<?xml version="1.0"?>
<feed xmlns="http://www.w3.org/2005/Atom" xml:lang="hi">
	<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?action=history&amp;feed=atom&amp;title=%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%B8%E0%A5%80</id>
	<title>तारकसी - अवतरण इतिहास</title>
	<link rel="self" type="application/atom+xml" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?action=history&amp;feed=atom&amp;title=%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%B8%E0%A5%80"/>
	<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%B8%E0%A5%80&amp;action=history"/>
	<updated>2026-06-09T11:47:49Z</updated>
	<subtitle>विकि पर उपलब्ध इस पृष्ठ का अवतरण इतिहास</subtitle>
	<generator>MediaWiki 1.41.1</generator>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%B8%E0%A5%80&amp;diff=663924&amp;oldid=prev</id>
		<title>रविन्द्र प्रसाद: ''''तारकसी''' एक भारतीय कला (काष्ठकला) है। उत्तर प्रदेश...' के साथ नया पृष्ठ बनाया</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%B8%E0%A5%80&amp;diff=663924&amp;oldid=prev"/>
		<updated>2021-06-13T09:49:26Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;तारकसी&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; एक भारतीय कला (काष्ठकला) है। उत्तर प्रदेश...&amp;#039; के साथ नया पृष्ठ बनाया&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;'''तारकसी''' एक भारतीय कला (काष्ठकला) है। [[उत्तर प्रदेश]] का [[मैनपुरी ज़िला]] ही पूरी दुनिया में तारकसी कला का एकमात्र केंद्र है। तारकसी लकड़ी पर की जाने वाली एक तरह की नक्काशी है जो [[धातु]] के तारों से की जाती है। इसके लिए लकड़ी को खास तरह से तैयार किया जाता है जो एक जटिल और लम्बी प्रक्रिया है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
*तारकसी कला की शुरुआत कैसे हुई, ये कहना मुश्किल है। लेकिन [[भारत]] में जब ब्रितानी हुकमत का सिलसिला शुरू हुआ तो तारकसी सात [[समुन्द्र]] पार पहुंच गई।&lt;br /&gt;
*हिंदुस्तान से सीधे इस कला को पहचान नहीं मिली। [[यूरोप]] के देशों में इस कला को जबरदस्त लोकप्रियता हासिल हुई।&lt;br /&gt;
*18वीं सदी में तारकसी के चाहने वाले पुरी दुनिया में हो गए, लेकिन अफसोस मैनपुरी में तारकसी की कला दम तोड़ती रही।&lt;br /&gt;
*मैनपुरी की भोगोलिक स्थिति के चलते तारकसी मैनपुरी की पहचान बनी थी। एक समय था जब मैनपुरी के हर घर में तारकसी की झलक मिलती थी। प्रसिद्ध [[इतिहासकार]] परसी ब्राउन ने भी इस कला का जिक्र किया है।&lt;br /&gt;
*आजादी के बाद तारकसी से बनाई गई शीशम की लकड़ी से निर्मित काष्ठ [[हाथी]] की प्रतिमा शिल्पकार रामस्वरूप ने [[राष्ट्रपति]] को भेंट की थी। मैनपुरी में रामस्वरूप ने इस कला को जीवित रखने में विशेष योगदान दिया।&lt;br /&gt;
*[[शीशम]] की प्लेट पर बनी तारकसी की आकृति कलाकृतियां उपहार में देने का चलन है। रथों का प्रयोग [[इतिहास]] से मिलता है।&lt;br /&gt;
*तेजगति से चलने वाले रथ और मंझोली के पहिया तारकसी कला का शानदार उदाहरण है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{हस्तशिल्प उद्योग}}&lt;br /&gt;
[[Category:उत्तर प्रदेश]][[Category:उत्तर प्रदेश की कला]][[Category:उत्तर प्रदेश की संस्कृति]][[Category:हस्तशिल्प कला]][[Category:हस्तशिल्प उद्योग]]&lt;br /&gt;
[[Category:संस्कृति कोश]][[Category:वाणिज्य व्यापार कोश]][[Category:कला कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>रविन्द्र प्रसाद</name></author>
	</entry>
</feed>