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	<title>Bharatkosh - सदस्य द्वारा योगदान [hi]</title>
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		<title>नाथूराम गोडसे</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Vishwajeetsingh: /* बाहरी कड़ियाँ */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[चित्र:nathuram godse.jpg|thumb|250px|नाथूराम गोडसे]]&lt;br /&gt;
नाथूराम गोडसे का असली नाम रामप्रसाद था। नाथूराम गोडसे [[मराठी]] थे। नाथूराम गोडसे बचपन से ही एक लड़की की तरह पले बढ़े थे और बचपन से ही नाक में बाईं तरफ नथ पहनने के कारण घर वाले उन्हेँ नाथू राम पुकारने लगे थे। नाथूराम गोडसे को लड़कियों की तरह पाले जाने के बावजूद नाथूराम को शरीर बनाने, कसरत करने और तैरने का शौक़ था। नाथूराम बाल्यकाल से ही समाजसेवी थे । जब भी गाँव में गहरे कुएँ से खोए हुए बर्तन तलाशने होते या किसी बीमार को जल्द डॉक्टर के पास पहुँचाना होता तो नाथूराम को याद किया जाता था। [[पुणे]] से [[मराठी भाषा]] में अपना क्रान्तिकारी विचारों का हिन्दू राष्ट्र अखबार निकालने के पहले नाथूराम ने लकड़ी के काम में भी अपना हाथ आज़माया था।&lt;br /&gt;
==परिवार==&lt;br /&gt;
नाथूराम गोडसे का जन्म 19 [[मई]] [[1910]] [[मुंबई]]- पुणे के बीच में एक राष्ट्रवादी हिन्दू  परिवार में हुआ था। नाथूराम गोडसे के पिता विनायक गोडसे पोस्ट ऑफिस में काम करते थे। जब विनायक गोडसे के पहले 3 बेटे बचपन में ही चल बसे और एक बेटी जिंदा बची रह गई तो विनायक को लगा कि ऐसा किसी शाप की वजह से हो रहा है।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/2831775.cms |title=लड़कियों की तरह हुई थी गोडसे की परवरिश |accessmonthday=[[1 जुलाई]] |accessyear=[[2010]] |last= |first= |authorlink= |coauthors= |date= |year= |month= |format= |work= |publisher=नवभारत टाइम्स |pages= |language=[[हिन्दी]]&lt;br /&gt;
 |archiveurl= |archivedate= |quote= }}&amp;lt;/ref&amp;gt; विनायक गोडसे ने मन्नत माँगी कि अगर अब लड़का होगा तो उसकी परवरिश लड़कियों की तरह ही होगी। नाथूराम की परवरिश लड़कियों की तरह करने की वजह एक मन्नत या आस्था से जुड़ी हुई थी। इसी वजह से नाथूराम को नथ पहननी पड़ी। नाथूराम गोडसे के घर वालों को लगता था कि नाथूराम के ऊपर देवी आती है।&lt;br /&gt;
{{tocright}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==देवी का ध्यान==&lt;br /&gt;
बचपन से ही नाथूराम अपनी कुलदेवी की मूर्ति के सामने बैठकर ताँबे के एक श्रीयंत्र को बैठा एकाग्रचित्त होकर देखता रहता था। नाथूराम गोडसे जब भी कुलदेवी की मूर्ति के सामने बैठकर एकाग्रचित्त होता तो उसके बाद उसे कुछ तस्वीरें या कुछ लिखा हुआ दिखता था। वह ध्यान कि अवस्था में चला जाता था। घर वालों का मानना है कि जब भी वह ध्यान कि अवस्था में होते थे तब उनके मुँह से खुद देवी जवाब देती थी। नाथूराम गोडसे के घर वालों को यकीन था कि नाथूराम गोडसे को कुछ दैवीय शक्तियाँ मिली हुई हैं। घर वाले उससे सवाल पूछते थे जिनके जवाब देवी के जवाब माने जाते थे, जो नाथूराम के जरिए बोलती हुई मानी जाती थीं। &lt;br /&gt;
==महात्मा गाँधी की हत्या==&lt;br /&gt;
[[30 जनवरी]] सन [[1948]] ई. की शाम को जब [[गाँधी जी]] एक प्रार्थना सभा में भाग लेने जा रहे थे, तब [[हिन्दू]] राष्ट्रवादी नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर [[महात्मा गाँधी]] की हत्या कर दी थी। नाथूराम गोडसे ने गाँधी जी की हत्या करने के 150 कारण न्यायालय के सामने बताये थे। नाथूराम गोडसे ने जज से आज्ञा प्राप्त कर ली थी कि वे अपने बयानों को पढ़कर सुनाना चाहते है और उन्होंने वो 150 बयान माइक पर पढ़कर सुनाए थे।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://satyarthved.blogspot.com/2009/08/blog-post_6150.html |title=नाथुराम गोडसे और गाँधी-----भाग 1 |accessmonthday=[[2 जुलाई]] |accessyear= [[2010]] |last= |first= |authorlink= |coauthors= |date= |year= |month= |format=एच.टी.एम.एल |work= |publisher=सत्यार्थवेद ब्लॉग स्पॉट |pages= |language=[[हिन्दी]] |archiveurl= |archivedate= |quote= }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==फ़ाँसी की सज़ा==&lt;br /&gt;
महात्मा गाँधी की हत्या करने के कारण नाथूराम गोडसे को फ़ाँसी की सज़ा सुनाई गई थी। नाथूराम गोडसे को [[15 नवम्बर]] [[1949]] में [[अंबाला]] ([[हरियाणा]]) में फ़ाँसी दी गई और फ़ाँसी दिये जाने से कुछ ही समय पहले नाथूराम गोड़से ने अपने भाई दत्तात्रय को हिदायत देते हुए कहा था, कि &amp;lt;blockquote&amp;gt;“मेरी अस्थियाँ पवित्र [[सिन्धु नदी]] में ही उस दिन प्रवाहित करना जब सिन्धु नदी एक स्वतन्त्र नदी के रूप में [[भारत]] के [[तिरंगा|झंडे]] तले बहने लगे, भले ही इसमें कितने भी वर्ष लग जायें, कितनी ही पीढ़ियाँ जन्म लें, लेकिन तब तक मेरी अस्थियाँ विसर्जित न करना”।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://mahashaktigroup.bharatuday.in/2008/02/blog-post_21.html |title=नाथुराम गोड़से का अस्थि कलश विसर्जन अभी बाकी है |accessmonthday=[[2 जुलाई]] |accessyear= [[2010]] |last= |first= |authorlink= |coauthors= |date= |year= |month= |format=एच.टी.एम.एल |work= |publisher=महाशक्ति ग्रुप |pages= |language=[[हिन्दी]] |archiveurl= |archivedate= |quote= }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/2745398.cms 1944 में भी गोडसे ने किया था गांधी पर हमला]&lt;br /&gt;
*[http://www.amarujala.com/national/nat-Nathuram%20Godse%20was%20born%20the%20wrong-4211.html नाथूराम गोडसे ने पैदा की थी गड़बड़ी]&lt;br /&gt;
*[http://kataksh.blogspot.com/2007/10/blog-post_15.html तो नाथूराम गोड़से गौतम बुद्ध से प्रेरित थे]&lt;br /&gt;
*[http://www.bhaskar.com/2010/02/01/100201003306_godse_would_then_sue.html फिर चलेगा गोडसे पर मुकदमा]&lt;br /&gt;
www.vishwajeetsingh1008.blogspot.com अखण्ड भारत के स्वप्नद्रष्टा वीर नाथूराम गोडसे भाग एक &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखण्ड भारत के स्वप्नद्रष्टा वीर नाथूराम गोडसे भाग दो &lt;br /&gt;
अखण्ड भारत के स्वप्नद्रष्टा वीर नाथूराम गोडसे भाग तीन&lt;br /&gt;
[[Category:व्यक्ति परिचय]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Vishwajeetsingh</name></author>
	</entry>
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		<title>नाथूराम गोडसे</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Vishwajeetsingh: /* टीका टिप्पणी और संदर्भ */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[चित्र:nathuram godse.jpg|thumb|250px|नाथूराम गोडसे]]&lt;br /&gt;
नाथूराम गोडसे का असली नाम रामप्रसाद था। नाथूराम गोडसे [[मराठी]] थे। नाथूराम गोडसे बचपन से ही एक लड़की की तरह पले बढ़े थे और बचपन से ही नाक में बाईं तरफ नथ पहनने के कारण घर वाले उन्हेँ नाथू राम पुकारने लगे थे। नाथूराम गोडसे को लड़कियों की तरह पाले जाने के बावजूद नाथूराम को शरीर बनाने, कसरत करने और तैरने का शौक़ था। नाथूराम बाल्यकाल से ही समाजसेवी थे । जब भी गाँव में गहरे कुएँ से खोए हुए बर्तन तलाशने होते या किसी बीमार को जल्द डॉक्टर के पास पहुँचाना होता तो नाथूराम को याद किया जाता था। [[पुणे]] से [[मराठी भाषा]] में अपना क्रान्तिकारी विचारों का हिन्दू राष्ट्र अखबार निकालने के पहले नाथूराम ने लकड़ी के काम में भी अपना हाथ आज़माया था।&lt;br /&gt;
==परिवार==&lt;br /&gt;
नाथूराम गोडसे का जन्म 19 [[मई]] [[1910]] [[मुंबई]]- पुणे के बीच में एक राष्ट्रवादी हिन्दू  परिवार में हुआ था। नाथूराम गोडसे के पिता विनायक गोडसे पोस्ट ऑफिस में काम करते थे। जब विनायक गोडसे के पहले 3 बेटे बचपन में ही चल बसे और एक बेटी जिंदा बची रह गई तो विनायक को लगा कि ऐसा किसी शाप की वजह से हो रहा है।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/2831775.cms |title=लड़कियों की तरह हुई थी गोडसे की परवरिश |accessmonthday=[[1 जुलाई]] |accessyear=[[2010]] |last= |first= |authorlink= |coauthors= |date= |year= |month= |format= |work= |publisher=नवभारत टाइम्स |pages= |language=[[हिन्दी]]&lt;br /&gt;
 |archiveurl= |archivedate= |quote= }}&amp;lt;/ref&amp;gt; विनायक गोडसे ने मन्नत माँगी कि अगर अब लड़का होगा तो उसकी परवरिश लड़कियों की तरह ही होगी। नाथूराम की परवरिश लड़कियों की तरह करने की वजह एक मन्नत या आस्था से जुड़ी हुई थी। इसी वजह से नाथूराम को नथ पहननी पड़ी। नाथूराम गोडसे के घर वालों को लगता था कि नाथूराम के ऊपर देवी आती है।&lt;br /&gt;
{{tocright}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==देवी का ध्यान==&lt;br /&gt;
बचपन से ही नाथूराम अपनी कुलदेवी की मूर्ति के सामने बैठकर ताँबे के एक श्रीयंत्र को बैठा एकाग्रचित्त होकर देखता रहता था। नाथूराम गोडसे जब भी कुलदेवी की मूर्ति के सामने बैठकर एकाग्रचित्त होता तो उसके बाद उसे कुछ तस्वीरें या कुछ लिखा हुआ दिखता था। वह ध्यान कि अवस्था में चला जाता था। घर वालों का मानना है कि जब भी वह ध्यान कि अवस्था में होते थे तब उनके मुँह से खुद देवी जवाब देती थी। नाथूराम गोडसे के घर वालों को यकीन था कि नाथूराम गोडसे को कुछ दैवीय शक्तियाँ मिली हुई हैं। घर वाले उससे सवाल पूछते थे जिनके जवाब देवी के जवाब माने जाते थे, जो नाथूराम के जरिए बोलती हुई मानी जाती थीं। &lt;br /&gt;
==महात्मा गाँधी की हत्या==&lt;br /&gt;
[[30 जनवरी]] सन [[1948]] ई. की शाम को जब [[गाँधी जी]] एक प्रार्थना सभा में भाग लेने जा रहे थे, तब [[हिन्दू]] राष्ट्रवादी नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर [[महात्मा गाँधी]] की हत्या कर दी थी। नाथूराम गोडसे ने गाँधी जी की हत्या करने के 150 कारण न्यायालय के सामने बताये थे। नाथूराम गोडसे ने जज से आज्ञा प्राप्त कर ली थी कि वे अपने बयानों को पढ़कर सुनाना चाहते है और उन्होंने वो 150 बयान माइक पर पढ़कर सुनाए थे। उनके उन बयानों को जवाहर लाल नेहरू सरकार ने गांधी वध की सच्चाई सामने आने के भय से प्रतिबंधित करा दिया था ।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://satyarthved.blogspot.com/2009/08/blog-post_6150.html |title=नाथुराम गोडसे और गाँधी-----भाग 1 |accessmonthday=[[2 जुलाई]] |accessyear= [[2010]] |last= |first= |authorlink= |coauthors= |date= |year= |month= |format=एच.टी.एम.एल |work= |publisher=सत्यार्थवेद ब्लॉग स्पॉट |pages= |language=[[हिन्दी]] |archiveurl= |archivedate= |quote= }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==फ़ाँसी की सज़ा==&lt;br /&gt;
महात्मा गाँधी की हत्या करने के कारण नाथूराम गोडसे को फ़ाँसी की सज़ा सुनाई गई थी। नाथूराम गोडसे को [[15 नवम्बर]] [[1949]] में [[अंबाला]] ([[हरियाणा]]) में फ़ाँसी दी गई और फ़ाँसी दिये जाने से कुछ ही समय पहले नाथूराम गोड़से ने अपने भाई दत्तात्रय को हिदायत देते हुए कहा था, कि &amp;lt;blockquote&amp;gt;“मेरी अस्थियाँ पवित्र [[सिन्धु नदी]] में ही उस दिन प्रवाहित करना जब सिन्धु नदी एक स्वतन्त्र नदी के रूप में [[भारत]] के [[तिरंगा|झंडे]] तले बहने लगे, भले ही इसमें कितने भी वर्ष लग जायें, कितनी ही पीढ़ियाँ जन्म लें, लेकिन तब तक मेरी अस्थियाँ विसर्जित न करना”।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://mahashaktigroup.bharatuday.in/2008/02/blog-post_21.html |title=नाथुराम गोड़से का अस्थि कलश विसर्जन अभी बाकी है |accessmonthday=[[2 जुलाई]] |accessyear= [[2010]] |last= |first= |authorlink= |coauthors= |date= |year= |month= |format=एच.टी.एम.एल |work= |publisher=महाशक्ति ग्रुप |pages= |language=[[हिन्दी]] |archiveurl= |archivedate= |quote= }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt; नाथूराम गोडसे अखण्ड भारत के अनन्य उपासक , सच्चे समाज सुधारक और यशस्वी पत्रकार थे । वह गांधी जी का सम्मान करते थे , लेकिन गांधी जी द्वारा उदार राष्ट्रवादी मुस्लिमों की उपेक्षा करके अरब साम्राज्यवादी जेहादी विचारधारा के कट्टर मुस्लिमों का हमेशा अनुचित पक्ष लेने के कारण वह गांधी जी के विरूद्ध हो गये । गोडसे जी मानते थे कि खिलापत आन्दोलन ( जिसका भारत या भारत के मुसलमानों से कोई सम्बंध नहीं था । ) का समर्थन करके पाकिस्तान का आधार तो गांधी जी ने जिन्ना से भी पहले रख दिया था । &lt;br /&gt;
अखण्ड भारत के स्वप्नद्रष्टा वीर नाथूराम गोडसे &lt;br /&gt;
www.vishwajeetsingh1008.blogspot.com&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/2745398.cms 1944 में भी गोडसे ने किया था गांधी पर हमला]&lt;br /&gt;
*[http://www.amarujala.com/national/nat-Nathuram%20Godse%20was%20born%20the%20wrong-4211.html नाथूराम गोडसे ने पैदा की थी गड़बड़ी]&lt;br /&gt;
*[http://kataksh.blogspot.com/2007/10/blog-post_15.html तो नाथूराम गोड़से गौतम बुद्ध से प्रेरित थे]&lt;br /&gt;
*[http://www.bhaskar.com/2010/02/01/100201003306_godse_would_then_sue.html फिर चलेगा गोडसे पर मुकदमा]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:व्यक्ति परिचय]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Vishwajeetsingh</name></author>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Vishwajeetsingh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[चित्र:nathuram godse.jpg|thumb|250px|नाथूराम गोडसे]]&lt;br /&gt;
नाथूराम गोडसे का असली नाम रामप्रसाद था। नाथूराम गोडसे [[मराठी]] थे। नाथूराम गोडसे बचपन से ही एक लड़की की तरह पले बढ़े थे और बचपन से ही नाक में बाईं तरफ नथ पहनने के कारण घर वाले उन्हेँ नाथू राम पुकारने लगे थे। नाथूराम गोडसे को लड़कियों की तरह पाले जाने के बावजूद नाथूराम को शरीर बनाने, कसरत करने और तैरने का शौक़ था। नाथूराम बाल्यकाल से ही समाजसेवी थे । जब भी गाँव में गहरे कुएँ से खोए हुए बर्तन तलाशने होते या किसी बीमार को जल्द डॉक्टर के पास पहुँचाना होता तो नाथूराम को याद किया जाता था। [[पुणे]] से [[मराठी भाषा]] में अपना क्रान्तिकारी विचारों का हिन्दू राष्ट्र अखबार निकालने के पहले नाथूराम ने लकड़ी के काम में भी अपना हाथ आज़माया था।&lt;br /&gt;
==परिवार==&lt;br /&gt;
नाथूराम गोडसे का जन्म 19 [[मई]] [[1910]] [[मुंबई]]- पुणे के बीच में एक राष्ट्रवादी हिन्दू  परिवार में हुआ था। नाथूराम गोडसे के पिता विनायक गोडसे पोस्ट ऑफिस में काम करते थे। जब विनायक गोडसे के पहले 3 बेटे बचपन में ही चल बसे और एक बेटी जिंदा बची रह गई तो विनायक को लगा कि ऐसा किसी शाप की वजह से हो रहा है।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/2831775.cms |title=लड़कियों की तरह हुई थी गोडसे की परवरिश |accessmonthday=[[1 जुलाई]] |accessyear=[[2010]] |last= |first= |authorlink= |coauthors= |date= |year= |month= |format= |work= |publisher=नवभारत टाइम्स |pages= |language=[[हिन्दी]]&lt;br /&gt;
 |archiveurl= |archivedate= |quote= }}&amp;lt;/ref&amp;gt; विनायक गोडसे ने मन्नत माँगी कि अगर अब लड़का होगा तो उसकी परवरिश लड़कियों की तरह ही होगी। नाथूराम की परवरिश लड़कियों की तरह करने की वजह एक मन्नत या आस्था से जुड़ी हुई थी। इसी वजह से नाथूराम को नथ पहननी पड़ी। नाथूराम गोडसे के घर वालों को लगता था कि नाथूराम के ऊपर देवी आती है।&lt;br /&gt;
{{tocright}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==देवी का ध्यान==&lt;br /&gt;
बचपन से ही नाथूराम अपनी कुलदेवी की मूर्ति के सामने बैठकर ताँबे के एक श्रीयंत्र को बैठा एकाग्रचित्त होकर देखता रहता था। नाथूराम गोडसे जब भी कुलदेवी की मूर्ति के सामने बैठकर एकाग्रचित्त होता तो उसके बाद उसे कुछ तस्वीरें या कुछ लिखा हुआ दिखता था। वह ध्यान कि अवस्था में चला जाता था। घर वालों का मानना है कि जब भी वह ध्यान कि अवस्था में होते थे तब उनके मुँह से खुद देवी जवाब देती थी। नाथूराम गोडसे के घर वालों को यकीन था कि नाथूराम गोडसे को कुछ दैवीय शक्तियाँ मिली हुई हैं। घर वाले उससे सवाल पूछते थे जिनके जवाब देवी के जवाब माने जाते थे, जो नाथूराम के जरिए बोलती हुई मानी जाती थीं। &lt;br /&gt;
==महात्मा गाँधी की हत्या==&lt;br /&gt;
[[30 जनवरी]] सन [[1948]] ई. की शाम को जब [[गाँधी जी]] एक प्रार्थना सभा में भाग लेने जा रहे थे, तब [[हिन्दू]] राष्ट्रवादी नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर [[महात्मा गाँधी]] की हत्या कर दी थी। नाथूराम गोडसे ने गाँधी जी की हत्या करने के 150 कारण न्यायालय के सामने बताये थे। नाथूराम गोडसे ने जज से आज्ञा प्राप्त कर ली थी कि वे अपने बयानों को पढ़कर सुनाना चाहते है और उन्होंने वो 150 बयान माइक पर पढ़कर सुनाए थे। उनके उन बयानों को जवाहर लाल नेहरू सरकार ने गांधी वध की सच्चाई सामने आने के भय से प्रतिबंधित करा दिया था ।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://satyarthved.blogspot.com/2009/08/blog-post_6150.html |title=नाथुराम गोडसे और गाँधी-----भाग 1 |accessmonthday=[[2 जूलाई]] |accessyear= [[2010]] |last= |first= |authorlink= |coauthors= |date= |year= |month= |format=एच.टी.एम.एल |work= |publisher=सत्यार्थवेद ब्लॉग स्पॉट |pages= |language=[[हिन्दी]] |archiveurl= |archivedate= |quote= }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==फ़ाँसी की सज़ा==&lt;br /&gt;
महात्मा गाँधी की हत्या करने के कारण नाथूराम गोडसे को फ़ाँसी की सज़ा सुनाई गई थी। नाथूराम गोडसे को [[15 नवम्बर]] [[1949]] में [[अंबाला]] ([[हरियाणा]]) में फ़ाँसी दी गई और फ़ाँसी दिये जाने से कुछ ही समय पहले नाथूराम गोड़से ने अपने भाई दत्तात्रय को हिदायत देते हुए कहा था, कि &amp;lt;blockquote&amp;gt;“मेरी अस्थियाँ पवित्र [[सिन्धु नदी]] में ही उस दिन प्रवाहित करना जब सिन्धु नदी एक स्वतन्त्र नदी के रूप में [[भारत]] के [[तिरंगा|झंडे]] तले बहने लगे, भले ही इसमें कितने भी वर्ष लग जायें, कितनी ही पीढ़ियाँ जन्म लें, लेकिन तब तक मेरी अस्थियाँ विसर्जित न करना”।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://mahashaktigroup.bharatuday.in/2008/02/blog-post_21.html |title=नाथुराम गोड़से का अस्थि कलश विसर्जन अभी बाकी है |accessmonthday=[[2 जूलाई]] |accessyear= [[2010]] |last= |first= |authorlink= |coauthors= |date= |year= |month= |format=एच.टी.एम.एल |work= |publisher=महाशक्ति ग्रुप |pages= |language=[[हिन्दी]] |archiveurl= |archivedate= |quote= }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/2745398.cms 1944 में भी गोडसे ने किया था गांधी पर हमला]&lt;br /&gt;
*[http://www.amarujala.com/national/nat-Nathuram%20Godse%20was%20born%20the%20wrong-4211.html नाथूराम गोडसे ने पैदा की थी गड़बड़ी]&lt;br /&gt;
*[http://kataksh.blogspot.com/2007/10/blog-post_15.html तो नाथूराम गोड़से गौतम बुद्ध से प्रेरित थे]&lt;br /&gt;
*[http://www.bhaskar.com/2010/02/01/100201003306_godse_would_then_sue.html फिर चलेगा गोडसे पर मुकदमा]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:व्यक्ति परिचय]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Vishwajeetsingh</name></author>
	</entry>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE_%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%B8%E0%A5%87&amp;diff=146845</id>
		<title>नाथूराम गोडसे</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE_%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%B8%E0%A5%87&amp;diff=146845"/>
		<updated>2011-04-04T05:41:12Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Vishwajeetsingh: /* महात्मा गाँधी की हत्या */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[चित्र:nathuram godse.jpg|thumb|250px|नाथूराम गोडसे]]&lt;br /&gt;
नाथूराम गोडसे का असली नाम रामप्रसाद था। नाथूराम गोडसे [[मराठी]] थे। नाथूराम गोडसे बचपन से ही एक लड़की की तरह पले बढ़े थे और बचपन से ही नाक में बाईं तरफ नथ पहनने के कारण घर वाले उसे नाथू राम पुकारने लगे थे। नाथूराम गोडसे को लड़कियों की तरह पाले जाने के बावजूद नाथूराम को शरीर बनाने, कसरत करने और तैरने का शौक़ था। जब भी गाँव में गहरे कुएँ से खोए हुए बर्तन तलाशने होते या किसी बीमार को जल्द डॉक्टर के पास पहुँचाना होता तो नाथूराम को याद किया जाता था। [[पुणे]] से [[मराठी भाषा]] में अपना अखबार निकालने के पहले नाथूराम लकड़ी के काम और सिलाई में भी अपना हाथ आज़मा चुका था।&lt;br /&gt;
==परिवार==&lt;br /&gt;
नाथूराम गोडसे का जन्म 19 [[मई]] [[1910]] [[मुंबई]]- पुणे के बीच में एक राष्ट्रवादी हिन्दू  परिवार में हुआ था। नाथूराम गोडसे के पिता विनायक गोडसे पोस्ट ऑफिस में काम करते थे। जब विनायक गोडसे के पहले 3 बेटे बचपन में ही चल बसे और एक बेटी जिंदा बची रह गई तो विनायक को लगा कि ऐसा किसी शाप की वजह से हो रहा है।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/2831775.cms |title=लड़कियों की तरह हुई थी गोडसे की परवरिश |accessmonthday=[[1 जुलाई]] |accessyear=[[2010]] |last= |first= |authorlink= |coauthors= |date= |year= |month= |format= |work= |publisher=नवभारत टाइम्स |pages= |language=[[हिन्दी]]&lt;br /&gt;
 |archiveurl= |archivedate= |quote= }}&amp;lt;/ref&amp;gt; विनायक गोडसे ने मन्नत माँगी कि अगर अब लड़का होगा तो उसकी परवरिश लड़कियों की तरह ही होगी। नाथूराम की परवरिश लड़कियों की तरह करने की वजह एक मन्नत या आस्था से जुड़ी हुई थी। इसी वजह से नाथूराम को नथ पहननी पड़ी। नाथूराम गोडसे के घर वालों को लगता था कि नाथूराम के ऊपर देवी आती है।&lt;br /&gt;
{{tocright}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==देवी का ध्यान==&lt;br /&gt;
बचपन से ही नाथूराम अपनी कुलदेवी की मूर्ति के सामने बैठकर ताँबे के एक श्रीयंत्र को बैठा घूरता रहता था। नाथूराम गोडसे जब भी कुलदेवी की मूर्ति के सामने बैठकर घूरता तो उसके बाद उसे कुछ तस्वीरें या कुछ लिखा हुआ दिखता था। वह ध्यान कि अवस्था में चला जाता था। घर वालों का मानना है कि जब भी वह ध्यान कि अवस्था में होते थे तब उनके मुँह से खुद देवी जवाब देती थी। नाथूराम गोडसे के घर वालों को यकीन था कि नाथूराम गोडसे को कुछ दैवीय शक्तियाँ मिली हुई हैं। घर वाले उससे सवाल पूछते थे जिनके जवाब देवी के जवाब माने जाते थे, जो नाथूराम के जरिए बोलती हुई मानी जाती थीं। &lt;br /&gt;
==महात्मा गाँधी की हत्या==&lt;br /&gt;
[[30 जनवरी]] सन [[1948]] ई. की शाम को जब [[गाँधी जी]] एक प्रार्थना सभा में भाग लेने जा रहे थे, तब [[हिन्दू]] राष्ट्रवादी नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर [[महात्मा गाँधी]] की हत्या कर दी थी। नाथूराम गोडसे ने गाँधी जी की हत्या करने के 150 कारण न्यायालय के सामने बताये थे। नाथूराम गोडसे ने जज से आज्ञा प्राप्त कर ली थी कि वे अपने बयानों को पढ़कर सुनाना चाहते है और उन्होंने वो 150 बयान माइक पर पढ़कर सुनाए थे। उनके उन बयानों को जवाहर लाल नेहरू सरकार ने ( सच्चाई सामने आने के भय से ) प्रतिबंधित कर दिया था ।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://satyarthved.blogspot.com/2009/08/blog-post_6150.html |title=नाथुराम गोडसे और गाँधी-----भाग 1 |accessmonthday=[[2 जूलाई]] |accessyear= [[2010]] |last= |first= |authorlink= |coauthors= |date= |year= |month= |format=एच.टी.एम.एल |work= |publisher=सत्यार्थवेद ब्लॉग स्पॉट |pages= |language=[[हिन्दी]] |archiveurl= |archivedate= |quote= }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==फ़ाँसी की सज़ा==&lt;br /&gt;
महात्मा गाँधी की हत्या करने के कारण नाथूराम गोडसे को फ़ाँसी की सज़ा सुनाई गई थी। नाथूराम गोडसे को [[15 नवम्बर]] [[1949]] में [[अंबाला]] ([[हरियाणा]]) में फ़ाँसी दी गई और फ़ाँसी दिये जाने से कुछ ही समय पहले नाथूराम गोड़से ने अपने भाई दत्तात्रय को हिदायत देते हुए कहा था, कि &amp;lt;blockquote&amp;gt;“मेरी अस्थियाँ पवित्र [[सिन्धु नदी]] में ही उस दिन प्रवाहित करना जब सिन्धु नदी एक स्वतन्त्र नदी के रूप में [[भारत]] के [[तिरंगा|झंडे]] तले बहने लगे, भले ही इसमें कितने भी वर्ष लग जायें, कितनी ही पीढ़ियाँ जन्म लें, लेकिन तब तक मेरी अस्थियाँ विसर्जित न करना”।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://mahashaktigroup.bharatuday.in/2008/02/blog-post_21.html |title=नाथुराम गोड़से का अस्थि कलश विसर्जन अभी बाकी है |accessmonthday=[[2 जूलाई]] |accessyear= [[2010]] |last= |first= |authorlink= |coauthors= |date= |year= |month= |format=एच.टी.एम.एल |work= |publisher=महाशक्ति ग्रुप |pages= |language=[[हिन्दी]] |archiveurl= |archivedate= |quote= }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/2745398.cms 1944 में भी गोडसे ने किया था गांधी पर हमला]&lt;br /&gt;
*[http://www.amarujala.com/national/nat-Nathuram%20Godse%20was%20born%20the%20wrong-4211.html नाथूराम गोडसे ने पैदा की थी गड़बड़ी]&lt;br /&gt;
*[http://kataksh.blogspot.com/2007/10/blog-post_15.html तो नाथूराम गोड़से गौतम बुद्ध से प्रेरित थे]&lt;br /&gt;
*[http://www.bhaskar.com/2010/02/01/100201003306_godse_would_then_sue.html फिर चलेगा गोडसे पर मुकदमा]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:व्यक्ति परिचय]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Vishwajeetsingh</name></author>
	</entry>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE_%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%B8%E0%A5%87&amp;diff=146794</id>
		<title>नाथूराम गोडसे</title>
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		<updated>2011-04-04T05:29:32Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Vishwajeetsingh: /* परिवार */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[चित्र:nathuram godse.jpg|thumb|250px|नाथूराम गोडसे]]&lt;br /&gt;
नाथूराम गोडसे का असली नाम रामप्रसाद था। नाथूराम गोडसे [[मराठी]] थे। नाथूराम गोडसे बचपन से ही एक लड़की की तरह पले बढ़े थे और बचपन से ही नाक में बाईं तरफ नथ पहनने के कारण घर वाले उसे नाथू राम पुकारने लगे थे। नाथूराम गोडसे को लड़कियों की तरह पाले जाने के बावजूद नाथूराम को शरीर बनाने, कसरत करने और तैरने का शौक़ था। जब भी गाँव में गहरे कुएँ से खोए हुए बर्तन तलाशने होते या किसी बीमार को जल्द डॉक्टर के पास पहुँचाना होता तो नाथूराम को याद किया जाता था। [[पुणे]] से [[मराठी भाषा]] में अपना अखबार निकालने के पहले नाथूराम लकड़ी के काम और सिलाई में भी अपना हाथ आज़मा चुका था।&lt;br /&gt;
==परिवार==&lt;br /&gt;
नाथूराम गोडसे का जन्म 19 [[मई]] [[1910]] [[मुंबई]]- पुणे के बीच में एक राष्ट्रवादी हिन्दू  परिवार में हुआ था। नाथूराम गोडसे के पिता विनायक गोडसे पोस्ट ऑफिस में काम करते थे। जब विनायक गोडसे के पहले 3 बेटे बचपन में ही चल बसे और एक बेटी जिंदा बची रह गई तो विनायक को लगा कि ऐसा किसी शाप की वजह से हो रहा है।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/2831775.cms |title=लड़कियों की तरह हुई थी गोडसे की परवरिश |accessmonthday=[[1 जुलाई]] |accessyear=[[2010]] |last= |first= |authorlink= |coauthors= |date= |year= |month= |format= |work= |publisher=नवभारत टाइम्स |pages= |language=[[हिन्दी]]&lt;br /&gt;
 |archiveurl= |archivedate= |quote= }}&amp;lt;/ref&amp;gt; विनायक गोडसे ने मन्नत माँगी कि अगर अब लड़का होगा तो उसकी परवरिश लड़कियों की तरह ही होगी। नाथूराम की परवरिश लड़कियों की तरह करने की वजह एक मन्नत या आस्था से जुड़ी हुई थी। इसी वजह से नाथूराम को नथ पहननी पड़ी। नाथूराम गोडसे के घर वालों को लगता था कि नाथूराम के ऊपर देवी आती है।&lt;br /&gt;
{{tocright}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==देवी का ध्यान==&lt;br /&gt;
बचपन से ही नाथूराम अपनी कुलदेवी की मूर्ति के सामने बैठकर ताँबे के एक श्रीयंत्र को बैठा घूरता रहता था। नाथूराम गोडसे जब भी कुलदेवी की मूर्ति के सामने बैठकर घूरता तो उसके बाद उसे कुछ तस्वीरें या कुछ लिखा हुआ दिखता था। वह ध्यान कि अवस्था में चला जाता था। घर वालों का मानना है कि जब भी वह ध्यान कि अवस्था में होते थे तब उनके मुँह से खुद देवी जवाब देती थी। नाथूराम गोडसे के घर वालों को यकीन था कि नाथूराम गोडसे को कुछ दैवीय शक्तियाँ मिली हुई हैं। घर वाले उससे सवाल पूछते थे जिनके जवाब देवी के जवाब माने जाते थे, जो नाथूराम के जरिए बोलती हुई मानी जाती थीं। &lt;br /&gt;
==महात्मा गाँधी की हत्या==&lt;br /&gt;
[[30 जनवरी]] सन [[1948]] ई. की शाम को जब [[गाँधी जी]] एक प्रार्थना सभा में भाग लेने जा रहे थे, तब [[हिन्दू]] कट्टरपंथी नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर [[महात्मा गाँधी]] की हत्या कर दी थी। नाथूराम गोडसे ने गाँधी जी की हत्या करने के 150 कारण न्यायालय के सामने बताये थे। नाथूराम गोडसे ने जज से आज्ञा प्राप्त कर ली थी कि वे अपने बयानों को पढ़कर सुनाना चाहते है और उन्होंने वो 150 बयान माइक पर पढ़कर सुनाए थे।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://satyarthved.blogspot.com/2009/08/blog-post_6150.html |title=नाथुराम गोडसे और गाँधी-----भाग 1 |accessmonthday=[[2 जूलाई]] |accessyear= [[2010]] |last= |first= |authorlink= |coauthors= |date= |year= |month= |format=एच.टी.एम.एल |work= |publisher=सत्यार्थवेद ब्लॉग स्पॉट |pages= |language=[[हिन्दी]] |archiveurl= |archivedate= |quote= }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==फ़ाँसी की सज़ा==&lt;br /&gt;
महात्मा गाँधी की हत्या करने के कारण नाथूराम गोडसे को फ़ाँसी की सज़ा सुनाई गई थी। नाथूराम गोडसे को [[15 नवम्बर]] [[1949]] में [[अंबाला]] ([[हरियाणा]]) में फ़ाँसी दी गई और फ़ाँसी दिये जाने से कुछ ही समय पहले नाथूराम गोड़से ने अपने भाई दत्तात्रय को हिदायत देते हुए कहा था, कि &amp;lt;blockquote&amp;gt;“मेरी अस्थियाँ पवित्र [[सिन्धु नदी]] में ही उस दिन प्रवाहित करना जब सिन्धु नदी एक स्वतन्त्र नदी के रूप में [[भारत]] के [[तिरंगा|झंडे]] तले बहने लगे, भले ही इसमें कितने भी वर्ष लग जायें, कितनी ही पीढ़ियाँ जन्म लें, लेकिन तब तक मेरी अस्थियाँ विसर्जित न करना”।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://mahashaktigroup.bharatuday.in/2008/02/blog-post_21.html |title=नाथुराम गोड़से का अस्थि कलश विसर्जन अभी बाकी है |accessmonthday=[[2 जूलाई]] |accessyear= [[2010]] |last= |first= |authorlink= |coauthors= |date= |year= |month= |format=एच.टी.एम.एल |work= |publisher=महाशक्ति ग्रुप |pages= |language=[[हिन्दी]] |archiveurl= |archivedate= |quote= }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/2745398.cms 1944 में भी गोडसे ने किया था गांधी पर हमला]&lt;br /&gt;
*[http://www.amarujala.com/national/nat-Nathuram%20Godse%20was%20born%20the%20wrong-4211.html नाथूराम गोडसे ने पैदा की थी गड़बड़ी]&lt;br /&gt;
*[http://kataksh.blogspot.com/2007/10/blog-post_15.html तो नाथूराम गोड़से गौतम बुद्ध से प्रेरित थे]&lt;br /&gt;
*[http://www.bhaskar.com/2010/02/01/100201003306_godse_would_then_sue.html फिर चलेगा गोडसे पर मुकदमा]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:व्यक्ति परिचय]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Vishwajeetsingh</name></author>
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		<title>सदस्य वार्ता:Vishwajeetsingh</title>
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		<updated>2011-04-02T21:35:37Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Vishwajeetsingh: आजाद हिन्द फौज के संस्थापक आर्यन पेशवा राजा महेन्द्र प्रताप&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;आजाद हिन्द फौज के संस्थापक आर्यन पेशवा राजा महेन्द्र प्रताप&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Vishwajeetsingh</name></author>
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