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||संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना 24 अक्टूवर, 1945 को संयुक्त राष्ट्र अधिकार-पत्र पर 50 देशों के हस्ताक्षर होने के साथ हुई। इसकी संरचना में सुरक्षा परिषद वाले सबसे शक्तिशाली देश (संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस, रूस और ब्रिटेन) द्वितीय विश्व युद्ध में बहुत अहम देश थे। वर्तमान में 193 देश उसके सदस्य हैं इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क (संयुक्त राज्य अमेरिका) में हैं। | ||[[संयुक्त राष्ट्र संघ]] की स्थापना 24 अक्टूवर, 1945 को संयुक्त राष्ट्र अधिकार-पत्र पर 50 देशों के हस्ताक्षर होने के साथ हुई। इसकी संरचना में सुरक्षा परिषद वाले सबसे शक्तिशाली देश ([[संयुक्त राज्य अमेरिका]], [[फ्रांस]], [[रूस]] और [[ब्रिटेन]]) द्वितीय विश्व युद्ध में बहुत अहम देश थे। वर्तमान में 193 देश उसके सदस्य हैं इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क (संयुक्त राज्य अमेरिका) में हैं। | ||
{निम्न में से कौन नौकरशाही की विशेषता नहीं है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-135,प्रश्न-39 | {निम्न में से कौन नौकरशाही की विशेषता नहीं है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-135,प्रश्न-39 | ||
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+अक्षमता | +अक्षमता | ||
-गोपनीयता | -गोपनीयता | ||
||स्थायित्व, तटस्थता तथा अनामता नौकरशाही की विशेषताएं हैं | ||स्थायित्व, तटस्थता तथा अनामता नौकरशाही की विशेषताएं हैं जबकि अक्षमता नौकरशाही का लक्षण नहीं है। | ||
{"स्व निर्णय का सिद्धांत दुधारी तलवार है" किसने कहा? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-196,प्रश्न-21 | {"स्व निर्णय का सिद्धांत दुधारी तलवार है" किसने कहा? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-196,प्रश्न-21 | ||
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-दुड्रो विल्सन | -दुड्रो विल्सन | ||
+लॉर्ड कर्जन | +लॉर्ड कर्जन | ||
-रबींद्र नाथ टैगोर | -[[रवींद्रनाथ टैगोर|रबींद्र नाथ टैगोर]] | ||
-बर्टैण्ड रसेल | -बर्टैण्ड रसेल | ||
||'स्व निर्णय का सिद्धांत दुधारी तलवार है।" यह कथन लार्ड कर्जन का है जिसे उन्होंने 1923 के 'लुसाने पीस कांफ्रेंस में स्वनिर्णय के अधिकार की आलोचना करते हुए रहा था। | ||'स्व निर्णय का सिद्धांत दुधारी तलवार है।" यह कथन लार्ड कर्जन का है जिसे उन्होंने 1923 के 'लुसाने पीस कांफ्रेंस में स्वनिर्णय के अधिकार की आलोचना करते हुए रहा था। | ||
{फ्रांस का वर्तमान संविधान किस गंणतंत्र के नाम से जान जाता है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-196,प्रश्न-22 | {[[फ्रांस]] का वर्तमान संविधान किस गंणतंत्र के नाम से जान जाता है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-196,प्रश्न-22 | ||
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-तृंतीय | -तृंतीय | ||
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+पंचम | +पंचम | ||
-षष्ठम | -षष्ठम | ||
||फ्रांस का वर्तमान संविधान पंचम गंणतंत्र के नाम से जाना जाता है। फ्रांस में राजतंत्र को समाप्त करने के लिए कई महान क्रांतियां हुई जिससे प्रभुसत्ता को जनसाधारण में निहित करने और व्यक्तिगत अधिकारों को व्यापक बनाने तथा साथ ही केंद्रीकरण की और अधिक सुदृढ़ बनाने में सहायता मिली। क्रांति के परिणामस्वरूप तृतीय गणतंत्र में संसद को अत्यधिक शक्ति संपन्न करके राष्ट्रपति को निर्बल बना दिया गया, राज्य का विकेंद्रीकरण नहीं हुआ। वर्ष 1946 में चतुर्थ गणतंत्र की स्थापना हुई जिसके द्वारा केंद्र की शक्ति को कम करके स्थानीय संस्थाओं को शक्ति प्रदान की गई। फ्रांस का चौथा गणतंत्र अधिक समय तक नहीं चला और एक जनमत संग्रह के उपरांत 5 अक्टूबर, 1958 को वर्तमान पंचम गणतंत्र का संविधान प्रवर्तित हुआ जो फ्रांस का 15वां संविधान है। | ||[[फ्रांस]] का वर्तमान संविधान पंचम गंणतंत्र के नाम से जाना जाता है। फ्रांस में राजतंत्र को समाप्त करने के लिए कई महान क्रांतियां हुई जिससे प्रभुसत्ता को जनसाधारण में निहित करने और व्यक्तिगत अधिकारों को व्यापक बनाने तथा साथ ही केंद्रीकरण की और अधिक सुदृढ़ बनाने में सहायता मिली। क्रांति के परिणामस्वरूप तृतीय गणतंत्र में [[संसद]] को अत्यधिक शक्ति संपन्न करके [[राष्ट्रपति]] को निर्बल बना दिया गया, राज्य का विकेंद्रीकरण नहीं हुआ। वर्ष 1946 में चतुर्थ गणतंत्र की स्थापना हुई जिसके द्वारा केंद्र की शक्ति को कम करके स्थानीय संस्थाओं को शक्ति प्रदान की गई। फ्रांस का चौथा गणतंत्र अधिक समय तक नहीं चला और एक जनमत संग्रह के उपरांत 5 अक्टूबर, 1958 को वर्तमान पंचम गणतंत्र का संविधान प्रवर्तित हुआ जो फ्रांस का 15वां संविधान है। | ||
{पॉलिटिक्स एमंग नेशंस' का लेखक कौन है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-203,प्रश्न-18 | {पॉलिटिक्स एमंग नेशंस' का लेखक कौन है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-203,प्रश्न-18 | ||
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{किसने राज्य को "एक संप्रभु भू-क्षेत्रीय समूह" कहा है- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-12,प्रश्न-43 | {किसने राज्य को "एक संप्रभु भू-क्षेत्रीय समूह" कहा है- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-12,प्रश्न-43 | ||
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-मैक्स वेबर ने | -[[मैक्स वेबर]] ने | ||
-लास्की ने | -लास्की ने | ||
-डेविड हेल्ड ने | -डेविड हेल्ड ने | ||
+लासवेल ने | +लासवेल ने | ||
||प्रसिद्ध राजनीति शास्त्री लासवेल ने राज्य को "एक संप्रभु भू-क्षेत्रीय समूह" कहा है। लासवेल संप्रभुता के परंपरागत स्वरूप को स्वीकार नहीं करते। आनुभविक आधार से देखने पर राज्य में संप्रभुता की अधिकांश परंपरागत विशेषताएं सत्य प्रतीत नहीं होती। लासवेल संप्रभुता को सत्ता की उच्चतम मात्रा के रूप में परिभाषित करते हैं। इनके अनुसार "राज्य व्यक्तियों सत्ता रखता है।" वेबर भी कहते हैं कि, राज्य का अस्तित्व है यदि किसी राजनीतिक संघ का अधिकारी तंत्र सफलता पूर्वक औचित्यपूर्ण भौतिक बल पर एकाधिकार का प्रयोग करता है। लासवेल मानते हैं कि संप्रभुता के साथ-साथ अन्य शक्ति संरचनाएं भी सर्वोच्च हो सकती हैं। उनकी सर्वोपरिता वैयक्तिक, विभाजित, स्थानिक आदि हो सकती है। इस आधार पर उन्होंने राज्य को एक संप्रभु भू-क्षेत्रीय समूह कहा है। | ||प्रसिद्ध राजनीति शास्त्री लासवेल ने राज्य को "एक संप्रभु भू-क्षेत्रीय समूह" कहा है। लासवेल संप्रभुता के परंपरागत स्वरूप को स्वीकार नहीं करते। आनुभविक आधार से देखने पर राज्य में संप्रभुता की अधिकांश परंपरागत विशेषताएं सत्य प्रतीत नहीं होती। लासवेल संप्रभुता को सत्ता की उच्चतम मात्रा के रूप में परिभाषित करते हैं। इनके अनुसार "राज्य व्यक्तियों सत्ता रखता है।" [[मैक्स वेबर|वेबर]] भी कहते हैं कि, राज्य का अस्तित्व है यदि किसी राजनीतिक संघ का अधिकारी तंत्र सफलता पूर्वक औचित्यपूर्ण भौतिक बल पर एकाधिकार का प्रयोग करता है। लासवेल मानते हैं कि संप्रभुता के साथ-साथ अन्य शक्ति संरचनाएं भी सर्वोच्च हो सकती हैं। उनकी सर्वोपरिता वैयक्तिक, विभाजित, स्थानिक आदि हो सकती है। इस आधार पर उन्होंने राज्य को एक संप्रभु भू-क्षेत्रीय समूह कहा है। | ||
{निम्नलिखित में से कौन संप्रभुता की विशेषता नहीं है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-25,प्रश्न-18 | {निम्नलिखित में से कौन संप्रभुता की विशेषता नहीं है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-25,प्रश्न-18 | ||
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-उपयोगितावाद से | -उपयोगितावाद से | ||
-आदर्शवाद से | -आदर्शवाद से | ||
||व्यवहारवाद प्रत्यक्षवाद से प्रेरणा लेता है। तार्किक व अनुभव जन्य प्रत्यक्षवाद से किसी व्यक्ति का व्यवहार निर्धारित होता है। प्रत्यक्षवाद वह सिद्धांत है जो केवल वैज्ञानिक पद्धति (Scientific Method)से प्राप्त ज्ञान को उपयुक्त (Relevant), विश्वस्त (Relible) और प्रामाणित (Valid) मानता है। प्रत्यक्षवाद के समर्थक यह मांग करते हैं कि सामाजिक विज्ञानों की सामग्री को प्रामाणित रूप देने के लिए उसे प्राकृतिक विज्ञानों की पद्धति के अनुरूप ढालना जरूरी है, इसलिए व्यवहारवादी तार्किक प्रत्यक्षवाद से विशेष रूप से प्रमाणित थे। | ||व्यवहारवाद प्रत्यक्षवाद से प्रेरणा लेता है। तार्किक व अनुभव जन्य प्रत्यक्षवाद से किसी व्यक्ति का व्यवहार निर्धारित होता है। प्रत्यक्षवाद वह सिद्धांत है जो केवल वैज्ञानिक पद्धति (Scientific Method) से प्राप्त ज्ञान को उपयुक्त (Relevant), विश्वस्त (Relible) और प्रामाणित (Valid) मानता है। प्रत्यक्षवाद के समर्थक यह मांग करते हैं कि सामाजिक विज्ञानों की सामग्री को प्रामाणित रूप देने के लिए उसे प्राकृतिक विज्ञानों की पद्धति के अनुरूप ढालना जरूरी है, इसलिए व्यवहारवादी तार्किक प्रत्यक्षवाद से विशेष रूप से प्रमाणित थे। | ||
{फॉसीवाद विश्वास करता है कि- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-43,प्रश्न-20 | {फॉसीवाद विश्वास करता है कि- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-43,प्रश्न-20 | ||
पंक्ति 117: | पंक्ति 117: | ||
-स्विस संसद की व्याख्या में | -स्विस संसद की व्याख्या में | ||
+ब्रिटिश संसदीय व्यवस्था की व्याख्या में | +ब्रिटिश संसदीय व्यवस्था की व्याख्या में | ||
||मान्तेस्क्यू ने ब्रिटिश संसदीय व्यवस्था की व्याख्या करने में त्रुटि की थी। मांतेस्क्यू का मानना था कि इंग्लैंड का संविधान 'शक्तियों के पृथक्करण' के सिद्धांत पर आधारित है जबकि शक्तियों का पृथक्करण इंग्लैंड के अलिखित संविधान की विशेषता नहीं है। | ||मान्तेस्क्यू ने ब्रिटिश संसदीय व्यवस्था की व्याख्या करने में त्रुटि की थी। मांतेस्क्यू का मानना था कि इंग्लैंड का संविधान 'शक्तियों के पृथक्करण' के सिद्धांत पर आधारित है जबकि शक्तियों का पृथक्करण [[इंग्लैंड]] के अलिखित संविधान की विशेषता नहीं है। | ||
{उरुग्वे चर्चा के दौर का परिणाम हुआ | {उरुग्वे चर्चा के दौर का परिणाम हुआ (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-113,प्रश्न-19 | ||
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-एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग की स्थापना | -एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग की स्थापना | ||
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-77वें समूह की स्थापना | -77वें समूह की स्थापना | ||
+विश्व व्यापार संगठन की स्थापना | +विश्व व्यापार संगठन की स्थापना | ||
||बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के 8वें एवं अंतिम चक्र का प्रारंभ दिसंबर, 1986 में पुंटा-डेल-एस्टे, उरुग्वे में हुआ। अंतिम रूप से उरुग्वे समझौते पर | ||बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के 8वें एवं अंतिम चक्र का प्रारंभ दिसंबर, 1986 में पुंटा-डेल-एस्टे, उरुग्वे में हुआ। अंतिम रूप से उरुग्वे समझौते पर अप्रैल, 1994 में मराकेश (मोरक्को) में हस्ताक्षर किए गए। इसी समझौते पर 1 जनवरी, 1995 को विश्व व्यापार संगठन की स्थापना की गई। | ||
{संयुक्त राष्ट्र की स्थापना कब हुई? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-121,प्रश्न-22 | {[[संयुक्त राष्ट्र]] की स्थापना कब हुई? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-121,प्रश्न-22 | ||
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+24 अक्टूवर, 1945 | +24 अक्टूवर, 1945 | ||
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-6 जून, 1946 | -6 जून, 1946 | ||
-30 अगस्त, 1945 | -30 अगस्त, 1945 | ||
||संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना 24 | ||[[संयुक्त राष्ट्र संघ]] की स्थापना 24 अक्टूबर, 1945 को संयुक्त राष्ट्र अधिकार-पत्र पर 50 देशों के हस्ताक्षर होने के साथ हुई। इसकी संरचना में सुरक्षा परिषद वाले सबसे शक्तिशाली देश ([[संयुक्त राज्य अमेरिका]], [[फ्रांस]], [[रूस]] और [[ब्रिटेन]]) द्वितीय विश्व युद्ध में बहुत अहम देश थे। वर्तमान में 193 देश उसके सदस्य हैं इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क (संयुक्त राज्य अमेरिका) में हैं। | ||
{निम्न में से किस देश में नौकरशाही की शुरुआत 'लूट प्रथा' के रूप में हुई? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-135,प्रश्न-40 | {निम्न में से किस देश में नौकरशाही की शुरुआत 'लूट प्रथा' के रूप में हुई? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-135,प्रश्न-40 | ||
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-ब्रिटेन | -[[ब्रिटेन]] | ||
+अमेरिका | +[[अमेरिका]] | ||
-भारत | -[[भारत]] | ||
-फ्रांस | -[[फ्रांस]] | ||
||संयुक्त राज्य अमेरिका में नागरिक सेवा (सिविल सर्विसेज) की शुरुआत वर्ष 1871 में हुई। 19वीं सदी के शुरुआती दौर में उच्च सरकारी पदों पर नियुक्तियां राष्ट्रपति की इच्छा तथा आज्ञा से होती थीं तथा नियुक्त नौकरशाहों कि किसी भी समय सेवामुक्त कर दिया जाता था। नौकरशाही की इस लूट प्रणाली को राजनीतिक दलों का समर्थन प्राप्त करने के उद्देश्य से उपयोग किया गया। इसी समस्या के समाधनार्थ पेंडलेटन सिविल सेवा सुधार अधिनियम, 1883 तथा हैच अधिनियम, 1939 बना। | ||[[संयुक्त राज्य अमेरिका]] में नागरिक सेवा (सिविल सर्विसेज) की शुरुआत वर्ष 1871 में हुई। 19वीं सदी के शुरुआती दौर में उच्च सरकारी पदों पर नियुक्तियां राष्ट्रपति की इच्छा तथा आज्ञा से होती थीं तथा नियुक्त नौकरशाहों कि किसी भी समय सेवामुक्त कर दिया जाता था। नौकरशाही की इस लूट प्रणाली को राजनीतिक दलों का समर्थन प्राप्त करने के उद्देश्य से उपयोग किया गया। इसी समस्या के समाधनार्थ पेंडलेटन सिविल सेवा सुधार अधिनियम, 1883 तथा हैच अधिनियम, 1939 बना। | ||
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12:34, 11 जनवरी 2018 का अवतरण
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