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	<title>शाकल - अवतरण इतिहास</title>
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	<subtitle>विकि पर उपलब्ध इस पृष्ठ का अवतरण इतिहास</subtitle>
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		<title>रविन्द्र प्रसाद: ''''शाकल''' या 'शाकल नगर' एक ऐतिहासिक स्थान, जिसका अभिज्ञा...' के साथ नया पन्ना बनाया</title>
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		<updated>2014-08-18T10:22:55Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;शाकल&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; या &amp;#039;शाकल नगर&amp;#039; एक ऐतिहासिक स्थान, जिसका अभिज्ञा...&amp;#039; के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;'''शाकल''' या 'शाकल नगर' एक ऐतिहासिक स्थान, जिसका अभिज्ञान पश्चिमी [[पाकिस्तान]] के [[सियालकोट]] से किया जाता है। [[टॉल्मी]] ने इसे 'यूथेडेमिया' कहा था। [[महाभारत]] काल में सियालकोट मद्रों की राजधानी थी। शाकल 326 ई. पू. में [[सिकन्दर|सिकन्दर महान]] के आधिपत्य में चला गया था। उसने इसे [[झेलम नदी|झेलम]] तथा [[चिनाब नदी|चिनाब]] के मध्यवर्ती क्षेत्र के [[क्षत्रप]] के अधीन कर दिया था।&amp;lt;ref name=&amp;quot;aa&amp;quot;&amp;gt;{{पुस्तक संदर्भ |पुस्तक का नाम=ऐतिहासिक स्थानावली|लेखक=विजयेन्द्र कुमार माथुर|अनुवादक= |आलोचक= |प्रकाशक=राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी, जयपुर|संकलन= भारतकोश पुस्तकालय|संपादन= |पृष्ठ संख्या=893|url=}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{tocright}}&lt;br /&gt;
==इतिहास==&lt;br /&gt;
विद्वानों का मत है कि 'शाकल' नाम का संबंध [[शक]] से है। यह स्थान सम्भवतः शकों अथवा शकस्थान के निवासी ईरानियों के निवास के कारण 'शाकल' कहलाता था। ईरानी मगों का संबंध भी शाकल से बताया जाता है। [[महाभारत]] में शाकल को 'मद्र देश' में स्थित माना गया है। इस नगर में मद्राधिप [[शल्य]] का राज्य था। इन्हें [[नकुल]] ने अपनी दिग्विजय यात्रा के प्रसंग में विजित किया था-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;'स चास्यगतभी राजन् प्रतिजग्राह शासनम्, ततः शाकल-मम्येत्य मद्राणां पुटभेदनं मातुलं प्रीतिपूर्वेण शल्य चक्रवशे बली।'&amp;lt;ref&amp;gt;[[महाभारत]], [[सभापर्व महाभारत|सभापर्व]] 32,14-15&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
====यात्री तथा इतिहासकारों का उल्लेख====&lt;br /&gt;
'[[मिलिन्दपन्ह|मिलिन्दपन्हों]]' में [[यवन|यवनराज]] [[मिलिंद (मिनांडर)|मिलिंद]] अथवा मिनेंडर&amp;lt;ref&amp;gt;द्वितीय शती ई. पू.&amp;lt;/ref&amp;gt; की राजधानी 'शागल' या 'शाकल' बताई गई है। [[अलक्षेंद्र]] (अलेग्जेंडर) के [[इतिहास]] लेखकों ने भी इस स्थान को 'सागल' या 'सांगल' कहा है। [[यूनानी]] लेखकों ने सांगल का [[कठ|कठ जाति]] के वीर [[क्षत्रिय|क्षत्रियों]] का मुख्य स्थान बताया है और उनके शौर्य की बहुत प्रशंसा की है। चीनी यात्री [[युवानच्वांग]] (7वीं शती) ने इस नगर को देखा था। उसने इसे 'शेकालो' लिखा है और [[हूण]] नरेश [[मिहिरकुल]] की यहां राजधानी बतायी है। [[कनिंघम]] ने 'सागल' का अभिज्ञान ज़िला गुजरांवाला ([[पंजाब]]) में स्थित संगला नामक पहाड़ी से किया है। स्मिथ के अनुसार यह स्थान [[झंग|ज़िला झंग]] में स्थित 'चिनोट' या 'शाहकोट' है। किन्तु अनेक प्रमाणों के बल पर फ्लीट ने सिद्ध किया है कि शाकल वास्तव में [[सियालकोट]] ही है।&amp;lt;ref&amp;gt;चतुर्दश ग्रोरियंटल कांग्रेस 1905, एलजीयर्स, भारत विभाग-पृ. 164&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref name=&amp;quot;aa&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य==&lt;br /&gt;
*[[महाभारत]] काल के शाकल निवासियों के आचार व्यवहार को दूषित समझा जाता था-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;'शाकलं नाम नगरमापगानाम निम्नगा, जर्तिंकानाम वाहीकास्तेषां वृत्तं सुनिश्चितम्।'&amp;lt;ref&amp;gt;[[महाभारत]], [[कर्णपर्व महाभारत|कर्णपर्व]] 44,10&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उपरोक्त उद्धरण से सिद्ध होता है कि महाभारत के समय में [[बाहीक|बाहीकों]] की राजधानी शाकल में थी तथा वहां 'जर्तिक' ([[जाट]]) नामक बाहीको का निवास था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*शाकल के निकट 'अपगा' नामक नदी बहती थी। शाकल को महाभारत में शाकल द्वीप भी कहा गया है। महाभारत, कर्णपर्व&amp;lt;ref&amp;gt;कर्णपर्व 44,7&amp;lt;/ref&amp;gt; से भी यह विदित होता है कि बाहीक देश [[पंजाब]] की [[पंचनद (नदियाँ)|पांच नदियों]] से तथा छठी [[सिन्धु नदी|सिन्धु]] से घिरा हुआ था और इसका एक नाम 'आरट्ट' भी था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*कलिंगबोधि जातक तथा कुरू जातक में भी सााकल (शाकल) का मद्र प्रदेश के रूप में उल्लेख है। सियालकोट के आसपास का प्रदेश तो [[गुरु गोविन्द सिंह]] के समय तक (17वीं शती) तक मद्र देश कहलाता था।&amp;lt;ref&amp;gt;मालकम-स्केच ऑफ दि सिखरा, पृ. 55&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
*एक किवदंती के अनुसार भक्त पूरनमल सियालकोट के निवासी थे। इस स्थान पर वह कूप भी स्थित है, जिसमें पूरनमल को हाथ-पैर काट कर डाल दिया गया था। कूप के निकट ही गुरु गोरखनाथ का मन्दिर है।&lt;br /&gt;
*शाकल या सांगल को सागलनगर भी कहते है। एक प्राचीन किंवदंती के अनुसार शाकल को [[महाभारत]] कालीन राजा [[शाल्व]] ने बसाया था तथा राजा शालिवाहन ने दुबारा बसाकर यहां एक [[दुर्ग]] का निर्माण किया था।&amp;lt;ref name=&amp;quot;aa&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक= प्रारम्भिक1|माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{विदेशी स्थान}}&lt;br /&gt;
[[Category:विदेशी स्थान]][[Category:ऐतिहासिक स्थल]][[Category:विदेशी नगर]][[Category:महाभारत]][[Category:पौराणिक कोश]][[Category:ऐतिहासिक स्थान कोश]][[Category:इतिहास कोश]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>रविन्द्र प्रसाद</name></author>
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