<?xml version="1.0"?>
<feed xmlns="http://www.w3.org/2005/Atom" xml:lang="hi">
	<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?action=history&amp;feed=atom&amp;title=%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%BE_%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80</id>
	<title>प्रवरा नदी - अवतरण इतिहास</title>
	<link rel="self" type="application/atom+xml" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?action=history&amp;feed=atom&amp;title=%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%BE_%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80"/>
	<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%BE_%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80&amp;action=history"/>
	<updated>2026-06-21T04:58:19Z</updated>
	<subtitle>विकि पर उपलब्ध इस पृष्ठ का अवतरण इतिहास</subtitle>
	<generator>MediaWiki 1.41.1</generator>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%BE_%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80&amp;diff=242987&amp;oldid=prev</id>
		<title>रविन्द्र प्रसाद: ''''प्रवरा नदी''' की उत्पत्ति और उसके प्रवाहमान होने की ...' के साथ नया पन्ना बनाया</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%BE_%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80&amp;diff=242987&amp;oldid=prev"/>
		<updated>2011-12-26T12:38:12Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;प्रवरा नदी&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; की उत्पत्ति और उसके प्रवाहमान होने की ...&amp;#039; के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;'''प्रवरा नदी''' की उत्पत्ति और उसके प्रवाहमान होने की कथा [[समुद्र मंथन]] के समय [[ब्रह्मपुराण]] में आती है। [[देवता|देवताओं]] ने समुद्र मंथन के फलस्वरूप निकले अमृत के वितरण के लिए एक शुभ मुहूर्त निकाला। [[असुर|असुरों]] को इस शुभ मुहूर्त तथा अमृत वितरण से अलग रखा गया था, जिससे कि वे अमृत का पान न करने पायें। [[राहु]] को इस बात का पता चल गया, कि सिर्फ़ देवता ही अमृत का पान करेंगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*देवताओं की चाल को जान लेने के बाद राहु अमृत पान का उपाय खोजने लगा।&lt;br /&gt;
*मरुद्गणों के मध्य छिपकर राहु ने भी अमृत का पान कर लिया।&lt;br /&gt;
*[[आदित्य देवता]] ने छिपकर बैठे हुए राहु को पहचान लिया।&lt;br /&gt;
*[[विष्णु]] ने तत्काल अपने [[चक्र अस्त्र|चक्र]] से राहु का सिर काट डाला, लेकिन अमृत पान से राहु का सिर और धड़ अमर हो चुके थे।&lt;br /&gt;
*देवता भयभीत थे, कि सिर और धड़ जुड़कर नया बखेड़ा न शुरू कर दें।&lt;br /&gt;
*राहु के सिर ने देवताओं को राय दी कि उसका धड़ चीरकर अमृत निकाल लें, तदुपरान्त वह धड़ भस्म हो जायेगा।&lt;br /&gt;
*देवताओं ने उसके सिर को राहु के रूप में [[नक्षत्र|नक्षत्रों]] में स्थान दिया।&lt;br /&gt;
*धड़ से अमृत निकालकर एक स्थान पर स्थापित कर दिया गया।&lt;br /&gt;
*राहु के शेष धड़ को [[काली देवी|भद्र काली]] (अम्बिका) चट कर गईं, और उसमें विद्यमान रस भी पी गई।&lt;br /&gt;
*जो रस बह गया था, उसकी बूंद-बूंद से 'प्रवरा नदी' की उत्पत्ति हुई और वह प्रवहमान हो [[पृथ्वी ग्रह|पृथ्वी]] पर बहने लगी।&amp;lt;ref&amp;gt;[[ब्रह्मपुराण]], 106&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1|माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध=}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
{{पुस्तक संदर्भ |पुस्तक का नाम=भारतीय संस्कृति कोश, भाग-2|लेखक=|अनुवादक= |आलोचक= |प्रकाशक=यूनिवर्सिटी पब्लिकेशन, नई दिल्ली-110002|संकलन= |संपादन=प्रोफ़ेसर देवेन्द्र मिश्र|पृष्ठ संख्या=517|url=}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{भारत की नदियाँ}}&lt;br /&gt;
[[Category:पौराणिक नदियाँ]][[Category:भारत की नदियाँ]][[Category:भूगोल कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>रविन्द्र प्रसाद</name></author>
	</entry>
</feed>