<?xml version="1.0"?>
<feed xmlns="http://www.w3.org/2005/Atom" xml:lang="hi">
	<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?action=history&amp;feed=atom&amp;title=%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5</id>
	<title>अजपार्श्व - अवतरण इतिहास</title>
	<link rel="self" type="application/atom+xml" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?action=history&amp;feed=atom&amp;title=%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5"/>
	<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5&amp;action=history"/>
	<updated>2026-06-21T15:05:33Z</updated>
	<subtitle>विकि पर उपलब्ध इस पृष्ठ का अवतरण इतिहास</subtitle>
	<generator>MediaWiki 1.41.1</generator>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5&amp;diff=253102&amp;oldid=prev</id>
		<title>रविन्द्र प्रसाद: ''''अजपार्श्व''' श्वेतकर्ण और मालिनी के पुत्र थे। इनके श...' के साथ नया पन्ना बनाया</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5&amp;diff=253102&amp;oldid=prev"/>
		<updated>2012-02-11T11:27:16Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;अजपार्श्व&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; श्वेतकर्ण और मालिनी के पुत्र थे। इनके श...&amp;#039; के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;'''अजपार्श्व''' श्वेतकर्ण और मालिनी के पुत्र थे। इनके शरीर का पार्श्व हिस्सा बकरे के समान [[काला रंग|काला]] पड़ गया था, इसीलिए इनका नाम 'अजपार्श्व' पड़ा। [[पुराण|पुराणों]] में अजपार्श्व के सन्दर्भ में निम्न दो प्रसंग प्राप्त होते हैं-&lt;br /&gt;
====प्रथम प्रसंग====&lt;br /&gt;
[[परीक्षित]] कुमार [[जनमेजय]] की पत्नी ने दो पुत्रों को जन्म दिया। उनके नाम 'चंद्रापीड' तथा 'सूर्यापीड' थे। चंद्रापीड के सौ पुत्र थे, वे सब 'जानमेजय' नाम से विख्यात हुए। सूर्यापीड मोक्षधर्म के ज्ञाता हुए। जानमेजय में सबसे बड़े का नाम 'सत्यकर्ण' था। उसके पुत्र श्वेतकर्ण तपोवन चले गये थे। वहाँ उसकी पत्नी ने एक पुत्र को जन्म दिया। वह पुत्र को वन में ही छोड़कर पति का अनुसरण करती हुई महाप्रस्थान की ओर अग्रसर हुई। जंगल में राजकुमार के छटपटाने से उसका पार्श्वभाग छिलकर बकरे की पार्श्व की भाँति काला और सख्त हो गया। अत: उसका नाम 'अजपार्श्व' पड़ा। उस रोते हुए बालक को अविष्ठा के दोनों पुत्रों 'पिप्पलाद' और 'कौशिक' ने उठा लिया तथा लालन-पालन किया।&amp;lt;ref&amp;gt;[[हरिवंशपुराण]], भविष्य पर्व, 1&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
====द्वितीय प्रसंग====&lt;br /&gt;
जनमेजयवंशीय राजा श्वेतकर्ण&amp;lt;ref&amp;gt;सत्यकर्ण के पुत्र&amp;lt;/ref&amp;gt; पुत्र की इच्छा से पत्नी सहित तपोवन चले गए। पत्नी के गर्भवती होने के उपरान्त उन्होंने स्वर्ग की यात्रा आरम्भ की। पत्नी मालिनी ने भी उनका अनुसरण किया। मार्ग में जन्में बालक को वहीं वन में छोड़कर वह पति की अनुगामिनी हुई। बालक के दोनों पार्श्व [[पर्वत]] शिला पर घिसकर लहूलुहान हो गये। उधर से जाते हुए श्रवण के पुत्रों पिप्पलाद और कौशिक ने बालक को उठा लिया। बालक के पार्श्व का [[रंग]] बकरे के समान [[काला रंग|काला]] पड़ा हुआ था, अत: वह 'अजपार्श्व' के नाम से विख्यात हुआ। रेमन मुनि के आश्रम में उसका लालन-पालन हुआ। वह रेमनी पुत्र&amp;lt;ref&amp;gt;रेमन की पत्नी का पुत्र&amp;lt;/ref&amp;gt; बन गया। दोनों [[ब्राह्मण]] उसके मंत्री बने। वह पौरव वंशी था। [[पांडव]] आदि का जन्म भी इसी वंश में हुआ था।&amp;lt;ref&amp;gt;[[ब्रह्मपुराण]], 13|125-140|-&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1|माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध=}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
{{पुस्तक संदर्भ |पुस्तक का नाम=भारतीय मिथक कोश|लेखक= डॉ. उषा पुरी विद्यावाचस्पति|अनुवादक= |आलोचक= |प्रकाशक=नेशनल पब्लिशिंग हाउस, नई दिल्ली|संकलन= |संपादन= |पृष्ठ संख्या=08|url=}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{पौराणिक चरित्र}}&lt;br /&gt;
[[Category:पौराणिक चरित्र]]&lt;br /&gt;
[[Category:पौराणिक कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध चरित्र और मिथक कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>रविन्द्र प्रसाद</name></author>
	</entry>
</feed>