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	<title>Bharatkosh - सदस्य द्वारा योगदान [hi]</title>
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		<title>रामधारी सिंह 'दिनकर'</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{| style=&amp;quot;background:transparent; float:right; margin:5px;&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
{{सूचना बक्सा साहित्यकार&lt;br /&gt;
|चित्र=Dinkar.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=रामधारी सिंह दिनकर&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=दिनकर&lt;br /&gt;
|जन्म=[[23 सितंबर]] सन् [[1908]] ई.&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=सिमरिया, ज़िला मुंगेर ([[बिहार]]) &lt;br /&gt;
|अविभावक=रवि सिंह, मनरूप देवी&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=एक पुत्र&lt;br /&gt;
|कर्म भूमि=[[पटना]]&lt;br /&gt;
|कर्म-क्षेत्र=कवि, लेखक&lt;br /&gt;
|मृत्यु=[[24 अप्रैल]] सन् [[1974]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[चेन्नई]], [[तमिलनाडु]], [[भारत]]&lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ=रश्मिरथी, [[उर्वशी- दिनकर|उर्वशी]] ([[ज्ञानपीठ पुरस्कार|ज्ञानपीठ]] से सम्मानित), हुंकार, कुरुक्षेत्र, संस्कृति के चार अध्याय, परशुराम की प्रतीक्षा, हाहाकार, चक्रव्यूह, आत्मजयी, वाजश्रवा के बहाने&lt;br /&gt;
|विषय=कविता, [[खंडकाव्य]], निबंध, समीक्षा&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिन्दी]]&lt;br /&gt;
|विद्यालय=राष्ट्रीय मिडिल स्कूल, मोकामाघाट हाई स्कूल, पटना विश्वविद्यालय&lt;br /&gt;
|शिक्षा=&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=[[साहित्य अकादमी पुरस्कार हिन्दी|साहित्य अकादमी पुरस्कार]] ([[1959]]), [[पद्म भूषण]], [[ज्ञानपीठ पुरस्कार|भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार]] ([[1972]])  &lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| style=&amp;quot;width:265px; float:right;&amp;quot;|&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;border:thin solid #a7d7f9; margin:5px&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{|  align=&amp;quot;center&amp;quot;&lt;br /&gt;
! रामधारी सिंह दिनकर की रचनाएँ&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;height: 250px; overflow:auto; overflow-x: hidden; width:99%&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{रामधारी सिंह दिनकर की रचनाएँ}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
'''राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर''' (जन्म- [[23 सितंबर]], [[1908]], सिमरिया; मृत्यु- [[24 अप्रैल]], [[1974]], [[चेन्नई]]) हिन्दी के प्रसिद्ध कवियों में से एक हैं।&lt;br /&gt;
==जीवन परिचय==&lt;br /&gt;
[[हिन्दी]] के सुविख्यात कवि रामधारी सिंह दिनकर का जन्म [[23 सितंबर]] [[1908]] ई. में सिमरिया, ज़िला मुंगेर ([[बिहार]]) में एक सामान्य किसान रवि सिंह तथा उनकी पत्नी मनरूप देवी के पुत्र के रूप में हुआ था।&amp;lt;ref name=&amp;quot;हिन्दी के चिराग&amp;quot;&amp;gt;{{cite web |url=http://hindikechirag.blogspot.com/2010/04/blog-post.html |title= राष्ट्रकवि रामधारी सिंह &amp;quot;दिनकर&amp;quot; |accessmonthday=[[11 सितंबर]] |accessyear=[[2010]] |authorlink= |format= एच टी एम एल |publisher=हिन्दी के चिराग |language=[[हिन्दी]] }}&amp;lt;/ref&amp;gt; रामधारी सिंह दिनकर एक ओजस्वी राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कवि के रूप में जाने जाते थे। उनकी कविताओं में छायावादी युग का प्रभाव होने के कारण श्रृंगार के भी प्रमाण मिलते हैं।&amp;lt;ref name=&amp;quot;महाशक्ति समूह&amp;quot;&amp;gt;{{cite web |url=http://mahashaktigroup.bharatuday.in/2008/09/blog-post_23.html |title= रामधारी सिंह &amp;quot;दिनकर&amp;quot; की जयन्ती पर विशेष |accessmonthday=[[11 सितंबर]] |accessyear=[[2010]] |authorlink= |format= एच टी एम एल |publisher=महाशक्ति समूह |language=[[हिन्दी]] }}&amp;lt;/ref&amp;gt; दिनकर के पिता एक साधारण किसान थे। दिनकर दो वर्ष के थे, जब उनके पिता का देहावसान हो गया। परिणामत: दिनकर और उनके भाई-बहनों का पालन-पोषण उनकी विधवा माता ने किया। दिनकर का बचपन और कैशोर्य देहात में बीता, जहाँ दूर तक फैले खेतों की हरियाली, बांसों के झुरमुट, आमों के बगीचे और कांस के विस्तार थे। प्रकृति की इस सुषमा का प्रभाव दिनकर के मन में बस गया, पर शायद इसीलिए वास्तविक जीवन की कठोरताओं का भी अधिक गहरा प्रभाव पड़ा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==शिक्षा==&lt;br /&gt;
[[संस्कृत]] के एक पंडित के पास अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्रारंभ करते हुए दिनकर जी ने गाँव के प्राथमिक विद्यालय से प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की एवं निकटवर्ती बोरो नामक ग्राम में राष्ट्रीय मिडिल स्कूल जो सरकारी शिक्षा व्यवस्था के विरोध में खोला गया था, में प्रवेश प्राप्त किया। यहीं से इनके मनोमस्तिष्क में राष्ट्रीयता की भावना का विकास होने लगा था। हाई स्कूल की शिक्षा इन्होंने मोकामाघाट हाई स्कूल से प्राप्त की। इसी बीच इनका विवाह भी हो चुका था तथा ये एक पुत्र के पिता भी बन चुके थे।&amp;lt;ref name= &amp;quot;हिन्दी के चिराग&amp;quot; /&amp;gt; [[1928]] में मैट्रिक के बाद दिनकर ने [[पटना]] विश्वविद्यालय से [[1932]] में इतिहास में बी. ए. ऑनर्स किया। &lt;br /&gt;
[[चित्र:Ramdhari-Singh-Dinkar.jpg|thumb|left|रामधारी सिंह दिनकर]]&lt;br /&gt;
[[पटना]] विश्वविद्यालय से बी. ए. ऑनर्स करने के बाद अगले ही [[वर्ष]] एक स्कूल में यह प्रधानाध्यापक नियुक्त हुए, पर [[1934]] में बिहार सरकार के अधीन इन्होंने सब-रजिस्ट्रार का पद स्वीकार कर लिया। लगभग नौ वर्षों तक वह इस पद पर रहे और उनका समूचा कार्यकाल बिहार के देहातों में बीता तथा जीवन का जो पीड़ित रूप उन्होंने बचपन से देखा था, उसका और तीखा रूप उनके मन को मथ गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पद==&lt;br /&gt;
[[1947]] में देश स्वाधीन हुआ और वह बिहार विश्वविद्यालय में [[हिन्दी]] के प्रध्यापक व विभागाध्यक्ष नियुक्त होकर मुज़फ़्फ़रपुर पहुँचे। [[1952]] में जब [[भारत]] की [[संसद|प्रथम संसद]] का निर्माण हुआ, तो उन्हें [[राज्यसभा]] का सदस्य चुना गया और वह [[दिल्ली]] आ गए। दिनकर 12 वर्ष तक संसद-सदस्य रहे, बाद में उन्हें सन् [[1964]] से [[1965]] ई. तक 'भागलपुर विश्वविद्यालय' का कुलपति नियुक्त किया गया। लेकिन अगले ही वर्ष [[भारत]] सरकार ने उन्हें 1965 से [[1971]] ई. तक अपना हिन्दी सलाहकार नियुक्त किया और वह फिर दिल्ली लौट आए। फिर तो ज्वार उमरा और रेणुका, हुंकार, रसवंती और द्वंदगीत रचे गए। रेणुका और हुंकार की कुछ रचनाऐं यहाँ-वहाँ प्रकाश में आईं और [[अंग्रेज़]] प्रशासकों को समझते देर न लगी कि वे एक ग़लत आदमी को अपने तंत्र का अंग बना बैठे हैं और दिनकर की फ़ाइल तैयार होने लगी, बात-बात पर क़ैफ़ियत तलब होती और चेतावनियाँ मिला करतीं। चार वर्ष में बाईस बार उनका तबादला किया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==विशिष्ट महत्त्व==&lt;br /&gt;
दिनकर जी की प्राय: 50 कृतियाँ प्रकाशित हुई हैं। हिन्दी काव्य छायावाद का प्रतिलोम है, यह कहना तो शायद उचित नहीं होगा पर इसमें सन्देह नहीं कि हिन्दी काव्य जगत पर छाये छायावादी कुहासे को काटने वाली शक्तियों में दिनकर की प्रवाहमयी, ओजस्विनी कविता के स्थान का विशिष्ट महत्त्व है। दिनकर छायावादोत्तर काल के कवि हैं, अत: छायावाद की उपलब्धियाँ उन्हें विरासत में मिलीं पर उनके काव्योत्कर्ष का  काल छायावाद की रंगभरी सन्ध्या का समय था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==द्विवेदी युगीन स्पष्टता==&lt;br /&gt;
कविता के भाव छायावाद के उत्तरकाल के निष्प्रभ शोभादीपों से सजे-सजाये कक्ष से ऊब चुके थे, बाहर की मुक्त वायु और प्राकृतिक प्रकाश और चाहतेताप का संस्पर्श थे। वे छायावाद के कल्पनाजन्य निर्विकार मानव के खोखलेपन से परिचित हो चुके थे, उस पार की दुनिया के अलभ्य सौन्दर्य का यथेष्ट स्वप्न दर्शन कर चुके थे, चमचमाते सैकत प्रदेश में संवेदना की मरीचिका के पीछे दौड़ते थक चुके थे, उस लाक्षणिक और अस्वाभिक भाषा शैली से उनका जी भर चुका था, जो उन्हें बार-बार अर्थ की गहराइयों की झलक सी दिखाकर छल चुकी थी। उन्हें अपेक्षा थी भाषा में द्विवेदी युगीन स्पष्टता की, पर उसकी शुष्कता की नहीं, व्यक्ति और परिवेश के वास्तविक संस्पर्श की, सहजता और शक्ति की। '[[हरिवंश राय बच्चन|बच्चन]]' की कविता में उन्हें व्यक्ति का संस्पर्श मिला, दिनकर के काव्य में उन्हें जीवन समाज और परिचित परिवेश का संस्पर्श मिला। दिनकर का समाज व्यक्तियों का समूह था, केवल एक राजनीतिक तथ्य नहीं था।&lt;br /&gt;
==द्विवेदी युग और छायावाद==&lt;br /&gt;
आरम्भ में दिनकर ने छायावादी रंग में कुछ कविताएँ लिखीं, पर जैसे-जैसे वे अपने स्वर से स्वयं परिचित होते गये, अपनी काव्यानुभूति पर ही अपनी कविता को आधारित करने का आत्म विश्वास उनमें बढ़ता गया, वैसे ही वैसे उनकी कविता छायावाद के प्रभाव से मुक्ति पाती गयी पर छायावाद से उन्हें जो कुछ विरासत में मिला था, जिसे वे मनोनुकूल पाकर अपना चुके थे, वह तो उनका हो ही गया। उनकी काव्यधारा जिन दो कुलों के बीच में प्रवाहित हुई, उनमें से एक छायावाद था। भूमि का ढलान दूसरे कुल की ओर था, पर धारा को आगे बढ़ाने में दोनों का अस्तित्व अपेक्षित और अनिवार्य था। दिनकर अपने को द्विवेदी युगीन और छायावादी काव्य पद्धतियों का वारिस मानते थे। उन्हीं के शब्दों में &amp;quot;[[सुमित्रानंदन पंत|पन्त]] के सपने हमारे हाथ में आकर उतने वायवीय नहीं रहे, जितने कि वे छायावादकाल में थे,&amp;quot; किन्तु द्विवेदी युगीन अभिव्यक्ति की शुभ्रता हम लोगों के पास आते-जाते कुछ रंगीन अवश्य हो गयी। अभिव्यक्ति की स्वच्छन्दता की नयी विरासत हमें आप से आप प्राप्त हो गयी।&lt;br /&gt;
==आत्म परीक्षण==&lt;br /&gt;
दिनकर ने अपने कृतित्व के विषय में एकाधिक स्थानों पर विचार किया है। सम्भवत: हिन्दी का कोई कवि अपने ही कवि कर्म के विषय में दिनकर से अधिक चिन्तन व आलोचना न करता होगा। वह दिनकर की आत्मरति का नहीं, अपने कवि कर्म के प्रति उनके दायित्व के बोध का प्रमाण है कि वे समय-समय पर इस प्रकार आत्म परीक्षण करते रहे। इसी कारण अधिकतर अपने बारे में जो कहते थे, वह सही होता था। उनकी कविता प्राय: छायावाद की अपेक्षा द्विवेदी युगीन स्पष्टता, प्रसाद गुण के प्रति आस्था और मोह, अतीत के प्रति आदर प्रदर्शन की प्रवृत्ति, अनेक बिन्दुओं पर दिनकर की कविता द्विवेदी युगीन काव्यधारा का आधुनिक ओजस्वी, प्रगतिशील संस्करण जान पड़ती है। उनका स्वर भले ही सर्वदा, सर्वथा 'हुंकार' न बन पाता हो, 'गुंजन' तो कभी भी नहीं बनता।&lt;br /&gt;
==सामाजिक चेतना के चारण==&lt;br /&gt;
दिनकर का नाम प्रगतिवादी कवियों में लिया जाता था, पर अब शायद साम्यवादी विचारक उन्हें उस विशिष्ट पंक्ति में स्थान देने के लिए तैयार न हों, क्योंकि आज का दिनकर &amp;quot;अरुण विश्व की काली जय हो! लाल सितारों वाली जय हो&amp;quot;? के लेखक से बहुत दूर जान पड़ता है। जो भी हो, साम्यवादी विचारक आज के दिनकर को किसी भी पंक्ति में क्यों न स्थान देना चाहे, इससे इंकार किया ही नहीं जा सकता कि जैसे बच्चन मूलत: एकांत व्यक्तिवादी कवि हैं, वैसे ही दिनकर मूलत: सामाजिक चेतना के चारण हैं।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Ramdhari-Singh-Dinkar-2.jpg|thumb|250px|रामधारी सिंह दिनकर]]&lt;br /&gt;
==कवि जीवन का आरम्भ==&lt;br /&gt;
उनके कवि जीवन का आरम्भ [[1935]] से हुआ, जब छायावाद के कुहासे को चीरती हुई 'रेणुका' प्रकाशित हुई और हिन्दी जगत एक बिल्कुल नई शैली, नई शक्ति, नई भाषा की गूंज से भर उठा। तीन वर्ष बाद जब 'हुंकार' प्रकाशित हुई, तो देश के युवा वर्ग ने कवि और उसकी ओजमयी कविताओं को कंठहार बना लिया। सभी के लिए वह अब राष्ट्रीयता, विद्रोह और क्रांति के कवि थे। 'कुरुक्षेत्र' द्वितीय महायुद्ध के समय की रचना है, किंतु उसकी मूल प्रेरणा युद्ध नहीं, देशभक्त युवा मानस के हिंसा-अहिंसा के द्वंद से उपजी थी।&lt;br /&gt;
==आत्म मंथन के युग की रचनाएँ==&lt;br /&gt;
दिनकर के प्रथम तीन काव्य-संग्रह प्रमुख हैं– 'रेणुका' (1935 ई.), 'हुंकार' ([[1938]] ई.) और 'रसवन्ती' ([[1939]] ई.) उनके आरम्भिक आत्म मंथन के युग की रचनाएँ हैं। इनमें दिनकर का कवि अपने व्यक्ति परक, सौन्दर्यान्वेषी मन और सामाजिक चेतना से उत्तम बुद्धि के परस्पर संघर्ष का तटस्थ द्रष्टा नहीं, दोनों के बीच से कोई राह निकालने की चेष्टा में संलग्न साधक के रूप में मिलता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'''रेणुका'''- में अतीत के गौरव के प्रति कवि का सहज आदर और आकर्षण परिलक्षित होता है। पर साथ ही वर्तमान परिवेश की नीरसता से त्रस्त मन की वेदना का परिचय भी मिलता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'''हुंकार'''- में कवि अतीत के गौरव-गान की अपेक्षा वर्तमान दैत्य के प्रति आक्रोश प्रदर्शन की ओर अधिक उन्मुख जान पड़ता है। &lt;br /&gt;
*'''रसवन्ती'''- में कवि की सौन्दर्यान्वेषी वृत्ति काव्यमयी हो जाती है पर यह अन्धेरे में ध्येय सौन्दर्य का अन्वेषण नहीं, उजाले में ज्ञेय सौन्दर्य का आराधन है। &lt;br /&gt;
*'''सामधेनी''' (1947 ई.)- में दिनकर की सामाजिक चेतना स्वदेश और परिचित परिवेश की परिधि से बढ़कर विश्व वेदना का अनुभव करती जान पड़ती है। कवि के स्वर का ओज नये वेग से नये शिखर तक पहुँच जाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
1955 में 'नीलकुसुम' दिनकर के काव्य में एक मोड़ बनकर आया। यहाँ वह काव्यात्मक प्रयोगशीलता के प्रति आस्थावान है। स्वयं प्रयोगशील कवियों को अजमाल पहनाने और राह पर फूल बिछाने की आकांक्षा उसे विह्वल कर देती है। नवीनतम काव्यधारा से सम्बन्ध स्थापित करने की कवि की इच्छा तो स्पष्ट हो जाती है, पर उसका कृतित्व साथ देता नहीं जान पड़ता है। अभी तक उनका काव्य आवेश का काव्य था, नीलकुसुम ने नियंत्रण और गहराइयों में पैठने की प्रवृत्ति की सूचना दी। छह वर्ष बाद [[उर्वशी- दिनकर|उर्वशी]] प्रकाशित हुई, हिन्दी साहित्य संसार में एक ओर उसकी कटु आलोचना और दूसरी ओर मुक्तकंठ से प्रशंसा हुई। धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हुई इस काव्य-नाटक को दिनकर की 'कवि-प्रतिभा का चमत्कार' माना गया। कवि ने इस वैदिक मिथक के माध्यम से [[देवता]] व मनुष्य, स्वर्ग व पृथ्वी, अप्सरा व लक्ष्मी अय्र काम अध्यात्म के संबंधों का अद्भुत विश्लेषण किया है।&lt;br /&gt;
==काव्य रचना==&lt;br /&gt;
इन मुक्तक काव्य संग्रहों के अतिरिक्त दिनकर ने अनेक प्रबन्ध काव्यों की रचना भी की है, जिनमें 'कुरुक्षेत्र' (1946 ई.), 'रश्मिरथी' (1952 ई.) तथा 'उर्वशी' (1961 ई.) प्रमुख हैं। 'कुरुक्षेत्र' में [[महाभारत]] के शान्ति पर्व के मूल कथानक का ढाँचा लेकर दिनकर ने युद्ध और शान्ति के विशद, गम्भीर और महत्त्वपूर्ण विषय पर अपने विचार [[भीष्म]] और [[युधिष्ठर]] के संलाप के रूप में प्रस्तुत किये हैं। दिनकर के काव्य में विचार तत्त्व इस तरह उभरकर सामने पहले कभी नहीं आया था। 'कुरुक्षेत्र' के बाद उनके नवीनतम काव्य 'उर्वशी' में फिर हमें विचार तत्त्व की प्रधानता मिलती है। साहसपूर्वक गांधीवादी अहिंसा की आलोचना करने वाले 'कुरुक्षेत्र' का हिन्दी जगत में यथेष्ट आदर हुआ। 'उर्वशी' जिसे कवि ने स्वयं 'कामाध्याय' की उपाधि प्रदान की है– ’दिनकर’ की कविता को एक नये शिखर पर पहुँचा दिया है। भले ही सर्वोच्च शिखर न हो, दिनकर के कृतित्त्व की गिरिश्रेणी का एक सर्वथा नवीन शिखर तो है ही। दिनकर ने अनेक पुस्तकों का सम्पादन भी किया है, जिनमें 'अनुग्रह अभिनन्दन ग्रन्थ' विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। &lt;br /&gt;
[[चित्र:Ramdhari-Singh-Dinkar-5.jpg|thumb|250px|रामधारी सिंह दिनकर]]&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
रे रोक युधिष्ठर को न यहाँ,&lt;br /&gt;
जाने दे उनको स्वर्ग धीर पर फिरा हमें गांडीव गदा, &lt;br /&gt;
लौटा दे अर्जुन भीम वीर -''' (हिमालय से)'''&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो,&lt;br /&gt;
उसको क्या जो दंतहीन विषहीन विनीत सरल हो -''' (कुरूक्षेत्र से)'''&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मैत्री की राह बताने को, सबको सुमार्ग पर लाने को,&lt;br /&gt;
दुर्योधन को समझाने को, भीषण विध्वंस बचाने को,&lt;br /&gt;
भगवान हस्तिनापुर आये, पांडव का संदेशा लाये। -''' (रश्मिरथी से)''' [[रश्मिरथी तृतीय सर्ग|.....और पढ़े]]&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==दिनकर की शैली==&lt;br /&gt;
दिनकर आधुनिक कवियों की प्रथम पंक्ति में बैठने के अधिकारी हैं, इस पर दो राय नहीं हो सकती। उनकी कविता में विचार तत्त्व की कमी नहीं है, यदि अभाव है तो विचार तत्त्व के प्राचुर्य के अनुरूप गहराई का। उनके व्यक्तित्व की छाप उनकी प्रत्येक पंक्ति पर है, पर कहीं-कहीं भावक को व्यक्तित्व की जगह वक्तृत्व ही मिल पाता है। दिनकर की शैली में प्रसादगुण यथेष्ट हैं, प्रवाह है, ओज है, अनुभूति की तीव्रता है, सच्ची संवेदना है। यदि कमी खटकती है तो तरलता की, घुलावट की। पर यह कमी कम ही खटकती है, क्योंकि दिनकर ने प्रगीत कम लिखे हैं। इनकी अधिकांश रचनाओं में काव्य की शैली रचना के विषय और 'मूड' के अनुरूप हैं। उनके चिन्तन में विस्तार अधिक और गहराई कम है, पर उनके विचार उनके अपने ही विचार हैं। उनकी काव्यनुभूति के अविच्छेद्य अंग हैं, यह स्पष्ट है। यह दिनकर की कविता का विशिष्ट गुण है कि जहाँ उसमें अभिव्यक्ति की तीव्रता है, वहीं उसके साथ ही चिन्तन-मनन की प्रवृत्ति भी स्पष्ट दिखती है। &lt;br /&gt;
==जीवन-दर्शन==&lt;br /&gt;
उनका जीवन-दर्शन उनका अपना जीवन-दर्शन है, उनकी अपनी अनुभूति से अनुप्राणित, उनके अपने विवेक से अनुमोदित परिणामत: निरन्तर परिवर्तनशील है। दिनकर प्रगतिवादी, जनवादी, मानववादी आदि रहे हैं और आज भी हैं, पर 'रसवन्ती' की भूमिका में यह कहने में उन्हें संकोच नहीं हुआ कि &amp;quot;प्रगति शब्द में जो नया अर्थ ठूँसा गया है, उसके फलस्वरूप हल और फावड़े कविता का सर्वोच्च विषय सिद्ध किये जा रहे हैं और वातावरण ऐसा बनता जा रहा है कि जीवन की गहराइयों में उतरने वाले कवि सिर उठाकर नहीं चल सकें।&amp;quot; गांधीवादी और अहिंसा के हामी होते हुए भी 'कुरुक्षेत्र' में वह कहते नहीं हिचके कि &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''कौन केवल आत्मबल से जूझकर, जीत सकता देह का संग्राम है, पाशविकता खड्ग जो लेती उठा, आत्मबल का एक वश चलता नहीं। योगियों की शक्ति से संसार में, हारता लेकिन नहीं समुदाय है।''' &lt;br /&gt;
==बाल-साहित्य==&lt;br /&gt;
जो कवि सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति सचेत हैं तथा जो अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित हैं, प्रतिबद्ध हैं, वे बाल-साहित्य लिखने के लिए भी अवकाश निकाल लेते हैं। विश्व-कवि [[रवीन्द्रनाथ ठाकुर]] जैसे अतल-स्पर्शी रहस्यवादी महाकवि ने कितना बाल-साहित्य लिखा है, यह सर्वविदित है। अतः दिनकर जी की लेखनी ने यदि बाल-साहित्य लिखा है तो वह उनके महत्त्व को बढ़ाता ही है।&lt;br /&gt;
बाल-काव्य विषयक उनकी दो पुस्तिकाएँ प्रकाशित हुई हैं —‘मिर्च का मजा’ और ‘सूरज का ब्याह’। ‘मिर्च का मजा’ में सात कविताएँ और ‘सूरज का ब्याह’ में नौ कविताएँ संकलित हैं। 'मिर्च का मजा' में एक मूर्ख क़ाबुलीवाले का वर्णन है, जो अपने जीवन में पहली बार मिर्च देखता है। मिर्च को वह कोई फल समझ जाता है-&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;सोचा, क्या अच्छे दाने हैं, खाने से बल होगा, &lt;br /&gt;
यह ज़रूर इस मौसम का कोई मीठा फल होगा।&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
'सूरज का ब्याह' में एक वृद्ध मछली का कथन पर्याप्त तर्क-संगत है।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Ramdhari-Singh-Dinkar-4.jpg|thumb|रामधारी सिंह दिनकर स्टाम्प]]&lt;br /&gt;
==सामाजिक चेतना==&lt;br /&gt;
दिनकर की प्रगतिशीलता साम्यवादी लीग पर चलने की प्रक्रिया का साहित्यिक नाम नहीं है, एक ऐसी सामाजिक चेतना का परिणाम है, जो मूलत: भारतीय है और राष्ट्रीय भावना से परिचालित है। उन्होंने राजनीतिक मान्यताओं को राजनीतिक मान्यताएँ होने के कारण अपने काव्य का विषय नहीं बनाया, न कभी राजनीतिक लक्ष्य सिद्धि को काव्य का उद्देश्य माना, पर उन्होंने नि:संकोच राजनीतिक विषयों को उठाया है और उनका प्रतिपादन किया है, क्योंकि वे काव्यानुभूति की व्यापकता स्वीकार करते हैं। राजनीतिक दायित्वों, मान्यताओं और नीतियों का बोध सहज ही उनकी काव्यानुभूति के भीतर समा जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ओजस्वी-तेजस्वी स्वरूप==&lt;br /&gt;
[[अलाउद्दीन ख़िलज़ी]] ने जब [[चित्तौड़]] पर कब्ज़ा कर लिया, तब राणा अजय सिंह अपने भतीजे [[हम्मीर देव|हम्मीर]] और बेटों को लेकर [[अरावली पर्वतमाला|अरावली पहाड़]] पर कैलवारा के क़िले में रहने लगे। राजा मुंज ने वहीं उनका अपमान किया था, जिसका बदला हम्मीर ने चुकाया। उस समय हम्मीर की उम्र सिर्फ़ ग्यारह साल की थी। आगे चलकर हम्मीर बहुत बड़ा योद्धा निकला और उसके हठ के बारे में यह कहावत चल पड़ी कि 'तिरिया तेल हमीर हठ चढ़ै न दूजी बार।’ इस रचना में दिनकर जी का ओजस्वी-तेजस्वी स्वरूप झलका है। &amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://www.abhivyakti-hindi.org/snibandh/2009/dinkar_balkavya.htm |title= रामधारी सिंह दिनकर का बाल-काव्य |accessmonthday=[[11 सितंबर]] |accessyear=[[2010]] |authorlink= |format= एच टी एम |publisher=अभिव्यक्ति |language=[[हिन्दी]] }}&amp;lt;/ref&amp;gt; क्योंकि इस कविता की विषय-सामग्री उनकी रुचि के अनुरूप थी। बालक हम्मीर कविता राष्ट्रीय गौरव से परिपूर्ण रचना है। इस कविता की निम्नलिखित पंक्तियाँ पाठक के मन में गूँजती रहती हैं-&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;धन है तन का मैल, पसीने का जैसे हो पानी, &lt;br /&gt;
एक आन को ही जीते हैं इज्जत के अभिमानी।&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==गद्य कृतियाँ==&lt;br /&gt;
दिनकर की गद्य कृतियों में मुख्य हैं– उनका विराट ग्रन्थ 'संस्कृति के चार अध्याय' ([[1956]] ई.), जिसमें उन्होंने प्रधानतया शोध और अनुशीलन के आधार पर मानव सभ्यता के इतिहास को चार मंजिलों में बाँटकर अध्ययन किया है। ग्रन्थ साहित्य अकादमी के पुरस्कार द्वारा सम्मानित हुआ और हिन्दी जगत में सादर स्वीकृत हुआ। उसके अतिरिक्त दिनकर के स्फुट, अमीक्षात्मक तथा विविध निबन्धों के संग्रह हैं, जो पठनीय हैं, विशेषत: इस कारण की उनसे दिनकर के कवित्व को समझने-परखने में यथेष्ट सहायता मिलती है। [[भाषा]] की भूलों के बावज़ूद शैली की प्रांजलता दिनकर के गद्य को आकर्षित बना देती है। दिनकर की प्रसिद्ध आलोचनात्मक कृतियाँ हैं– 'मिट्टी की ओर' (1946 ई.), 'काव्य की भूमिका' ([[1958]] ई.), 'पंत, प्रसाद और मैथिलीशरण' (1958 ई.), हमारी सांस्कृतिक कहानी ([[1955]]), 'शुद्ध कविता की खोज़' ([[1966]] ई.) &lt;br /&gt;
==पुरस्कार==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Ramdhari-Singh-Dinkar-3.jpg|thumb|250px|रामधारी सिंह दिनकर]]&lt;br /&gt;
दिनकर जी को सरकार के विरोधी रूप के लिये भी जाना जाता है, [[भारत]] सरकार द्वारा उन्‍हें [[पद्म भूषण]] से अंलकृत किया गया। इनकी गद्य की प्रसिद्ध पुस्‍तक 'संस्‍कृ‍त के चार अध्याय' के लिये [[साहित्य अकादमी]] तथा उर्वशी के लिये [[ज्ञानपीठ पुरस्कार]] दिया गया।&amp;lt;ref name= &amp;quot;महाशक्ति समूह&amp;quot; /&amp;gt; दिनकर को कुरुक्षेत्र के लिए [[इलाहाबाद]] की साहित्यकार संसद द्वारा पुरस्कृत (1948) किया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मृत्यु ==&lt;br /&gt;
दिनकर अपने युग के प्रमुखतम कवि ही नहीं, एक सफल और प्रभावपूर्ण गद्य लेखक भी थे। सरल भाषा और प्रांजल शैली में उन्होंने विभिन्न साहित्यिक विषयों पर निबंध के अलावा बोधकथा, डायरी, संस्मरण तथा दर्शन व इतिहासगत तथ्यों के विवेचन भी लिखे। [[24 अप्रॅल]],1974 को दिनकर जी अपने आपको अपनी कविताओं में हमारे बीच जीवित रखकर सदा के लिये अमर हो गये।&amp;lt;ref name= &amp;quot;महाशक्ति समूह&amp;quot; /&amp;gt; विभिन्‍न सरकारी सेवाओं में होने के बावज़ूद दिनकर जी के अंदर उग्र रूप प्रत्‍यक्ष देखा जा सकता था। शायद उस समय की व्‍यवस्‍था के नज़दीक होने के कारण [[भारत]] की तत्कालीन दर्द के समक्ष रहे थे। तभी वे कहते है –&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;सदियों की ठंढी-बुझी राख सुगबुगा उठी,&lt;br /&gt;
मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है,&lt;br /&gt;
दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,&lt;br /&gt;
सिंहासन ख़ाली करो कि जनता आती है।&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[26 जनवरी]] सन् [[1950]] ई. को लिखी गई ये पंक्तियाँ आज़ादी के बाद गणतंत्र बनने के दर्द को बताती है कि हम आज़ाद तो हो गये किन्‍तु व्‍यवस्‍था नहीं बदली। [[जवाहर लाल नेहरू|नेहरू]] जी की नीतियों के प्रखर विरोधी के रूप में भी इन्‍हें जाना जाता है तथा कई मायनों में दिनकर [[गाँधी जी]] से भी अपनी असहमति जताते दिखे हैं, [[परशुराम]] की प्रतीक्षा इसका प्रत्‍यक्ष उदाहरण है। यही कारण है कि आज देश में दिनकर का नाम एक कवि के रूप में नहीं बल्कि जनकवि के रूप में जाना जाता है।&amp;lt;ref name= &amp;quot;महाशक्ति समूह&amp;quot; /&amp;gt;   &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति&lt;br /&gt;
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|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक3&lt;br /&gt;
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}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{साहित्यकार}}{{भारत के कवि}}&lt;br /&gt;
[[Category:कवि]][[Category:जीवनी_साहित्य]][[Category:प्रसिद्ध_व्यक्तित्व]][[Category:साहित्य_कोश]][[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:आधुनिक साहित्यकार]][[Category:आधुनिक कवि]]&lt;br /&gt;
[[Category:पद्म भूषण]]&lt;br /&gt;
[[Category:रामधारी सिंह दिनकर]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<title>साँचा:छठी लोकसभा सांसद</title>
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[[अनंतन कुमार]] '''·''' [[अमृत कांसर]] '''·''' [[ए. अशोकराज]] '''·''' [[ए. वी. पी असेथाम्बी]] '''·''' [[एम. ए. हन्नान अलहाज]] '''·'''  [[एम. कल्याण सुन्दरम]] '''·'''  [[के .पी. उन्नीकृष्णन]] '''·''' [[गैव एम. अवारी]] '''·'''  [[जगजीवन राम]] '''·''' [[पी. अंकीनीडु प्रसाद राव]] '''·'''  [[फकीर अली अंसारी]] '''·'''  [[बसंत सिंह खालसा]] '''·'''  [[बापू कालदाते]] '''·'''  [[मगंती अंकीनीडु]] '''·'''  [[सम्भाजीराव साहेबराव काकड़े]] '''·''' [[सत्येन्द्र नारायण सिंह]] &lt;br /&gt;
''' ''' [[सुभाष आहूजा]] '''·'''  [[सुभाष चन्द्र बोस अल्लूरी]] '''·'''  [[हेनरी आस्टिन]] '''·''' [[के. पी. उन्नीकृष्णन]] '''·'''  [[डी. बी. चन्द्रे गौड़ा]] '''·''' [[लालू प्रसाद]] '''·''' [[सौगत राय]] '''·'''  [[कड़िया मुण्डा]] '''·''' [[हुकुमदेव नारायण यादव]] '''·'''  [[सतीश अग्रवाल]] '''·'''  [[कुमारी अनन्तन]] '''·''' [[एस. आर. ए. एस. अप्पालानायडू]] '''·''' [[अब्दुल लतीफ]] '''·''' [[बेगम अकबर जहां अब्दुल्ला]] '''·''' [[मनीराम बागड़ी]]&lt;br /&gt;
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[[अख़्तर हसन]] '''·'''   [[अब्दुल हन्नान अंसारी]] '''·'''   [[आनन्द सिंह]] '''·'''   [[आर. अन्ना नाम्बी]] '''·'''    [[कमलनाथ]] '''·'''   [[के .पी. उन्नीकृष्णन]] '''·'''   [[के. जी अदियोडी]] '''·'''   [[गंगाराम (सांसद)|गंगाराम]] '''·'''   [[गुरुदास कामत]] '''·'''  [[जगजीवन राम]] '''·'''   [[जगदीश अवस्थी]] '''·'''   [[जय प्रकाश अग्रवाल]] '''·'''   [[जियाउर्रहमान अंसारी]] '''·'''   [[टी. अंजैया]] '''·'''   [[टी. कल्पना देवी]] '''·'''   [[निर्मल खत्री]] '''·'''   [[बसुदेव आचार्य]] '''·'''   [[बी.के गढ़वी]] '''·'''   [[मीरा कुमार]] '''·'''   [[सम्भाजीराव साहेबराव काकड़े]] '''·'''   [[के. पी. उन्नीकृष्णन]] '''·'''   [[पलानीअप्पन चिदम्बरम]] '''·'''   [[चिन्ता मोहन]] '''·''' [[एस. जगतरक्षकन]] '''·''' [[के.वी. थॉमस]] '''·''' [[जितेन्द्र सिंह]] '''·''' [[शरद चन्द्र गोविन्दराव पवार]] '''·''' [[सत्येन्द्र नारायण सिंह]]'''·''' [[वसंत साठे]]  ''' '''  [[दिनेश सिंह]] '''·''' [[मुकुल बालकृष्ण वासनिक]] '''·''' [[गंगासान्द्रा सिडप्पा बसवराज]] '''·''' [[बाजू बन रियान]] '''·''' [[हरीश रावत]] '''·''' [[विलास बाबूराव मुत्तेमवार]] '''·''' [[रामचंद्रन मुल्लापल्ली]] '''·''' [[जयपाल सुदीनी रेड्डी]] '''·''' [[अजीज सेट]] '''·''' [[धनुषकोडी अतीतन]] '''·''' [[लोर्डसामी अडईकलराज]] '''·''' [[पी. अप्पाला नरसिंहम]] '''·''' [[बेगम अकबर जहां अब्दुल्ला]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<title>साँचा:प्रथम लोकसभा सांसद</title>
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		<updated>2012-09-05T05:29:29Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
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		<title>साँचा:प्रथम लोकसभा सांसद</title>
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		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<title>सत्येन्द्र नारायण सिंह</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: मुख्यमंत्री सत्येन्द्र नारायण सिन्हा ने ऐतिहासिक तारामंडल की आधारशिला रखी&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=सत्येन्द्र नारायण सिन्हा.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=सत्येन्द्र नारायण सिन्हा&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=छोटे साहब&lt;br /&gt;
|जन्म=[[12 सितम्बर]], [[1917]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[मगध मंडल]], [[बिहार]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=[[2006]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[पटना]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=[[भारतीय]]&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]] ([[1940]]-[[1969]]), कांग्रेस-ओ (1969–[[1977]]), जनता पार्टी&lt;br /&gt;
|पद=बिहार के [[मुख्यमंत्री|पूर्व मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|कार्य काल=[[26 जनवरी]], [[1950]] से [[13 मई]], [[1962]]&lt;br /&gt;
|भाषा=&lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री &lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत्येन्द्र नारायण सिन्हा एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता और [[बिहार ]] के पूर्व [[मुख्यमंत्री]] थे। प्यार से लोग उन्हें ''छोटे साहब'' कहते थे। वे भारत के स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ, सांसद, शिक्षा मंत्री तथा बिहार राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं। वह 72 वर्ष की आयु में मुख्यमंत्री बने थे। इसके पूर्व 1977 मे उन्होंने मुख्यमंत्री बनने की कोशिश की परंतु असफल रहे। वस्तुत: छोटे साहब इतने भाग्यशाली नहीं रहे और वर्षों तक [[बिहार ]] के वरिष्ठतम नेता होने के बावज़ूद उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया।    &lt;br /&gt;
==राजनीतिक जीवन==&lt;br /&gt;
{{बाँयाबक्सा|पाठ=&amp;quot;अपने छह दशक के राजनीतिक जीवन में छोटे साहब ने कई मील के पत्थर स्थापित किए। युवाओं और छात्रों को राजनीति में आने के लिए मोटिवेट किया।।&amp;quot;- '''  उप राष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी'''|विचारक=}}&lt;br /&gt;
[[स्वतंत्रता संग्राम]] में भागीदारी के बाद देश की आज़ादी के समय राष्ट्रीय राजनीति में इनका नाम वज़नदार हो चुका था। लेकिन सत्येन्द्र नारायण सिन्हा की प्राथमिक रुचि राज्य की राजनीति में ही थी। यही कारण है कि वे [[1961]] में बिहार के शिक्षा मंत्री बने जो उप मुख्यमंत्री के हैसियत में थे। उन्होंने छठे और सातवें दशक में [[बिहार]] की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभायी। उन्होंने राजनीति के लिए मानवीय अनुभूतियों को तिलांजलि दे दी। शिक्षा मंत्री के रूप में शैक्षणिक सुधार किया, साथ ही [[मगध विश्वविद्यालय]] की स्थापना की। वे देश में अपनी सैद्धांतिक राजनीति के लिए चर्चित हुआ करते थे।सत्येन्द्र बाबू शिक्षा को नई दिशा दिए जाने ,युवकों एवं छात्रों को राजनिति में उचित स्थान दिलाये जाने के हिमायत थे।छोटे साहब ने बिहार के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई।सत्येन्द्र बाबू ने राजधानी का गौरव और देश भर में पटना को अलग पहचान दिलाने वाले ऐतिहासिक तारामंडल की आधारशिला रखी|&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://tewaronline.com/?p=682 सत्येन्द्र नारायण सिन्हा के जीवन पर स्मृति कलश पुस्तक]&lt;br /&gt;
*[http://www.khaskhabar.com/hamid-ansari-0720111210933611529.html सत्येन्द्र नारायण सिन्हा एक सच्चे देशभक्त थे:  उप राष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी]&lt;br /&gt;
*[http://www.livehindustan.com/news/location/rajwarkhabre/article1-story-248-0-180255.html&amp;amp;locatiopnvalue=10?menuvalue=248&amp;amp;Id=248 सत्येन्द्र नारायण सिन्हा  व्याख्यानमाला]&lt;br /&gt;
*[http://visfot.com/home/index.php/permalink/6195.html मुख्यमंत्री सत्येन्द्र नारायण सिन्हा ने ऐतिहासिक तारामंडल की आधारशिला रखी] &lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5764172.html जन नेता थे छोटे साहब : पूर्व मुख्यमंत्री राम सुन्दर दास]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:YndCj_BcwtkJ:in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_6564942.html+%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0+%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A5%82&amp;amp;cd=18&amp;amp;hl=en&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in&amp;amp;source=www.google.co.in  सत्येन्द्र बाबू सामाजिक- राजनीतिक और प्रशासनिक क्षमता के अद्भुत समन्वय थे-केन्द्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{स्वतन्त्रता सेनानी}} &lt;br /&gt;
[[Category:बिहार के मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीतिज्ञ]]&lt;br /&gt;
[[Category:लेखक]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध_व्यक्तित्व]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:चरित कोश]] &lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0_%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=250331</id>
		<title>सत्येन्द्र नारायण सिंह</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0_%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=250331"/>
		<updated>2012-02-03T14:33:30Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=सत्येन्द्र नारायण सिन्हा.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=सत्येन्द्र नारायण सिन्हा&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=छोटे साहब&lt;br /&gt;
|जन्म=[[12 सितम्बर]], [[1917]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[मगध मंडल]], [[बिहार]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=[[2006]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[पटना]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=[[भारतीय]]&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]] ([[1940]]-[[1969]]), कांग्रेस-ओ (1969–[[1977]]), जनता पार्टी&lt;br /&gt;
|पद=बिहार के [[मुख्यमंत्री|पूर्व मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|कार्य काल=[[26 जनवरी]], [[1950]] से [[13 मई]], [[1962]]&lt;br /&gt;
|भाषा=&lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री &lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत्येन्द्र नारायण सिन्हा एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता और [[बिहार ]] के पूर्व [[मुख्यमंत्री]] थे। प्यार से लोग उन्हें ''छोटे साहब'' कहते थे। वे भारत के स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ, सांसद, शिक्षा मंत्री तथा बिहार राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं। वह 72 वर्ष की आयु में मुख्यमंत्री बने थे। इसके पूर्व 1977 मे उन्होंने मुख्यमंत्री बनने की कोशिश की परंतु असफल रहे। वस्तुत: छोटे साहब इतने भाग्यशाली नहीं रहे और वर्षों तक [[बिहार ]] के वरिष्ठतम नेता होने के बावज़ूद उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया।    &lt;br /&gt;
==राजनीतिक जीवन==&lt;br /&gt;
{{बाँयाबक्सा|पाठ=&amp;quot;अपने छह दशक के राजनीतिक जीवन में छोटे साहब ने कई मील के पत्थर स्थापित किए। युवाओं और छात्रों को राजनीति में आने के लिए मोटिवेट किया।।&amp;quot;- '''  उप राष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी'''|विचारक=}}&lt;br /&gt;
[[स्वतंत्रता संग्राम]] में भागीदारी के बाद देश की आज़ादी के समय राष्ट्रीय राजनीति में इनका नाम वज़नदार हो चुका था। लेकिन सत्येन्द्र नारायण सिन्हा की प्राथमिक रुचि राज्य की राजनीति में ही थी। यही कारण है कि वे [[1961]] में बिहार के शिक्षा मंत्री बने जो उप मुख्यमंत्री के हैसियत में थे। उन्होंने छठे और सातवें दशक में [[बिहार]] की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभायी। उन्होंने राजनीति के लिए मानवीय अनुभूतियों को तिलांजलि दे दी। शिक्षा मंत्री के रूप में शैक्षणिक सुधार किया, साथ ही [[मगध विश्वविद्यालय]] की स्थापना की। वे देश में अपनी सैद्धांतिक राजनीति के लिए चर्चित हुआ करते थे।सत्येन्द्र बाबू शिक्षा को नई दिशा दिए जाने ,युवकों एवं छात्रों को राजनिति में उचित स्थान दिलाये जाने के हिमायत थे।छोटे साहब ने बिहार के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://tewaronline.com/?p=682 सत्येन्द्र नारायण सिन्हा के जीवन पर स्मृति कलश पुस्तक]&lt;br /&gt;
*[http://www.khaskhabar.com/hamid-ansari-0720111210933611529.html सत्येन्द्र नारायण सिन्हा एक सच्चे देशभक्त थे:  उप राष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी]&lt;br /&gt;
*[http://www.livehindustan.com/news/location/rajwarkhabre/article1-story-248-0-180255.html&amp;amp;locatiopnvalue=10?menuvalue=248&amp;amp;Id=248 सत्येन्द्र नारायण सिन्हा  व्याख्यानमाला]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5764172.html जन नेता थे छोटे साहब : पूर्व मुख्यमंत्री राम सुन्दर दास]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:YndCj_BcwtkJ:in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_6564942.html+%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0+%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A5%82&amp;amp;cd=18&amp;amp;hl=en&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in&amp;amp;source=www.google.co.in  सत्येन्द्र बाबू सामाजिक- राजनीतिक और प्रशासनिक क्षमता के अद्भुत समन्वय थे-केन्द्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{स्वतन्त्रता सेनानी}} &lt;br /&gt;
[[Category:बिहार के मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीतिज्ञ]]&lt;br /&gt;
[[Category:लेखक]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध_व्यक्तित्व]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:चरित कोश]] &lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0_%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=250322</id>
		<title>सत्येन्द्र नारायण सिंह</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0_%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=250322"/>
		<updated>2012-02-03T14:28:54Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=सत्येन्द्र नारायण सिन्हा.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=सत्येन्द्र नारायण सिन्हा&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=छोटे साहब&lt;br /&gt;
|जन्म=[[12 सितम्बर]], [[1917]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[मगध मंडल]], [[बिहार]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=[[2006]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[पटना]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=[[भारतीय]]&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]] ([[1940]]-[[1969]]), कांग्रेस-ओ (1969–[[1977]]), जनता पार्टी&lt;br /&gt;
|पद=बिहार के [[मुख्यमंत्री|पूर्व मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|कार्य काल=[[26 जनवरी]], [[1950]] से [[13 मई]], [[1962]]&lt;br /&gt;
|भाषा=&lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री &lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
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|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत्येन्द्र नारायण सिन्हा एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता और [[बिहार ]] के पूर्व [[मुख्यमंत्री]] थे। प्यार से लोग उन्हें ''छोटे साहब'' कहते थे। वे भारत के स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ, सांसद, शिक्षा मंत्री तथा बिहार राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं। वह 72 वर्ष की आयु में मुख्यमंत्री बने थे। इसके पूर्व 1977 मे उन्होंने मुख्यमंत्री बनने की कोशिश की परंतु असफल रहे। वस्तुत: छोटे साहब इतने भाग्यशाली नहीं रहे और वर्षों तक [[बिहार ]] के वरिष्ठतम नेता होने के बावज़ूद उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया।    &lt;br /&gt;
==राजनीतिक जीवन==&lt;br /&gt;
{{बाँयाबक्सा|पाठ=&amp;quot;अपने छह दशक के राजनीतिक जीवन में छोटे साहब ने कई मील के पत्थर स्थापित किए। युवाओं और छात्रों को राजनीति में आने के लिए मोटिवेट किया।।&amp;quot;- '''  उप राष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी'''|विचारक=}}&lt;br /&gt;
[[स्वतंत्रता संग्राम]] में भागीदारी के बाद देश की आज़ादी के समय राष्ट्रीय राजनीति में इनका नाम वज़नदार हो चुका था। लेकिन सत्येन्द्र नारायण सिन्हा की प्राथमिक रुचि राज्य की राजनीति में ही थी। यही कारण है कि वे [[1961]] में बिहार के शिक्षा मंत्री बने जो उप मुख्यमंत्री के हैसियत में थे। उन्होंने छठे और सातवें दशक में [[बिहार]] की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभायी। उन्होंने राजनीति के लिए मानवीय अनुभूतियों को तिलांजलि दे दी। शिक्षा मंत्री के रूप में शैक्षणिक सुधार किया, साथ ही [[मगध विश्वविद्यालय]] की स्थापना की। वे देश में अपनी सैद्धांतिक राजनीति के लिए चर्चित हुआ करते थे। छोटे साहब ने बिहार के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://tewaronline.com/?p=682 सत्येन्द्र नारायण सिन्हा के जीवन पर स्मृति कलश पुस्तक]&lt;br /&gt;
*[http://www.khaskhabar.com/hamid-ansari-0720111210933611529.html सत्येन्द्र नारायण सिन्हा एक सच्चे देशभक्त थे:  उप राष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी]&lt;br /&gt;
*[http://www.livehindustan.com/news/location/rajwarkhabre/article1-story-248-0-180255.html&amp;amp;locatiopnvalue=10?menuvalue=248&amp;amp;Id=248 सत्येन्द्र नारायण सिन्हा  व्याख्यानमाला]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5764172.html जन नेता थे छोटे साहब : पूर्व मुख्यमंत्री राम सुन्दर दास]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:YndCj_BcwtkJ:in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_6564942.html+%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0+%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A5%82&amp;amp;cd=18&amp;amp;hl=en&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in&amp;amp;source=www.google.co.in  सत्येन्द्र बाबू सामाजिक- राजनीतिक और प्रशासनिक क्षमता के अद्भुत समन्वय थे-केन्द्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{स्वतन्त्रता सेनानी}} &lt;br /&gt;
[[Category:बिहार के मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीतिज्ञ]]&lt;br /&gt;
[[Category:लेखक]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध_व्यक्तित्व]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:चरित कोश]] &lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<title>अनुग्रह नारायण सिंह</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9_%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=250319"/>
		<updated>2012-02-03T14:18:22Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=BiharVibhuti Dr Anugrah Narayan Sinha.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=अनुग्रह नारायण सिंह&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=अनुग्रह बाबू&lt;br /&gt;
|जन्म=[[18 जून ]],[[1887]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[बिहार]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[पटना]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]&lt;br /&gt;
|पद=[[बिहार]] के प्रथम उप [[मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिन्दी]],[[अंग्रेज़ी]] &lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=[[2 जनवरी]], [[1946]] से 05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|विद्यालय=[[कलकत्ता विश्वविद्यालय]], प्रेसीडेंसी कॉलेज (कलकत्ता)&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री और डॉक्टरेट&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=बिहार विभूति&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=भारत की स्वतन्त्रता, अहिंसक आन्दोलन, सत्याग्रह&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=[[असहयोग आंदोलन]], [[नमक सत्याग्रह]] आदि&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=रचनाऐं-मेरे संस्मरण:आत्मकथा&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
डा '''अनुग्रह नारायण सिंह''' एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता और [[बिहार]] के पहले उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री (1946- 1957) थे। अनुग्रह बाबू (1887-1957) [[भारत]] के स्वतंत्रता सेनानी ,शिक्षक,वकील,राजनीतिज्ञ तथा आधुनिक बिहार के निर्माता रहे हैं।उन्हें '''बिहार विभूति''' के रूप में जाना जाता था।वह स्वाधीनता आंदोलन के महान योद्धा थे।स्वाधीनता के बाद राष्ट्र निर्माण व जनकल्याण के कार्यो में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया। अनुग्रह बाबू ने [[महात्मा गांधी]] एवं डा. [[राजेन्द्र प्रसाद]] के साथ राष्ट्रीय आन्दोलन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==आधुनिक बिहार के निर्माता==&lt;br /&gt;
डा अनुग्रह नारायण सिन्हा मानवतावादी प्रगतिशील विचारक एवं दलितों के उत्थान के प्रबल समर्थक और आधुनिक बिहार के निर्माताओं में से एक थे। उनका जीवन दर्शन देश की अखंडतास्वतंत्रता और नवनिर्माण की भावनाआ से शराबोर रहा है। उनका सौभ्य, स्निग्ध, शीतल, परोपकारी, अहंकारहीन और दर्पोदीप्त शख़्सियत बिहार के जनगणमन पर अधिकार किए हुए था|वे शरीर से दुर्बल, कृषकाय थे, पर इस अर्थ में महाप्राण कोई संकट उनके ओठों की मुस्कुराहट नहीं छीन सका। उनमें शक्ति और शील एकाकार हो गये थे और इसीलिए वे बुद्धिजीवियों को विशेष प्रिय थे।[[बिहार]] के विकास में उनका योगदान अतुलनीय है।राज्य के प्रशासनिक ढांचा को तैयार करना का काम अनुग्रह बाबू  ने किया था।इन्होंने राज्य के प्रथम उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  के रूप मे 11 वर्षो तक बिहार की अनवरत सेवा की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रारंभिक जीवन==&lt;br /&gt;
अनुग्रह बाबू का जन्म औरंगाबाद ज़िले के पोईअवा नामक गांव में 18 जून 1887 को हुआ । उनके पिता ठाकुर विशेश्वर दयाल सिंह जी अपने इलाके के एक वीर पुरुष थे। पांच बसंत जब वे पार कर गये तो उनकी शिक्षा का श्रीगणेश हुआ। सन्‌ 1900 में औरंगाबाद मिडिल स्कूल,1904 में गया ज़िला स्कूल और 1908 में पटना कॉलेज में प्रविष्ट हुए। जिस समय ये पटना कॉलेज में आये उस समय देश के शिक्षित व्यक्तियों के हृदय में परतंत्रता की वेदना का अनुभव होने लगा था। ग़ुलामी की जंजीर में जक़डी हुई मानवता का चित्कार अब उन्हें सुनायी प़डने लगा था। वे उस जंजीर को त़ोड फेंकने के लिए व्याकुल होने लगे थे। सुरेन्द्रनाथ बनर्जी तथा योगिराज अरविंद ऐसे महान आत्माआे का प्रादुर्भाव हो चुका था । इन महान आत्माआ के कार्य कलापों तथा व्याख्यानों का समुचित प्रभाव अनुग्रह बाबू के हृदय पर प़डा। उनका हृदय भी भारतमाता की सेवा के लिए त़डप उठा और वे उस पावन मार्ग पर अग्रसर हो गये। सर्फूद्दीन के नेतृत्व में ‘बिहारी छात्र सम्मेलन’ नामक संस्था संगठित की गई, जिसमें देशरत्न डॉ राजेन्द्र बाबू ऐसे मेधावी छात्रों को कार्य करने तथा नेतृत्व करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन==&lt;br /&gt;
{{बाँयाबक्सा|पाठ=&amp;quot;मेरा परिचय अनुग्रह बाबू से बिहारी छात्र सम्मेलन में ही पहले पहल हुआ था।मैं उनकी संगठन शक्ति और हाथ में आए हुए काया] में उत्साह देखकर मुग्ध हो गया और वह भावना समय बीतने से कम न होकर अधिक गहरी होती गई।&amp;quot;- ''' देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद'''|विचारक=}}इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध [[चम्पारण]] से अपना सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था।अनुग्रह बाबू के हृदय में सेवा की उच्च भावना तो बाल्यकाल से ही था, उसे कार्य रूप में परिणत करने तथा उसे पूर्ण रूप से विकसित करने का सुअवसर भी उन्हें इस संगठन में प्रविष्ट होने पर मिल गया। सन्‌ 1910 में आई ए की परीक्षा भी उन्होंने प्रथम श्रेणी में पास की फिर बीए में प्रवेश किया। उसी वर्ष महामना पोलक साहब जो महात्मा गांधी के सहकर्मी थे, पटना पधारे, अफ्रीका के प्रवासी भारतीयों के बारे में जो उनका व्याख्यान हुआ। उससे अनुग्रह बाबू बहुत प्रभावित हुए। उसी वर्ष प्रयाग में अखिल भारतीय कांग्रेस अधिवेशन हुआ, जिसमें वे अपनी उत्साही सहपाठियों के साथ गये। उस अधिवेशन में महामना गोखले आदि विद्वान राष्ट्रभक्तों के भाषणों को सुनने का स्वर्ण अवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ, जिससे वे ब़डे प्रभावित हुए।अनुग्रह बाबू विद्यार्थी जीवन में ही संगठनशक्ति तथा कार्य संचालन की काबिलियत हासिल कर ली थी। सन्‌ 1914 में इतिहास से एमए करने के बाद 1915 में बी एल की परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की। भागलपुर के तेजनारायण जुविल कॉलेज में इतिहास के एक प्रोफेसर की आवश्यकता हुई। अपने साथियों के परामर्श करने के पश्चात तुरंत उन्होंने अपना आवेदन पत्र भेज दिया और उस पद पर उनकी नियुक्ति हो गई। वर्ष 1916 में उन्होंने कॉलेज की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और पटना हाईकोर्ट में वकालत प्रारंभ कर दी। वकालत के सिलसिले में सरलता की मूर्ति देशरत्न राजेन्द्र बाबू के संसर्ग में अधिक रहने का सुअवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ और उनसे पेशे को उन्नत करने की प्रेरणा भी मिली। कलकत्ते में भी उन्हें राजेन्द्र बाबू के सम्पर्क में रहने का स्वर्ण अवसर मिला था। जिस समय राजेन्द्र बाबू लॉ कॉलेज में अध्यापक थे, उसी समय उसी कॉलेज में वे एक विद्यार्थी थे। इसलिये वे राजेन्द्र बाबू की प्रतिष्ठा किया करते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== गांधीजी का सत्याग्रह==&lt;br /&gt;
उन्हें वकालत करते हुए अभी एक वर्ष भी नहीं बीता था कि चम्पारण में नील आंदोलन उठ ख़डा हुआ । इस आंदोलन ने उनके जीवन की धारा ही बदल दी। चम्पारण के किसानों की तबाही का समाचार जब [[महात्मा गांधी]] से सुने तो वे करुणा से विचलित हो उठे।{{बाँयाबक्सा|पाठ=&amp;quot;जो देश भक्त जेल में अनुग्रह बाबू के चौके में खाते थे, वे जब जेल से निकले तो यह कहते निकले कि अनुग्रह बाबू सचमुच प्रांत के अर्थमंत्री पद के योग्य हैं।इस काम में उनसे कोई बाजी नहीं मार सकता।&amp;quot;- '''  राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर'''|विचारक=}} मुजफ्फरपुर के कमिश्नर की राय के विरुद्ध गांधीजी चम्पारण गये और जांच कार्य प्रारंभ कर दिया।[[चित्र:Champaran Satyagraha.jpg|thumb|220px|चंपारण सत्याग्रह आंदोलन के दौरान डॉ. [[राजेन्द्र प्रसाद]] और [[अनुग्रह नारायण सिन्हा]]]] अत्याचारों की जांच प्रारंभ हुई । इसमें कुछ ऐसे वकीलों की आवश्यकता थी, जो निर्भीकता पूर्वक कार्य कर सकें और समय आने पर जेल जाने के लिए भी तैयार रहें। इस विकट कार्य के लिए वृज किशोर बाबू के प्रोत्साहन पर राजेन्द्र बाबू के साथ ही अनुग्रह बाबू भी तत्पर हो गये। उन्होंने इसकी तनिक भी चिंता नहीं की कि उनका पेशा नया है और उन्हें भारी क्षति उठानी प़ड सकती है। एक बार जो त्याग के मार्ग पर आगे ब़ढ चुका है, उसे भला इन तुच्छ चीज़ों का क्या भय हो सकता है। चम्पारण का किसान आंदोलन 45 महीनों तक ज़ोरशोर से चलता रहा। अनुग्रह बाबू बराबर उसमें काम करते रहे और आखिर तक डटे रहे । स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का पाठ उन्हें गांधीजी के आश्रम में ही रहकर प़ढने का सुअवसर प्राप्त हुआ। अनुग्रह बाबू ने चम्पारण के नील आंदोलन में गांधीजी के साथ लगन और निर्भीकता के साथ काम किया और आंदोलन को सफल बनाकर उनके आदेशानुसार 1917 में पटना आये। बापू के साथ रहने से उन्हें जो आत्मिक बल प्राप्त हुआ, वही इनके जीवन का संबल बना। सन्‌ 1920 के दिसंबर में नागपुर में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हुआ, जिसमें अनुग्रह बाबू ने भी भाग लिया। सन्‌ 1929 के दिसंबर में सरदार पटेल ने किसान संगठन के सिलसिले में मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया, तब अनुग्रह बाबू सभी जगह उनके साथ थे। 26 जनवरी 1930 को सारे देश में स्वतंत्रता की घोषणा प़ढी गई। अनुग्रह बाबू को भी कई स्थानों में घोषण पत्र प़ढना प़ढा । कुछ दिनों के बाद महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया। उस सिलसिले में उन्हें चम्पारण, मुजफ्फरपुर आदि स्थानों का दौरा करना प़डा । 26 जनवरी, 1933 को जब पटना में घोषणा प़ढ रहे थे, उसी समय उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें पंद्रह मास की सज़ा हुई और उन्हें हज़ारीबाग़ जेल भेज दिया गया। जिस समय वे जेल में थे, बिहार में इतिहास विख्यात प्रलयंकारी भूकंप आया। हृदय विदारक समाचारों को प़ढकर उनका हृदय दर्द से कराह उठा। चहारदीवारी के अंदर बंद रहने के कारण ये कोई राहत कार्य नहीं कर सकते थे। लेकिन सरकार ने तीन हफ्तों के बाद इन्हें छ़ोड दिया। छूटते ही अनुग्रह बाबू राहत कार्य में संलग्न हो गये। राजेन्द्र बाबू के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इन्होंने अथक परिश्रम के साथ पी़डत मानवता की सेवा की। मुजफ्फरपुर, मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया । इसके लिये राजेन्द्र बाबू की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी, जिसके उपाध्यक्ष अनुग्रह बाबू ही चुने गये तथा खूब लगन के साथ सेवा कार्य किया।सन्‌ 1940 को मार्च महीने में अखिल भारतीय कांग्रेस का अधिवेशन रामग़ढ में हुआ। अधिवेशन का संपूर्ण भार अनुग्रह बाबू के कंधे पर था। उसमें जो अपनी तत्परता दिखलाई उसके फलस्वरूप ही कांग्रेस का अधिवेशन सफल हुआ। देश की परिस्थिति को देखते हुए जब गांधीजी ने व्यक्तिगत सत्याग्रह अपनाया तब उनके प्रिय सहयोगी अनुग्रह बाबू कब चूकने वाले थे। फलस्वरूप 1940 को वह गिरफ्तार कर लिये गये और अगस्त 1941 में रिहा हुए।&lt;br /&gt;
&amp;lt;br /&amp;gt;&amp;lt;blockquote&amp;gt;&amp;lt;span style=&amp;quot;color: Green&amp;quot;&amp;gt;'मुझे अपने लिए चिंता नहीं है,किंतु देश के लिए मुझे चिंता है।’ '''बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा'''&amp;lt;/span&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
गांधीजी का ‘करो या मरो’ का नारा बुलंद हुआ। 7 अगस्त, 1942 को गांधीजी गिरफ्तार किये गये। सारे देश में एक बार ही बिजली की तरह आंदोलन की आग फैल गई। कांग्रेस कमिटियां जब्त कर ली गई और कांग्रेस नेता जहां के तहां गिरफ्तार कर लिये गये। 10 अगस्त को अनुग्रह बाबू भी जब अपने मित्रों से मिलने गये, एकाएक मार्ग में ही गिरफ्तार कर लिये गये। सन्‌ 1944 में जब सारे कांग्रेसी नेता जेल से मुक्त किये जाने लगे, तो अनुग्रह बाबू भी कारावास की कैद से आज़ाद कर दिये गये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बिहार के पहले उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री==&lt;br /&gt;
1937 में ही बाबू साहब बिहार प्रान्त के वित्त मंत्री बने।अनुग्रह बाबू [[बिहार]] [[विधानसभा]]  में 1937 से  लेकर 1957 तक कांग्रेस [[विधायक]] दल के उप नेता थे। 1946 में जब दूसरा मंत्रिमंडल बना तब वित्त और श्रम दोनों विभागों के पहले मंत्री बने और उन्होंने अपने मंत्रित्व काल में विशेषकर श्रम विभाग में अपनी न्याय प्रियता लोकतांत्रिक विचारधारा एवं श्रमिकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का जो परिचय दिया वह सराहनीय ही नहीं अनुकरणीय है। श्रम मंत्री के रूप में अनुग्रह बाबू ने ‘बिहार केन्द्रीय श्रम परामर्श समिति’ के माध्यम से श्रम प्रशासन तथा श्रमिक समस्याओं के समाधान के लिए जो नियम एवं प्रावधान बनाये वे आज पूरे देश के लिये मापदंड के रूप में काम करते हैं। तृतीय मंत्रिमंडल में उन्हें खाद, बीज, मिट्‌टी, मवेशी में सुधार लाने के लिए शोध कार्य करवाए और पहली बार जापानी ढंग से धान उपजाने की पद्धति का प्रचार कराया। पूसा का कृषि अनुसंधान फार्म उनकी ही देन है। इस तेजस्वी महापुरुष का निधन 5 जुलाई, 1957 को उनके निवास स्थान [[पटना]] मे बीमारी के कारण हुआ। उनके सम्मान मे तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया, उनके अन्तिम संस्कार में विशाल जनसमूह उपस्थित था।अनुग्रह बाबू  [[2 जनवरी]], [[1946]] से अपनी मृत्यु तक बिहार के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  रहे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==संदर्भ==&lt;br /&gt;
{{reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/database/biographies/anugrah_narayan_sinha.htm अनुग्रह बाबू की जीवनी]&lt;br /&gt;
*[http://books.google.co.in/books?id=kmZV1ALVaCYC&amp;amp;pg=PT403&amp;amp;lpg=PT403&amp;amp;dq=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9+%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;source=bl&amp;amp;ots=BrT6nN3s6g&amp;amp;sig=AQGM4ELFM1mxpiXuSV_kVCFd_Fs&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ei=yaZmS5DaJsWVtgenqvS2Bg&amp;amp;sa=X&amp;amp;oi=book_result&amp;amp;ct=result&amp;amp;resnum=2&amp;amp;ved=0CAkQ6AEwATge#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%20%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;f=false बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा]&lt;br /&gt;
*[http://www.prabhatkhabar.com/node/120444 बिहार विभूति डॉ अनुग्रह नारायण सिन्हा: राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के संस्मरण] &lt;br /&gt;
*[http://www.prabhatkhabar.com/node/18888 सादगी की प्रतिमूर्ति थे बिहार विभूति अनुग्रह बाबू] &lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_7898028.html  भारत को आज़ादी दिलाने में डा. अनुग्रह बाबू का अतुलनीय योगदान:राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.newshunt.com/cr.action?act=browseNewsItem&amp;amp;npKey=jagran&amp;amp;ctKey=Patna&amp;amp;newsUid=9712713&amp;amp;brand=NewsHunt&amp;amp;parent=null&amp;amp;res=128x128 बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिंह की जयंती]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_7891955.html अनुग्रह बाबू को श्रद्धांजलि]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:z7Qyx0yJNJ4J:in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html+/search%3Fhl%3Dhi%26q%3D%2Bsite:in.jagran.yahoo.com%2B%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2597%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25B9%2B%25E0%25A4%25AC%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%2582&amp;amp;cd=5&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in आधुनिक भारत के निर्माता थे अनुग्रह बाबू : राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_4561311.html लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी थे डा अनुग्रह बाबू ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html अनुग्रह बाबू के जीवन से सीख लेने की जरूरत है-राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/kalranga/freedom/congress/c127.htm बिहार के स्वतंत्रता सेनानी]&lt;br /&gt;
*[http://www.aicc.org.in/satyagraha_laboratories_of_mahatma_gandhi.htm महात्मा गाँधी की सत्याग्रह प्रयोगशाला]&lt;br /&gt;
*[http://loksabha.nic.in/ लोकसभा का जालस्थल]&lt;br /&gt;
*[http://www.mkgandhi.org/jpnarayan/total_revolution.htm सम्पूर्ण क्रांति]&lt;br /&gt;
*[http://www.snsibm.com/ अनुग्रह नारायण सिन्हा व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, राँची]&lt;br /&gt;
*[http://www.ancollege.org/ अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय, पटना]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{स्वतन्त्रता सेनानी}}&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार_का_इतिहास]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]]&lt;br /&gt;
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[[Category:राजनीतिज्ञ]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध_व्यक्तित्व]]&lt;br /&gt;
[[Category:इतिहास कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<title>सच्चिदानन्द सिन्हा</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;*[[बिहार]] को [[अखण्डित बंगाल|बंगाल]] से पृथक राज्य के रूप में स्थापित करने वाले लोगों में सबसे प्रमुख नाम '''डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा''' है। &lt;br /&gt;
*सच्चिदानन्द सिन्हा [[1910]] के चुनाव में चार महाराजों को परास्त कर केन्द्रीय विधान परिषद में प्रतिनिधि निर्वाचित हुए। &lt;br /&gt;
*प्रथम भारतीय जिन्हें एक प्रान्त का [[राज्यपाल]] और हाउस लार्डस का सदस्य बनने का श्रेय प्राप्त है। वे प्रिवी कौंसिल के सदस्य भी थे। &lt;br /&gt;
==बिहार की स्थापना में योगदान==&lt;br /&gt;
[[बिहार]] का इतिहास सच्चिदानन्द सिन्हा से शुरू होता है क्योंकि राजनीतिक स्तर पर सबसे पहले उन्होंने ही बिहार की बात उठाई थी। कहते हैं, डा. सिन्हा जब वकालत पास कर [[इंग्लैंड]] से लौट रहे थे। तब उनसे एक पंजाबी वकील ने पूछा था कि मिस्टर सिन्हा आप किस प्रान्त के रहने वाले हैं। डा. सिन्हा ने जब बिहार का नाम लिया तो वह पंजाबी वकील आश्चर्य में पड़ गया। इसलिए क्योंकि तब बिहार नाम का कोई प्रांत था ही नहीं। उसके यह कहने पर कि बिहार नाम का कोई प्रांत तो है ही नहीं, डा. सिन्हा ने कहा था, नहीं है लेकिन जल्दी ही होगा। यह घटना  [[फरवरी]], 1893 की बात है।&lt;br /&gt;
डॉ. सिन्हा को ऐसी और भी घटनाओं ने झकझोरा, जब बिहारी युवाओं (पुलिस) के कंधे पर ‘बंगाल पुलिस’ का बिल्ला देखते तो गुस्से से भर जाते थे। डॉ. सिन्हा ने बिहार की आवाज़ को बुलंद करने के लिए नवजागरण का शंखनाद किया। इस मुहिम में महेश नारायण,अनुग्रह नारायण सिन्हा,नन्दकिशोर लाल,  राय बहादुर, कृष्ण सहाय जैसे मुट्ठीभर लोग ही थे। उन दिनों सिर्फ ‘द बिहार हेराल्ड’ अखबार था, जिसके संपादक गुरु प्रसाद सेन थे। तमाम बंगाली अखबार बिहार के पृथककरन का विरोध करते थे। [[पटना]] में कई बंगाली पत्रकार थे जो बिहार के हित की बात तो करते थे लेकिन इसके पृथक राज्य बनाने के विरोधी थे।&lt;br /&gt;
बिहार अलग राज्य के पक्ष में जनमत तैयार करने या कहें माहौल बनाने के उद्देश्य से 1894 में डॉ. सिन्हा ने अपने कुछ सहयोगियों के साथ ‘द बिहार टाइम्स’ [[अंग्रेज़ी]] साप्ताहिक का प्रकाशन शुरू किया। स्थितियां बदलते देख बाद में ‘बिहार क्रानिकल्स’ भी बिहार अलग प्रांत के आन्दोलन का समर्थन करने लगा। 1907 में महेश नारायण की मृत्यु के बाद डॉ. सिन्हा अकेले हो गए। इसके बावजूद उन्होंने अपनी मुहिम को जारी रखा। 1911 में अपने मित्र सर अली इमाम से मिलकर केन्द्रीय विधान परिषद में बिहार का मामला रखने के लिए उत्साहित किया। [[12 दिसम्बर]] 1911 को ब्रिटिश सरकार ने बिहार और [[उड़ीसा]] के लिए एक लेफ्टिनेंट गवर्नर इन कौंसिल की घोषणा कर दी। यह डॉ. सिन्हा और उनके समर्थकों की बड़ी जीत थी। डॉ. सिन्हा का बिहार के नवजागरण में वही स्थान माना जाता है जो बंगाल नवजागरण में [[राजा राममोहन राय]] का। उन्होंने न केवल बिहार में पत्रकारिता की शुरुआत की बल्कि सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक विकास के अग्रदूत भी बने।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://ranchiexpress.com/83919.php |title=जवाहरलाल का हिन्दी-प्रेम |accessmonthday=7 जून |accessyear=2011 |last= |first= |authorlink= |format=पी.एच.पी |publisher=lakesparadise.com |language=हिन्दी}}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
==संविधान सभा में डॉ. सिन्हा==&lt;br /&gt;
घटना संविधान सभा नियमावली निर्माण के प्रथम दिवस की है और उसका संबंध [[हिन्दी भाषा]] से है। [[झाँसी]] के माननीय रघुनाथ विनायक धुलेकर संविधान निर्माण सभा के सदस्य थे जो बाद में [[लोकसभा]] के सांसद तथा [[उत्तर प्रदेश]] विधान परिषद् के अध्यक्ष हुए। वह बडे विद्वान्, धर्मनिष्ठ, कर्मठ और कुशल राजनेता भी थे। संविधान सभा में उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त दक्षिण भारत तथा [[मुस्लिम लीग]] के भी सदस्य थे। गवर्नर जनरल ने [[पटना]] के प्रख्यात विधिवेत्ता सच्चिदानन्द सिन्हा को वरिष्ठता और श्रेष्ठता के कारण इसका अस्थायी अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। [[पं. जवाहरलाल नेहरू]] ने अधिकृत नियम बन जाने तक कार्य संचालन के लिए यह प्रस्ताव रखा कि जब तक संविधान सभा अपने संचालन की नियमावली स्वयं नहीं बना लेती तब तक केंद्रीय धारा सभी के नियमानुसार यथासंभव कार्य किया जाय। तदनुसार कार्य प्रणाली को बनाने के लिए श्री जे.बी. कृपलानी ने केन्द्रीय धारा सभा के नियमों के अनुसार एक लम्बा प्रस्ताव भेजा जिसके अनुसार संविधान सभा को वह नियम निर्माण समिति (प्रोसोडवोर कमेटी) गठित करना था जो संविधान सभा की कार्य प्रणाली के नियम और उसके अधिकारों का नियमन करने के प्रारूप बनाकर संविधान सभा में उसको स्वीकृति के लिए प्रस्तुत करती। कृपलानी जी का यह प्रस्ताव समस्त संविधान सभा सदस्यों के पास भेजा गया कि अगली बैठक की तिथि के पूर्व तक यदि कोई संशोधन हो तो सचिव संविधान सभा तक पहुँचा सकते हैं। इसके अतिरिक्त अन्य किसी प्रस्ताव पर विचार नहीं हो सकता। इस पर माननीय रघुनाथ विनायक धुलेकर ने इस प्रस्ताव पर यह संशोधन भेजा कि यह कार्य नियमावली गठन समिति अपने नियम हिंदुस्तानी में बनाये। वे नियम [[अंग्रेज़ी]] में अनुवाद किये जा सकते हैं। जब कोई सदस्य किसी नियम पर तर्क करे तो वह मूल हिन्दुस्तानी का उपयोग करे और उस पर जो निर्णय किया जाये वह भी हिंदुस्तानी में हो।&amp;lt;ref&amp;gt; {{cite web |url=http://www.lakesparadise.com/madhumati/show-article_1184.html |title=जवाहरलाल का हिन्दी-प्रेम |accessmonthday=7 जून |accessyear=2011 |last= |first= |authorlink= |format=एच.टी.एम.एल |publisher=lakesparadise.com |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति&lt;br /&gt;
|आधार=आधार1&lt;br /&gt;
|प्रारम्भिक=&lt;br /&gt;
|माध्यमिक=&lt;br /&gt;
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}}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार का इतिहास]][[Category:राजनीतिज्ञ]][[Category:राजनीति कोश]][[Category:इतिहास कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
[[Category:1857]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
	</entry>
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		<title>गणतंत्र दिवस</title>
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		<updated>2012-02-03T08:35:50Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{| width=&amp;quot;100%&amp;quot;&lt;br /&gt;
|- &lt;br /&gt;
| style=&amp;quot;background:#ff9934&amp;quot;|&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| style=&amp;quot;background:#118806&amp;quot;|&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
[[चित्र:Tricolor.jpg|thumb|250px|[[राष्‍ट्रीय ध्‍वज]]]]&lt;br /&gt;
[[भारत]] में [[26 जनवरी]] को '''गणतंत्र दिवस''' (Republic Day) मनाया जाता है और यह भारत का एक राष्ट्रीय पर्व है। हर वर्ष 26 जनवरी एक ऐसा दिन है जब प्रत्‍येक भारतीय के मन में देश भक्ति की लहर और मातृभूमि के प्रति अपार स्‍नेह भर उठता है। ऐसी अनेक महत्त्वपूर्ण स्‍मृतियां हैं जो इस दिन के साथ जुड़ी हुई है। &lt;br /&gt;
* 26 जनवरी, [[1950]] को देश का संविधान लागू हुआ और इस प्रकार यह सरकार के संसदीय रूप के साथ एक संप्रभुताशाली समाजवादी लोक‍तांत्रिक गणतंत्र के रूप में भारत देश सामने आया। &lt;br /&gt;
* भारतीय संविधान, जिसे देश की सरकार की रूपरेखा का प्रतिनिधित्‍व करने वाले पर्याप्‍त विचार विमर्श के बाद विधान मंडल द्वारा अपनाया गया, तब से 26 जनवरी को भारत के गणतंत्र दिवस के रूप में भारी उत्‍साह के साथ मनाया जाता है और इसे राष्‍ट्रीय अवकाश घोषित किया जाता है। &lt;br /&gt;
* यह आयोजन हमें देश के सभी शहीदों के नि:स्‍वार्थ बलिदान की याद दिलाता है, जिन्‍होंने आज़ादी के संघर्ष में अपने जीवन बलिदान कर दिए और विदेशी आक्रमणों के विरुद्ध अनेक लड़ाइयाँ जीती।&lt;br /&gt;
==इतिहास==&lt;br /&gt;
[[भारत का संविधान|भारत के संविधान]] को लागू किए जाने से पहले भी 26 जनवरी का बहुत महत्त्व था। 26 जनवरी को विशेष दिन के रूप में चिह्नित किया गया था, [[31 दिसंबर]] सन [[1929]] के मध्‍य रात्रि में राष्‍ट्र को स्वतंत्र बनाने की पहल करते हुए [[लाहौर]] में [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] का अधिवेशन [[जवाहरलाल नेहरू|पंडित जवाहरलाल नेहरू]] की अध्यक्षता में हु‌आ जिसमें प्रस्ताव पारित कर इस बात की घोषणा की ग‌ई कि यदि [[अंग्रेज़]] सरकार 26 जनवरी, [[1930]] तक भारत को उपनिवेश का पद (डोमीनियन स्टेटस) नहीं प्रदान करेगी तो भारत अपने को पूर्ण स्वतंत्र घोषित कर देगा। [[चित्र:Gurkha-Rifles.jpg|thumb|300px|left|गणतंत्र दिवस पर गुरखा राइफल्स की परेड]] 26 जनवरी, 1930 तक जब अंग्रेज़ सरकार ने कुछ नहीं किया तब कांग्रेस ने उस दिन भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के निश्चय की घोषणा की और अपना सक्रिय आंदोलन आरंभ किया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के इस लाहौर अधिवेशन में पहली बार [[तिरंगा|तिरंगे झंडे]] को फहराया गया था परंतु साथ ही इस दिन सर्वसम्मति से एक और महत्त्वपूर्ण फैसला लिया गया कि प्रतिवर्ष 26 जनवरी का दिन पूर्ण स्वराज दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन सभी स्वतंत्रता सैनानी पूर्ण स्वराज का प्रचार करेंगे। इस तरह 26 जनवरी अघोषित रूप से भारत का [[स्वतंत्रता दिवस]] बन गया था। उस दिन से [[1947]] में स्वतंत्रता प्राप्त होने तक 26 जनवरी स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://www.samaydarpan.com/republic_special/republic_day.html |title=गणतंत्र दिवस का इतिहास |accessmonthday=23 दिसंबर |accessyear=2010 |last= |first= |authorlink= |format=एच.टी.एम.एल |publisher=समय दर्पण डॉट कॉम |language=[[हिन्दी]]}}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
====भारतीय संविधान सभा==== &lt;br /&gt;
उसी समय भारतीय संविधान सभा की बैठकें होती रहीं, जिसकी पहली बैठक [[9 दिसंबर]], [[1946]] को हुई, जिसमें भारतीय नेताओं और [[अंग्रेज़]] [[कैबिनेट मिशन]] ने भाग लिया। भारत को एक संविधान देने के विषय में कई चर्चाएँ, सिफारिशें और वाद - विवाद किया गया। कई बार संशोधन करने के पश्चात भारतीय संविधान को अंतिम रूप दिया गया जो 3 वर्ष बाद यानी [[26 नवंबर]], [[1949]] को आधिकारिक रूप से अपनाया गया। [[15 अगस्त]], 1947 में अंग्रेजों ने भारत की सत्ता की बागडोर जवाहरलाल नेहरू के हाथों में दे दी, लेकिन भारत का ब्रिटेन के साथ नाता या अंग्रेजों का अधिपत्य समाप्त नहीं हुआ। भारत अभी भी एक ब्रिटिश कॉलोनी की तरह था, जहाँ कि मुद्रा पर ज्योर्ज 6 की तस्वीरें थी। आज़ादी मिलने के बाद तत्कालीन सरकार ने देश के संविधान को फिर से परिभाषित करने की जरूरत महसूस की और संविधान सभा का गठन किया जिसकी अध्यक्षता [[भीमराव आम्बेडकर|डॉ. भीमराव अम्बेडकर]] को मिली, 25 नवम्बर, 1949 को 211 विद्वानों द्वारा 2 महिने और 11 दिन में तैयार देश के संविधान को मंजूरी मिली। [[चित्र:fist repablicday.jpg|thumb|250px|सन 1950, प्रथम गणतंत्र दिवस में [[जवाहरलाल नेहरू]]]] [[24 जनवरी]], 1950 को सभी सांसदों और विधायकों ने इस पर हस्ताक्षर किए। और इसके दो दिन बाद यानी 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू कर दिया गया। इस अवसर पर [[डॉ. राजेन्द्र प्रसाद]] ने भारत के प्रथम [[राष्‍ट्रपति]] के रूप में शपथ ली तथा 21 तोपों की सलामी के बाद इर्विन स्‍टेडियम में भारतीय [[राष्‍ट्रीय ध्‍वज]] को फहराकर भारतीय गणतंत्र के ऐतिहासिक जन्‍म की घो‍षणा की थी। 26 जनवरी का महत्त्व बना‌ए रखने के लि‌ए विधान निर्मात्री सभा (कांस्टीट्यू‌एंट असेंबली) द्वारा स्वीकृत संविधान में भारत के गणतंत्र स्वरूप को मान्यता प्रदान की ग‌ई। इस तरह से 26 जनवरी एक बार फिर सुर्खियों में आ गया। यह एक संयोग ही था कि कभी भारत का पूर्ण स्वराज दिवस के रूप में मनाया जाने वाला दिन अब भारत का गणतंत्र दिवस बन गया था। '''अंग्रेजों के शासनकाल से छुटकारा पाने के 894 दिन बाद हमारा देश स्‍वतंत्र राष्ट्र''' बना। तब से आज तक हर वर्ष राष्‍ट्रभर में बड़े गर्व और हर्षोल्लास के साथ गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। तदनंतर स्वतंत्रता प्राप्ति के वास्तविक दिन 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में स्वीकार किया गया। '''यही वह दिन था जब [[1965]] में [[हिन्दी]] को भारत की [[राजभाषा]] घोषित किया गया।'''&lt;br /&gt;
====कांग्रेस अधिवेशन और मुस्लिम लीग====&lt;br /&gt;
26 जनवरी सन 1930 को ही कांग्रेस ने [[लाहौर]] अधिवेशन में [[रावी नदी|रावी]] के किनारे पूर्ण स्वतंत्रता प्रस्ताव पास करके आज़ादी का जश्न मनाया था। उसी वक़्त से सारे देश में हर साल 26 जनवरी को पूर्ण स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाने लगा था। [[जुलाई]] 1946 में संविधान सभा का चुनाव हुआ, जिसमें 296 सदस्यों की सभा में से [[मुस्लिम लीग]] को 73 और कांग्रेस को 211 स्थान मिले थे। [[चित्र:Agni-Missile.jpg|thumb|250px|left|अग्नि मिसाइल, गणतंत्र दिवस]] कांग्रेस के नेताओं ने पं. जवाहर लाल नेहरू, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, [[चक्रवर्ती राजगोपालाचारी]], [[सरदार बल्लभ भाई पटेल]], [[गोविन्द बल्लभ पन्त]], डॉ. अनुग्रह नारायण सिन्हा,श्री बी. जी. खेर, डॉ. पुरुषोत्तम दास टण्डन, [[अबुल क़लाम आज़ाद|मौलाना अबुलकलाम आज़ाद]], [[खान अब्दुल गफ़्फ़ार ख़ाँ]], श्री आसफ़ अली, श्री रफ़ी अहमद किदवाई, श्री कृष्ण सिन्हा, श्री कन्हैयालाल माणिकलाल मुन्शी, आचार्य जे. बी. कृपलानी और श्री कृष्णमाचारी आदि थे। इसके अलावा कांग्रेस सेना मेम्बरों में कांग्रेस द्वारा नामांकित सदस्यों में [[डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन]], [[डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा]], श्री एन. गोपाल स्वामी अयंगर, डॉ. बी. आर. अम्बेडकर, डॉ. एम. आर. जयकर, श्री अल्लादि कृष्ण स्वामी अय्यर, पं. हृदयनाथ कुंजरू, श्री हरी सिंह गौड़ और प्रोफेसर के. टी.शाह आदि थे। संविधान सभा में कुछ महिलायें भी थीं, जिनमें श्रीमती [[सरोजिनी नायडू]], श्रीमती दुर्गाबाई देशमुख, श्रीमती [[हंसा मेहता]], और श्रीमती रेणुका राय प्रमुख थीं। मुस्लिम लीग में नवाबज़ादा लियाक़त अली ख़ाँ, ख़्वाजा नाज़िमुद्दीम, श्री एच. एस. सुहरावर्दी, सर फ़िरोज़ ख़ाँ नून और मोहम्मद जफ़रुल्ला ख़ाँ, प्रमुख थे। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद इस सभा के अध्यक्ष थे। 9 दिसम्बर सन 1946 को संविधान सभा का पहला अधिवेशन होना निश्चित हुआ। मुस्लिम लीन ने दो संविधान सभाओं की माँग की जिसमें से एक पाकिस्तान के लिए बनाई और दूसरी भारत के लिए। &amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
====भारत का विभाजन====&lt;br /&gt;
{{Main|भारत का विभाजन}}&lt;br /&gt;
[[3 जून]] सन 1947 को माउण्ट बेटन योजना प्रस्तुत की गई, जिसमें प्रस्ताव किया गया कि भारत को दो भागों, [[भारत]] और [[पाकिस्तान]] में बाँट दिया जाए। कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों ने ही इस योजना को स्वीकार कर लिया। अप्रैल सन 1947 में [[बड़ौदा]], [[बीकानेर]], [[उदयपुर]], [[जोधपुर]], रीवा और [[पटियाला]] के देशी राज्यों के प्रतिनिधि संविधान सभा में सम्मिलित हो चुके थे। [[चित्र:Marchpast-By-National-Cadet-Corps.jpg|thumb|250px|गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय कैडेट कोर की परेड]] और 14 जुलाई सन 1947 तक केवल दो देशी राज्यों जम्मू–कश्मीर और [[हैदराबाद]] को छोड़कर बाकी देशी राज्यों के प्रतिनिधि संविधान सभा में भाग लेने आ गए थे। [[15 अगस्त]] सन [[1947]] को भारत के दो टुकड़े भारत और [[पाकिस्तान]] से होकर भारत आज़ाद हुआ। पं. जवाहर लाल नेहरू भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने और [[लाल क़िला दिल्ली|लाल क़िले]] पर [[तिरंगा]] झण्डा फहराया। अक्टूबर सन 1947 तक [[जम्मू और कश्मीर]] भी भारत में शामिल हो गया और [[नवम्बर]] सन [[1948]] में [[हैदराबाद]] भी। &lt;br /&gt;
====संविधान पारित====&lt;br /&gt;
इस प्रकार [[संसद]] भारत की मुकम्मल प्रतिनिधि सभा बन गई। 29 अगस्त सन 1947 के प्रस्ताव के अनुसार एक प्रारूप समिति क़ायम की गई, जिसके सात मेम्बर थे और [[भीमराव आम्बेडकर|डॉ. बी. आर. अम्बेडकर]] उसके चेयरमैन थे। इस समिति ने 21 फ़रवरी सन 1948 को अपना निर्णय प्रस्तुत कर दिया, जो 4 नवम्बर, सन 1948 को संसद के सामने रखा गया। इस पर 9 नवम्बर सन 1948 से 17 अक्टूबर सन 1949 तक दूसरी खुवांदगी (वाचन) चलती रही जिसमें 7635 धाराएँ पेश की गईं। 14 नवम्बर सन 1949 से 26 नवम्बर सन 1949 तक तीसरी खुवांदगी हुई और 26 नवम्बर, 1949 को संविधान पर संविधान सभा हस्ताक्षर होकर संविधान पारित हो गया। '''24 जनवरी सन 1950''' को संविधान सभा का अन्तिम अधिवेशन हुआ और इसमें नये संविधान के अनुसार [[डॉ. राजेन्द्र प्रसाद]] को भारतीय गणराज्य का प्रथम [[राष्ट्रपति]] चुना गया। '''26 जनवरी सन 1950 से नया संविधान लागू किया गया।''' उसी दिन से हर साल 26 जनवरी को भारत में गणतंत्रता दिवस मनाया जाता है।&amp;lt;ref&amp;gt;पुस्तक- '''भारतीय उत्सव और पर्व''' द्वारा- वेद प्रकाश गुप्ता&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==गणतंत्र की यात्रा==&lt;br /&gt;
58 वर्ष पहले 21 तोपों की सलामी के बाद भारतीय [[तिरंगा|राष्‍ट्रीय ध्‍वज]] को [[डॉ. राजेन्द्र प्रसाद]] ने फहरा कर [[26 जनवरी]], 1950 को भारतीय गणतंत्र के ऐतिहासिक जन्‍म की घो‍षणा की। ब्रिटिश राज से छुटकारा पाने 894 दिन बाद हमारा देश स्‍वतंत्र राज्‍य बना। तब से हर वर्ष पूरे राष्‍ट्र में बड़े उत्‍साह और गर्व से यह दिन मनाया जाता है। एक ब्रिटिश उप निवेश से एक सम्‍प्रभुतापूर्ण, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक राष्‍ट्र के रूप में भारत का निर्माण एक ऐतिहासिक घटना रही। यह लगभग 2 दशक पुरानी यात्रा थी जो 1930 में एक सपने के रूप में संकल्पित की गई और 1950 में इसे साकार किया गया। भारतीय गणतंत्र की इस यात्रा पर एक नज़र डालने से हमारे आयोजन और भी अधिक सार्थक हो जाते हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://bharat.gov.in/myindia/journey_india.php |title=भारत के गणतंत्र की यात्रा |accessmonthday=29 दिसंबर |accessyear=2010 |last= |first= |authorlink= |format=पी.एच.पी |publisher=आधिकारिक वेबासाइट भारत |language=[[हिन्दी]]}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[चित्र:Republic-Day-India.jpg|thumb|250px|left|गणतंत्र दिवस के विभिन्न दृश्य]]&lt;br /&gt;
====भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस का लाहौर सत्र====&lt;br /&gt;
गणतंत्र राष्‍ट्र के बीज [[31 दिसंबर]], [[1929]] की मध्‍य रात्रि में [[भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस]] के लाहौर सत्र में बोए गए थे। यह सत्र [[जवाहरलाल नेहरू|पंडित जवाहरलाल नेहरू]] की अध्‍यक्षता में आयोजि‍त किया गया था। उस बैठक में उपस्थित लोगों ने 26 जनवरी को &amp;quot;स्‍वतंत्रता दिवस&amp;quot; के रूप में अंकित करने की शपथ ली थी ताकि ब्रिटिश राज से पूर्ण स्‍वतंत्रता के सपने को साकार किया जा सके। लाहौर सत्र में नागरिक अवज्ञा आंदोलन का मार्ग प्रशस्‍त किया गया। यह निर्णय लिया गया कि 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्‍वराज दिवस के रूप में मनाया जाएगा। पूरे भारत से अनेक भारतीय राजनीतिक दलों और भारतीय क्रांतिकारियों ने सम्‍मान और गर्व सहित इस दिन को मनाने के प्रति एकता दर्शाई।&lt;br /&gt;
====भारतीय संविधान सभा की बैठकें====&lt;br /&gt;
[[चित्र:Celebration-Of-Republic-Day.jpg|thumb|250px|गणतंत्र दिवस मनाती लड़कियाँ]]&lt;br /&gt;
भारतीय संविधान सभा की पहली बैठक [[9 दिसंबर]], [[1946]] को की गई, जिसका गठन भारतीय नेताओं और ब्रिटिश कैबिनेट मिशन के बीच हुई बातचीत के परिणाम स्‍वरूप किया गया था। इस सभा का उद्देश्‍य भारत को एक संविधान प्रदान करना था जो दीर्घ अवधि प्रयोजन पूरे करेगा और इसलिए प्रस्‍तावित संविधान के विभिन्‍न पक्षों पर गहराई से अनुसंधान करने के लिए अनेक समितियों की नियुक्ति की गई। सिफारिशों पर चर्चा, वादविवाद किया गया और भारतीय संविधान पर अंतिम रूप देने से पहले कई बार संशोधित किया गया तथा 3 वर्ष बाद [[26 नवंबर]], [[1949]] को आधिकारिक रूप से अपनाया गया।&lt;br /&gt;
====संविधान प्रभावी==== &lt;br /&gt;
जब भारत [[15 अगस्त]], [[1947]] को एक स्‍वतंत्र राष्‍ट्र बना, इसने स्‍वतंत्रता की सच्‍ची भावना का आनन्‍द 26 जनवरी, 1950 को उठाया जब भारतीय संविधान प्रभावी हुआ। इस संविधान से भारत के नागरिकों को अपनी सरकार चुनकर स्‍वयं अपना शासन चलाने का अधिकार मिला। डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद ने गवर्नमेंट हाउस के दरबार हाल में [[भारत]] के प्रथम [[राष्‍ट्रपति]] के रूप में शपथ ली और इसके बाद राष्‍ट्रपति का काफिला 5 मील की दूरी पर स्थित इर्विन स्‍टेडियम पहुंचा जहां उन्‍होंने राष्‍ट्रीय ध्‍वज फहराया। तब से ही इस ऐतिहासिक दिवस, 26 जनवरी को पूरे देश में एक त्‍यौहार की तरह और राष्‍ट्रीय भावना के साथ मनाया जाता है। इस दिन का अपना अलग महत्‍व है जब भारतीय संविधान को अपनाया गया था। इस गणतंत्र दिवस पर महान भारतीय संविधान को पढ़कर देखें जो उदार लोकतंत्र का परिचायक है, जो इसके भण्‍डार में निहित है। &lt;br /&gt;
==सांस्‍कृतिक कार्यक्रम और आयोजन==&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;bharattable-purple&amp;quot; style=&amp;quot;margin:2px; float:right; text-align:center&amp;quot; &lt;br /&gt;
|+ '''गणतंत्र दिवस के आयोजन'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Republic-Day-New-Delhi.jpg|150px|गणतंत्र दिवस की परेड]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| &amp;lt;small&amp;gt;गणतंत्र दिवस की परेड, [[नई दिल्ली]]&amp;lt;/small&amp;gt;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Republicday-Celebration.jpg|150px|गणतंत्र दिवस मनाते बच्चे]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| &amp;lt;small&amp;gt;गणतंत्र दिवस मनाते बच्चे&amp;lt;/small&amp;gt;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Republic Day-Celebration-2.jpg|150px|एन.सी.सी. छात्र]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| &amp;lt;small&amp;gt;एन.सी.सी. छात्र&amp;lt;/small&amp;gt;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Republicday-Ralley.jpg|150px|गणतंत्र दिवस रैली]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| &amp;lt;small&amp;gt;गणतंत्र दिवस रैली&amp;lt;/small&amp;gt;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Folk-Dance-Republicday.jpg|150px|लोकनृत्य करते कलाकार]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| &amp;lt;small&amp;gt;लोकनृत्य करते कलाकार&amp;lt;/small&amp;gt;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Republic-Day.jpg|150px|गणतंत्र दिवस की परेड]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| &amp;lt;small&amp;gt;गणतंत्र दिवस की परेड&amp;lt;/small&amp;gt;&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
गणतंत्र दिवस हमारा सबसे बड़ा राष्ट्रीय त्योहार है, इस दिन राष्ट्रपति [[इंडिया गेट]] पर भारत के सब राज्यों से आए हुए प्रतिनिधियों तथा भारत की तीनों सेनाओं की सलामी लेते हैं। अनेक प्रकार की सुन्दर–सुन्दर झाँकियाँ नाच–गाने, बैण्ड–बाजे, [[हाथी]], ऊँट, घोड़ों की सवारियाँ, टेंक, तोप, समुद्री जहाज़ और हवाई जहाज़ के नमूने कृषि और उद्योग की झाँकियाँ, स्कूली बच्चों के नाच–गाने करते हुए ग्रुप राष्ट्रपति को सलामी देते हुए चलते हैं। जो कि विजय चौक से शुरू होकर लाल क़िले तक जाते हैं। इस उत्सव में किसी दूसरे देश का कोई मेहमान बुलाया जाता है। उस दिन दर्शकों की इतनी भीड़ होती है कि इंडिया गेट पर ऐसा मालूम होता है जैसे इन्सानों का समुद्र लहरा रहा हो। रात को इंडिया गेट, [[राष्ट्रपति भवन]], सेंट्रल सेक्रेटेरियट, संसद भवन तथा मुख्य सरकारी इमारतों पर रोशनी की जाती है। &lt;br /&gt;
*असली मायनों में भारत की जनता को राज्य 26 जनवरी सन 1950 से ही प्राप्त हुआ। 15 अगस्त सन् 1947 को हम आज़ाद ज़रूर हो गए थे लेकिन हमारा कोई संविधान लागू नहीं हुआ था और न ही कोई गणराज्य का राष्ट्रपति था। &lt;br /&gt;
*[[अंग्रेज़]] भारत को छोड़कर चले गए और 26 जनवरी को जनता का राज्य हुआ, इसलिए 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस और 26 जनवरी को गणतंत्रता दिवस मनाते हैं। जो जवान आज़ादी की लड़ाई में शहीद हुए उनकी याद में इंडिया गेट पर अमर ज्योति जलाई जाती है। &lt;br /&gt;
* इसके शीघ्र बाद 21 तोपों की सलामी दी जाती है, राष्‍ट्रपति महोदय द्वारा राष्‍ट्रीय ध्‍वज फहराया जाता है और [[राष्‍ट्रगान]] होता है। इस प्रकार परेड आरंभ होती है। महामहिम राष्‍ट्रपति के साथ एक उल्‍लेखनीय विदेशी राष्‍ट्र प्रमुख आते हैं, जिन्‍हें आयोजन के मुख्‍य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाता है। &lt;br /&gt;
* राष्‍ट्रपति महोदय के सामने से खुली जीपों में वीर सैनिक गुजरते हैं। [[भारत के राष्ट्रपति]], जो भारतीय सशस्‍त्र बल, के मुख्‍य कमांडर हैं, विशाल परेड की सलामी लेते हैं। भारतीय सेना द्वारा इसके नवीनतम हथियारों और बलों का प्रदर्शन किया जाता है जैसे टैंक, मिसाइल, राडार आदि। इसके शीघ्र बाद राष्ट्रपति द्वारा सशस्‍त्र सेना के सैनिकों को बहादुरी के पुरस्‍कार और मेडल दिए जाते हैं जिन्‍होंने अपने क्षेत्र में अभूतपूर्व साहस दिखाया और ऐसे नागरिकों को भी सम्‍मानित किया जाता है जिन्‍होंने विभिन्‍न परिस्थितियों में वीरता के अलग-अलग कारनामे किए। इसके बाद सशस्‍त्र सेना के हेलिकॉप्‍टर दर्शकों पर [[गुलाब]] की पंखुडियों की बारिश करते हुए फ्लाई पास्‍ट करते हैं।&lt;br /&gt;
====सांस्‍कृतिक परेड====&lt;br /&gt;
सेना की परेड के बाद रंगारंग सांस्‍कृतिक परेड होती है। विभिन्‍न राज्‍यों से आई झांकियों के रूप में भारत की समृद्ध सांस्‍कृतिक विरासत को दर्शाया जाता है। प्रत्‍येक राज्‍य अपने अनोखे त्‍यौहारों, ऐतिहासिक स्‍थलों और [[कला]] का प्रदर्शन करते हैं। यह प्रदर्शनी भारत की [[संस्कृति]] की विविधता और समृद्धि को एक त्‍यौहार का रंग देती है। विभिन्‍न सरकारी विभागों और भारत सरकार के मंत्रालयों की झांकियां भी राष्‍ट्र की प्रगति में अपने योगदान प्रस्‍तुत करती है। इस परेड का सबसे खुशनुमा हिस्‍सा तब आता है जब बच्‍चे, जिन्‍हें राष्‍ट्रीय वीरता पुरस्‍कार [[हाथी|हाथियों]] पर बैठकर सामने आते हैं। पूरे देश के स्‍कूली बच्‍चे परेड में अलग-अलग लोक नृत्‍य और देश भक्ति की धुनों पर गीत प्रस्‍तुत करते हैं। परेड में कुशल मोटर साइकिल सवार, जो सशस्‍त्र सेना कार्मिक होते हैं, अपने प्रदर्शन करते हैं। परेड का सर्वाधिक प्रतीक्षित भाग फ्लाई पास्‍ट है जो भारतीय वायु सेना द्वारा किया जाता है। फ्लाई पास्‍ट परेड का अंतिम पड़ाव है, जब भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमान राष्‍ट्रपति का अभिवादन करते हुए मंच पर से गुजरते हैं।&lt;br /&gt;
====प्रधानमंत्री की रैली====&lt;br /&gt;
गणतंत्र दिवस का आयोजन कुल मिलाकर तीन दिनों का होता है और [[27 जनवरी]] को इंडिया गेट पर इस आयोजन के बाद प्रधानमंत्री की रैली में एनसीसी केडेट्स द्वारा विभिन्‍न चौंका देने वाले प्रदर्शन और ड्रिल किए जाते हैं।&lt;br /&gt;
====लोक तरंग====&lt;br /&gt;
सात क्षेत्रीय सांस्‍कृतिक केन्‍द्रों के साथ मिलकर संस्‍कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा हर वर्ष 24 से 29 जनवरी के बीच ‘’लोक तरंग – राष्‍ट्रीय लोक नृत्‍य समारोह’’ आयोजित किया जाता है। इस आयोजन में लोगों को देश के विभिन्‍न भागों से आए रंग बिरंगे और चमकदार और वास्‍तविक लोक नृत्‍य देखने का अनोखा अवसर मिलता है।&lt;br /&gt;
====बीटिंग द रिट्रीट====&lt;br /&gt;
बीटिंग द रिट्रीट गणतंत्र दिवस आयोजनों का आधिकारिक रूप से समापन घोषित करता है। सभी महत्‍वपूर्ण सरकारी भवनों को 26 जनवरी से 29 जनवरी के बीच रोशनी से सुंदरता पूर्वक सजाया जाता है। हर वर्ष [[29 जनवरी]] की शाम को अर्थात गणतंत्र दिवस के बाद अर्थात गणतंत्र की तीसरे दिन बीटिंग द रिट्रीट आयोजन किया जाता है। यह आयोजन तीन सेनाओं के एक साथ मिलकर सामूहिक बैंड वादन से आरंभ होता है जो लोकप्रिय मार्चिंग धुनें बजाते हैं।&lt;br /&gt;
ड्रमर भी एकल प्रदर्शन (जिसे ड्रमर्स कॉल कहते हैं) करते हैं। ड्रमर्स द्वारा एबाइडिड विद मी (यह [[महात्मा गाँधी]] की प्रिय धुनों में से एक कहीं जाती है) बजाई जाती है और ट्युबुलर घंटियों द्वारा चाइम्‍स बजाई जाती हैं, जो काफ़ी दूरी पर रखी होती हैं और इससे एक मनमोहक दृश्‍य बनता है। इसके बाद रिट्रीट का बिगुल वादन होता है, जब बैंड मास्‍टर राष्‍ट्रपति के समीप जाते हैं और बैंड वापिस ले जाने की अनुमति मांगते हैं। तब सूचित किया जाता है कि समापन समारोह पूरा हो गया है। बैंड मार्च वापस जाते समय लोकप्रिय धुन '''सारे जहाँ से अच्‍छा''' बजाते हैं।&lt;br /&gt;
ठीक शाम 6 बजे बगलर्स रिट्रीट की धुन बजाते हैं और [[राष्‍ट्रीय ध्‍वज]] को उतार लिया जाता हैं तथा [[राष्‍ट्रगान]] गाया जाता है और इस प्रकार गणतंत्र दिवस के आयोजन का औपचारिक समापन होता हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://bharat.gov.in/myindia/republic_day.php |title=गणतंत्र दिवस के आयोजन |accessmonthday=23 दिसंबर |accessyear=2010 |last= |first= |authorlink= |format=पी.एच.पी |publisher=आधिकारिक वेबासाइट भारत |language=[[हिन्दी]]}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==महापुरुष कथन==&lt;br /&gt;
{| width=&amp;quot;100%&amp;quot; class=&amp;quot;bharattable-green&amp;quot; style=&amp;quot;padding-left:5px&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
{|&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Dr.Rajendra-Prasad.jpg|link=राजेन्द्र प्रसाद|border|100px|right]] [[राजेन्द्र प्रसाद|डॉ. राजेन्द्र प्रसाद]], स्‍वतंत्र भारत के प्रथम [[राष्‍ट्रपति]] ने भारतीय गणतंत्र के जन्‍म के अवसर पर देश के नागरिकों का अपने विशेष संदेश में कहा:-&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;quot;हमें स्‍वयं को आज के दिन एक शांतिपूर्ण किंतु एक ऐसे सपने को साकार करने के प्रति पुन: समर्पित करना चाहिए, जिसने हमारे राष्‍ट्रपिता और स्‍वतंत्रता संग्राम के अनेक नेताओं और सैनिकों को अपने देश में एक वर्गहीन, सहकारी, मुक्‍त और प्रसन्‍नचित्त समाज की स्‍थापना के सपने को साकार करने की प्रेरणा दी। हमें इस दिन यह याद रखना चाहिए कि आज का दिन आनन्‍द मनाने की तुलना में समर्पण का दिन है – श्रमिकों और कामगारों परिश्रमियों और विचारकों को पूरी तरह से स्‍वतंत्र, प्रसन्‍न और सांस्‍कृतिक बनाने के भव्‍य कार्य के प्रति समर्पण करने का दिन है।&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[चित्र:C-Rajagopalachari.jpg|link=सी. राजगोपालाचारी|border|100px|right]] [[सी. राजगोपालाचारी]], महामहिम, महाराज्‍यपाल ने 26 जनवरी, 1950 को ऑल इंडिया रेडियो के दिल्‍ली स्‍टेशन से प्रसारित एक वार्ता में कहा:-&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;quot;अपने कार्यालय में जाने की संध्‍या पर गणतंत्र के उदघाटन के साथ मैं भारत के पुरुषों और महिलाओं को अपनी शुभकामनाएं और बधाई देता हूँ जो अब से एक गणतंत्र के नागरिक है। मैं समाज के सभी वर्गों से मुझ पर बरसाए गए इस स्‍नेह के लिए हार्दिक धन्‍यवाद देता हूँ, जिससे मुझे कार्यालय में अपने कर्त्तव्‍यों और परम्‍पराओं का निर्वाह करने की क्षमता मिली है, अन्‍यथा मैं इससे सर्वथा अपरिचित था।&amp;quot;&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि==&lt;br /&gt;
{| width=&amp;quot;98%&amp;quot; class=&amp;quot;bharattable-purple&amp;quot; border=&amp;quot;1&amp;quot; style=&amp;quot;float:right; margin:10px&amp;quot;&lt;br /&gt;
|+ भारत के गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
! वर्ष&lt;br /&gt;
! मुख्य अतिथि&lt;br /&gt;
! देश और पद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|26 जनवरी [[2011]], 62वाँ गणतंत्र दिवस&lt;br /&gt;
|सुसिलो बाम्बांग युधोयोनो&lt;br /&gt;
|इंडोनेशिया के राष्ट्रपति&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|26 जनवरी [[2010]], 61वाँ गणतंत्र दिवस&lt;br /&gt;
|ली म्यूंग बाक&lt;br /&gt;
|कोरिया गणराज्य (दक्षिण कोरिया) के राष्ट्रपति&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|26 जनवरी [[2009]], 60वाँ गणतंत्र दिवस&lt;br /&gt;
|नूर सुल्तान नजरबायेब&lt;br /&gt;
|कज़ाख़िस्तान के राष्ट्रपति&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|26 जनवरी [[2008]], 59वाँ गणतंत्र दिवस&lt;br /&gt;
|निकोलस सर्कोजी&lt;br /&gt;
|[[फ्रांस]] के राष्ट्रपति&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|26 जनवरी [[2007]], 58वाँ गणतंत्र दिवस&lt;br /&gt;
|व्लादिमीर पुतिन&lt;br /&gt;
|रूस के राष्ट्रपति&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|26 जनवरी [[2006]], 57वाँ गणतंत्र दिवस&lt;br /&gt;
|अब्दुल्ला बिन अब्दुल अज़ीज़ अल-सऊद&lt;br /&gt;
|सउदी अरब के शाह&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|26 जनवरी [[2005]], 56वाँ गणतंत्र दिवस&lt;br /&gt;
|वांगचुक&lt;br /&gt;
|[[भूटान]] नरेश&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|26 जनवरी [[2004]], 55वाँ गणतंत्र दिवस&lt;br /&gt;
|लुईज़ इनासियो लूला द सिल्वा&lt;br /&gt;
|ब्राज़ील के राष्ट्रपति&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|26 जनवरी [[2003]], 54वाँ गणतंत्र दिवस&lt;br /&gt;
|मोहम्मद ख़ातमी&lt;br /&gt;
|[[ईरान]] के राष्ट्रपति&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|26 जनवरी [[1950]], प्रथम गणतंत्र दिवस&lt;br /&gt;
|सुकर्णो&lt;br /&gt;
|इंडोनेशियाई राष्ट्रपति&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति&lt;br /&gt;
|आधार=&lt;br /&gt;
|प्रारम्भिक=&lt;br /&gt;
|माध्यमिक=माध्यमिक1&lt;br /&gt;
|पूर्णता=&lt;br /&gt;
|शोध=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://bharat.gov.in/myindia/photogal/photogallery.php गणतंत्र दिवस समारोह और इतिहास की झलकें]&lt;br /&gt;
*[http://yehamarabhavishyahai.mywebdunia.com/2009/01/24/1232788440000.html भारतीय गणतंत्र दिवस]&lt;br /&gt;
*[http://aviratyatra26jan.blogspot.com/2009/01/blog-post.html गणतंत्र दिवस के आयोजन]&lt;br /&gt;
*[http://www.tarakash.com/2/magazine/special/775-story-of-26-january-republic-day.html गणतंत्र दिवस कभी ‘स्वतंत्रता दिवस’ भी था]&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{राष्ट्रीय दिवस}}{{भारत गणराज्य}}{{पर्व और त्योहार}}&lt;br /&gt;
[[Category:राष्ट्रीय पर्व और त्योहार]]&lt;br /&gt;
[[Category:राष्ट्रीय दिवस]]&lt;br /&gt;
[[Category:इतिहास कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:महत्त्वपूर्ण_दिवस]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<title>गणतंत्र दिवस</title>
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[[चित्र:Tricolor.jpg|thumb|250px|[[राष्‍ट्रीय ध्‍वज]]]]&lt;br /&gt;
[[भारत]] में [[26 जनवरी]] को '''गणतंत्र दिवस''' (Republic Day) मनाया जाता है और यह भारत का एक राष्ट्रीय पर्व है। हर वर्ष 26 जनवरी एक ऐसा दिन है जब प्रत्‍येक भारतीय के मन में देश भक्ति की लहर और मातृभूमि के प्रति अपार स्‍नेह भर उठता है। ऐसी अनेक महत्त्वपूर्ण स्‍मृतियां हैं जो इस दिन के साथ जुड़ी हुई है। &lt;br /&gt;
* 26 जनवरी, [[1950]] को देश का संविधान लागू हुआ और इस प्रकार यह सरकार के संसदीय रूप के साथ एक संप्रभुताशाली समाजवादी लोक‍तांत्रिक गणतंत्र के रूप में भारत देश सामने आया। &lt;br /&gt;
* भारतीय संविधान, जिसे देश की सरकार की रूपरेखा का प्रतिनिधित्‍व करने वाले पर्याप्‍त विचार विमर्श के बाद विधान मंडल द्वारा अपनाया गया, तब से 26 जनवरी को भारत के गणतंत्र दिवस के रूप में भारी उत्‍साह के साथ मनाया जाता है और इसे राष्‍ट्रीय अवकाश घोषित किया जाता है। &lt;br /&gt;
* यह आयोजन हमें देश के सभी शहीदों के नि:स्‍वार्थ बलिदान की याद दिलाता है, जिन्‍होंने आज़ादी के संघर्ष में अपने जीवन बलिदान कर दिए और विदेशी आक्रमणों के विरुद्ध अनेक लड़ाइयाँ जीती।&lt;br /&gt;
==इतिहास==&lt;br /&gt;
[[भारत का संविधान|भारत के संविधान]] को लागू किए जाने से पहले भी 26 जनवरी का बहुत महत्त्व था। 26 जनवरी को विशेष दिन के रूप में चिह्नित किया गया था, [[31 दिसंबर]] सन [[1929]] के मध्‍य रात्रि में राष्‍ट्र को स्वतंत्र बनाने की पहल करते हुए [[लाहौर]] में [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] का अधिवेशन [[जवाहरलाल नेहरू|पंडित जवाहरलाल नेहरू]] की अध्यक्षता में हु‌आ जिसमें प्रस्ताव पारित कर इस बात की घोषणा की ग‌ई कि यदि [[अंग्रेज़]] सरकार 26 जनवरी, [[1930]] तक भारत को उपनिवेश का पद (डोमीनियन स्टेटस) नहीं प्रदान करेगी तो भारत अपने को पूर्ण स्वतंत्र घोषित कर देगा। [[चित्र:Gurkha-Rifles.jpg|thumb|300px|left|गणतंत्र दिवस पर गुरखा राइफल्स की परेड]] 26 जनवरी, 1930 तक जब अंग्रेज़ सरकार ने कुछ नहीं किया तब कांग्रेस ने उस दिन भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के निश्चय की घोषणा की और अपना सक्रिय आंदोलन आरंभ किया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के इस लाहौर अधिवेशन में पहली बार [[तिरंगा|तिरंगे झंडे]] को फहराया गया था परंतु साथ ही इस दिन सर्वसम्मति से एक और महत्त्वपूर्ण फैसला लिया गया कि प्रतिवर्ष 26 जनवरी का दिन पूर्ण स्वराज दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन सभी स्वतंत्रता सैनानी पूर्ण स्वराज का प्रचार करेंगे। इस तरह 26 जनवरी अघोषित रूप से भारत का [[स्वतंत्रता दिवस]] बन गया था। उस दिन से [[1947]] में स्वतंत्रता प्राप्त होने तक 26 जनवरी स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://www.samaydarpan.com/republic_special/republic_day.html |title=गणतंत्र दिवस का इतिहास |accessmonthday=23 दिसंबर |accessyear=2010 |last= |first= |authorlink= |format=एच.टी.एम.एल |publisher=समय दर्पण डॉट कॉम |language=[[हिन्दी]]}}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
====भारतीय संविधान सभा==== &lt;br /&gt;
उसी समय भारतीय संविधान सभा की बैठकें होती रहीं, जिसकी पहली बैठक [[9 दिसंबर]], [[1946]] को हुई, जिसमें भारतीय नेताओं और [[अंग्रेज़]] [[कैबिनेट मिशन]] ने भाग लिया। भारत को एक संविधान देने के विषय में कई चर्चाएँ, सिफारिशें और वाद - विवाद किया गया। कई बार संशोधन करने के पश्चात भारतीय संविधान को अंतिम रूप दिया गया जो 3 वर्ष बाद यानी [[26 नवंबर]], [[1949]] को आधिकारिक रूप से अपनाया गया। [[15 अगस्त]], 1947 में अंग्रेजों ने भारत की सत्ता की बागडोर जवाहरलाल नेहरू के हाथों में दे दी, लेकिन भारत का ब्रिटेन के साथ नाता या अंग्रेजों का अधिपत्य समाप्त नहीं हुआ। भारत अभी भी एक ब्रिटिश कॉलोनी की तरह था, जहाँ कि मुद्रा पर ज्योर्ज 6 की तस्वीरें थी। आज़ादी मिलने के बाद तत्कालीन सरकार ने देश के संविधान को फिर से परिभाषित करने की जरूरत महसूस की और संविधान सभा का गठन किया जिसकी अध्यक्षता [[भीमराव आम्बेडकर|डॉ. भीमराव अम्बेडकर]] को मिली, 25 नवम्बर, 1949 को 211 विद्वानों द्वारा 2 महिने और 11 दिन में तैयार देश के संविधान को मंजूरी मिली। [[चित्र:fist repablicday.jpg|thumb|250px|सन 1950, प्रथम गणतंत्र दिवस में [[जवाहरलाल नेहरू]]]] [[24 जनवरी]], 1950 को सभी सांसदों और विधायकों ने इस पर हस्ताक्षर किए। और इसके दो दिन बाद यानी 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू कर दिया गया। इस अवसर पर [[डॉ. राजेन्द्र प्रसाद]] ने भारत के प्रथम [[राष्‍ट्रपति]] के रूप में शपथ ली तथा 21 तोपों की सलामी के बाद इर्विन स्‍टेडियम में भारतीय [[राष्‍ट्रीय ध्‍वज]] को फहराकर भारतीय गणतंत्र के ऐतिहासिक जन्‍म की घो‍षणा की थी। 26 जनवरी का महत्त्व बना‌ए रखने के लि‌ए विधान निर्मात्री सभा (कांस्टीट्यू‌एंट असेंबली) द्वारा स्वीकृत संविधान में भारत के गणतंत्र स्वरूप को मान्यता प्रदान की ग‌ई। इस तरह से 26 जनवरी एक बार फिर सुर्खियों में आ गया। यह एक संयोग ही था कि कभी भारत का पूर्ण स्वराज दिवस के रूप में मनाया जाने वाला दिन अब भारत का गणतंत्र दिवस बन गया था। '''अंग्रेजों के शासनकाल से छुटकारा पाने के 894 दिन बाद हमारा देश स्‍वतंत्र राष्ट्र''' बना। तब से आज तक हर वर्ष राष्‍ट्रभर में बड़े गर्व और हर्षोल्लास के साथ गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। तदनंतर स्वतंत्रता प्राप्ति के वास्तविक दिन 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में स्वीकार किया गया। '''यही वह दिन था जब [[1965]] में [[हिन्दी]] को भारत की [[राजभाषा]] घोषित किया गया।'''&lt;br /&gt;
====कांग्रेस अधिवेशन और मुस्लिम लीग====&lt;br /&gt;
26 जनवरी सन 1930 को ही कांग्रेस ने [[लाहौर]] अधिवेशन में [[रावी नदी|रावी]] के किनारे पूर्ण स्वतंत्रता प्रस्ताव पास करके आज़ादी का जश्न मनाया था। उसी वक़्त से सारे देश में हर साल 26 जनवरी को पूर्ण स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाने लगा था। [[जुलाई]] 1946 में संविधान सभा का चुनाव हुआ, जिसमें 296 सदस्यों की सभा में से [[मुस्लिम लीग]] को 73 और कांग्रेस को 211 स्थान मिले थे। [[चित्र:Agni-Missile.jpg|thumb|250px|left|अग्नि मिसाइल, गणतंत्र दिवस]] कांग्रेस के नेताओं ने पं. जवाहर लाल नेहरू, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, [[चक्रवर्ती राजगोपालाचारी]], [[सरदार बल्लभ भाई पटेल]], [[गोविन्द बल्लभ पन्त]], डॉ.[[अनुग्रह नारायण सिन्हा]],श्री बी. जी. खेर, डॉ. पुरुषोत्तम दास टण्डन, [[अबुल क़लाम आज़ाद|मौलाना अबुलकलाम आज़ाद]], [[खान अब्दुल गफ़्फ़ार ख़ाँ]], श्री आसफ़ अली, श्री रफ़ी अहमद किदवाई, श्री कृष्ण सिन्हा, श्री कन्हैयालाल माणिकलाल मुन्शी, आचार्य जे. बी. कृपलानी और श्री कृष्णमाचारी आदि थे। इसके अलावा कांग्रेस सेना मेम्बरों में कांग्रेस द्वारा नामांकित सदस्यों में [[डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन]], [[डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा]], श्री एन. गोपाल स्वामी अयंगर, डॉ. बी. आर. अम्बेडकर, डॉ. एम. आर. जयकर, श्री अल्लादि कृष्ण स्वामी अय्यर, पं. हृदयनाथ कुंजरू, श्री हरी सिंह गौड़ और प्रोफेसर के. टी.शाह आदि थे। संविधान सभा में कुछ महिलायें भी थीं, जिनमें श्रीमती [[सरोजिनी नायडू]], श्रीमती दुर्गाबाई देशमुख, श्रीमती [[हंसा मेहता]], और श्रीमती रेणुका राय प्रमुख थीं। मुस्लिम लीग में नवाबज़ादा लियाक़त अली ख़ाँ, ख़्वाजा नाज़िमुद्दीम, श्री एच. एस. सुहरावर्दी, सर फ़िरोज़ ख़ाँ नून और मोहम्मद जफ़रुल्ला ख़ाँ, प्रमुख थे। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद इस सभा के अध्यक्ष थे। 9 दिसम्बर सन 1946 को संविधान सभा का पहला अधिवेशन होना निश्चित हुआ। मुस्लिम लीन ने दो संविधान सभाओं की माँग की जिसमें से एक पाकिस्तान के लिए बनाई और दूसरी भारत के लिए। &amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
====भारत का विभाजन====&lt;br /&gt;
{{Main|भारत का विभाजन}}&lt;br /&gt;
[[3 जून]] सन 1947 को माउण्ट बेटन योजना प्रस्तुत की गई, जिसमें प्रस्ताव किया गया कि भारत को दो भागों, [[भारत]] और [[पाकिस्तान]] में बाँट दिया जाए। कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों ने ही इस योजना को स्वीकार कर लिया। अप्रैल सन 1947 में [[बड़ौदा]], [[बीकानेर]], [[उदयपुर]], [[जोधपुर]], रीवा और [[पटियाला]] के देशी राज्यों के प्रतिनिधि संविधान सभा में सम्मिलित हो चुके थे। [[चित्र:Marchpast-By-National-Cadet-Corps.jpg|thumb|250px|गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय कैडेट कोर की परेड]] और 14 जुलाई सन 1947 तक केवल दो देशी राज्यों जम्मू–कश्मीर और [[हैदराबाद]] को छोड़कर बाकी देशी राज्यों के प्रतिनिधि संविधान सभा में भाग लेने आ गए थे। [[15 अगस्त]] सन [[1947]] को भारत के दो टुकड़े भारत और [[पाकिस्तान]] से होकर भारत आज़ाद हुआ। पं. जवाहर लाल नेहरू भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने और [[लाल क़िला दिल्ली|लाल क़िले]] पर [[तिरंगा]] झण्डा फहराया। अक्टूबर सन 1947 तक [[जम्मू और कश्मीर]] भी भारत में शामिल हो गया और [[नवम्बर]] सन [[1948]] में [[हैदराबाद]] भी। &lt;br /&gt;
====संविधान पारित====&lt;br /&gt;
इस प्रकार [[संसद]] भारत की मुकम्मल प्रतिनिधि सभा बन गई। 29 अगस्त सन 1947 के प्रस्ताव के अनुसार एक प्रारूप समिति क़ायम की गई, जिसके सात मेम्बर थे और [[भीमराव आम्बेडकर|डॉ. बी. आर. अम्बेडकर]] उसके चेयरमैन थे। इस समिति ने 21 फ़रवरी सन 1948 को अपना निर्णय प्रस्तुत कर दिया, जो 4 नवम्बर, सन 1948 को संसद के सामने रखा गया। इस पर 9 नवम्बर सन 1948 से 17 अक्टूबर सन 1949 तक दूसरी खुवांदगी (वाचन) चलती रही जिसमें 7635 धाराएँ पेश की गईं। 14 नवम्बर सन 1949 से 26 नवम्बर सन 1949 तक तीसरी खुवांदगी हुई और 26 नवम्बर, 1949 को संविधान पर संविधान सभा हस्ताक्षर होकर संविधान पारित हो गया। '''24 जनवरी सन 1950''' को संविधान सभा का अन्तिम अधिवेशन हुआ और इसमें नये संविधान के अनुसार [[डॉ. राजेन्द्र प्रसाद]] को भारतीय गणराज्य का प्रथम [[राष्ट्रपति]] चुना गया। '''26 जनवरी सन 1950 से नया संविधान लागू किया गया।''' उसी दिन से हर साल 26 जनवरी को भारत में गणतंत्रता दिवस मनाया जाता है।&amp;lt;ref&amp;gt;पुस्तक- '''भारतीय उत्सव और पर्व''' द्वारा- वेद प्रकाश गुप्ता&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==गणतंत्र की यात्रा==&lt;br /&gt;
58 वर्ष पहले 21 तोपों की सलामी के बाद भारतीय [[तिरंगा|राष्‍ट्रीय ध्‍वज]] को [[डॉ. राजेन्द्र प्रसाद]] ने फहरा कर [[26 जनवरी]], 1950 को भारतीय गणतंत्र के ऐतिहासिक जन्‍म की घो‍षणा की। ब्रिटिश राज से छुटकारा पाने 894 दिन बाद हमारा देश स्‍वतंत्र राज्‍य बना। तब से हर वर्ष पूरे राष्‍ट्र में बड़े उत्‍साह और गर्व से यह दिन मनाया जाता है। एक ब्रिटिश उप निवेश से एक सम्‍प्रभुतापूर्ण, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक राष्‍ट्र के रूप में भारत का निर्माण एक ऐतिहासिक घटना रही। यह लगभग 2 दशक पुरानी यात्रा थी जो 1930 में एक सपने के रूप में संकल्पित की गई और 1950 में इसे साकार किया गया। भारतीय गणतंत्र की इस यात्रा पर एक नज़र डालने से हमारे आयोजन और भी अधिक सार्थक हो जाते हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://bharat.gov.in/myindia/journey_india.php |title=भारत के गणतंत्र की यात्रा |accessmonthday=29 दिसंबर |accessyear=2010 |last= |first= |authorlink= |format=पी.एच.पी |publisher=आधिकारिक वेबासाइट भारत |language=[[हिन्दी]]}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[चित्र:Republic-Day-India.jpg|thumb|250px|left|गणतंत्र दिवस के विभिन्न दृश्य]]&lt;br /&gt;
====भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस का लाहौर सत्र====&lt;br /&gt;
गणतंत्र राष्‍ट्र के बीज [[31 दिसंबर]], [[1929]] की मध्‍य रात्रि में [[भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस]] के लाहौर सत्र में बोए गए थे। यह सत्र [[जवाहरलाल नेहरू|पंडित जवाहरलाल नेहरू]] की अध्‍यक्षता में आयोजि‍त किया गया था। उस बैठक में उपस्थित लोगों ने 26 जनवरी को &amp;quot;स्‍वतंत्रता दिवस&amp;quot; के रूप में अंकित करने की शपथ ली थी ताकि ब्रिटिश राज से पूर्ण स्‍वतंत्रता के सपने को साकार किया जा सके। लाहौर सत्र में नागरिक अवज्ञा आंदोलन का मार्ग प्रशस्‍त किया गया। यह निर्णय लिया गया कि 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्‍वराज दिवस के रूप में मनाया जाएगा। पूरे भारत से अनेक भारतीय राजनीतिक दलों और भारतीय क्रांतिकारियों ने सम्‍मान और गर्व सहित इस दिन को मनाने के प्रति एकता दर्शाई।&lt;br /&gt;
====भारतीय संविधान सभा की बैठकें====&lt;br /&gt;
[[चित्र:Celebration-Of-Republic-Day.jpg|thumb|250px|गणतंत्र दिवस मनाती लड़कियाँ]]&lt;br /&gt;
भारतीय संविधान सभा की पहली बैठक [[9 दिसंबर]], [[1946]] को की गई, जिसका गठन भारतीय नेताओं और ब्रिटिश कैबिनेट मिशन के बीच हुई बातचीत के परिणाम स्‍वरूप किया गया था। इस सभा का उद्देश्‍य भारत को एक संविधान प्रदान करना था जो दीर्घ अवधि प्रयोजन पूरे करेगा और इसलिए प्रस्‍तावित संविधान के विभिन्‍न पक्षों पर गहराई से अनुसंधान करने के लिए अनेक समितियों की नियुक्ति की गई। सिफारिशों पर चर्चा, वादविवाद किया गया और भारतीय संविधान पर अंतिम रूप देने से पहले कई बार संशोधित किया गया तथा 3 वर्ष बाद [[26 नवंबर]], [[1949]] को आधिकारिक रूप से अपनाया गया।&lt;br /&gt;
====संविधान प्रभावी==== &lt;br /&gt;
जब भारत [[15 अगस्त]], [[1947]] को एक स्‍वतंत्र राष्‍ट्र बना, इसने स्‍वतंत्रता की सच्‍ची भावना का आनन्‍द 26 जनवरी, 1950 को उठाया जब भारतीय संविधान प्रभावी हुआ। इस संविधान से भारत के नागरिकों को अपनी सरकार चुनकर स्‍वयं अपना शासन चलाने का अधिकार मिला। डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद ने गवर्नमेंट हाउस के दरबार हाल में [[भारत]] के प्रथम [[राष्‍ट्रपति]] के रूप में शपथ ली और इसके बाद राष्‍ट्रपति का काफिला 5 मील की दूरी पर स्थित इर्विन स्‍टेडियम पहुंचा जहां उन्‍होंने राष्‍ट्रीय ध्‍वज फहराया। तब से ही इस ऐतिहासिक दिवस, 26 जनवरी को पूरे देश में एक त्‍यौहार की तरह और राष्‍ट्रीय भावना के साथ मनाया जाता है। इस दिन का अपना अलग महत्‍व है जब भारतीय संविधान को अपनाया गया था। इस गणतंत्र दिवस पर महान भारतीय संविधान को पढ़कर देखें जो उदार लोकतंत्र का परिचायक है, जो इसके भण्‍डार में निहित है। &lt;br /&gt;
==सांस्‍कृतिक कार्यक्रम और आयोजन==&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;bharattable-purple&amp;quot; style=&amp;quot;margin:2px; float:right; text-align:center&amp;quot; &lt;br /&gt;
|+ '''गणतंत्र दिवस के आयोजन'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Republic-Day-New-Delhi.jpg|150px|गणतंत्र दिवस की परेड]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| &amp;lt;small&amp;gt;गणतंत्र दिवस की परेड, [[नई दिल्ली]]&amp;lt;/small&amp;gt;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Republicday-Celebration.jpg|150px|गणतंत्र दिवस मनाते बच्चे]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| &amp;lt;small&amp;gt;गणतंत्र दिवस मनाते बच्चे&amp;lt;/small&amp;gt;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Republic Day-Celebration-2.jpg|150px|एन.सी.सी. छात्र]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| &amp;lt;small&amp;gt;एन.सी.सी. छात्र&amp;lt;/small&amp;gt;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Republicday-Ralley.jpg|150px|गणतंत्र दिवस रैली]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| &amp;lt;small&amp;gt;गणतंत्र दिवस रैली&amp;lt;/small&amp;gt;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Folk-Dance-Republicday.jpg|150px|लोकनृत्य करते कलाकार]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| &amp;lt;small&amp;gt;लोकनृत्य करते कलाकार&amp;lt;/small&amp;gt;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Republic-Day.jpg|150px|गणतंत्र दिवस की परेड]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| &amp;lt;small&amp;gt;गणतंत्र दिवस की परेड&amp;lt;/small&amp;gt;&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
गणतंत्र दिवस हमारा सबसे बड़ा राष्ट्रीय त्योहार है, इस दिन राष्ट्रपति [[इंडिया गेट]] पर भारत के सब राज्यों से आए हुए प्रतिनिधियों तथा भारत की तीनों सेनाओं की सलामी लेते हैं। अनेक प्रकार की सुन्दर–सुन्दर झाँकियाँ नाच–गाने, बैण्ड–बाजे, [[हाथी]], ऊँट, घोड़ों की सवारियाँ, टेंक, तोप, समुद्री जहाज़ और हवाई जहाज़ के नमूने कृषि और उद्योग की झाँकियाँ, स्कूली बच्चों के नाच–गाने करते हुए ग्रुप राष्ट्रपति को सलामी देते हुए चलते हैं। जो कि विजय चौक से शुरू होकर लाल क़िले तक जाते हैं। इस उत्सव में किसी दूसरे देश का कोई मेहमान बुलाया जाता है। उस दिन दर्शकों की इतनी भीड़ होती है कि इंडिया गेट पर ऐसा मालूम होता है जैसे इन्सानों का समुद्र लहरा रहा हो। रात को इंडिया गेट, [[राष्ट्रपति भवन]], सेंट्रल सेक्रेटेरियट, संसद भवन तथा मुख्य सरकारी इमारतों पर रोशनी की जाती है। &lt;br /&gt;
*असली मायनों में भारत की जनता को राज्य 26 जनवरी सन 1950 से ही प्राप्त हुआ। 15 अगस्त सन् 1947 को हम आज़ाद ज़रूर हो गए थे लेकिन हमारा कोई संविधान लागू नहीं हुआ था और न ही कोई गणराज्य का राष्ट्रपति था। &lt;br /&gt;
*[[अंग्रेज़]] भारत को छोड़कर चले गए और 26 जनवरी को जनता का राज्य हुआ, इसलिए 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस और 26 जनवरी को गणतंत्रता दिवस मनाते हैं। जो जवान आज़ादी की लड़ाई में शहीद हुए उनकी याद में इंडिया गेट पर अमर ज्योति जलाई जाती है। &lt;br /&gt;
* इसके शीघ्र बाद 21 तोपों की सलामी दी जाती है, राष्‍ट्रपति महोदय द्वारा राष्‍ट्रीय ध्‍वज फहराया जाता है और [[राष्‍ट्रगान]] होता है। इस प्रकार परेड आरंभ होती है। महामहिम राष्‍ट्रपति के साथ एक उल्‍लेखनीय विदेशी राष्‍ट्र प्रमुख आते हैं, जिन्‍हें आयोजन के मुख्‍य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाता है। &lt;br /&gt;
* राष्‍ट्रपति महोदय के सामने से खुली जीपों में वीर सैनिक गुजरते हैं। [[भारत के राष्ट्रपति]], जो भारतीय सशस्‍त्र बल, के मुख्‍य कमांडर हैं, विशाल परेड की सलामी लेते हैं। भारतीय सेना द्वारा इसके नवीनतम हथियारों और बलों का प्रदर्शन किया जाता है जैसे टैंक, मिसाइल, राडार आदि। इसके शीघ्र बाद राष्ट्रपति द्वारा सशस्‍त्र सेना के सैनिकों को बहादुरी के पुरस्‍कार और मेडल दिए जाते हैं जिन्‍होंने अपने क्षेत्र में अभूतपूर्व साहस दिखाया और ऐसे नागरिकों को भी सम्‍मानित किया जाता है जिन्‍होंने विभिन्‍न परिस्थितियों में वीरता के अलग-अलग कारनामे किए। इसके बाद सशस्‍त्र सेना के हेलिकॉप्‍टर दर्शकों पर [[गुलाब]] की पंखुडियों की बारिश करते हुए फ्लाई पास्‍ट करते हैं।&lt;br /&gt;
====सांस्‍कृतिक परेड====&lt;br /&gt;
सेना की परेड के बाद रंगारंग सांस्‍कृतिक परेड होती है। विभिन्‍न राज्‍यों से आई झांकियों के रूप में भारत की समृद्ध सांस्‍कृतिक विरासत को दर्शाया जाता है। प्रत्‍येक राज्‍य अपने अनोखे त्‍यौहारों, ऐतिहासिक स्‍थलों और [[कला]] का प्रदर्शन करते हैं। यह प्रदर्शनी भारत की [[संस्कृति]] की विविधता और समृद्धि को एक त्‍यौहार का रंग देती है। विभिन्‍न सरकारी विभागों और भारत सरकार के मंत्रालयों की झांकियां भी राष्‍ट्र की प्रगति में अपने योगदान प्रस्‍तुत करती है। इस परेड का सबसे खुशनुमा हिस्‍सा तब आता है जब बच्‍चे, जिन्‍हें राष्‍ट्रीय वीरता पुरस्‍कार [[हाथी|हाथियों]] पर बैठकर सामने आते हैं। पूरे देश के स्‍कूली बच्‍चे परेड में अलग-अलग लोक नृत्‍य और देश भक्ति की धुनों पर गीत प्रस्‍तुत करते हैं। परेड में कुशल मोटर साइकिल सवार, जो सशस्‍त्र सेना कार्मिक होते हैं, अपने प्रदर्शन करते हैं। परेड का सर्वाधिक प्रतीक्षित भाग फ्लाई पास्‍ट है जो भारतीय वायु सेना द्वारा किया जाता है। फ्लाई पास्‍ट परेड का अंतिम पड़ाव है, जब भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमान राष्‍ट्रपति का अभिवादन करते हुए मंच पर से गुजरते हैं।&lt;br /&gt;
====प्रधानमंत्री की रैली====&lt;br /&gt;
गणतंत्र दिवस का आयोजन कुल मिलाकर तीन दिनों का होता है और [[27 जनवरी]] को इंडिया गेट पर इस आयोजन के बाद प्रधानमंत्री की रैली में एनसीसी केडेट्स द्वारा विभिन्‍न चौंका देने वाले प्रदर्शन और ड्रिल किए जाते हैं।&lt;br /&gt;
====लोक तरंग====&lt;br /&gt;
सात क्षेत्रीय सांस्‍कृतिक केन्‍द्रों के साथ मिलकर संस्‍कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा हर वर्ष 24 से 29 जनवरी के बीच ‘’लोक तरंग – राष्‍ट्रीय लोक नृत्‍य समारोह’’ आयोजित किया जाता है। इस आयोजन में लोगों को देश के विभिन्‍न भागों से आए रंग बिरंगे और चमकदार और वास्‍तविक लोक नृत्‍य देखने का अनोखा अवसर मिलता है।&lt;br /&gt;
====बीटिंग द रिट्रीट====&lt;br /&gt;
बीटिंग द रिट्रीट गणतंत्र दिवस आयोजनों का आधिकारिक रूप से समापन घोषित करता है। सभी महत्‍वपूर्ण सरकारी भवनों को 26 जनवरी से 29 जनवरी के बीच रोशनी से सुंदरता पूर्वक सजाया जाता है। हर वर्ष [[29 जनवरी]] की शाम को अर्थात गणतंत्र दिवस के बाद अर्थात गणतंत्र की तीसरे दिन बीटिंग द रिट्रीट आयोजन किया जाता है। यह आयोजन तीन सेनाओं के एक साथ मिलकर सामूहिक बैंड वादन से आरंभ होता है जो लोकप्रिय मार्चिंग धुनें बजाते हैं।&lt;br /&gt;
ड्रमर भी एकल प्रदर्शन (जिसे ड्रमर्स कॉल कहते हैं) करते हैं। ड्रमर्स द्वारा एबाइडिड विद मी (यह [[महात्मा गाँधी]] की प्रिय धुनों में से एक कहीं जाती है) बजाई जाती है और ट्युबुलर घंटियों द्वारा चाइम्‍स बजाई जाती हैं, जो काफ़ी दूरी पर रखी होती हैं और इससे एक मनमोहक दृश्‍य बनता है। इसके बाद रिट्रीट का बिगुल वादन होता है, जब बैंड मास्‍टर राष्‍ट्रपति के समीप जाते हैं और बैंड वापिस ले जाने की अनुमति मांगते हैं। तब सूचित किया जाता है कि समापन समारोह पूरा हो गया है। बैंड मार्च वापस जाते समय लोकप्रिय धुन '''सारे जहाँ से अच्‍छा''' बजाते हैं।&lt;br /&gt;
ठीक शाम 6 बजे बगलर्स रिट्रीट की धुन बजाते हैं और [[राष्‍ट्रीय ध्‍वज]] को उतार लिया जाता हैं तथा [[राष्‍ट्रगान]] गाया जाता है और इस प्रकार गणतंत्र दिवस के आयोजन का औपचारिक समापन होता हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://bharat.gov.in/myindia/republic_day.php |title=गणतंत्र दिवस के आयोजन |accessmonthday=23 दिसंबर |accessyear=2010 |last= |first= |authorlink= |format=पी.एच.पी |publisher=आधिकारिक वेबासाइट भारत |language=[[हिन्दी]]}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==महापुरुष कथन==&lt;br /&gt;
{| width=&amp;quot;100%&amp;quot; class=&amp;quot;bharattable-green&amp;quot; style=&amp;quot;padding-left:5px&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
{|&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Dr.Rajendra-Prasad.jpg|link=राजेन्द्र प्रसाद|border|100px|right]] [[राजेन्द्र प्रसाद|डॉ. राजेन्द्र प्रसाद]], स्‍वतंत्र भारत के प्रथम [[राष्‍ट्रपति]] ने भारतीय गणतंत्र के जन्‍म के अवसर पर देश के नागरिकों का अपने विशेष संदेश में कहा:-&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;quot;हमें स्‍वयं को आज के दिन एक शांतिपूर्ण किंतु एक ऐसे सपने को साकार करने के प्रति पुन: समर्पित करना चाहिए, जिसने हमारे राष्‍ट्रपिता और स्‍वतंत्रता संग्राम के अनेक नेताओं और सैनिकों को अपने देश में एक वर्गहीन, सहकारी, मुक्‍त और प्रसन्‍नचित्त समाज की स्‍थापना के सपने को साकार करने की प्रेरणा दी। हमें इस दिन यह याद रखना चाहिए कि आज का दिन आनन्‍द मनाने की तुलना में समर्पण का दिन है – श्रमिकों और कामगारों परिश्रमियों और विचारकों को पूरी तरह से स्‍वतंत्र, प्रसन्‍न और सांस्‍कृतिक बनाने के भव्‍य कार्य के प्रति समर्पण करने का दिन है।&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[चित्र:C-Rajagopalachari.jpg|link=सी. राजगोपालाचारी|border|100px|right]] [[सी. राजगोपालाचारी]], महामहिम, महाराज्‍यपाल ने 26 जनवरी, 1950 को ऑल इंडिया रेडियो के दिल्‍ली स्‍टेशन से प्रसारित एक वार्ता में कहा:-&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;quot;अपने कार्यालय में जाने की संध्‍या पर गणतंत्र के उदघाटन के साथ मैं भारत के पुरुषों और महिलाओं को अपनी शुभकामनाएं और बधाई देता हूँ जो अब से एक गणतंत्र के नागरिक है। मैं समाज के सभी वर्गों से मुझ पर बरसाए गए इस स्‍नेह के लिए हार्दिक धन्‍यवाद देता हूँ, जिससे मुझे कार्यालय में अपने कर्त्तव्‍यों और परम्‍पराओं का निर्वाह करने की क्षमता मिली है, अन्‍यथा मैं इससे सर्वथा अपरिचित था।&amp;quot;&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि==&lt;br /&gt;
{| width=&amp;quot;98%&amp;quot; class=&amp;quot;bharattable-purple&amp;quot; border=&amp;quot;1&amp;quot; style=&amp;quot;float:right; margin:10px&amp;quot;&lt;br /&gt;
|+ भारत के गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
! वर्ष&lt;br /&gt;
! मुख्य अतिथि&lt;br /&gt;
! देश और पद&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|26 जनवरी [[2011]], 62वाँ गणतंत्र दिवस&lt;br /&gt;
|सुसिलो बाम्बांग युधोयोनो&lt;br /&gt;
|इंडोनेशिया के राष्ट्रपति&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|26 जनवरी [[2010]], 61वाँ गणतंत्र दिवस&lt;br /&gt;
|ली म्यूंग बाक&lt;br /&gt;
|कोरिया गणराज्य (दक्षिण कोरिया) के राष्ट्रपति&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|26 जनवरी [[2009]], 60वाँ गणतंत्र दिवस&lt;br /&gt;
|नूर सुल्तान नजरबायेब&lt;br /&gt;
|कज़ाख़िस्तान के राष्ट्रपति&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|26 जनवरी [[2008]], 59वाँ गणतंत्र दिवस&lt;br /&gt;
|निकोलस सर्कोजी&lt;br /&gt;
|[[फ्रांस]] के राष्ट्रपति&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|26 जनवरी [[2007]], 58वाँ गणतंत्र दिवस&lt;br /&gt;
|व्लादिमीर पुतिन&lt;br /&gt;
|रूस के राष्ट्रपति&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|26 जनवरी [[2006]], 57वाँ गणतंत्र दिवस&lt;br /&gt;
|अब्दुल्ला बिन अब्दुल अज़ीज़ अल-सऊद&lt;br /&gt;
|सउदी अरब के शाह&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|26 जनवरी [[2005]], 56वाँ गणतंत्र दिवस&lt;br /&gt;
|वांगचुक&lt;br /&gt;
|[[भूटान]] नरेश&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|26 जनवरी [[2004]], 55वाँ गणतंत्र दिवस&lt;br /&gt;
|लुईज़ इनासियो लूला द सिल्वा&lt;br /&gt;
|ब्राज़ील के राष्ट्रपति&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|26 जनवरी [[2003]], 54वाँ गणतंत्र दिवस&lt;br /&gt;
|मोहम्मद ख़ातमी&lt;br /&gt;
|[[ईरान]] के राष्ट्रपति&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|26 जनवरी [[1950]], प्रथम गणतंत्र दिवस&lt;br /&gt;
|सुकर्णो&lt;br /&gt;
|इंडोनेशियाई राष्ट्रपति&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति&lt;br /&gt;
|आधार=&lt;br /&gt;
|प्रारम्भिक=&lt;br /&gt;
|माध्यमिक=माध्यमिक1&lt;br /&gt;
|पूर्णता=&lt;br /&gt;
|शोध=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://bharat.gov.in/myindia/photogal/photogallery.php गणतंत्र दिवस समारोह और इतिहास की झलकें]&lt;br /&gt;
*[http://yehamarabhavishyahai.mywebdunia.com/2009/01/24/1232788440000.html भारतीय गणतंत्र दिवस]&lt;br /&gt;
*[http://aviratyatra26jan.blogspot.com/2009/01/blog-post.html गणतंत्र दिवस के आयोजन]&lt;br /&gt;
*[http://www.tarakash.com/2/magazine/special/775-story-of-26-january-republic-day.html गणतंत्र दिवस कभी ‘स्वतंत्रता दिवस’ भी था]&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{राष्ट्रीय दिवस}}{{भारत गणराज्य}}{{पर्व और त्योहार}}&lt;br /&gt;
[[Category:राष्ट्रीय पर्व और त्योहार]]&lt;br /&gt;
[[Category:राष्ट्रीय दिवस]]&lt;br /&gt;
[[Category:इतिहास कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:महत्त्वपूर्ण_दिवस]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BE_%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80_%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%9A%E0%A5%80&amp;diff=217514</id>
		<title>स्वतंत्रता सेनानी सूची</title>
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		<updated>2011-09-14T14:43:35Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;div style=&amp;quot;text-align:center; direction: ltr; margin-left: 1em;&amp;quot;&amp;gt;'''यहाँ आप वर्णमालानुसार स्वतंत्रता सेनानी की खोज कर सकते हैं'''&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{वर्णमाला सूची}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;table align=center width=100% cellspacing=0 cellpadding=3&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;tr&amp;gt;&amp;lt;td valign=top&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===अ===&lt;br /&gt;
*[[अंजना देवी चौधरी]]&lt;br /&gt;
*[[अनुग्रह नारायण सिन्हा]]&lt;br /&gt;
*[[अजय घोष]]&lt;br /&gt;
*[[अन्नत हरि मित्र]]&lt;br /&gt;
*[[अबुलकलाम आज़ाद]]&lt;br /&gt;
*[[अब्दुल मोमिन]]&lt;br /&gt;
*[[अब्दुल रशीद]]&lt;br /&gt;
*[[अब्दुल रहमान ख़ाँ]]&lt;br /&gt;
*[[अमर शहीद ऊधम सिंह]]&lt;br /&gt;
*[[अम्बिका चक्रवर्ती]]&lt;br /&gt;
*[[अरबिंदो घोष]]&lt;br /&gt;
*[[अरुणा आसफ़ अली]]&lt;br /&gt;
*[[अब्दुल हमीद कैसर]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===आ===&lt;br /&gt;
*[[आसफ़ अली]]&lt;br /&gt;
===इ===&lt;br /&gt;
*[[इंदिरा गाँधी]]&lt;br /&gt;
*[[इन्द्रनारायण द्विवेदी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===ई===&lt;br /&gt;
*[[ई.वी. रामास्वामी नायकर]]&lt;br /&gt;
===उ===&lt;br /&gt;
===ए===&lt;br /&gt;
*[[ए.के. गोपालन]]&lt;br /&gt;
*[[एन.एम. जोशी]]&lt;br /&gt;
*[[एन. गोपाल स्वामी आयंगर]]&lt;br /&gt;
*[[एन.जी. रंगा]]&lt;br /&gt;
*[[एन.जी. हार्डीकर]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===ओ===&lt;br /&gt;
===औ===&lt;br /&gt;
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===ॠ===&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===क===&lt;br /&gt;
*[[कन्हाई लाल दत्त]]&lt;br /&gt;
*[[कमला नेहरू]]&lt;br /&gt;
*[[कमलादेवी चट्टोपाध्याय]]&lt;br /&gt;
*[[कस्तूरबा गाँधी]]&lt;br /&gt;
*[[कुलाधर चालिहा]]&lt;br /&gt;
*[[कसीनथूनी नागेश्वर राव]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===ख===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*[[ख़ान अब्दुलगफ़्फ़ार ख़ान]]&lt;br /&gt;
*[[खुदीराम बोस]]&lt;br /&gt;
*[[खलीकुज्जमा]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===ग===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*[[गंगाधर अधिकारी]]&lt;br /&gt;
*[[गणेश दामोदर सावरकर]]&lt;br /&gt;
*[[गणेशशंकर विद्यार्थी]]&lt;br /&gt;
*[[गोपाल कृष्ण गोखले]]&lt;br /&gt;
*[[गोपीनाथ बोरदोलोई]]&lt;br /&gt;
*[[गोविंद बल्लभ पंत]]&lt;br /&gt;
*[[गंगा राम]]&lt;br /&gt;
*[[गंगा सिंह]]&lt;br /&gt;
*[[गणपत लाल वर्मा]]&lt;br /&gt;
*[[गुरुबख्श ढिल्लो]]&lt;br /&gt;
===घ===&lt;br /&gt;
*[[घनश्याम लाल जोशी]]&lt;br /&gt;
*[[घनश्याम दास बिड़ला]]&lt;br /&gt;
*[[घासी राम चौधरी]]&lt;br /&gt;
*[[घीसी लाल धाकड़]]&lt;br /&gt;
===च===&lt;br /&gt;
*[[चंद्रशेखर आज़ाद]]&lt;br /&gt;
*[[चक्रवर्ती राजगोपालाचारी]]&lt;br /&gt;
*[[चन्द्रभानु गुप्त]]&lt;br /&gt;
*[[चित्तरंजन दास]]&lt;br /&gt;
*[[चिदंबरम पिल्लई]]&lt;br /&gt;
*[[चेन्नम्मा]]&lt;br /&gt;
*[[चौधरी देवी लाल]]&lt;br /&gt;
*[[चन्द्रसिंह गढ़वाली]]&lt;br /&gt;
*[[चितरंजन मुखर्जी]]&lt;br /&gt;
*[[चित्तू पाण्डे]]&lt;br /&gt;
*[[चुन्नीलाल चित्तौड़ा]]&lt;br /&gt;
===छ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*[[छगनराज चौपासनी वाला]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===ज===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*[[जगजीवन राम]]&lt;br /&gt;
*[[जगत नारायण लाल]]&lt;br /&gt;
*[[जगतराम]]&lt;br /&gt;
*[[जगबंधु बख्शी]]&lt;br /&gt;
*[[जयप्रकाश नारायण]]&lt;br /&gt;
*[[जवाहरलाल नेहरू]]&lt;br /&gt;
*[[जयरामदास दौलतराम]]&lt;br /&gt;
*[[जमनालाल बजाज]]&lt;br /&gt;
*[[जयनारायण व्यास]]&lt;br /&gt;
*[[ज़ाकिर हुसैन]]&lt;br /&gt;
*[[जे.एम. सेनगुप्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/td&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;td valign=top&amp;gt;&lt;br /&gt;
===झ===&lt;br /&gt;
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===ट===&lt;br /&gt;
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===ठ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===ड===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===त===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*[[तिलका माँझी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===द===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*[[दादा भाई नौरोजी]]&lt;br /&gt;
*[[दुर्गा भाभी]]&lt;br /&gt;
*[[चौधरी दिगम्बर सिंह|दिगम्बर सिंह चौधरी]]&lt;br /&gt;
*[[दिनेश चंद्र मजूमदार]]&lt;br /&gt;
*[[दुर्गाबाई देशमुख]]&lt;br /&gt;
===ध===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===न===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*[[नगेन्द्र बाला]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===प===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*[[प्रफुल्लचंद चाकी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===फ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*[[फ़ीरोज़ गाँधी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===ब===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*[[बंसीलाल]]&lt;br /&gt;
*[[बटुकेश्वर दत्त]]&lt;br /&gt;
*[[बलवंत सांवलराम देशपाण्डे]]&lt;br /&gt;
*[[बाल गंगाधर तिलक]]&lt;br /&gt;
*[[बिधान चंद्र राय]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===भ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*[[भगतसिंह]]&lt;br /&gt;
*[[भगवान दास]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===म===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*[[मदनमोहन मालवीय]]&lt;br /&gt;
*[[महात्मा गाँधी]]&lt;br /&gt;
*[[मदन लाल ढींगरा]]&lt;br /&gt;
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===य===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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===र===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*[[राजगुरु]]&lt;br /&gt;
*[[राजेन्द्र प्रसाद]]&lt;br /&gt;
*[[राम मनोहर लोहिया]]&lt;br /&gt;
*[[राम प्रसाद बिस्मिल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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===ल===&lt;br /&gt;
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*[[लाला लाजपत राय]]&lt;br /&gt;
*[[लाला हरदयाल]]&lt;br /&gt;
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===व===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*[[विजयलक्ष्मी पण्डित]]&lt;br /&gt;
*[[विनोबा भावे]]&lt;br /&gt;
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===स===&lt;br /&gt;
*[[सरदार पटेल]]&lt;br /&gt;
*[[सत्येन्द्र नारायण सिंह]]&lt;br /&gt;
*[[सरोजिनी नायडू]]&lt;br /&gt;
*[[सुखदेव]]&lt;br /&gt;
*[[सुभद्रा कुमारी चौहान]]&lt;br /&gt;
*[[सुभाष चंद्र बोस]]&lt;br /&gt;
*[[सुशीला दीदी]]&lt;br /&gt;
*[[सुचेता कृपलानी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===ह===&lt;br /&gt;
*[[हंसा मेहता]]&lt;br /&gt;
*[[हनुमान प्रसाद पोद्दार]]&lt;br /&gt;
*[[हिराली चनया दासप्पा]] &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===त्र===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===ज्ञ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*[[ज्ञानचंद्र मजूमदार]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/td&amp;gt;&amp;lt;/tr&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/table&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्रता सेनानी}}&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता सेनानी]][[Category:इतिहास कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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		<author><name>B Narayan</name></author>
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[[अजय घोष]] '''·''' [[अन्नत हरि मित्र]] '''·'''  [[अनुग्रह नारायण सिन्हा]] '''·''' [[अबुलकलाम आज़ाद]] '''·''' [[अब्दुल मोमिन]] '''·''' [[अब्दुल रशीद]] '''·''' [[अब्दुल रहमान ख़ाँ]] '''·''' [[अम्बिका चक्रवर्ती]] '''·''' [[इंदिरा गाँधी]] '''·''' [[एन.एम. जोशी]] '''·''' [[एन. गोपाल स्वामी आयंगर]] '''·''' [[एन.जी. रंगा]] '''·''' [[एन.जी. हार्डीकर]] '''·''' [[कन्हाई लाल दत्त]] '''·''' [[कमला नेहरू]] '''·'''  [[अरबिंदो घोष]] '''·'''  [[कमलादेवी चट्टोपाध्याय]] '''·'''  [[कस्तूरबा गाँधी]] '''·'''  [[ख़ान अब्दुलगफ़्फ़ार ख़ान]] '''·'''  [[खुदीराम बोस]] '''·'''  [[गोविंद बल्लभ पंत]] '''·'''  [[चंद्रशेखर आज़ाद]] '''·'''  [[अमर शहीद ऊधम सिंह|ऊधम सिंह]] '''·'''  [[जवाहरलाल नेहरू]] '''·'''  [[बाल गंगाधर तिलक]] '''·'''  [[महात्मा गाँधी]] '''·'''  [[राजगुरु]] '''·'''  [[राजेन्द्र प्रसाद]] '''·'''  [[वीर सावरकर]] '''·'''  [[विनोबा भावे]] '''·'''  [[दुर्गा भाभी]] '''·'''  [[सरोजिनी नायडू]] '''·'''  [[भगतसिंह]] '''·'''  [[सुखदेव]] '''·'''  [[सुभाष चंद्र बोस]] '''·'''  [[लाला लाजपत राय]] '''·'''  [[विपिन चन्द्र पाल]] '''·'''  [[जयप्रकाश नारायण]] '''·'''  [[सरदार पटेल|सरदार वल्लभ भाई पटेल]] '''·'''  [[मदनमोहन मालवीय]] '''·'''  [[विजयलक्ष्मी पण्डित]] '''·'''  [[सुशीला दीदी]] '''·'''  [[गणेशशंकर विद्यार्थी]] '''·'''  [[भगवान दास|भगवान दास]] '''·'''  [[चक्रवर्ती राजगोपालाचारी]] '''·'''  [[बिधान चंद्र राय]] '''·'''  [[एनी बेसेंट]] '''·'''  [[सुभद्रा कुमारी चौहान]] '''·'''  [[दादा भाई नौरोजी]] '''·'''  [[जगजीवन राम]] '''·''' [[अनन्त हरि मित्र]] '''·''' [[राम मनोहर लोहिया]] '''·'''  [[तिलका माँझी]] '''·'''  [[चौधरी देवी लाल]] '''·'''  [[अरुणा आसफ़ अली]] '''·'''  [[प्रफुल्लचंद चाकी]] '''·'''  [[चित्तरंजन दास]] '''·'''  [[बंसीलाल]] '''·'''  [[गोपाल कृष्ण गोखले]] '''·'''  [[जगतराम]] '''·''' [[लाला हरदयाल]] '''·''' [[हंसा मेहता]] '''·''' [[जगबंधु बख्शी]] '''·''' [[गणेश दामोदर सावरकर]] '''·''' [[बटुकेश्वर दत्त]] '''·''' [[चिदंबरम पिल्लई]] '''·''' [[गंगाधर अधिकारी]] '''·''' [[चन्द्रभानु गुप्त]] '''·''' [[कुलाधर चालिहा]] '''·''' [[जगत नारायण लाल]] '''·''' [[फ़ीरोज़ गाँधी]] '''·''' [[एच. सी. दासप्पा|हिराली चनया दासप्पा]] '''·''' [[पद्मजा नायडू]] '''·''' [[हनुमान प्रसाद पोद्दार]] '''·''' [[अंजना देवी चौधरी]] '''·''' [[इन्द्रनारायण द्विवेदी]] '''·''' [[ई.वी. रामास्वामी नायकर]] '''·''' [[ए.के. गोपालन]] '''·''' [[घनश्याम लाल जोशी]] '''·''' [[जयरामदास दौलतराम]] '''·''' [[ज्ञानचंद्र मजूमदार]] '''·''' [[छगनराज चौपासनी वाला]] '''·''' [[बलवंत सांवलराम देशपाण्डे]] '''·''' [[राम प्रसाद बिस्मिल]]  '''·''' [[ठाकुर निरंजन सिंह]] '''·''' [[केदारेश्वर सेन गुप्ता]] '''·''' [[टी. बी. कुन्हा]] '''·''' [[कसीनथूनी नागेश्वर राव]] '''·''' [[खलीकुज्जमा]] '''·''' [[गंगा राम]] '''·''' [[गंगा सिंह]] '''·''' [[गणपत लाल वर्मा]] '''·''' [[गुरुबख्श ढिल्लो]] '''·''' [[घनश्याम दास बिड़ला]] '''·''' [[घासी राम चौधरी]] '''·''' [[घीसी लाल धाकड़]] '''·''' [[चन्द्रसिंह गढ़वाली]] '''·''' [[चितरंजन मुखर्जी]] '''·''' [[चित्तू पाण्डे]] '''·''' [[चुन्नीलाल चित्तौड़ा]] '''·''' [[जमनालाल बजाज]] '''·''' [[जयनारायण व्यास]] '''·''' [[जे.एम. सेनगुप्ता]] '''·''' [[ज़ाकिर हुसैन]] '''·''' [[दिनेश चंद्र मजूमदार]] '''·''' [[दुर्गाबाई देशमुख]] '''·''' [[विट्ठलदास झवेरभाई पटेल]] '''·''' [[मदन लाल ढींगरा]] '''·''' [[कामराज]] '''·''' [[आसफ़ अली]] '''·''' [[सुचेता कृपलानी]] '''·''' [[अब्दुल हमीद कैसर]] '''·''' [[बदरुद्दीन तैयब जी]] '''·''' [[पंडित रूपचंद]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>B Narayan</name></author>
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[[अजय घोष]] '''·''' [[अन्नत हरि मित्र]] ''' ''' [[अनुग्रह नारायण सिन्हा]] ''' ''' [[अबुलकलाम आज़ाद]] '''·''' [[अब्दुल मोमिन]] '''·''' [[अब्दुल रशीद]] '''·''' [[अब्दुल रहमान ख़ाँ]] '''·''' [[अम्बिका चक्रवर्ती]] '''·''' [[इंदिरा गाँधी]] '''·''' [[एन.एम. जोशी]] '''·''' [[एन. गोपाल स्वामी आयंगर]] '''·''' [[एन.जी. रंगा]] '''·''' [[एन.जी. हार्डीकर]] '''·''' [[कन्हाई लाल दत्त]] '''·''' [[कमला नेहरू]] '''·'''  [[अरबिंदो घोष]] '''·'''  [[कमलादेवी चट्टोपाध्याय]] '''·'''  [[कस्तूरबा गाँधी]] '''·'''  [[ख़ान अब्दुलगफ़्फ़ार ख़ान]] '''·'''  [[खुदीराम बोस]] '''·'''  [[गोविंद बल्लभ पंत]] '''·'''  [[चंद्रशेखर आज़ाद]] '''·'''  [[अमर शहीद ऊधम सिंह|ऊधम सिंह]] '''·'''  [[जवाहरलाल नेहरू]] '''·'''  [[बाल गंगाधर तिलक]] '''·'''  [[महात्मा गाँधी]] '''·'''  [[राजगुरु]] '''·'''  [[राजेन्द्र प्रसाद]] '''·'''  [[वीर सावरकर]] '''·'''  [[विनोबा भावे]] '''·'''  [[दुर्गा भाभी]] '''·'''  [[सरोजिनी नायडू]] '''·'''  [[भगतसिंह]] '''·'''  [[सुखदेव]] '''·'''  [[सुभाष चंद्र बोस]] '''·'''  [[लाला लाजपत राय]] '''·'''  [[विपिन चन्द्र पाल]] '''·'''  [[जयप्रकाश नारायण]] '''·'''  [[सरदार पटेल|सरदार वल्लभ भाई पटेल]] '''·'''  [[मदनमोहन मालवीय]] '''·'''  [[विजयलक्ष्मी पण्डित]] '''·'''  [[सुशीला दीदी]] '''·'''  [[गणेशशंकर विद्यार्थी]] '''·'''  [[भगवान दास|भगवान दास]] '''·'''  [[चक्रवर्ती राजगोपालाचारी]] '''·'''  [[बिधान चंद्र राय]] '''·'''  [[एनी बेसेंट]] '''·'''  [[सुभद्रा कुमारी चौहान]] '''·'''  [[दादा भाई नौरोजी]] '''·'''  [[जगजीवन राम]] '''·''' [[अनन्त हरि मित्र]] '''·''' [[राम मनोहर लोहिया]] '''·'''  [[तिलका माँझी]] '''·'''  [[चौधरी देवी लाल]] '''·'''  [[अरुणा आसफ़ अली]] '''·'''  [[प्रफुल्लचंद चाकी]] '''·'''  [[चित्तरंजन दास]] '''·'''  [[बंसीलाल]] '''·'''  [[गोपाल कृष्ण गोखले]] '''·'''  [[जगतराम]] '''·''' [[लाला हरदयाल]] '''·''' [[हंसा मेहता]] '''·''' [[जगबंधु बख्शी]] '''·''' [[गणेश दामोदर सावरकर]] '''·''' [[बटुकेश्वर दत्त]] '''·''' [[चिदंबरम पिल्लई]] '''·''' [[गंगाधर अधिकारी]] '''·''' [[चन्द्रभानु गुप्त]] '''·''' [[कुलाधर चालिहा]] '''·''' [[जगत नारायण लाल]] '''·''' [[फ़ीरोज़ गाँधी]] '''·''' [[एच. सी. दासप्पा|हिराली चनया दासप्पा]] '''·''' [[पद्मजा नायडू]] '''·''' [[हनुमान प्रसाद पोद्दार]] '''·''' [[अंजना देवी चौधरी]] '''·''' [[इन्द्रनारायण द्विवेदी]] '''·''' [[ई.वी. रामास्वामी नायकर]] '''·''' [[ए.के. गोपालन]] '''·''' [[घनश्याम लाल जोशी]] '''·''' [[जयरामदास दौलतराम]] '''·''' [[ज्ञानचंद्र मजूमदार]] '''·''' [[छगनराज चौपासनी वाला]] '''·''' [[बलवंत सांवलराम देशपाण्डे]] '''·''' [[राम प्रसाद बिस्मिल]]  '''·''' [[ठाकुर निरंजन सिंह]] '''·''' [[केदारेश्वर सेन गुप्ता]] '''·''' [[टी. बी. कुन्हा]] '''·''' [[कसीनथूनी नागेश्वर राव]] '''·''' [[खलीकुज्जमा]] '''·''' [[गंगा राम]] '''·''' [[गंगा सिंह]] '''·''' [[गणपत लाल वर्मा]] '''·''' [[गुरुबख्श ढिल्लो]] '''·''' [[घनश्याम दास बिड़ला]] '''·''' [[घासी राम चौधरी]] '''·''' [[घीसी लाल धाकड़]] '''·''' [[चन्द्रसिंह गढ़वाली]] '''·''' [[चितरंजन मुखर्जी]] '''·''' [[चित्तू पाण्डे]] '''·''' [[चुन्नीलाल चित्तौड़ा]] '''·''' [[जमनालाल बजाज]] '''·''' [[जयनारायण व्यास]] '''·''' [[जे.एम. सेनगुप्ता]] '''·''' [[ज़ाकिर हुसैन]] '''·''' [[दिनेश चंद्र मजूमदार]] '''·''' [[दुर्गाबाई देशमुख]] '''·''' [[विट्ठलदास झवेरभाई पटेल]] '''·''' [[मदन लाल ढींगरा]] '''·''' [[कामराज]] '''·''' [[आसफ़ अली]] '''·''' [[सुचेता कृपलानी]] '''·''' [[अब्दुल हमीद कैसर]] '''·''' [[बदरुद्दीन तैयब जी]] '''·''' [[पंडित रूपचंद]]&lt;br /&gt;
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}}&amp;lt;noinclude&amp;gt;[[Category:इतिहास के साँचे]][[Category:राजनीति के साँचे]]&amp;lt;/noinclude&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<title>अनुग्रह नारायण सिंह</title>
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		<updated>2011-09-14T14:32:18Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=BiharVibhuti Dr Anugrah Narayan Sinha.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=अनुग्रह नारायण सिंह&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=अनुग्रह बाबू&lt;br /&gt;
|जन्म=[[18 जून ]],[[1887]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[बिहार]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[पटना]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]&lt;br /&gt;
|पद=[[बिहार]] के प्रथम उप [[मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिन्दी]],[[अंग्रेज़ी]] &lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=[[2 जनवरी]], [[1946]] से 05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|विद्यालय=[[कलकत्ता विश्वविद्यालय]], प्रेसीडेंसी कॉलेज (कलकत्ता)&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री और डॉक्टरेट&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=बिहार विभूति&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=भारत की स्वतन्त्रता, अहिंसक आन्दोलन, सत्याग्रह&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=[[असहयोग आंदोलन]], [[नमक सत्याग्रह]] आदि&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=रचनाऐं-मेरे संस्मरण:आत्मकथा&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
डा '''अनुग्रह नारायण सिंह''' एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता और [[बिहार]] के पहले उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री (1946- 1957) थे। अनुग्रह बाबू (1887-1957) [[भारत]] के स्वतंत्रता सेनानी ,शिक्षक,वकील,राजनीतिज्ञ तथा आधुनिक बिहार के निर्माता रहे हैं।उन्हें '''बिहार विभूति''' के रूप में जाना जाता था।वह स्वाधीनता आंदोलन के महान योद्धा थे।स्वाधीनता के बाद राष्ट्र निर्माण व जनकल्याण के कार्यो में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया। अनुग्रह बाबू ने [[महात्मा गांधी]] एवं डा. [[राजेन्द्र प्रसाद]] के साथ राष्ट्रीय आन्दोलन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==आधुनिक बिहार के निर्माता==&lt;br /&gt;
डा अनुग्रह नारायण सिन्हा मानवतावादी प्रगतिशील विचारक एवं दलितों के उत्थान के प्रबल समर्थक और आधुनिक बिहार के निर्माताओं में से एक थे। उनका जीवन दर्शन देश की अखंडतास्वतंत्रता और नवनिर्माण की भावनाआ से शराबोर रहा है। उनका सौभ्य, स्निग्ध, शीतल, परोपकारी, अहंकारहीन और दर्पोदीप्त शख़्सियत बिहार के जनगणमन पर अधिकार किए हुए था|वे शरीर से दुर्बल, कृषकाय थे, पर इस अर्थ में महाप्राण कोई संकट उनके ओठों की मुस्कुराहट नहीं छीन सका। उनमें शक्ति और शील एकाकार हो गये थे और इसीलिए वे बुद्धिजीवियों को विशेष प्रिय थे।[[बिहार]] के विकास में उनका योगदान अतुलनीय है।राज्य के प्रशासनिक ढांचा को तैयार करना का काम अनुग्रह बाबू  ने किया था।इन्होंने राज्य के प्रथम उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  के रूप मे 11 वर्षो तक बिहार की अनवरत सेवा की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रारंभिक जीवन==&lt;br /&gt;
अनुग्रह बाबू का जन्म औरंगाबाद ज़िले के पोईअवा नामक गांव में 18 जून 1887 को हुआ । उनके पिता ठाकुर विशेश्वर दयाल सिंह जी अपने इलाके के एक वीर पुरुष थे। पांच बसंत जब वे पार कर गये तो उनकी शिक्षा का श्रीगणेश हुआ। सन्‌ 1900 में औरंगाबाद मिडिल स्कूल,1904 में गया ज़िला स्कूल और 1908 में पटना कॉलेज में प्रविष्ट हुए। जिस समय ये पटना कॉलेज में आये उस समय देश के शिक्षित व्यक्तियों के हृदय में परतंत्रता की वेदना का अनुभव होने लगा था। ग़ुलामी की जंजीर में जक़डी हुई मानवता का चित्कार अब उन्हें सुनायी प़डने लगा था। वे उस जंजीर को त़ोड फेंकने के लिए व्याकुल होने लगे थे। सुरेन्द्रनाथ बनर्जी तथा योगिराज अरविंद ऐसे महान आत्माआे का प्रादुर्भाव हो चुका था । इन महान आत्माआ के कार्य कलापों तथा व्याख्यानों का समुचित प्रभाव अनुग्रह बाबू के हृदय पर प़डा। उनका हृदय भी भारतमाता की सेवा के लिए त़डप उठा और वे उस पावन मार्ग पर अग्रसर हो गये। सर्फूद्दीन के नेतृत्व में ‘बिहारी छात्र सम्मेलन’ नामक संस्था संगठित की गई, जिसमें देशरत्न डॉ राजेन्द्र बाबू ऐसे मेधावी छात्रों को कार्य करने तथा नेतृत्व करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन==&lt;br /&gt;
{{बाँयाबक्सा|पाठ=&amp;quot;मेरा परिचय अनुग्रह बाबू से बिहारी छात्र सम्मेलन में ही पहले पहल हुआ था।मैं उनकी संगठन शक्ति और हाथ में आए हुए काया] में उत्साह देखकर मुग्ध हो गया और वह भावना समय बीतने से कम न होकर अधिक गहरी होती गई।&amp;quot;- ''' देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद'''|विचारक=}}इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध [[चम्पारण]] से अपना सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था।अनुग्रह बाबू के हृदय में सेवा की उच्च भावना तो बाल्यकाल से ही था, उसे कार्य रूप में परिणत करने तथा उसे पूर्ण रूप से विकसित करने का सुअवसर भी उन्हें इस संगठन में प्रविष्ट होने पर मिल गया। सन्‌ 1910 में आई ए की परीक्षा भी उन्होंने प्रथम श्रेणी में पास की फिर बीए में प्रवेश किया। उसी वर्ष महामना पोलक साहब जो महात्मा गांधी के सहकर्मी थे, पटना पधारे, अफ्रीका के प्रवासी भारतीयों के बारे में जो उनका व्याख्यान हुआ। उससे अनुग्रह बाबू बहुत प्रभावित हुए। उसी वर्ष प्रयाग में अखिल भारतीय कांग्रेस अधिवेशन हुआ, जिसमें वे अपनी उत्साही सहपाठियों के साथ गये। उस अधिवेशन में महामना गोखले आदि विद्वान राष्ट्रभक्तों के भाषणों को सुनने का स्वर्ण अवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ, जिससे वे ब़डे प्रभावित हुए।अनुग्रह बाबू विद्यार्थी जीवन में ही संगठनशक्ति तथा कार्य संचालन की काबिलियत हासिल कर ली थी। सन्‌ 1914 में इतिहास से एमए करने के बाद 1915 में बी एल की परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की। भागलपुर के तेजनारायण जुविल कॉलेज में इतिहास के एक प्रोफेसर की आवश्यकता हुई। अपने साथियों के परामर्श करने के पश्चात तुरंत उन्होंने अपना आवेदन पत्र भेज दिया और उस पद पर उनकी नियुक्ति हो गई। वर्ष 1916 में उन्होंने कॉलेज की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और पटना हाईकोर्ट में वकालत प्रारंभ कर दी। वकालत के सिलसिले में सरलता की मूर्ति देशरत्न राजेन्द्र बाबू के संसर्ग में अधिक रहने का सुअवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ और उनसे पेशे को उन्नत करने की प्रेरणा भी मिली। कलकत्ते में भी उन्हें राजेन्द्र बाबू के सम्पर्क में रहने का स्वर्ण अवसर मिला था। जिस समय राजेन्द्र बाबू लॉ कॉलेज में अध्यापक थे, उसी समय उसी कॉलेज में वे एक विद्यार्थी थे। इसलिये वे राजेन्द्र बाबू की प्रतिष्ठा किया करते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== गांधीजी का सत्याग्रह==&lt;br /&gt;
उन्हें वकालत करते हुए अभी एक वर्ष भी नहीं बीता था कि चम्पारण में नील आंदोलन उठ ख़डा हुआ । इस आंदोलन ने उनके जीवन की धारा ही बदल दी। चम्पारण के किसानों की तबाही का समाचार जब [[महात्मा गांधी]] से सुने तो वे करुणा से विचलित हो उठे। मुजफ्फरपुर के कमिश्नर की राय के विरुद्ध गांधीजी चम्पारण गये और जांच कार्य प्रारंभ कर दिया।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Champaran Satyagraha.jpg|thumb|220px|चंपारण सत्याग्रह आंदोलन के दौरान डॉ. [[राजेन्द्र प्रसाद]] और [[अनुग्रह नारायण सिन्हा]]]] अत्याचारों की जांच प्रारंभ हुई । इसमें कुछ ऐसे वकीलों की आवश्यकता थी, जो निर्भीकता पूर्वक कार्य कर सकें और समय आने पर जेल जाने के लिए भी तैयार रहें। इस विकट कार्य के लिए वृज किशोर बाबू के प्रोत्साहन पर राजेन्द्र बाबू के साथ ही अनुग्रह बाबू भी तत्पर हो गये। उन्होंने इसकी तनिक भी चिंता नहीं की कि उनका पेशा नया है और उन्हें भारी क्षति उठानी प़ड सकती है। एक बार जो त्याग के मार्ग पर आगे ब़ढ चुका है, उसे भला इन तुच्छ चीज़ों का क्या भय हो सकता है। चम्पारण का किसान आंदोलन 45 महीनों तक ज़ोरशोर से चलता रहा। अनुग्रह बाबू बराबर उसमें काम करते रहे और आखिर तक डटे रहे । स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का पाठ उन्हें गांधीजी के आश्रम में ही रहकर प़ढने का सुअवसर प्राप्त हुआ। अनुग्रह बाबू ने चम्पारण के नील आंदोलन में गांधीजी के साथ लगन और निर्भीकता के साथ काम किया और आंदोलन को सफल बनाकर उनके आदेशानुसार 1917 में पटना आये। बापू के साथ रहने से उन्हें जो आत्मिक बल प्राप्त हुआ, वही इनके जीवन का संबल बना। सन्‌ 1920 के दिसंबर में नागपुर में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हुआ, जिसमें अनुग्रह बाबू ने भी भाग लिया। सन्‌ 1929 के दिसंबर में सरदार पटेल ने किसान संगठन के सिलसिले में मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया, तब अनुग्रह बाबू सभी जगह उनके साथ थे। 26 जनवरी 1930 को सारे देश में स्वतंत्रता की घोषणा प़ढी गई। अनुग्रह बाबू को भी कई स्थानों में घोषण पत्र प़ढना प़ढा । कुछ दिनों के बाद महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया। उस सिलसिले में उन्हें चम्पारण, मुजफ्फरपुर आदि स्थानों का दौरा करना प़डा । 26 जनवरी, 1933 को जब पटना में घोषणा प़ढ रहे थे, उसी समय उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें पंद्रह मास की सज़ा हुई और उन्हें हज़ारीबाग़ जेल भेज दिया गया। जिस समय वे जेल में थे, बिहार में इतिहास विख्यात प्रलयंकारी भूकंप आया। हृदय विदारक समाचारों को प़ढकर उनका हृदय दर्द से कराह उठा। चहारदीवारी के अंदर बंद रहने के कारण ये कोई राहत कार्य नहीं कर सकते थे। लेकिन सरकार ने तीन हफ्तों के बाद इन्हें छ़ोड दिया। छूटते ही अनुग्रह बाबू राहत कार्य में संलग्न हो गये। राजेन्द्र बाबू के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इन्होंने अथक परिश्रम के साथ पी़डत मानवता की सेवा की। मुजफ्फरपुर, मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया । इसके लिये राजेन्द्र बाबू की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी, जिसके उपाध्यक्ष अनुग्रह बाबू ही चुने गये तथा खूब लगन के साथ सेवा कार्य किया।सन्‌ 1940 को मार्च महीने में अखिल भारतीय कांग्रेस का अधिवेशन रामग़ढ में हुआ। अधिवेशन का संपूर्ण भार अनुग्रह बाबू के कंधे पर था। उसमें जो अपनी तत्परता दिखलाई उसके फलस्वरूप ही कांग्रेस का अधिवेशन सफल हुआ। देश की परिस्थिति को देखते हुए जब गांधीजी ने व्यक्तिगत सत्याग्रह अपनाया तब उनके प्रिय सहयोगी अनुग्रह बाबू कब चूकने वाले थे। फलस्वरूप 1940 को वह गिरफ्तार कर लिये गये और अगस्त 1941 में रिहा हुए।&lt;br /&gt;
&amp;lt;br /&amp;gt;&amp;lt;blockquote&amp;gt;&amp;lt;span style=&amp;quot;color: blue&amp;quot;&amp;gt;'मुझे अपने लिए चिंता नहीं है,किंतु देश के लिए मुझे चिंता है।’ '''बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा'''&amp;lt;/span&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
गांधीजी का ‘करो या मरो’ का नारा बुलंद हुआ। 7 अगस्त, 1942 को गांधीजी गिरफ्तार किये गये। सारे देश में एक बार ही बिजली की तरह आंदोलन की आग फैल गई। कांग्रेस कमिटियां जब्त कर ली गई और कांग्रेस नेता जहां के तहां गिरफ्तार कर लिये गये। 10 अगस्त को अनुग्रह बाबू भी जब अपने मित्रों से मिलने गये, एकाएक मार्ग में ही गिरफ्तार कर लिये गये। सन्‌ 1944 में जब सारे कांग्रेसी नेता जेल से मुक्त किये जाने लगे, तो अनुग्रह बाबू भी कारावास की कैद से आज़ाद कर दिये गये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बिहार के पहले उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री==&lt;br /&gt;
1937 में ही बाबू साहब बिहार प्रान्त के वित्त मंत्री बने।अनुग्रह बाबू [[बिहार]] [[विधानसभा]]  में 1937 से  लेकर 1957 तक कांग्रेस [[विधायक]] दल के उप नेता थे। 1946 में जब दूसरा मंत्रिमंडल बना तब वित्त और श्रम दोनों विभागों के पहले मंत्री बने और उन्होंने अपने मंत्रित्व काल में विशेषकर श्रम विभाग में अपनी न्याय प्रियता लोकतांत्रिक विचारधारा एवं श्रमिकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का जो परिचय दिया वह सराहनीय ही नहीं अनुकरणीय है। श्रम मंत्री के रूप में अनुग्रह बाबू ने ‘बिहार केन्द्रीय श्रम परामर्श समिति’ के माध्यम से श्रम प्रशासन तथा श्रमिक समस्याओं के समाधान के लिए जो नियम एवं प्रावधान बनाये वे आज पूरे देश के लिये मापदंड के रूप में काम करते हैं। तृतीय मंत्रिमंडल में उन्हें खाद, बीज, मिट्‌टी, मवेशी में सुधार लाने के लिए शोध कार्य करवाए और पहली बार जापानी ढंग से धान उपजाने की पद्धति का प्रचार कराया। पूसा का कृषि अनुसंधान फार्म उनकी ही देन है। इस तेजस्वी महापुरुष का निधन 5 जुलाई, 1957 को उनके निवास स्थान [[पटना]] मे बीमारी के कारण हुआ। उनके सम्मान मे तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया, उनके अन्तिम संस्कार में विशाल जनसमूह उपस्थित था।अनुग्रह बाबू  [[2 जनवरी]], [[1946]] से अपनी मृत्यु तक बिहार के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  रहे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==संदर्भ==&lt;br /&gt;
{{reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/database/biographies/anugrah_narayan_sinha.htm अनुग्रह बाबू की जीवनी]&lt;br /&gt;
*[http://books.google.co.in/books?id=kmZV1ALVaCYC&amp;amp;pg=PT403&amp;amp;lpg=PT403&amp;amp;dq=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9+%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;source=bl&amp;amp;ots=BrT6nN3s6g&amp;amp;sig=AQGM4ELFM1mxpiXuSV_kVCFd_Fs&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ei=yaZmS5DaJsWVtgenqvS2Bg&amp;amp;sa=X&amp;amp;oi=book_result&amp;amp;ct=result&amp;amp;resnum=2&amp;amp;ved=0CAkQ6AEwATge#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%20%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;f=false बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा]&lt;br /&gt;
*[http://www.prabhatkhabar.com/node/18888 सादगी की प्रतिमूर्ति थे बिहार विभूति अनुग्रह बाबू] &lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_7898028.html  भारत को आज़ादी दिलाने में डा. अनुग्रह बाबू का अतुलनीय योगदान:राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.newshunt.com/cr.action?act=browseNewsItem&amp;amp;npKey=jagran&amp;amp;ctKey=Patna&amp;amp;newsUid=9712713&amp;amp;brand=NewsHunt&amp;amp;parent=null&amp;amp;res=128x128 बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिंह की जयंती]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_7891955.html अनुग्रह बाबू को श्रद्धांजलि]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:z7Qyx0yJNJ4J:in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html+/search%3Fhl%3Dhi%26q%3D%2Bsite:in.jagran.yahoo.com%2B%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2597%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25B9%2B%25E0%25A4%25AC%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%2582&amp;amp;cd=5&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in आधुनिक भारत के निर्माता थे अनुग्रह बाबू : राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_4561311.html लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी थे डा अनुग्रह बाबू ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html अनुग्रह बाबू के जीवन से सीख लेने की जरूरत है-राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/kalranga/freedom/congress/c127.htm बिहार के स्वतंत्रता सेनानी]&lt;br /&gt;
*[http://www.aicc.org.in/satyagraha_laboratories_of_mahatma_gandhi.htm महात्मा गाँधी की सत्याग्रह प्रयोगशाला]&lt;br /&gt;
*[http://loksabha.nic.in/ लोकसभा का जालस्थल]&lt;br /&gt;
*[http://www.mkgandhi.org/jpnarayan/total_revolution.htm सम्पूर्ण क्रांति]&lt;br /&gt;
*[http://www.snsibm.com/ अनुग्रह नारायण सिन्हा व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, राँची]&lt;br /&gt;
*[http://www.ancollege.org/ अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय, पटना]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{स्वतन्त्रता सेनानी}}&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार_का_इतिहास]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:लेखक]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीतिज्ञ]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध_व्यक्तित्व]]&lt;br /&gt;
[[Category:इतिहास कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9_%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=217509</id>
		<title>अनुग्रह नारायण सिंह</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9_%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=217509"/>
		<updated>2011-09-14T14:30:35Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=BiharVibhuti Dr Anugrah Narayan Sinha.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=अनुग्रह नारायण सिंह&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=अनुग्रह बाबू&lt;br /&gt;
|जन्म=[[18 जून ]],[[1887]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[बिहार]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[पटना]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]&lt;br /&gt;
|पद=[[बिहार]] के प्रथम उप [[मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिन्दी]],[[अंग्रेज़ी]] &lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=[[2 जनवरी]], [[1946]] से 05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|विद्यालय=[[कलकत्ता विश्वविद्यालय]], प्रेसीडेंसी कॉलेज (कलकत्ता)&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री और डॉक्टरेट&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=बिहार विभूति&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=भारत की स्वतन्त्रता, अहिंसक आन्दोलन, सत्याग्रह&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=[[असहयोग आंदोलन]], [[नमक सत्याग्रह]] आदि&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=रचनाऐं-मेरे संस्मरण:आत्मकथा&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
डा '''अनुग्रह नारायण सिंह''' एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता और [[बिहार]] के पहले उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री (1946- 1957) थे। अनुग्रह बाबू (1887-1957) [[भारत]] के स्वतंत्रता सेनानी ,शिक्षक,वकील,राजनीतिज्ञ तथा आधुनिक बिहार के निर्माता रहे हैं।उन्हें '''बिहार विभूति''' के रूप में जाना जाता था।वह स्वाधीनता आंदोलन के महान योद्धा थे।स्वाधीनता के बाद राष्ट्र निर्माण व जनकल्याण के कार्यो में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया। अनुग्रह बाबू ने [[महात्मा गांधी]] एवं डा. [[राजेन्द्र प्रसाद]] के साथ राष्ट्रीय आन्दोलन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==आधुनिक बिहार के निर्माता==&lt;br /&gt;
डा अनुग्रह नारायण सिन्हा मानवतावादी प्रगतिशील विचारक एवं दलितों के उत्थान के प्रबल समर्थक और आधुनिक बिहार के निर्माताओं में से एक थे। उनका जीवन दर्शन देश की अखंडतास्वतंत्रता और नवनिर्माण की भावनाआ से शराबोर रहा है। उनका सौभ्य, स्निग्ध, शीतल, परोपकारी, अहंकारहीन और दर्पोदीप्त शख़्सियत बिहार के जनगणमन पर अधिकार किए हुए था|वे शरीर से दुर्बल, कृषकाय थे, पर इस अर्थ में महाप्राण कोई संकट उनके ओठों की मुस्कुराहट नहीं छीन सका। उनमें शक्ति और शील एकाकार हो गये थे और इसीलिए वे बुद्धिजीवियों को विशेष प्रिय थे।[[बिहार]] के विकास में उनका योगदान अतुलनीय है।राज्य के प्रशासनिक ढांचा को तैयार करना का काम अनुग्रह बाबू  ने किया था।इन्होंने राज्य के प्रथम उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  के रूप मे 11 वर्षो तक बिहार की अनवरत सेवा की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रारंभिक जीवन==&lt;br /&gt;
अनुग्रह बाबू का जन्म औरंगाबाद ज़िले के पोईअवा नामक गांव में 18 जून 1887 को हुआ । उनके पिता ठाकुर विशेश्वर दयाल सिंह जी अपने इलाके के एक वीर पुरुष थे। पांच बसंत जब वे पार कर गये तो उनकी शिक्षा का श्रीगणेश हुआ। सन्‌ 1900 में औरंगाबाद मिडिल स्कूल,1904 में गया ज़िला स्कूल और 1908 में पटना कॉलेज में प्रविष्ट हुए। जिस समय ये पटना कॉलेज में आये उस समय देश के शिक्षित व्यक्तियों के हृदय में परतंत्रता की वेदना का अनुभव होने लगा था। ग़ुलामी की जंजीर में जक़डी हुई मानवता का चित्कार अब उन्हें सुनायी प़डने लगा था। वे उस जंजीर को त़ोड फेंकने के लिए व्याकुल होने लगे थे। सुरेन्द्रनाथ बनर्जी तथा योगिराज अरविंद ऐसे महान आत्माआे का प्रादुर्भाव हो चुका था । इन महान आत्माआ के कार्य कलापों तथा व्याख्यानों का समुचित प्रभाव अनुग्रह बाबू के हृदय पर प़डा। उनका हृदय भी भारतमाता की सेवा के लिए त़डप उठा और वे उस पावन मार्ग पर अग्रसर हो गये। सर्फूद्दीन के नेतृत्व में ‘बिहारी छात्र सम्मेलन’ नामक संस्था संगठित की गई, जिसमें देशरत्न डॉ राजेन्द्र बाबू ऐसे मेधावी छात्रों को कार्य करने तथा नेतृत्व करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन==&lt;br /&gt;
{{बाँयाबक्सा|पाठ=&amp;quot;मेरा परिचय अनुग्रह बाबू से बिहारी छात्र सम्मेलन में ही पहले पहल हुआ था।मैं उनकी संगठन शक्ति और हाथ में आए हुए काया] में उत्साह देखकर मुग्ध हो गया और वह भावना समय बीतने से कम न होकर अधिक गहरी होती गई।&amp;quot;- ''' देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद'''|विचारक=}}इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध [[चम्पारण]] से अपना सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था।अनुग्रह बाबू के हृदय में सेवा की उच्च भावना तो बाल्यकाल से ही था, उसे कार्य रूप में परिणत करने तथा उसे पूर्ण रूप से विकसित करने का सुअवसर भी उन्हें इस संगठन में प्रविष्ट होने पर मिल गया। सन्‌ 1910 में आई ए की परीक्षा भी उन्होंने प्रथम श्रेणी में पास की फिर बीए में प्रवेश किया। उसी वर्ष महामना पोलक साहब जो महात्मा गांधी के सहकर्मी थे, पटना पधारे, अफ्रीका के प्रवासी भारतीयों के बारे में जो उनका व्याख्यान हुआ। उससे अनुग्रह बाबू बहुत प्रभावित हुए। उसी वर्ष प्रयाग में अखिल भारतीय कांग्रेस अधिवेशन हुआ, जिसमें वे अपनी उत्साही सहपाठियों के साथ गये। उस अधिवेशन में महामना गोखले आदि विद्वान राष्ट्रभक्तों के भाषणों को सुनने का स्वर्ण अवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ, जिससे वे ब़डे प्रभावित हुए।अनुग्रह बाबू विद्यार्थी जीवन में ही संगठनशक्ति तथा कार्य संचालन की काबिलियत हासिल कर ली थी। सन्‌ 1914 में इतिहास से एमए करने के बाद 1915 में बी एल की परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की। भागलपुर के तेजनारायण जुविल कॉलेज में इतिहास के एक प्रोफेसर की आवश्यकता हुई। अपने साथियों के परामर्श करने के पश्चात तुरंत उन्होंने अपना आवेदन पत्र भेज दिया और उस पद पर उनकी नियुक्ति हो गई। वर्ष 1916 में उन्होंने कॉलेज की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और पटना हाईकोर्ट में वकालत प्रारंभ कर दी। वकालत के सिलसिले में सरलता की मूर्ति देशरत्न राजेन्द्र बाबू के संसर्ग में अधिक रहने का सुअवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ और उनसे पेशे को उन्नत करने की प्रेरणा भी मिली। कलकत्ते में भी उन्हें राजेन्द्र बाबू के सम्पर्क में रहने का स्वर्ण अवसर मिला था। जिस समय राजेन्द्र बाबू लॉ कॉलेज में अध्यापक थे, उसी समय उसी कॉलेज में वे एक विद्यार्थी थे। इसलिये वे राजेन्द्र बाबू की प्रतिष्ठा किया करते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== गांधीजी का सत्याग्रह==&lt;br /&gt;
उन्हें वकालत करते हुए अभी एक वर्ष भी नहीं बीता था कि चम्पारण में नील आंदोलन उठ ख़डा हुआ । इस आंदोलन ने उनके जीवन की धारा ही बदल दी। चम्पारण के किसानों की तबाही का समाचार जब [[महात्मा गांधी]] से सुने तो वे करुणा से विचलित हो उठे। मुजफ्फरपुर के कमिश्नर की राय के विरुद्ध गांधीजी चम्पारण गये और जांच कार्य प्रारंभ कर दिया।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Champaran Satyagraha.jpg|thumb|220px|चंपारण सत्याग्रह आंदोलन के दौरान डॉ. [[राजेन्द्र प्रसाद]] और [[अनुग्रह नारायण सिन्हा]]]] अत्याचारों की जांच प्रारंभ हुई । इसमें कुछ ऐसे वकीलों की आवश्यकता थी, जो निर्भीकता पूर्वक कार्य कर सकें और समय आने पर जेल जाने के लिए भी तैयार रहें। इस विकट कार्य के लिए वृज किशोर बाबू के प्रोत्साहन पर राजेन्द्र बाबू के साथ ही अनुग्रह बाबू भी तत्पर हो गये। उन्होंने इसकी तनिक भी चिंता नहीं की कि उनका पेशा नया है और उन्हें भारी क्षति उठानी प़ड सकती है। एक बार जो त्याग के मार्ग पर आगे ब़ढ चुका है, उसे भला इन तुच्छ चीज़ों का क्या भय हो सकता है। चम्पारण का किसान आंदोलन 45 महीनों तक ज़ोरशोर से चलता रहा। अनुग्रह बाबू बराबर उसमें काम करते रहे और आखिर तक डटे रहे । स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का पाठ उन्हें गांधीजी के आश्रम में ही रहकर प़ढने का सुअवसर प्राप्त हुआ। अनुग्रह बाबू ने चम्पारण के नील आंदोलन में गांधीजी के साथ लगन और निर्भीकता के साथ काम किया और आंदोलन को सफल बनाकर उनके आदेशानुसार 1917 में पटना आये। बापू के साथ रहने से उन्हें जो आत्मिक बल प्राप्त हुआ, वही इनके जीवन का संबल बना। सन्‌ 1920 के दिसंबर में नागपुर में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हुआ, जिसमें अनुग्रह बाबू ने भी भाग लिया। सन्‌ 1929 के दिसंबर में सरदार पटेल ने किसान संगठन के सिलसिले में मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया, तब अनुग्रह बाबू सभी जगह उनके साथ थे। 26 जनवरी 1930 को सारे देश में स्वतंत्रता की घोषणा प़ढी गई। अनुग्रह बाबू को भी कई स्थानों में घोषण पत्र प़ढना प़ढा । कुछ दिनों के बाद महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया। उस सिलसिले में उन्हें चम्पारण, मुजफ्फरपुर आदि स्थानों का दौरा करना प़डा । 26 जनवरी, 1933 को जब पटना में घोषणा प़ढ रहे थे, उसी समय उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें पंद्रह मास की सज़ा हुई और उन्हें हज़ारीबाग़ जेल भेज दिया गया। जिस समय वे जेल में थे, बिहार में इतिहास विख्यात प्रलयंकारी भूकंप आया। हृदय विदारक समाचारों को प़ढकर उनका हृदय दर्द से कराह उठा। चहारदीवारी के अंदर बंद रहने के कारण ये कोई राहत कार्य नहीं कर सकते थे। लेकिन सरकार ने तीन हफ्तों के बाद इन्हें छ़ोड दिया। छूटते ही अनुग्रह बाबू राहत कार्य में संलग्न हो गये। राजेन्द्र बाबू के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इन्होंने अथक परिश्रम के साथ पी़डत मानवता की सेवा की। मुजफ्फरपुर, मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया । इसके लिये राजेन्द्र बाबू की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी, जिसके उपाध्यक्ष अनुग्रह बाबू ही चुने गये तथा खूब लगन के साथ सेवा कार्य किया।सन्‌ 1940 को मार्च महीने में अखिल भारतीय कांग्रेस का अधिवेशन रामग़ढ में हुआ। अधिवेशन का संपूर्ण भार अनुग्रह बाबू के कंधे पर था। उसमें जो अपनी तत्परता दिखलाई उसके फलस्वरूप ही कांग्रेस का अधिवेशन सफल हुआ। देश की परिस्थिति को देखते हुए जब गांधीजी ने व्यक्तिगत सत्याग्रह अपनाया तब उनके प्रिय सहयोगी अनुग्रह बाबू कब चूकने वाले थे। फलस्वरूप 1940 को वह गिरफ्तार कर लिये गये और अगस्त 1941 में रिहा हुए।&lt;br /&gt;
&amp;lt;br /&amp;gt;&amp;lt;blockquote&amp;gt;&amp;lt;span style=&amp;quot;color: blue&amp;quot;&amp;gt;'मुझे अपने लिए चिंता नहीं है,किंतु देश के लिए मुझे चिंता है।’ '''बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा'''&amp;lt;/span&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
गांधीजी का ‘करो या मरो’ का नारा बुलंद हुआ। 7 अगस्त, 1942 को गांधीजी गिरफ्तार किये गये। सारे देश में एक बार ही बिजली की तरह आंदोलन की आग फैल गई। कांग्रेस कमिटियां जब्त कर ली गई और कांग्रेस नेता जहां के तहां गिरफ्तार कर लिये गये। 10 अगस्त को अनुग्रह बाबू भी जब अपने मित्रों से मिलने गये, एकाएक मार्ग में ही गिरफ्तार कर लिये गये। सन्‌ 1944 में जब सारे कांग्रेसी नेता जेल से मुक्त किये जाने लगे, तो अनुग्रह बाबू भी कारावास की कैद से आज़ाद कर दिये गये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बिहार के पहले उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री==&lt;br /&gt;
1937 में ही बाबू साहब बिहार प्रान्त के वित्त मंत्री बने।अनुग्रह बाबू [[बिहार]] [[विधानसभा]]  में 1937 से  लेकर 1957 तक कांग्रेस [[विधायक]] दल के उप नेता थे। 1946 में जब दूसरा मंत्रिमंडल बना तब वित्त और श्रम दोनों विभागों के पहले मंत्री बने और उन्होंने अपने मंत्रित्व काल में विशेषकर श्रम विभाग में अपनी न्याय प्रियता लोकतांत्रिक विचारधारा एवं श्रमिकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का जो परिचय दिया वह सराहनीय ही नहीं अनुकरणीय है। श्रम मंत्री के रूप में अनुग्रह बाबू ने ‘बिहार केन्द्रीय श्रम परामर्श समिति’ के माध्यम से श्रम प्रशासन तथा श्रमिक समस्याओं के समाधान के लिए जो नियम एवं प्रावधान बनाये वे आज पूरे देश के लिये मापदंड के रूप में काम करते हैं। तृतीय मंत्रिमंडल में उन्हें खाद, बीज, मिट्‌टी, मवेशी में सुधार लाने के लिए शोध कार्य करवाए और पहली बार जापानी ढंग से धान उपजाने की पद्धति का प्रचार कराया। पूसा का कृषि अनुसंधान फार्म उनकी ही देन है। इस तेजस्वी महापुरुष का निधन 5 जुलाई, 1957 को उनके निवास स्थान [[पटना]] मे बीमारी के कारण हुआ। उनके सम्मान मे तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया, उनके अन्तिम संस्कार में विशाल जनसमूह उपस्थित था।अनुग्रह बाबू  [[2 जनवरी]], [[1946]] से अपनी मृत्यु तक बिहार के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  रहे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==संदर्भ==&lt;br /&gt;
{{reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/database/biographies/anugrah_narayan_sinha.htm अनुग्रह बाबू की जीवनी]&lt;br /&gt;
*[http://books.google.co.in/books?id=kmZV1ALVaCYC&amp;amp;pg=PT403&amp;amp;lpg=PT403&amp;amp;dq=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9+%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;source=bl&amp;amp;ots=BrT6nN3s6g&amp;amp;sig=AQGM4ELFM1mxpiXuSV_kVCFd_Fs&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ei=yaZmS5DaJsWVtgenqvS2Bg&amp;amp;sa=X&amp;amp;oi=book_result&amp;amp;ct=result&amp;amp;resnum=2&amp;amp;ved=0CAkQ6AEwATge#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%20%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;f=false बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा]&lt;br /&gt;
*[http://www.prabhatkhabar.com/node/18888 सादगी की प्रतिमूर्ति थे बिहार विभूति अनुग्रह बाबू] &lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_7898028.html  भारत को आज़ादी दिलाने में डा. अनुग्रह बाबू का अतुलनीय योगदान:राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.newshunt.com/cr.action?act=browseNewsItem&amp;amp;npKey=jagran&amp;amp;ctKey=Patna&amp;amp;newsUid=9712713&amp;amp;brand=NewsHunt&amp;amp;parent=null&amp;amp;res=128x128 बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिंह की जयंती]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_7891955.html अनुग्रह बाबू को श्रद्धांजलि]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:z7Qyx0yJNJ4J:in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html+/search%3Fhl%3Dhi%26q%3D%2Bsite:in.jagran.yahoo.com%2B%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2597%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25B9%2B%25E0%25A4%25AC%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%2582&amp;amp;cd=5&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in आधुनिक भारत के निर्माता थे अनुग्रह बाबू : राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_4561311.html लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी थे डा अनुग्रह बाबू ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html अनुग्रह बाबू के जीवन से सीख लेने की जरूरत है-राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/kalranga/freedom/congress/c127.htm बिहार के स्वतंत्रता सेनानी]&lt;br /&gt;
*[http://www.aicc.org.in/satyagraha_laboratories_of_mahatma_gandhi.htm महात्मा गाँधी की सत्याग्रह प्रयोगशाला]&lt;br /&gt;
*[http://loksabha.nic.in/ लोकसभा का जालस्थल]&lt;br /&gt;
*[http://www.mkgandhi.org/jpnarayan/total_revolution.htm सम्पूर्ण क्रांति]&lt;br /&gt;
*[http://www.snsibm.com/ अनुग्रह नारायण सिन्हा व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, राँची]&lt;br /&gt;
*[http://www.ancollege.org/ अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय, पटना]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{स्वतन्त्रता सेनानी}}&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार_का_इतिहास]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:लेखक]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीतिज्ञ]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध_व्यक्तित्व]]&lt;br /&gt;
[[Category:इतिहास कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A4_%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3_%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B2&amp;diff=217508</id>
		<title>जगत नारायण लाल</title>
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		<updated>2011-09-14T14:27:48Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{पुनरीक्षण}}जगत नारायण लाल (जन्म- [[गोरखपुर]] [[उत्तर प्रदेश]], मृत्यु- [[1966]]) [[बिहार]] के प्रसिद्ध सार्वजनिक कार्यकर्ता थे। जगत नारायण लाल का जन्म [[उत्तर प्रदेश]] के [[गोरखपुर]] नगर में हुआ था। उनके पिता भगवती प्रसाद वहाँ स्टेशन मास्टर थे। जगत नारायण लाल ने [[इलाहाबाद]] से एम.ए. और क़ानून की शिक्षा पूरी की और [[पटना]] को अपना कार्यक्षेत्र बनाया। उनके ऊपर [[राजेन्द्र प्रसाद|डॉ. राजेन्द्र प्रसाद]],अनुग्रह नारायण सिन्हा और [[मदन मोहन मालवीय|मदन मोहन मालवीय जी]] के विचारों का बड़ा प्रभाव था। राजेन्द्र प्रसाद के कारण वे स्वतंत्रता संग्राम में सम्मिलित हुए और मालवीय जी के कारण हिन्दू महासभा से उनकी निकटता हुई।&lt;br /&gt;
====राजनीति सफ़र====&lt;br /&gt;
[[1937]] के निर्वाचन के बाद जगत नारायण लाल बिहार मंत्रिमण्डल में सभा-सचिव बने। [[1940]]-[[1942]] की लम्बी जेल यात्राओं के बाद [[1957]] में वे बिहार सरकार में मंत्री बनाए गए। सामाजिक क्षेत्र में काम करने के लिए उन्होंने दोबारा सेवा समिति का गठन किया। [[1926]] में उन्हें अखिल भारतीय हिन्दू महासभा का महामंत्री चुना गया था। &lt;br /&gt;
====साम्प्रदायिक सौहार्द====&lt;br /&gt;
जगत नारायण लाल साम्प्रदायिक सौहार्द के समर्थक थे। छुआ-छूत का निवारण और महिलाओं के उत्थान के कार्यों में भी उनकी रुचि थी। वे प्रबुद्ध प्रवक्ता थे और श्रोताओं को घंटों अपनी वाणी से मुग्ध रख सकते थे। अपने समय में बिहार के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में उनका महत्त्वपूर्ण स्थान था। 1966 ई. में उनका देहान्त हो गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
*पुस्तक ‘भारतीय चरित कोश’ पृष्ठ संख्या-292 से&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{स्वतन्त्रता सेनानी}}&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
	</entry>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B6_%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3&amp;diff=217507</id>
		<title>जयप्रकाश नारायण</title>
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		<updated>2011-09-14T14:21:40Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=Jayaprakash-Narayan.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=जयप्रकाश नारायण&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=लोकनायक, जेपी&lt;br /&gt;
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|जन्म भूमि=[[सिताबदियारा]], [[बिहार]] &lt;br /&gt;
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|मृत्यु=[[8 अक्टूबर]], सन [[1979]] ई.&lt;br /&gt;
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|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=कांग्रेस&lt;br /&gt;
|पद=&lt;br /&gt;
|भाषा=&lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=[[7 मार्च]] सन [[1940]] को ब्रिटिश पुलिस द्वारा, हज़ारी बाग़ जेल में क़ैद, [[आगरा]] सेन्ट्रल जेल &lt;br /&gt;
|कार्य काल=&lt;br /&gt;
|विद्यालय=सन [[1922]] से [[1929]] ई. के बीच कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बरकली, विसकांसन विश्वविद्यालय &lt;br /&gt;
|शिक्षा=एम. ए (समाजशास्त्र से)&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=सन [[1998]] ई. में [[भारत रत्न]] से सम्मनित &lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
'''जयप्रकाश नारायण''' (जन्म- [[11 अक्तूबर]], [[1902]], [[सिताब दियारा]], (बिहार), मृत्यु- [[8 अक्तूबर]], [[1979]], [[पटना]], [[बिहार]]) राजनीतिज्ञ और सिद्धांतवादी नेता थे। मातृभूमि के वरदपुत्र जयप्रकाश नारायण ने हमारे देश की सराहनीय सेवा की है। लोकनायक जय प्रकाश नारायण त्याग एवं बलिदान की प्रतिमूर्ति थे। कहा गया है–&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''होनहार वीरवान के होत चीकने पात'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जयप्रकाश विचार के पक्के और बुद्धि के सुलझे हुए व्यक्ति थे। जय प्रकाश जी देश के सच्चे सपूत थे। जयप्रकाश ने देश को अन्धकार से प्रकाश की ओर लाने का सच्चा प्रयास किया, जिसमें वह पूरी तरह से सफल रहे हैं। लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने भारतीय जनमानस पर अपना अमिट छाप छोड़ा है। जयप्रकाश जी का समाजवाद का नारा आज भी गूँज रहा है। समाजवाद का सम्बन्ध न केवल उनके राजनीतिक जीवन से था, अपितु यह उनके सम्पूर्ण जीवन में समाया हुआ था।&lt;br /&gt;
==जीवन परिचय==&lt;br /&gt;
जय प्रकाश का जन्म 11 अक्तूबर, 1902 ई. में सिताब दियारा बिहार में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री 'देवकी बाबू' था, माता 'फूलरानी देवी' थीं। इन्हें चार वर्ष तक दाँत नहीं आया, जिससे इनकी माताजी इन्हें 'बऊल जी' कहती थीं। इन्होंने जब बोलना आरम्भ किया तो वाणी में ओज झलकने लगा। [[1920]] में जय प्रकाश का विवाह 'प्रभा' नामक लड़की से हुआ। प्रभावती स्वभाव से अत्यन्त मृदुल थीं। [[महात्मा गाँधी|गांधी जी]] का उनके प्रति अपार स्नेह था। प्रभा से शादी होने के समय और शादी के बाद में भी गांधी जी से उनके पिता का सम्बन्ध था, क्योंकि प्रभावती के पिता श्री 'ब्रजकिशोर बापू' चम्पारन में जहाँ गांधी जी ठहरे थे, प्रभा को साथ लेकर गये थे। प्रभा विभिन्न राष्ट्रीय उत्सवों और कार्यक्रमों में भाग लेती थीं।&lt;br /&gt;
==शिक्षा==&lt;br /&gt;
जयप्रकाश नारायण एक निष्ठावान राष्ट्रवादी थे और सिर्फ़ खादी पहनते थे। जय प्रकाश ने [[रॉलेट एक्ट]] [[जलियाँवाला बाग़]] नरसंहार के विरोध में ब्रिटिश शैली के स्कूलों को छोड़कर बिहार विद्यापीठ से अपनी उच्चशिक्षा पूरी की,जिसे युवा प्रतिभाशाली युवाओं को प्रेरित करने के लिए डॉ. [[राजेन्द्र प्रसाद]] और सुप्रसिद्ध गांधीवादी डॉ. [[अनुग्रह नारायण सिन्हा]],जो गांधी जी के एक निकट सहयोगी रहे द्वारा स्थापित किया गया था।। जयप्रकाश जी ने एम. ए. समाजशास्त्र से किया है। जय प्रकाश ने अमेरिकी विश्वविद्यालय से आठ वर्ष तक अध्ययन किया और वहाँ वह मार्क्सवादी दर्शन से गहरे प्रभावित हुए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==स्वतंत्रता संग्राम में भाग==&lt;br /&gt;
जय प्रकाश ने [[भारतीय स्वतंत्रता संग्राम]] में कूदने का निश्चय किया, क्योंकि इन्हें [[अबुलकलाम आज़ाद|मौलाना]] की एक गरज सुनाई पड़ी, जिसे उन्होंने [[पटना]] में ध्वनित किया था।&amp;lt;br /&amp;gt;&amp;lt;blockquote&amp;gt;&amp;lt;span style=&amp;quot;color: #8f5d31&amp;quot;&amp;gt;नौजवानों अंग्रेज़ी (शिक्षा) का त्याग करो और मैदान में आकर ब्रिटिश हुक़ूमत की ढहती दीवारों को धराशायी करो और ऐसे हिन्दुस्तान का निर्माण करो, जो सारे आलम में ख़ुशबू पैदा करे। '''मौलाना अबुल कलाम आज़ाद'''&amp;lt;/span&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जय प्रकाश ने इस वक्तव्य को सुना तो उनके अंतर्मन में हलचल मच गया। जय प्रकाश पढ़ाई छोड़कर आंदोलन में कूद पड़े। भविष्य में जयप्रकाश जी प्रभा के साथ आ गये और [[जवाहरलाल नेहरू|नेहरू जी]] के यहाँ ठहरे। यहाँ उन्होंने देश को आज़ाद करने की विविध योजनाएँ बनाना आरम्भ कर दिया। एक दिन पटना में 'आचार्य नरेन्द्रदेव' की अध्यक्षता में समाजवादी कार्यकर्ताओं की राष्ट्रीय स्तर पर मीटिंग चल रही थी।&amp;lt;br /&amp;gt;&amp;lt;blockquote&amp;gt;&amp;lt;span style=&amp;quot;color: #8f5d31&amp;quot;&amp;gt;आज़ादी तो हमें तभी प्राप्त होगी, जबकि हम समाजवादी लड़ाई का मार्ग पकड़ें। '''नरेन्द्र देव'''&amp;lt;/span&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वहाँ पर यह विचार भी बताया गया कि यह संघर्ष तभी सफल होगा, जबकि हम समाजवाद की राह का अनुसरण करें। कोई भी आंदोलन बिना मध्यमवर्गीय लोगों के सहयोग के सफल नहीं होता। भविष्य में कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी का गठन हुआ तो जय प्रकाश को उसमें शामिल किया गया और उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया गया। जयप्रकाश जी ने नई पार्टी की ख़ूब सेवा की और उसका प्रचार एवं प्रसार किया। जय प्रकाश विलक्षण प्रतिभा से युक्त थे। उनकी बातों का भारतीय जनमानस पर अच्छा प्रभाव था। जय प्रकाश जी आजीवन मन से देश की सेवा करते रहे। उनके नेतृत्व में विभिन्न आंदोलन हुए। जय प्रकाश जी के निम्न आदर्श थे–&lt;br /&gt;
#सत्य।&lt;br /&gt;
#निष्ठा।&lt;br /&gt;
#ईमानदारी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==योगदान==&lt;br /&gt;
जयप्रकाश जी के योगदानों के बारे में जितना कहा जाए वह कम है। ये अत्यन्त परिश्रमी व्यक्ति थे। इनकी विलक्षणता की तारीफ़ स्वयं गांधीजी और [[जवाहर लाल नेहरू|नेहरू]] जैसे लोग किया करते थे। [[भारत]] माता को आज़ाद कराने हेतु इन्होंने तरह-तरह की परेशानियों को झेला किन्तु इन्होंने अंग्रेज़ों के सामने घुटने नहीं टेके। क्योंकि ये दृढ़निश्चयी व्यक्ति थे। संघर्ष के इसी दौर में उनकी पत्नी भी गिरफ़्तार कर ली गईं और उन्हें दो वर्ष की सज़ा हुई। क्योंकि वह भी स्वतंत्रता आंदोलन में कूदी थीं और जनप्रिय नेता बन चुकी थीं। जयप्रकाश जी अपनी निष्ठा और चतुराई के लिए प्रसिद्ध थे। वे सच्चे देशभक्त एवं ईमानदार नेता थे। वे ब्रिटिश प्रशासन का समूल नष्ट करने पर तुले हुए थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्होंने विश्व स्तर पर अपनी आवाज़ बुलन्द करते हुए कहा है कि विश्व के संकट को मद्देनज़र रखते हुए भारत को आज़ादी प्राप्त होना अति आवश्यक है। जब तक हम आज़ाद न होंगे, हमारा स्वतंत्र अस्तित्व क़ायम न होगा और हम विकास के पथ पर अग्रसर न हो सकेंगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
महात्मा गांधी ने अपने सारवान भाषण में कहा था– '''करो या मरो'''&amp;quot; '''&amp;quot;Do or die&amp;quot;'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये वाक्यांश जयप्रकाश बाबू के मन में सदैव गूँजता रहता था। फलत: उन्होंने देश को आज़ाद करने हेतु 'करो या मरो' का निर्णय लिया। गांधीजी के इस महामंत्र का उन्होंने जमकर प्रचार व प्रसार भी किया। गांधीजी से प्रेरणा लेकर जयप्रकाश आगे बढ़ते गये और स्वतंत्रता का बिगुल बज उठा। जब जयप्रकाश की गिरफ़्तारी हुई तो ठीक दूसरे दिन महात्मा गांधी की भी गिरफ़्तारी हुई। सैकड़ों हज़ारों की संख्या में लोग अपने नेताओं की रिहाई की माँग करने लगे। अंग्रेज़ स्तब्ध रह गये। देश के कोने-कोने के कार्यकर्ता बन्दी बनाये गये। क्रान्ति की स्थिति सम्पूर्ण देश के सम्मुख आयी हज़ारों की संख्या में लोगों ने गिरफ़्तारियाँ दीं।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Jayaprakash-Narayan-2.jpg|thumb|जयप्रकाश नारायण स्टाम्प&amp;lt;br /&amp;gt; Jayaprakash Narayan Stamp]]&lt;br /&gt;
==गिरफ़्तारी==&lt;br /&gt;
जयप्रकाश [[1929]] में भारत लौटने पर कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। भारत में ब्रिटिश हुक़ूमत के ख़िलाफ़ [[सविनय अवज्ञा आंदोलन]] में भाग लेने के कारण [[1932]] में उन्हें एक वर्ष की क़ैद हुई। रिहा होने पर जयप्रकाश ने कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के गठन में अग्रणी भूमिका निभाई, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का नेतृव्य करने वाली भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर एक वामपंथी समूह था। द्वितीय विश्व युद्ध में ग्रेट ब्रिटेन के पक्ष में भारत की भागीदारी का विरोध करने के कारण [[1939]] में जयप्रकाश को दुबारा गिरफ़्तार कर लिया गया, जय प्रकाश नारायण जी को हज़ारी बाग़ जेल में क़ैद किया गया था। बापू जय प्रकाश जी के जेल से भागने की योजना बनाने लगे। इसी बीच [[दीपावली]] का त्योहार आया और जेलर साहब ने जश्न मनाने हेतु नाच-गाने का भव्य प्रोग्राम तैयार किया था, लोग मस्ती में झूम रहे थे। इसी बीच जब नाच-गाने का कार्यक्रम हुआ तो जयप्रकाश और छ: सहयोगियों ने धोती बांधकर जेल परिसर को लांघ लिया। इसकी सूचना लन्दन तक पहुँची। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ दिन बाद [[1943]] में जयप्रकाश और [[राममनोहर लोहिया]] दोनों लोग गिरफ़्तार कर लिये गये। किन्तु येनकेन प्रकारेण वे लोग फ़रार हो गये। भविष्य में जयप्रकाश जी रावलपिंडी पहुँचे और वहाँ पर जयप्रकाश जी ने अपना नाम बदल लिया। किन्तु ट्रेन में किसी दिन सफ़र करते हुए जयप्रकाश जी को अंग्रेज़ पुलिस अफ़सर ने दो भारतीय सैनिकों की सहायता से गिरफ़्तार कर लिया। जयप्रकाश को [[लाहौर]] की काल कोठरी में रखा गया तथा इनकी कुर्सी पर बांधकर पिटाई की गई। भविष्य में इन्हें वहाँ से [[आगरा]] सेन्ट्रल जेल भेज दिया गया। इसी बीच [[ब्रिटेन]] में 'कन्जरवेटिव पार्टी' की हार हुई और 'लिबरल पार्टी' सत्ता में आयी। सत्ता सम्भालने के बाद लिबरल पार्टी ने अपनी घोषणा में यह वक्तव्य जारी किया कि वह [[भारत]] को शीघ्र ही आज़ाद करने वाली है। जयप्रकाश नारायण का संकल्प पूर्ण हुआ। जब लिबरल पार्टी ने यह घोषणा की कि वह भारत को आज़ादी प्रदान करेगी, उसके कुछ समय बाद उसने भारत के सपूतों के हाथ में सत्ता सौंपी। इस प्रकार अथक प्रयास के फलस्वरूप [[15 अगस्त]], सन [[1947]] को हमारा देश आज़ाद हो गया।&lt;br /&gt;
====कांग्रेस सोशलिस्ट की स्थापना====&lt;br /&gt;
जयप्रकाश नारयण ने आचार्य नरेंद्र देव के साथ मिलकर [[1948]] में ऑल इंडिया कांग्रेस सोशलिस्ट की स्थापना की। [[1953]] में कृषक मज़दूर प्रजा पार्टियों के विलय में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। भारत के स्वतंत्र होने के बाद उन्होंने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया और चुनावी राजनीति से अलग होकर भूमि सुधार के लिए [[विनोबा भावे]] के भूदान आंदोलन से जुड़ गए।&lt;br /&gt;
==जनता पार्टी का निर्माण==&lt;br /&gt;
जयप्रकाश जी [[1974]] में भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में एक कटु आलोचक के रूप में प्रभावी ढंग से उभरे। जयप्रकाश जी की निगाह में प्रधानमंत्री [[इंदिरा गांधी]] की सरकार भ्रष्ट व अलोकतांत्रिक होती जा रही थी। [[1975]] में निचली अदालत में गांधी पर चुनावों में भ्रष्टाचार का आरोप साबित हो गया और जयप्रकाश ने उनके इस्तीफ़े की माँग की। इसके बदले में इंदिरा गांधी ने राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर दी और नारायण तथा अन्य विपक्षी नेताओं को गिरफ़्तार कर लिया। पाँच महीने बाद जयप्रकाश जी गिरफ़्तार किए गए। भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ जेपी आंदोलन व्यापक हो गया और इसमें जनसंघ, समाजवादी, कांग्रेस (ओ) तथा भारतीय लोकदल जैसी कई पार्टियाँ कांग्रेस सरकार को गिराने एवं नागरिक स्वतंत्रताओं की बहाली के लिए एकत्र हो गईं। इस प्रकार जयप्रकाश ने ग़ैर साम्यवादी विपक्षी पार्टियों को एकजुट करके जनता पार्टी का निर्माण किया। जिसने भारत के [[1977]] के आम चुनाव में भारी सफलता प्राप्त करके आज़ादी के बाद की पहली ग़ैर कांग्रेसी सरकार बनाई। जयप्रकाश ने स्वयं राजनीतिक पद से दूर रहकर [[मोरारजी देसाई]] को प्रधानमंत्री मनोनीत किया।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Jayaprakash-Narayan-3.jpg|thumb|जयप्रकाश नारायण&amp;lt;br /&amp;gt; Jayaprakash Narayan]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==कर्मयोगी==&lt;br /&gt;
लोकनायक बाबू जय प्रकाश नारायण ने स्वार्थलोलुपता में कोई कार्य नहीं किया है। वे देश के सच्चे सपूत थे और उन्होंने निष्ठा की भावना से देश की सेवा की है। देश को आज़ाद करने में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। वे कर्मयोगी थे। वे अन्त: प्रेरणा के पुरुष थे। उन्होंने अनेक यूरोपीय यात्राएँ करके सर्वोदय के सिद्धान्त को सम्पूर्ण विश्व में प्रसारित किया। उन्होंने [[संस्कृत]] के निम्न श्लोक से सम्पूर्ण विश्व को प्रेरणा लेने को कहा है–&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
सर्वे भवन्तु सुखिन:&lt;br /&gt;
सर्वेसन्तु निरामया&lt;br /&gt;
सर्वे भद्राणी पश्यन्तु&lt;br /&gt;
मां कश्चिद दुखभागवेत्।।&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==मृत्यु==&lt;br /&gt;
बाबू जयप्रकाश नारायण सभी से उन्नति की बात करते थे। वे ऊँच-नीच की भेद भावना से परे थे। उनका विचार अच्छी बातों से युक्त था। वे सच्चे अर्थों में आदर्श पुरुष थे। उनके व्यक्तित्व में अदभुत ओज और तेज़ था। जय प्रकाश ने बिहार आंदोलन में भी भाग लिया है। जय प्रकाश की धर्म पत्नी श्रीमती प्रभा के [[13 अगस्त]] सन [[1973]] में मृत हो जाने के पश्चात उनको गहरा झटका लगा। किन्तु इसके बावज़ूद भी वे देश की सेवा में लगे रहे और एक बहादुर सिपाही की तरह कार्य करते रहे। भारत का यह अमर सपूत 8 अक्टूबर सन 1979 ई. को पटना, बिहार में चिर निन्द्रा में सो गया। &lt;br /&gt;
*[[रामधारी सिंह दिनकर|दिनकर]] ने लोकनायक के विषय में लिखा है–&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
है जय प्रकाश वह नाम&lt;br /&gt;
जिसे इतिहास आदर देता है।&lt;br /&gt;
बढ़कर जिसके पद चिन्हों की&lt;br /&gt;
उन पर अंकित कर देता है।&lt;br /&gt;
कहते हैं जो यह प्रकाश को,&lt;br /&gt;
नहीं मरण से जो डरता है।&lt;br /&gt;
ज्वाला को बुझते देख&lt;br /&gt;
कुंड में कूद स्वयं जो पड़ता है।।&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==भारत रत्न==&lt;br /&gt;
भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्त्वपूर्ण योगदान के लिये [[1998]] में लोकनायक जय प्रकाश नारायण को मरणोपरान्त भारत सरकार ने देश के सर्वोच्च सम्मान [[भारत रत्न]] से सम्मानित किया। &lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति&lt;br /&gt;
|आधार=&lt;br /&gt;
|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक3&lt;br /&gt;
|माध्यमिक=&lt;br /&gt;
|पूर्णता=&lt;br /&gt;
|शोध=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.mkgandhi-sarvodaya.org/jpnarayan/index.htm लोकनायक जयप्रकाश नारायण]&lt;br /&gt;
*[http://www.mkgandhi.org/jpnarayan/index.htm जयप्रकाश नारायण जीवनी]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{भारत रत्‍न}}{{रेमन मैग्सेसे पुरस्कार}}{{स्वतन्त्रता सेनानी}}{{भारत रत्‍न2}}&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता_सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:भारत रत्न सम्मान]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:इतिहास कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:रेमन मैग्सेसे पुरस्कार]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9_%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=212090</id>
		<title>अनुग्रह नारायण सिंह</title>
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		<updated>2011-08-31T06:44:15Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=BiharVibhuti Dr Anugrah Narayan Sinha.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=अनुग्रह नारायण सिंह&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=अनुग्रह बाबू&lt;br /&gt;
|जन्म=[[18 जून ]],[[1887]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[बिहार]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[पटना]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]&lt;br /&gt;
|पद=[[बिहार]] के प्रथम उप [[मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिन्दी]],[[अंग्रेज़ी]] &lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=[[2 जनवरी]], [[1946]] से 05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|विद्यालय=[[कलकत्ता विश्वविद्यालय]], प्रेसीडेंसी कॉलेज (कलकत्ता)&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री और डॉक्टरेट&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=बिहार विभूति&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=भारत की स्वतन्त्रता, अहिंसक आन्दोलन, सत्याग्रह&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=[[असहयोग आंदोलन]], [[नमक सत्याग्रह]] आदि&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=रचनाऐं-मेरे संस्मरण:आत्मकथा&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
डा '''अनुग्रह नारायण सिंह''' एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता और [[बिहार]] के पहले उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री (1946- 1957) थे। अनुग्रह बाबू (1887-1957) [[भारत]] के स्वतंत्रता सेनानी ,शिक्षक,वकील,राजनीतिज्ञ तथा आधुनिक बिहार के निर्माता रहे हैं।उन्हें '''बिहार विभूति''' के रूप में जाना जाता था।वह स्वाधीनता आंदोलन के महान योद्धा थे।स्वाधीनता के बाद राष्ट्र निर्माण व जनकल्याण के कार्यो में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया। अनुग्रह बाबू ने [[महात्मा गांधी]] एवं डा. [[राजेन्द्र प्रसाद]] के साथ राष्ट्रीय आन्दोलन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==आधुनिक बिहार के निर्माता==&lt;br /&gt;
डा अनुग्रह नारायण सिन्हा मानवतावादी प्रगतिशील विचारक एवं दलितों के उत्थान के प्रबल समर्थक और आधुनिक बिहार के निर्माताओं में से एक थे। उनका जीवन दर्शन देश की अखंडतास्वतंत्रता और नवनिर्माण की भावनाआ से शराबोर रहा है। उनका सौभ्य, स्निग्ध, शीतल, परोपकारी, अहंकारहीन और दर्पोदीप्त शख़्सियत बिहार के जनगणमन पर अधिकार किए हुए था|वे शरीर से दुर्बल, कृषकाय थे, पर इस अर्थ में महाप्राण कोई संकट उनके ओठों की मुस्कुराहट नहीं छीन सका। उनमें शक्ति और शील एकाकार हो गये थे और इसीलिए वे बुद्धिजीवियों को विशेष प्रिय थे।[[बिहार]] के विकास में उनका योगदान अतुलनीय है।राज्य के प्रशासनिक ढांचा को तैयार करना का काम अनुग्रह बाबू  ने किया था।इन्होंने राज्य के प्रथम उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  के रूप मे 11 वर्षो तक बिहार की अनवरत सेवा की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रारंभिक जीवन==&lt;br /&gt;
अनुग्रह बाबू का जन्म औरंगाबाद जिले के पोईअवा नामक गांव में 18 जून 1887 को हुआ । उनके पिता ठाकुर विशेश्वर दयाल सिंह जी अपने इलाके के एक वीर पुरुष थे। पांच बसंत जब वे पार कर गये तो उनकी शिक्षा का श्रीगणेश हुआ। सन्‌ 1900 में औरंगाबाद मिडिल स्कूल,1904 में गया ज़िला स्कूल और 1908 में पटना कॉलेज में प्रविष्ट हुए। जिस समय ये पटना कॉलेज में आये उस समय देश के शिक्षित व्यक्तियों के हृदय में परतंत्रता की वेदना का अनुभव होने लगा था। ग़ुलामी की जंजीर में जक़डी हुई मानवता का चित्कार अब उन्हें सुनायी प़डने लगा था। वे उस जंजीर को त़ोड फेंकने के लिए व्याकुल होने लगे थे। सुरेन्द्रनाथ बनर्जी तथा योगिराज अरविंद ऐसे महान आत्माआे का प्रादुर्भाव हो चुका था । इन महान आत्माआ के कार्य कलापों तथा व्याख्यानों का समुचित प्रभाव अनुग्रह बाबू के हृदय पर प़डा। उनका हृदय भी भारतमाता की सेवा के लिए त़डप उठा और वे उस पावन मार्ग पर अग्रसर हो गये। सर्फूद्दीन के नेतृत्व में ‘बिहारी छात्र सम्मेलन’ नामक संस्था संगठित की गई, जिसमें देशरत्न डॉ राजेन्द्र बाबू ऐसे मेधावी छात्रों को कार्य करने तथा नेतृत्व करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन==&lt;br /&gt;
{{बाँयाबक्सा|पाठ=&amp;quot;मेरा परिचय अनुग्रह बाबू से बिहारी छात्र सम्मेलन में ही पहले पहल हुआ था।मैं उनकी संगठन शक्ति और हाथ में आए हुए काया] में उत्साह देखकर मुग्ध हो गया और वह भावना समय बीतने से कम न होकर अधिक गहरी होती गई।&amp;quot;- ''' देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद'''|विचारक=}}इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध [[चम्पारण]] से अपना सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था।अनुग्रह बाबू के हृदय में सेवा की उच्च भावना तो बाल्यकाल से ही था, उसे कार्य रूप में परिणत करने तथा उसे पूर्ण रूप से विकसित करने का सुअवसर भी उन्हें इस संगठन में प्रविष्ट होने पर मिल गया। सन्‌ 1910 में आई ए की परीक्षा भी उन्होंने प्रथम श्रेणी में पास की फिर बीए में प्रवेश किया। उसी वर्ष महामना पोलक साहब जो महात्मा गांधी के सहकर्मी थे, पटना पधारे, अफ्रीका के प्रवासी भारतीयों के बारे में जो उनका व्याख्यान हुआ। उससे अनुग्रह बाबू बहुत प्रभावित हुए। उसी वर्ष प्रयाग में अखिल भारतीय कांग्रेस अधिवेशन हुआ, जिसमें वे अपनी उत्साही सहपाठियों के साथ गये। उस अधिवेशन में महामना गोखले आदि विद्वान राष्ट्रभक्तों के भाषणों को सुनने का स्वर्ण अवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ, जिससे वे ब़डे प्रभावित हुए।अनुग्रह बाबू विद्यार्थी जीवन में ही संगठनशक्ति तथा कार्य संचालन की काबिलियत हासिल कर ली थी। सन्‌ 1914 में इतिहास से एमए करने के बाद 1915 में बी एल की परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की। भागलपुर के तेजनारायण जुविल कॉलेज में इतिहास के एक प्रोफेसर की आवश्यकता हुई। अपने साथियों के परामर्श करने के पश्चात तुरंत उन्होंने अपना आवेदन पत्र भेज दिया और उस पद पर उनकी नियुक्ति हो गई। वर्ष 1916 में उन्होंने कॉलेज की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और पटना हाईकोर्ट में वकालत प्रारंभ कर दी। वकालत के सिलसिले में सरलता की मूर्ति देशरत्न राजेन्द्र बाबू के संसर्ग में अधिक रहने का सुअवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ और उनसे पेशे को उन्नत करने की प्रेरणा भी मिली। कलकत्ते में भी उन्हें राजेन्द्र बाबू के सम्पर्क में रहने का स्वर्ण अवसर मिला था। जिस समय राजेन्द्र बाबू लॉ कॉलेज में अध्यापक थे, उसी समय उसी कॉलेज में वे एक विद्यार्थी थे। इसलिये वे राजेन्द्र बाबू की प्रतिष्ठा किया करते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== गांधीजी का सत्याग्रह==&lt;br /&gt;
उन्हें वकालत करते हुए अभी एक वर्ष भी नहीं बीता था कि चम्पारण में नील आंदोलन उठ ख़डा हुआ । इस आंदोलन ने उनके जीवन की धारा ही बदल दी। चम्पारण के किसानों की तबाही का समाचार जब [[महात्मा गांधी]] से सुने तो वे करुणा से विचलित हो उठे। मुजफ्फरपुर के कमिश्नर की राय के विरुद्ध गांधीजी चम्पारण गये और जांच कार्य प्रारंभ कर दिया।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Champaran Satyagraha.jpg|thumb|220px|चंपारण सत्याग्रह आंदोलन के दौरान डॉ. [[राजेन्द्र प्रसाद]] और [[अनुग्रह नारायण सिन्हा]]]] अत्याचारों की जांच प्रारंभ हुई । इसमें कुछ ऐसे वकीलों की आवश्यकता थी, जो निर्भीकता पूर्वक कार्य कर सकें और समय आने पर जेल जाने के लिए भी तैयार रहें। इस विकट कार्य के लिए वृज किशोर बाबू के प्रोत्साहन पर राजेन्द्र बाबू के साथ ही अनुग्रह बाबू भी तत्पर हो गये। उन्होंने इसकी तनिक भी चिंता नहीं की कि उनका पेशा नया है और उन्हें भारी क्षति उठानी प़ड सकती है। एक बार जो त्याग के मार्ग पर आगे ब़ढ चुका है, उसे भला इन तुच्छ चीज़ों का क्या भय हो सकता है। चम्पारण का किसान आंदोलन 45 महीनों तक ज़ोरशोर से चलता रहा। अनुग्रह बाबू बराबर उसमें काम करते रहे और आखिर तक डटे रहे । स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का पाठ उन्हें गांधीजी के आश्रम में ही रहकर प़ढने का सुअवसर प्राप्त हुआ। अनुग्रह बाबू ने चम्पारण के नील आंदोलन में गांधीजी के साथ लगन और निर्भीकता के साथ काम किया और आंदोलन को सफल बनाकर उनके आदेशानुसार 1917 में पटना आये। बापू के साथ रहने से उन्हें जो आत्मिक बल प्राप्त हुआ, वही इनके जीवन का संबल बना। सन्‌ 1920 के दिसंबर में नागपुर में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हुआ, जिसमें अनुग्रह बाबू ने भी भाग लिया। सन्‌ 1929 के दिसंबर में सरदार पटेल ने किसान संगठन के सिलसिले में मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया, तब अनुग्रह बाबू सभी जगह उनके साथ थे। 26 जनवरी 1930 को सारे देश में स्वतंत्रता की घोषणा प़ढी गई। अनुग्रह बाबू को भी कई स्थानों में घोषण पत्र प़ढना प़ढा । कुछ दिनों के बाद महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया। उस सिलसिले में उन्हें चम्पारण, मुजफ्फरपुर आदि स्थानों का दौरा करना प़डा । 26 जनवरी, 1933 को जब पटना में घोषणा प़ढ रहे थे, उसी समय उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें पंद्रह मास की सज़ा हुई और उन्हें हज़ारीबाग़ जेल भेज दिया गया। जिस समय वे जेल में थे, बिहार में इतिहास विख्यात प्रलयंकारी भूकंप आया। हृदय विदारक समाचारों को प़ढकर उनका हृदय दर्द से कराह उठा। चहारदीवारी के अंदर बंद रहने के कारण ये कोई राहत कार्य नहीं कर सकते थे। लेकिन सरकार ने तीन हफ्तों के बाद इन्हें छ़ोड दिया। छूटते ही अनुग्रह बाबू राहत कार्य में संलग्न हो गये। राजेन्द्र बाबू के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इन्होंने अथक परिश्रम के साथ पी़डत मानवता की सेवा की। मुजफ्फरपुर, मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया । इसके लिये राजेन्द्र बाबू की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी, जिसके उपाध्यक्ष अनुग्रह बाबू ही चुने गये तथा खूब लगन के साथ सेवा कार्य किया।सन्‌ 1940 को मार्च महीने में अखिल भारतीय कांग्रेस का अधिवेशन रामग़ढ में हुआ। अधिवेशन का संपूर्ण भार अनुग्रह बाबू के कंधे पर था। उसमें जो अपनी तत्परता दिखलाई उसके फलस्वरूप ही कांग्रेस का अधिवेशन सफल हुआ। देश की परिस्थिति को देखते हुए जब गांधीजी ने व्यक्तिगत सत्याग्रह अपनाया तब उनके प्रिय सहयोगी अनुग्रह बाबू कब चूकने वाले थे। फलस्वरूप 1940 को वह गिरफ्तार कर लिये गये और अगस्त 1941 में रिहा हुए।&lt;br /&gt;
&amp;lt;br /&amp;gt;&amp;lt;blockquote&amp;gt;&amp;lt;span style=&amp;quot;color: blue&amp;quot;&amp;gt;'मुझे अपने लिए चिंता नहीं है,किंतु देश के लिए मुझे चिंता है।’ '''बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा'''&amp;lt;/span&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
गांधीजी का ‘करो या मरो’ का नारा बुलंद हुआ। 7 अगस्त, 1942 को गांधीजी गिरफ्तार किये गये। सारे देश में एक बार ही बिजली की तरह आंदोलन की आग फैल गई। कांग्रेस कमिटियां जब्त कर ली गई और कांग्रेस नेता जहां के तहां गिरफ्तार कर लिये गये। 10 अगस्त को अनुग्रह बाबू भी जब अपने मित्रों से मिलने गये, एकाएक मार्ग में ही गिरफ्तार कर लिये गये। सन्‌ 1944 में जब सारे कांग्रेसी नेता जेल से मुक्त किये जाने लगे, तो अनुग्रह बाबू भी कारावास की कैद से आज़ाद कर दिये गये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बिहार के पहले उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री==&lt;br /&gt;
1937 में ही बाबू साहब बिहार प्रान्त के वित्त मंत्री बने।अनुग्रह बाबू [[बिहार]] [[विधानसभा]]  में 1937 से  लेकर 1957 तक कांग्रेस [[विधायक]] दल के उप नेता थे। 1946 में जब दूसरा मंत्रिमंडल बना तब वित्त और श्रम दोनों विभागों के पहले मंत्री बने और उन्होंने अपने मंत्रित्व काल में विशेषकर श्रम विभाग में अपनी न्याय प्रियता लोकतांत्रिक विचारधारा एवं श्रमिकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का जो परिचय दिया वह सराहनीय ही नहीं अनुकरणीय है। श्रम मंत्री के रूप में अनुग्रह बाबू ने ‘बिहार केन्द्रीय श्रम परामर्श समिति’ के माध्यम से श्रम प्रशासन तथा श्रमिक समस्याओं के समाधान के लिए जो नियम एवं प्रावधान बनाये वे आज पूरे देश के लिये मापदंड के रूप में काम करते हैं। तृतीय मंत्रिमंडल में उन्हें खाद, बीज, मिट्‌टी, मवेशी में सुधार लाने के लिए शोध कार्य करवाए और पहली बार जापानी ढंग से धान उपजाने की पद्धति का प्रचार कराया। पूसा का कृषि अनुसंधान फार्म उनकी ही देन है। इस तेजस्वी महापुरुष का निधन 5 जुलाई, 1957 को उनके निवास स्थान [[पटना]] मे बीमारी के कारण हुआ। उनके सम्मान मे तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया, उनके अन्तिम संस्कार में विशाल जनसमूह उपस्थित था।अनुग्रह बाबू  [[2 जनवरी]], [[1946]] से अपनी मृत्यु तक बिहार के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  रहे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==संदर्भ==&lt;br /&gt;
{{reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/database/biographies/anugrah_narayan_sinha.htm अनुग्रह बाबू की जीवनी]&lt;br /&gt;
*[http://books.google.co.in/books?id=kmZV1ALVaCYC&amp;amp;pg=PT403&amp;amp;lpg=PT403&amp;amp;dq=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9+%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;source=bl&amp;amp;ots=BrT6nN3s6g&amp;amp;sig=AQGM4ELFM1mxpiXuSV_kVCFd_Fs&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ei=yaZmS5DaJsWVtgenqvS2Bg&amp;amp;sa=X&amp;amp;oi=book_result&amp;amp;ct=result&amp;amp;resnum=2&amp;amp;ved=0CAkQ6AEwATge#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%20%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;f=false बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा]&lt;br /&gt;
*[http://www.prabhatkhabar.com/node/18888 सादगी की प्रतिमूर्ति थे बिहार विभूति अनुग्रह बाबू] &lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_7898028.html  भारत को आज़ादी दिलाने में डा. अनुग्रह बाबू का अतुलनीय योगदान:राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.newshunt.com/cr.action?act=browseNewsItem&amp;amp;npKey=jagran&amp;amp;ctKey=Patna&amp;amp;newsUid=9712713&amp;amp;brand=NewsHunt&amp;amp;parent=null&amp;amp;res=128x128 बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिंह की जयंती]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_7891955.html अनुग्रह बाबू को श्रद्धांजलि]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:z7Qyx0yJNJ4J:in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html+/search%3Fhl%3Dhi%26q%3D%2Bsite:in.jagran.yahoo.com%2B%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2597%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25B9%2B%25E0%25A4%25AC%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%2582&amp;amp;cd=5&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in आधुनिक भारत के निर्माता थे अनुग्रह बाबू : राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_4561311.html लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी थे डा अनुग्रह बाबू ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html अनुग्रह बाबू के जीवन से सीख लेने की जरूरत है-राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/kalranga/freedom/congress/c127.htm बिहार के स्वतंत्रता सेनानी]&lt;br /&gt;
*[http://www.aicc.org.in/satyagraha_laboratories_of_mahatma_gandhi.htm महात्मा गाँधी की सत्याग्रह प्रयोगशाला]&lt;br /&gt;
*[http://loksabha.nic.in/ लोकसभा का जालस्थल]&lt;br /&gt;
*[http://www.mkgandhi.org/jpnarayan/total_revolution.htm सम्पूर्ण क्रांति]&lt;br /&gt;
*[http://www.snsibm.com/ अनुग्रह नारायण सिन्हा व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, राँची]&lt;br /&gt;
*[http://www.ancollege.org/ अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय, पटना]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार_का_इतिहास]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:लेखक]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीतिज्ञ]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध_व्यक्तित्व]]&lt;br /&gt;
[[Category:इतिहास कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<title>श्रीकृष्ण सिंह</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{लेख विस्तार}}&lt;br /&gt;
*मुंगेर ज़िले में जन्मे बिहार केसरी '''डॉ. श्रीकृष्ण सिंह''' [[बिहार]] के प्रथम [[मुख्यमंत्री]] थे। &lt;br /&gt;
* डॉ राजेन्द्र प्रसाद तथा डॉ अनुग्रह नारायण सिंह के साथ वे भी आधुनिक [[बिहार]] के निर्माता के रूप में जाने जाते हैं। &lt;br /&gt;
*श्रीकृष्ण सिंह,  [[2 जनवरी]], [[1946]] से अपनी मृत्यु तक अर्थात [[31 जनवरी]], [[1961]] तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे। &lt;br /&gt;
* बिहार, [[भारत]] का पहला राज्य था, जहाँ सबसे पहले उनके नेतृत्व में ज़मींदारी प्रथा का उन्मूलन उनके शासनकाल में हुआ। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति&lt;br /&gt;
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|माध्यमिक=&lt;br /&gt;
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}}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीतिज्ञ]][[Category:बिहार के मुख्यमंत्री]][[Category:राजनीति कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0_%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=174245</id>
		<title>सत्येन्द्र नारायण सिंह</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=सत्येन्द्र नारायण सिन्हा.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=सत्येन्द्र नारायण सिन्हा&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=छोटे साहब&lt;br /&gt;
|जन्म=[[१२ सितम्बर]], [[१९१७]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[मगध मंडल]], [[बिहार]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=[[2006]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[पटना]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=[[भारतीय]]&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]] ([[1940]]-[[1969]]), कांग्रेस-ओ (1969–[[1977]]), जनता पार्टी&lt;br /&gt;
|पद=बिहार के [[मुख्यमंत्री|पूर्व मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|कार्य काल=[[26 जनवरी]], [[1950]] से [[13 मई]], [[1962]]&lt;br /&gt;
|भाषा=&lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री &lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत्येन्द्र नारायण सिन्हा एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता और [[बिहार ]] के [[मुख्यमंत्री]] रह चुके थे। प्यार से लोग उन्हें '''''छोटे साहब'' ''' कहते थे।वे भारत के स्वतंत्रता सेनानी,राजनीतिज्ञ,सांसद,शिक्षा मंत्री तथा बिहार राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं।वह 72 वर्ष की आयु में मुख्यमंत्री  बने थे। इसके पूर्व 1977 मे उन्होंने मुख्यमंत्री बनने की कोशिश की परंतु असफल रहे।वस्तुत: छोटे साहब इतने भाग्यशाली नहीं रहे और वर्षों तक [[बिहार ]] के वरिष्ठतम नेता होने के बावज़ूद उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया।    &lt;br /&gt;
==राजनीतिक जीवन==&lt;br /&gt;
[[स्वतंत्रता संग्राम]] में भागीदारी के बाद देश की आज़ादी के समय राष्ट्रीय राजनीति में इनका नाम वज़नदार हो चुका था।लेकिन सत्येन्द्र नारायण सिन्हा की प्राथमिक रुचि राज्य की राजनीति में ही थी।यही कारण है कि वे [[1961]]में बिहार के शिक्षा मंत्री बने जो उप मुख्यमंत्री के हैसियत में थे।।उन्होंने  छठे और सातवें दशक में [[बिहार]] की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभायी। उन्होंने राजनीति के लिए मानवीय अनुभूतियों को तिलांजलि दे दी,शिक्षा मंत्री के रूप में शैक्षणिक सुधार किया, साथ ही [[मगध]] [[विश्वविद्यालय]] की स्थापना की।वे देश में अपनी सैद्धांतिक राजनीति के लिए चर्चित हुआ करते थे।छोटे साहब ने बिहार के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://tewaronline.com/?p=682 सत्येन्द्र नारायण सिन्हा के जीवन पर स्मृति कलश पुस्तक]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5764172.html जन नेता थे छोटे साहब : पूर्व मुख्यमंत्री राम सुन्दर दास]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:YndCj_BcwtkJ:in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_6564942.html+%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0+%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A5%82&amp;amp;cd=18&amp;amp;hl=en&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in&amp;amp;source=www.google.co.in  सत्येन्द्र बाबू सामाजिक- राजनीतिक और प्रशासनिक क्षमता के अद्भुत समन्वय थे-केन्द्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार के मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीतिज्ञ]]&lt;br /&gt;
[[Category:लेखक]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध_व्यक्तित्व]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:चरित कोश]] &lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9_%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=174244</id>
		<title>अनुग्रह नारायण सिंह</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9_%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=174244"/>
		<updated>2011-06-21T15:23:15Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: /* संबंधित लेख */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=BiharVibhuti Dr Anugrah Narayan Sinha.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=अनुग्रह नारायण सिंह&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=अनुग्रह बाबू&lt;br /&gt;
|जन्म=[[18 जून ]],[[1887]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[बिहार]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[पटना]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]&lt;br /&gt;
|पद=[[बिहार]] के प्रथम उप [[मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिन्दी]],[[अंग्रेज़ी]] &lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=[[2 जनवरी]], [[1946]] से 05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|विद्यालय=[[कलकत्ता विश्वविद्यालय]], प्रेसीडेंसी कॉलेज (कलकत्ता)&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री और डॉक्टरेट&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=बिहार विभूति&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=भारत की स्वतन्त्रता, अहिंसक आन्दोलन, सत्याग्रह&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=[[असहयोग आंदोलन]], [[नमक सत्याग्रह]] आदि&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=रचनाऐं-मेरे संस्मरण:आत्मकथा&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
डा '''अनुग्रह नारायण सिंह''' एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता और [[बिहार]] के पहले उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री (१९४६- १९५७) थे। अनुग्रह बाबू (१८८७-१९५७) [[भारत]] के स्वतंत्रता सेनानी ,शिक्षक,वकील,राजनीतिज्ञ तथा आधुनिक बिहार के निर्माता रहे हैं।उन्हें '''बिहार विभूति''' के रूप में जाना जाता था।वह स्वाधीनता आंदोलन के महान योद्धा थे।स्वाधीनता के बाद राष्ट्र निर्माण व जनकल्याण के कार्यो में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया। अनुग्रह बाबू ने [[महात्मा गांधी]] एवं डा. [[राजेन्द्र प्रसाद]] के साथ राष्ट्रीय आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==आधुनिक बिहार के निर्माता==&lt;br /&gt;
डा अनुग्रह नारायण सिन्हा मानवतावादी प्रगतिशील विचारक एवं दलितों के उत्थान के प्रबल समर्थक और आधुनिक भारत के निर्माताआें में से एक थे। उनका जीवन दर्शन देश की अखंडतास्वतंत्रता और नवनिर्माण की भावनाआ से शराबोर रहा है। उनका सौभ्य, स्निग्ध, शीतल, परोपकारी, अहंकारहीन और दर्पोदीप्त शख्सियत बिहार के जनगणमन पर अधिकार किए हुए था|वे शरीर से दुर्बल, कृषकाय थे, पर इस अर्थ में महाप्राण कोई संकट उनके ओठों की मुस्कुराहट नहीं छीन सका। उनमें शक्ति और शील एकाकार हो गये थे और इसीलिए वे बुद्धिजीवियों को विशेष प्रिय थे।[[बिहार]] के विकास में उनका योगदान अतुलनीय है।राज्य के प्रशासनिक ढांचा को तैयार करना का काम अनुग्रह बाबू  ने किया था।इन्होंने राज्य के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  के रूप मे ११ वर्षो तक बिहार की अनवरत सेवा की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रारंभिक जीवन==&lt;br /&gt;
अनुग्रह बाबू का जन्म औरंगाबाद जिले के पोईअवा नामक गांव में १८ जून १८८७ को हुआ । उनके पिता ठाकुर विशेश्वर दयाल सिंह जी अपने इलाके के एक वीर पुरुष थे। पांच बसंत जब वे पार कर गये तो उनकी शिक्षा का श्रीगणेश हुआ। सन्‌ १९०० में औरंगाबाद मिडिल स्कूल,१९०४ में गया जिला स्कूल और १९०८ में पटना कॉलेज में प्रविष्ट हुए। जिस समय ये पटना कॉलेज में आये उस समय देश के शिक्षित व्यक्तियों के हृदय में परतंत्रता की वेदना का अनुभव होने लगा था। गुलामी की जंजीर में जक़डी हुई मानवता का चित्कार अब उन्हें सुनायी प़डने लगा था। वे उस जंजीर को त़ोड फेंकने के लिए व्याकुल होने लगे थे। सुरेन्द्रनाथ बनर्जी तथा योगिराज अरविंद ऐसे महान आत्माआे का प्रादुर्भाव हो चुका था । इन महान आत्माआ के कार्य कलापों तथा व्याख्यानों का समुचित प्रभाव अनुग्रह बाबू के हृदय पर प़डा। उनका हृदय भी भारतमाता की सेवा के लिए त़डप उठा और वे उस पावन मार्ग पर अग्रसर हो गये। सर्फूद्दीन के नेतृत्व में ‘बिहारी छात्र सम्मेलन’ नामक संस्था संगठित की गई, जिसमें देशरत्न डॉ राजेन्द्र बाबू ऐसे मेधावी छात्रों को कार्य करने तथा नेतृत्व करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन==&lt;br /&gt;
{{बाँयाबक्सा|पाठ=&amp;quot;मेरा परिचय अनुग्रह बाबू से बिहारी छात्र सम्मेलन में ही पहले पहल हुआ था।मैं उनकी संगठन शक्ति और हाथ में आए हुए काया] में उत्साह देखकर मुग्ध हो गया और वह भावना समय बीतने से कम न होकर अधिक गहरी होती गई।&amp;quot;- ''' देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद'''|विचारक=}}इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध [[चम्पारण]] से अपना सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था।अनुग्रह बाबू के हृदय में सेवा की उच्च भावना तो बाल्यकाल से ही था, उसे कार्य रूप में परिणत करने तथा उसे पूर्ण रूप से विकसित करने का सुअवसर भी उन्हें इस संगठन में प्रविष्ट होने पर मिल गया। सन्‌ १९१० में आई ए की परीक्षा भी उन्होंने प्रथम श्रेणी में पास की फिर बीए में प्रवेश किया। उसी वर्ष महामना पोलक साहब जो महात्मा गांधी के सहकर्मी थे, पटना पधारे, अफ्रीका के प्रवासी भारतीयों के बारे में जो उनका व्याख्यान हुआ। उससे अनुग्रह बाबू बहुत प्रभावित हुए। उसी वर्ष प्रयाग में अखिल भारतीय कांग्रेस अधिवेशन हुआ, जिसमें वे अपनी उत्साही सहपाठियों के साथ गये। उस अधिवेशन में महामना गोखले आदि विद्वान राष्ट्रभक्तों के भाषणों को सुनने का स्वर्ण अवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ, जिससे वे ब़डे प्रभावित हुए।अनुग्रह बाबू विद्यार्थी जीवन में ही संगठनशक्ति तथा कार्य संचालन की काबिलियत हासिल कर ली थी। सन्‌ १९१४ में इतिहास से एमए करने के बाद १९१५ में बी एल की परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की। भागलपुर के तेजनारायण जुविल कॉलेज में इतिहास के एक प्रोफेसर की आवश्यकता हुई। अपने साथियों के परामर्श करने के पश्चात तुरंत उन्होंने अपना आवेदन पत्र भेज दिया और उस पद पर उनकी नियुक्ति हो गई। वर्ष १९१६ में उन्होंने कॉलेज की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और पटना हाईकोर्ट में वकालत प्रारंभ कर दी। वकालत के सिलसिले में सरलता की मूर्ति देशरत्न राजेन्द्र बाबू के संसर्ग में अधिक रहने का सुअवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ और उनसे पेशे को उन्नत करने की प्रेरणा भी मिली। कलकत्ते में भी उन्हें राजेन्द्र बाबू के सम्पर्क में रहने का स्वर्ण अवसर मिला था। जिस समय राजेन्द्र बाबू लॉ कॉलेज में अध्यापक थे, उसी समय उसी कॉलेज में वे एक विद्यार्थी थे। इसलिये वे राजेन्द्र बाबू की प्रतिष्ठा किया करते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== गांधीजी का सत्याग्रह==&lt;br /&gt;
उन्हें वकालत करते हुए अभी एक वर्ष भी नहीं बीता था कि चम्पारण में नील आंदोलन उठ ख़डा हुआ । इस आंदोलन ने उनके जीवन की धारा ही बदल दी। चम्पारण के किसानों की तबाही का समाचार जब [[महात्मा गांधी]] से सुने तो वे करुणा से विचलित हो उठे। मुजफ्फरपुर के कमिश्नर की राय के विरुद्ध गांधीजी चम्पारण गये और जांच कार्य प्रारंभ कर दिया।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Champaran Satyagraha.jpg|thumb|220px|चंपारण सत्याग्रह आंदोलन के दौरान डॉ. [[राजेन्द्र प्रसाद]] और [[अनुग्रह नारायण सिन्हा]]]] अत्याचारों की जांच प्रारंभ हुई । इसमें कुछ ऐसे वकीलों की आवश्यकता थी, जो निर्भीकता पूर्वक कार्य कर सकें और समय आने पर जेल जाने के लिए भी तैयार रहें। इस विकट कार्य के लिए वृज किशोर बाबू के प्रोत्साहन पर राजेन्द्र बाबू के साथ ही अनुग्रह बाबू भी तत्पर हो गये। उन्होंने इसकी तनिक भी चिंता नहीं की कि उनका पेशा नया है और उन्हें भारी क्षति उठानी प़ड सकती है। एक बार जो त्याग के मार्ग पर आगे ब़ढ चुका है, उसे भला इन तुच्छ चीजों का क्या भय हो सकता है। चम्पारण का किसान आंदोलन ४५ महीनों तक जोरशोर से चलता रहा। अनुग्रह बाबू बराबर उसमें काम करते रहे और आखिर तक डटे रहे । स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का पाठ उन्हें गांधीजी के आश्रम में ही रहकर प़ढने का सुअवसर प्राप्त हुआ। अनुग्रह बाबू ने चम्पारण के नील आंदोलन में गांधीजी के साथ लगन और निर्भीकता के साथ काम किया और आंदोलन को सफल बनाकर उनके आदेशानुसार १९१७ में पटना आये। बापू के साथ रहने से उन्हें जो आत्मिक बल प्राप्त हुआ, वही इनके जीवन का संबल बना। सन्‌ १९२० के दिसंबर में नागपुर में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हुआ, जिसमें अनुग्रह बाबू ने भी भाग लिया। सन्‌ १९२९ के दिसंबर में सरदार पटेल ने किसान संगठन के सिलसिले में मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया, तब अनुग्रह बाबू सभी जगह उनके साथ थे। २६ जनवरी १९३० को सारे देश में स्वतंत्रता की घोषणा प़ढी गई। अनुग्रह बाबू को भी कई स्थानों में घोषण पत्र प़ढना प़ढा । कुछ दिनों के बाद महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया। उस सिलसिले में उन्हें चम्पारण, मुजफ्फरपुर आदि स्थानों का दौरा करना प़डा । २६ जनवरी, १९३३ को जब पटना में घोषणा प़ढ रहे थे, उसी समय उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें पंद्रह मास की सजा हुई और उन्हें हजारीबाग जेल भेज दिया गया। जिस समय वे जेल में थे, बिहार में इतिहास विख्यात प्रलयंकारी भूकंप आया। हृदय विदारक समाचारों को प़ढकर उनका हृदय दर्द से कराह उठा। चहारदीवारी के अंदर बंद रहने के कारण ये कोई राहत कार्य नहीं कर सकते थे। लेकिन सरकार ने तीन हफ्तों के बाद इन्हें छ़ोड दिया। छूटते ही अनुग्रह बाबू राहत कार्य में संलग्न हो गये। राजेन्द्र बाबू के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इन्होंने अथक परिश्रम के साथ पी़डत मानवता की सेवा की। मुजफ्फरपुर, मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया । इसके लिये राजेन्द्र बाबू की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी, जिसके उपाध्यक्ष अनुग्रह बाबू ही चुने गये तथा खूब लगन के साथ सेवा कार्य किया।सन्‌ १९४० को मार्च महीने में अखिल भारतीय कांग्रेस का अधिवेशन रामग़ढ में हुआ। अधिवेशन का संपूर्ण भार अनुग्रह बाबू के कंधे पर था। उसमें जो अपनी तत्परता दिखलाई उसके फलस्वरूप ही कांग्रेस का अधिवेशन सफल हुआ। देश की परिस्थिति को देखते हुए जब गांधीजी ने व्यक्तिगत सत्याग्रह अपनाया तब उनके प्रिय सहयोगी अनुग्रह बाबू कब चूकने वाले थे। फलस्वरूप १९४० को वह गिरफ्तार कर लिये गये और अगस्त १९४१ में रिहा हुए।&lt;br /&gt;
&amp;lt;br /&amp;gt;&amp;lt;blockquote&amp;gt;&amp;lt;span style=&amp;quot;color: blue&amp;quot;&amp;gt;'मुझे अपने लिए चिंता नहीं है,किंतु देश के लिए मुझे चिंता है।’ '''बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा'''&amp;lt;/span&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
गांधीजी का ‘करो या मरो’ का नारा बुलंद हुआ। ७ अगस्त, १९४२ को गांधीजी गिरफ्तार किये गये। सारे देश में एक बार ही बिजली की तरह आंदोलन की आग फैल गई। कांग्रेस कमिटियां जब्त कर ली गई और कांग्रेस नेता जहां के तहां गिरफ्तार कर लिये गये। १० अगस्त को अनुग्रह बाबू भी जब अपने मित्रों से मिलने गये, एकाएक मार्ग में ही गिरफ्तार कर लिये गये। सन्‌ १९४४ में जब सारे कांग्रेसी नेता जेल से मुक्त किये जाने लगे, तो अनुग्रह बाबू भी कारावास की कैद से आजाद कर दिये गये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बिहार के पहले उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री==&lt;br /&gt;
१९३७ में ही बाबू साहब बिहार प्रान्त के वित्त मंत्री बने।अनुग्रह बाबू [[बिहार]] [[विधानसभा]]  में १९३७ से  लेकर १९५७ तक कांग्रेस [[विधायक]] दल के उप नेता थे। १९४६ में जब दूसरा मंत्रिमंडल बना तब वित्त और श्रम दोनों विभागों के पहले मंत्री बने और उन्होंने अपने मंत्रित्व काल में विशेषकर श्रम विभाग में अपनी न्याय प्रियता लोकतांत्रिक विचारधारा एवं श्रमिकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का जो परिचय दिया वह सराहनीय ही नहीं अनुकरणीय है। श्रम मंत्री के रूप में अनुग्रह बाबू ने ‘बिहार केन्द्रीय श्रम परामर्श समिति’ के माध्यम से श्रम प्रशासन तथा श्रमिक समस्याआें के समाधान के लिए जो नियम एवं प्रावधान बनाये वे आज पूरे देश के लिये मापदंड के रूप में काम करते हैं। तृतीय मंत्रिमंडल में उन्हें खाद, बीज, मिट्‌टी, मवेशी में सुधार लाने के लिए शोध कार्य करवाए और पहली बार जापानी ढंग से धान उपजाने की पद्धति का प्रचार कराया। पूसा का कृषि अनुसंधान फार्म उनकी ही देन है। इस तेजस्वी महापुरुष का निधन ५ जुलाई, १९५७ को उनके निवास स्थान [[पटना]] मे बीमारी के कारण हुआ। उनके सम्मान मे तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया, उनके अन्तिम संस्कार में विशाल जनसमूह उपस्थित था।अनुग्रह बाबू  [[२ जनवरी]], [[१९४६]] से अपनी मृत्यु तक बिहार के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  रहे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==संदर्भ==&lt;br /&gt;
{{reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/database/biographies/anugrah_narayan_sinha.htm अनुग्रह बाबू की जीवनी]&lt;br /&gt;
*[http://books.google.co.in/books?id=kmZV1ALVaCYC&amp;amp;pg=PT403&amp;amp;lpg=PT403&amp;amp;dq=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9+%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;source=bl&amp;amp;ots=BrT6nN3s6g&amp;amp;sig=AQGM4ELFM1mxpiXuSV_kVCFd_Fs&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ei=yaZmS5DaJsWVtgenqvS2Bg&amp;amp;sa=X&amp;amp;oi=book_result&amp;amp;ct=result&amp;amp;resnum=2&amp;amp;ved=0CAkQ6AEwATge#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%20%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;f=false बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा]&lt;br /&gt;
*[http://www.prabhatkhabar.com/node/18888 सादगी की प्रतिमूर्ति थे बिहार विभूति अनुग्रह बाबू] &lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_7898028.html  भारत को आजादी दिलाने में डा. अनुग्रह बाबू का अतुलनीय योगदान:राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.newshunt.com/cr.action?act=browseNewsItem&amp;amp;npKey=jagran&amp;amp;ctKey=Patna&amp;amp;newsUid=9712713&amp;amp;brand=NewsHunt&amp;amp;parent=null&amp;amp;res=128x128 बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिंह की जयंती]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_7891955.html अनुग्रह बाबू को श्रद्धांजलि]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:z7Qyx0yJNJ4J:in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html+/search%3Fhl%3Dhi%26q%3D%2Bsite:in.jagran.yahoo.com%2B%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2597%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25B9%2B%25E0%25A4%25AC%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%2582&amp;amp;cd=5&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in आधुनिक भारत के निर्माता थे अनुग्रह बाबू : राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_4561311.html लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी थे डा अनुग्रह बाबू ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html अनुग्रह बाबू के जीवन से सीख लेने की जरूरत है-राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/kalranga/freedom/congress/c127.htm बिहार के स्वतंत्रता सेनानी]&lt;br /&gt;
*[http://www.aicc.org.in/satyagraha_laboratories_of_mahatma_gandhi.htm महात्मा गाँधी की सत्याग्रह प्रयोगशाला]&lt;br /&gt;
*[http://loksabha.nic.in/ लोकसभा का जालस्थल]&lt;br /&gt;
*[http://www.mkgandhi.org/jpnarayan/total_revolution.htm सम्पूर्ण क्रांति]&lt;br /&gt;
*[http://www.snsibm.com/ अनुग्रह नारायण सिन्हा व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, राँची]&lt;br /&gt;
*[http://www.ancollege.org/ अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय, पटना]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार_का_इतिहास]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:लेखक]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीतिज्ञ]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध_व्यक्तित्व]]&lt;br /&gt;
[[Category:इतिहास कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9_%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=174243</id>
		<title>अनुग्रह नारायण सिंह</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9_%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=174243"/>
		<updated>2011-06-21T15:22:14Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=BiharVibhuti Dr Anugrah Narayan Sinha.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=अनुग्रह नारायण सिंह&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=अनुग्रह बाबू&lt;br /&gt;
|जन्म=[[18 जून ]],[[1887]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[बिहार]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[पटना]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]&lt;br /&gt;
|पद=[[बिहार]] के प्रथम उप [[मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिन्दी]],[[अंग्रेज़ी]] &lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=[[2 जनवरी]], [[1946]] से 05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|विद्यालय=[[कलकत्ता विश्वविद्यालय]], प्रेसीडेंसी कॉलेज (कलकत्ता)&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री और डॉक्टरेट&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=बिहार विभूति&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=भारत की स्वतन्त्रता, अहिंसक आन्दोलन, सत्याग्रह&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=[[असहयोग आंदोलन]], [[नमक सत्याग्रह]] आदि&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=रचनाऐं-मेरे संस्मरण:आत्मकथा&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
डा '''अनुग्रह नारायण सिंह''' एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता और [[बिहार]] के पहले उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री (१९४६- १९५७) थे। अनुग्रह बाबू (१८८७-१९५७) [[भारत]] के स्वतंत्रता सेनानी ,शिक्षक,वकील,राजनीतिज्ञ तथा आधुनिक बिहार के निर्माता रहे हैं।उन्हें '''बिहार विभूति''' के रूप में जाना जाता था।वह स्वाधीनता आंदोलन के महान योद्धा थे।स्वाधीनता के बाद राष्ट्र निर्माण व जनकल्याण के कार्यो में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया। अनुग्रह बाबू ने [[महात्मा गांधी]] एवं डा. [[राजेन्द्र प्रसाद]] के साथ राष्ट्रीय आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==आधुनिक बिहार के निर्माता==&lt;br /&gt;
डा अनुग्रह नारायण सिन्हा मानवतावादी प्रगतिशील विचारक एवं दलितों के उत्थान के प्रबल समर्थक और आधुनिक भारत के निर्माताआें में से एक थे। उनका जीवन दर्शन देश की अखंडतास्वतंत्रता और नवनिर्माण की भावनाआ से शराबोर रहा है। उनका सौभ्य, स्निग्ध, शीतल, परोपकारी, अहंकारहीन और दर्पोदीप्त शख्सियत बिहार के जनगणमन पर अधिकार किए हुए था|वे शरीर से दुर्बल, कृषकाय थे, पर इस अर्थ में महाप्राण कोई संकट उनके ओठों की मुस्कुराहट नहीं छीन सका। उनमें शक्ति और शील एकाकार हो गये थे और इसीलिए वे बुद्धिजीवियों को विशेष प्रिय थे।[[बिहार]] के विकास में उनका योगदान अतुलनीय है।राज्य के प्रशासनिक ढांचा को तैयार करना का काम अनुग्रह बाबू  ने किया था।इन्होंने राज्य के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  के रूप मे ११ वर्षो तक बिहार की अनवरत सेवा की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रारंभिक जीवन==&lt;br /&gt;
अनुग्रह बाबू का जन्म औरंगाबाद जिले के पोईअवा नामक गांव में १८ जून १८८७ को हुआ । उनके पिता ठाकुर विशेश्वर दयाल सिंह जी अपने इलाके के एक वीर पुरुष थे। पांच बसंत जब वे पार कर गये तो उनकी शिक्षा का श्रीगणेश हुआ। सन्‌ १९०० में औरंगाबाद मिडिल स्कूल,१९०४ में गया जिला स्कूल और १९०८ में पटना कॉलेज में प्रविष्ट हुए। जिस समय ये पटना कॉलेज में आये उस समय देश के शिक्षित व्यक्तियों के हृदय में परतंत्रता की वेदना का अनुभव होने लगा था। गुलामी की जंजीर में जक़डी हुई मानवता का चित्कार अब उन्हें सुनायी प़डने लगा था। वे उस जंजीर को त़ोड फेंकने के लिए व्याकुल होने लगे थे। सुरेन्द्रनाथ बनर्जी तथा योगिराज अरविंद ऐसे महान आत्माआे का प्रादुर्भाव हो चुका था । इन महान आत्माआ के कार्य कलापों तथा व्याख्यानों का समुचित प्रभाव अनुग्रह बाबू के हृदय पर प़डा। उनका हृदय भी भारतमाता की सेवा के लिए त़डप उठा और वे उस पावन मार्ग पर अग्रसर हो गये। सर्फूद्दीन के नेतृत्व में ‘बिहारी छात्र सम्मेलन’ नामक संस्था संगठित की गई, जिसमें देशरत्न डॉ राजेन्द्र बाबू ऐसे मेधावी छात्रों को कार्य करने तथा नेतृत्व करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन==&lt;br /&gt;
{{बाँयाबक्सा|पाठ=&amp;quot;मेरा परिचय अनुग्रह बाबू से बिहारी छात्र सम्मेलन में ही पहले पहल हुआ था।मैं उनकी संगठन शक्ति और हाथ में आए हुए काया] में उत्साह देखकर मुग्ध हो गया और वह भावना समय बीतने से कम न होकर अधिक गहरी होती गई।&amp;quot;- ''' देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद'''|विचारक=}}इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध [[चम्पारण]] से अपना सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था।अनुग्रह बाबू के हृदय में सेवा की उच्च भावना तो बाल्यकाल से ही था, उसे कार्य रूप में परिणत करने तथा उसे पूर्ण रूप से विकसित करने का सुअवसर भी उन्हें इस संगठन में प्रविष्ट होने पर मिल गया। सन्‌ १९१० में आई ए की परीक्षा भी उन्होंने प्रथम श्रेणी में पास की फिर बीए में प्रवेश किया। उसी वर्ष महामना पोलक साहब जो महात्मा गांधी के सहकर्मी थे, पटना पधारे, अफ्रीका के प्रवासी भारतीयों के बारे में जो उनका व्याख्यान हुआ। उससे अनुग्रह बाबू बहुत प्रभावित हुए। उसी वर्ष प्रयाग में अखिल भारतीय कांग्रेस अधिवेशन हुआ, जिसमें वे अपनी उत्साही सहपाठियों के साथ गये। उस अधिवेशन में महामना गोखले आदि विद्वान राष्ट्रभक्तों के भाषणों को सुनने का स्वर्ण अवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ, जिससे वे ब़डे प्रभावित हुए।अनुग्रह बाबू विद्यार्थी जीवन में ही संगठनशक्ति तथा कार्य संचालन की काबिलियत हासिल कर ली थी। सन्‌ १९१४ में इतिहास से एमए करने के बाद १९१५ में बी एल की परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की। भागलपुर के तेजनारायण जुविल कॉलेज में इतिहास के एक प्रोफेसर की आवश्यकता हुई। अपने साथियों के परामर्श करने के पश्चात तुरंत उन्होंने अपना आवेदन पत्र भेज दिया और उस पद पर उनकी नियुक्ति हो गई। वर्ष १९१६ में उन्होंने कॉलेज की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और पटना हाईकोर्ट में वकालत प्रारंभ कर दी। वकालत के सिलसिले में सरलता की मूर्ति देशरत्न राजेन्द्र बाबू के संसर्ग में अधिक रहने का सुअवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ और उनसे पेशे को उन्नत करने की प्रेरणा भी मिली। कलकत्ते में भी उन्हें राजेन्द्र बाबू के सम्पर्क में रहने का स्वर्ण अवसर मिला था। जिस समय राजेन्द्र बाबू लॉ कॉलेज में अध्यापक थे, उसी समय उसी कॉलेज में वे एक विद्यार्थी थे। इसलिये वे राजेन्द्र बाबू की प्रतिष्ठा किया करते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== गांधीजी का सत्याग्रह==&lt;br /&gt;
उन्हें वकालत करते हुए अभी एक वर्ष भी नहीं बीता था कि चम्पारण में नील आंदोलन उठ ख़डा हुआ । इस आंदोलन ने उनके जीवन की धारा ही बदल दी। चम्पारण के किसानों की तबाही का समाचार जब [[महात्मा गांधी]] से सुने तो वे करुणा से विचलित हो उठे। मुजफ्फरपुर के कमिश्नर की राय के विरुद्ध गांधीजी चम्पारण गये और जांच कार्य प्रारंभ कर दिया।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Champaran Satyagraha.jpg|thumb|220px|चंपारण सत्याग्रह आंदोलन के दौरान डॉ. [[राजेन्द्र प्रसाद]] और [[अनुग्रह नारायण सिन्हा]]]] अत्याचारों की जांच प्रारंभ हुई । इसमें कुछ ऐसे वकीलों की आवश्यकता थी, जो निर्भीकता पूर्वक कार्य कर सकें और समय आने पर जेल जाने के लिए भी तैयार रहें। इस विकट कार्य के लिए वृज किशोर बाबू के प्रोत्साहन पर राजेन्द्र बाबू के साथ ही अनुग्रह बाबू भी तत्पर हो गये। उन्होंने इसकी तनिक भी चिंता नहीं की कि उनका पेशा नया है और उन्हें भारी क्षति उठानी प़ड सकती है। एक बार जो त्याग के मार्ग पर आगे ब़ढ चुका है, उसे भला इन तुच्छ चीजों का क्या भय हो सकता है। चम्पारण का किसान आंदोलन ४५ महीनों तक जोरशोर से चलता रहा। अनुग्रह बाबू बराबर उसमें काम करते रहे और आखिर तक डटे रहे । स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का पाठ उन्हें गांधीजी के आश्रम में ही रहकर प़ढने का सुअवसर प्राप्त हुआ। अनुग्रह बाबू ने चम्पारण के नील आंदोलन में गांधीजी के साथ लगन और निर्भीकता के साथ काम किया और आंदोलन को सफल बनाकर उनके आदेशानुसार १९१७ में पटना आये। बापू के साथ रहने से उन्हें जो आत्मिक बल प्राप्त हुआ, वही इनके जीवन का संबल बना। सन्‌ १९२० के दिसंबर में नागपुर में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हुआ, जिसमें अनुग्रह बाबू ने भी भाग लिया। सन्‌ १९२९ के दिसंबर में सरदार पटेल ने किसान संगठन के सिलसिले में मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया, तब अनुग्रह बाबू सभी जगह उनके साथ थे। २६ जनवरी १९३० को सारे देश में स्वतंत्रता की घोषणा प़ढी गई। अनुग्रह बाबू को भी कई स्थानों में घोषण पत्र प़ढना प़ढा । कुछ दिनों के बाद महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया। उस सिलसिले में उन्हें चम्पारण, मुजफ्फरपुर आदि स्थानों का दौरा करना प़डा । २६ जनवरी, १९३३ को जब पटना में घोषणा प़ढ रहे थे, उसी समय उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें पंद्रह मास की सजा हुई और उन्हें हजारीबाग जेल भेज दिया गया। जिस समय वे जेल में थे, बिहार में इतिहास विख्यात प्रलयंकारी भूकंप आया। हृदय विदारक समाचारों को प़ढकर उनका हृदय दर्द से कराह उठा। चहारदीवारी के अंदर बंद रहने के कारण ये कोई राहत कार्य नहीं कर सकते थे। लेकिन सरकार ने तीन हफ्तों के बाद इन्हें छ़ोड दिया। छूटते ही अनुग्रह बाबू राहत कार्य में संलग्न हो गये। राजेन्द्र बाबू के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इन्होंने अथक परिश्रम के साथ पी़डत मानवता की सेवा की। मुजफ्फरपुर, मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया । इसके लिये राजेन्द्र बाबू की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी, जिसके उपाध्यक्ष अनुग्रह बाबू ही चुने गये तथा खूब लगन के साथ सेवा कार्य किया।सन्‌ १९४० को मार्च महीने में अखिल भारतीय कांग्रेस का अधिवेशन रामग़ढ में हुआ। अधिवेशन का संपूर्ण भार अनुग्रह बाबू के कंधे पर था। उसमें जो अपनी तत्परता दिखलाई उसके फलस्वरूप ही कांग्रेस का अधिवेशन सफल हुआ। देश की परिस्थिति को देखते हुए जब गांधीजी ने व्यक्तिगत सत्याग्रह अपनाया तब उनके प्रिय सहयोगी अनुग्रह बाबू कब चूकने वाले थे। फलस्वरूप १९४० को वह गिरफ्तार कर लिये गये और अगस्त १९४१ में रिहा हुए।&lt;br /&gt;
&amp;lt;br /&amp;gt;&amp;lt;blockquote&amp;gt;&amp;lt;span style=&amp;quot;color: blue&amp;quot;&amp;gt;'मुझे अपने लिए चिंता नहीं है,किंतु देश के लिए मुझे चिंता है।’ '''बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा'''&amp;lt;/span&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
गांधीजी का ‘करो या मरो’ का नारा बुलंद हुआ। ७ अगस्त, १९४२ को गांधीजी गिरफ्तार किये गये। सारे देश में एक बार ही बिजली की तरह आंदोलन की आग फैल गई। कांग्रेस कमिटियां जब्त कर ली गई और कांग्रेस नेता जहां के तहां गिरफ्तार कर लिये गये। १० अगस्त को अनुग्रह बाबू भी जब अपने मित्रों से मिलने गये, एकाएक मार्ग में ही गिरफ्तार कर लिये गये। सन्‌ १९४४ में जब सारे कांग्रेसी नेता जेल से मुक्त किये जाने लगे, तो अनुग्रह बाबू भी कारावास की कैद से आजाद कर दिये गये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बिहार के पहले उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री==&lt;br /&gt;
१९३७ में ही बाबू साहब बिहार प्रान्त के वित्त मंत्री बने।अनुग्रह बाबू [[बिहार]] [[विधानसभा]]  में १९३७ से  लेकर १९५७ तक कांग्रेस [[विधायक]] दल के उप नेता थे। १९४६ में जब दूसरा मंत्रिमंडल बना तब वित्त और श्रम दोनों विभागों के पहले मंत्री बने और उन्होंने अपने मंत्रित्व काल में विशेषकर श्रम विभाग में अपनी न्याय प्रियता लोकतांत्रिक विचारधारा एवं श्रमिकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का जो परिचय दिया वह सराहनीय ही नहीं अनुकरणीय है। श्रम मंत्री के रूप में अनुग्रह बाबू ने ‘बिहार केन्द्रीय श्रम परामर्श समिति’ के माध्यम से श्रम प्रशासन तथा श्रमिक समस्याआें के समाधान के लिए जो नियम एवं प्रावधान बनाये वे आज पूरे देश के लिये मापदंड के रूप में काम करते हैं। तृतीय मंत्रिमंडल में उन्हें खाद, बीज, मिट्‌टी, मवेशी में सुधार लाने के लिए शोध कार्य करवाए और पहली बार जापानी ढंग से धान उपजाने की पद्धति का प्रचार कराया। पूसा का कृषि अनुसंधान फार्म उनकी ही देन है। इस तेजस्वी महापुरुष का निधन ५ जुलाई, १९५७ को उनके निवास स्थान [[पटना]] मे बीमारी के कारण हुआ। उनके सम्मान मे तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया, उनके अन्तिम संस्कार में विशाल जनसमूह उपस्थित था।अनुग्रह बाबू  [[२ जनवरी]], [[१९४६]] से अपनी मृत्यु तक बिहार के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  रहे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==संदर्भ==&lt;br /&gt;
{{reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/database/biographies/anugrah_narayan_sinha.htm अनुग्रह बाबू की जीवनी]&lt;br /&gt;
*[http://books.google.co.in/books?id=kmZV1ALVaCYC&amp;amp;pg=PT403&amp;amp;lpg=PT403&amp;amp;dq=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9+%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;source=bl&amp;amp;ots=BrT6nN3s6g&amp;amp;sig=AQGM4ELFM1mxpiXuSV_kVCFd_Fs&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ei=yaZmS5DaJsWVtgenqvS2Bg&amp;amp;sa=X&amp;amp;oi=book_result&amp;amp;ct=result&amp;amp;resnum=2&amp;amp;ved=0CAkQ6AEwATge#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%20%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;f=false बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा]&lt;br /&gt;
*[http://www.prabhatkhabar.com/node/18888 सादगी की प्रतिमूर्ति थे बिहार विभूति अनुग्रह बाबू] &lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_7898028.html  भारत को आजादी दिलाने में डा. अनुग्रह बाबू का अतुलनीय योगदान:राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.newshunt.com/cr.action?act=browseNewsItem&amp;amp;npKey=jagran&amp;amp;ctKey=Patna&amp;amp;newsUid=9712713&amp;amp;brand=NewsHunt&amp;amp;parent=null&amp;amp;res=128x128 बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिंह की जयंती]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_7891955.html अनुग्रह बाबू को श्रद्धांजलि]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:z7Qyx0yJNJ4J:in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html+/search%3Fhl%3Dhi%26q%3D%2Bsite:in.jagran.yahoo.com%2B%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2597%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25B9%2B%25E0%25A4%25AC%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%2582&amp;amp;cd=5&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in आधुनिक भारत के निर्माता थे अनुग्रह बाबू : राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_4561311.html लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी थे डा अनुग्रह बाबू ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html अनुग्रह बाबू के जीवन से सीख लेने की जरूरत है-राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/kalranga/freedom/congress/c127.htm बिहार के स्वतंत्रता सेनानी]&lt;br /&gt;
*[http://www.aicc.org.in/satyagraha_laboratories_of_mahatma_gandhi.htm महात्मा गाँधी की सत्याग्रह प्रयोगशाला]&lt;br /&gt;
*[http://loksabha.nic.in/ लोकसभा का जालस्थल]&lt;br /&gt;
*[http://www.mkgandhi.org/jpnarayan/total_revolution.htm सम्पूर्ण क्रांति]&lt;br /&gt;
*[http://www.snsibm.com/ अनुग्रह नारायण सिन्हा व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, राँची]&lt;br /&gt;
*[http://www.ancollege.org/ अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय, पटना]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार_का_इतिहास]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:लेखक]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीतिज्ञ]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध_व्यक्तित्व]&lt;br /&gt;
[[Category:इतिहास कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
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		<author><name>B Narayan</name></author>
	</entry>
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		<title>अनुग्रह नारायण सिंह</title>
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		<updated>2011-06-21T15:13:58Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=BiharVibhuti Dr Anugrah Narayan Sinha.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=अनुग्रह नारायण सिंह&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=अनुग्रह बाबू&lt;br /&gt;
|जन्म=[[18 जून ]],[[1887]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[बिहार]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[पटना]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]&lt;br /&gt;
|पद=[[बिहार]] के प्रथम उप [[मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिन्दी]],[[अंग्रेज़ी]] &lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=[[2 जनवरी]], [[1946]] से 05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|विद्यालय=[[कलकत्ता विश्वविद्यालय]], प्रेसीडेंसी कॉलेज (कलकत्ता)&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री और डॉक्टरेट&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=बिहार विभूति&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=भारत की स्वतन्त्रता, अहिंसक आन्दोलन, सत्याग्रह&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=[[असहयोग आंदोलन]], [[नमक सत्याग्रह]] आदि&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=रचनाऐं-मेरे संस्मरण:आत्मकथा&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
डा '''अनुग्रह नारायण सिंह''' एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता और [[बिहार]] के पहले उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री (१९४६- १९५७) थे। अनुग्रह बाबू (१८८७-१९५७) [[भारत]] के स्वतंत्रता सेनानी ,शिक्षक,राजनीतिज्ञ तथा आधुनिक बिहार के निर्माता रहे हैं।उन्हें '''बिहार विभूति''' के रूप में जाना जाता था।वह स्वाधीनता आंदोलन के महान योद्धा थे।स्वाधीनता के बाद राष्ट्र निर्माण व जनकल्याण के कार्यो में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया। अनुग्रह बाबू ने [[महात्मा गांधी]] एवं डा. [[राजेन्द्र प्रसाद]] के साथ राष्ट्रीय आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==आधुनिक बिहार के निर्माता==&lt;br /&gt;
डा अनुग्रह नारायण सिन्हा मानवतावादी प्रगतिशील विचारक एवं दलितों के उत्थान के प्रबल समर्थक और आधुनिक भारत के निर्माताआें में से एक थे। उनका जीवन दर्शन देश की अखंडतास्वतंत्रता और नवनिर्माण की भावनाआ से शराबोर रहा है। उनका सौभ्य, स्निग्ध, शीतल, परोपकारी, अहंकारहीन और दर्पोदीप्त शख्सियत बिहार के जनगणमन पर अधिकार किए हुए था|वे शरीर से दुर्बल, कृषकाय थे, पर इस अर्थ में महाप्राण कोई संकट उनके ओठों की मुस्कुराहट नहीं छीन सका। उनमें शक्ति और शील एकाकार हो गये थे और इसीलिए वे बुद्धिजीवियों को विशेष प्रिय थे।[[बिहार]] के विकास में उनका योगदान अतुलनीय है।राज्य के प्रशासनिक ढांचा को तैयार करना का काम अनुग्रह बाबू  ने किया था।इन्होंने राज्य के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  के रूप मे ११ वर्षो तक बिहार की अनवरत सेवा की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रारंभिक जीवन==&lt;br /&gt;
अनुग्रह बाबू का जन्म औरंगाबाद जिले के पोईअवा नामक गांव में १८ जून १८८७ को हुआ । उनके पिता ठाकुर विशेश्वर दयाल सिंह जी अपने इलाके के एक वीर पुरुष थे। पांच बसंत जब वे पार कर गये तो उनकी शिक्षा का श्रीगणेश हुआ। सन्‌ १९०० में औरंगाबाद मिडिल स्कूल,१९०४ में गया जिला स्कूल और १९०८ में पटना कॉलेज में प्रविष्ट हुए। जिस समय ये पटना कॉलेज में आये उस समय देश के शिक्षित व्यक्तियों के हृदय में परतंत्रता की वेदना का अनुभव होने लगा था। गुलामी की जंजीर में जक़डी हुई मानवता का चित्कार अब उन्हें सुनायी प़डने लगा था। वे उस जंजीर को त़ोड फेंकने के लिए व्याकुल होने लगे थे। सुरेन्द्रनाथ बनर्जी तथा योगिराज अरविंद ऐसे महान आत्माआे का प्रादुर्भाव हो चुका था । इन महान आत्माआ के कार्य कलापों तथा व्याख्यानों का समुचित प्रभाव अनुग्रह बाबू के हृदय पर प़डा। उनका हृदय भी भारतमाता की सेवा के लिए त़डप उठा और वे उस पावन मार्ग पर अग्रसर हो गये। सर्फूद्दीन के नेतृत्व में ‘बिहारी छात्र सम्मेलन’ नामक संस्था संगठित की गई, जिसमें देशरत्न डॉ राजेन्द्र बाबू ऐसे मेधावी छात्रों को कार्य करने तथा नेतृत्व करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन==&lt;br /&gt;
{{बाँयाबक्सा|पाठ=&amp;quot;मेरा परिचय अनुग्रह बाबू से बिहारी छात्र सम्मेलन में ही पहले पहल हुआ था।मैं उनकी संगठन शक्ति और हाथ में आए हुए काया] में उत्साह देखकर मुग्ध हो गया और वह भावना समय बीतने से कम न होकर अधिक गहरी होती गई।&amp;quot;- ''' देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद'''|विचारक=}}इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध [[चम्पारण]] से अपना सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था।अनुग्रह बाबू के हृदय में सेवा की उच्च भावना तो बाल्यकाल से ही था, उसे कार्य रूप में परिणत करने तथा उसे पूर्ण रूप से विकसित करने का सुअवसर भी उन्हें इस संगठन में प्रविष्ट होने पर मिल गया। सन्‌ १९१० में आई ए की परीक्षा भी उन्होंने प्रथम श्रेणी में पास की फिर बीए में प्रवेश किया। उसी वर्ष महामना पोलक साहब जो महात्मा गांधी के सहकर्मी थे, पटना पधारे, अफ्रीका के प्रवासी भारतीयों के बारे में जो उनका व्याख्यान हुआ। उससे अनुग्रह बाबू बहुत प्रभावित हुए। उसी वर्ष प्रयाग में अखिल भारतीय कांग्रेस अधिवेशन हुआ, जिसमें वे अपनी उत्साही सहपाठियों के साथ गये। उस अधिवेशन में महामना गोखले आदि विद्वान राष्ट्रभक्तों के भाषणों को सुनने का स्वर्ण अवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ, जिससे वे ब़डे प्रभावित हुए।अनुग्रह बाबू विद्यार्थी जीवन में ही संगठनशक्ति तथा कार्य संचालन की काबिलियत हासिल कर ली थी। सन्‌ १९१४ में इतिहास से एमए करने के बाद १९१५ में बी एल की परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की। भागलपुर के तेजनारायण जुविल कॉलेज में इतिहास के एक प्रोफेसर की आवश्यकता हुई। अपने साथियों के परामर्श करने के पश्चात तुरंत उन्होंने अपना आवेदन पत्र भेज दिया और उस पद पर उनकी नियुक्ति हो गई। वर्ष १९१६ में उन्होंने कॉलेज की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और पटना हाईकोर्ट में वकालत प्रारंभ कर दी। वकालत के सिलसिले में सरलता की मूर्ति देशरत्न राजेन्द्र बाबू के संसर्ग में अधिक रहने का सुअवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ और उनसे पेशे को उन्नत करने की प्रेरणा भी मिली। कलकत्ते में भी उन्हें राजेन्द्र बाबू के सम्पर्क में रहने का स्वर्ण अवसर मिला था। जिस समय राजेन्द्र बाबू लॉ कॉलेज में अध्यापक थे, उसी समय उसी कॉलेज में वे एक विद्यार्थी थे। इसलिये वे राजेन्द्र बाबू की प्रतिष्ठा किया करते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== गांधीजी का सत्याग्रह==&lt;br /&gt;
उन्हें वकालत करते हुए अभी एक वर्ष भी नहीं बीता था कि चम्पारण में नील आंदोलन उठ ख़डा हुआ । इस आंदोलन ने उनके जीवन की धारा ही बदल दी। चम्पारण के किसानों की तबाही का समाचार जब [[महात्मा गांधी]] से सुने तो वे करुणा से विचलित हो उठे। मुजफ्फरपुर के कमिश्नर की राय के विरुद्ध गांधीजी चम्पारण गये और जांच कार्य प्रारंभ कर दिया।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Champaran Satyagraha.jpg|thumb|220px|चंपारण सत्याग्रह आंदोलन के दौरान डॉ. [[राजेन्द्र प्रसाद]] और [[अनुग्रह नारायण सिन्हा]]]] अत्याचारों की जांच प्रारंभ हुई । इसमें कुछ ऐसे वकीलों की आवश्यकता थी, जो निर्भीकता पूर्वक कार्य कर सकें और समय आने पर जेल जाने के लिए भी तैयार रहें। इस विकट कार्य के लिए वृज किशोर बाबू के प्रोत्साहन पर राजेन्द्र बाबू के साथ ही अनुग्रह बाबू भी तत्पर हो गये। उन्होंने इसकी तनिक भी चिंता नहीं की कि उनका पेशा नया है और उन्हें भारी क्षति उठानी प़ड सकती है। एक बार जो त्याग के मार्ग पर आगे ब़ढ चुका है, उसे भला इन तुच्छ चीजों का क्या भय हो सकता है। चम्पारण का किसान आंदोलन ४५ महीनों तक जोरशोर से चलता रहा। अनुग्रह बाबू बराबर उसमें काम करते रहे और आखिर तक डटे रहे । स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का पाठ उन्हें गांधीजी के आश्रम में ही रहकर प़ढने का सुअवसर प्राप्त हुआ। अनुग्रह बाबू ने चम्पारण के नील आंदोलन में गांधीजी के साथ लगन और निर्भीकता के साथ काम किया और आंदोलन को सफल बनाकर उनके आदेशानुसार १९१७ में पटना आये। बापू के साथ रहने से उन्हें जो आत्मिक बल प्राप्त हुआ, वही इनके जीवन का संबल बना। सन्‌ १९२० के दिसंबर में नागपुर में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हुआ, जिसमें अनुग्रह बाबू ने भी भाग लिया। सन्‌ १९२९ के दिसंबर में सरदार पटेल ने किसान संगठन के सिलसिले में मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया, तब अनुग्रह बाबू सभी जगह उनके साथ थे। २६ जनवरी १९३० को सारे देश में स्वतंत्रता की घोषणा प़ढी गई। अनुग्रह बाबू को भी कई स्थानों में घोषण पत्र प़ढना प़ढा । कुछ दिनों के बाद महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया। उस सिलसिले में उन्हें चम्पारण, मुजफ्फरपुर आदि स्थानों का दौरा करना प़डा । २६ जनवरी, १९३३ को जब पटना में घोषणा प़ढ रहे थे, उसी समय उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें पंद्रह मास की सजा हुई और उन्हें हजारीबाग जेल भेज दिया गया। जिस समय वे जेल में थे, बिहार में इतिहास विख्यात प्रलयंकारी भूकंप आया। हृदय विदारक समाचारों को प़ढकर उनका हृदय दर्द से कराह उठा। चहारदीवारी के अंदर बंद रहने के कारण ये कोई राहत कार्य नहीं कर सकते थे। लेकिन सरकार ने तीन हफ्तों के बाद इन्हें छ़ोड दिया। छूटते ही अनुग्रह बाबू राहत कार्य में संलग्न हो गये। राजेन्द्र बाबू के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इन्होंने अथक परिश्रम के साथ पी़डत मानवता की सेवा की। मुजफ्फरपुर, मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया । इसके लिये राजेन्द्र बाबू की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी, जिसके उपाध्यक्ष अनुग्रह बाबू ही चुने गये तथा खूब लगन के साथ सेवा कार्य किया।सन्‌ १९४० को मार्च महीने में अखिल भारतीय कांग्रेस का अधिवेशन रामग़ढ में हुआ। अधिवेशन का संपूर्ण भार अनुग्रह बाबू के कंधे पर था। उसमें जो अपनी तत्परता दिखलाई उसके फलस्वरूप ही कांग्रेस का अधिवेशन सफल हुआ। देश की परिस्थिति को देखते हुए जब गांधीजी ने व्यक्तिगत सत्याग्रह अपनाया तब उनके प्रिय सहयोगी अनुग्रह बाबू कब चूकने वाले थे। फलस्वरूप १९४० को वह गिरफ्तार कर लिये गये और अगस्त १९४१ में रिहा हुए।&lt;br /&gt;
&amp;lt;br /&amp;gt;&amp;lt;blockquote&amp;gt;&amp;lt;span style=&amp;quot;color: blue&amp;quot;&amp;gt;'मुझे अपने लिए चिंता नहीं है,किंतु देश के लिए मुझे चिंता है।’ '''बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा'''&amp;lt;/span&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
गांधीजी का ‘करो या मरो’ का नारा बुलंद हुआ। ७ अगस्त, १९४२ को गांधीजी गिरफ्तार किये गये। सारे देश में एक बार ही बिजली की तरह आंदोलन की आग फैल गई। कांग्रेस कमिटियां जब्त कर ली गई और कांग्रेस नेता जहां के तहां गिरफ्तार कर लिये गये। १० अगस्त को अनुग्रह बाबू भी जब अपने मित्रों से मिलने गये, एकाएक मार्ग में ही गिरफ्तार कर लिये गये। सन्‌ १९४४ में जब सारे कांग्रेसी नेता जेल से मुक्त किये जाने लगे, तो अनुग्रह बाबू भी कारावास की कैद से आजाद कर दिये गये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बिहार के पहले उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री==&lt;br /&gt;
१९३७ में ही बाबू साहब बिहार प्रान्त के वित्त मंत्री बने।अनुग्रह बाबू [[बिहार]] [[विधानसभा]]  में १९३७ से  लेकर १९५७ तक कांग्रेस [[विधायक]] दल के उप नेता थे। १९४६ में जब दूसरा मंत्रिमंडल बना तब वित्त और श्रम दोनों विभागों के पहले मंत्री बने और उन्होंने अपने मंत्रित्व काल में विशेषकर श्रम विभाग में अपनी न्याय प्रियता लोकतांत्रिक विचारधारा एवं श्रमिकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का जो परिचय दिया वह सराहनीय ही नहीं अनुकरणीय है। श्रम मंत्री के रूप में अनुग्रह बाबू ने ‘बिहार केन्द्रीय श्रम परामर्श समिति’ के माध्यम से श्रम प्रशासन तथा श्रमिक समस्याआें के समाधान के लिए जो नियम एवं प्रावधान बनाये वे आज पूरे देश के लिये मापदंड के रूप में काम करते हैं। तृतीय मंत्रिमंडल में उन्हें खाद, बीज, मिट्‌टी, मवेशी में सुधार लाने के लिए शोध कार्य करवाए और पहली बार जापानी ढंग से धान उपजाने की पद्धति का प्रचार कराया। पूसा का कृषि अनुसंधान फार्म उनकी ही देन है। इस तेजस्वी महापुरुष का निधन ५ जुलाई, १९५७ को उनके निवास स्थान [[पटना]] मे बीमारी के कारण हुआ। उनके सम्मान मे तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया, उनके अन्तिम संस्कार में विशाल जनसमूह उपस्थित था।अनुग्रह बाबू  [[२ जनवरी]], [[१९४६]] से अपनी मृत्यु तक बिहार के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  रहे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==संदर्भ==&lt;br /&gt;
{{reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/database/biographies/anugrah_narayan_sinha.htm अनुग्रह बाबू की जीवनी]&lt;br /&gt;
*[http://books.google.co.in/books?id=kmZV1ALVaCYC&amp;amp;pg=PT403&amp;amp;lpg=PT403&amp;amp;dq=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9+%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;source=bl&amp;amp;ots=BrT6nN3s6g&amp;amp;sig=AQGM4ELFM1mxpiXuSV_kVCFd_Fs&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ei=yaZmS5DaJsWVtgenqvS2Bg&amp;amp;sa=X&amp;amp;oi=book_result&amp;amp;ct=result&amp;amp;resnum=2&amp;amp;ved=0CAkQ6AEwATge#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%20%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;f=false बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा]&lt;br /&gt;
*[http://www.prabhatkhabar.com/node/18888 सादगी की प्रतिमूर्ति थे बिहार विभूति अनुग्रह बाबू] &lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_7898028.html  भारत को आजादी दिलाने में डा. अनुग्रह बाबू का अतुलनीय योगदान:राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.newshunt.com/cr.action?act=browseNewsItem&amp;amp;npKey=jagran&amp;amp;ctKey=Patna&amp;amp;newsUid=9712713&amp;amp;brand=NewsHunt&amp;amp;parent=null&amp;amp;res=128x128 बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिंह की जयंती]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_7891955.html अनुग्रह बाबू को श्रद्धांजलि]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:z7Qyx0yJNJ4J:in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html+/search%3Fhl%3Dhi%26q%3D%2Bsite:in.jagran.yahoo.com%2B%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2597%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25B9%2B%25E0%25A4%25AC%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%2582&amp;amp;cd=5&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in आधुनिक भारत के निर्माता थे अनुग्रह बाबू : राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_4561311.html लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी थे डा अनुग्रह बाबू ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html अनुग्रह बाबू के जीवन से सीख लेने की जरूरत है-राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/kalranga/freedom/congress/c127.htm बिहार के स्वतंत्रता सेनानी]&lt;br /&gt;
*[http://www.aicc.org.in/satyagraha_laboratories_of_mahatma_gandhi.htm महात्मा गाँधी की सत्याग्रह प्रयोगशाला]&lt;br /&gt;
*[http://loksabha.nic.in/ लोकसभा का जालस्थल]&lt;br /&gt;
*[http://www.mkgandhi.org/jpnarayan/total_revolution.htm सम्पूर्ण क्रांति]&lt;br /&gt;
*[http://www.snsibm.com/ अनुग्रह नारायण सिन्हा व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, राँची]&lt;br /&gt;
*[http://www.ancollege.org/ अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय, पटना]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार_का_इतिहास]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार के मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीतिज्ञ]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<title>अनुग्रह नारायण सिंह</title>
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		<updated>2011-06-21T15:11:52Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=BiharVibhuti Dr Anugrah Narayan Sinha.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=अनुग्रह नारायण सिंह&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=अनुग्रह बाबू&lt;br /&gt;
|जन्म=[[18 जून ]],[[1887]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[बिहार]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[पटना]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]&lt;br /&gt;
|पद=[[बिहार]] के प्रथम उप [[मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिन्दी]],[[अंग्रेज़ी]] &lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=[[2 जनवरी]], [[1946]] से 05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|विद्यालय=[[कलकत्ता विश्वविद्यालय]], प्रेसीडेंसी कॉलेज (कलकत्ता)&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री और डॉक्टरेट&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=बिहार विभूति&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=भारत की स्वतन्त्रता, अहिंसक आन्दोलन, सत्याग्रह&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=[[असहयोग आंदोलन]], [[नमक सत्याग्रह]] आदि&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=रचनाऐं-मेरे संस्मरण:आत्मकथा&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
डा '''अनुग्रह नारायण सिंह''' एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता और [[बिहार]] के पहले उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री (१९४६- १९५७) थे। अनुग्रह बाबू (१८८७-१९५७) [[भारत]] के [[स्वतंत्रता सेनानी]],शिक्षक,राजनीतिज्ञ तथा आधुनिक बिहार के निर्माता रहे हैं।उन्हें '''बिहार विभूति''' के रूप में जाना जाता था।वह स्वाधीनता आंदोलन के महान योद्धा थे।स्वाधीनता के बाद राष्ट्र निर्माण व जनकल्याण के कार्यो में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==आधुनिक बिहार के निर्माता==&lt;br /&gt;
डा अनुग्रह नारायण सिन्हा मानवतावादी प्रगतिशील विचारक एवं दलितों के उत्थान के प्रबल समर्थक और आधुनिक भारत के निर्माताआें में से एक थे। उनका जीवन दर्शन देश की अखंडतास्वतंत्रता और नवनिर्माण की भावनाआ से शराबोर रहा है। उनका सौभ्य, स्निग्ध, शीतल, परोपकारी, अहंकारहीन और दर्पोदीप्त शख्सियत बिहार के जनगणमन पर अधिकार किए हुए था|वे शरीर से दुर्बल, कृषकाय थे, पर इस अर्थ में महाप्राण कोई संकट उनके ओठों की मुस्कुराहट नहीं छीन सका। उनमें शक्ति और शील एकाकार हो गये थे और इसीलिए वे बुद्धिजीवियों को विशेष प्रिय थे।[[बिहार]] के विकास में उनका योगदान अतुलनीय है।राज्य के प्रशासनिक ढांचा को तैयार करना का काम अनुग्रह बाबू  ने किया था।इन्होंने राज्य के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  के रूप मे ११ वर्षो तक बिहार की अनवरत सेवा की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रारंभिक जीवन==&lt;br /&gt;
अनुग्रह बाबू का जन्म औरंगाबाद जिले के पोईअवा नामक गांव में १८ जून १८८७ को हुआ । उनके पिता ठाकुर विशेश्वर दयाल सिंह जी अपने इलाके के एक वीर पुरुष थे। पांच बसंत जब वे पार कर गये तो उनकी शिक्षा का श्रीगणेश हुआ। सन्‌ १९०० में औरंगाबाद मिडिल स्कूल,१९०४ में गया जिला स्कूल और १९०८ में पटना कॉलेज में प्रविष्ट हुए। जिस समय ये पटना कॉलेज में आये उस समय देश के शिक्षित व्यक्तियों के हृदय में परतंत्रता की वेदना का अनुभव होने लगा था। गुलामी की जंजीर में जक़डी हुई मानवता का चित्कार अब उन्हें सुनायी प़डने लगा था। वे उस जंजीर को त़ोड फेंकने के लिए व्याकुल होने लगे थे। सुरेन्द्रनाथ बनर्जी तथा योगिराज अरविंद ऐसे महान आत्माआे का प्रादुर्भाव हो चुका था । इन महान आत्माआ के कार्य कलापों तथा व्याख्यानों का समुचित प्रभाव अनुग्रह बाबू के हृदय पर प़डा। उनका हृदय भी भारतमाता की सेवा के लिए त़डप उठा और वे उस पावन मार्ग पर अग्रसर हो गये। सर्फूद्दीन के नेतृत्व में ‘बिहारी छात्र सम्मेलन’ नामक संस्था संगठित की गई, जिसमें देशरत्न डॉ राजेन्द्र बाबू ऐसे मेधावी छात्रों को कार्य करने तथा नेतृत्व करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन==&lt;br /&gt;
{{बाँयाबक्सा|पाठ=&amp;quot;मेरा परिचय अनुग्रह बाबू से बिहारी छात्र सम्मेलन में ही पहले पहल हुआ था।मैं उनकी संगठन शक्ति और हाथ में आए हुए काया] में उत्साह देखकर मुग्ध हो गया और वह भावना समय बीतने से कम न होकर अधिक गहरी होती गई।&amp;quot;- ''' देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद'''|विचारक=}}इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध [[चम्पारण]] से अपना सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था।अनुग्रह बाबू के हृदय में सेवा की उच्च भावना तो बाल्यकाल से ही था, उसे कार्य रूप में परिणत करने तथा उसे पूर्ण रूप से विकसित करने का सुअवसर भी उन्हें इस संगठन में प्रविष्ट होने पर मिल गया। सन्‌ १९१० में आई ए की परीक्षा भी उन्होंने प्रथम श्रेणी में पास की फिर बीए में प्रवेश किया। उसी वर्ष महामना पोलक साहब जो महात्मा गांधी के सहकर्मी थे, पटना पधारे, अफ्रीका के प्रवासी भारतीयों के बारे में जो उनका व्याख्यान हुआ। उससे अनुग्रह बाबू बहुत प्रभावित हुए। उसी वर्ष प्रयाग में अखिल भारतीय कांग्रेस अधिवेशन हुआ, जिसमें वे अपनी उत्साही सहपाठियों के साथ गये। उस अधिवेशन में महामना गोखले आदि विद्वान राष्ट्रभक्तों के भाषणों को सुनने का स्वर्ण अवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ, जिससे वे ब़डे प्रभावित हुए।अनुग्रह बाबू विद्यार्थी जीवन में ही संगठनशक्ति तथा कार्य संचालन की काबिलियत हासिल कर ली थी। सन्‌ १९१४ में इतिहास से एमए करने के बाद १९१५ में बी एल की परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की। भागलपुर के तेजनारायण जुविल कॉलेज में इतिहास के एक प्रोफेसर की आवश्यकता हुई। अपने साथियों के परामर्श करने के पश्चात तुरंत उन्होंने अपना आवेदन पत्र भेज दिया और उस पद पर उनकी नियुक्ति हो गई। वर्ष १९१६ में उन्होंने कॉलेज की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और पटना हाईकोर्ट में वकालत प्रारंभ कर दी। वकालत के सिलसिले में सरलता की मूर्ति देशरत्न राजेन्द्र बाबू के संसर्ग में अधिक रहने का सुअवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ और उनसे पेशे को उन्नत करने की प्रेरणा भी मिली। कलकत्ते में भी उन्हें राजेन्द्र बाबू के सम्पर्क में रहने का स्वर्ण अवसर मिला था। जिस समय राजेन्द्र बाबू लॉ कॉलेज में अध्यापक थे, उसी समय उसी कॉलेज में वे एक विद्यार्थी थे। इसलिये वे राजेन्द्र बाबू की प्रतिष्ठा किया करते थे। उन्होंने [[महात्मा गांधी]] एवं डा. [[राजेन्द्र प्रसाद]] के साथ राष्ट्रीय आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== गांधीजी का सत्याग्रह==&lt;br /&gt;
उन्हें वकालत करते हुए अभी एक वर्ष भी नहीं बीता था कि चम्पारण में नील आंदोलन उठ ख़डा हुआ । इस आंदोलन ने उनके जीवन की धारा ही बदल दी। चम्पारण के किसानों की तबाही का समाचार जब [[महात्मा गांधी]] से सुने तो वे करुणा से विचलित हो उठे। मुजफ्फरपुर के कमिश्नर की राय के विरुद्ध गांधीजी चम्पारण गये और जांच कार्य प्रारंभ कर दिया।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Champaran Satyagraha.jpg|thumb|220px|चंपारण सत्याग्रह आंदोलन के दौरान डॉ. [[राजेन्द्र प्रसाद]] और [[अनुग्रह नारायण सिन्हा]]]] अत्याचारों की जांच प्रारंभ हुई । इसमें कुछ ऐसे वकीलों की आवश्यकता थी, जो निर्भीकता पूर्वक कार्य कर सकें और समय आने पर जेल जाने के लिए भी तैयार रहें। इस विकट कार्य के लिए वृज किशोर बाबू के प्रोत्साहन पर राजेन्द्र बाबू के साथ ही अनुग्रह बाबू भी तत्पर हो गये। उन्होंने इसकी तनिक भी चिंता नहीं की कि उनका पेशा नया है और उन्हें भारी क्षति उठानी प़ड सकती है। एक बार जो त्याग के मार्ग पर आगे ब़ढ चुका है, उसे भला इन तुच्छ चीजों का क्या भय हो सकता है। चम्पारण का किसान आंदोलन ४५ महीनों तक जोरशोर से चलता रहा। अनुग्रह बाबू बराबर उसमें काम करते रहे और आखिर तक डटे रहे । स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का पाठ उन्हें गांधीजी के आश्रम में ही रहकर प़ढने का सुअवसर प्राप्त हुआ। अनुग्रह बाबू ने चम्पारण के नील आंदोलन में गांधीजी के साथ लगन और निर्भीकता के साथ काम किया और आंदोलन को सफल बनाकर उनके आदेशानुसार १९१७ में पटना आये। बापू के साथ रहने से उन्हें जो आत्मिक बल प्राप्त हुआ, वही इनके जीवन का संबल बना। सन्‌ १९२० के दिसंबर में नागपुर में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हुआ, जिसमें अनुग्रह बाबू ने भी भाग लिया। सन्‌ १९२९ के दिसंबर में सरदार पटेल ने किसान संगठन के सिलसिले में मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया, तब अनुग्रह बाबू सभी जगह उनके साथ थे। २६ जनवरी १९३० को सारे देश में स्वतंत्रता की घोषणा प़ढी गई। अनुग्रह बाबू को भी कई स्थानों में घोषण पत्र प़ढना प़ढा । कुछ दिनों के बाद महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया। उस सिलसिले में उन्हें चम्पारण, मुजफ्फरपुर आदि स्थानों का दौरा करना प़डा । २६ जनवरी, १९३३ को जब पटना में घोषणा प़ढ रहे थे, उसी समय उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें पंद्रह मास की सजा हुई और उन्हें हजारीबाग जेल भेज दिया गया। जिस समय वे जेल में थे, बिहार में इतिहास विख्यात प्रलयंकारी भूकंप आया। हृदय विदारक समाचारों को प़ढकर उनका हृदय दर्द से कराह उठा। चहारदीवारी के अंदर बंद रहने के कारण ये कोई राहत कार्य नहीं कर सकते थे। लेकिन सरकार ने तीन हफ्तों के बाद इन्हें छ़ोड दिया। छूटते ही अनुग्रह बाबू राहत कार्य में संलग्न हो गये। राजेन्द्र बाबू के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इन्होंने अथक परिश्रम के साथ पी़डत मानवता की सेवा की। मुजफ्फरपुर, मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया । इसके लिये राजेन्द्र बाबू की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी, जिसके उपाध्यक्ष अनुग्रह बाबू ही चुने गये तथा खूब लगन के साथ सेवा कार्य किया।सन्‌ १९४० को मार्च महीने में अखिल भारतीय कांग्रेस का अधिवेशन रामग़ढ में हुआ। अधिवेशन का संपूर्ण भार अनुग्रह बाबू के कंधे पर था। उसमें जो अपनी तत्परता दिखलाई उसके फलस्वरूप ही कांग्रेस का अधिवेशन सफल हुआ। देश की परिस्थिति को देखते हुए जब गांधीजी ने व्यक्तिगत सत्याग्रह अपनाया तब उनके प्रिय सहयोगी अनुग्रह बाबू कब चूकने वाले थे। फलस्वरूप १९४० को वह गिरफ्तार कर लिये गये और अगस्त १९४१ में रिहा हुए।&lt;br /&gt;
&amp;lt;br /&amp;gt;&amp;lt;blockquote&amp;gt;&amp;lt;span style=&amp;quot;color: blue&amp;quot;&amp;gt;'मुझे अपने लिए चिंता नहीं है,किंतु देश के लिए मुझे चिंता है।’ '''बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा'''&amp;lt;/span&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
गांधीजी का ‘करो या मरो’ का नारा बुलंद हुआ। ७ अगस्त, १९४२ को गांधीजी गिरफ्तार किये गये। सारे देश में एक बार ही बिजली की तरह आंदोलन की आग फैल गई। कांग्रेस कमिटियां जब्त कर ली गई और कांग्रेस नेता जहां के तहां गिरफ्तार कर लिये गये। १० अगस्त को अनुग्रह बाबू भी जब अपने मित्रों से मिलने गये, एकाएक मार्ग में ही गिरफ्तार कर लिये गये। सन्‌ १९४४ में जब सारे कांग्रेसी नेता जेल से मुक्त किये जाने लगे, तो अनुग्रह बाबू भी कारावास की कैद से आजाद कर दिये गये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बिहार के पहले उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री==&lt;br /&gt;
१९३७ में ही बाबू साहब बिहार प्रान्त के वित्त मंत्री बने।अनुग्रह बाबू [[बिहार]] [[विधानसभा]]  में १९३७ से  लेकर १९५७ तक कांग्रेस [[विधायक]] दल के उप नेता थे। १९४६ में जब दूसरा मंत्रिमंडल बना तब वित्त और श्रम दोनों विभागों के पहले मंत्री बने और उन्होंने अपने मंत्रित्व काल में विशेषकर श्रम विभाग में अपनी न्याय प्रियता लोकतांत्रिक विचारधारा एवं श्रमिकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का जो परिचय दिया वह सराहनीय ही नहीं अनुकरणीय है। श्रम मंत्री के रूप में अनुग्रह बाबू ने ‘बिहार केन्द्रीय श्रम परामर्श समिति’ के माध्यम से श्रम प्रशासन तथा श्रमिक समस्याआें के समाधान के लिए जो नियम एवं प्रावधान बनाये वे आज पूरे देश के लिये मापदंड के रूप में काम करते हैं। तृतीय मंत्रिमंडल में उन्हें खाद, बीज, मिट्‌टी, मवेशी में सुधार लाने के लिए शोध कार्य करवाए और पहली बार जापानी ढंग से धान उपजाने की पद्धति का प्रचार कराया। पूसा का कृषि अनुसंधान फार्म उनकी ही देन है। इस तेजस्वी महापुरुष का निधन ५ जुलाई, १९५७ को उनके निवास स्थान [[पटना]] मे बीमारी के कारण हुआ। उनके सम्मान मे तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया, उनके अन्तिम संस्कार में विशाल जनसमूह उपस्थित था।अनुग्रह बाबू  [[२ जनवरी]], [[१९४६]] से अपनी मृत्यु तक बिहार के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  रहे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==संदर्भ==&lt;br /&gt;
{{reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/database/biographies/anugrah_narayan_sinha.htm अनुग्रह बाबू की जीवनी]&lt;br /&gt;
*[http://books.google.co.in/books?id=kmZV1ALVaCYC&amp;amp;pg=PT403&amp;amp;lpg=PT403&amp;amp;dq=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9+%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;source=bl&amp;amp;ots=BrT6nN3s6g&amp;amp;sig=AQGM4ELFM1mxpiXuSV_kVCFd_Fs&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ei=yaZmS5DaJsWVtgenqvS2Bg&amp;amp;sa=X&amp;amp;oi=book_result&amp;amp;ct=result&amp;amp;resnum=2&amp;amp;ved=0CAkQ6AEwATge#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%20%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;f=false बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा]&lt;br /&gt;
*[http://www.prabhatkhabar.com/node/18888 सादगी की प्रतिमूर्ति थे बिहार विभूति अनुग्रह बाबू] &lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_7898028.html  भारत को आजादी दिलाने में डा. अनुग्रह बाबू का अतुलनीय योगदान:राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.newshunt.com/cr.action?act=browseNewsItem&amp;amp;npKey=jagran&amp;amp;ctKey=Patna&amp;amp;newsUid=9712713&amp;amp;brand=NewsHunt&amp;amp;parent=null&amp;amp;res=128x128 बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिंह की जयंती]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_7891955.html अनुग्रह बाबू को श्रद्धांजलि]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:z7Qyx0yJNJ4J:in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html+/search%3Fhl%3Dhi%26q%3D%2Bsite:in.jagran.yahoo.com%2B%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2597%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25B9%2B%25E0%25A4%25AC%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%2582&amp;amp;cd=5&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in आधुनिक भारत के निर्माता थे अनुग्रह बाबू : राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_4561311.html लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी थे डा अनुग्रह बाबू ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html अनुग्रह बाबू के जीवन से सीख लेने की जरूरत है-राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/kalranga/freedom/congress/c127.htm बिहार के स्वतंत्रता सेनानी]&lt;br /&gt;
*[http://www.aicc.org.in/satyagraha_laboratories_of_mahatma_gandhi.htm महात्मा गाँधी की सत्याग्रह प्रयोगशाला]&lt;br /&gt;
*[http://loksabha.nic.in/ लोकसभा का जालस्थल]&lt;br /&gt;
*[http://www.mkgandhi.org/jpnarayan/total_revolution.htm सम्पूर्ण क्रांति]&lt;br /&gt;
*[http://www.snsibm.com/ अनुग्रह नारायण सिन्हा व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, राँची]&lt;br /&gt;
*[http://www.ancollege.org/ अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय, पटना]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार_का_इतिहास]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार के मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीतिज्ञ]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<title>अनुग्रह नारायण सिंह</title>
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		<updated>2011-06-21T15:08:15Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=BiharVibhuti Dr Anugrah Narayan Sinha.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=अनुग्रह नारायण सिंह&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=अनुग्रह बाबू&lt;br /&gt;
|जन्म=[[18 जून ]],[[1887]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[बिहार]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[पटना]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]&lt;br /&gt;
|पद=[[बिहार]] के प्रथम उप [[मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिन्दी]],[[अंग्रेज़ी]] &lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=[[2 जनवरी]], [[1946]] से 05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|विद्यालय=[[कलकत्ता विश्वविद्यालय]], प्रेसीडेंसी कॉलेज (कलकत्ता)&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री और डॉक्टरेट&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=बिहार विभूति&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=भारत की स्वतन्त्रता, अहिंसक आन्दोलन, सत्याग्रह&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=[[असहयोग आंदोलन]], [[नमक सत्याग्रह]] आदि&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=रचनाऐं-मेरे संस्मरण:आत्मकथा&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
डा '''अनुग्रह नारायण सिंह''' एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता और [[बिहार]] के पहले उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री (१९४६- १९५७) थे। अनुग्रह बाबू (१८८७-१९५७) [[भारत]] के [[स्वतंत्रता सेनानी]], शिक्षक तथा राजनीतिज्ञ रहे हैं। लोकप्रियता के कारण उन्हें '''बिहार विभूति''' के रूप में जाना जाता था।वह स्वाधीनता आंदोलन के महान योद्धा थे।स्वाधीनता के बाद राष्ट्र निर्माण व जनकल्याण के कार्यो में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==आधुनिक बिहार के निर्माता==&lt;br /&gt;
डा अनुग्रह नारायण सिन्हा मानवतावादी प्रगतिशील विचारक एवं दलितों के उत्थान के प्रबल समर्थक और आधुनिक भारत के निर्माताआें में से एक थे। उनका जीवन दर्शन देश की अखंडतास्वतंत्रता और नवनिर्माण की भावनाआ से शराबोर रहा है। उनका सौभ्य, स्निग्ध, शीतल, परोपकारी, अहंकारहीन और दर्पोदीप्त शख्सियत बिहार के जनगणमन पर अधिकार किए हुए था|वे शरीर से दुर्बल, कृषकाय थे, पर इस अर्थ में महाप्राण कोई संकट उनके ओठों की मुस्कुराहट नहीं छीन सका। उनमें शक्ति और शील एकाकार हो गये थे और इसीलिए वे बुद्धिजीवियों को विशेष प्रिय थे।[[बिहार]] के विकास में उनका योगदान अतुलनीय है।राज्य के प्रशासनिक ढांचा को तैयार करना का काम अनुग्रह बाबू  ने किया था।इन्होंने राज्य के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  के रूप मे ११ वर्षो तक बिहार की अनवरत सेवा की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रारंभिक जीवन==&lt;br /&gt;
अनुग्रह बाबू का जन्म औरंगाबाद जिले के पोईअवा नामक गांव में १८ जून १८८७ को हुआ । उनके पिता ठाकुर विशेश्वर दयाल सिंह जी अपने इलाके के एक वीर पुरुष थे। पांच बसंत जब वे पार कर गये तो उनकी शिक्षा का श्रीगणेश हुआ। सन्‌ १९०० में औरंगाबाद मिडिल स्कूल,१९०४ में गया जिला स्कूल और १९०८ में पटना कॉलेज में प्रविष्ट हुए। जिस समय ये पटना कॉलेज में आये उस समय देश के शिक्षित व्यक्तियों के हृदय में परतंत्रता की वेदना का अनुभव होने लगा था। गुलामी की जंजीर में जक़डी हुई मानवता का चित्कार अब उन्हें सुनायी प़डने लगा था। वे उस जंजीर को त़ोड फेंकने के लिए व्याकुल होने लगे थे। सुरेन्द्रनाथ बनर्जी तथा योगिराज अरविंद ऐसे महान आत्माआे का प्रादुर्भाव हो चुका था । इन महान आत्माआ के कार्य कलापों तथा व्याख्यानों का समुचित प्रभाव अनुग्रह बाबू के हृदय पर प़डा। उनका हृदय भी भारतमाता की सेवा के लिए त़डप उठा और वे उस पावन मार्ग पर अग्रसर हो गये। सर्फूद्दीन के नेतृत्व में ‘बिहारी छात्र सम्मेलन’ नामक संस्था संगठित की गई, जिसमें देशरत्न डॉ राजेन्द्र बाबू ऐसे मेधावी छात्रों को कार्य करने तथा नेतृत्व करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन==&lt;br /&gt;
{{बाँयाबक्सा|पाठ=&amp;quot;मेरा परिचय अनुग्रह बाबू से बिहारी छात्र सम्मेलन में ही पहले पहल हुआ था।मैं उनकी संगठन शक्ति और हाथ में आए हुए काया] में उत्साह देखकर मुग्ध हो गया और वह भावना समय बीतने से कम न होकर अधिक गहरी होती गई।&amp;quot;- ''' देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद'''|विचारक=}}इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध [[चम्पारण]] से अपना सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था।अनुग्रह बाबू के हृदय में सेवा की उच्च भावना तो बाल्यकाल से ही था, उसे कार्य रूप में परिणत करने तथा उसे पूर्ण रूप से विकसित करने का सुअवसर भी उन्हें इस संगठन में प्रविष्ट होने पर मिल गया। सन्‌ १९१० में आई ए की परीक्षा भी उन्होंने प्रथम श्रेणी में पास की फिर बीए में प्रवेश किया। उसी वर्ष महामना पोलक साहब जो महात्मा गांधी के सहकर्मी थे, पटना पधारे, अफ्रीका के प्रवासी भारतीयों के बारे में जो उनका व्याख्यान हुआ। उससे अनुग्रह बाबू बहुत प्रभावित हुए। उसी वर्ष प्रयाग में अखिल भारतीय कांग्रेस अधिवेशन हुआ, जिसमें वे अपनी उत्साही सहपाठियों के साथ गये। उस अधिवेशन में महामना गोखले आदि विद्वान राष्ट्रभक्तों के भाषणों को सुनने का स्वर्ण अवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ, जिससे वे ब़डे प्रभावित हुए।अनुग्रह बाबू विद्यार्थी जीवन में ही संगठनशक्ति तथा कार्य संचालन की काबिलियत हासिल कर ली थी। सन्‌ १९१४ में इतिहास से एमए करने के बाद १९१५ में बी एल की परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की। भागलपुर के तेजनारायण जुविल कॉलेज में इतिहास के एक प्रोफेसर की आवश्यकता हुई। अपने साथियों के परामर्श करने के पश्चात तुरंत उन्होंने अपना आवेदन पत्र भेज दिया और उस पद पर उनकी नियुक्ति हो गई। वर्ष १९१६ में उन्होंने कॉलेज की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और पटना हाईकोर्ट में वकालत प्रारंभ कर दी। वकालत के सिलसिले में सरलता की मूर्ति देशरत्न राजेन्द्र बाबू के संसर्ग में अधिक रहने का सुअवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ और उनसे पेशे को उन्नत करने की प्रेरणा भी मिली। कलकत्ते में भी उन्हें राजेन्द्र बाबू के सम्पर्क में रहने का स्वर्ण अवसर मिला था। जिस समय राजेन्द्र बाबू लॉ कॉलेज में अध्यापक थे, उसी समय उसी कॉलेज में वे एक विद्यार्थी थे। इसलिये वे राजेन्द्र बाबू की प्रतिष्ठा किया करते थे। उन्होंने [[महात्मा गांधी]] एवं डा. [[राजेन्द्र प्रसाद]] के साथ राष्ट्रीय आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== गांधीजी का सत्याग्रह==&lt;br /&gt;
उन्हें वकालत करते हुए अभी एक वर्ष भी नहीं बीता था कि चम्पारण में नील आंदोलन उठ ख़डा हुआ । इस आंदोलन ने उनके जीवन की धारा ही बदल दी। चम्पारण के किसानों की तबाही का समाचार जब [[महात्मा गांधी]] से सुने तो वे करुणा से विचलित हो उठे। मुजफ्फरपुर के कमिश्नर की राय के विरुद्ध गांधीजी चम्पारण गये और जांच कार्य प्रारंभ कर दिया।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Champaran Satyagraha.jpg|thumb|220px|चंपारण सत्याग्रह आंदोलन के दौरान डॉ. [[राजेन्द्र प्रसाद]] और [[अनुग्रह नारायण सिन्हा]]]] अत्याचारों की जांच प्रारंभ हुई । इसमें कुछ ऐसे वकीलों की आवश्यकता थी, जो निर्भीकता पूर्वक कार्य कर सकें और समय आने पर जेल जाने के लिए भी तैयार रहें। इस विकट कार्य के लिए वृज किशोर बाबू के प्रोत्साहन पर राजेन्द्र बाबू के साथ ही अनुग्रह बाबू भी तत्पर हो गये। उन्होंने इसकी तनिक भी चिंता नहीं की कि उनका पेशा नया है और उन्हें भारी क्षति उठानी प़ड सकती है। एक बार जो त्याग के मार्ग पर आगे ब़ढ चुका है, उसे भला इन तुच्छ चीजों का क्या भय हो सकता है। चम्पारण का किसान आंदोलन ४५ महीनों तक जोरशोर से चलता रहा। अनुग्रह बाबू बराबर उसमें काम करते रहे और आखिर तक डटे रहे । स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का पाठ उन्हें गांधीजी के आश्रम में ही रहकर प़ढने का सुअवसर प्राप्त हुआ। अनुग्रह बाबू ने चम्पारण के नील आंदोलन में गांधीजी के साथ लगन और निर्भीकता के साथ काम किया और आंदोलन को सफल बनाकर उनके आदेशानुसार १९१७ में पटना आये। बापू के साथ रहने से उन्हें जो आत्मिक बल प्राप्त हुआ, वही इनके जीवन का संबल बना। सन्‌ १९२० के दिसंबर में नागपुर में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हुआ, जिसमें अनुग्रह बाबू ने भी भाग लिया। सन्‌ १९२९ के दिसंबर में सरदार पटेल ने किसान संगठन के सिलसिले में मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया, तब अनुग्रह बाबू सभी जगह उनके साथ थे। २६ जनवरी १९३० को सारे देश में स्वतंत्रता की घोषणा प़ढी गई। अनुग्रह बाबू को भी कई स्थानों में घोषण पत्र प़ढना प़ढा । कुछ दिनों के बाद महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया। उस सिलसिले में उन्हें चम्पारण, मुजफ्फरपुर आदि स्थानों का दौरा करना प़डा । २६ जनवरी, १९३३ को जब पटना में घोषणा प़ढ रहे थे, उसी समय उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें पंद्रह मास की सजा हुई और उन्हें हजारीबाग जेल भेज दिया गया। जिस समय वे जेल में थे, बिहार में इतिहास विख्यात प्रलयंकारी भूकंप आया। हृदय विदारक समाचारों को प़ढकर उनका हृदय दर्द से कराह उठा। चहारदीवारी के अंदर बंद रहने के कारण ये कोई राहत कार्य नहीं कर सकते थे। लेकिन सरकार ने तीन हफ्तों के बाद इन्हें छ़ोड दिया। छूटते ही अनुग्रह बाबू राहत कार्य में संलग्न हो गये। राजेन्द्र बाबू के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इन्होंने अथक परिश्रम के साथ पी़डत मानवता की सेवा की। मुजफ्फरपुर, मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया । इसके लिये राजेन्द्र बाबू की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी, जिसके उपाध्यक्ष अनुग्रह बाबू ही चुने गये तथा खूब लगन के साथ सेवा कार्य किया।सन्‌ १९४० को मार्च महीने में अखिल भारतीय कांग्रेस का अधिवेशन रामग़ढ में हुआ। अधिवेशन का संपूर्ण भार अनुग्रह बाबू के कंधे पर था। उसमें जो अपनी तत्परता दिखलाई उसके फलस्वरूप ही कांग्रेस का अधिवेशन सफल हुआ। देश की परिस्थिति को देखते हुए जब गांधीजी ने व्यक्तिगत सत्याग्रह अपनाया तब उनके प्रिय सहयोगी अनुग्रह बाबू कब चूकने वाले थे। फलस्वरूप १९४० को वह गिरफ्तार कर लिये गये और अगस्त १९४१ में रिहा हुए।&lt;br /&gt;
&amp;lt;br /&amp;gt;&amp;lt;blockquote&amp;gt;&amp;lt;span style=&amp;quot;color: blue&amp;quot;&amp;gt;'मुझे अपने लिए चिंता नहीं है,किंतु देश के लिए मुझे चिंता है।’ '''बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा'''&amp;lt;/span&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
गांधीजी का ‘करो या मरो’ का नारा बुलंद हुआ। ७ अगस्त, १९४२ को गांधीजी गिरफ्तार किये गये। सारे देश में एक बार ही बिजली की तरह आंदोलन की आग फैल गई। कांग्रेस कमिटियां जब्त कर ली गई और कांग्रेस नेता जहां के तहां गिरफ्तार कर लिये गये। १० अगस्त को अनुग्रह बाबू भी जब अपने मित्रों से मिलने गये, एकाएक मार्ग में ही गिरफ्तार कर लिये गये। सन्‌ १९४४ में जब सारे कांग्रेसी नेता जेल से मुक्त किये जाने लगे, तो अनुग्रह बाबू भी कारावास की कैद से आजाद कर दिये गये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बिहार के पहले उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री==&lt;br /&gt;
१९३७ में ही बाबू साहब बिहार प्रान्त के वित्त मंत्री बने।अनुग्रह बाबू [[बिहार]] [[विधानसभा]]  में १९३७ से  लेकर १९५७ तक कांग्रेस [[विधायक]] दल के उप नेता थे। १९४६ में जब दूसरा मंत्रिमंडल बना तब वित्त और श्रम दोनों विभागों के पहले मंत्री बने और उन्होंने अपने मंत्रित्व काल में विशेषकर श्रम विभाग में अपनी न्याय प्रियता लोकतांत्रिक विचारधारा एवं श्रमिकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का जो परिचय दिया वह सराहनीय ही नहीं अनुकरणीय है। श्रम मंत्री के रूप में अनुग्रह बाबू ने ‘बिहार केन्द्रीय श्रम परामर्श समिति’ के माध्यम से श्रम प्रशासन तथा श्रमिक समस्याआें के समाधान के लिए जो नियम एवं प्रावधान बनाये वे आज पूरे देश के लिये मापदंड के रूप में काम करते हैं। तृतीय मंत्रिमंडल में उन्हें खाद, बीज, मिट्‌टी, मवेशी में सुधार लाने के लिए शोध कार्य करवाए और पहली बार जापानी ढंग से धान उपजाने की पद्धति का प्रचार कराया। पूसा का कृषि अनुसंधान फार्म उनकी ही देन है। इस तेजस्वी महापुरुष का निधन ५ जुलाई, १९५७ को उनके निवास स्थान [[पटना]] मे बीमारी के कारण हुआ। उनके सम्मान मे तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया, उनके अन्तिम संस्कार में विशाल जनसमूह उपस्थित था।अनुग्रह बाबू  [[२ जनवरी]], [[१९४६]] से अपनी मृत्यु तक बिहार के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  रहे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==संदर्भ==&lt;br /&gt;
{{reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/database/biographies/anugrah_narayan_sinha.htm अनुग्रह बाबू की जीवनी]&lt;br /&gt;
*[http://books.google.co.in/books?id=kmZV1ALVaCYC&amp;amp;pg=PT403&amp;amp;lpg=PT403&amp;amp;dq=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9+%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;source=bl&amp;amp;ots=BrT6nN3s6g&amp;amp;sig=AQGM4ELFM1mxpiXuSV_kVCFd_Fs&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ei=yaZmS5DaJsWVtgenqvS2Bg&amp;amp;sa=X&amp;amp;oi=book_result&amp;amp;ct=result&amp;amp;resnum=2&amp;amp;ved=0CAkQ6AEwATge#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%20%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;f=false बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा]&lt;br /&gt;
*[http://www.prabhatkhabar.com/node/18888 सादगी की प्रतिमूर्ति थे बिहार विभूति अनुग्रह बाबू] &lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_7898028.html  भारत को आजादी दिलाने में डा. अनुग्रह बाबू का अतुलनीय योगदान:राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.newshunt.com/cr.action?act=browseNewsItem&amp;amp;npKey=jagran&amp;amp;ctKey=Patna&amp;amp;newsUid=9712713&amp;amp;brand=NewsHunt&amp;amp;parent=null&amp;amp;res=128x128 बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिंह की जयंती]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_7891955.html अनुग्रह बाबू को श्रद्धांजलि]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:z7Qyx0yJNJ4J:in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html+/search%3Fhl%3Dhi%26q%3D%2Bsite:in.jagran.yahoo.com%2B%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2597%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25B9%2B%25E0%25A4%25AC%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%2582&amp;amp;cd=5&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in आधुनिक भारत के निर्माता थे अनुग्रह बाबू : राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_4561311.html लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी थे डा अनुग्रह बाबू ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html अनुग्रह बाबू के जीवन से सीख लेने की जरूरत है-राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/kalranga/freedom/congress/c127.htm बिहार के स्वतंत्रता सेनानी]&lt;br /&gt;
*[http://www.aicc.org.in/satyagraha_laboratories_of_mahatma_gandhi.htm महात्मा गाँधी की सत्याग्रह प्रयोगशाला]&lt;br /&gt;
*[http://loksabha.nic.in/ लोकसभा का जालस्थल]&lt;br /&gt;
*[http://www.mkgandhi.org/jpnarayan/total_revolution.htm सम्पूर्ण क्रांति]&lt;br /&gt;
*[http://www.snsibm.com/ अनुग्रह नारायण सिन्हा व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, राँची]&lt;br /&gt;
*[http://www.ancollege.org/ अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय, पटना]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार_का_इतिहास]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार के मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीतिज्ञ]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<title>अनुग्रह नारायण सिंह</title>
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		<updated>2011-06-21T15:00:40Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: /* गांधीजी का सत्याग्रह */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=BiharVibhuti Dr Anugrah Narayan Sinha.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=अनुग्रह नारायण सिंह&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=अनुग्रह बाबू&lt;br /&gt;
|जन्म=[[18 जून ]],[[1887]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[बिहार]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[पटना]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]&lt;br /&gt;
|पद=[[बिहार]] के प्रथम उप [[मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिन्दी]],[[अंग्रेज़ी]] &lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=[[2 जनवरी]], [[1946]] से 05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|विद्यालय=[[कलकत्ता विश्वविद्यालय]], प्रेसीडेंसी कॉलेज (कलकत्ता)&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री और डॉक्टरेट&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=बिहार विभूति&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=भारत की स्वतन्त्रता, अहिंसक आन्दोलन, सत्याग्रह&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=[[असहयोग आंदोलन]], [[नमक सत्याग्रह]] आदि&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=रचनाऐं-मेरे संस्मरण:आत्मकथा&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
डा '''अनुग्रह नारायण सिंह''' एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता और [[बिहार]] के पहले उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री (१९४६- १९५७) थे। अनुग्रह बाबू (१८८७-१९५७) [[भारत]] के [[स्वतंत्रता सेनानी]], शिक्षक तथा राजनीतिज्ञ रहे हैं। लोकप्रियता के कारण उन्हें '''बिहार विभूति''' के रूप में जाना जाता था।वह स्वाधीनता आंदोलन के महान योद्धा थे।स्वाधीनता के बाद राष्ट्र निर्माण व जनकल्याण के कार्यो में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==आधुनिक बिहार के निर्माता==&lt;br /&gt;
डा अनुग्रह नारायण सिन्हा मानवतावादी प्रगतिशील विचारक एवं दलितों के उत्थान के प्रबल समर्थक और आधुनिक भारत के निर्माताआें में से एक थे। उनका जीवन दर्शन देश की अखंडतास्वतंत्रता और नवनिर्माण की भावनाआ से शराबोर रहा है। उनका सौभ्य, स्निग्ध, शीतल, परोपकारी, अहंकारहीन और दर्पोदीप्त शख्सियत बिहार के जनगणमन पर अधिकार किए हुए था|वे शरीर से दुर्बल, कृषकाय थे, पर इस अर्थ में महाप्राण कोई संकट उनके ओठों की मुस्कुराहट नहीं छीन सका। उनमें शक्ति और शील एकाकार हो गये थे और इसीलिए वे बुद्धिजीवियों को विशेष प्रिय थे।[[बिहार]] के विकास में उनका योगदान अतुलनीय है।राज्य के प्रशासनिक ढांचा को तैयार करना का काम अनुग्रह बाबू  ने किया था।इन्होंने राज्य के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  के रूप मे ११ वर्षो तक बिहार की अनवरत सेवा की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रारंभिक जीवन==&lt;br /&gt;
अनुग्रह बाबू का जन्म औरंगाबाद जिले के पोईअवा नामक गांव में १८ जून १८८७ को हुआ । उनके पिता ठाकुर विशेश्वर दयाल सिंह जी अपने इलाके के एक वीर पुरुष थे। पांच बसंत जब वे पार कर गये तो उनकी शिक्षा का श्रीगणेश हुआ। सन्‌ १९०० में औरंगाबाद मिडिल स्कूल,१९०४ में गया जिला स्कूल और १९०८ में पटना कॉलेज में प्रविष्ट हुए। जिस समय ये पटना कॉलेज में आये उस समय देश के शिक्षित व्यक्तियों के हृदय में परतंत्रता की वेदना का अनुभव होने लगा था। गुलामी की जंजीर में जक़डी हुई मानवता का चित्कार अब उन्हें सुनायी प़डने लगा था। वे उस जंजीर को त़ोड फेंकने के लिए व्याकुल होने लगे थे। सुरेन्द्रनाथ बनर्जी तथा योगिराज अरविंद ऐसे महान आत्माआे का प्रादुर्भाव हो चुका था । इन महान आत्माआ के कार्य कलापों तथा व्याख्यानों का समुचित प्रभाव अनुग्रह बाबू के हृदय पर प़डा। उनका हृदय भी भारतमाता की सेवा के लिए त़डप उठा और वे उस पावन मार्ग पर अग्रसर हो गये। सर्फूद्दीन के नेतृत्व में ‘बिहारी छात्र सम्मेलन’ नामक संस्था संगठित की गई, जिसमें देशरत्न डॉ राजेन्द्र बाबू ऐसे मेधावी छात्रों को कार्य करने तथा नेतृत्व करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन==&lt;br /&gt;
{{बाँयाबक्सा|पाठ=&amp;quot;मेरा परिचय अनुग्रह बाबू से बिहारी छात्र सम्मेलन में ही पहले पहल हुआ था।मैं उनकी संगठन शक्ति और हाथ में आए हुए काया] में उत्साह देखकर मुग्ध हो गया और वह भावना समय बीतने से कम न होकर अधिक गहरी होती गई।&amp;quot;- ''' देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद'''|विचारक=}}इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध [[चम्पारण]] से अपना सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था।अनुग्रह बाबू के हृदय में सेवा की उच्च भावना तो बाल्यकाल से ही था, उसे कार्य रूप में परिणत करने तथा उसे पूर्ण रूप से विकसित करने का सुअवसर भी उन्हें इस संगठन में प्रविष्ट होने पर मिल गया। सन्‌ १९१० में आई ए की परीक्षा भी उन्होंने प्रथम श्रेणी में पास की फिर बीए में प्रवेश किया। उसी वर्ष महामना पोलक साहब जो महात्मा गांधी के सहकर्मी थे, पटना पधारे, अफ्रीका के प्रवासी भारतीयों के बारे में जो उनका व्याख्यान हुआ। उससे अनुग्रह बाबू बहुत प्रभावित हुए। उसी वर्ष प्रयाग में अखिल भारतीय कांग्रेस अधिवेशन हुआ, जिसमें वे अपनी उत्साही सहपाठियों के साथ गये। उस अधिवेशन में महामना गोखले आदि विद्वान राष्ट्रभक्तों के भाषणों को सुनने का स्वर्ण अवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ, जिससे वे ब़डे प्रभावित हुए।अनुग्रह बाबू विद्यार्थी जीवन में ही संगठनशक्ति तथा कार्य संचालन की काबिलियत हासिल कर ली थी। सन्‌ १९१४ में इतिहास से एमए करने के बाद १९१५ में बी एल की परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की। भागलपुर के तेजनारायण जुविल कॉलेज में इतिहास के एक प्रोफेसर की आवश्यकता हुई। अपने साथियों के परामर्श करने के पश्चात तुरंत उन्होंने अपना आवेदन पत्र भेज दिया और उस पद पर उनकी नियुक्ति हो गई। वर्ष १९१६ में उन्होंने कॉलेज की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और पटना हाईकोर्ट में वकालत प्रारंभ कर दी। वकालत के सिलसिले में सरलता की मूर्ति देशरत्न राजेन्द्र बाबू के संसर्ग में अधिक रहने का सुअवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ और उनसे पेशे को उन्नत करने की प्रेरणा भी मिली। कलकत्ते में भी उन्हें राजेन्द्र बाबू के सम्पर्क में रहने का स्वर्ण अवसर मिला था। जिस समय राजेन्द्र बाबू लॉ कॉलेज में अध्यापक थे, उसी समय उसी कॉलेज में वे एक विद्यार्थी थे। इसलिये वे राजेन्द्र बाबू की प्रतिष्ठा किया करते थे। उन्होंने [[महात्मा गांधी]] एवं डा. [[राजेन्द्र प्रसाद]] के साथ राष्ट्रीय आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== गांधीजी का सत्याग्रह==&lt;br /&gt;
उन्हें वकालत करते हुए अभी एक वर्ष भी नहीं बीता था कि चम्पारण में नील आंदोलन उठ ख़डा हुआ । इस आंदोलन ने उनके जीवन की धारा ही बदल दी। चम्पारण के किसानों की तबाही का समाचार जब [[महात्मा गांधी]] से सुने तो वे करुणा से विचलित हो उठे। मुजफ्फरपुर के कमिश्नर की राय के विरुद्ध गांधीजी चम्पारण गये और जांच कार्य प्रारंभ कर दिया।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Champaran Satyagraha.jpg|thumb|220px|चंपारण सत्याग्रह आंदोलन के दौरान डॉ. [[राजेन्द्र प्रसाद]] और [[अनुग्रह नारायण सिन्हा]]]] अत्याचारों की जांच प्रारंभ हुई । इसमें कुछ ऐसे वकीलों की आवश्यकता थी, जो निर्भीकता पूर्वक कार्य कर सकें और समय आने पर जेल जाने के लिए भी तैयार रहें। इस विकट कार्य के लिए वृज किशोर बाबू के प्रोत्साहन पर राजेन्द्र बाबू के साथ ही अनुग्रह बाबू भी तत्पर हो गये। उन्होंने इसकी तनिक भी चिंता नहीं की कि उनका पेशा नया है और उन्हें भारी क्षति उठानी प़ड सकती है। एक बार जो त्याग के मार्ग पर आगे ब़ढ चुका है, उसे भला इन तुच्छ चीजों का क्या भय हो सकता है। चम्पारण का किसान आंदोलन ४५ महीनों तक जोरशोर से चलता रहा। अनुग्रह बाबू बराबर उसमें काम करते रहे और आखिर तक डटे रहे । स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का पाठ उन्हें गांधीजी के आश्रम में ही रहकर प़ढने का सुअवसर प्राप्त हुआ। अनुग्रह बाबू ने चम्पारण के नील आंदोलन में गांधीजी के साथ लगन और निर्भीकता के साथ काम किया और आंदोलन को सफल बनाकर उनके आदेशानुसार १९१७ में पटना आये। बापू के साथ रहने से उन्हें जो आत्मिक बल प्राप्त हुआ, वही इनके जीवन का संबल बना। सन्‌ १९२० के दिसंबर में नागपुर में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हुआ, जिसमें अनुग्रह बाबू ने भी भाग लिया। सन्‌ १९२९ के दिसंबर में सरदार पटेल ने किसान संगठन के सिलसिले में मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया, तब अनुग्रह बाबू सभी जगह उनके साथ थे। २६ जनवरी १९३० को सारे देश में स्वतंत्रता की घोषणा प़ढी गई। अनुग्रह बाबू को भी कई स्थानों में घोषण पत्र प़ढना प़ढा । कुछ दिनों के बाद महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया। उस सिलसिले में उन्हें चम्पारण, मुजफ्फरपुर आदि स्थानों का दौरा करना प़डा । २६ जनवरी, १९३३ को जब पटना में घोषणा प़ढ रहे थे, उसी समय उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें पंद्रह मास की सजा हुई और उन्हें हजारीबाग जेल भेज दिया गया। जिस समय वे जेल में थे, बिहार में इतिहास विख्यात प्रलयंकारी भूकंप आया। हृदय विदारक समाचारों को प़ढकर उनका हृदय दर्द से कराह उठा। चहारदीवारी के अंदर बंद रहने के कारण ये कोई राहत कार्य नहीं कर सकते थे। लेकिन सरकार ने तीन हफ्तों के बाद इन्हें छ़ोड दिया। छूटते ही अनुग्रह बाबू राहत कार्य में संलग्न हो गये। राजेन्द्र बाबू के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इन्होंने अथक परिश्रम के साथ पी़डत मानवता की सेवा की। मुजफ्फरपुर, मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया । इसके लिये राजेन्द्र बाबू की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी, जिसके उपाध्यक्ष अनुग्रह बाबू ही चुने गये तथा खूब लगन के साथ सेवा कार्य किया।सन्‌ १९४० को मार्च महीने में अखिल भारतीय कांग्रेस का अधिवेशन रामग़ढ में हुआ। अधिवेशन का संपूर्ण भार अनुग्रह बाबू के कंधे पर था। उसमें जो अपनी तत्परता दिखलाई उसके फलस्वरूप ही कांग्रेस का अधिवेशन सफल हुआ। देश की परिस्थिति को देखते हुए जब गांधीजी ने व्यक्तिगत सत्याग्रह अपनाया तब उनके प्रिय सहयोगी अनुग्रह बाबू कब चूकने वाले थे। फलस्वरूप १९४० को वह गिरफ्तार कर लिये गये और अगस्त १९४१ में रिहा हुए।&lt;br /&gt;
&amp;lt;br /&amp;gt;&amp;lt;blockquote&amp;gt;&amp;lt;span style=&amp;quot;color: blue&amp;quot;&amp;gt;'मुझे अपने लिए चिंता नहीं है,किंतु देश के लिए मुझे चिंता है।’ '''बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा'''&amp;lt;/span&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
गांधीजी का ‘करो या मरो’ का नारा बुलंद हुआ। ७ अगस्त, १९४२ को गांधीजी गिरफ्तार किये गये। सारे देश में एक बार ही बिजली की तरह आंदोलन की आग फैल गई। कांग्रेस कमिटियां जब्त कर ली गई और कांग्रेस नेता जहां के तहां गिरफ्तार कर लिये गये। १० अगस्त को अनुग्रह बाबू भी जब अपने मित्रों से मिलने गये, एकाएक मार्ग में ही गिरफ्तार कर लिये गये। सन्‌ १९४४ में जब सारे कांग्रेसी नेता जेल से मुक्त किये जाने लगे, तो अनुग्रह बाबू भी कारावास की कैद से आजाद कर दिये गये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बिहार के पहले उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री==&lt;br /&gt;
१९३७ में ही बाबू साहब बिहार प्रान्त के वित्त मंत्री बने।अनुग्रह बाबू [[बिहार]] [[विधानसभा]]  में १९३७ से  लेकर १९५७ तक कांग्रेस [[विधायक]] दल के उप नेता थे। १९४६ में जब दूसरा मंत्रिमंडल बना तब वित्त और श्रम दोनों विभागों के पहले मंत्री बने और उन्होंने अपने मंत्रित्व काल में विशेषकर श्रम विभाग में अपनी न्याय प्रियता लोकतांत्रिक विचारधारा एवं श्रमिकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का जो परिचय दिया वह सराहनीय ही नहीं अनुकरणीय है। श्रम मंत्री के रूप में अनुग्रह बाबू ने ‘बिहार केन्द्रीय श्रम परामर्श समिति’ के माध्यम से श्रम प्रशासन तथा श्रमिक समस्याआें के समाधान के लिए जो नियम एवं प्रावधान बनाये वे आज पूरे देश के लिये मापदंड के रूप में काम करते हैं। तृतीय मंत्रिमंडल में उन्हें खाद, बीज, मिट्‌टी, मवेशी में सुधार लाने के लिए शोध कार्य करवाए और पहली बार जापानी ढंग से धान उपजाने की पद्धति का प्रचार कराया। पूसा का कृषि अनुसंधान फार्म उनकी ही देन है। इस तेजस्वी महापुरुष का निधन ५ जुलाई, १९५७ को उनके निवास स्थान [[पटना]] मे बीमारी के कारण हुआ। उनके सम्मान मे तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया, उनके अन्तिम संस्कार में विशाल जनसमूह उपस्थित था।अनुग्रह बाबू  [[२ जनवरी]], [[१९४६]] से अपनी मृत्यु तक बिहार के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  रहे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==संदर्भ==&lt;br /&gt;
{{reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/database/biographies/anugrah_narayan_sinha.htm अनुग्रह बाबू की जीवनी]&lt;br /&gt;
*[http://books.google.co.in/books?id=kmZV1ALVaCYC&amp;amp;pg=PT403&amp;amp;lpg=PT403&amp;amp;dq=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9+%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;source=bl&amp;amp;ots=BrT6nN3s6g&amp;amp;sig=AQGM4ELFM1mxpiXuSV_kVCFd_Fs&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ei=yaZmS5DaJsWVtgenqvS2Bg&amp;amp;sa=X&amp;amp;oi=book_result&amp;amp;ct=result&amp;amp;resnum=2&amp;amp;ved=0CAkQ6AEwATge#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%20%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;f=false बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा]&lt;br /&gt;
*[http://www.prabhatkhabar.com/node/18888 सादगी की प्रतिमूर्ति थे बिहार विभूति अनुग्रह बाबू] &lt;br /&gt;
*[http://www.newshunt.com/cr.action?act=browseNewsItem&amp;amp;npKey=jagran&amp;amp;ctKey=Patna&amp;amp;newsUid=9712713&amp;amp;brand=NewsHunt&amp;amp;parent=null&amp;amp;res=128x128 बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिंह की जयंती]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_7891955.html अनुग्रह बाबू को श्रद्धांजलि]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:z7Qyx0yJNJ4J:in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html+/search%3Fhl%3Dhi%26q%3D%2Bsite:in.jagran.yahoo.com%2B%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2597%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25B9%2B%25E0%25A4%25AC%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%2582&amp;amp;cd=5&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in आधुनिक भारत के निर्माता थे अनुग्रह बाबू : राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_4561311.html लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी थे डा अनुग्रह बाबू ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html अनुग्रह बाबू के जीवन से सीख लेने की जरूरत है-राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/kalranga/freedom/congress/c127.htm बिहार के स्वतंत्रता सेनानी]&lt;br /&gt;
*[http://www.aicc.org.in/satyagraha_laboratories_of_mahatma_gandhi.htm महात्मा गाँधी की सत्याग्रह प्रयोगशाला]&lt;br /&gt;
*[http://loksabha.nic.in/ लोकसभा का जालस्थल]&lt;br /&gt;
*[http://www.mkgandhi.org/jpnarayan/total_revolution.htm सम्पूर्ण क्रांति]&lt;br /&gt;
*[http://www.snsibm.com/ अनुग्रह नारायण सिन्हा व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, राँची]&lt;br /&gt;
*[http://www.ancollege.org/ अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय, पटना]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार_का_इतिहास]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार के मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीतिज्ञ]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<title>अनुग्रह नारायण सिंह</title>
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		<updated>2011-06-21T14:53:01Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=BiharVibhuti Dr Anugrah Narayan Sinha.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=अनुग्रह नारायण सिंह&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=अनुग्रह बाबू&lt;br /&gt;
|जन्म=[[18 जून ]],[[1887]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[बिहार]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[पटना]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]&lt;br /&gt;
|पद=[[बिहार]] के प्रथम उप [[मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिन्दी]],[[अंग्रेज़ी]] &lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=[[2 जनवरी]], [[1946]] से 05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|विद्यालय=[[कलकत्ता विश्वविद्यालय]], प्रेसीडेंसी कॉलेज (कलकत्ता)&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री और डॉक्टरेट&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=बिहार विभूति&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=भारत की स्वतन्त्रता, अहिंसक आन्दोलन, सत्याग्रह&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=[[असहयोग आंदोलन]], [[नमक सत्याग्रह]] आदि&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=रचनाऐं-मेरे संस्मरण:आत्मकथा&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
डा '''अनुग्रह नारायण सिंह''' एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता और [[बिहार]] के पहले उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री (१९४६- १९५७) थे। अनुग्रह बाबू (१८८७-१९५७) [[भारत]] के [[स्वतंत्रता सेनानी]], शिक्षक तथा राजनीतिज्ञ रहे हैं। लोकप्रियता के कारण उन्हें '''बिहार विभूति''' के रूप में जाना जाता था।वह स्वाधीनता आंदोलन के महान योद्धा थे।स्वाधीनता के बाद राष्ट्र निर्माण व जनकल्याण के कार्यो में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==आधुनिक बिहार के निर्माता==&lt;br /&gt;
डा अनुग्रह नारायण सिन्हा मानवतावादी प्रगतिशील विचारक एवं दलितों के उत्थान के प्रबल समर्थक और आधुनिक भारत के निर्माताआें में से एक थे। उनका जीवन दर्शन देश की अखंडतास्वतंत्रता और नवनिर्माण की भावनाआ से शराबोर रहा है। उनका सौभ्य, स्निग्ध, शीतल, परोपकारी, अहंकारहीन और दर्पोदीप्त शख्सियत बिहार के जनगणमन पर अधिकार किए हुए था|वे शरीर से दुर्बल, कृषकाय थे, पर इस अर्थ में महाप्राण कोई संकट उनके ओठों की मुस्कुराहट नहीं छीन सका। उनमें शक्ति और शील एकाकार हो गये थे और इसीलिए वे बुद्धिजीवियों को विशेष प्रिय थे।[[बिहार]] के विकास में उनका योगदान अतुलनीय है।राज्य के प्रशासनिक ढांचा को तैयार करना का काम अनुग्रह बाबू  ने किया था।इन्होंने राज्य के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  के रूप मे ११ वर्षो तक बिहार की अनवरत सेवा की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रारंभिक जीवन==&lt;br /&gt;
अनुग्रह बाबू का जन्म औरंगाबाद जिले के पोईअवा नामक गांव में १८ जून १८८७ को हुआ । उनके पिता ठाकुर विशेश्वर दयाल सिंह जी अपने इलाके के एक वीर पुरुष थे। पांच बसंत जब वे पार कर गये तो उनकी शिक्षा का श्रीगणेश हुआ। सन्‌ १९०० में औरंगाबाद मिडिल स्कूल,१९०४ में गया जिला स्कूल और १९०८ में पटना कॉलेज में प्रविष्ट हुए। जिस समय ये पटना कॉलेज में आये उस समय देश के शिक्षित व्यक्तियों के हृदय में परतंत्रता की वेदना का अनुभव होने लगा था। गुलामी की जंजीर में जक़डी हुई मानवता का चित्कार अब उन्हें सुनायी प़डने लगा था। वे उस जंजीर को त़ोड फेंकने के लिए व्याकुल होने लगे थे। सुरेन्द्रनाथ बनर्जी तथा योगिराज अरविंद ऐसे महान आत्माआे का प्रादुर्भाव हो चुका था । इन महान आत्माआ के कार्य कलापों तथा व्याख्यानों का समुचित प्रभाव अनुग्रह बाबू के हृदय पर प़डा। उनका हृदय भी भारतमाता की सेवा के लिए त़डप उठा और वे उस पावन मार्ग पर अग्रसर हो गये। सर्फूद्दीन के नेतृत्व में ‘बिहारी छात्र सम्मेलन’ नामक संस्था संगठित की गई, जिसमें देशरत्न डॉ राजेन्द्र बाबू ऐसे मेधावी छात्रों को कार्य करने तथा नेतृत्व करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन==&lt;br /&gt;
{{बाँयाबक्सा|पाठ=&amp;quot;मेरा परिचय अनुग्रह बाबू से बिहारी छात्र सम्मेलन में ही पहले पहल हुआ था।मैं उनकी संगठन शक्ति और हाथ में आए हुए काया] में उत्साह देखकर मुग्ध हो गया और वह भावना समय बीतने से कम न होकर अधिक गहरी होती गई।&amp;quot;- ''' देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद'''|विचारक=}}इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध [[चम्पारण]] से अपना सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था।अनुग्रह बाबू के हृदय में सेवा की उच्च भावना तो बाल्यकाल से ही था, उसे कार्य रूप में परिणत करने तथा उसे पूर्ण रूप से विकसित करने का सुअवसर भी उन्हें इस संगठन में प्रविष्ट होने पर मिल गया। सन्‌ १९१० में आई ए की परीक्षा भी उन्होंने प्रथम श्रेणी में पास की फिर बीए में प्रवेश किया। उसी वर्ष महामना पोलक साहब जो महात्मा गांधी के सहकर्मी थे, पटना पधारे, अफ्रीका के प्रवासी भारतीयों के बारे में जो उनका व्याख्यान हुआ। उससे अनुग्रह बाबू बहुत प्रभावित हुए। उसी वर्ष प्रयाग में अखिल भारतीय कांग्रेस अधिवेशन हुआ, जिसमें वे अपनी उत्साही सहपाठियों के साथ गये। उस अधिवेशन में महामना गोखले आदि विद्वान राष्ट्रभक्तों के भाषणों को सुनने का स्वर्ण अवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ, जिससे वे ब़डे प्रभावित हुए।अनुग्रह बाबू विद्यार्थी जीवन में ही संगठनशक्ति तथा कार्य संचालन की काबिलियत हासिल कर ली थी। सन्‌ १९१४ में इतिहास से एमए करने के बाद १९१५ में बी एल की परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की। भागलपुर के तेजनारायण जुविल कॉलेज में इतिहास के एक प्रोफेसर की आवश्यकता हुई। अपने साथियों के परामर्श करने के पश्चात तुरंत उन्होंने अपना आवेदन पत्र भेज दिया और उस पद पर उनकी नियुक्ति हो गई। वर्ष १९१६ में उन्होंने कॉलेज की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और पटना हाईकोर्ट में वकालत प्रारंभ कर दी। वकालत के सिलसिले में सरलता की मूर्ति देशरत्न राजेन्द्र बाबू के संसर्ग में अधिक रहने का सुअवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ और उनसे पेशे को उन्नत करने की प्रेरणा भी मिली। कलकत्ते में भी उन्हें राजेन्द्र बाबू के सम्पर्क में रहने का स्वर्ण अवसर मिला था। जिस समय राजेन्द्र बाबू लॉ कॉलेज में अध्यापक थे, उसी समय उसी कॉलेज में वे एक विद्यार्थी थे। इसलिये वे राजेन्द्र बाबू की प्रतिष्ठा किया करते थे। उन्होंने [[महात्मा गांधी]] एवं डा. [[राजेन्द्र प्रसाद]] के साथ राष्ट्रीय आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== गांधीजी का सत्याग्रह==&lt;br /&gt;
उन्हें वकालत करते हुए अभी एक वर्ष भी नहीं बीता था कि चम्पारण में नील आंदोलन उठ ख़डा हुआ । इस आंदोलन ने उनके जीवन की धारा ही बदल दी। चम्पारण के किसानों की तबाही का समाचार जब [[महात्मा गांधी]] से सुने तो वे करुणा से विचलित हो उठे। मुजफ्फरपुर के कमिश्नर की राय के विरुद्ध गांधीजी चम्पारण गये और जांच कार्य प्रारंभ कर दिया।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Champaran Satyagraha.jpg|thumb|220px|चंपारण सत्याग्रह आंदोलन के दौरान डॉ. [[राजेन्द्र प्रसाद]] और [[अनुग्रह नारायण सिन्हा]]]] अत्याचारों की जांच प्रारंभ हुई । इसमें कुछ ऐसे वकीलों की आवश्यकता थी, जो निर्भीकता पूर्वक कार्य कर सकें और समय आने पर जेल जाने के लिए भी तैयार रहें। इस विकट कार्य के लिए वृज किशोर बाबू के प्रोत्साहन पर राजेन्द्र बाबू के साथ ही अनुग्रह बाबू भी तत्पर हो गये। उन्होंने इसकी तनिक भी चिंता नहीं की कि उनका पेशा नया है और उन्हें भारी क्षति उठानी प़ड सकती है। एक बार जो त्याग के मार्ग पर आगे ब़ढ चुका है, उसे भला इन तुच्छ चीजों का क्या भय हो सकता है। चम्पारण का किसान आंदोलन ४५ महीनों तक जोरशोर से चलता रहा। अनुग्रह बाबू बराबर उसमें काम करते रहे और आखिर तक डटे रहे । स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का पाठ उन्हें गांधीजी के आश्रम में ही रहकर प़ढने का सुअवसर प्राप्त हुआ। अनुग्रह बाबू ने चम्पारण के नील आंदोलन में गांधीजी के साथ लगन और निर्भीकता के साथ काम किया और आंदोलन को सफल बनाकर उनके आदेशानुसार १९१७ में पटना आये। बापू के साथ रहने से उन्हें जो आत्मिक बल प्राप्त हुआ, वही इनके जीवन का संबल बना। सन्‌ १९२० के दिसंबर में नागपुर में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हुआ, जिसमें अनुग्रह बाबू ने भी भाग लिया। सन्‌ १९२९ के दिसंबर में सरदार पटेल ने किसान संगठन के सिलसिले में मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया, तब अनुग्रह बाबू सभी जगह उनके साथ थे। २६ जनवरी १९३० को सारे देश में स्वतंत्रता की घोषणा प़ढी गई। अनुग्रह बाबू को भी कई स्थानों में घोषण पत्र प़ढना प़ढा । कुछ दिनों के बाद महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया। उस सिलसिले में उन्हें चम्पारण, मुजफ्फरपुर आदि स्थानों का दौरा करना प़डा । २६ जनवरी, १९३३ को जब पटना में घोषणा प़ढ रहे थे, उसी समय उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें पंद्रह मास की सजा हुई और उन्हें हजारीबाग जेल भेज दिया गया। जिस समय वे जेल में थे, बिहार में इतिहास विख्यात प्रलयंकारी भूकंप आया। हृदय विदारक समाचारों को प़ढकर उनका हृदय दर्द से कराह उठा। चहारदीवारी के अंदर बंद रहने के कारण ये कोई राहत कार्य नहीं कर सकते थे। लेकिन सरकार ने तीन हफ्तों के बाद इन्हें छ़ोड दिया। छूटते ही अनुग्रह बाबू राहत कार्य में संलग्न हो गये। राजेन्द्र बाबू के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इन्होंने अथक परिश्रम के साथ पी़डत मानवता की सेवा की। मुजफ्फरपुर, मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया । इसके लिये राजेन्द्र बाबू की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी, जिसके उपाध्यक्ष अनुग्रह बाबू ही चुने गये तथा खूब लगन के साथ सेवा कार्य किया।सन्‌ १९४० को मार्च महीने में अखिल भारतीय कांग्रेस का अधिवेशन रामग़ढ में हुआ। अधिवेशन का संपूर्ण भार अनुग्रह बाबू के कंधे पर था। उसमें जो अपनी तत्परता दिखलाई उसके फलस्वरूप ही कांग्रेस का अधिवेशन सफल हुआ। देश की परिस्थिति को देखते हुए जब गांधीजी ने व्यक्तिगत सत्याग्रह अपनाया तब उनके प्रिय सहयोगी अनुग्रह बाबू कब चूकने वाले थे। फलस्वरूप १९४० को वह गिरफ्तार कर लिये गये और अगस्त १९४१ में रिहा हुए।&lt;br /&gt;
&amp;lt;br /&amp;gt;&amp;lt;blockquote&amp;gt;&amp;lt;span style=&amp;quot;color: #8f5d31&amp;quot;&amp;gt;मुझे अपने लिए चिंता नहीं है,किंतु देश के लिए मुझे चिंता है।’ '''बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा'''&amp;lt;/span&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
गांधीजी का ‘करो या मरो’ का नारा बुलंद हुआ। ७ अगस्त, १९४२ को गांधीजी गिरफ्तार किये गये। सारे देश में एक बार ही बिजली की तरह आंदोलन की आग फैल गई। कांग्रेस कमिटियां जब्त कर ली गई और कांग्रेस नेता जहां के तहां गिरफ्तार कर लिये गये। १० अगस्त को अनुग्रह बाबू भी जब अपने मित्रों से मिलने गये, एकाएक मार्ग में ही गिरफ्तार कर लिये गये। सन्‌ १९४४ में जब सारे कांग्रेसी नेता जेल से मुक्त किये जाने लगे, तो अनुग्रह बाबू भी कारावास की कैद से आजाद कर दिये गये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बिहार के पहले उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री==&lt;br /&gt;
१९३७ में ही बाबू साहब बिहार प्रान्त के वित्त मंत्री बने।अनुग्रह बाबू [[बिहार]] [[विधानसभा]]  में १९३७ से  लेकर १९५७ तक कांग्रेस [[विधायक]] दल के उप नेता थे। १९४६ में जब दूसरा मंत्रिमंडल बना तब वित्त और श्रम दोनों विभागों के पहले मंत्री बने और उन्होंने अपने मंत्रित्व काल में विशेषकर श्रम विभाग में अपनी न्याय प्रियता लोकतांत्रिक विचारधारा एवं श्रमिकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का जो परिचय दिया वह सराहनीय ही नहीं अनुकरणीय है। श्रम मंत्री के रूप में अनुग्रह बाबू ने ‘बिहार केन्द्रीय श्रम परामर्श समिति’ के माध्यम से श्रम प्रशासन तथा श्रमिक समस्याआें के समाधान के लिए जो नियम एवं प्रावधान बनाये वे आज पूरे देश के लिये मापदंड के रूप में काम करते हैं। तृतीय मंत्रिमंडल में उन्हें खाद, बीज, मिट्‌टी, मवेशी में सुधार लाने के लिए शोध कार्य करवाए और पहली बार जापानी ढंग से धान उपजाने की पद्धति का प्रचार कराया। पूसा का कृषि अनुसंधान फार्म उनकी ही देन है। इस तेजस्वी महापुरुष का निधन ५ जुलाई, १९५७ को उनके निवास स्थान [[पटना]] मे बीमारी के कारण हुआ। उनके सम्मान मे तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया, उनके अन्तिम संस्कार में विशाल जनसमूह उपस्थित था।अनुग्रह बाबू  [[२ जनवरी]], [[१९४६]] से अपनी मृत्यु तक बिहार के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  रहे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==संदर्भ==&lt;br /&gt;
{{reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/database/biographies/anugrah_narayan_sinha.htm अनुग्रह बाबू की जीवनी]&lt;br /&gt;
*[http://books.google.co.in/books?id=kmZV1ALVaCYC&amp;amp;pg=PT403&amp;amp;lpg=PT403&amp;amp;dq=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9+%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;source=bl&amp;amp;ots=BrT6nN3s6g&amp;amp;sig=AQGM4ELFM1mxpiXuSV_kVCFd_Fs&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ei=yaZmS5DaJsWVtgenqvS2Bg&amp;amp;sa=X&amp;amp;oi=book_result&amp;amp;ct=result&amp;amp;resnum=2&amp;amp;ved=0CAkQ6AEwATge#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%20%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;f=false बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा]&lt;br /&gt;
*[http://www.prabhatkhabar.com/node/18888 सादगी की प्रतिमूर्ति थे बिहार विभूति अनुग्रह बाबू] &lt;br /&gt;
*[http://www.newshunt.com/cr.action?act=browseNewsItem&amp;amp;npKey=jagran&amp;amp;ctKey=Patna&amp;amp;newsUid=9712713&amp;amp;brand=NewsHunt&amp;amp;parent=null&amp;amp;res=128x128 बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिंह की जयंती]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_7891955.html अनुग्रह बाबू को श्रद्धांजलि]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:z7Qyx0yJNJ4J:in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html+/search%3Fhl%3Dhi%26q%3D%2Bsite:in.jagran.yahoo.com%2B%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2597%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25B9%2B%25E0%25A4%25AC%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%2582&amp;amp;cd=5&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in आधुनिक भारत के निर्माता थे अनुग्रह बाबू : राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_4561311.html लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी थे डा अनुग्रह बाबू ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html अनुग्रह बाबू के जीवन से सीख लेने की जरूरत है-राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/kalranga/freedom/congress/c127.htm बिहार के स्वतंत्रता सेनानी]&lt;br /&gt;
*[http://www.aicc.org.in/satyagraha_laboratories_of_mahatma_gandhi.htm महात्मा गाँधी की सत्याग्रह प्रयोगशाला]&lt;br /&gt;
*[http://loksabha.nic.in/ लोकसभा का जालस्थल]&lt;br /&gt;
*[http://www.mkgandhi.org/jpnarayan/total_revolution.htm सम्पूर्ण क्रांति]&lt;br /&gt;
*[http://www.snsibm.com/ अनुग्रह नारायण सिन्हा व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, राँची]&lt;br /&gt;
*[http://www.ancollege.org/ अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय, पटना]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार_का_इतिहास]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार के मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीतिज्ञ]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<title>डा अनुग्रह नारायण सिंह</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: 'अनुग्रह नारायण सिन्हा' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[अनुग्रह नारायण सिन्हा]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<title>अनुग्रह नारायण सिंह</title>
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		<updated>2011-06-19T07:21:37Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=BiharVibhuti Dr Anugrah Narayan Sinha.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=अनुग्रह नारायण सिंह&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=अनुग्रह बाबू&lt;br /&gt;
|जन्म=[[18 जून ]],[[1887]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[बिहार]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[पटना]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]&lt;br /&gt;
|पद=[[बिहार]] के प्रथम उप [[मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिन्दी]],[[अंग्रेज़ी]] &lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=[[2 जनवरी]], [[1946]] से 05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|विद्यालय=[[कलकत्ता विश्वविद्यालय]], प्रेसीडेंसी कॉलेज (कलकत्ता)&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री और डॉक्टरेट&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=बिहार विभूति&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=भारत की स्वतन्त्रता, अहिंसक आन्दोलन, सत्याग्रह&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=[[असहयोग आंदोलन]], [[नमक सत्याग्रह]] आदि&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=रचनाऐं-मेरे संस्मरण:आत्मकथा&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
डा '''अनुग्रह नारायण सिंह''' एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता और [[बिहार]] के पहले उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री (१९४६- १९५७) थे। अनुग्रह बाबू (१८८७-१९५७) [[भारत]] के [[स्वतंत्रता सेनानी]], शिक्षक तथा राजनीतिज्ञ रहे हैं। लोकप्रियता के कारण उन्हें '''बिहार विभूति''' के रूप में जाना जाता था।वह स्वाधीनता आंदोलन के महान योद्धा थे।स्वाधीनता के बाद राष्ट्र निर्माण व जनकल्याण के कार्यो में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==आधुनिक बिहार के निर्माता==&lt;br /&gt;
डा अनुग्रह नारायण सिन्हा मानवतावादी प्रगतिशील विचारक एवं दलितों के उत्थान के प्रबल समर्थक और आधुनिक भारत के निर्माताआें में से एक थे। उनका जीवन दर्शन देश की अखंडतास्वतंत्रता और नवनिर्माण की भावनाआ से शराबोर रहा है। उनका सौभ्य, स्निग्ध, शीतल, परोपकारी, अहंकारहीन और दर्पोदीप्त शख्सियत बिहार के जनगणमन पर अधिकार किए हुए था|वे शरीर से दुर्बल, कृषकाय थे, पर इस अर्थ में महाप्राण कोई संकट उनके ओठों की मुस्कुराहट नहीं छीन सका। उनमें शक्ति और शील एकाकार हो गये थे और इसीलिए वे बुद्धिजीवियों को विशेष प्रिय थे।[[बिहार]] के विकास में उनका योगदान अतुलनीय है।राज्य के प्रशासनिक ढांचा को तैयार करना का काम अनुग्रह बाबू  ने किया था।इन्होंने राज्य के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  के रूप मे ११ वर्षो तक बिहार की अनवरत सेवा की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रारंभिक जीवन==&lt;br /&gt;
अनुग्रह बाबू का जन्म औरंगाबाद जिले के पोईअवा नामक गांव में १८ जून १८८७ को हुआ । उनके पिता ठाकुर विशेश्वर दयाल सिंह जी अपने इलाके के एक वीर पुरुष थे। पांच बसंत जब वे पार कर गये तो उनकी शिक्षा का श्रीगणेश हुआ। सन्‌ १९०० में औरंगाबाद मिडिल स्कूल,१९०४ में गया जिला स्कूल और १९०८ में पटना कॉलेज में प्रविष्ट हुए। जिस समय ये पटना कॉलेज में आये उस समय देश के शिक्षित व्यक्तियों के हृदय में परतंत्रता की वेदना का अनुभव होने लगा था। गुलामी की जंजीर में जक़डी हुई मानवता का चित्कार अब उन्हें सुनायी प़डने लगा था। वे उस जंजीर को त़ोड फेंकने के लिए व्याकुल होने लगे थे। सुरेन्द्रनाथ बनर्जी तथा योगिराज अरविंद ऐसे महान आत्माआे का प्रादुर्भाव हो चुका था । इन महान आत्माआ के कार्य कलापों तथा व्याख्यानों का समुचित प्रभाव अनुग्रह बाबू के हृदय पर प़डा। उनका हृदय भी भारतमाता की सेवा के लिए त़डप उठा और वे उस पावन मार्ग पर अग्रसर हो गये। सर्फूद्दीन के नेतृत्व में ‘बिहारी छात्र सम्मेलन’ नामक संस्था संगठित की गई, जिसमें देशरत्न डॉ राजेन्द्र बाबू ऐसे मेधावी छात्रों को कार्य करने तथा नेतृत्व करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन==&lt;br /&gt;
{{बाँयाबक्सा|पाठ=&amp;quot;मेरा परिचय अनुग्रह बाबू से बिहारी छात्र सम्मेलन में ही पहले पहल हुआ था।मैं उनकी संगठन शक्ति और हाथ में आए हुए काया] में उत्साह देखकर मुग्ध हो गया और वह भावना समय बीतने से कम न होकर अधिक गहरी होती गई।&amp;quot;- ''' देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद'''|विचारक=}}इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध [[चम्पारण]] से अपना सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था।अनुग्रह बाबू के हृदय में सेवा की उच्च भावना तो बाल्यकाल से ही था, उसे कार्य रूप में परिणत करने तथा उसे पूर्ण रूप से विकसित करने का सुअवसर भी उन्हें इस संगठन में प्रविष्ट होने पर मिल गया। सन्‌ १९१० में आई ए की परीक्षा भी उन्होंने प्रथम श्रेणी में पास की फिर बीए में प्रवेश किया। उसी वर्ष महामना पोलक साहब जो महात्मा गांधी के सहकर्मी थे, पटना पधारे, अफ्रीका के प्रवासी भारतीयों के बारे में जो उनका व्याख्यान हुआ। उससे अनुग्रह बाबू बहुत प्रभावित हुए। उसी वर्ष प्रयाग में अखिल भारतीय कांग्रेस अधिवेशन हुआ, जिसमें वे अपनी उत्साही सहपाठियों के साथ गये। उस अधिवेशन में महामना गोखले आदि विद्वान राष्ट्रभक्तों के भाषणों को सुनने का स्वर्ण अवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ, जिससे वे ब़डे प्रभावित हुए।अनुग्रह बाबू विद्यार्थी जीवन में ही संगठनशक्ति तथा कार्य संचालन की काबिलियत हासिल कर ली थी। सन्‌ १९१४ में इतिहास से एमए करने के बाद १९१५ में बी एल की परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की। भागलपुर के तेजनारायण जुविल कॉलेज में इतिहास के एक प्रोफेसर की आवश्यकता हुई। अपने साथियों के परामर्श करने के पश्चात तुरंत उन्होंने अपना आवेदन पत्र भेज दिया और उस पद पर उनकी नियुक्ति हो गई। वर्ष १९१६ में उन्होंने कॉलेज की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और पटना हाईकोर्ट में वकालत प्रारंभ कर दी। वकालत के सिलसिले में सरलता की मूर्ति देशरत्न राजेन्द्र बाबू के संसर्ग में अधिक रहने का सुअवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ और उनसे पेशे को उन्नत करने की प्रेरणा भी मिली। कलकत्ते में भी उन्हें राजेन्द्र बाबू के सम्पर्क में रहने का स्वर्ण अवसर मिला था। जिस समय राजेन्द्र बाबू लॉ कॉलेज में अध्यापक थे, उसी समय उसी कॉलेज में वे एक विद्यार्थी थे। इसलिये वे राजेन्द्र बाबू की प्रतिष्ठा किया करते थे। उन्होंने [[महात्मा गांधी]] एवं डा. [[राजेन्द्र प्रसाद]] के साथ राष्ट्रीय आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== गांधीजी का सत्याग्रह==&lt;br /&gt;
उन्हें वकालत करते हुए अभी एक वर्ष भी नहीं बीता था कि चम्पारण में नील आंदोलन उठ ख़डा हुआ । इस आंदोलन ने उनके जीवन की धारा ही बदल दी। चम्पारण के किसानों की तबाही का समाचार जब [[महात्मा गांधी]] से सुने तो वे करुणा से विचलित हो उठे। मुजफ्फरपुर के कमिश्नर की राय के विरुद्ध गांधीजी चम्पारण गये और जांच कार्य प्रारंभ कर दिया।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Champaran Satyagraha.jpg|thumb|220px|चंपारण सत्याग्रह आंदोलन के दौरान डॉ. [[राजेन्द्र प्रसाद]] और [[अनुग्रह नारायण सिन्हा]]]] अत्याचारों की जांच प्रारंभ हुई । इसमें कुछ ऐसे वकीलों की आवश्यकता थी, जो निर्भीकता पूर्वक कार्य कर सकें और समय आने पर जेल जाने के लिए भी तैयार रहें। इस विकट कार्य के लिए वृज किशोर बाबू के प्रोत्साहन पर राजेन्द्र बाबू के साथ ही अनुग्रह बाबू भी तत्पर हो गये। उन्होंने इसकी तनिक भी चिंता नहीं की कि उनका पेशा नया है और उन्हें भारी क्षति उठानी प़ड सकती है। एक बार जो त्याग के मार्ग पर आगे ब़ढ चुका है, उसे भला इन तुच्छ चीजों का क्या भय हो सकता है। चम्पारण का किसान आंदोलन ४५ महीनों तक जोरशोर से चलता रहा। अनुग्रह बाबू बराबर उसमें काम करते रहे और आखिर तक डटे रहे । स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का पाठ उन्हें गांधीजी के आश्रम में ही रहकर प़ढने का सुअवसर प्राप्त हुआ। अनुग्रह बाबू ने चम्पारण के नील आंदोलन में गांधीजी के साथ लगन और निर्भीकता के साथ काम किया और आंदोलन को सफल बनाकर उनके आदेशानुसार १९१७ में पटना आये। बापू के साथ रहने से उन्हें जो आत्मिक बल प्राप्त हुआ, वही इनके जीवन का संबल बना। सन्‌ १९२० के दिसंबर में नागपुर में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हुआ, जिसमें अनुग्रह बाबू ने भी भाग लिया। सन्‌ १९२९ के दिसंबर में सरदार पटेल ने किसान संगठन के सिलसिले में मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया, तब अनुग्रह बाबू सभी जगह उनके साथ थे। २६ जनवरी १९३० को सारे देश में स्वतंत्रता की घोषणा प़ढी गई। अनुग्रह बाबू को भी कई स्थानों में घोषण पत्र प़ढना प़ढा । कुछ दिनों के बाद महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया। उस सिलसिले में उन्हें चम्पारण, मुजफ्फरपुर आदि स्थानों का दौरा करना प़डा । २६ जनवरी, १९३३ को जब पटना में घोषणा प़ढ रहे थे, उसी समय उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें पंद्रह मास की सजा हुई और उन्हें हजारीबाग जेल भेज दिया गया। जिस समय वे जेल में थे, बिहार में इतिहास विख्यात प्रलयंकारी भूकंप आया। हृदय विदारक समाचारों को प़ढकर उनका हृदय दर्द से कराह उठा। चहारदीवारी के अंदर बंद रहने के कारण ये कोई राहत कार्य नहीं कर सकते थे। लेकिन सरकार ने तीन हफ्तों के बाद इन्हें छ़ोड दिया। छूटते ही अनुग्रह बाबू राहत कार्य में संलग्न हो गये। राजेन्द्र बाबू के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इन्होंने अथक परिश्रम के साथ पी़डत मानवता की सेवा की। मुजफ्फरपुर, मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया । इसके लिये राजेन्द्र बाबू की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी, जिसके उपाध्यक्ष अनुग्रह बाबू ही चुने गये तथा खूब लगन के साथ सेवा कार्य किया।सन्‌ १९४० को मार्च महीने में अखिल भारतीय कांग्रेस का अधिवेशन रामग़ढ में हुआ। अधिवेशन का संपूर्ण भार अनुग्रह बाबू के कंधे पर था। उसमें जो अपनी तत्परता दिखलाई उसके फलस्वरूप ही कांग्रेस का अधिवेशन सफल हुआ। देश की परिस्थिति को देखते हुए जब गांधीजी ने व्यक्तिगत सत्याग्रह अपनाया तब उनके प्रिय सहयोगी अनुग्रह बाबू कब चूकने वाले थे। फलस्वरूप १९४० को वह गिरफ्तार कर लिये गये और अगस्त १९४१ में रिहा हुए।&lt;br /&gt;
&amp;lt;br /&amp;gt;&amp;lt;blockquote&amp;gt;&amp;lt;span style=&amp;quot;color: #8f5d31&amp;quot;&amp;gt;मुझे अपने लिए चिंता नहीं है,किंतु देश के लिए मुझे चिंता है।’ '''बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा'''&amp;lt;/span&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
गांधीजी का ‘करो या मरो’ का नारा बुलंद हुआ। ७ अगस्त, १९४२ को गांधीजी गिरफ्तार किये गये। सारे देश में एक बार ही बिजली की तरह आंदोलन की आग फैल गई। कांग्रेस कमिटियां जब्त कर ली गई और कांग्रेस नेता जहां के तहां गिरफ्तार कर लिये गये। १० अगस्त को अनुग्रह बाबू भी जब अपने मित्रों से मिलने गये, एकाएक मार्ग में ही गिरफ्तार कर लिये गये। सन्‌ १९४४ में जब सारे कांग्रेसी नेता जेल से मुक्त किये जाने लगे, तो अनुग्रह बाबू भी कारावास की कैद से आजाद कर दिये गये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बिहार के पहले उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री==&lt;br /&gt;
१९३७ में ही बाबू साहब बिहार प्रान्त के वित्त मंत्री बने।अनुग्रह बाबू [[बिहार]] [[विधानसभा]]  में १९३७ से  लेकर १९५७ तक कांग्रेस [[विधायक]] दल के उप नेता थे। १९४६ में जब दूसरा मंत्रिमंडल बना तब वित्त और श्रम दोनों विभागों के पहले मंत्री बने और उन्होंने अपने मंत्रित्व काल में विशेषकर श्रम विभाग में अपनी न्याय प्रियता लोकतांत्रिक विचारधारा एवं श्रमिकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का जो परिचय दिया वह सराहनीय ही नहीं अनुकरणीय है। श्रम मंत्री के रूप में अनुग्रह बाबू ने ‘बिहार केन्द्रीय श्रम परामर्श समिति’ के माध्यम से श्रम प्रशासन तथा श्रमिक समस्याआें के समाधान के लिए जो नियम एवं प्रावधान बनाये वे आज पूरे देश के लिये मापदंड के रूप में काम करते हैं। तृतीय मंत्रिमंडल में उन्हें खाद, बीज, मिट्‌टी, मवेशी में सुधार लाने के लिए शोध कार्य करवाए और पहली बार जापानी ढंग से धान उपजाने की पद्धति का प्रचार कराया। पूसा का कृषि अनुसंधान फार्म उनकी ही देन है। इस तेजस्वी महापुरुष का निधन ५ जुलाई, १९५७ को उनके निवास स्थान [[पटना]] मे बीमारी के कारण हुआ। उनके सम्मान मे तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया, उनके अन्तिम संस्कार में विशाल जनसमूह उपस्थित था।अनुग्रह बाबू  [[२ जनवरी]], [[१९४६]] से अपनी मृत्यु तक बिहार के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  रहे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==संदर्भ==&lt;br /&gt;
{{reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/database/biographies/anugrah_narayan_sinha.htm अनुग्रह बाबू की जीवनी]&lt;br /&gt;
*[http://books.google.co.in/books?id=kmZV1ALVaCYC&amp;amp;pg=PT403&amp;amp;lpg=PT403&amp;amp;dq=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9+%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;source=bl&amp;amp;ots=BrT6nN3s6g&amp;amp;sig=AQGM4ELFM1mxpiXuSV_kVCFd_Fs&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ei=yaZmS5DaJsWVtgenqvS2Bg&amp;amp;sa=X&amp;amp;oi=book_result&amp;amp;ct=result&amp;amp;resnum=2&amp;amp;ved=0CAkQ6AEwATge#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%20%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;f=false बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:z7Qyx0yJNJ4J:in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html+/search%3Fhl%3Dhi%26q%3D%2Bsite:in.jagran.yahoo.com%2B%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2597%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25B9%2B%25E0%25A4%25AC%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%2582&amp;amp;cd=5&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in आधुनिक भारत के निर्माता थे अनुग्रह बाबू : राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_4561311.html लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी थे डा अनुग्रह बाबू ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html अनुग्रह बाबू के जीवन से सीख लेने की जरूरत है-राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/kalranga/freedom/congress/c127.htm बिहार के स्वतंत्रता सेनानी]&lt;br /&gt;
*[http://www.aicc.org.in/satyagraha_laboratories_of_mahatma_gandhi.htm महात्मा गाँधी की सत्याग्रह प्रयोगशाला]&lt;br /&gt;
*[http://loksabha.nic.in/ लोकसभा का जालस्थल]&lt;br /&gt;
*[http://www.mkgandhi.org/jpnarayan/total_revolution.htm सम्पूर्ण क्रांति]&lt;br /&gt;
*[http://www.snsibm.com/ अनुग्रह नारायण सिन्हा व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, राँची]&lt;br /&gt;
*[http://www.ancollege.org/ अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय, पटना]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता_सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार_का_इतिहास]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9_%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=173608</id>
		<title>अनुग्रह नारायण सिंह</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9_%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=173608"/>
		<updated>2011-06-19T07:16:11Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=BiharVibhuti Dr Anugrah Narayan Sinha.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=अनुग्रह नारायण सिंह&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=अनुग्रह बाबू&lt;br /&gt;
|जन्म=[[18 जून ]],[[1887]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[बिहार]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[पटना]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]&lt;br /&gt;
|पद=[[बिहार]] के प्रथम उप [[मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिन्दी]],[[अंग्रेज़ी]] &lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=[[2 जनवरी]], [[1946]] से 05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|विद्यालय=[[कलकत्ता विश्वविद्यालय]], प्रेसीडेंसी कॉलेज (कलकत्ता)&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री और डॉक्टरेट&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=बिहार विभूति&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=भारत की स्वतन्त्रता, अहिंसक आन्दोलन, सत्याग्रह&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=[[असहयोग आंदोलन]], [[नमक सत्याग्रह]] आदि&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=रचनाऐं-मेरे संस्मरण:आत्मकथा&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
डा '''अनुग्रह नारायण सिंह''' एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता और [[बिहार]] के पहले उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री (१९४६- १९५७) थे। अनुग्रह बाबू (१८८७-१९५७) [[भारत]] के [[स्वतंत्रता सेनानी]], शिक्षक तथा राजनीतिज्ञ रहे हैं। लोकप्रियता के कारण उन्हें '''बिहार विभूति''' के रूप में जाना जाता था।वह स्वाधीनता आंदोलन के महान योद्धा थे।स्वाधीनता के बाद राष्ट्र निर्माण व जनकल्याण के कार्यो में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==आधुनिक बिहार के निर्माता==&lt;br /&gt;
डा अनुग्रह नारायण सिन्हा मानवतावादी प्रगतिशील विचारक एवं दलितों के उत्थान के प्रबल समर्थक और आधुनिक भारत के निर्माताआें में से एक थे। उनका जीवन दर्शन देश की अखंडतास्वतंत्रता और नवनिर्माण की भावनाआ से शराबोर रहा है। उनका सौभ्य, स्निग्ध, शीतल, परोपकारी, अहंकारहीन और दर्पोदीप्त शख्सियत बिहार के जनगणमन पर अधिकार किए हुए था|वे शरीर से दुर्बल, कृषकाय थे, पर इस अर्थ में महाप्राण कोई संकट उनके ओठों की मुस्कुराहट नहीं छीन सका। उनमें शक्ति और शील एकाकार हो गये थे और इसीलिए वे बुद्धिजीवियों को विशेष प्रिय थे।[[बिहार]] के विकास में उनका योगदान अतुलनीय है। बिहार के प्रशासनिक ढांचा को तैयार करना का काम अनुग्रह बाबू  ने किया था।अनुग्रह बाबू ने राज्य के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  के रूप मे ११ वर्षो तक बिहार की अनवरत सेवा की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रारंभिक जीवन==&lt;br /&gt;
अनुग्रह बाबू का जन्म औरंगाबाद जिले के पोईअवा नामक गांव में १८ जून १८८७ को हुआ । उनके पिता ठाकुर विशेश्वर दयाल सिंह जी अपने इलाके के एक वीर पुरुष थे। पांच बसंत जब वे पार कर गये तो उनकी शिक्षा का श्रीगणेश हुआ। सन्‌ १९०० में औरंगाबाद मिडिल स्कूल,१९०४ में गया जिला स्कूल और १९०८ में पटना कॉलेज में प्रविष्ट हुए। जिस समय ये पटना कॉलेज में आये उस समय देश के शिक्षित व्यक्तियों के हृदय में परतंत्रता की वेदना का अनुभव होने लगा था। गुलामी की जंजीर में जक़डी हुई मानवता का चित्कार अब उन्हें सुनायी प़डने लगा था। वे उस जंजीर को त़ोड फेंकने के लिए व्याकुल होने लगे थे। सुरेन्द्रनाथ बनर्जी तथा योगिराज अरविंद ऐसे महान आत्माआे का प्रादुर्भाव हो चुका था । इन महान आत्माआ के कार्य कलापों तथा व्याख्यानों का समुचित प्रभाव अनुग्रह बाबू के हृदय पर प़डा। उनका हृदय भी भारतमाता की सेवा के लिए त़डप उठा और वे उस पावन मार्ग पर अग्रसर हो गये। सर्फूद्दीन के नेतृत्व में ‘बिहारी छात्र सम्मेलन’ नामक संस्था संगठित की गई, जिसमें देशरत्न डॉ राजेन्द्र बाबू ऐसे मेधावी छात्रों को कार्य करने तथा नेतृत्व करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन==&lt;br /&gt;
{{बाँयाबक्सा|पाठ=&amp;quot;मेरा परिचय अनुग्रह बाबू से बिहारी छात्र सम्मेलन में ही पहले पहल हुआ था।मैं उनकी संगठन शक्ति और हाथ में आए हुए काया] में उत्साह देखकर मुग्ध हो गया और वह भावना समय बीतने से कम न होकर अधिक गहरी होती गई।&amp;quot;- ''' देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद'''|विचारक=}}इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध [[चम्पारण]] से अपना सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था।अनुग्रह बाबू के हृदय में सेवा की उच्च भावना तो बाल्यकाल से ही था, उसे कार्य रूप में परिणत करने तथा उसे पूर्ण रूप से विकसित करने का सुअवसर भी उन्हें इस संगठन में प्रविष्ट होने पर मिल गया। सन्‌ १९१० में आई ए की परीक्षा भी उन्होंने प्रथम श्रेणी में पास की फिर बीए में प्रवेश किया। उसी वर्ष महामना पोलक साहब जो महात्मा गांधी के सहकर्मी थे, पटना पधारे, अफ्रीका के प्रवासी भारतीयों के बारे में जो उनका व्याख्यान हुआ। उससे अनुग्रह बाबू बहुत प्रभावित हुए। उसी वर्ष प्रयाग में अखिल भारतीय कांग्रेस अधिवेशन हुआ, जिसमें वे अपनी उत्साही सहपाठियों के साथ गये। उस अधिवेशन में महामना गोखले आदि विद्वान राष्ट्रभक्तों के भाषणों को सुनने का स्वर्ण अवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ, जिससे वे ब़डे प्रभावित हुए।अनुग्रह बाबू विद्यार्थी जीवन में ही संगठनशक्ति तथा कार्य संचालन की काबिलियत हासिल कर ली थी। सन्‌ १९१४ में इतिहास से एमए करने के बाद १९१५ में बी एल की परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की। भागलपुर के तेजनारायण जुविल कॉलेज में इतिहास के एक प्रोफेसर की आवश्यकता हुई। अपने साथियों के परामर्श करने के पश्चात तुरंत उन्होंने अपना आवेदन पत्र भेज दिया और उस पद पर उनकी नियुक्ति हो गई। वर्ष १९१६ में उन्होंने कॉलेज की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और पटना हाईकोर्ट में वकालत प्रारंभ कर दी। वकालत के सिलसिले में सरलता की मूर्ति देशरत्न राजेन्द्र बाबू के संसर्ग में अधिक रहने का सुअवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ और उनसे पेशे को उन्नत करने की प्रेरणा भी मिली। कलकत्ते में भी उन्हें राजेन्द्र बाबू के सम्पर्क में रहने का स्वर्ण अवसर मिला था। जिस समय राजेन्द्र बाबू लॉ कॉलेज में अध्यापक थे, उसी समय उसी कॉलेज में वे एक विद्यार्थी थे। इसलिये वे राजेन्द्र बाबू की प्रतिष्ठा किया करते थे। उन्होंने [[महात्मा गांधी]] एवं डा. [[राजेन्द्र प्रसाद]] के साथ राष्ट्रीय आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== गांधीजी का सत्याग्रह==&lt;br /&gt;
उन्हें वकालत करते हुए अभी एक वर्ष भी नहीं बीता था कि चम्पारण में नील आंदोलन उठ ख़डा हुआ । इस आंदोलन ने उनके जीवन की धारा ही बदल दी। चम्पारण के किसानों की तबाही का समाचार जब [[महात्मा गांधी]] से सुने तो वे करुणा से विचलित हो उठे। मुजफ्फरपुर के कमिश्नर की राय के विरुद्ध गांधीजी चम्पारण गये और जांच कार्य प्रारंभ कर दिया।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Champaran Satyagraha.jpg|thumb|220px|चंपारण सत्याग्रह आंदोलन के दौरान डॉ. [[राजेन्द्र प्रसाद]] और [[अनुग्रह नारायण सिन्हा]]]] अत्याचारों की जांच प्रारंभ हुई । इसमें कुछ ऐसे वकीलों की आवश्यकता थी, जो निर्भीकता पूर्वक कार्य कर सकें और समय आने पर जेल जाने के लिए भी तैयार रहें। इस विकट कार्य के लिए वृज किशोर बाबू के प्रोत्साहन पर राजेन्द्र बाबू के साथ ही अनुग्रह बाबू भी तत्पर हो गये। उन्होंने इसकी तनिक भी चिंता नहीं की कि उनका पेशा नया है और उन्हें भारी क्षति उठानी प़ड सकती है। एक बार जो त्याग के मार्ग पर आगे ब़ढ चुका है, उसे भला इन तुच्छ चीजों का क्या भय हो सकता है। चम्पारण का किसान आंदोलन ४५ महीनों तक जोरशोर से चलता रहा। अनुग्रह बाबू बराबर उसमें काम करते रहे और आखिर तक डटे रहे । स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का पाठ उन्हें गांधीजी के आश्रम में ही रहकर प़ढने का सुअवसर प्राप्त हुआ। अनुग्रह बाबू ने चम्पारण के नील आंदोलन में गांधीजी के साथ लगन और निर्भीकता के साथ काम किया और आंदोलन को सफल बनाकर उनके आदेशानुसार १९१७ में पटना आये। बापू के साथ रहने से उन्हें जो आत्मिक बल प्राप्त हुआ, वही इनके जीवन का संबल बना। सन्‌ १९२० के दिसंबर में नागपुर में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हुआ, जिसमें अनुग्रह बाबू ने भी भाग लिया। सन्‌ १९२९ के दिसंबर में सरदार पटेल ने किसान संगठन के सिलसिले में मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया, तब अनुग्रह बाबू सभी जगह उनके साथ थे। २६ जनवरी १९३० को सारे देश में स्वतंत्रता की घोषणा प़ढी गई। अनुग्रह बाबू को भी कई स्थानों में घोषण पत्र प़ढना प़ढा । कुछ दिनों के बाद महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया। उस सिलसिले में उन्हें चम्पारण, मुजफ्फरपुर आदि स्थानों का दौरा करना प़डा । २६ जनवरी, १९३३ को जब पटना में घोषणा प़ढ रहे थे, उसी समय उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें पंद्रह मास की सजा हुई और उन्हें हजारीबाग जेल भेज दिया गया। जिस समय वे जेल में थे, बिहार में इतिहास विख्यात प्रलयंकारी भूकंप आया। हृदय विदारक समाचारों को प़ढकर उनका हृदय दर्द से कराह उठा। चहारदीवारी के अंदर बंद रहने के कारण ये कोई राहत कार्य नहीं कर सकते थे। लेकिन सरकार ने तीन हफ्तों के बाद इन्हें छ़ोड दिया। छूटते ही अनुग्रह बाबू राहत कार्य में संलग्न हो गये। राजेन्द्र बाबू के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इन्होंने अथक परिश्रम के साथ पी़डत मानवता की सेवा की। मुजफ्फरपुर, मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया । इसके लिये राजेन्द्र बाबू की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी, जिसके उपाध्यक्ष अनुग्रह बाबू ही चुने गये तथा खूब लगन के साथ सेवा कार्य किया।सन्‌ १९४० को मार्च महीने में अखिल भारतीय कांग्रेस का अधिवेशन रामग़ढ में हुआ। अधिवेशन का संपूर्ण भार अनुग्रह बाबू के कंधे पर था। उसमें जो अपनी तत्परता दिखलाई उसके फलस्वरूप ही कांग्रेस का अधिवेशन सफल हुआ। देश की परिस्थिति को देखते हुए जब गांधीजी ने व्यक्तिगत सत्याग्रह अपनाया तब उनके प्रिय सहयोगी अनुग्रह बाबू कब चूकने वाले थे। फलस्वरूप १९४० को वह गिरफ्तार कर लिये गये और अगस्त १९४१ में रिहा हुए।&lt;br /&gt;
&amp;lt;br /&amp;gt;&amp;lt;blockquote&amp;gt;&amp;lt;span style=&amp;quot;color: #8f5d31&amp;quot;&amp;gt;मुझे अपने लिए चिंता नहीं है,किंतु देश के लिए मुझे चिंता है।’ '''बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा'''&amp;lt;/span&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
गांधीजी का ‘करो या मरो’ का नारा बुलंद हुआ। ७ अगस्त, १९४२ को गांधीजी गिरफ्तार किये गये। सारे देश में एक बार ही बिजली की तरह आंदोलन की आग फैल गई। कांग्रेस कमिटियां जब्त कर ली गई और कांग्रेस नेता जहां के तहां गिरफ्तार कर लिये गये। १० अगस्त को अनुग्रह बाबू भी जब अपने मित्रों से मिलने गये, एकाएक मार्ग में ही गिरफ्तार कर लिये गये। सन्‌ १९४४ में जब सारे कांग्रेसी नेता जेल से मुक्त किये जाने लगे, तो अनुग्रह बाबू भी कारावास की कैद से आजाद कर दिये गये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बिहार के पहले उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री==&lt;br /&gt;
१९३७ में ही बाबू साहब बिहार प्रान्त के वित्त मंत्री बने।अनुग्रह बाबू [[बिहार]] [[विधानसभा]]  में १९३७ से  लेकर १९५७ तक कांग्रेस [[विधायक]] दल के उप नेता थे। १९४६ में जब दूसरा मंत्रिमंडल बना तब वित्त और श्रम दोनों विभागों के पहले मंत्री बने और उन्होंने अपने मंत्रित्व काल में विशेषकर श्रम विभाग में अपनी न्याय प्रियता लोकतांत्रिक विचारधारा एवं श्रमिकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का जो परिचय दिया वह सराहनीय ही नहीं अनुकरणीय है। श्रम मंत्री के रूप में अनुग्रह बाबू ने ‘बिहार केन्द्रीय श्रम परामर्श समिति’ के माध्यम से श्रम प्रशासन तथा श्रमिक समस्याआें के समाधान के लिए जो नियम एवं प्रावधान बनाये वे आज पूरे देश के लिये मापदंड के रूप में काम करते हैं। तृतीय मंत्रिमंडल में उन्हें खाद, बीज, मिट्‌टी, मवेशी में सुधार लाने के लिए शोध कार्य करवाए और पहली बार जापानी ढंग से धान उपजाने की पद्धति का प्रचार कराया। पूसा का कृषि अनुसंधान फार्म उनकी ही देन है। इस तेजस्वी महापुरुष का निधन ५ जुलाई, १९५७ को उनके निवास स्थान [[पटना]] मे बीमारी के कारण हुआ। उनके सम्मान मे तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया, उनके अन्तिम संस्कार में विशाल जनसमूह उपस्थित था।अनुग्रह बाबू  [[२ जनवरी]], [[१९४६]] से अपनी मृत्यु तक बिहार के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  रहे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==संदर्भ==&lt;br /&gt;
{{reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/database/biographies/anugrah_narayan_sinha.htm अनुग्रह बाबू की जीवनी]&lt;br /&gt;
*[http://books.google.co.in/books?id=kmZV1ALVaCYC&amp;amp;pg=PT403&amp;amp;lpg=PT403&amp;amp;dq=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9+%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;source=bl&amp;amp;ots=BrT6nN3s6g&amp;amp;sig=AQGM4ELFM1mxpiXuSV_kVCFd_Fs&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ei=yaZmS5DaJsWVtgenqvS2Bg&amp;amp;sa=X&amp;amp;oi=book_result&amp;amp;ct=result&amp;amp;resnum=2&amp;amp;ved=0CAkQ6AEwATge#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%20%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;f=false बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:z7Qyx0yJNJ4J:in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html+/search%3Fhl%3Dhi%26q%3D%2Bsite:in.jagran.yahoo.com%2B%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2597%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25B9%2B%25E0%25A4%25AC%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%2582&amp;amp;cd=5&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in आधुनिक भारत के निर्माता थे अनुग्रह बाबू : राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_4561311.html लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी थे डा अनुग्रह बाबू ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html अनुग्रह बाबू के जीवन से सीख लेने की जरूरत है-राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/kalranga/freedom/congress/c127.htm बिहार के स्वतंत्रता सेनानी]&lt;br /&gt;
*[http://www.aicc.org.in/satyagraha_laboratories_of_mahatma_gandhi.htm महात्मा गाँधी की सत्याग्रह प्रयोगशाला]&lt;br /&gt;
*[http://loksabha.nic.in/ लोकसभा का जालस्थल]&lt;br /&gt;
*[http://www.mkgandhi.org/jpnarayan/total_revolution.htm सम्पूर्ण क्रांति]&lt;br /&gt;
*[http://www.snsibm.com/ अनुग्रह नारायण सिन्हा व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, राँची]&lt;br /&gt;
*[http://www.ancollege.org/ अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय, पटना]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता_सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार_का_इतिहास]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<title>अनुग्रह नारायण सिंह</title>
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		<updated>2011-06-19T06:58:52Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=BiharVibhuti Dr Anugrah Narayan Sinha.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=अनुग्रह नारायण सिंह&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=अनुग्रह बाबू&lt;br /&gt;
|जन्म=[[18 जून ]],[[1887]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[बिहार]]&lt;br /&gt;
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|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[पटना]]&lt;br /&gt;
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|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]&lt;br /&gt;
|पद=[[बिहार]] के प्रथम उप [[मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिन्दी]],[[अंग्रेज़ी]] &lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=[[2 जनवरी]], [[1946]] से 05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|विद्यालय=[[कलकत्ता विश्वविद्यालय]], प्रेसीडेंसी कॉलेज (कलकत्ता)&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री और डॉक्टरेट&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=बिहार विभूति&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=भारत की स्वतन्त्रता, अहिंसक आन्दोलन, सत्याग्रह&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=[[असहयोग आंदोलन]], [[नमक सत्याग्रह]] आदि&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=रचनाऐं-मेरे संस्मरण:आत्मकथा&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
डा '''अनुग्रह नारायण सिंह''' एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता और [[बिहार]] के पहले उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री (१९४६- १९५७) थे। अनुग्रह बाबू (1887-१९५७) [[भारत]] के [[स्वतंत्रता सेनानी]], शिक्षक तथा राजनीतिज्ञ रहे हैं। लोकप्रियता के कारण उन्हें '''बिहार विभूति''' के रूप में जाना जाता था।वह स्वाधीनता आंदोलन के महान योद्धा थे।स्वाधीनता के बाद राष्ट्र निर्माण व जनकल्याण के कार्यो में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==आधुनिक बिहार के निर्माता==&lt;br /&gt;
[[बिहार]] के विकास में डा अनुग्रह नारायण सिन्हा का योगदान अतुलनीय है। बिहार के प्रशासनिक ढांचा को तैयार करना का काम अनुग्रह बाबू  ने किया था।प्रभावशाली पद पर होने के बावजूद उन्होंने अपना पूरा जीवन सादगी से बिताया। उनके कार्यकाल में [[बिहार]] में उद्योग -धंधे का जाल बिछा। अनुग्रह बाबू ने राज्य के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  के रूप मे ११ वर्षो तक बिहार की अनवरत सेवा की।अनुग्रह नारायण सिंह घोर मानवतावादी प्रगतिशील विचारक एवं दलितों के उत्थान के प्रबल समर्थक और आधुनिक भारत के निर्माताआें में से एक थे। उनका जीवन दर्शन देश की अखंडतास्वतंत्रता और नवनिर्माण की भावनाआ से शराबोर रहा है। उनका सौभ्य, स्निग्ध, शीतल, परोपकारी, अहंकारहीन और दर्पोदीप्त शख्सियत बिहार के जनगणमन पर अधिकार किए हुए था|वे शरीर से दुर्बल, कृषकाय थे, पर इस अर्थ में महाप्राण कोई संकट उनके ओठों की मुस्कुराहट नहीं छीन सका। उनमें शक्ति और शील एकाकार हो गये थे और इसीलिए वे बुद्धिजीवियों को विशेष प्रिय थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रारंभिक जीवन==&lt;br /&gt;
अनुग्रह बाबू का जन्म औरंगाबाद जिले के पोईअवा नामक गांव में १८ जून १८८७ को हुआ । उनके पिता ठाकुर विशेश्वर दयाल सिंह जी अपने इलाके के एक वीर पुरुष थे। पांच बसंत जब वे पार कर गये तो उनकी शिक्षा का श्रीगणेश हुआ। सन्‌ १९०० में औरंगाबाद मिडिल स्कूल,१९०४ में गया जिला स्कूल और १९०८ में पटना कॉलेज में प्रविष्ट हुए। जिस समय ये पटना कॉलेज में आये उस समय देश के शिक्षित व्यक्तियों के हृदय में परतंत्रता की वेदना का अनुभव होने लगा था। गुलामी की जंजीर में जक़डी हुई मानवता का चित्कार अब उन्हें सुनायी प़डने लगा था। वे उस जंजीर को त़ोड फेंकने के लिए व्याकुल होने लगे थे। सुरेन्द्रनाथ बनर्जी तथा योगिराज अरविंद ऐसे महान आत्माआे का प्रादुर्भाव हो चुका था । इन महान आत्माआ के कार्य कलापों तथा व्याख्यानों का समुचित प्रभाव अनुग्रह बाबू के हृदय पर प़डा। उनका हृदय भी भारतमाता की सेवा के लिए त़डप उठा और वे उस पावन मार्ग पर अग्रसर हो गये। सर्फूद्दीन के नेतृत्व में ‘बिहारी छात्र सम्मेलन’ नामक संस्था संगठित की गई, जिसमें देशरत्न डॉ राजेन्द्र बाबू ऐसे मेधावी छात्रों को कार्य करने तथा नेतृत्व करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन==&lt;br /&gt;
{{बाँयाबक्सा|पाठ=&amp;quot;मेरा परिचय अनुग्रह बाबू से बिहारी छात्र सम्मेलन में ही पहले पहल हुआ था।मैं उनकी संगठन शक्ति और हाथ में आए हुए काया] में उत्साह देखकर मुग्ध हो गया और वह भावना समय बीतने से कम न होकर अधिक गहरी होती गई।&amp;quot;- ''' देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद'''|विचारक=}}इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध [[चम्पारण]] से अपना सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था।अनुग्रह बाबू के हृदय में सेवा की उच्च भावना तो बाल्यकाल से ही था, उसे कार्य रूप में परिणत करने तथा उसे पूर्ण रूप से विकसित करने का सुअवसर भी उन्हें इस संगठन में प्रविष्ट होने पर मिल गया। सन्‌ १९१० में आई ए की परीक्षा भी उन्होंने प्रथम श्रेणी में पास की फिर बीए में प्रवेश किया। उसी वर्ष महामना पोलक साहब जो महात्मा गांधी के सहकर्मी थे, पटना पधारे, अफ्रीका के प्रवासी भारतीयों के बारे में जो उनका व्याख्यान हुआ। उससे अनुग्रह बाबू बहुत प्रभावित हुए। उसी वर्ष प्रयाग में अखिल भारतीय कांग्रेस अधिवेशन हुआ, जिसमें वे अपनी उत्साही सहपाठियों के साथ गये। उस अधिवेशन में महामना गोखले आदि विद्वान राष्ट्रभक्तों के भाषणों को सुनने का स्वर्ण अवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ, जिससे वे ब़डे प्रभावित हुए।अनुग्रह बाबू विद्यार्थी जीवन में ही संगठनशक्ति तथा कार्य संचालन की काबिलियत हासिल कर ली थी। सन्‌ १९१४ में इतिहास से एमए करने के बाद १९१५ में बी एल की परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की। भागलपुर के तेजनारायण जुविल कॉलेज में इतिहास के एक प्रोफेसर की आवश्यकता हुई। अपने साथियों के परामर्श करने के पश्चात तुरंत उन्होंने अपना आवेदन पत्र भेज दिया और उस पद पर उनकी नियुक्ति हो गई। वर्ष १९१६ में उन्होंने कॉलेज की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और पटना हाईकोर्ट में वकालत प्रारंभ कर दी। वकालत के सिलसिले में सरलता की मूर्ति देशरत्न राजेन्द्र बाबू के संसर्ग में अधिक रहने का सुअवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ और उनसे पेशे को उन्नत करने की प्रेरणा भी मिली। कलकत्ते में भी उन्हें राजेन्द्र बाबू के सम्पर्क में रहने का स्वर्ण अवसर मिला था। जिस समय राजेन्द्र बाबू लॉ कॉलेज में अध्यापक थे, उसी समय उसी कॉलेज में वे एक विद्यार्थी थे। इसलिये वे राजेन्द्र बाबू की प्रतिष्ठा किया करते थे। उन्होंने [[महात्मा गांधी]] एवं डा. [[राजेन्द्र प्रसाद]] के साथ राष्ट्रीय आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== गांधीजी का सत्याग्रह==&lt;br /&gt;
उन्हें वकालत करते हुए अभी एक वर्ष भी नहीं बीता था कि चम्पारण में नील आंदोलन उठ ख़डा हुआ । इस आंदोलन ने उनके जीवन की धारा ही बदल दी। चम्पारण के किसानों की तबाही का समाचार जब [[महात्मा गांधी]] से सुने तो वे करुणा से विचलित हो उठे। मुजफ्फरपुर के कमिश्नर की राय के विरुद्ध गांधीजी चम्पारण गये और जांच कार्य प्रारंभ कर दिया।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Champaran Satyagraha.jpg|thumb|220px|चंपारण सत्याग्रह आंदोलन के दौरान डॉ. [[राजेन्द्र प्रसाद]] और [[अनुग्रह नारायण सिन्हा]]]] अत्याचारों की जांच प्रारंभ हुई । इसमें कुछ ऐसे वकीलों की आवश्यकता थी, जो निर्भीकता पूर्वक कार्य कर सकें और समय आने पर जेल जाने के लिए भी तैयार रहें। इस विकट कार्य के लिए वृज किशोर बाबू के प्रोत्साहन पर राजेन्द्र बाबू के साथ ही अनुग्रह बाबू भी तत्पर हो गये। उन्होंने इसकी तनिक भी चिंता नहीं की कि उनका पेशा नया है और उन्हें भारी क्षति उठानी प़ड सकती है। एक बार जो त्याग के मार्ग पर आगे ब़ढ चुका है, उसे भला इन तुच्छ चीजों का क्या भय हो सकता है। चम्पारण का किसान आंदोलन ४५ महीनों तक जोरशोर से चलता रहा। अनुग्रह बाबू बराबर उसमें काम करते रहे और आखिर तक डटे रहे । स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का पाठ उन्हें गांधीजी के आश्रम में ही रहकर प़ढने का सुअवसर प्राप्त हुआ। अनुग्रह बाबू ने चम्पारण के नील आंदोलन में गांधीजी के साथ लगन और निर्भीकता के साथ काम किया और आंदोलन को सफल बनाकर उनके आदेशानुसार १९१७ में पटना आये। बापू के साथ रहने से उन्हें जो आत्मिक बल प्राप्त हुआ, वही इनके जीवन का संबल बना। सन्‌ १९२० के दिसंबर में नागपुर में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हुआ, जिसमें अनुग्रह बाबू ने भी भाग लिया। सन्‌ १९२९ के दिसंबर में सरदार पटेल ने किसान संगठन के सिलसिले में मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया, तब अनुग्रह बाबू सभी जगह उनके साथ थे। २६ जनवरी १९३० को सारे देश में स्वतंत्रता की घोषणा प़ढी गई। अनुग्रह बाबू को भी कई स्थानों में घोषण पत्र प़ढना प़ढा । कुछ दिनों के बाद महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया। उस सिलसिले में उन्हें चम्पारण, मुजफ्फरपुर आदि स्थानों का दौरा करना प़डा । २६ जनवरी, १९३३ को जब पटना में घोषणा प़ढ रहे थे, उसी समय उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें पंद्रह मास की सजा हुई और उन्हें हजारीबाग जेल भेज दिया गया। जिस समय वे जेल में थे, बिहार में इतिहास विख्यात प्रलयंकारी भूकंप आया। हृदय विदारक समाचारों को प़ढकर उनका हृदय दर्द से कराह उठा। चहारदीवारी के अंदर बंद रहने के कारण ये कोई राहत कार्य नहीं कर सकते थे। लेकिन सरकार ने तीन हफ्तों के बाद इन्हें छ़ोड दिया। छूटते ही अनुग्रह बाबू राहत कार्य में संलग्न हो गये। राजेन्द्र बाबू के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इन्होंने अथक परिश्रम के साथ पी़डत मानवता की सेवा की। मुजफ्फरपुर, मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया । इसके लिये राजेन्द्र बाबू की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी, जिसके उपाध्यक्ष अनुग्रह बाबू ही चुने गये तथा खूब लगन के साथ सेवा कार्य किया।सन्‌ १९४० को मार्च महीने में अखिल भारतीय कांग्रेस का अधिवेशन रामग़ढ में हुआ। अधिवेशन का संपूर्ण भार अनुग्रह बाबू के कंधे पर था। उसमें जो अपनी तत्परता दिखलाई उसके फलस्वरूप ही कांग्रेस का अधिवेशन सफल हुआ। देश की परिस्थिति को देखते हुए जब गांधीजी ने व्यक्तिगत सत्याग्रह अपनाया तब उनके प्रिय सहयोगी अनुग्रह बाबू कब चूकने वाले थे। फलस्वरूप १९४० को वह गिरफ्तार कर लिये गये और अगस्त १९४१ में रिहा हुए।&lt;br /&gt;
&amp;lt;br /&amp;gt;&amp;lt;blockquote&amp;gt;&amp;lt;span style=&amp;quot;color: #8f5d31&amp;quot;&amp;gt;मुझे अपने लिए चिंता नहीं है,किंतु देश के लिए मुझे चिंता है।’ '''बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा'''&amp;lt;/span&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
गांधीजी का ‘करो या मरो’ का नारा बुलंद हुआ। ७ अगस्त, १९४२ को गांधीजी गिरफ्तार किये गये। सारे देश में एक बार ही बिजली की तरह आंदोलन की आग फैल गई। कांग्रेस कमिटियां जब्त कर ली गई और कांग्रेस नेता जहां के तहां गिरफ्तार कर लिये गये। १० अगस्त को अनुग्रह बाबू भी जब अपने मित्रों से मिलने गये, एकाएक मार्ग में ही गिरफ्तार कर लिये गये। सन्‌ १९४४ में जब सारे कांग्रेसी नेता जेल से मुक्त किये जाने लगे, तो अनुग्रह बाबू भी कारावास की कैद से आजाद कर दिये गये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बिहार के पहले उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री==&lt;br /&gt;
१९३७ में ही बाबू साहब बिहार प्रान्त के वित्त मंत्री बने।अनुग्रह बाबू [[बिहार]] [[विधानसभा]]  में १९३७ से  लेकर १९५७ तक कांग्रेस [[विधायक]] दल के उप नेता थे। १९४६ में जब दूसरा मंत्रिमंडल बना तब वित्त और श्रम दोनों विभागों के पहले मंत्री बने और उन्होंने अपने मंत्रित्व काल में विशेषकर श्रम विभाग में अपनी न्याय प्रियता लोकतांत्रिक विचारधारा एवं श्रमिकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का जो परिचय दिया वह सराहनीय ही नहीं अनुकरणीय है। श्रम मंत्री के रूप में अनुग्रह बाबू ने ‘बिहार केन्द्रीय श्रम परामर्श समिति’ के माध्यम से श्रम प्रशासन तथा श्रमिक समस्याआें के समाधान के लिए जो नियम एवं प्रावधान बनाये वे आज पूरे देश के लिये मापदंड के रूप में काम करते हैं। तृतीय मंत्रिमंडल में उन्हें खाद, बीज, मिट्‌टी, मवेशी में सुधार लाने के लिए शोध कार्य करवाए और पहली बार जापानी ढंग से धान उपजाने की पद्धति का प्रचार कराया। पूसा का कृषि अनुसंधान फार्म उनकी ही देन है। इस तेजस्वी महापुरुष का निधन ५ जुलाई, १९५७ को उनके निवास स्थान [[पटना]] मे बीमारी के कारण हुआ। उनके सम्मान मे तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया, उनके अन्तिम संस्कार में विशाल जनसमूह उपस्थित था।अनुग्रह बाबू  [[२ जनवरी]], [[१९४६]] से अपनी मृत्यु तक बिहार के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  रहे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==संदर्भ==&lt;br /&gt;
{{reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/database/biographies/anugrah_narayan_sinha.htm अनुग्रह बाबू की जीवनी]&lt;br /&gt;
*[http://books.google.co.in/books?id=kmZV1ALVaCYC&amp;amp;pg=PT403&amp;amp;lpg=PT403&amp;amp;dq=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9+%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;source=bl&amp;amp;ots=BrT6nN3s6g&amp;amp;sig=AQGM4ELFM1mxpiXuSV_kVCFd_Fs&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ei=yaZmS5DaJsWVtgenqvS2Bg&amp;amp;sa=X&amp;amp;oi=book_result&amp;amp;ct=result&amp;amp;resnum=2&amp;amp;ved=0CAkQ6AEwATge#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%20%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;f=false बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:z7Qyx0yJNJ4J:in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html+/search%3Fhl%3Dhi%26q%3D%2Bsite:in.jagran.yahoo.com%2B%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2597%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25B9%2B%25E0%25A4%25AC%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%2582&amp;amp;cd=5&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in आधुनिक भारत के निर्माता थे अनुग्रह बाबू : राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_4561311.html लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी थे डा अनुग्रह बाबू ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html अनुग्रह बाबू के जीवन से सीख लेने की जरूरत है-राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/kalranga/freedom/congress/c127.htm बिहार के स्वतंत्रता सेनानी]&lt;br /&gt;
*[http://www.aicc.org.in/satyagraha_laboratories_of_mahatma_gandhi.htm महात्मा गाँधी की सत्याग्रह प्रयोगशाला]&lt;br /&gt;
*[http://loksabha.nic.in/ लोकसभा का जालस्थल]&lt;br /&gt;
*[http://www.mkgandhi.org/jpnarayan/total_revolution.htm सम्पूर्ण क्रांति]&lt;br /&gt;
*[http://www.snsibm.com/ अनुग्रह नारायण सिन्हा व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, राँची]&lt;br /&gt;
*[http://www.ancollege.org/ अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय, पटना]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता_सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार_का_इतिहास]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<title>अनुग्रह नारायण सिंह</title>
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		<updated>2011-06-19T06:57:04Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=BiharVibhuti Dr Anugrah Narayan Sinha.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=अनुग्रह नारायण सिंह&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=अनुग्रह बाबू&lt;br /&gt;
|जन्म=[[18 जून ]],[[1887]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[बिहार]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[पटना]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]&lt;br /&gt;
|पद=[[बिहार]] के प्रथम उप [[मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिन्दी]],[[अंग्रेज़ी]] &lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=[[2 जनवरी]], [[1946]] से 05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|विद्यालय=[[कलकत्ता विश्वविद्यालय]], प्रेसीडेंसी कॉलेज (कलकत्ता)&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री और डॉक्टरेट&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=बिहार विभूति&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=भारत की स्वतन्त्रता, अहिंसक आन्दोलन, सत्याग्रह&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=[[असहयोग आंदोलन]], [[नमक सत्याग्रह]] आदि&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=रचनाऐं-मेरे संस्मरण:आत्मकथा&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
डा '''अनुग्रह नारायण सिंह''' एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता और [[बिहार]] के पहले उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री (१९४६- १९५७) थे। अनुग्रह बाबू (1887-१९५७) [[भारत]] के [[स्वतंत्रता सेनानी]], शिक्षक तथा राजनीतिज्ञ रहे हैं। लोकप्रियता के कारण उन्हें '''बिहार विभूति''' के रूप में जाना जाता था।वह स्वाधीनता आंदोलन के महान योद्धा थे।स्वाधीनता के बाद राष्ट्र निर्माण व जनकल्याण के कार्यो में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==आधुनिक बिहार के निर्माता==&lt;br /&gt;
[[बिहार]] के विकास में डा अनुग्रह नारायण सिन्हा का योगदान अतुलनीय है। बिहार के प्रशासनिक ढांचा को तैयार करना का काम अनुग्रह बाबू  ने किया था।प्रभावशाली पद पर होने के बावजूद उन्होंने अपना पूरा जीवन सादगी से बिताया। उनके कार्यकाल में [[बिहार]] में उद्योग -धंधे का जाल बिछा। अनुग्रह बाबू ने राज्य के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  के रूप मे ११ वर्षो तक बिहार की अनवरत सेवा की।अनुग्रह नारायण सिंह घोर मानवतावादी प्रगतिशील विचारक एवं दलितों के उत्थान के प्रबल समर्थक और आधुनिक भारत के निर्माताआें में से एक थे। उनका जीवन दर्शन देश की अखंडतास्वतंत्रता और नवनिर्माण की भावनाआ से शराबोर रहा है। उनका सौभ्य, स्निग्ध, शीतल, परोपकारी, अहंकारहीन और दर्पोदीप्त शख्सियत बिहार के जनगणमन पर अधिकार किए हुए था|वे शरीर से दुर्बल, कृषकाय थे, पर इस अर्थ में महाप्राण कोई संकट उनके ओठों की मुस्कुराहट नहीं छीन सका। उनमें शक्ति और शील एकाकार हो गये थे और इसीलिए वे बुद्धिजीवियों को विशेष प्रिय थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रारंभिक जीवन==&lt;br /&gt;
अनुग्रह बाबू का जन्म औरंगाबाद जिले के पोईअवा नामक गांव में १८ जून १८८७ को हुआ । उनके पिता ठाकुर विशेश्वर दयाल सिंह जी अपने इलाके के एक वीर पुरुष थे। पांच बसंत जब वे पार कर गये तो उनकी शिक्षा का श्रीगणेश हुआ। सन्‌ १९०० में औरंगाबाद मिडिल स्कूल,१९०४ में गया जिला स्कूल और १९०८ में पटना कॉलेज में प्रविष्ट हुए। जिस समय ये पटना कॉलेज में आये उस समय देश के शिक्षित व्यक्तियों के हृदय में परतंत्रता की वेदना का अनुभव होने लगा था। गुलामी की जंजीर में जक़डी हुई मानवता का चित्कार अब उन्हें सुनायी प़डने लगा था। वे उस जंजीर को त़ोड फेंकने के लिए व्याकुल होने लगे थे। सुरेन्द्रनाथ बनर्जी तथा योगिराज अरविंद ऐसे महान आत्माआे का प्रादुर्भाव हो चुका था । इन महान आत्माआ के कार्य कलापों तथा व्याख्यानों का समुचित प्रभाव अनुग्रह बाबू के हृदय पर प़डा। उनका हृदय भी भारतमाता की सेवा के लिए त़डप उठा और वे उस पावन मार्ग पर अग्रसर हो गये। सर्फूद्दीन के नेतृत्व में ‘बिहारी छात्र सम्मेलन’ नामक संस्था संगठित की गई, जिसमें देशरत्न डॉ राजेन्द्र बाबू ऐसे मेधावी छात्रों को कार्य करने तथा नेतृत्व करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन==&lt;br /&gt;
{{बाँयाबक्सा|पाठ=&amp;quot;मेरा परिचय अनुग्रह बाबू से बिहारी छात्र सम्मेलन में ही पहले पहल हुआ था।मैं उनकी संगठन शक्ति और हाथ में आए हुए काया] में उत्साह देखकर मुग्ध हो गया और वह भावना समय बीतने से कम न होकर अधिक गहरी होती गई।&amp;quot;- ''' देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद'''|विचारक=}}इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध [[चम्पारण]] से अपना सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था।अनुग्रह बाबू के हृदय में सेवा की उच्च भावना तो बाल्यकाल से ही था, उसे कार्य रूप में परिणत करने तथा उसे पूर्ण रूप से विकसित करने का सुअवसर भी उन्हें इस संगठन में प्रविष्ट होने पर मिल गया। सन्‌ १९१० में आई ए की परीक्षा भी उन्होंने प्रथम श्रेणी में पास की फिर बीए में प्रवेश किया। उसी वर्ष महामना पोलक साहब जो महात्मा गांधी के सहकर्मी थे, पटना पधारे, अफ्रीका के प्रवासी भारतीयों के बारे में जो उनका व्याख्यान हुआ। उससे अनुग्रह बाबू बहुत प्रभावित हुए। उसी वर्ष प्रयाग में अखिल भारतीय कांग्रेस अधिवेशन हुआ, जिसमें वे अपनी उत्साही सहपाठियों के साथ गये। उस अधिवेशन में महामना गोखले आदि विद्वान राष्ट्रभक्तों के भाषणों को सुनने का स्वर्ण अवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ, जिससे वे ब़डे प्रभावित हुए।अनुग्रह बाबू विद्यार्थी जीवन में ही संगठनशक्ति तथा कार्य संचालन की काबिलियत हासिल कर ली थी। सन्‌ १९१४ में इतिहास से एमए करने के बाद १९१५ में बी एल की परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की। भागलपुर के तेजनारायण जुविल कॉलेज में इतिहास के एक प्रोफेसर की आवश्यकता हुई। अपने साथियों के परामर्श करने के पश्चात तुरंत उन्होंने अपना आवेदन पत्र भेज दिया और उस पद पर उनकी नियुक्ति हो गई। वर्ष १९१६ में उन्होंने कॉलेज की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और पटना हाईकोर्ट में वकालत प्रारंभ कर दी। वकालत के सिलसिले में सरलता की मूर्ति देशरत्न राजेन्द्र बाबू के संसर्ग में अधिक रहने का सुअवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ और उनसे पेशे को उन्नत करने की प्रेरणा भी मिली। कलकत्ते में भी उन्हें राजेन्द्र बाबू के सम्पर्क में रहने का स्वर्ण अवसर मिला था। जिस समय राजेन्द्र बाबू लॉ कॉलेज में अध्यापक थे, उसी समय उसी कॉलेज में वे एक विद्यार्थी थे। इसलिये वे राजेन्द्र बाबू की प्रतिष्ठा किया करते थे। उन्होंने [[महात्मा गांधी]] एवं डा. [[राजेन्द्र प्रसाद]] के साथ राष्ट्रीय आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== गांधीजी का सत्याग्रह==&lt;br /&gt;
उन्हें वकालत करते हुए अभी एक वर्ष भी नहीं बीता था कि चम्पारण में नील आंदोलन उठ ख़डा हुआ । इस आंदोलन ने उनके जीवन की धारा ही बदल दी। चम्पारण के किसानों की तबाही का समाचार जब [[महात्मा गांधी]] से सुने तो वे करुणा से विचलित हो उठे। मुजफ्फरपुर के कमिश्नर की राय के विरुद्ध गांधीजी चम्पारण गये और जांच कार्य प्रारंभ कर दिया।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Champaran Satyagraha.jpg|thumb|220px|चंपारण सत्याग्रह आंदोलन के दौरान डॉ. [[राजेन्द्र प्रसाद]] और [[अनुग्रह नारायण सिन्हा]]]] अत्याचारों की जांच प्रारंभ हुई । इसमें कुछ ऐसे वकीलों की आवश्यकता थी, जो निर्भीकता पूर्वक कार्य कर सकें और समय आने पर जेल जाने के लिए भी तैयार रहें। इस विकट कार्य के लिए वृज किशोर बाबू के प्रोत्साहन पर राजेन्द्र बाबू के साथ ही अनुग्रह बाबू भी तत्पर हो गये। उन्होंने इसकी तनिक भी चिंता नहीं की कि उनका पेशा नया है और उन्हें भारी क्षति उठानी प़ड सकती है। एक बार जो त्याग के मार्ग पर आगे ब़ढ चुका है, उसे भला इन तुच्छ चीजों का क्या भय हो सकता है। चम्पारण का किसान आंदोलन ४५ महीनों तक जोरशोर से चलता रहा। अनुग्रह बाबू बराबर उसमें काम करते रहे और आखिर तक डटे रहे । स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का पाठ उन्हें गांधीजी के आश्रम में ही रहकर प़ढने का सुअवसर प्राप्त हुआ। अनुग्रह बाबू ने चम्पारण के नील आंदोलन में गांधीजी के साथ लगन और निर्भीकता के साथ काम किया और आंदोलन को सफल बनाकर उनके आदेशानुसार १९१७ में पटना आये। बापू के साथ रहने से उन्हें जो आत्मिक बल प्राप्त हुआ, वही इनके जीवन का संबल बना। सन्‌ १९२० के दिसंबर में नागपुर में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हुआ, जिसमें अनुग्रह बाबू ने भी भाग लिया। सन्‌ १९२९ के दिसंबर में सरदार पटेल ने किसान संगठन के सिलसिले में मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया, तब अनुग्रह बाबू सभी जगह उनके साथ थे। २६ जनवरी १९३० को सारे देश में स्वतंत्रता की घोषणा प़ढी गई। अनुग्रह बाबू को भी कई स्थानों में घोषण पत्र प़ढना प़ढा । कुछ दिनों के बाद महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया। उस सिलसिले में उन्हें चम्पारण, मुजफ्फरपुर आदि स्थानों का दौरा करना प़डा । २६ जनवरी, १९३३ को जब पटना में घोषणा प़ढ रहे थे, उसी समय उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें पंद्रह मास की सजा हुई और उन्हें हजारीबाग जेल भेज दिया गया। जिस समय वे जेल में थे, बिहार में इतिहास विख्यात प्रलयंकारी भूकंप आया। हृदय विदारक समाचारों को प़ढकर उनका हृदय दर्द से कराह उठा। चहारदीवारी के अंदर बंद रहने के कारण ये कोई राहत कार्य नहीं कर सकते थे। लेकिन सरकार ने तीन हफ्तों के बाद इन्हें छ़ोड दिया। छूटते ही अनुग्रह बाबू राहत कार्य में संलग्न हो गये। राजेन्द्र बाबू के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इन्होंने अथक परिश्रम के साथ पी़डत मानवता की सेवा की। मुजफ्फरपुर, मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया । इसके लिये राजेन्द्र बाबू की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी, जिसके उपाध्यक्ष अनुग्रह बाबू ही चुने गये तथा खूब लगन के साथ सेवा कार्य किया।सन्‌ १९४० को मार्च महीने में अखिल भारतीय कांग्रेस का अधिवेशन रामग़ढ में हुआ। अधिवेशन का संपूर्ण भार अनुग्रह बाबू के कंधे पर था। उसमें जो अपनी तत्परता दिखलाई उसके फलस्वरूप ही कांग्रेस का अधिवेशन सफल हुआ। देश की परिस्थिति को देखते हुए जब गांधीजी ने व्यक्तिगत सत्याग्रह अपनाया तब उनके प्रिय सहयोगी अनुग्रह बाबू कब चूकने वाले थे। फलस्वरूप १९४० को वह गिरफ्तार कर लिये गये और अगस्त १९४१ में रिहा हुए।&lt;br /&gt;
&amp;lt;br /&amp;gt;&amp;lt;blockquote&amp;gt;&amp;lt;span style=&amp;quot;color: #8f5d31&amp;quot;&amp;gt;मुझे अपने लिए चिंता नहीं है,क्योंकि मेरा समय पूरा हो गया है, किंतु देश के लिए मुझे चिंता है।’ '''बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा'''&amp;lt;/span&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
गांधीजी का ‘करो या मरो’ का नारा बुलंद हुआ। ७ अगस्त, १९४२ को गांधीजी गिरफ्तार किये गये। सारे देश में एक बार ही बिजली की तरह आंदोलन की आग फैल गई। कांग्रेस कमिटियां जब्त कर ली गई और कांग्रेस नेता जहां के तहां गिरफ्तार कर लिये गये। १० अगस्त को अनुग्रह बाबू भी जब अपने मित्रों से मिलने गये, एकाएक मार्ग में ही गिरफ्तार कर लिये गये। सन्‌ १९४४ में जब सारे कांग्रेसी नेता जेल से मुक्त किये जाने लगे, तो अनुग्रह बाबू भी कारावास की कैद से आजाद कर दिये गये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बिहार के पहले उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री==&lt;br /&gt;
१९३७ में ही बाबू साहब बिहार प्रान्त के वित्त मंत्री बने।अनुग्रह बाबू [[बिहार]] [[विधानसभा]]  में १९३७ से  लेकर १९५७ तक कांग्रेस [[विधायक]] दल के उप नेता थे। १९४६ में जब दूसरा मंत्रिमंडल बना तब वित्त और श्रम दोनों विभागों के पहले मंत्री बने और उन्होंने अपने मंत्रित्व काल में विशेषकर श्रम विभाग में अपनी न्याय प्रियता लोकतांत्रिक विचारधारा एवं श्रमिकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का जो परिचय दिया वह सराहनीय ही नहीं अनुकरणीय है। श्रम मंत्री के रूप में अनुग्रह बाबू ने ‘बिहार केन्द्रीय श्रम परामर्श समिति’ के माध्यम से श्रम प्रशासन तथा श्रमिक समस्याआें के समाधान के लिए जो नियम एवं प्रावधान बनाये वे आज पूरे देश के लिये मापदंड के रूप में काम करते हैं। तृतीय मंत्रिमंडल में उन्हें खाद, बीज, मिट्‌टी, मवेशी में सुधार लाने के लिए शोध कार्य करवाए और पहली बार जापानी ढंग से धान उपजाने की पद्धति का प्रचार कराया। पूसा का कृषि अनुसंधान फार्म उनकी ही देन है। इस तेजस्वी महापुरुष का निधन ५ जुलाई, १९५७ को उनके निवास स्थान [[पटना]] मे बीमारी के कारण हुआ। उनके सम्मान मे तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया, उनके अन्तिम संस्कार में विशाल जनसमूह उपस्थित था।अनुग्रह बाबू  [[२ जनवरी]], [[१९४६]] से अपनी मृत्यु तक बिहार के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  रहे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==संदर्भ==&lt;br /&gt;
{{reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/database/biographies/anugrah_narayan_sinha.htm अनुग्रह बाबू की जीवनी]&lt;br /&gt;
*[http://books.google.co.in/books?id=kmZV1ALVaCYC&amp;amp;pg=PT403&amp;amp;lpg=PT403&amp;amp;dq=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9+%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;source=bl&amp;amp;ots=BrT6nN3s6g&amp;amp;sig=AQGM4ELFM1mxpiXuSV_kVCFd_Fs&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ei=yaZmS5DaJsWVtgenqvS2Bg&amp;amp;sa=X&amp;amp;oi=book_result&amp;amp;ct=result&amp;amp;resnum=2&amp;amp;ved=0CAkQ6AEwATge#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%20%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;f=false बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:z7Qyx0yJNJ4J:in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html+/search%3Fhl%3Dhi%26q%3D%2Bsite:in.jagran.yahoo.com%2B%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2597%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25B9%2B%25E0%25A4%25AC%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%2582&amp;amp;cd=5&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in आधुनिक भारत के निर्माता थे अनुग्रह बाबू : राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_4561311.html लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी थे डा अनुग्रह बाबू ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html अनुग्रह बाबू के जीवन से सीख लेने की जरूरत है-राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/kalranga/freedom/congress/c127.htm बिहार के स्वतंत्रता सेनानी]&lt;br /&gt;
*[http://www.aicc.org.in/satyagraha_laboratories_of_mahatma_gandhi.htm महात्मा गाँधी की सत्याग्रह प्रयोगशाला]&lt;br /&gt;
*[http://loksabha.nic.in/ लोकसभा का जालस्थल]&lt;br /&gt;
*[http://www.mkgandhi.org/jpnarayan/total_revolution.htm सम्पूर्ण क्रांति]&lt;br /&gt;
*[http://www.snsibm.com/ अनुग्रह नारायण सिन्हा व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, राँची]&lt;br /&gt;
*[http://www.ancollege.org/ अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय, पटना]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता_सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार_का_इतिहास]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9_%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=173603</id>
		<title>अनुग्रह नारायण सिंह</title>
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		<updated>2011-06-19T06:51:24Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=BiharVibhuti Dr Anugrah Narayan Sinha.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=अनुग्रह नारायण सिंह&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=अनुग्रह बाबू&lt;br /&gt;
|जन्म=[[18 जून ]],[[1887]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[बिहार]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[पटना]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]&lt;br /&gt;
|पद=[[बिहार]] के प्रथम उप [[मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिन्दी]],[[अंग्रेज़ी]] &lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=[[2 जनवरी]], [[1946]] से 05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|विद्यालय=[[कलकत्ता विश्वविद्यालय]], प्रेसीडेंसी कॉलेज (कलकत्ता)&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री और डॉक्टरेट&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=बिहार विभूति&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=भारत की स्वतन्त्रता, अहिंसक आन्दोलन, सत्याग्रह&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=[[असहयोग आंदोलन]], [[नमक सत्याग्रह]] आदि&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=रचनाऐं-मेरे संस्मरण:आत्मकथा&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
डा '''अनुग्रह नारायण सिंह''' एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता और [[बिहार]] के पहले उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री (१९४६- १९५७) थे। अनुग्रह बाबू (1887-१९५७) [[भारत]] के [[स्वतंत्रता सेनानी]], शिक्षक तथा राजनीतिज्ञ रहे हैं। लोकप्रियता के कारण उन्हें '''बिहार विभूति''' के रूप में जाना जाता था।वह स्वाधीनता आंदोलन के महान योद्धा थे।स्वाधीनता के बाद राष्ट्र निर्माण व जनकल्याण के कार्यो में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==आधुनिक बिहार के निर्माता==&lt;br /&gt;
[[बिहार]] के विकास में डा अनुग्रह नारायण सिन्हा का योगदान अतुलनीय है। बिहार के प्रशासनिक ढांचा को तैयार करना का काम अनुग्रह बाबू  ने किया था।प्रभावशाली पद पर होने के बावजूद उन्होंने अपना पूरा जीवन सादगी से बिताया। उनके कार्यकाल में [[बिहार]] में उद्योग -धंधे का जाल बिछा। अनुग्रह बाबू ने राज्य के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  के रूप मे ११ वर्षो तक बिहार की अनवरत सेवा की।अनुग्रह नारायण सिंह घोर मानवतावादी प्रगतिशील विचारक एवं दलितों के उत्थान के प्रबल समर्थक और आधुनिक भारत के निर्माताआें में से एक थे। उनका जीवन दर्शन देश की अखंडतास्वतंत्रता और नवनिर्माण की भावनाआ से शराबोर रहा है। उनका सौभ्य, स्निग्ध, शीतल, परोपकारी, अहंकारहीन और दर्पोदीप्त शख्सियत बिहार के जनगणमन पर अधिकार किए हुए था|वे शरीर से दुर्बल, कृषकाय थे, पर इस अर्थ में महाप्राण कोई संकट उनके ओठों की मुस्कुराहट नहीं छीन सका। उनमें शक्ति और शील एकाकार हो गये थे और इसीलिए वे बुद्धिजीवियों को विशेष प्रिय थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रारंभिक जीवन==&lt;br /&gt;
अनुग्रह बाबू का जन्म औरंगाबाद जिले के पोईअवा नामक गांव में १८ जून १८८७ को हुआ । उनके पिता ठाकुर विशेश्वर दयाल सिंह जी अपने इलाके के एक वीर पुरुष थे। पांच बसंत जब वे पार कर गये तो उनकी शिक्षा का श्रीगणेश हुआ। सन्‌ १९०० में औरंगाबाद मिडिल स्कूल,१९०४ में गया जिला स्कूल और १९०८ में पटना कॉलेज में प्रविष्ट हुए। जिस समय ये पटना कॉलेज में आये उस समय देश के शिक्षित व्यक्तियों के हृदय में परतंत्रता की वेदना का अनुभव होने लगा था। गुलामी की जंजीर में जक़डी हुई मानवता का चित्कार अब उन्हें सुनायी प़डने लगा था। वे उस जंजीर को त़ोड फेंकने के लिए व्याकुल होने लगे थे। सुरेन्द्रनाथ बनर्जी तथा योगिराज अरविंद ऐसे महान आत्माआे का प्रादुर्भाव हो चुका था । इन महान आत्माआ के कार्य कलापों तथा व्याख्यानों का समुचित प्रभाव अनुग्रह बाबू के हृदय पर प़डा। उनका हृदय भी भारतमाता की सेवा के लिए त़डप उठा और वे उस पावन मार्ग पर अग्रसर हो गये। सर्फूद्दीन के नेतृत्व में ‘बिहारी छात्र सम्मेलन’ नामक संस्था संगठित की गई, जिसमें देशरत्न डॉ राजेन्द्र बाबू ऐसे मेधावी छात्रों को कार्य करने तथा नेतृत्व करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन==&lt;br /&gt;
{{बाँयाबक्सा|पाठ=&amp;quot;मेरा परिचय अनुग्रह बाबू से बिहारी छात्र सम्मेलन में ही पहले पहल हुआ था।मैं उनकी संगठन शक्ति और हाथ में आए हुए काया] में उत्साह देखकर मुग्ध हो गया और वह भावना समय बीतने से कम न होकर अधिक गहरी होती गई।&amp;quot;- ''' देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद'''|विचारक=}}इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध [[चम्पारण]] से अपना सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था।अनुग्रह बाबू के हृदय में सेवा की उच्च भावना तो बाल्यकाल से ही था, उसे कार्य रूप में परिणत करने तथा उसे पूर्ण रूप से विकसित करने का सुअवसर भी उन्हें इस संगठन में प्रविष्ट होने पर मिल गया। सन्‌ १९१० में आई ए की परीक्षा भी उन्होंने प्रथम श्रेणी में पास की फिर बीए में प्रवेश किया। उसी वर्ष महामना पोलक साहब जो महात्मा गांधी के सहकर्मी थे, पटना पधारे, अफ्रीका के प्रवासी भारतीयों के बारे में जो उनका व्याख्यान हुआ। उससे अनुग्रह बाबू बहुत प्रभावित हुए। उसी वर्ष प्रयाग में अखिल भारतीय कांग्रेस अधिवेशन हुआ, जिसमें वे अपनी उत्साही सहपाठियों के साथ गये। उस अधिवेशन में महामना गोखले आदि विद्वान राष्ट्रभक्तों के भाषणों को सुनने का स्वर्ण अवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ, जिससे वे ब़डे प्रभावित हुए।अनुग्रह बाबू विद्यार्थी जीवन में ही संगठनशक्ति तथा कार्य संचालन की काबिलियत हासिल कर ली थी। सन्‌ १९१४ में इतिहास से एमए करने के बाद १९१५ में बी एल की परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की। भागलपुर के तेजनारायण जुविल कॉलेज में इतिहास के एक प्रोफेसर की आवश्यकता हुई। अपने साथियों के परामर्श करने के पश्चात तुरंत उन्होंने अपना आवेदन पत्र भेज दिया और उस पद पर उनकी नियुक्ति हो गई। वर्ष १९१६ में उन्होंने कॉलेज की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और पटना हाईकोर्ट में वकालत प्रारंभ कर दी। वकालत के सिलसिले में सरलता की मूर्ति देशरत्न राजेन्द्र बाबू के संसर्ग में अधिक रहने का सुअवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ और उनसे पेशे को उन्नत करने की प्रेरणा भी मिली। कलकत्ते में भी उन्हें राजेन्द्र बाबू के सम्पर्क में रहने का स्वर्ण अवसर मिला था। जिस समय राजेन्द्र बाबू लॉ कॉलेज में अध्यापक थे, उसी समय उसी कॉलेज में वे एक विद्यार्थी थे। इसलिये वे राजेन्द्र बाबू की प्रतिष्ठा किया करते थे। उन्होंने [[महात्मा गांधी]] एवं डा. [[राजेन्द्र प्रसाद]] के साथ राष्ट्रीय आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== गांधीजी का सत्याग्रह==&lt;br /&gt;
उन्हें वकालत करते हुए अभी एक वर्ष भी नहीं बीता था कि चम्पारण में नील आंदोलन उठ ख़डा हुआ । इस आंदोलन ने उनके जीवन की धारा ही बदल दी। चम्पारण के किसानों की तबाही का समाचार जब [[महात्मा गांधी]] से सुने तो वे करुणा से विचलित हो उठे। मुजफ्फरपुर के कमिश्नर की राय के विरुद्ध गांधीजी चम्पारण गये और जांच कार्य प्रारंभ कर दिया।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Champaran Satyagraha.jpg|thumb|220px|चंपारण सत्याग्रह आंदोलन के दौरान डॉ. [[राजेन्द्र प्रसाद]] और अनुग्रह नारायण सिन्हा]] अत्याचारों की जांच प्रारंभ हुई । इसमें कुछ ऐसे वकीलों की आवश्यकता थी, जो निर्भीकता पूर्वक कार्य कर सकें और समय आने पर जेल जाने के लिए भी तैयार रहें। इस विकट कार्य के लिए वृज किशोर बाबू के प्रोत्साहन पर राजेन्द्र बाबू के साथ ही अनुग्रह बाबू भी तत्पर हो गये। उन्होंने इसकी तनिक भी चिंता नहीं की कि उनका पेशा नया है और उन्हें भारी क्षति उठानी प़ड सकती है। एक बार जो त्याग के मार्ग पर आगे ब़ढ चुका है, उसे भला इन तुच्छ चीजों का क्या भय हो सकता है। चम्पारण का किसान आंदोलन ४५ महीनों तक जोरशोर से चलता रहा। अनुग्रह बाबू बराबर उसमें काम करते रहे और आखिर तक डटे रहे । स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का पाठ उन्हें गांधीजी के आश्रम में ही रहकर प़ढने का सुअवसर प्राप्त हुआ। अनुग्रह बाबू ने चम्पारण के नील आंदोलन में गांधीजी के साथ लगन और निर्भीकता के साथ काम किया और आंदोलन को सफल बनाकर उनके आदेशानुसार १९१७ में पटना आये। बापू के साथ रहने से उन्हें जो आत्मिक बल प्राप्त हुआ, वही इनके जीवन का संबल बना। सन्‌ १९२० के दिसंबर में नागपुर में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हुआ, जिसमें अनुग्रह बाबू ने भी भाग लिया। सन्‌ १९२९ के दिसंबर में सरदार पटेल ने किसान संगठन के सिलसिले में मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया, तब अनुग्रह बाबू सभी जगह उनके साथ थे। २६ जनवरी १९३० को सारे देश में स्वतंत्रता की घोषणा प़ढी गई। अनुग्रह बाबू को भी कई स्थानों में घोषण पत्र प़ढना प़ढा । कुछ दिनों के बाद महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया। उस सिलसिले में उन्हें चम्पारण, मुजफ्फरपुर आदि स्थानों का दौरा करना प़डा । २६ जनवरी, १९३३ को जब पटना में घोषणा प़ढ रहे थे, उसी समय उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें पंद्रह मास की सजा हुई और उन्हें हजारीबाग जेल भेज दिया गया। जिस समय वे जेल में थे, बिहार में इतिहास विख्यात प्रलयंकारी भूकंप आया। हृदय विदारक समाचारों को प़ढकर उनका हृदय दर्द से कराह उठा। चहारदीवारी के अंदर बंद रहने के कारण ये कोई राहत कार्य नहीं कर सकते थे। लेकिन सरकार ने तीन हफ्तों के बाद इन्हें छ़ोड दिया। छूटते ही अनुग्रह बाबू राहत कार्य में संलग्न हो गये। राजेन्द्र बाबू के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इन्होंने अथक परिश्रम के साथ पी़डत मानवता की सेवा की। मुजफ्फरपुर, मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया । इसके लिये राजेन्द्र बाबू की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी, जिसके उपाध्यक्ष अनुग्रह बाबू ही चुने गये तथा खूब लगन के साथ सेवा कार्य किया।सन्‌ १९४० को मार्च महीने में अखिल भारतीय कांग्रेस का अधिवेशन रामग़ढ में हुआ। अधिवेशन का संपूर्ण भार अनुग्रह बाबू के कंधे पर था। उसमें जो अपनी तत्परता दिखलाई उसके फलस्वरूप ही कांग्रेस का अधिवेशन सफल हुआ। देश की परिस्थिति को देखते हुए जब गांधीजी ने व्यक्तिगत सत्याग्रह अपनाया तब उनके प्रिय सहयोगी अनुग्रह बाबू कब चूकने वाले थे। फलस्वरूप १९४० को वह गिरफ्तार कर लिये गये और अगस्त १९४१ में रिहा हुए। गांधीजी का ‘करो या मरो’ का नारा बुलंद हुआ। ७ अगस्त, १९४२ को गांधीजी गिरफ्तार किये गये। सारे देश में एक बार ही बिजली की तरह आंदोलन की आग फैल गई। कांग्रेस कमिटियां जब्त कर ली गई और कांग्रेस नेता जहां के तहां गिरफ्तार कर लिये गये। १० अगस्त को अनुग्रह बाबू भी जब अपने मित्रों से मिलने गये, एकाएक मार्ग में ही गिरफ्तार कर लिये गये। सन्‌ १९४४ में जब सारे कांग्रेसी नेता जेल से मुक्त किये जाने लगे, तो अनुग्रह बाबू भी कारावास की कैद से आजाद कर दिये गये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बिहार के पहले उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री==&lt;br /&gt;
१९३७ में ही बाबू साहब बिहार प्रान्त के वित्त मंत्री बने।अनुग्रह बाबू [[बिहार]] [[विधानसभा]]  में १९३७ से  लेकर १९५७ तक कांग्रेस [[विधायक]] दल के उप नेता थे। १९४६ में जब दूसरा मंत्रिमंडल बना तब वित्त और श्रम दोनों विभागों के पहले मंत्री बने और उन्होंने अपने मंत्रित्व काल में विशेषकर श्रम विभाग में अपनी न्याय प्रियता लोकतांत्रिक विचारधारा एवं श्रमिकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का जो परिचय दिया वह सराहनीय ही नहीं अनुकरणीय है। श्रम मंत्री के रूप में अनुग्रह बाबू ने ‘बिहार केन्द्रीय श्रम परामर्श समिति’ के माध्यम से श्रम प्रशासन तथा श्रमिक समस्याआें के समाधान के लिए जो नियम एवं प्रावधान बनाये वे आज पूरे देश के लिये मापदंड के रूप में काम करते हैं। तृतीय मंत्रिमंडल में उन्हें खाद, बीज, मिट्‌टी, मवेशी में सुधार लाने के लिए शोध कार्य करवाए और पहली बार जापानी ढंग से धान उपजाने की पद्धति का प्रचार कराया। पूसा का कृषि अनुसंधान फार्म उनकी ही देन है। इस तेजस्वी महापुरुष का निधन ५ जुलाई, १९५७ को उनके निवास स्थान [[पटना]] मे बीमारी के कारण हुआ। उनके सम्मान मे तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया, उनके अन्तिम संस्कार में विशाल जनसमूह उपस्थित था।अनुग्रह बाबू  [[२ जनवरी]], [[१९४६]] से अपनी मृत्यु तक बिहार के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  रहे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==संदर्भ==&lt;br /&gt;
{{reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/database/biographies/anugrah_narayan_sinha.htm अनुग्रह बाबू की जीवनी]&lt;br /&gt;
*[http://books.google.co.in/books?id=kmZV1ALVaCYC&amp;amp;pg=PT403&amp;amp;lpg=PT403&amp;amp;dq=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9+%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;source=bl&amp;amp;ots=BrT6nN3s6g&amp;amp;sig=AQGM4ELFM1mxpiXuSV_kVCFd_Fs&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ei=yaZmS5DaJsWVtgenqvS2Bg&amp;amp;sa=X&amp;amp;oi=book_result&amp;amp;ct=result&amp;amp;resnum=2&amp;amp;ved=0CAkQ6AEwATge#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%20%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;f=false बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:z7Qyx0yJNJ4J:in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html+/search%3Fhl%3Dhi%26q%3D%2Bsite:in.jagran.yahoo.com%2B%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2597%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25B9%2B%25E0%25A4%25AC%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%2582&amp;amp;cd=5&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in आधुनिक भारत के निर्माता थे अनुग्रह बाबू : राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_4561311.html लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी थे डा अनुग्रह बाबू ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html अनुग्रह बाबू के जीवन से सीख लेने की जरूरत है-राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/kalranga/freedom/congress/c127.htm बिहार के स्वतंत्रता सेनानी]&lt;br /&gt;
*[http://www.aicc.org.in/satyagraha_laboratories_of_mahatma_gandhi.htm महात्मा गाँधी की सत्याग्रह प्रयोगशाला]&lt;br /&gt;
*[http://loksabha.nic.in/ लोकसभा का जालस्थल]&lt;br /&gt;
*[http://www.mkgandhi.org/jpnarayan/total_revolution.htm सम्पूर्ण क्रांति]&lt;br /&gt;
*[http://www.snsibm.com/ अनुग्रह नारायण सिन्हा व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, राँची]&lt;br /&gt;
*[http://www.ancollege.org/ अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय, पटना]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता_सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार_का_इतिहास]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9_%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=173602</id>
		<title>अनुग्रह नारायण सिंह</title>
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		<updated>2011-06-19T06:47:26Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=BiharVibhuti Dr Anugrah Narayan Sinha.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=अनुग्रह नारायण सिंह&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=अनुग्रह बाबू&lt;br /&gt;
|जन्म=[[18 जून ]],[[1887]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[बिहार]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[पटना]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]&lt;br /&gt;
|पद=[[बिहार]] के प्रथम उप [[मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिन्दी]],[[अंग्रेज़ी]] &lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=[[2 जनवरी]], [[1946]] से 05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|विद्यालय=[[कलकत्ता विश्वविद्यालय]], प्रेसीडेंसी कॉलेज (कलकत्ता)&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री और डॉक्टरेट&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=बिहार विभूति&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=भारत की स्वतन्त्रता, अहिंसक आन्दोलन, सत्याग्रह&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=[[असहयोग आंदोलन]], [[नमक सत्याग्रह]] आदि&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=रचनाऐं-मेरे संस्मरण:आत्मकथा&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
डा '''अनुग्रह नारायण सिंह''' एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता और [[बिहार]] के पहले उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री (1946-1957) थे। अनुग्रह बाबू (1887-1957) [[भारत]] के [[स्वतंत्रता सेनानी]], शिक्षक तथा राजनीतिज्ञ रहे हैं। लोकप्रियता के कारण उन्हें '''बिहार विभूति''' के रूप में जाना जाता था।वह स्वाधीनता आंदोलन के महान योद्धा थे।स्वाधीनता के बाद राष्ट्र निर्माण व जनकल्याण के कार्यो में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया। अनुग्रह बाबू का निधन उनके निवास स्थान [[पटना]] मे बीमारी के कारण हुआ। उनके सम्मान मे तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया, उनके अन्तिम संस्कार में विशाल जनसमूह उपस्थित था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==आधुनिक बिहार के निर्माता==&lt;br /&gt;
[[बिहार]] के विकास में डा अनुग्रह नारायण सिन्हा का योगदान अतुलनीय है। बिहार के प्रशासनिक ढांचा को तैयार करना का काम अनुग्रह बाबू  ने किया था।प्रभावशाली पद पर होने के बावजूद उन्होंने अपना पूरा जीवन सादगी से बिताया। उनके कार्यकाल में [[बिहार]] में उद्योग -धंधे का जाल बिछा। अनुग्रह बाबू ने राज्य के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  के रूप मे 13 वर्षो तक बिहार की अनवरत सेवा की।अनुग्रह नारायण सिंह घोर मानवतावादी प्रगतिशील विचारक एवं दलितों के उत्थान के प्रबल समर्थक और आधुनिक भारत के निर्माताआें में से एक थे। उनका जीवन दर्शन देश की अखंडतास्वतंत्रता और नवनिर्माण की भावनाआ से शराबोर रहा है। उनका सौभ्य, स्निग्ध, शीतल, परोपकारी, अहंकारहीन और दर्पोदीप्त शख्सियत बिहार के जनगणमन पर अधिकार किए हुए था|वे शरीर से दुर्बल, कृषकाय थे, पर इस अर्थ में महाप्राण कोई संकट उनके ओठों की मुस्कुराहट नहीं छीन सका। उनमें शक्ति और शील एकाकार हो गये थे और इसीलिए वे बुद्धिजीवियों को विशेष प्रिय थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रारंभिक जीवन==&lt;br /&gt;
अनुग्रह बाबू का जन्म औरंगाबाद जिले के पोईअवा नामक गांव में १८ जून १८८७ को हुआ । उनके पिता ठाकुर विशेश्वर दयाल सिंह जी अपने इलाके के एक वीर पुरुष थे। पांच बसंत जब वे पार कर गये तो उनकी शिक्षा का श्रीगणेश हुआ। सन्‌ १९०० में औरंगाबाद मिडिल स्कूल,१९०४ में गया जिला स्कूल और १९०८ में पटना कॉलेज में प्रविष्ट हुए। जिस समय ये पटना कॉलेज में आये उस समय देश के शिक्षित व्यक्तियों के हृदय में परतंत्रता की वेदना का अनुभव होने लगा था। गुलामी की जंजीर में जक़डी हुई मानवता का चित्कार अब उन्हें सुनायी प़डने लगा था। वे उस जंजीर को त़ोड फेंकने के लिए व्याकुल होने लगे थे। सुरेन्द्रनाथ बनर्जी तथा योगिराज अरविंद ऐसे महान आत्माआे का प्रादुर्भाव हो चुका था । इन महान आत्माआ के कार्य कलापों तथा व्याख्यानों का समुचित प्रभाव अनुग्रह बाबू के हृदय पर प़डा। उनका हृदय भी भारतमाता की सेवा के लिए त़डप उठा और वे उस पावन मार्ग पर अग्रसर हो गये। सर्फूद्दीन के नेतृत्व में ‘बिहारी छात्र सम्मेलन’ नामक संस्था संगठित की गई, जिसमें देशरत्न डॉ राजेन्द्र बाबू ऐसे मेधावी छात्रों को कार्य करने तथा नेतृत्व करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन==&lt;br /&gt;
{{बाँयाबक्सा|पाठ=&amp;quot;मेरा परिचय अनुग्रह बाबू से बिहारी छात्र सम्मेलन में ही पहले पहल हुआ था।मैं उनकी संगठन शक्ति और हाथ में आए हुए काया] में उत्साह देखकर मुग्ध हो गया और वह भावना समय बीतने से कम न होकर अधिक गहरी होती गई।&amp;quot;- ''' देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद'''|विचारक=}}इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध [[चम्पारण]] से अपना सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था।अनुग्रह बाबू के हृदय में सेवा की उच्च भावना तो बाल्यकाल से ही था, उसे कार्य रूप में परिणत करने तथा उसे पूर्ण रूप से विकसित करने का सुअवसर भी उन्हें इस संगठन में प्रविष्ट होने पर मिल गया। सन्‌ १९१० में आई ए की परीक्षा भी उन्होंने प्रथम श्रेणी में पास की फिर बीए में प्रवेश किया। उसी वर्ष महामना पोलक साहब जो महात्मा गांधी के सहकर्मी थे, पटना पधारे, अफ्रीका के प्रवासी भारतीयों के बारे में जो उनका व्याख्यान हुआ। उससे अनुग्रह बाबू बहुत प्रभावित हुए। उसी वर्ष प्रयाग में अखिल भारतीय कांग्रेस अधिवेशन हुआ, जिसमें वे अपनी उत्साही सहपाठियों के साथ गये। उस अधिवेशन में महामना गोखले आदि विद्वान राष्ट्रभक्तों के भाषणों को सुनने का स्वर्ण अवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ, जिससे वे ब़डे प्रभावित हुए।अनुग्रह बाबू विद्यार्थी जीवन में ही संगठनशक्ति तथा कार्य संचालन की काबिलियत हासिल कर ली थी। सन्‌ १९१४ में इतिहास से एमए करने के बाद १९१५ में बी एल की परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की। भागलपुर के तेजनारायण जुविल कॉलेज में इतिहास के एक प्रोफेसर की आवश्यकता हुई। अपने साथियों के परामर्श करने के पश्चात तुरंत उन्होंने अपना आवेदन पत्र भेज दिया और उस पद पर उनकी नियुक्ति हो गई। वर्ष १९१६ में उन्होंने कॉलेज की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और पटना हाईकोर्ट में वकालत प्रारंभ कर दी। वकालत के सिलसिले में सरलता की मूर्ति देशरत्न राजेन्द्र बाबू के संसर्ग में अधिक रहने का सुअवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ और उनसे पेशे को उन्नत करने की प्रेरणा भी मिली। कलकत्ते में भी उन्हें राजेन्द्र बाबू के सम्पर्क में रहने का स्वर्ण अवसर मिला था। जिस समय राजेन्द्र बाबू लॉ कॉलेज में अध्यापक थे, उसी समय उसी कॉलेज में वे एक विद्यार्थी थे। इसलिये वे राजेन्द्र बाबू की प्रतिष्ठा किया करते थे। उन्होंने [[महात्मा गांधी]] एवं डा. [[राजेन्द्र प्रसाद]] के साथ राष्ट्रीय आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== गांधीजी का सत्याग्रह==&lt;br /&gt;
उन्हें वकालत करते हुए अभी एक वर्ष भी नहीं बीता था कि चम्पारण में नील आंदोलन उठ ख़डा हुआ । इस आंदोलन ने उनके जीवन की धारा ही बदल दी। चम्पारण के किसानों की तबाही का समाचार जब [[महात्मा गांधी]] से सुने तो वे करुणा से विचलित हो उठे। मुजफ्फरपुर के कमिश्नर की राय के विरुद्ध गांधीजी चम्पारण गये और जांच कार्य प्रारंभ कर दिया।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Champaran Satyagraha.jpg|thumb|220px|चंपारण सत्याग्रह आंदोलन के दौरान डॉ. [[राजेन्द्र प्रसाद]] और अनुग्रह नारायण सिन्हा]] अत्याचारों की जांच प्रारंभ हुई । इसमें कुछ ऐसे वकीलों की आवश्यकता थी, जो निर्भीकता पूर्वक कार्य कर सकें और समय आने पर जेल जाने के लिए भी तैयार रहें। इस विकट कार्य के लिए वृज किशोर बाबू के प्रोत्साहन पर राजेन्द्र बाबू के साथ ही अनुग्रह बाबू भी तत्पर हो गये। उन्होंने इसकी तनिक भी चिंता नहीं की कि उनका पेशा नया है और उन्हें भारी क्षति उठानी प़ड सकती है। एक बार जो त्याग के मार्ग पर आगे ब़ढ चुका है, उसे भला इन तुच्छ चीजों का क्या भय हो सकता है। चम्पारण का किसान आंदोलन ४५ महीनों तक जोरशोर से चलता रहा। अनुग्रह बाबू बराबर उसमें काम करते रहे और आखिर तक डटे रहे । स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का पाठ उन्हें गांधीजी के आश्रम में ही रहकर प़ढने का सुअवसर प्राप्त हुआ। अनुग्रह बाबू ने चम्पारण के नील आंदोलन में गांधीजी के साथ लगन और निर्भीकता के साथ काम किया और आंदोलन को सफल बनाकर उनके आदेशानुसार १९१७ में पटना आये। बापू के साथ रहने से उन्हें जो आत्मिक बल प्राप्त हुआ, वही इनके जीवन का संबल बना। सन्‌ १९२० के दिसंबर में नागपुर में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हुआ, जिसमें अनुग्रह बाबू ने भी भाग लिया। सन्‌ १९२९ के दिसंबर में सरदार पटेल ने किसान संगठन के सिलसिले में मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया, तब अनुग्रह बाबू सभी जगह उनके साथ थे। २६ जनवरी १९३० को सारे देश में स्वतंत्रता की घोषणा प़ढी गई। अनुग्रह बाबू को भी कई स्थानों में घोषण पत्र प़ढना प़ढा । कुछ दिनों के बाद महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया। उस सिलसिले में उन्हें चम्पारण, मुजफ्फरपुर आदि स्थानों का दौरा करना प़डा । २६ जनवरी, १९३३ को जब पटना में घोषणा प़ढ रहे थे, उसी समय उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें पंद्रह मास की सजा हुई और उन्हें हजारीबाग जेल भेज दिया गया। जिस समय वे जेल में थे, बिहार में इतिहास विख्यात प्रलयंकारी भूकंप आया। हृदय विदारक समाचारों को प़ढकर उनका हृदय दर्द से कराह उठा। चहारदीवारी के अंदर बंद रहने के कारण ये कोई राहत कार्य नहीं कर सकते थे। लेकिन सरकार ने तीन हफ्तों के बाद इन्हें छ़ोड दिया। छूटते ही अनुग्रह बाबू राहत कार्य में संलग्न हो गये। राजेन्द्र बाबू के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इन्होंने अथक परिश्रम के साथ पी़डत मानवता की सेवा की। मुजफ्फरपुर, मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया । इसके लिये राजेन्द्र बाबू की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी, जिसके उपाध्यक्ष अनुग्रह बाबू ही चुने गये तथा खूब लगन के साथ सेवा कार्य किया।सन्‌ १९४० को मार्च महीने में अखिल भारतीय कांग्रेस का अधिवेशन रामग़ढ में हुआ। अधिवेशन का संपूर्ण भार अनुग्रह बाबू के कंधे पर था। उसमें जो अपनी तत्परता दिखलाई उसके फलस्वरूप ही कांग्रेस का अधिवेशन सफल हुआ। देश की परिस्थिति को देखते हुए जब गांधीजी ने व्यक्तिगत सत्याग्रह अपनाया तब उनके प्रिय सहयोगी अनुग्रह बाबू कब चूकने वाले थे। फलस्वरूप १९४० को वह गिरफ्तार कर लिये गये और अगस्त १९४१ में रिहा हुए। गांधीजी का ‘करो या मरो’ का नारा बुलंद हुआ। ७ अगस्त, १९४२ को गांधीजी गिरफ्तार किये गये। सारे देश में एक बार ही बिजली की तरह आंदोलन की आग फैल गई। कांग्रेस कमिटियां जब्त कर ली गई और कांग्रेस नेता जहां के तहां गिरफ्तार कर लिये गये। १० अगस्त को अनुग्रह बाबू भी जब अपने मित्रों से मिलने गये, एकाएक मार्ग में ही गिरफ्तार कर लिये गये। सन्‌ १९४४ में जब सारे कांग्रेसी नेता जेल से मुक्त किये जाने लगे, तो अनुग्रह बाबू भी कारावास की कैद से आजाद कर दिये गये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बिहार के पहले उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री==&lt;br /&gt;
१९३७ में ही बाबू साहब बिहार प्रान्त के वित्त मंत्री बने।अनुग्रह बाबू [[बिहार]] [[विधानसभा]]  में १९३७ से  लेकर १९५७ तक कांग्रेस [[विधायक]] दल के उप नेता थे। १९४६ में जब दूसरा मंत्रिमंडल बना तब वित्त और श्रम दोनों विभागों के पहले मंत्री बने और उन्होंने अपने मंत्रित्व काल में विशेषकर श्रम विभाग में अपनी न्याय प्रियता लोकतांत्रिक विचारधारा एवं श्रमिकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का जो परिचय दिया वह सराहनीय ही नहीं अनुकरणीय है। श्रम मंत्री के रूप में अनुग्रह बाबू ने ‘बिहार केन्द्रीय श्रम परामर्श समिति’ के माध्यम से श्रम प्रशासन तथा श्रमिक समस्याआें के समाधान के लिए जो नियम एवं प्रावधान बनाये वे आज पूरे देश के लिये मापदंड के रूप में काम करते हैं। तृतीय मंत्रिमंडल में उन्हें खाद, बीज, मिट्‌टी, मवेशी में सुधार लाने के लिए शोध कार्य करवाए और पहली बार जापानी ढंग से धान उपजाने की पद्धति का प्रचार कराया। पूसा का कृषि अनुसंधान फार्म उनकी ही देन है। इस तेजस्वी महापुरुष का निधन ५ जुलाई, १९५७ को हुआ।अनुग्रह बाबू  [[२ जनवरी]], [[१९४६]] से अपनी मृत्यु तक बिहार के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  रहे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==संदर्भ==&lt;br /&gt;
{{reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/database/biographies/anugrah_narayan_sinha.htm अनुग्रह बाबू की जीवनी]&lt;br /&gt;
*[http://books.google.co.in/books?id=kmZV1ALVaCYC&amp;amp;pg=PT403&amp;amp;lpg=PT403&amp;amp;dq=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9+%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;source=bl&amp;amp;ots=BrT6nN3s6g&amp;amp;sig=AQGM4ELFM1mxpiXuSV_kVCFd_Fs&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ei=yaZmS5DaJsWVtgenqvS2Bg&amp;amp;sa=X&amp;amp;oi=book_result&amp;amp;ct=result&amp;amp;resnum=2&amp;amp;ved=0CAkQ6AEwATge#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%20%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;f=false बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:z7Qyx0yJNJ4J:in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html+/search%3Fhl%3Dhi%26q%3D%2Bsite:in.jagran.yahoo.com%2B%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2597%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25B9%2B%25E0%25A4%25AC%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%2582&amp;amp;cd=5&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in आधुनिक भारत के निर्माता थे अनुग्रह बाबू : राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_4561311.html लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी थे डा अनुग्रह बाबू ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html अनुग्रह बाबू के जीवन से सीख लेने की जरूरत है-राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/kalranga/freedom/congress/c127.htm बिहार के स्वतंत्रता सेनानी]&lt;br /&gt;
*[http://www.aicc.org.in/satyagraha_laboratories_of_mahatma_gandhi.htm महात्मा गाँधी की सत्याग्रह प्रयोगशाला]&lt;br /&gt;
*[http://loksabha.nic.in/ लोकसभा का जालस्थल]&lt;br /&gt;
*[http://www.mkgandhi.org/jpnarayan/total_revolution.htm सम्पूर्ण क्रांति]&lt;br /&gt;
*[http://www.snsibm.com/ अनुग्रह नारायण सिन्हा व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, राँची]&lt;br /&gt;
*[http://www.ancollege.org/ अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय, पटना]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता_सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार_का_इतिहास]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<title>अनुग्रह नारायण सिंह</title>
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		<updated>2011-06-19T06:41:36Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=BiharVibhuti Dr Anugrah Narayan Sinha.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=अनुग्रह नारायण सिंह&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=अनुग्रह बाबू&lt;br /&gt;
|जन्म=[[18 जून ]],[[1887]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[बिहार]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[पटना]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]&lt;br /&gt;
|पद=[[बिहार]] के प्रथम उप [[मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिन्दी]],[[अंग्रेज़ी]] &lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=[[2 जनवरी]], [[1946]] से 05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|विद्यालय=[[कलकत्ता विश्वविद्यालय]], प्रेसीडेंसी कॉलेज (कलकत्ता)&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री और डॉक्टरेट&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=बिहार विभूति&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=भारत की स्वतन्त्रता, अहिंसक आन्दोलन, सत्याग्रह&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=[[असहयोग आंदोलन]], [[नमक सत्याग्रह]] आदि&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=रचनाऐं-मेरे संस्मरण:आत्मकथा&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
डा '''अनुग्रह नारायण सिंह''' एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता और [[बिहार]] के पहले उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री (1946-1957) थे। अनुग्रह बाबू (1887-1957) [[भारत]] के [[स्वतंत्रता सेनानी]], शिक्षक तथा राजनीतिज्ञ रहे हैं। लोकप्रियता के कारण उन्हें '''बिहार विभूति''' के रूप में जाना जाता था।वह स्वाधीनता आंदोलन के महान योद्धा थे।स्वाधीनता के बाद राष्ट्र निर्माण व जनकल्याण के कार्यो में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया। अनुग्रह बाबू का निधन उनके निवास स्थान [[पटना]] मे बीमारी के कारण हुआ। उनके सम्मान मे तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया, उनके अन्तिम संस्कार में विशाल जनसमूह उपस्थित था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==आधुनिक बिहार के निर्माता==&lt;br /&gt;
[[बिहार]] के विकास में डा अनुग्रह नारायण सिन्हा का योगदान अतुलनीय है। बिहार के प्रशासनिक ढांचा को तैयार करना का काम अनुग्रह बाबू  ने किया था।प्रभावशाली पद पर होने के बावजूद उन्होंने अपना पूरा जीवन सादगी से बिताया। उनके कार्यकाल में [[बिहार]] में उद्योग -धंधे का जाल बिछा। अनुग्रह बाबू ने राज्य के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  के रूप मे 13 वर्षो तक बिहार की अनवरत सेवा की।अनुग्रह नारायण सिंह घोर मानवतावादी प्रगतिशील विचारक एवं दलितों के उत्थान के प्रबल समर्थक और आधुनिक भारत के निर्माताआें में से एक थे। उनका जीवन दर्शन देश की अखंडतास्वतंत्रता और नवनिर्माण की भावनाआ से शराबोर रहा है। उनका सौभ्य, स्निग्ध, शीतल, परोपकारी, अहंकारहीन और दर्पोदीप्त शख्सियत बिहार के जनगणमन पर अधिकार किए हुए था|वे शरीर से दुर्बल, कृषकाय थे, पर इस अर्थ में महाप्राण कोई संकट उनके ओठों की मुस्कुराहट नहीं छीन सका। उनमें शक्ति और शील एकाकार हो गये थे और इसीलिए वे बुद्धिजीवियों को विशेष प्रिय थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रारंभिक जीवन==&lt;br /&gt;
अनुग्रह बाबू का जन्म औरंगाबाद जिले के पोईअवा नामक गांव में १८ जून १८८७ को हुआ । उनके पिता ठाकुर विशेश्वर दयाल सिंह जी अपने इलाके के एक वीर पुरुष थे। पांच बसंत जब वे पार कर गये तो उनकी शिक्षा का श्रीगणेश हुआ। सन्‌ १९०० में औरंगाबाद मिडिल स्कूल,१९०४ में गया जिला स्कूल और १९०८ में पटना कॉलेज में प्रविष्ट हुए। जिस समय ये पटना कॉलेज में आये उस समय देश के शिक्षित व्यक्तियों के हृदय में परतंत्रता की वेदना का अनुभव होने लगा था। गुलामी की जंजीर में जक़डी हुई मानवता का चित्कार अब उन्हें सुनायी प़डने लगा था। वे उस जंजीर को त़ोड फेंकने के लिए व्याकुल होने लगे थे। सुरेन्द्रनाथ बनर्जी तथा योगिराज अरविंद ऐसे महान आत्माआे का प्रादुर्भाव हो चुका था । इन महान आत्माआ के कार्य कलापों तथा व्याख्यानों का समुचित प्रभाव अनुग्रह बाबू के हृदय पर प़डा। उनका हृदय भी भारतमाता की सेवा के लिए त़डप उठा और वे उस पावन मार्ग पर अग्रसर हो गये। सर्फूद्दीन के नेतृत्व में ‘बिहारी छात्र सम्मेलन’ नामक संस्था संगठित की गई, जिसमें देशरत्न डॉ राजेन्द्र बाबू ऐसे मेधावी छात्रों को कार्य करने तथा नेतृत्व करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन==&lt;br /&gt;
{{बाँयाबक्सा|पाठ=&amp;quot;मेरा परिचय अनुग्रह बाबू से बिहारी छात्र सम्मेलन में ही पहले पहल हुआ था।मैं उनकी संगठन शक्ति और हाथ में आए हुए काया] में उत्साह देखकर मुग्ध हो गया और वह भावना समय बीतने से कम न होकर अधिक गहरी होती गई।&amp;quot;- ''' देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद'''|विचारक=}}इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध [[चम्पारण]] से अपना सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था।अनुग्रह बाबू के हृदय में सेवा की उच्च भावना तो बाल्यकाल से ही था, उसे कार्य रूप में परिणत करने तथा उसे पूर्ण रूप से विकसित करने का सुअवसर भी उन्हें इस संगठन में प्रविष्ट होने पर मिल गया। सन्‌ १९१० में आई ए की परीक्षा भी उन्होंने प्रथम श्रेणी में पास की फिर बीए में प्रवेश किया। उसी वर्ष महामना पोलक साहब जो महात्मा गांधी के सहकर्मी थे, पटना पधारे, अफ्रीका के प्रवासी भारतीयों के बारे में जो उनका व्याख्यान हुआ। उससे अनुग्रह बाबू बहुत प्रभावित हुए। उसी वर्ष प्रयाग में अखिल भारतीय कांग्रेस अधिवेशन हुआ, जिसमें वे अपनी उत्साही सहपाठियों के साथ गये। उस अधिवेशन में महामना गोखले आदि विद्वान राष्ट्रभक्तों के भाषणों को सुनने का स्वर्ण अवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ, जिससे वे ब़डे प्रभावित हुए।अनुग्रह बाबू विद्यार्थी जीवन में ही संगठनशक्ति तथा कार्य संचालन की काबिलियत हासिल कर ली थी। सन्‌ १९१४ में इतिहास से एमए करने के बाद १९१५ में बी एल की परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की। भागलपुर के तेजनारायण जुविल कॉलेज में इतिहास के एक प्रोफेसर की आवश्यकता हुई। अपने साथियों के परामर्श करने के पश्चात तुरंत उन्होंने अपना आवेदन पत्र भेज दिया और उस पद पर उनकी नियुक्ति हो गई। वर्ष १९१६ में उन्होंने कॉलेज की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और पटना हाईकोर्ट में वकालत प्रारंभ कर दी। वकालत के सिलसिले में सरलता की मूर्ति देशरत्न राजेन्द्र बाबू के संसर्ग में अधिक रहने का सुअवसर भी इन्हें प्राप्त हुआ और उनसे पेशे को उन्नत करने की प्रेरणा भी मिली। कलकत्ते में भी उन्हें राजेन्द्र बाबू के सम्पर्क में रहने का स्वर्ण अवसर मिला था। जिस समय राजेन्द्र बाबू लॉ कॉलेज में अध्यापक थे, उसी समय उसी कॉलेज में वे एक विद्यार्थी थे। इसलिये वे राजेन्द्र बाबू की प्रतिष्ठा किया करते थे। उन्होंने [[महात्मा गांधी]] एवं डा. [[राजेन्द्र प्रसाद]] के साथ राष्ट्रीय आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== गांधीजी का सत्याग्रह==&lt;br /&gt;
उन्हें वकालत करते हुए अभी एक वर्ष भी नहीं बीता था कि चम्पारण में नील आंदोलन उठ ख़डा हुआ । इस आंदोलन ने उनके जीवन की धारा ही बदल दी। चम्पारण के किसानों की तबाही का समाचार जब [[महात्मा गांधी]] से सुने तो वे करुणा से विचलित हो उठे। मुजफ्फरपुर के कमिश्नर की राय के विरुद्ध गांधीजी चम्पारण गये और जांच कार्य प्रारंभ कर दिया।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Champaran Satyagraha.jpg|thumb|220px|चंपारण सत्याग्रह आंदोलन के दौरान डॉ. [[राजेन्द्र प्रसाद]] और अनुग्रह नारायण सिन्हा]] अत्याचारों की जांच प्रारंभ हुई । इसमें कुछ ऐसे वकीलों की आवश्यकता थी, जो निर्भीकता पूर्वक कार्य कर सकें और समय आने पर जेल जाने के लिए भी तैयार रहें। इस विकट कार्य के लिए वृज किशोर बाबू के प्रोत्साहन पर राजेन्द्र बाबू के साथ ही अनुग्रह बाबू भी तत्पर हो गये। उन्होंने इसकी तनिक भी चिंता नहीं की कि उनका पेशा नया है और उन्हें भारी क्षति उठानी प़ड सकती है। एक बार जो त्याग के मार्ग पर आगे ब़ढ चुका है, उसे भला इन तुच्छ चीजों का क्या भय हो सकता है। चम्पारण का किसान आंदोलन ४५ महीनों तक जोरशोर से चलता रहा। अनुग्रह बाबू बराबर उसमें काम करते रहे और आखिर तक डटे रहे । स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का पाठ उन्हें गांधीजी के आश्रम में ही रहकर प़ढने का सुअवसर प्राप्त हुआ। अनुग्रह बाबू ने चम्पारण के नील आंदोलन में गांधीजी के साथ लगन और निर्भीकता के साथ काम किया और आंदोलन को सफल बनाकर उनके आदेशानुसार १९१७ में पटना आये। बापू के साथ रहने से उन्हें जो आत्मिक बल प्राप्त हुआ, वही इनके जीवन का संबल बना। सन्‌ १९२० के दिसंबर में नागपुर में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हुआ, जिसमें अनुग्रह बाबू ने भी भाग लिया। सन्‌ १९२९ के दिसंबर में सरदार पटेल ने किसान संगठन के सिलसिले में मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया, तब अनुग्रह बाबू सभी जगह उनके साथ थे। २६ जनवरी १९३० को सारे देश में स्वतंत्रता की घोषणा प़ढी गई। अनुग्रह बाबू को भी कई स्थानों में घोषण पत्र प़ढना प़ढा । कुछ दिनों के बाद महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया। उस सिलसिले में उन्हें चम्पारण, मुजफ्फरपुर आदि स्थानों का दौरा करना प़डा । २६ जनवरी, १९३३ को जब पटना में घोषणा प़ढ रहे थे, उसी समय उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें पंद्रह मास की सजा हुई और उन्हें हजारीबाग जेल भेज दिया गया। जिस समय वे जेल में थे, बिहार में इतिहास विख्यात प्रलयंकारी भूकंप आया। हृदय विदारक समाचारों को प़ढकर उनका हृदय दर्द से कराह उठा। चहारदीवारी के अंदर बंद रहने के कारण ये कोई राहत कार्य नहीं कर सकते थे। लेकिन सरकार ने तीन हफ्तों के बाद इन्हें छ़ोड दिया। छूटते ही अनुग्रह बाबू राहत कार्य में संलग्न हो गये। राजेन्द्र बाबू के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इन्होंने अथक परिश्रम के साथ पी़डत मानवता की सेवा की। मुजफ्फरपुर, मुंगेर आदि शहरों का दौरा किया । इसके लिये राजेन्द्र बाबू की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी, जिसके उपाध्यक्ष अनुग्रह बाबू ही चुने गये तथा खूब लगन के साथ सेवा कार्य किया।सन्‌ १९४० को मार्च महीने में अखिल भारतीय कांग्रेस का अधिवेशन रामग़ढ में हुआ। अधिवेशन का संपूर्ण भार अनुग्रह बाबू के कंधे पर था। उसमें जो अपनी तत्परता दिखलाई उसके फलस्वरूप ही कांग्रेस का अधिवेशन सफल हुआ। देश की परिस्थिति को देखते हुए जब गांधीजी ने व्यक्तिगत सत्याग्रह अपनाया तब उनके प्रिय सहयोगी अनुग्रह बाबू कब चूकने वाले थे। फलस्वरूप १९४० को वह गिरफ्तार कर लिये गये और अगस्त १९४१ में रिहा हुए। गांधीजी का ‘करो या मरो’ का नारा बुलंद हुआ। ७ अगस्त, १९४२ को गांधीजी गिरफ्तार किये गये। सारे देश में एक बार ही बिजली की तरह आंदोलन की आग फैल गई। कांग्रेस कमिटियां जब्त कर ली गई और कांग्रेस नेता जहां के तहां गिरफ्तार कर लिये गये। १० अगस्त को अनुग्रह बाबू भी जब अपने मित्रों से मिलने गये, एकाएक मार्ग में ही गिरफ्तार कर लिये गये। सन्‌ १९४४ में जब सारे कांग्रेसी नेता जेल से मुक्त किये जाने लगे, तो अनुग्रह बाबू भी कारावास की कैद से आजाद कर दिये गये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==संदर्भ==&lt;br /&gt;
{{reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/database/biographies/anugrah_narayan_sinha.htm अनुग्रह बाबू की जीवनी]&lt;br /&gt;
*[http://books.google.co.in/books?id=kmZV1ALVaCYC&amp;amp;pg=PT403&amp;amp;lpg=PT403&amp;amp;dq=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9+%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;source=bl&amp;amp;ots=BrT6nN3s6g&amp;amp;sig=AQGM4ELFM1mxpiXuSV_kVCFd_Fs&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ei=yaZmS5DaJsWVtgenqvS2Bg&amp;amp;sa=X&amp;amp;oi=book_result&amp;amp;ct=result&amp;amp;resnum=2&amp;amp;ved=0CAkQ6AEwATge#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%20%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;f=false बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:z7Qyx0yJNJ4J:in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html+/search%3Fhl%3Dhi%26q%3D%2Bsite:in.jagran.yahoo.com%2B%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2597%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25B9%2B%25E0%25A4%25AC%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%2582&amp;amp;cd=5&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in आधुनिक भारत के निर्माता थे अनुग्रह बाबू : राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_4561311.html लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी थे डा अनुग्रह बाबू ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html अनुग्रह बाबू के जीवन से सीख लेने की जरूरत है-राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/kalranga/freedom/congress/c127.htm बिहार के स्वतंत्रता सेनानी]&lt;br /&gt;
*[http://www.aicc.org.in/satyagraha_laboratories_of_mahatma_gandhi.htm महात्मा गाँधी की सत्याग्रह प्रयोगशाला]&lt;br /&gt;
*[http://loksabha.nic.in/ लोकसभा का जालस्थल]&lt;br /&gt;
*[http://www.mkgandhi.org/jpnarayan/total_revolution.htm सम्पूर्ण क्रांति]&lt;br /&gt;
*[http://www.snsibm.com/ अनुग्रह नारायण सिन्हा व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, राँची]&lt;br /&gt;
*[http://www.ancollege.org/ अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय, पटना]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता_सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार_का_इतिहास]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9_%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=173600</id>
		<title>अनुग्रह नारायण सिंह</title>
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		<updated>2011-06-19T06:28:54Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=BiharVibhuti Dr Anugrah Narayan Sinha.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=अनुग्रह नारायण सिंह&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=अनुग्रह बाबू&lt;br /&gt;
|जन्म=[[18 जून ]],[[1887]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[बिहार]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[पटना]]&lt;br /&gt;
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|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]&lt;br /&gt;
|पद=[[बिहार]] के प्रथम उप [[मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिन्दी]],[[अंग्रेज़ी]] &lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=[[2 जनवरी]], [[1946]] से 05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|विद्यालय=[[कलकत्ता विश्वविद्यालय]], प्रेसीडेंसी कॉलेज (कलकत्ता)&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री और डॉक्टरेट&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=बिहार विभूति&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=भारत की स्वतन्त्रता, अहिंसक आन्दोलन, सत्याग्रह&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=[[असहयोग आंदोलन]], [[नमक सत्याग्रह]] आदि&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=रचनाऐं-मेरे संस्मरण:आत्मकथा&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
डा '''अनुग्रह नारायण सिंह''' एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता और [[बिहार]] के पहले उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री (1946-1957) थे। अनुग्रह बाबू (1887-1957) [[भारत]] के [[स्वतंत्रता सेनानी]], शिक्षक तथा राजनीतिज्ञ रहे हैं। लोकप्रियता के कारण उन्हें '''बिहार विभूति''' के रूप में जाना जाता था।वह स्वाधीनता आंदोलन के महान योद्धा थे।स्वाधीनता के बाद राष्ट्र निर्माण व जनकल्याण के कार्यो में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया। अनुग्रह बाबू का निधन उनके निवास स्थान [[पटना]] मे बीमारी के कारण हुआ। उनके सम्मान मे तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया, उनके अन्तिम संस्कार में विशाल जनसमूह उपस्थित था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==आधुनिक बिहार के निर्माता==&lt;br /&gt;
[[बिहार]] के विकास में डा अनुग्रह नारायण सिन्हा का योगदान अतुलनीय है। बिहार के प्रशासनिक ढांचा को तैयार करना का काम अनुग्रह बाबू  ने किया था।प्रभावशाली पद पर होने के बावजूद उन्होंने अपना पूरा जीवन सादगी से बिताया।बिहार के लिए उन्होंने बहुत से ऐसे काम किये थे, जिन्हें कभी भुलाया नही जा सकता है। उनके कार्यकाल में [[बिहार]] में उद्योग -धंधे का जाल बिछा। अनुग्रह बाबू ने राज्य के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  के रूप मे 13 वर्षो तक बिहार की अनवरत सेवा की।अनुग्रह बाबू का जीवन बहुत सादगी था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==स्वतंत्रता संग्राम==&lt;br /&gt;
{{बाँयाबक्सा|पाठ=&amp;quot;मेरा परिचय अनुग्रह बाबू से बिहारी छात्र सम्मेलन में ही पहले पहल हुआ था।मैं उनकी संगठन शक्ति और हाथ में आए हुए काया] में उत्साह देखकर मुग्ध हो गया और वह भावना समय बीतने से कम न होकर अधिक गहरी होती गई।&amp;quot;- ''' देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद'''|विचारक=}}&lt;br /&gt;
[[चित्र:Champaran Satyagraha.jpg|thumb|220px|चंपारण सत्याग्रह आंदोलन के दौरान डॉ. [[राजेन्द्र प्रसाद]] और अनुग्रह नारायण सिन्हा]]&lt;br /&gt;
इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध [[चम्पारण]] से अपना सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था।बिहार-विभूति का [[भारत]] की आजादी में सहभागिता रही थी। उन्होंने [[महात्मा गांधी]] एवं डा. [[राजेन्द्र प्रसाद]] के साथ राष्ट्रीय आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थे। अनुग्रह बाबू ने 34 दिनों तक साइकिल यात्रा करके नीलहों के खिलाफ किसानों को गोलबंद किया थाजिसका लोहा अंग्रेजों को मानना पड़ा।गांधी जी ने अपना प्रथम प्रयोग बिहार के चम्पारन ज़िले में किया जहाँ कृषकों की दशा बहुत ही दयनीय थी। ब्रिटिश लोगों ने बहुत सारी धरती पर नील की खेती आरम्भ कर दी थी जो उनके लिये लाभदायक थी। भूखे, नंगे, कृषक किरायेदार को नील उगाने के लिये ज़बरदस्ती की जाती। यदि वे उनकी आज्ञा नहीं मानते तो उन पर जुर्माना किया जाता और क्रूरता से यातनाएँ दी जाती एवं उनके खेत और घरों का नष्ट कर दिया जाता था।[[महात्मा गांधी]]जी को चम्पारन में हो रहे दमन पर विश्वास नहीं हुआ और वास्तविकता का पता लगाने वह कलकत्ता अधिवेशन के बाद स्वयं बिहार गये।डा अनुग्रह नारायण सिन्हा [[बिहार]] के निर्माता थे।वे देश के उन गिने-चुने सर्वाधिक लोकप्रिय नेताओं में से थे जिन्होंने अपने छात्र जीवन से लेकर अंतिम दिनों तक राष्ट्र और समाज की सेवा की। उन्होंने आधुनिक बिहार के निर्माण के लिए जो कार्य किया, उसके कारण लोग उन्हें प्यार से ''बिहार विभूति'' के नाम से पूकारते हैं। अनुग्रह बाबू [[बिहार]] [[विधानसभा]]  में 1937 से  लेकर 1957 तक कांग्रेस [[विधायक]] दल के उप नेता थे। प्रथम मुख्यमंत्री [[श्रीकृष्ण सिंह]] एवं उनकी जोड़ी मिसाल मानी जाती है। आजादी की लड़ाई में उनकी योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। आजादी के बाद बिहार के विकास में उन्होंने महथी भूमिका निभाई। बिहार के निर्माण में उनका योगदान सराहनीय रहा है। अनुग्रह बाबू  [[2 जनवरी]], [[1946]] से अपनी मृत्यु तक बिहार के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  रहे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संदर्भ==&lt;br /&gt;
{{reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/database/biographies/anugrah_narayan_sinha.htm अनुग्रह बाबू की जीवनी]&lt;br /&gt;
*[http://books.google.co.in/books?id=kmZV1ALVaCYC&amp;amp;pg=PT403&amp;amp;lpg=PT403&amp;amp;dq=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9+%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;source=bl&amp;amp;ots=BrT6nN3s6g&amp;amp;sig=AQGM4ELFM1mxpiXuSV_kVCFd_Fs&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ei=yaZmS5DaJsWVtgenqvS2Bg&amp;amp;sa=X&amp;amp;oi=book_result&amp;amp;ct=result&amp;amp;resnum=2&amp;amp;ved=0CAkQ6AEwATge#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%20%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;f=false बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:z7Qyx0yJNJ4J:in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html+/search%3Fhl%3Dhi%26q%3D%2Bsite:in.jagran.yahoo.com%2B%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2597%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25B9%2B%25E0%25A4%25AC%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%2582&amp;amp;cd=5&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in आधुनिक भारत के निर्माता थे अनुग्रह बाबू : राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_4561311.html लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी थे डा अनुग्रह बाबू ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html अनुग्रह बाबू के जीवन से सीख लेने की जरूरत है-राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/kalranga/freedom/congress/c127.htm बिहार के स्वतंत्रता सेनानी]&lt;br /&gt;
*[http://www.aicc.org.in/satyagraha_laboratories_of_mahatma_gandhi.htm महात्मा गाँधी की सत्याग्रह प्रयोगशाला]&lt;br /&gt;
*[http://loksabha.nic.in/ लोकसभा का जालस्थल]&lt;br /&gt;
*[http://www.mkgandhi.org/jpnarayan/total_revolution.htm सम्पूर्ण क्रांति]&lt;br /&gt;
*[http://www.snsibm.com/ अनुग्रह नारायण सिन्हा व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, राँची]&lt;br /&gt;
*[http://www.ancollege.org/ अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय, पटना]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता_सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार_का_इतिहास]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<title>अनुग्रह नारायण सिंह</title>
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		<updated>2011-06-18T23:15:38Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=BiharVibhuti Dr Anugrah Narayan Sinha.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=अनुग्रह नारायण सिंह&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=अनुग्रह बाबू&lt;br /&gt;
|जन्म=[[18 जून ]],[[1887]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[बिहार]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[पटना]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]&lt;br /&gt;
|पद=[[बिहार]] के प्रथम उप [[मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिन्दी]],[[अंग्रेज़ी]] &lt;br /&gt;
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|कार्य काल=[[2 जनवरी]], [[1946]] से 05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|विद्यालय=[[कलकत्ता विश्वविद्यालय]], प्रेसीडेंसी कॉलेज (कलकत्ता)&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री और डॉक्टरेट&lt;br /&gt;
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|विशेष योगदान=भारत की स्वतन्त्रता, अहिंसक आन्दोलन, सत्याग्रह&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=[[असहयोग आंदोलन]], [[नमक सत्याग्रह]] आदि&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=रचनाऐं-मेरे संस्मरण:आत्मकथा&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
डा '''अनुग्रह नारायण सिंह''' एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता और [[बिहार]] के पहले उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री (1946-1957) थे। अनुग्रह बाबू (1887-1957) [[भारत]] के [[स्वतंत्रता सेनानी]], शिक्षक तथा राजनीतिज्ञ रहे हैं। लोकप्रियता के कारण उन्हें '''बिहार विभूति''' के रूप में जाना जाता था।वह स्वाधीनता आंदोलन के महान योद्धा थे।स्वाधीनता के बाद राष्ट्र निर्माण व जनकल्याण के कार्यो में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया। अनुग्रह बाबू का निधन उनके निवास स्थान [[पटना]] मे बीमारी के कारण हुआ। उनके सम्मान मे तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया, उनके अन्तिम संस्कार में विशाल जनसमूह उपस्थित था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==आधुनिक बिहार के निर्माता==&lt;br /&gt;
[[बिहार]] के विकास में डा अनुग्रह नारायण सिन्हा का योगदान अतुलनीय है। बिहार के प्रशासनिक ढांचा को तैयार करना का काम अनुग्रह बाबू  ने किया था।प्रभावशाली पद पर होने के बावजूद उन्होंने अपना पूरा जीवन सादगी से बिताया।बिहार के लिए उन्होंने बहुत से ऐसे काम किये थे, जिन्हें कभी भुलाया नही जा सकता है। उनके कार्यकाल में [[बिहार]] में उद्योग -धंधे का जाल बिछा। अनुग्रह बाबू ने राज्य के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  के रूप मे 13 वर्षो तक बिहार की अनवरत सेवा की।अनुग्रह बाबू का जीवन बहुत सादगी था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==स्वतंत्रता संग्राम==&lt;br /&gt;
{{बाँयाबक्सा|पाठ=&amp;quot;मानस का प्रत्येक पृष्ठ भक्ति से भरपूर है। मानस अनुभवजन्य ज्ञान का भण्डार है।&amp;quot;- '''महात्मा गांधी'''|विचारक=}}&lt;br /&gt;
[[चित्र:Champaran Satyagraha.jpg|thumb|220px|चंपारण सत्याग्रह आंदोलन के दौरान डॉ. [[राजेन्द्र प्रसाद]] और अनुग्रह नारायण सिन्हा]]&lt;br /&gt;
इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध [[चम्पारण]] से अपना सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था।बिहार-विभूति का [[भारत]] की आजादी में सहभागिता रही थी। उन्होंने [[महात्मा गांधी]] एवं डा. [[राजेन्द्र प्रसाद]] के साथ राष्ट्रीय आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थे। अनुग्रह बाबू ने 34 दिनों तक साइकिल यात्रा करके नीलहों के खिलाफ किसानों को गोलबंद किया थाजिसका लोहा अंग्रेजों को मानना पड़ा।गांधी जी ने अपना प्रथम प्रयोग बिहार के चम्पारन ज़िले में किया जहाँ कृषकों की दशा बहुत ही दयनीय थी। ब्रिटिश लोगों ने बहुत सारी धरती पर नील की खेती आरम्भ कर दी थी जो उनके लिये लाभदायक थी। भूखे, नंगे, कृषक किरायेदार को नील उगाने के लिये ज़बरदस्ती की जाती। यदि वे उनकी आज्ञा नहीं मानते तो उन पर जुर्माना किया जाता और क्रूरता से यातनाएँ दी जाती एवं उनके खेत और घरों का नष्ट कर दिया जाता था।[[महात्मा गांधी]]जी को चम्पारन में हो रहे दमन पर विश्वास नहीं हुआ और वास्तविकता का पता लगाने वह कलकत्ता अधिवेशन के बाद स्वयं बिहार गये।डा अनुग्रह नारायण सिन्हा [[बिहार]] के निर्माता थे।वे देश के उन गिने-चुने सर्वाधिक लोकप्रिय नेताओं में से थे जिन्होंने अपने छात्र जीवन से लेकर अंतिम दिनों तक राष्ट्र और समाज की सेवा की। उन्होंने आधुनिक बिहार के निर्माण के लिए जो कार्य किया, उसके कारण लोग उन्हें प्यार से ''बिहार विभूति'' के नाम से पूकारते हैं। अनुग्रह बाबू [[बिहार]] [[विधानसभा]]  में 1937 से  लेकर 1957 तक कांग्रेस [[विधायक]] दल के उप नेता थे। प्रथम मुख्यमंत्री [[श्रीकृष्ण सिंह]] एवं उनकी जोड़ी मिसाल मानी जाती है। आजादी की लड़ाई में उनकी योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। आजादी के बाद बिहार के विकास में उन्होंने महथी भूमिका निभाई। बिहार के निर्माण में उनका योगदान सराहनीय रहा है। अनुग्रह बाबू  [[2 जनवरी]], [[1946]] से अपनी मृत्यु तक बिहार के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  रहे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संदर्भ==&lt;br /&gt;
{{reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/database/biographies/anugrah_narayan_sinha.htm अनुग्रह बाबू की जीवनी]&lt;br /&gt;
*[http://books.google.co.in/books?id=kmZV1ALVaCYC&amp;amp;pg=PT403&amp;amp;lpg=PT403&amp;amp;dq=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9+%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;source=bl&amp;amp;ots=BrT6nN3s6g&amp;amp;sig=AQGM4ELFM1mxpiXuSV_kVCFd_Fs&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ei=yaZmS5DaJsWVtgenqvS2Bg&amp;amp;sa=X&amp;amp;oi=book_result&amp;amp;ct=result&amp;amp;resnum=2&amp;amp;ved=0CAkQ6AEwATge#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%20%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;f=false बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:z7Qyx0yJNJ4J:in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html+/search%3Fhl%3Dhi%26q%3D%2Bsite:in.jagran.yahoo.com%2B%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2597%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25B9%2B%25E0%25A4%25AC%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%2582&amp;amp;cd=5&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in आधुनिक भारत के निर्माता थे अनुग्रह बाबू : राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_4561311.html लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी थे डा अनुग्रह बाबू ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html अनुग्रह बाबू के जीवन से सीख लेने की जरूरत है-राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/kalranga/freedom/congress/c127.htm बिहार के स्वतंत्रता सेनानी]&lt;br /&gt;
*[http://www.aicc.org.in/satyagraha_laboratories_of_mahatma_gandhi.htm महात्मा गाँधी की सत्याग्रह प्रयोगशाला]&lt;br /&gt;
*[http://loksabha.nic.in/ लोकसभा का जालस्थल]&lt;br /&gt;
*[http://www.mkgandhi.org/jpnarayan/total_revolution.htm सम्पूर्ण क्रांति]&lt;br /&gt;
*[http://www.snsibm.com/ अनुग्रह नारायण सिन्हा व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, राँची]&lt;br /&gt;
*[http://www.ancollege.org/ अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय, पटना]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता_सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार_का_इतिहास]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0_%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=173311</id>
		<title>सत्येन्द्र नारायण सिंह</title>
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		<updated>2011-06-17T20:43:27Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=सत्येन्द्र नारायण सिन्हा.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=सत्येन्द्र नारायण सिन्हा&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=छोटे साहब&lt;br /&gt;
|जन्म=[[१२ सितम्बर]], [[१९१७]]&lt;br /&gt;
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|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=[[भारतीय]]&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]] ([[1940]]-[[1969]]), कांग्रेस-ओ (1969–[[1977]]), जनता पार्टी&lt;br /&gt;
|पद=बिहार के [[मुख्यमंत्री|पूर्व मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|कार्य काल=[[26 जनवरी]], [[1950]] से [[13 मई]], [[1962]]&lt;br /&gt;
|भाषा=&lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री &lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत्येन्द्र नारायण सिन्हा एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता है और [[बिहार ]] के [[मुख्यमंत्री]] रह चुके है। प्यार से लोग उन्हें '''''छोटे साहब'' ''' कहते थे।वे भारत के स्वतंत्रता सेनानी,राजनीतिज्ञ,सांसद,शिक्षा मंत्री तथा बिहार राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं।वह 72 वर्ष की आयु में मुख्यमंत्री  बने थे। इसके पूर्व 1977 मे उन्होंने मुख्यमंत्री बनने की कोशिश की परंतु असफल रहे।वस्तुत: छोटे साहब इतने भाग्यशाली नहीं रहे और वर्षों तक [[बिहार ]] के वरिष्ठतम नेता होने के बावज़ूद उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया।    &lt;br /&gt;
==राजनीतिक जीवन==&lt;br /&gt;
[[स्वतंत्रता संग्राम]] में भागीदारी के बाद देश की आज़ादी के समय राष्ट्रीय राजनीति में इनका नाम वज़नदार हो चुका था।लेकिन सत्येन्द्र नारायण सिन्हा की प्राथमिक रुचि राज्य की राजनीति में ही थी।यही कारण है कि वे [[1961]]में बिहार के शिक्षा मंत्री बने जो उप मुख्यमंत्री के हैसियत में थे।।उन्होंने  छठे और सातवें दशक में [[बिहार]] की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभायी। उन्होंने राजनीति के लिए मानवीय अनुभूतियों को तिलांजलि दे दी,शिक्षा मंत्री के रूप में शैक्षणिक सुधार किया, साथ ही [[मगध]] [[विश्वविद्यालय]] की स्थापना की।वे देश में अपनी सैद्धांतिक राजनीति के लिए चर्चित हुआ करते थे।छोटे साहब ने बिहार के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता_सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://tewaronline.com/?p=682 सत्येन्द्र नारायण सिन्हा के जीवन पर स्मृति कलश पुस्तक]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5764172.html जन नेता थे छोटे साहब : पूर्व मुख्यमंत्री राम सुन्दर दास]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:YndCj_BcwtkJ:in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_6564942.html+%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0+%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A5%82&amp;amp;cd=18&amp;amp;hl=en&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in&amp;amp;source=www.google.co.in  सत्येन्द्र बाबू सामाजिक- राजनीतिक और प्रशासनिक क्षमता के अद्भुत समन्वय थे-केन्द्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:बिहार ]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:बिहार के मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:जीवनी साहित्य]] &lt;br /&gt;
[[श्रेणी:प्रसिद्ध व्यक्तित्व]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:चरित कोश]] &lt;br /&gt;
[[श्रेणी:राजनीति कोश]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<title>सत्येन्द्र नारायण सिंह</title>
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&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=सत्येन्द्र नारायण सिन्हा.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=सत्येन्द्र नारायण सिन्हा&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=छोटे साहब&lt;br /&gt;
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|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री &lt;br /&gt;
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|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
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|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
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|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
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}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत्येन्द्र नारायण सिन्हा एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता है और [[बिहार ]] के [[मुख्यमंत्री]] रह चुके है। प्यार से लोग उन्हें '''''छोटे साहब'' ''' कहते थे।वे भारत के स्वतंत्रता सेनानी,राजनीतिज्ञ,सांसद,शिक्षा मंत्री तथा बिहार राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं।वह 72 वर्ष की आयु में मुख्यमंत्री  बने थे। इसके पूर्व 1977 मे उन्होंने मुख्यमंत्री बनने की कोशिश की परंतु असफल रहे।वस्तुत: छोटे साहब इतने भाग्यशाली नहीं रहे और वर्षों तक [[बिहार ]] के वरिष्ठतम नेता होने के बावज़ूद उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया।    &lt;br /&gt;
==राजनीतिक जीवन==&lt;br /&gt;
[[स्वतंत्रता संग्राम]] में भागीदारी के बाद देश की आज़ादी के समय राष्ट्रीय राजनीति में इनका नाम वज़नदार हो चुका था।लेकिन सत्येन्द्र नारायण सिन्हा की प्राथमिक रुचि राज्य की राजनीति में ही थी।यही कारण है कि वे [[1961]]में बिहार के शिक्षा मंत्री बने जो उप मुख्यमंत्री के हैसियत में थे।।उन्होंने  छठे और सातवें दशक में [[बिहार]] की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभायी। उन्होंने राजनीति के लिए मानवीय अनुभूतियों को तिलांजलि दे दी,शिक्षा मंत्री के रूप में शैक्षणिक सुधार किया, साथ ही [[मगध]] [[विश्वविद्यालय]] की स्थापना की।वे देश में अपनी सैद्धांतिक राजनीति के लिए चर्चित हुआ करते थे।छोटे साहब ने बिहार के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता_सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://tewaronline.com/?p=682 सत्येन्द्र नारायण सिन्हा के जीवन पर स्मृति कलश पुस्तक]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5764172.html जन नेता थे छोटे साहब : पूर्व मुख्यमंत्री राम सुन्दर दास]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:YndCj_BcwtkJ:in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_6564942.html+%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0+%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A5%82&amp;amp;cd=18&amp;amp;hl=en&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in&amp;amp;source=www.google.co.in  सत्येन्द्र बाबू सामाजिक- राजनीतिक और प्रशासनिक क्षमता के अद्भुत समन्वय थे-केन्द्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:बिहार ]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:बिहार के मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:राजनेता]]&lt;br /&gt;
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[[श्रेणी:प्रसिद्ध व्यक्तित्व]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<title>सत्येन्द्र नारायण सिंह</title>
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		<updated>2011-06-17T18:26:09Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=सत्येन्द्र नारायण सिन्हा.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=सत्येन्द्र नारायण सिन्हा&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=छोटे साहब&lt;br /&gt;
|जन्म=[[१२ सितम्बर]], [[१९१७]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[मगध मंडल]], [[बिहार]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=[[2006]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[पटना]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=[[भारतीय]]&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]] ([[1969]]), कांग्रेस-ओ (1969–[[1977]]), जनता पार्टी&lt;br /&gt;
|पद=बिहार के [[मुख्यमंत्री|पूर्व मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|भाषा=&lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री &lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत्येन्द्र नारायण सिन्हा एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता है और [[बिहार ]] के [[मुख्यमंत्री]] रह चुके है। प्यार से लोग उन्हें '''''छोटे साहब'' ''' कहते थे।वे भारत के स्वतंत्रता सेनानी,राजनीतिज्ञ,सांसद,शिक्षा मंत्री तथा बिहार राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं।वह 72 वर्ष की आयु में मुख्यमंत्री  बने थे। इसके पूर्व 1977 मे उन्होंने मुख्यमंत्री बनने की कोशिश की परंतु असफल रहे।वस्तुत: छोटे साहब इतने भाग्यशाली नहीं रहे और वर्षों तक [[बिहार ]] के वरिष्ठतम नेता होने के बावज़ूद उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया।    &lt;br /&gt;
==राजनीतिक जीवन==&lt;br /&gt;
[[स्वतंत्रता संग्राम]] में भागीदारी के बाद देश की आज़ादी के समय राष्ट्रीय राजनीति में इनका नाम वज़नदार हो चुका था।लेकिन सत्येन्द्र नारायण सिन्हा की प्राथमिक रुचि राज्य की राजनीति में ही थी।यही कारण है कि वे [[1961]]में बिहार के शिक्षा मंत्री बने जो उप मुख्यमंत्री के हैसियत में थे।।उन्होंने  छठे और सातवें दशक में [[बिहार]] की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभायी। उन्होंने राजनीति के लिए मानवीय अनुभूतियों को तिलांजलि दे दी,शिक्षा मंत्री के रूप में शैक्षणिक सुधार किया, साथ ही [[मगध]] [[विश्वविद्यालय]] की स्थापना की।वे देश में अपनी सैद्धांतिक राजनीति के लिए चर्चित हुआ करते थे।छोटे साहब ने बिहार के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://tewaronline.com/?p=682 सत्येन्द्र नारायण सिन्हा के जीवन पर स्मृति कलश पुस्तक]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5764172.html जन नेता थे छोटे साहब : पूर्व मुख्यमंत्री राम सुन्दर दास]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:YndCj_BcwtkJ:in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_6564942.html+%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0+%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A5%82&amp;amp;cd=18&amp;amp;hl=en&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in&amp;amp;source=www.google.co.in  सत्येन्द्र बाबू सामाजिक- राजनीतिक और प्रशासनिक क्षमता के अद्भुत समन्वय थे-केन्द्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:बिहार ]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:बिहार के मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
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[[श्रेणी:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]]&lt;br /&gt;
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[[श्रेणी:राजनीति कोश]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<title>अनुग्रह नारायण सिंह</title>
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		<updated>2011-06-17T18:05:19Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=BiharVibhuti Dr Anugrah Narayan Sinha.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=अनुग्रह नारायण सिंह&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=अनुग्रह बाबू&lt;br /&gt;
|जन्म=[[18 जून ]],[[1887]]&lt;br /&gt;
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|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
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|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]&lt;br /&gt;
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|कार्य काल=[[2 जनवरी]], [[1946]] से 05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|विद्यालय=[[कलकत्ता विश्वविद्यालय]], प्रेसीडेंसी कॉलेज (कलकत्ता)&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री और डॉक्टरेट&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=बिहार विभूति&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=भारत की स्वतन्त्रता, अहिंसक आन्दोलन, सत्याग्रह&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=[[असहयोग आंदोलन]], [[नमक सत्याग्रह]] आदि&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=रचनाऐं-मेरे संस्मरण:आत्मकथा&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
डा '''अनुग्रह नारायण सिंह''' एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता और [[बिहार]] के पहले उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री (1946-1957) थे। अनुग्रह बाबू (1887-1957) [[भारत]] के [[स्वतंत्रता सेनानी]], शिक्षक तथा राजनीतिज्ञ रहे हैं। लोकप्रियता के कारण उन्हें '''बिहार विभूति''' के रूप में जाना जाता था। अनुग्रह बाबू का निधन उनके निवास स्थान [[पटना]] मे बीमारी के कारण हुआ। उनके सम्मान मे तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया, उनके अन्तिम संस्कार में विशाल जनसमूह उपस्थित था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==आधुनिक बिहार के निर्माता==&lt;br /&gt;
[[बिहार]] के विकास में डा अनुग्रह नारायण सिन्हा का योगदान अतुलनीय है। बिहार के प्रशासनिक ढांचा को तैयार करना का काम अनुग्रह बाबू  ने किया था।प्रभावशाली पद पर होने के बावजूद उन्होंने अपना पूरा जीवन सादगी से बिताया।बिहार के लिए उन्होंने बहुत से ऐसे काम किये थे, जिन्हें कभी भुलाया नही जा सकता है। उनके कार्यकाल में [[बिहार]] में उद्योग -धंधे का जाल बिछा। अनुग्रह बाबू ने राज्य के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  के रूप मे 13 वर्षो तक बिहार की अनवरत सेवा की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==स्वतंत्रता संग्राम==&lt;br /&gt;
{{बाँयाबक्सा|पाठ=&amp;quot;मानस का प्रत्येक पृष्ठ भक्ति से भरपूर है। मानस अनुभवजन्य ज्ञान का भण्डार है।&amp;quot;- '''महात्मा गांधी'''|विचारक=}}&lt;br /&gt;
[[चित्र:Champaran Satyagraha.jpg|thumb|220px|चंपारण सत्याग्रह आंदोलन के दौरान डॉ. [[राजेन्द्र प्रसाद]] और अनुग्रह नारायण सिन्हा]]&lt;br /&gt;
इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध [[चम्पारण]] से अपना सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था।बिहार-विभूति का [[भारत]] की आजादी में सहभागिता रही थी। उन्होंने [[महात्मा गांधी]] एवं डा. [[राजेन्द्र प्रसाद]] के साथ राष्ट्रीय आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थे। अनुग्रह बाबू ने 34 दिनों तक साइकिल यात्रा करके नीलहों के खिलाफ किसानों को गोलबंद किया थाजिसका लोहा अंग्रेजों को मानना पड़ा।गांधी जी ने अपना प्रथम प्रयोग बिहार के चम्पारन ज़िले में किया जहाँ कृषकों की दशा बहुत ही दयनीय थी। ब्रिटिश लोगों ने बहुत सारी धरती पर नील की खेती आरम्भ कर दी थी जो उनके लिये लाभदायक थी। भूखे, नंगे, कृषक किरायेदार को नील उगाने के लिये ज़बरदस्ती की जाती। यदि वे उनकी आज्ञा नहीं मानते तो उन पर जुर्माना किया जाता और क्रूरता से यातनाएँ दी जाती एवं उनके खेत और घरों का नष्ट कर दिया जाता था।[[महात्मा गांधी]]जी को चम्पारन में हो रहे दमन पर विश्वास नहीं हुआ और वास्तविकता का पता लगाने वह कलकत्ता अधिवेशन के बाद स्वयं बिहार गये।डा अनुग्रह नारायण सिन्हा [[बिहार]] के निर्माता थे।वे देश के उन गिने-चुने सर्वाधिक लोकप्रिय नेताओं में से थे जिन्होंने अपने छात्र जीवन से लेकर अंतिम दिनों तक राष्ट्र और समाज की सेवा की। उन्होंने आधुनिक बिहार के निर्माण के लिए जो कार्य किया, उसके कारण लोग उन्हें प्यार से ''बिहार विभूति'' के नाम से पूकारते हैं। अनुग्रह बाबू [[बिहार]] [[विधानसभा]]  में 1937 से  लेकर 1957 तक कांग्रेस [[विधायक]] दल के उप नेता थे। प्रथम मुख्यमंत्री [[श्रीकृष्ण सिंह]] एवं उनकी जोड़ी मिसाल मानी जाती है। अनुग्रह बाबू  [[2 जनवरी]], [[1946]] से अपनी मृत्यु तक बिहार के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  रहे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संदर्भ==&lt;br /&gt;
{{reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/database/biographies/anugrah_narayan_sinha.htm अनुग्रह बाबू की जीवनी]&lt;br /&gt;
*[http://books.google.co.in/books?id=kmZV1ALVaCYC&amp;amp;pg=PT403&amp;amp;lpg=PT403&amp;amp;dq=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9+%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;source=bl&amp;amp;ots=BrT6nN3s6g&amp;amp;sig=AQGM4ELFM1mxpiXuSV_kVCFd_Fs&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ei=yaZmS5DaJsWVtgenqvS2Bg&amp;amp;sa=X&amp;amp;oi=book_result&amp;amp;ct=result&amp;amp;resnum=2&amp;amp;ved=0CAkQ6AEwATge#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%20%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;f=false बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:z7Qyx0yJNJ4J:in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html+/search%3Fhl%3Dhi%26q%3D%2Bsite:in.jagran.yahoo.com%2B%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2597%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25B9%2B%25E0%25A4%25AC%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%2582&amp;amp;cd=5&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in आधुनिक भारत के निर्माता थे अनुग्रह बाबू : राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_4561311.html लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी थे डा अनुग्रह बाबू ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html अनुग्रह बाबू के जीवन से सीख लेने की जरूरत है-राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/kalranga/freedom/congress/c127.htm बिहार के स्वतंत्रता सेनानी]&lt;br /&gt;
*[http://www.aicc.org.in/satyagraha_laboratories_of_mahatma_gandhi.htm महात्मा गाँधी की सत्याग्रह प्रयोगशाला]&lt;br /&gt;
*[http://loksabha.nic.in/ लोकसभा का जालस्थल]&lt;br /&gt;
*[http://www.mkgandhi.org/jpnarayan/total_revolution.htm सम्पूर्ण क्रांति]&lt;br /&gt;
*[http://www.snsibm.com/ अनुग्रह नारायण सिन्हा व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, राँची]&lt;br /&gt;
*[http://www.ancollege.org/ अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय, पटना]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता_सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार_का_इतिहास]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9_%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=173307</id>
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		<updated>2011-06-17T18:01:04Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=BiharVibhuti Dr Anugrah Narayan Sinha.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=अनुग्रह नारायण सिंह&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=अनुग्रह बाबू&lt;br /&gt;
|जन्म=[[18 जून ]],[[1887]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[बिहार]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[पटना]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]&lt;br /&gt;
|पद=[[बिहार]] के प्रथम उप [[मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिन्दी]],[[अंग्रेज़ी]] &lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=[[2 जनवरी]], [[1946]] से 05 जुलाई,[[1957]]&lt;br /&gt;
|विद्यालय=[[कलकत्ता विश्वविद्यालय]], प्रेसीडेंसी कॉलेज (कलकत्ता)&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री और डॉक्टरेट&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=बिहार विभूति&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=भारत की स्वतन्त्रता, अहिंसक आन्दोलन, सत्याग्रह&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=[[असहयोग आंदोलन]], [[नमक सत्याग्रह]] आदि&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=रचनाऐं-मेरे संस्मरण:आत्मकथा&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
डा '''अनुग्रह नारायण सिंह''' एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता और [[बिहार]] के पहले उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री (1946-1957) थे। अनुग्रह बाबू (1887-1957) [[भारत]] के [[स्वतंत्रता सेनानी]], शिक्षक तथा राजनीतिज्ञ रहे हैं। लोकप्रियता के कारण उन्हें '''बिहार विभूति''' के रूप में जाना जाता था। अनुग्रह बाबू का निधन उनके निवास स्थान [[पटना]] मे बीमारी के कारण हुआ। उनके सम्मान मे तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया, उनके अन्तिम संस्कार में विशाल जनसमूह उपस्थित था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==व्यक्तिगत जीवन==&lt;br /&gt;
बिहार के विकास में डा अनुग्रह नारायण सिन्हा का योगदान अतुलनीय है। बिहार के प्रशासनिक ढांचा को तैयार करना का काम अनुग्रह बाबू  ने किया था। प्रभावशाली पद पर होने के बावजूद उन्होंने अपना पूरा जीवन सादगी से बिताया।बिहार के लिए उन्होंने बहुत से ऐसे काम किये थे, जिन्हें कभी भुलाया नही जा सकता है। उनके कार्यकाल में [[बिहार]] में उद्योग -धंधे का जाल बिछा। अनुग्रह बाबू ने 13 वर्षो तक बिहार की अनवरत सेवा की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==स्वतंत्रता संग्राम==&lt;br /&gt;
{{बाँयाबक्सा|पाठ=&amp;quot;मानस का प्रत्येक पृष्ठ भक्ति से भरपूर है। मानस अनुभवजन्य ज्ञान का भण्डार है।&amp;quot;- '''महात्मा गांधी'''|विचारक=}}&lt;br /&gt;
[[चित्र:Champaran Satyagraha.jpg|thumb|220px|चंपारण सत्याग्रह आंदोलन के दौरान डॉ. [[राजेन्द्र प्रसाद]] और अनुग्रह नारायण सिन्हा]]&lt;br /&gt;
इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध [[चम्पारण]] से अपना सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था।बिहार-विभूति का [[भारत]] की आजादी में सहभागिता रही थी। उन्होंने [[महात्मा गांधी]] एवं डा. [[राजेन्द्र प्रसाद]] के साथ राष्ट्रीय आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थे। अनुग्रह बाबू ने 34 दिनों तक साइकिल यात्रा करके नीलहों के खिलाफ किसानों को गोलबंद किया थाजिसका लोहा अंग्रेजों को मानना पड़ा।गांधी जी ने अपना प्रथम प्रयोग बिहार के चम्पारन ज़िले में किया जहाँ कृषकों की दशा बहुत ही दयनीय थी। ब्रिटिश लोगों ने बहुत सारी धरती पर नील की खेती आरम्भ कर दी थी जो उनके लिये लाभदायक थी। भूखे, नंगे, कृषक किरायेदार को नील उगाने के लिये ज़बरदस्ती की जाती। यदि वे उनकी आज्ञा नहीं मानते तो उन पर जुर्माना किया जाता और क्रूरता से यातनाएँ दी जाती एवं उनके खेत और घरों का नष्ट कर दिया जाता था।[[महात्मा गांधी]]जी को चम्पारन में हो रहे दमन पर विश्वास नहीं हुआ और वास्तविकता का पता लगाने वह कलकत्ता अधिवेशन के बाद स्वयं बिहार गये।डा अनुग्रह नारायण सिन्हा [[बिहार]] के निर्माता थे।वे देश के उन गिने-चुने सर्वाधिक लोकप्रिय नेताओं में से थे जिन्होंने अपने छात्र जीवन से लेकर अंतिम दिनों तक राष्ट्र और समाज की सेवा की। उन्होंने आधुनिक बिहार के निर्माण के लिए जो कार्य किया, उसके कारण लोग उन्हें प्यार से ''बिहार विभूति'' के नाम से पूकारते हैं। अनुग्रह बाबू [[बिहार]] [[विधानसभा]]  में 1937 से  लेकर 1957 तक कांग्रेस [[विधायक]] दल के उप नेता थे। प्रथम मुख्यमंत्री [[श्रीकृष्ण सिंह]] एवं उनकी जोड़ी मिसाल मानी जाती है। अनुग्रह बाबू  [[2 जनवरी]], [[1946]] से अपनी मृत्यु तक बिहार के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  रहे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संदर्भ==&lt;br /&gt;
{{reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/database/biographies/anugrah_narayan_sinha.htm अनुग्रह बाबू की जीवनी]&lt;br /&gt;
*[http://books.google.co.in/books?id=kmZV1ALVaCYC&amp;amp;pg=PT403&amp;amp;lpg=PT403&amp;amp;dq=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9+%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;source=bl&amp;amp;ots=BrT6nN3s6g&amp;amp;sig=AQGM4ELFM1mxpiXuSV_kVCFd_Fs&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ei=yaZmS5DaJsWVtgenqvS2Bg&amp;amp;sa=X&amp;amp;oi=book_result&amp;amp;ct=result&amp;amp;resnum=2&amp;amp;ved=0CAkQ6AEwATge#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%20%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;f=false बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:z7Qyx0yJNJ4J:in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html+/search%3Fhl%3Dhi%26q%3D%2Bsite:in.jagran.yahoo.com%2B%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2597%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25B9%2B%25E0%25A4%25AC%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%2582&amp;amp;cd=5&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in आधुनिक भारत के निर्माता थे अनुग्रह बाबू : राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_4561311.html लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी थे डा अनुग्रह बाबू ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html अनुग्रह बाबू के जीवन से सीख लेने की जरूरत है-राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/kalranga/freedom/congress/c127.htm बिहार के स्वतंत्रता सेनानी]&lt;br /&gt;
*[http://www.aicc.org.in/satyagraha_laboratories_of_mahatma_gandhi.htm महात्मा गाँधी की सत्याग्रह प्रयोगशाला]&lt;br /&gt;
*[http://loksabha.nic.in/ लोकसभा का जालस्थल]&lt;br /&gt;
*[http://www.mkgandhi.org/jpnarayan/total_revolution.htm सम्पूर्ण क्रांति]&lt;br /&gt;
*[http://www.snsibm.com/ अनुग्रह नारायण सिन्हा व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, राँची]&lt;br /&gt;
*[http://www.ancollege.org/ अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय, पटना]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता_सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार_का_इतिहास]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9_%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=173306</id>
		<title>अनुग्रह नारायण सिंह</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9_%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=173306"/>
		<updated>2011-06-17T17:47:26Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=BiharVibhuti Dr Anugrah Narayan Sinha.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=अनुग्रह नारायण सिंह&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=अनुग्रह बाबू&lt;br /&gt;
|जन्म=[[18 जून ]],[[1887]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[बिहार]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=[[05 जुलाई ]],[[1957]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[पटना]]&lt;br /&gt;
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|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]&lt;br /&gt;
|पद=[[बिहार]] के प्रथम उप [[मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिन्दी]],[[अंग्रेज़ी]] &lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=[[2 जनवरी]], [[1946]] से [[05 जुलाई ]],[[1957]]&lt;br /&gt;
|विद्यालय=[[कलकत्ता विश्वविद्यालय]], प्रेसीडेंसी कॉलेज (कलकत्ता)&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री और डॉक्टरेट&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=बिहार विभूति&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=भारत की स्वतन्त्रता, अहिंसक आन्दोलन, सत्याग्रह&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=[[असहयोग आंदोलन]], [[नमक सत्याग्रह]] आदि&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=रचनाऐं-मेरे संस्मरण:आत्मकथा&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
डा '''अनुग्रह नारायण सिंह''' एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता और [[बिहार]] के पहले उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री (1946-1957) थे। अनुग्रह बाबू (1887-1957) [[भारत]] के [[स्वतंत्रता सेनानी]], शिक्षक तथा राजनीतिज्ञ रहे हैं। लोकप्रियता के कारण उन्हें '''बिहार विभूति''' के रूप में जाना जाता था। अनुग्रह बाबू का निधन उनके निवास स्थान [[पटना]] मे बीमारी के कारण हुआ। उनके सम्मान मे तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया, उनके अन्तिम संस्कार में विशाल जनसमूह उपस्थित था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==व्यक्तिगत जीवन==&lt;br /&gt;
बिहार के विकास में डा अनुग्रह नारायण सिन्हा का योगदान अतुलनीय है। बिहार के प्रशासनिक ढांचा को तैयार करना का काम अनुग्रह बाबू  ने किया था। प्रभावशाली पद पर होने के बावजूद उन्होंने अपना पूरा जीवन सादगी से बिताया। बिहार के लिए उन्होंने बहुत से ऐसे काम किये थे, जिन्हें कभी भुलाया नही जा सकता है। उनके कार्यकाल में [[बिहार]] में उद्योग -धंधे का जाल बिछा। अनुग्रह बाबू ने 13 वर्षो तक बिहार की अनवरत सेवा की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==स्वतंत्रता संग्राम==&lt;br /&gt;
इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध [[चम्पारण]] से अपना सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था। बिहार-विभूति का [[भारत]] की आजादी में सहभागिता रही थी। उन्होंने [[महात्मा गांधी]] एवं डा. [[राजेन्द्र प्रसाद]] के साथ राष्ट्रीय आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थे। अनुग्रह बाबू ने 34 दिनों तक साइकिल यात्रा करके नीलहों के खिलाफ किसानों को गोलबंद किया था। &lt;br /&gt;
 &amp;lt;br /&amp;gt;&amp;lt;blockquote&amp;gt;&amp;lt;span style=&amp;quot;color: #8f5d31&amp;quot;&amp;gt;मानस का प्रत्येक पृष्ठ भक्ति से भरपूर है। मानस अनुभवजन्य ज्ञान का भण्डार है। '''महात्मा गांधी'''&amp;lt;/span&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt; जिसका लोहा अंग्रेजों को मानना पड़ा।गांधी जी ने अपना प्रथम प्रयोग बिहार के चम्पारन ज़िले में किया जहाँ कृषकों की दशा बहुत ही दयनीय थी। ब्रिटिश लोगों ने बहुत सारी धरती पर नील की खेती आरम्भ कर दी थी जो उनके लिये लाभदायक थी। भूखे, नंगे, कृषक किरायेदार को नील उगाने के लिये ज़बरदस्ती की जाती। यदि वे उनकी आज्ञा नहीं मानते तो उन पर जुर्माना किया जाता और क्रूरता से यातनाएँ दी जाती एवं उनके खेत और घरों का नष्ट कर दिया जाता था।[[महात्मा गांधी]]जी को चम्पारन में हो रहे दमन पर विश्वास नहीं हुआ और वास्तविकता का पता लगाने वह कलकत्ता अधिवेशन के बाद स्वयं बिहार गये।[[चित्र:Champaran Satyagraha.jpg|thumb|220px|चंपारण सत्याग्रह आंदोलन के दौरान डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और अनुग्रह नारायण सिन्हा]]डा अनुग्रह नारायण सिन्हा [[बिहार]] के निर्माता थे।वे देश के उन गिने-चुने सर्वाधिक लोकप्रिय नेताओं में से थे जिन्होंने अपने छात्र जीवन से लेकर अंतिम दिनों तक राष्ट्र और समाज की सेवा की। उन्होंने आधुनिक बिहार के निर्माण के लिए जो कार्य किया, उसके कारण लोग उन्हें प्यार से ''बिहार विभूति'' के नाम से पूकारते हैं। अनुग्रह बाबू [[बिहार]] [[विधानसभा]]  में 1937 से  लेकर 1957 तक कांग्रेस [[विधायक]] दल के उप नेता थे। प्रथम मुख्यमंत्री [[श्रीकृष्ण सिंह]] एवं उनकी जोड़ी मिसाल मानी जाती है। अनुग्रह बाबू  [[2 जनवरी]], [[1946]] से अपनी मृत्यु तक बिहार के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  रहे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संदर्भ==&lt;br /&gt;
{{reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/database/biographies/anugrah_narayan_sinha.htm अनुग्रह बाबू की जीवनी]&lt;br /&gt;
*[http://books.google.co.in/books?id=kmZV1ALVaCYC&amp;amp;pg=PT403&amp;amp;lpg=PT403&amp;amp;dq=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9+%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;source=bl&amp;amp;ots=BrT6nN3s6g&amp;amp;sig=AQGM4ELFM1mxpiXuSV_kVCFd_Fs&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ei=yaZmS5DaJsWVtgenqvS2Bg&amp;amp;sa=X&amp;amp;oi=book_result&amp;amp;ct=result&amp;amp;resnum=2&amp;amp;ved=0CAkQ6AEwATge#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%20%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;f=false बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:z7Qyx0yJNJ4J:in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html+/search%3Fhl%3Dhi%26q%3D%2Bsite:in.jagran.yahoo.com%2B%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2597%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25B9%2B%25E0%25A4%25AC%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%2582&amp;amp;cd=5&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in आधुनिक भारत के निर्माता थे अनुग्रह बाबू : राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_4561311.html लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी थे डा अनुग्रह बाबू ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html अनुग्रह बाबू के जीवन से सीख लेने की जरूरत है-राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/kalranga/freedom/congress/c127.htm बिहार के स्वतंत्रता सेनानी]&lt;br /&gt;
*[http://www.aicc.org.in/satyagraha_laboratories_of_mahatma_gandhi.htm महात्मा गाँधी की सत्याग्रह प्रयोगशाला]&lt;br /&gt;
*[http://loksabha.nic.in/ लोकसभा का जालस्थल]&lt;br /&gt;
*[http://www.mkgandhi.org/jpnarayan/total_revolution.htm सम्पूर्ण क्रांति]&lt;br /&gt;
*[http://www.snsibm.com/ अनुग्रह नारायण सिन्हा व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, राँची]&lt;br /&gt;
*[http://www.ancollege.org/ अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय, पटना]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता_सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार_का_इतिहास]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9_%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=173305</id>
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		<updated>2011-06-17T17:43:59Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=BiharVibhuti Dr Anugrah Narayan Sinha.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=अनुग्रह नारायण सिंह&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=बाबू साहेब,अनुग्रह बाबू&lt;br /&gt;
|जन्म=[[18 जून ]],[[1887]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[बिहार]]&lt;br /&gt;
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|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
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|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]&lt;br /&gt;
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|विद्यालय=[[कलकत्ता विश्वविद्यालय]], प्रेसीडेंसी कॉलेज (कलकत्ता)&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री और डॉक्टरेट&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=बिहार विभूति&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=भारत की स्वतन्त्रता, अहिंसक आन्दोलन, सत्याग्रह&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=[[असहयोग आंदोलन]], [[नमक सत्याग्रह]] आदि&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=रचनाऐं-मेरे संस्मरण:आत्मकथा&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
डा '''अनुग्रह नारायण सिंह''' एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता और [[बिहार]] के पहले उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री (1946-1957) थे। अनुग्रह बाबू (1887-1957) [[भारत]] के [[स्वतंत्रता सेनानी]], शिक्षक तथा राजनीतिज्ञ रहे हैं। लोकप्रियता के कारण उन्हें '''बिहार विभूति''' के रूप में जाना जाता था। अनुग्रह बाबू का निधन उनके निवास स्थान [[पटना]] मे बीमारी के कारण हुआ। उनके सम्मान मे तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया, उनके अन्तिम संस्कार में विशाल जनसमूह उपस्थित था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==व्यक्तिगत जीवन==&lt;br /&gt;
बिहार के विकास में डा अनुग्रह नारायण सिन्हा का योगदान अतुलनीय है। बिहार के प्रशासनिक ढांचा को तैयार करना का काम अनुग्रह बाबू  ने किया था। प्रभावशाली पद पर होने के बावजूद उन्होंने अपना पूरा जीवन सादगी से बिताया। बिहार के लिए उन्होंने बहुत से ऐसे काम किये थे, जिन्हें कभी भुलाया नही जा सकता है। उनके कार्यकाल में [[बिहार]] में उद्योग -धंधे का जाल बिछा। अनुग्रह बाबू ने 13 वर्षो तक बिहार की अनवरत सेवा की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==स्वतंत्रता संग्राम==&lt;br /&gt;
इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध [[चम्पारण]] से अपना सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था। बिहार-विभूति का [[भारत]] की आजादी में सहभागिता रही थी। उन्होंने [[महात्मा गांधी]] एवं डा. [[राजेन्द्र प्रसाद]] के साथ राष्ट्रीय आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थे। अनुग्रह बाबू ने 34 दिनों तक साइकिल यात्रा करके नीलहों के खिलाफ किसानों को गोलबंद किया था। &lt;br /&gt;
 &amp;lt;br /&amp;gt;&amp;lt;blockquote&amp;gt;&amp;lt;span style=&amp;quot;color: #8f5d31&amp;quot;&amp;gt;मानस का प्रत्येक पृष्ठ भक्ति से भरपूर है। मानस अनुभवजन्य ज्ञान का भण्डार है। '''महात्मा गांधी'''&amp;lt;/span&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt; जिसका लोहा अंग्रेजों को मानना पड़ा।गांधी जी ने अपना प्रथम प्रयोग बिहार के चम्पारन ज़िले में किया जहाँ कृषकों की दशा बहुत ही दयनीय थी। ब्रिटिश लोगों ने बहुत सारी धरती पर नील की खेती आरम्भ कर दी थी जो उनके लिये लाभदायक थी। भूखे, नंगे, कृषक किरायेदार को नील उगाने के लिये ज़बरदस्ती की जाती। यदि वे उनकी आज्ञा नहीं मानते तो उन पर जुर्माना किया जाता और क्रूरता से यातनाएँ दी जाती एवं उनके खेत और घरों का नष्ट कर दिया जाता था।[[महात्मा गांधी]]जी को चम्पारन में हो रहे दमन पर विश्वास नहीं हुआ और वास्तविकता का पता लगाने वह कलकत्ता अधिवेशन के बाद स्वयं बिहार गये।[[चित्र:Champaran Satyagraha.jpg|thumb|220px|चंपारण सत्याग्रह आंदोलन के दौरान डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और अनुग्रह नारायण सिन्हा]]डा अनुग्रह नारायण सिन्हा [[बिहार]] के निर्माता थे।वे देश के उन गिने-चुने सर्वाधिक लोकप्रिय नेताओं में से थे जिन्होंने अपने छात्र जीवन से लेकर अंतिम दिनों तक राष्ट्र और समाज की सेवा की। उन्होंने आधुनिक बिहार के निर्माण के लिए जो कार्य किया, उसके कारण लोग उन्हें प्यार से ''बिहार विभूति'' के नाम से पूकारते हैं। अनुग्रह बाबू [[बिहार]] [[विधानसभा]]  में 1937 से  लेकर 1957 तक कांग्रेस [[विधायक]] दल के उप नेता थे। प्रथम मुख्यमंत्री [[श्रीकृष्ण सिंह]] एवं उनकी जोड़ी मिसाल मानी जाती है। अनुग्रह बाबू  [[2 जनवरी]], [[1946]] से अपनी मृत्यु तक बिहार के उप [[मुख्यमंत्री]] सह वित्त मंत्री  रहे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संदर्भ==&lt;br /&gt;
{{reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/database/biographies/anugrah_narayan_sinha.htm अनुग्रह बाबू की जीवनी]&lt;br /&gt;
*[http://books.google.co.in/books?id=kmZV1ALVaCYC&amp;amp;pg=PT403&amp;amp;lpg=PT403&amp;amp;dq=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9+%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;source=bl&amp;amp;ots=BrT6nN3s6g&amp;amp;sig=AQGM4ELFM1mxpiXuSV_kVCFd_Fs&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ei=yaZmS5DaJsWVtgenqvS2Bg&amp;amp;sa=X&amp;amp;oi=book_result&amp;amp;ct=result&amp;amp;resnum=2&amp;amp;ved=0CAkQ6AEwATge#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%20%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;amp;f=false बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:z7Qyx0yJNJ4J:in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html+/search%3Fhl%3Dhi%26q%3D%2Bsite:in.jagran.yahoo.com%2B%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2597%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25B9%2B%25E0%25A4%25AC%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%2582&amp;amp;cd=5&amp;amp;hl=hi&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in आधुनिक भारत के निर्माता थे अनुग्रह बाबू : राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/jharkhand/4_8_4561311.html लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी थे डा अनुग्रह बाबू ]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_5556289_1.html अनुग्रह बाबू के जीवन से सीख लेने की जरूरत है-राज्यपाल]&lt;br /&gt;
*[http://www.kamat.com/kalranga/freedom/congress/c127.htm बिहार के स्वतंत्रता सेनानी]&lt;br /&gt;
*[http://www.aicc.org.in/satyagraha_laboratories_of_mahatma_gandhi.htm महात्मा गाँधी की सत्याग्रह प्रयोगशाला]&lt;br /&gt;
*[http://loksabha.nic.in/ लोकसभा का जालस्थल]&lt;br /&gt;
*[http://www.mkgandhi.org/jpnarayan/total_revolution.htm सम्पूर्ण क्रांति]&lt;br /&gt;
*[http://www.snsibm.com/ अनुग्रह नारायण सिन्हा व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, राँची]&lt;br /&gt;
*[http://www.ancollege.org/ अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय, पटना]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता_सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
[[Category:बिहार_का_इतिहास]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<title>सत्येन्द्र नारायण सिंह</title>
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		<updated>2011-06-17T17:23:27Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=सत्येन्द्र नारायण सिन्हा.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=सत्येन्द्र नारायण सिन्हा&lt;br /&gt;
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|जन्म=१२ सितम्बर, १९१७&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[मगध मंडल]], [[बिहार]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
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|मृत्यु स्थान=[[पटना]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=[[भारतीय]]&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]&lt;br /&gt;
|पद=बिहार के [[मुख्यमंत्री|पूर्व मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|भाषा=&lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री &lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
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|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत्येन्द्र नारायण सिन्हा एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता है और [[बिहार ]] के [[मुख्यमंत्री]] रह चुके है। प्यार से लोग उन्हें '''''छोटे साहब'' ''' कहते थे।वे भारत के स्वतंत्रता सेनानी,राजनीतिज्ञ,सांसद,शिक्षा मंत्री तथा बिहार राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं।   &lt;br /&gt;
==व्यक्तिगत जीवन==&lt;br /&gt;
==राजनीतिक जीवन==&lt;br /&gt;
उन्होंने  छठे और सातवें दशक में [[बिहार]] की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभायी। उन्होंने राजनीति के लिए मानवीय अनुभूतियों को तिलांजलि दे दी,शिक्षा मंत्री के रूप में शैक्षणिक सुधार किया, साथ ही [[मगध]] [[विश्वविद्यालय]] की स्थापना की।वे देश में अपनी सैद्धांतिक राजनीति के लिए चर्चित हुआ करते थे।छोटे साहब ने बिहार के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता_सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://tewaronline.com/?p=682 सत्येन्द्र नारायण सिन्हा के जीवन पर स्मृति कलश पुस्तक]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5764172.html जन नेता थे छोटे साहब : पूर्व मुख्यमंत्री राम सुन्दर दास]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:YndCj_BcwtkJ:in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_6564942.html+%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0+%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A5%82&amp;amp;cd=18&amp;amp;hl=en&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in&amp;amp;source=www.google.co.in  सत्येन्द्र बाबू सामाजिक- राजनीतिक और प्रशासनिक क्षमता के अद्भुत समन्वय थे-केन्द्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:बिहार ]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:बिहार के मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:जीवनी साहित्य]] &lt;br /&gt;
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		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<title>सत्येन्द्र नारायण सिंह</title>
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&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=सत्येन्द्र नारायण सिन्हा.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=सत्येन्द्र नारायण सिन्हा&lt;br /&gt;
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|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
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|क़ब्र= &lt;br /&gt;
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|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री &lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
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|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत्येन्द्र नारायण सिन्हा एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता है और [[बिहार ]] के [[मुख्यमंत्री]] रह चुके है। प्यार से लोग उन्हें '''''छोटे साहब'' ''' कहते थे।वे भारत के स्वतंत्रता सेनानी,राजनीतिज्ञ,सांसद,शिक्षा मंत्री तथा बिहार राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं।   &lt;br /&gt;
==व्यक्तिगत जीवन==&lt;br /&gt;
==राजनीतिक जीवन==&lt;br /&gt;
उन्होंने  छठे और सातवें दशक में [[बिहार]] की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभायी। उन्होंने राजनीति के लिए मानवीय अनुभूतियों को तिलांजलि दे दी,शिक्षा मंत्री के रूप में शैक्षणिक सुधार किया, साथ ही [[मगध]] [[विश्वविद्यालय]] की स्थापना की।वे देश में अपनी सैद्धांतिक राजनीति के लिए चर्चित हुआ करते थे।छोटे साहब ने बिहार के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता_सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://tewaronline.com/?p=682 सत्येन्द्र नारायण सिन्हा के जीवन पर स्मृति कलश पुस्तक]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5764172.html जन नेता थे छोटे साहब : पूर्व मुख्यमंत्री राम सुन्दर दास]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:YndCj_BcwtkJ:in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_6564942.html+%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0+%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A5%82&amp;amp;cd=18&amp;amp;hl=en&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in&amp;amp;source=www.google.co.in  सत्येन्द्र बाबू सामाजिक- राजनीतिक और प्रशासनिक क्षमता के अद्भुत समन्वय थे-केन्द्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:बिहार ]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:बिहार के मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<title>सत्येन्द्र नारायण सिंह</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=सत्येन्द्र नारायण सिन्हा.jpg&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=सत्येन्द्र नारायण सिन्हा&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=छोटे साहब&lt;br /&gt;
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|जन्म भूमि=[[मगध मंडल]], [[बिहार]]&lt;br /&gt;
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|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=[[2006]]&lt;br /&gt;
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|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
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|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]&lt;br /&gt;
|पद=[[बिहार के मुख्यमंत्री|पूर्व मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
|भाषा=&lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|कार्य काल=[[1946]] से [[1957]]&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक, बी. एल., क़ानून में मास्टर डिग्री &lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत्येन्द्र नारायण सिन्हा एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता है और [[बिहार ]] के [[मुख्यमंत्री]] रह चुके है। प्यार से लोग उन्हें '''''छोटे साहब'' ''' कहते थे।वे भारत के स्वतंत्रता सेनानी,राजनीतिज्ञ,सांसद,शिक्षा मंत्री तथा बिहार राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं।   &lt;br /&gt;
==व्यक्तिगत जीवन==&lt;br /&gt;
==राजनीतिक जीवन==&lt;br /&gt;
उन्होंने  छठे और सातवें दशक में [[बिहार]] की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभायी। उन्होंने राजनीति के लिए मानवीय अनुभूतियों को तिलांजलि दे दी,शिक्षा मंत्री के रूप में शैक्षणिक सुधार किया, साथ ही [[मगध]] [[विश्वविद्यालय]] की स्थापना की।वे देश में अपनी सैद्धांतिक राजनीति के लिए चर्चित हुआ करते थे।छोटे साहब ने बिहार के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता_सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति_कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://tewaronline.com/?p=682 सत्येन्द्र नारायण सिन्हा के जीवन पर स्मृति कलश पुस्तक]&lt;br /&gt;
*[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5764172.html जन नेता थे छोटे साहब : पूर्व मुख्यमंत्री राम सुन्दर दास]&lt;br /&gt;
*[http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:YndCj_BcwtkJ:in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_6564942.html+%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0+%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A5%82&amp;amp;cd=18&amp;amp;hl=en&amp;amp;ct=clnk&amp;amp;gl=in&amp;amp;source=www.google.co.in  सत्येन्द्र बाबू सामाजिक- राजनीतिक और प्रशासनिक क्षमता के अद्भुत समन्वय थे-केन्द्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:बिहार ]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:बिहार के मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:मुख्यमंत्री]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:राजनेता]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
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		<updated>2011-06-17T08:52:31Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;B Narayan: भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, राजनेता और बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके छोटे साहब(सत्येन्द्र नारायण स&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, राजनेता और बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके छोटे साहब(सत्येन्द्र नारायण सिन्हा)&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>B Narayan</name></author>
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