"दृष्टि": अवतरणों में अंतर
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07:05, 13 जनवरी 2011 का अवतरण
| हिन्दी | देखने के लिए खुली हुई अथवा देखने में प्रवृत्त आँखें, मन की आँख से देखना। |
| -व्याकरण | स्त्रीलिंग- आँखों से देखने की शक्ति |
| -उदाहरण | जहाँ तक दृष्टि जाती थी, वहाँ तक जल ही जल दिखाई देता था। |
| -विशेष | उक्त के अतिरिक्त मंगल की अपने से चौथे और आठवें भावों पर, बृहस्पति की पाँचवें और नवें भावों पर, तथा शनि की तीसरे और दसवें भावों पर पूर्ण दृष्टि होती है। |
| -विलोम | |
| -पर्यायवाची | नेत्र, आँख। |
| संस्कृत | धातु- दृश+क्तिन |
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