<?xml version="1.0"?>
<feed xmlns="http://www.w3.org/2005/Atom" xml:lang="hi">
	<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?action=history&amp;feed=atom&amp;title=%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B6</id>
	<title>आयरिश - अवतरण इतिहास</title>
	<link rel="self" type="application/atom+xml" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?action=history&amp;feed=atom&amp;title=%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B6"/>
	<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B6&amp;action=history"/>
	<updated>2026-06-06T15:37:39Z</updated>
	<subtitle>विकि पर उपलब्ध इस पृष्ठ का अवतरण इतिहास</subtitle>
	<generator>MediaWiki 1.41.1</generator>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B6&amp;diff=630885&amp;oldid=prev</id>
		<title>यशी चौधरी: ''''आयरिश''' आयरलैंड की भाषा तथा साहित्य को 'आयरिश' नाम स...' के साथ नया पृष्ठ बनाया</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B6&amp;diff=630885&amp;oldid=prev"/>
		<updated>2018-06-14T11:41:35Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;आयरिश&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; आयरलैंड की भाषा तथा साहित्य को &amp;#039;आयरिश&amp;#039; नाम स...&amp;#039; के साथ नया पृष्ठ बनाया&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;'''आयरिश''' आयरलैंड की भाषा तथा साहित्य को 'आयरिश' नाम से जाना जाता है। आयरलैंड में अंग्रेजों के प्रभुत्वकाल में तो अंग्रेेजी की ही प्रधानता रही, पर देश की स्वाधीनता के बाद वहाँ की अपनी भाषा आयरिश (गैली) को फिर से महत्व दिया गया। गैली का साहित्य पाँचवी शताब्दी ई. तक का मिलता है। आयरिश भारत यूरोपीय कुल की केल्टिक शाखा के गोइडेली वर्ग से संबद्ध नहीं मानी जाती है। विकास की दृष्टि से आयरिश भाषा के इतिहास को तीन कालों में विभक्त किया जाता है-(1) प्राचीन आयरिश सातवीं सदी नवीं सदी के मध्य तक, (2) मध्यकालीन आयरिश नवीं से 12वीं सदी तक तथा (3) आधुनिक 13वीं सदी के उपरांत। आधुनिक आयरिश को पुन: दो कालों में बाँटते हैं-17वीं सदी से पूर्व तथा 17वीं सदी के बाद। राष्ट्रीय पुनर्जागरण के फलस्वरूप आयरिश को देश में फिर से स्थापित तो किया गया, परंतु आधुनिक आयरिश का कोई एक स्थिरीकृत रूप नहीं बन सका है। आयरिश की कई बोलियाँ अब भी महत्व की स्थिति लिए हुए हैं। प्रमुखत: आयरिश बोले जानेवाले क्षेत्रों में 1946 की गणना के अनुसार 1,92,963 आयरिश भाषाभाषी बताए गए थे, जब कि संपूर्ण आयरलैंड में यह संख्या 5,88,725 थी। इस संख्या में काफी बड़ा समूह ऐसे लोगों का है जो अंग्रेजी का प्रयोग भी समान सुविधा और इच्छा से करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रारंभिक आयरिश साहित्य में शौर्यगाथाओं की प्रधानता रही है जो गद्य तथा पद्य के मिले जुले रूप में लिखी गई थीं। ऐसे गाथाचक्रों में 'अलस्टर' का नाम विशेष महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त आदिकालीन आयरिश कविता में गीत तत्व की भी प्रधानता थी। ऐसा काव्य प्रमुखत: धार्मिक तथा प्रकृति सम्बंधी प्रेरणाओं की पृठभूमि में लिखा गया था। इन धार्मिक गीतों में सेंट पैट्रिक का गीत तथा उल्टान का सेंट ब्रिजिट के प्रति गीत विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। नवीं तथा 10वीं सदी के आसपास ऐतिहासिक आभास देनेवाले साहित्य का सर्जन हुआ। धार्मिक साहित्य के अंतर्गत उपदेश, संतों के चरित्र तथा इलहाम आदि आते हैं। इस वर्ग के लेखकों में माइकेल ओ' क्लेरे (17वीं सदी) का नाम महत्वपूर्ण है। फिर इस युग में ऐतिहासिक रचनाएँ भी लिखी गईं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रारंभिक आधुनिक आयरिश साहित्य को क्लैसिकल युग कहकर भी अभिहित किया जाता है। 13वीं से 17वीं शताब्दी के बीच प्रमुखत: दरबारों में लिखा गया काव्य ऐसे कवियों द्वारा प्रस्तुत किया गया जिन्हें पेशेवर कहा जा सकता है। इन कवियों ने अपनी कुछ रचनाएँ गद्य में भी लिखीं। 17वीं सदी के अंत तक यह चारणकाव्य समाप्त हो जाता है। नए काव्यसंप्रदाय में स्वराघात पर आधारित छंदयोजना प्रचलित हुई। इस युग के प्रमुख कवि थे ईगन ओ' राहिली (18वीं सदी का पूर्व) तथा धार्मिक कवि ताग गैले ओ' सुइलयाँ। रिवाइवलिस्ट आंदोलन के प्रमुख लेखकों में हैं---थॉमस ओ' क्रिओमथाँ (मृत्यु--1937), थॉमस ओ' सुइलयाँ, पैप्लेट ओ' कोनर तथा माहरे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आयरिश पुनर्जागरण का एक सशक्त रूप अंग्रेजी साहित्य में भी व्यक्ति हुआ है जहाँ आयरलैंड के अंग्रेजी लेखकों ने अपनी रचनाओं में आयरिश लोकतत्व, शब्दविधान तथा प्रतीकयोजना के अत्यंत सफल प्रयोग किए हैं। इस आंदोलन को आयरिश या केल्टिक पुनर्जागरण के नाम से जाना जाता है।&amp;lt;ref&amp;gt;{{पुस्तक संदर्भ |पुस्तक का नाम=हिन्दी विश्वकोश, खण्ड 1|लेखक= |अनुवादक= |आलोचक= |प्रकाशक= नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी|संकलन= भारत डिस्कवरी पुस्तकालय|संपादन= |पृष्ठ संख्या=399 |url=}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार= |प्रारम्भिक=प्रारम्भिक2 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{भाषा और लिपि}}&lt;br /&gt;
[[Category:भाषा और लिपि]][[Category:भाषा कोश]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:हिन्दी विश्वकोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>यशी चौधरी</name></author>
	</entry>
</feed>