/5_1_6839609.html जागरण याहू]&lt;br /&gt;
*[http://www.patrika.com/news.aspx?id=463350 पत्रिका]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक= |माध्यमिक=माध्यमिक1 |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==वीथिका==&lt;br /&gt;
&amp;lt;gallery&amp;gt;&lt;br /&gt;
चित्र:Elephants-Jim-Corbett-National-Park.jpg|जंगली हाथियों का झुंड, [[जिम कोर्बेट राष्ट्रीय पार्क]]&lt;br /&gt;
चित्र:Elephant tusk.jpg|हाथी दांत &lt;br /&gt;
&amp;lt;/gallery&amp;gt;&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
[http://www.upali.ch/elephant_encyclopedia.html Elephant encyclopedia]&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{भारतीय संस्कृति के प्रतीक}}{{पशु पक्षी}}&lt;br /&gt;
[[Category:स्तनधारी जीव]][[Category:प्राणि विज्ञान]][[Category:प्राणि विज्ञान कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:हिन्दू धर्म]] [[Category:हिन्दू धर्म कोश]] &lt;br /&gt;
[[Category:पौराणिक कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:धार्मिक चिह्न]]&lt;br /&gt;
[[Category:वन्य प्राणी]]&lt;br /&gt;
[[Category:समाचार जगत]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
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		<title>सेही</title>
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		<updated>2012-05-29T05:03:54Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* संबंधित लेख */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा जीव जन्तु&lt;br /&gt;
|चित्र=Porcupine.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=सेही &lt;br /&gt;
|जगत=जीव - जन्तु &lt;br /&gt;
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|उप-वर्ग=&lt;br /&gt;
|गण=कृंतक (रोडेन्शिया / Rodentia)&lt;br /&gt;
|उपगण=हिस्ट्रिकोमोरफा (Hystricomorpha)&lt;br /&gt;
|अधिकुल=&lt;br /&gt;
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|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
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|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=सेही सूअर की भाँती घुरघुर ध्वनियाँ निकालती है।&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेही ([[अंग्रेज़ी]]:Porcupine) अथवा साही [[अफ़्रीका]] और [[एशिया]] की प्राचीन दुनिया की सेहियाँ (हिस्ट्रिक्स) बड़ी, नाटी और छोटी टाँगों वाली कृंतक होती हैं जिनकी एक छोटी अपरिग्राही पुच्छ होते है। &lt;br /&gt;
*शरीर और पुच्छ पृष्ठ ओर मोटे बालों के अतिरिक्त, सुरक्षा के लिए लम्बे, तेज़, उत्थानशील [[काला रंग|काले]] और [[सफ़ेद रंग|सफ़ेद]] कंटकों या शूलों से आच्छादित होते हैं। &lt;br /&gt;
*जैसा कि सामान्यतया विश्वास किया जाता है, सेहियाँ अपने कंटकों को फेंककर आक्रमण नहीं करती हैं। &lt;br /&gt;
*भारतीय शिखरैधारी सेही, '''हिस्ट्रिक्स इन्डिका''' वनों, चट्टानी पहाड़ियों और तंग घाटियों में रहती हैं। &lt;br /&gt;
*सेही दिन का अधिकांश समय अपने बिल में व्यतीत करती है, परंतु रात्री में फ़सलों, [[शाक-सब्ज़ी|शाक-सब्ज़ियों]] और पौधों की जड़ों को खाने के लिए बाहर निकलती है। &lt;br /&gt;
*सेही सूअर की भाँती घुरघुर ध्वनियाँ निकालती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार= |प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{पशु पक्षी}}&lt;br /&gt;
[[Category:स्तनधारी जीव]][[Category:प्राणि विज्ञान]][[Category:प्राणि विज्ञान कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:वन्य प्राणी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%86&amp;diff=276745</id>
		<title>सुआ</title>
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		<updated>2012-05-29T05:03:44Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* संबंधित लेख */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[चित्र:Parrot.jpg|thumb|तोता]]&lt;br /&gt;
पारम्परिक भारतीय [[संस्कृत]] - [[हिन्दी]] साहित्य में प्रेमी प्रेमिका के बीच संदेश लाने ले जाने वाले संदेश्वाहक का कार्य '[[शुक]]' करता रहा है। मानवों की बोलियों की हूबहू नक़ल उतारने के गुण होने के कारण और सदियों से घरों में पाले जाने के साथ ही कन्याओं का विशेष प्रिय होने के कारण शुक (सुआ) नारियों का प्रिय रहा है। है। मनुष्य की बोली की नक़ल उतारने में सिद्धहस्त इस पक्षी को साक्षी मानकर उसे अपने दिल का हाल बताने और संदेश भेज कर वियोगिनी यह संतोष करती है कि उसका संदेश उसके प्रेमी तक पहुँच गया है। कालांतर में सुआ के माध्यम से नारियों के मन के भाव और संदेश लोकगीतों में गाये जाने लगे &lt;br /&gt;
{{main|तोता}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=आधार1|प्रारम्भिक= |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://aarambha.blogspot.com/2010/11/blog-post_30.html सुआ गीत]&lt;br /&gt;
*[http://www.kavitakosh.org/kk/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%86-%E0%A4%96%E0%A4%82%E0%A4%A1_/_%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%95_%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%A6_%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%B8%E0%A5%80  सुआ-खंड / मलिक मोहम्मद जायसी]&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{पशु पक्षी}}&lt;br /&gt;
[[Category:प्राणि विज्ञान]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्राणि विज्ञान कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:पक्षी]]&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=276744</id>
		<title>सिंह</title>
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		<updated>2012-05-29T05:03:38Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* संबंधित लेख */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा जीव जन्तु&lt;br /&gt;
|चित्र=lion.jpg&lt;br /&gt;
|जगत=जंतु (Animalia)&lt;br /&gt;
|संघ=कॉर्डेटा (Chordata)&lt;br /&gt;
|वर्ग=स्तनपायी (Mammalia)&lt;br /&gt;
|उप-वर्ग=&lt;br /&gt;
|गण=Carnivora&lt;br /&gt;
|उपगण=&lt;br /&gt;
|अधिकुल=&lt;br /&gt;
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|प्रजाति=Panthera&lt;br /&gt;
|द्विपद नाम=Panthera leo&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख= &lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
सिंह (लिओ या पैंथरा लिओ), फैलिडी कुल का बड़ा और शक्तिशाली विड़ाल, [[बाघ]] के बाद दूसरा बड़ा विड़ाल है। कहानियों में '''जंगल का राजा''' कहलाने वाला यह जानवर प्राचीन काल से ही सबसे अधिक जाना-पहचाना जंगली पशु रहा है, अब यह मुख्यतः अफ़्रीका में सहारा के दक्षिणी क्षेत्र में पाया जाता है। एशियाई नस्ल के कुछ सौ सिंह [[भारत]] के [[गुजरात]] राज्य के [[गिर राष्ट्रीय उद्यान]] में कड़े संरक्षण में रह रहे हैं। सिंह के पसंदीदा पर्यावासों में घास के खुले मैदान हैं। क़ैद में सिंह का अन्य विड़ालों के साथ प्रजनन करवाया जाता है। सिंह और मादा बाघ के वर्णसंकर को लाइगर कहते हैं, जबकि बाघ और मादा सिंह से टाइअगॉन और [[तेंदुआ|तेंदुए]] और मादा सिंह से लिओपोन पैदा होते हैं। अमेरिकी, मैक्सिकी या पहाड़ी सिंह फ़ेलिसी जाति के नई दुनिया के सदस्य हैं।&lt;br /&gt;
==रूप और आकृति==&lt;br /&gt;
सिंह लंबे शरीर, छोटे पैर, बड़े सिर व मज़बूत [[माँसपेशियाँ|माँसपेशियों]] वाला विडाल है। इसमें नर व मादा के आकार-प्रकार में भिन्नता पाई जाती है। &lt;br /&gt;
;&amp;lt;u&amp;gt;नर&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
*एक पूर्ण वयस्क नर लगभग 1.8 मीटर से 2.1 मीटर लंबा होता है, जिसमें इसकी 1 मीटर लंबी पूँछ शामिल नहीं है। कंधे तक इसकी ऊँचाई लगभग 1.2 मीटर और वज़न 170 किलोग्राम से 230 किलोग्राम के बीच होता है। &lt;br /&gt;
*सिंह की खाल का रंग हल्का [[पीला रंग|पीला]], [[नारंगी रंग|नारंगी]]-[[भूरा रंग|भूरा]] या [[चाँदी]] जैसे स्लेटी से लेकर गाढ़े भूरे रंग का होता है और इसकी पूँछ के सिर पर खाल की तुलना में गहरे रंग के बालों का गुच्छा होता है।&lt;br /&gt;
*नर की विशेषता उसके अयाल होते हैं, जो अलग-अलग सिंहों में भिन्न-भिन्न प्रकार के होते हैं। कुछ में अयाल बिल्कुल नहीं होते, कुछ में चेहरे पर झालर की तरह होते हैं और कुछ में ये लंबे और लहराते हुए होते हैं, जो सिर के पीछे से शुरू होते हुए गर्दन, कंधे को ढकते हुए गले और छाती से झालर बनाते हुए पेट से जुड़े होते हैं। कुछ में अयाल और झालर अत्यंत गहरे रंग, लगभग काले रंग के होते हैं। जो सिंह को राजसी अंदाज़ प्रदान करते हैं।&lt;br /&gt;
;&amp;lt;u&amp;gt;मादा&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{tocright}}&lt;br /&gt;
*मादा, यानी सिंहनी छोटे क़द की होती है, जिसकी लंबाई 1.5 मीटर कंधे तक ऊँचाई 0.9 मीटर से 1 मीटर तक और वज़न 120 से 180 किलोग्राम होता है। &lt;br /&gt;
*सिंहनी अधिकतर भूरी-पीली या रेतीले रंग की होती है। &lt;br /&gt;
[[चित्र:Lion-Gir-Forest-National-Park-2.jpg|thumb|250px|left|सिंहनी, [[गिर वन राष्ट्रीय उद्यान]]]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==निवास==&lt;br /&gt;
सिंह बड़े विडालों में एकमात्र ऐसा जानवर है, जो समूह या झुंड में रहता है। एक समूह अथवा झुंड में कई पीढ़ियों की एक-दूसरे से संबंधित सिंहनियाँ होती हैं, जिनके साथ शावक और एक या दो वयस्क नर होते हैं, जो अपनी गृहक्षेत्र की सीमा की रक्षा करते हैं और मादा के साथ सहवास करते हैं। नर सिंह परिवार में बाहर से आते हैं, जो परिवार को अन्य बाहरी नरों से बचाने की अपनी क्षमता के अनुसार, उस परिवार में कुछ महीनों से कई साल तक रहते हैं। एक परिवार में कम से कम 4 से लेकर अधिकतम 37 सदस्य तक हो सकते हैं, लेकिन औसतन इसमें 15 सदस्य होते हैं। प्रत्येक परिवार की अपनी निर्धारित क्षेत्र-सीमा होती है; जहाँ शिकार बहुतायत में उपलब्ध हो, वहाँ क्षेत्र-सीमा 20 वर्ग किलोमीटर तक सीमित हो सकती है, लेकिन शिकार की कमी वाले क्षेत्रों में यह 400 वर्ग किलोमीटर तक होती है। नर शावकों को तीन वर्ष का होने पर परिवार से निष्कासित कर दिया जाता है और यह तब तक (पाँच वर्ष की आयु तक) ख़ानाबदोश की तरह घूमता रहता है, जब तक वह नये किसी झुंड पर क़ब्ज़ा करने की क्षमता न हासिल कर ले। लेकिन कई वयस्क नर जीवनपर्यंत ख़ानाबदोश रहते हैं। कुछ मादा शावक यौन परिपक्वता हासिल करने पर परिवार में ही रहती हैं, जबकि शेष को अन्य परिवारों में जाने के लिए बाध्य कर दिया जाता है। एक परिवार के सदस्य दिन में भिन्न-भिन्न समूहों में घूमते हैं, लेकिन शिकार का पीछा करने या शिकार खाने के लिए ये इकट्ठा हो सकते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==उपस्थिति की घोषणा==&lt;br /&gt;
सिंह अपनी गर्जना और गंध के निशान से अपने क्षेत्र की घोषणा करता है। सिंह की विख्यात गर्जना आमतौर पर रात के शिकार से पहते शाम को तथा फिर प्रभात होने पर उठने से पहले होती है। नर सिंह झाड़ियों, पेड़ों और मौदान पर पेशाब द्वारा तीखी गंध छोड़कर भी अपनी उपस्थिति की घोषणा करता है। झाड़ियों से शरीर रगड़ने और मलत्याग द्वारा भी गंध छोड़ी जाती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==शिकार==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Lion-Gir-Forest-National-Park.jpg|thumb|250px|सिंहनी, [[गिर वन राष्ट्रीय उद्यान]]]]&lt;br /&gt;
सिंह छोटे [[बारहसिंगा]] और बबून से लेकर भैंस और [[दरियाई घोड़ा|दरियाई घोड़े]] जैसे बड़े जंतुओं तक, कई तरह के जानवरों का शिकार करता है, लेकिन वह मध्यम से बड़े आकार के खुरवाले जानवरों, जैसे विल्डरबीस्ट, ज़ेब्रा, इंपाला और अन्य मृगों का शिकार करना पसंद करता है। सिंह किसी भी प्रकार के प्राप्त मांस को खा लेता है, चाहे वह सड़ा हो या ताज़ा, जिसे वह बल प्रयोग कर या डराकर लकड़बग्घे से हासिल कर लेता है। झुंड के लिए अधिकांश शिकार सिंहनी करती है। शिकार करते समय सिंह हवा की दिशा का ध्यान नहीं रखता, जो इसके शिकार तक इसकी गंध पहुँचा देती है। सिंह थोड़ा सा भागकर थक जाता है, इसीलिए शिकार में इसे अधिकतर असफलता मिलती है। इसीलिए सिंहनी या सिंह, हर उपलब्ध आवरण का इस्तेमाल करते हुए धैर्यपूर्वक शिकार का पीछा करते हैं और फिर अचानक छोटी किंतु तेज़ दौड़ से शिकार पर झपट पड़ते हैं। शिकार पर कूदने के बाद सिंहनी उसकी गर्दन पर झपटकर उसका दम घुटने तक दांत गड़ाए रहती है। इतने में परिवार के अन्य सदस्य शिकार खाने के लिए घेरा बना लेते हैं। शिकार के मांस के लिए होने वाली झड़पों में नर को सर्वाधिक और शावकों को कम या कुछ भी नहीं मिलता। सिंहनियाँ कई बार समूह में शिकार करती हैं। समूह के सदस्य विपरीत दिशाओं से शिकार पशुओं के झुंड को घेरकर भगदड़ में शिकार का प्रयास करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सिंह और सिंहनी पेट भर शिकार का मांस खा लेते हैं और फिर उसके बाद इसके समीप ही कई दिनों तक आराम करते हैं। एक बार में 34 किलोग्राम से अधिक मांस खाने के बाद एक वयस्क नर दुबारा शिकार की खोज में जाने से पहले एक सप्ताह तक विश्राम कर सकता है। यदि क्षेत्र में शिकार बहुतायक में है, तो नर और मादा, दोनों एक दिन में दो या तीन घंटे ही शिकार की खोज में निकलते हैं, जबकि क़रीब 20 घंटे विश्राम करने, सोने और बैठने में गुज़ार देते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पारिवारिक इकाई==&lt;br /&gt;
नर और मादा, दोनों बहुगामी होते हैं और वर्ष भर प्रजनन कर सकते हैं, लेकिन मादा आमतौर पर परिवार के एक या दो नरों से ही मैथुन करती है। क़ैद में सिंह अधिकत्र हर वर्ष प्रजनन करते हैं, लेकिन जंगल में ये दो वर्षों में एक से अधिक बार प्रजनन नहीं करते। गर्भावधि लगभग 108 दिनों की होती है और एक बार में एक से छह शावक जन्म ले सकते हैं। हालांकि औसतन दो से चार शावक ही जन्म लेते हैं। नवजात शिशु असहाय और बंद आंखों वाला होता है और इसकी मोटी [[त्वचा]] पर गहरे निशान होते हैं, जो उम्र के साथ-साथ मिट जाते हैं। तीन महीने की उम्र से शावक अपनी माँ का अनुसरण करने योग्य हो जाता हैं और छह से सात महीने का होने पर माँ का [[दूध]] पीना छोड़ देता है। 11 महीने का होने तक वह शिकार में भाग लेने लगता है। लेकिन संभवतः दो साल का होने तक वह अपने बूते जीवनयापन नहीं कर सकता है। उसमें यौन परिपक्वता तीन से चार वर्ष के बीच आती है। शावकों में मृत्युदर अधिक होती है और वयस्क आठ से दस वर्ष के अधिक नहीं जीते, जिसका मुख्य कारण है इंसानों और अन्य सिंहों द्वारा इन पर हमला तथा इनके शिकार द्वारा प्रतिरक्षा में चुभाए गए सींग और पैरों की मार, लेकिन बंदी अवस्था में सिंह 25 वर्ष या इससे भी अधिक जीवित रह सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==विलुप्त==&lt;br /&gt;
अभिनूतन युग, (प्लाइस्टोसीन 16 लाख से 10 हज़ार वर्ष पूर्व) के दौरान सिंहों का भौगोलिक विस्तार व्यापक था। संपूर्ण उत्तरी [[अमेरिका]], अफ़्रीका, बाल्कन के अधिकांश भागों, अनातोलिया और मध्य-पूर्व से लेकर [[भारत]] तक इनका आवास था। लगभग 10 हज़ार वर्ष पूर्व वे उत्तरी अमेरिका से विलुप्त हो गए, लगभग 2 हज़ार वर्ष पूर्व बाल्कन से और [[ईसाई धर्म|ईसाईयों]] के धर्मयुद्ध के दौरान वे फ़िलिस्तीन से भी विलुप्त हो गए। 20वीं [[सदी]] के अंत मे इनकी संख्या घटकर 10 हज़ार ही रह गई। राष्ट्रीय उद्यानों के बाहर स्थित इनके पर्यावास के क्षेत्र [[कृषि]] में काम आने लगे। तंज़ानिया के सेरेंगेती और अन्य राष्ट्रीय उद्यानों में पर्यटको के आकर्षण का केंद्र होने के कारण इनका संरक्षण सुरक्षित प्रतीत होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
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		<title>सर्प</title>
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		<updated>2012-05-29T05:03:31Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* संबंधित लेख */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[चित्र:Snake.jpg|thumb|250px|सर्प]]&lt;br /&gt;
'''सांप''' या '''सर्प''', पृष्ठवंशी [[सरीसृप]] वर्ग का प्राणी है। यह जल तथा थल दोनों जगह पाया जाता है। इसका शरीर लम्बी रस्सी के समान होता है जो पूरा का पूरा स्केल्स से ढँका रहता है। साँप के पैर नहीं होते हैं। यह निचले भाग में उपस्थित घड़ारियों की सहायता से चलता फिरता है। इसकी आँखों में पलके नहीं होती, ये हमेशा खुली रहती हैं। साँप विषैले तथा विषहीन दोनों प्रकार के होते हैं। इसके ऊपरी और निचले जबड़े की हड्डियाँ इस प्रकार की सन्धि बनाती है जिसके कारण इसका मुँह बड़े आकार में खुलता है। इसके मुँह में विष की थैली होती है जिससे जुडे़ दाँत तेज़ तथा खोखले होते हैं अतः इसके काटते ही विष शरीर में प्रवेश कर जाता है। दुनिया में सांपों की कोई 2500-3000 प्रजातियाँ पाई जाती हैं। &amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url= http://www.reptileknowledge.com/articles/article9.php |title=रेप्टाइल नालेज&lt;br /&gt;
|accessmonthday=[[23 अप्रॅल]]|accessyear=[[2009]]|format=पीएचपी|publisher=रेप्टाइल नालेज.कॉम|language=अँग्रेजी}}&amp;lt;/ref&amp;gt; इसकी कुछ प्रजातियों का आकार 10 सेण्टीमीटर होता है जबकि [[अजगर]] नामक साँप 25 फिट तक लम्बा होता है। साँप [[मेढक]], [[छिपकली]], [[पक्षी]], [[चूहा|चूहे]] तथा दूसरे साँपों को खाता है। यह कभी-कभी बड़े जन्तुओं को भी निगल जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सरीसृप वर्ग के अन्य सभी सदस्यों की तरह ही सर्प [[शीतरक्त का प्राणी]] है अर्थात् यह अपने शरीर का [[तापमान]] स्वंय नियंत्रित नहीं कर सकता है। इसके शरीर का तापमान वातावरण के ताप के अनुसार घटता या बढ़ता रहता है। यह अपने शरीर के तापमान को बढ़ाने के लिए भोजन पर निर्भर नहीं है इसलिए अत्यन्त कम भोजन मिलने पर भी यह जीवीत रहता है। कुछ साँपों को महीनों बाद-बाद भोजन मिलता है तथा कुछ सर्प वर्ष में मात्र एक बार या दो बार ढेड़ सारा खाना खाकर जीवीत रहते हैं। खाते समय साँप भोजन को चबाकर नहीं खाता है बल्कि पूरा का पूरा निकल जाता है। अधिकांश सर्पों के जबड़े इनके सिर से भी बड़े शिकार को निगल सकने के लिए अनुकुलित होते हैं। [[अफ्रीका]] का [[अजगर]] तो छोटी [[गाय]] आदि को भी निगल जाता है। विश्व का सबसे छोटा साँप थ्रेड स्नेक होता है । जो कैरेबियन सागर के सेट लुसिया माटिनिक तथा वारवडोस आदि द्वीपों में पाया जाता है वह केवल 10-12 सेंटीमीटर लंबा होता है। विश्व का सबसे लंबा सांप रैटिकुलेटेड पेथोन (जालीदार अजगर ) है, जो प्राय: 10 मीटर से भी अधिक लंबा तथा 120 किलोग्राम वजन तक का पाया जाता है । यह दक्षिण -पूर्वी एशिया तथा फिलीपींस में मिलता है।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url= http://khulasaa.com/index.php?option=com_content&amp;amp;view=article&amp;amp;id=116&amp;amp;Itemid=48|title=साँपों का संसार |accessmonthday=[[23 अप्रॅल]]|accessyear=[[2009]]|format=पीएचपी|publisher=खुलासा.कॉम|language=}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
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{{लेख प्रगति &lt;br /&gt;
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==वीथिका==&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
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[[Category:प्राणि विज्ञान]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्राणि विज्ञान कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
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		<title>हाँगर</title>
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		<updated>2012-05-29T05:02:05Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* संबंधित लेख */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[चित्र:Shark-3.jpg|thumb|250px|शार्क&amp;lt;br /&amp;gt;Shark]]&lt;br /&gt;
शार्क सिलैकिआई उपवर्ग की उपास्थियुक्त [[मछली|मछलियाँ]] हैं, जो संसार के सभी समुद्रों में पाई जाती हैं। इनके कंकाल में अस्थि की अनुपस्थिति तथा सिर के पिछले भाग में प्रत्येक ओर पाँच से सात गिलछिद्र, इन्हें अस्थिल मछलियों से अलग करते हैं। कुछ शार्क अंडे देते हैं, परंतु अधिकांश सजीवप्रजक होते हैं। शार्क में आंतरनिषेचन होता है। शार्क की त्वचा कोमल नहीं होती है। इसे छूने पर बिलकुल सैंड पेपर पर हाथ लगाने का अहसास होता है। यह छोटे-छोटे दाँतनुमा आकृतियों से ढँकी रहती है। समुद्री जानवरों में सबसे ज़्यादा होशियार भी होती है।&lt;br /&gt;
==आकार==&lt;br /&gt;
{{tocright}}&lt;br /&gt;
प्ररूपी शार्क मछलियाँ क्रियाशील तथा मछलियों को खानेवाली होती हैं और सामान्यत: [[नीला रंग|नीले]] या [[हरा रंग|हरे रंग]] की होती हैं। शार्क का शरीर बहुत लम्बा होता है जो शल्कों से ढका रहता है। इन शल्कों को प्लेक्वायड कहते हैं। इनकी त्वचा चिकनी होती है। त्वचा के नीचे वसा (चर्बी) की मोटी परत होती है। इसके शरीर में हड्डी की जगह उपास्थि (कार्टिलेज) पाई जाती है। शरीर नौकाकार होता है। इसका निचला जबड़ा ऊपरी जबड़े से छोटा होता है। अतः इसका मुँह सामने न होकर नीचे की ओर होता है जिसमें तेज [[दाँत]] होते हैं। यह एक माँसाहारी प्राणी है। शार्क के शरीर में देखने के लिए एक जोड़ी आँखें, तैरने के लिए पाँच जोड़े पखने और श्वांस लेने के लिए पाँच जोड़े क्लोम होते हैं। ग्रेट व्हाइट शार्क 15 वर्ष की युवा अवस्था में पूर्ण विकसित होकर लगभग 20 फीट से अधिक हो जाती है। टाइगर शार्क युवा अवस्था में लगभग 16 फीट की हो जाती है। इन दोनों को ही आक्रामक और घातक प्रजातियों में रखा जाता है। &lt;br /&gt;
[[चित्र:Shark-1.jpg|thumb|250px|left|शार्क&amp;lt;br /&amp;gt;Shark]]&lt;br /&gt;
====तैरने का तरीका====&lt;br /&gt;
शार्क में अन्य मछलियों की तरह गिल्स स्लिट पाई जाती हैं, जिनकी संख्या 10 होती है। ये पाँच-पाँच दोनों तरफ मौज़ूद होती हैं। शार्क के तैरने का तरीका बिलकुल अलग होता है। सबसे पहले यह सिर घुमाती है, उसके बाद शरीर और आखिर में अपनी लंबी पूँछ। शार्क की पूँछ नीचे से छोटी और ऊपर से बड़ी होती है। शार्क का आकार ऐसा होने से इसे तैरने में सहायता मिलती है।&lt;br /&gt;
====बेहतरीन शिकारी====&lt;br /&gt;
शार्क समुद्र के अन्य प्राणियों में सबसे बेहतरीन शिकारी होती है। यह अपने खतरनाक दाँत और बड़े-बड़े जबड़ों की सहायता से शिकार करती है। अपने दाँतों और जबड़ों से यह दूसरी मछलियों, कछुओं यहाँ तक की लकड़ी की नावों तक को काट देती है। टाइगर शार्क और सफ़ेद शार्क कभी-कभी मनुष्यों पर भी हमला कर देती हैं, लेकिन ज़्यादातर शार्क मनुष्यों से डरती हैं और उन्हें देख कर दूर चली जाती हैं। शार्क की नाक बहुत तेज होती है। वह कई सौ मीटर दूर पड़े किसी घायल जानवर या अन्य कोई दूसरे खाने की चीज़ का सूँघ कर पता लगा लेती है। वैसे तो सभी एनिमल थोड़ी-बहुत मात्रा में बिजली पैदा करते हैं, लेकिन मात्रा कम होने के कारण यह महसूस नहीं होती है। शार्क ही ऐसी मछली है, जिसमें बिजली महसूस की जा सकती है। इसके सिर पर मौज़ूद दो छेद एंटीने का काम करते हैं, जिससे इसे पता पड़ता है कि शिकार कहाँ छिपा हुआ है।&lt;br /&gt;
==शार्क के प्रकार==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Shark.jpg|thumb|250px|शार्क&amp;lt;br /&amp;gt;Shark]]&lt;br /&gt;
शार्क बहुत प्रकार की होती हैं। कुछ शार्क को उनके आकार के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है जैसे- कुकीकटर शार्क, हेमरहेड शार्क, प्रिकली डॉम फिश शार्क, वूबबिगांग शार्क और ग्रेट व्हाइट शार्क।&lt;br /&gt;
;ह्वेल शार्क&lt;br /&gt;
ह्वेल शार्क सबसे बड़ा एवं अघातक शार्क है। इसका आकार 50 फुट से भी अधिक लंबा होता है। यह मनुष्यों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है, क्योंकि इसका प्रमुख भोजन समुद्री जीव तथा पौधे होते हैं। यह सबसे बड़ी ज्ञात [[मछली]] है। ह्वेल, जो मछली के आकार का होता है, वास्तव में मछली नहीं है। यह स्तनपायी वर्ग का एक जंतु है।&lt;br /&gt;
;बास्किंग शार्क&lt;br /&gt;
बास्किंग शार्क दूसरा अघातक शार्क है। यह आर्कटिक महासागर में पाया जाता है। &lt;br /&gt;
;निस्तुषी शार्क&lt;br /&gt;
निस्तुषी शार्क लगभग 15 फुट लंबा होता है। इसकी पूँछ विशेष रूप से लंबी होती है। यह भी अघातक शार्क है तथा समुद्री जल में यह हेरिंग तथा मैक्रेल मछलियों के समूहों का पीछा करते हुए पाया जाता है।&lt;br /&gt;
;सफ़ेद शार्क&lt;br /&gt;
बड़े शार्कों में एक, सक्रिय एवं बहुभोजी शार्क, सफ़ेद शार्क है। इसकी लंबाई 40 फुट तक हो सकती हैं, परंतु बहुधा इतना बड़ा सफ़ेद शार्क नहीं पाया जाता। साधारणत: पाए जाने वाले सफ़ेद शार्कों की लंबाई 20 से 30 फुट होती है। इसका रंग राख के रंग का होता है। इसकी निचली सतह केवल सफ़ेद होती है। यह मानवभक्षी शार्क गरम समुद्रों में पाया जाता है तथा कभी-कभी ही ठंडे जल में प्रवेश करता है। अन्य मानवभक्षी शार्क हैं- अयोधन शिर शार्क, रेत शार्क आदि।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Shark-2.jpg|thumb|250px|left|शार्क&amp;lt;br /&amp;gt;Shark]]&lt;br /&gt;
;डॉग फिश&lt;br /&gt;
एक अन्य प्रकार का शार्क, जिसे डॉग फिश कहते हैं, आकार में तो छोटा होता है, परंतु यह मछुओं के कार्य में विशेष व्यवधान उपस्थित करता है। &lt;br /&gt;
;आरा शार्क&lt;br /&gt;
आरा शार्क इंडोपैसिफिक सागर में पाया जाता है। इसका प्रोथ आगे की ओर बढ़कर एक चौरस फलक बना देता है, जिसके दोनों ओर क्रम से दांत लगे रहते हैं।&lt;br /&gt;
==उपयोग==&lt;br /&gt;
शार्कों में केवल कुछ शार्क ही मानव खाद्य की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं। इनके सूखे पंखों से [[चीन]] में जिलेटिन बनाया जाता है। शार्क चर्म का उपयोग लकड़ी के बने सामानों को चिकना करने तथा जूता बनाने में भी किया जाता है। शार्कों का एक विशेष महत्व उनके यकृत में पाए जाने वाले तेल के कारण है, जिसमें विटामिन ए की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। इसका व्यापारिक नाम 'शार्क लिवर ऑयल' है। शार्क से सरेस तथा उर्वरक भी तैयार किया जाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
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{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
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[[Category:प्राणि विज्ञान]]&lt;br /&gt;
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		<title>लंगूर</title>
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		<updated>2012-05-29T05:01:58Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* संबंधित लेख */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[चित्र:Langur.jpg|thumb|लंगूर]]&lt;br /&gt;
लंगूर सर्कोपिथीकाइडिया कुल के प्रेस्बाइटिस, पायगाथ्रिक्स, राइनोपिथैकस और सिमिया वंश के कई पूर्वदेशीय वानरों में से एक। इनसे संबंधित अफ्रीकी गुरेजा की तरह लंगूर का बड़े आकार का आमाशय होता है। जो इसके भोजन, पत्तियों, फलों और अन्य वनस्पतियों आदि को पचाने में अनुकूल सिद्ध होता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रेस्बाइटिस वंश के लंगूर अथवा पत्तियां खाने वाले लंगूर (जिसे कभी पायगाथ्रिक्स जाति में भी रखा जाता है) की लगभग 14 प्रजातियां हैं, जिसमें [[भारत]] का पूज्य वानर [[हनुमान]] लंगूर (पी. एंटेलस) भी शामिल है। इस वंश के सदस्य समूह में रहने वाले, दिनचर और मूलतः वृक्षवासी होते हैं। इन वानरों की पूंछ लंबी, शरीर सुतवां और हाथ-पैर लंबे व पतले होते हैं। अलग-अलग प्रजातियों के अनुसार इन लंगूरों का सिर और शरीर 40 से 80 सेमी लंबा और पूंछ लगभग 50 से 110 सेमी लंबी होती है। इन बंदरों के लंबे रोय होते हैं और इनकी कई प्रजातियों में तो सिर पर लंबे बालों की टोपी या कलगीनुमा संरचना होती है। वयस्कों के चेहरे का रंग सामान्यतः काला होता है। [[रंग]] अलग-अलग प्रजातियों पर भी निर्भर करता है। लेकिन आमतौर पर यह स्लेटी,भूरा अथवा काला होता है। लगभग 168 दिनों की गर्भावधि के बाद पैदा हुए एकल शिशु का रंग वयस्क के रंग से भिन्न होता है और शायद इसीलिए उसकी मां उसकी रक्षा के लिए प्रेरित होती है। &lt;br /&gt;
[[चित्र:Langur-Manas-National-Park.jpg|thumb|250px|left|लंगूर, [[मानस अभयारण्य]]]]&lt;br /&gt;
इस वंश का सामान्य बंदर हनुमान लंगूर जन्म के समय लगभग काला और वयस्क होते-होते स्लेटी, धूसर या भूरा हो जाता है। भारत में पवित्र माना जाने वाला यह लंगूर फसलों और व्यापारियों के गोदामों पर धावा बोलते हुए गांव और मंदिरों में स्वतंत्रता से घूमता रहता है। हनुमान लंगूर लगभग 20 से 30 के झुण्ड में रहते हैं। इस जाति में नर का प्रमुख स्थान है। लेकिन मादा का कोई निश्चित स्थान नहीं होता है। मां अपने बच्चे की सुरक्षा का बहुत ध्यान रखती है। लेकिन वह अन्य मादाआं को नवजात शिशु की देखभाल में सहायता की अनुमति दे देती है। डाक लंगूर (पायगाथ्रिक्स नीमियस) दक्षिण पूर्व एशिया के जंगलों में रहने वाला बड़ा बंदर है। इसके शरीर पर छोटे और धूसर रंग के रोएं होते हैं। जिन पर लाल और सफेद निशान बने होते हैं। चपटी-छोटी और मोटी नाक वाले लंगूर (पायगाथ्रिक्स राक्सलनी और एव्यूंक्यूलस) [[चीन]] व उत्तरी वियतनाम के जंगलों में पाये जाते हैं। इनकी नाक ऊपर की ओर मुड़ी होती है और शरीर के लंबे रोएं धूसर काले या भूरे व ऊपर से पीलापन लिए होते हैं। इंडोनेशिया के नम जंगलों में पाए जाने वाले मैकाक जैसे सुअर-पूंछ लंगूर (नैसैलिस कानकलर) की नाक चपटी और रंग भूरा सा होता है। प्रेस्बाइटिस एंटैलस प्रजाति के अतिरिक्स अन्य सभी वर्णित प्रजातियां दुर्लभ और विलुप्तप्राय प्राणियों के रूप में वर्गीकृत हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति&lt;br /&gt;
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{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
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[[Category:वन्य प्राणी]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
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		<title>मैना</title>
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		<updated>2012-05-29T05:01:43Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* संबंधित लेख */&lt;/p&gt;
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[[चित्र:Starling.jpg|thumb|250px|मैना, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, [[भरतपुर]]&amp;lt;br /&amp;gt;Starling, Keoladeo National Park, Bharatpur]]&lt;br /&gt;
मैना शाखाशयी गण के स्टनींडी कुल की पक्षी है, जो कत्थर्स, भूरी, सिलेटी, या चितली होती है। यह पहाड़ी मैनाओं से भिन्न पक्षी है, जो जगलों की अपेक्षा बस्ती के बागों और जलाशयों के किनारे रहना अधिक पसंद करता है। यह सर्वभक्षी पक्षी है, जो क़द में फाखता के बराबर होती है। कुछ मैना पक्षी अपनी मीठी बोली के लिय प्रसिद्ध हैं। निम्नलिखित पाँच मैना बहुत प्रसिद्ध हैं:&lt;br /&gt;
#'''तैलियर, या स्टालिंग:-''' इसे अपनी मीठी बोली के कारण अंग्रेजी साहित्य में वही स्थान प्राप्त है, जो हमारे यहाँ पहाड़ी मैना की है।&lt;br /&gt;
#'''किलहँटा, या देशी मैना:-''' बस्ती बाग़ में हनेवाला यह बहुत प्रसिद्ध पक्षी है।&lt;br /&gt;
#'''चुहों, या हरिया मैना:-''' यह जलाशयों और [[गाय]] बैलों के आस-पास रहने वाली पक्षी है।&lt;br /&gt;
#'''अबलखा मैना:-''' काली और सफ़ेद पोशाक वाली पक्षी है।&lt;br /&gt;
#'''पवई:-''' यह बहुत मीठी बोली बोलने वाली पक्षी है।&lt;br /&gt;
==पहाड़ी मैना==&lt;br /&gt;
*पहाड़ी मैना या सारिका शाखाशायी गण के ग्रेकुलिडी कुल का प्रसिद्ध पक्षी है, जो अपनी मीठी बोली के कारण शैकीनों द्वारा पिंजड़ों में पाला जाता है। [[अंग्रेजी]] [[साहित्य]] में स्टालिंग को जो स्थान प्राप्त है, वही इस मैंना को हमारे साहित्य में मिला हैं।&lt;br /&gt;
*यह गिरोह में रहनेवाला पक्षी है, जो हमारा देश छोड़कर कहीं बाहर नहीं जाता। इसकी कई जातियाँ [[भारत]] में पाई जाती हैं, जिनमें थोड़ा ही भेद रहता है।&lt;br /&gt;
*मैना का सारा शरीर चमकीला काला रहता है, जिसमें बैंगनी और हरी झलक रहती है। डैने पर एक सफेद चिता रहता है और आँखों के पीछे से गुद्दी तक फीते की तरह पीली खाल बढती रहती है।&lt;br /&gt;
*इसका मुख्या भोजन तो [[भारत के फल|फल]] [[भारत के पुष्प|फूल]] और कीड़े मकोड़े हैं, लेकिन यह फूलों का रस भी खूब पीती है। मादा [[फरवरी]] से मई के बीच में दो-तीन नीली छौंह हरे रंग के अंडे देती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार= |प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
{{cite book | last = | first =  | title =हिन्दी विश्वकोश | edition =[[1967]] | publisher =नागरी प्रचारिणी सभा वाराणसी | location =भारतडिस्कवरी पुस्तकालय | language =हिन्दी | pages =417 | chapter =खण्ड 9 }}&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{पशु पक्षी}}&lt;br /&gt;
[[Category:प्राणि विज्ञान]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्राणि विज्ञान कोश]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
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		<title>मरल मछली</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* संबंधित लेख */&lt;/p&gt;
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&lt;div&gt;{{पुनरीक्षण}}&lt;br /&gt;
'''मरल''' ''केनाइडी'' कुल की ताज़े पानी की [[मछली]] की प्रजातियों में से एक है जो [[अफ़्रीक़ा]] और [[एशिया]] में पाई जाती हैं। &lt;br /&gt;
*लंबे और तक़रीबन बेलनाकार शरीर वाली मरल का मुंह बड़ा व लंबा, एक लंबा पृष्ठ और गुदा पंख होता है। &lt;br /&gt;
*मरल मछली क़रीब 10 से 90 सेमी लंबी होती हैं। &lt;br /&gt;
*मरल पानी से ऊपर हवा में भी गलफड़ों के पास स्थित संवहन गुहिका की मदद से सांस ले सकती हैं। &lt;br /&gt;
*मरल मछली पानी से बाहर लंबे समय तक जीवित रह सकती हैं। &lt;br /&gt;
*मरल मछली का इस्तेमाल भोजन के रूप में भी होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार= |प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{पशु पक्षी}}&lt;br /&gt;
[[Category:जलचर]]&lt;br /&gt;
[[Category:मछली]]&lt;br /&gt;
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		<title>मछली</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* संबंधित लेख */&lt;/p&gt;
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&lt;div&gt;{{लेख विस्तार}}&lt;br /&gt;
[[चित्र:Fish-Colag.jpg|thumb|250px|मछली के विभिन्न दृश्य]]&lt;br /&gt;
'''मछली''' शल्कों वाला एक [[जलचर]] है जो कि कम से कम एक जोडा़ पन्खो से युक्त होती है। मछलियाँ मीठे पानी के स्रोतों और समुद्र में बहुतायत में पाई जाती हैं। &lt;br /&gt;
*समुद्र तट के आसपास के इलाकों में मछलियाँ खाने और [[पोषण]] का एक प्रमुख स्रोत हैं। कई सभ्यताओं के [[साहित्य]], [[इतिहास]] एवं उनकी [[संस्कृति]] में मछलियों का विशेष स्थान है। &lt;br /&gt;
*इस दुनिया में मछलियों की कम से कम 28,500 प्रजातियाँ पाई जाती हैं जिन्हें अलग अलग स्थानों पर कोई 2,18,000 भिन्न नामों से जाना जाता है।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://www.fishbase.org/home.htm |title=मछलियों के विषय में जानकारी |accessmonthday=27 जनवरी |accessyear=2011 |last= |first= |authorlink= |format=एच.टी.एम.एल |publisher=फिशबेस |language=[[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]}}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
[[चित्र:Fish.jpg|मछली|thumb|250px|left]]&lt;br /&gt;
*इसकी परिभाषा कई मछलियों को अन्य जलीय प्रणी से अलग करती है, यथा ह्वेल एक मछली नहीं है। परिभाषा के अनुसार, मछली एक ऐसी जलीय प्राणी है जिसकी रीढ़ की हड्डी होती है (कशेरुकी जन्तु), तथा आजीवन गलफड़े (गिल्स) से युक्त होती हैं तथा अगर कोई डालीनुमा अंग होते हैं (लिंब) तो वे फिन के रूप में होते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.clovegarden.com/ingred/seafishv.html मछलियों की विभिन्न प्रजातियों के बारे में जानकारी]&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{पशु पक्षी}}&lt;br /&gt;
[[Category:जलचर]]&lt;br /&gt;
[[Category:मछली]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्राणि विज्ञान]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्राणि विज्ञान कोश]] &lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
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		<title>मगरमच्छ</title>
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		<updated>2012-05-29T04:57:13Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रीति चौधरी: /* संबंधित लेख */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{पुनरीक्षण}}&lt;br /&gt;
[[चित्र:Crocodile.jpg|thumb|250px|मगरमच्छ]]&lt;br /&gt;
'''मगरमच्छ''' बड़े, भारी शरीर वाले उभयचर जंतु हैं, जो दिखने में कुछ हद तक छिपकली जैसे लगते हैं और मांसभक्षी प्रकृति के होते हैं। यह सरीसृप गण ''क्रोकोडिलिया'' के सदस्य है। &lt;br /&gt;
==लक्षण==&lt;br /&gt;
शंक्वाकार दांतों से युक्त इनके जबड़े काफ़ी मज़बूत होते हैं और इनके छोटे पैरों के पंजे झिल्लीयुक्त होते हैं। पूंछ लंबी, भारी और चमड़ी मोटी व पट्टीदार होती है। &lt;br /&gt;
==प्रजातियाँ==&lt;br /&gt;
दुनिया भर में इसकी लगभग 20 से अधिक प्रजातियों की खोज की गई है। मगरमच्छ पुराऐतिहासिक काल के डायनासोरनुमा प्राणियों की अंतिम जीवित कड़ी हैं। साथ ही जीवाश्मों ये पक्षियों के सबसे नज़दीकी जीवित रिश्तेदार हैं। कई प्रकार के मगरमच्छों के जीवाश्मों की खोज की गई है; ''क्रोकोडिलिया'' गण के चार उपगणों में से तीन लुप्त हो चुके हैं। व्यापक जीवाश्म प्रमाणों के आधार पर मगरमच्छों और अन्य रीढ़धारी प्राणी समूहों के बीच सुपरिभाषित संबंध क़ायम करना संभव हो पाया है। &lt;br /&gt;
==अवास==&lt;br /&gt;
मगरमच्छ भारत में नदियों, दलदलों और [[झील|झीलों]] में पाए जाते हैं। नदियों के मुहानों के क्षेत्र में पाया जाने वाला मगरमच्छ (''क्रोकोडिलस पोरोसस'') जिसकी लंबाई लगभग 9 मीटर होती है, सामान्यतः कीचड़युक्त डेल्टा क्षेत्र में पाई जाने वाली [[मछली|मछलियों]], पक्षियों और केकड़ों को खाता है। लंबी थूथन वाला घड़ियाल (''गैविएलिस गैंजेटिकस''), जो मगरमच्छ से मिलती-जुलती प्रजाति है, [[गंगा]] और [[ब्रह्मपुत्र]] समेत बड़ी नदियों और उनकी सहयोगी धाराओं में पाया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार= |प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{जीव जन्तु}}&lt;br /&gt;
[[Category:प्राणि विज्ञान]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्राणि विज्ञान कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:उभयचर]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>प्रीति चौधरी</name></author>
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