रेल परिवहन

भारत डिस्कवरी प्रस्तुति
यहाँ जाएँ:भ्रमण, खोजें
Icon-edit.gif इस लेख का पुनरीक्षण एवं सम्पादन होना आवश्यक है। आप इसमें सहायता कर सकते हैं। "सुझाव"

रेल परिवहन का एक ज़रिया है जिसमें यात्रियों और माल को पटरियों पर चलने वाले वाहनों पर एक स्थान से दुसरे स्थान ले जाया जाता है। देश के विशालता, सामानों के आन्तरिक परिवहन तथा यात्रियों के संचालन हेतु रेल परिवहन का महत्वपूर्ण स्थान है। देश की रेलों ने सुदूर क्षेत्रों में बसे लोगों तथा वहाँ मिलने वाले संसाधनों एवं तैयार वस्तुओं को सम्पूर्ण देश में पहुंचाया है। व्यापार-व्यवसाय, देशाटन, तीर्थयात्रा आदि का अवसर सुलभ कराने वाले साधनों की दृष्टि से रेलें देश की जीवन रेखा है।

सर्वप्रथम रेल

भारत में रेलवे के विकास की दिशा में सर्वप्रथम प्रयास 1844 में तत्कालीन गर्वनर जनरल लार्ड हार्डिंग ने निजी कंपनियों के समक्ष रेल प्रणाली के निर्माण का प्रस्ताव रखकर किया। देश में पहली रेलगाड़ी का परिचालन 22 दिसम्बर, 1851 को किया गया जिसका प्रयोग रूड़की में निर्माण कार्य के माल की ढुलाई के लिए होता था। ऐतिहासिक दृष्टि से भारत में प्रथम रेलमार्ग 1853 में मुम्बई एवं थाना (थाणे) के बीच बनाया गया था, जिसकी लम्बाई 34 किमी थी। इस रेलगाड़ी के लिए तीन लोकोमोटिव इंजनों- साहिब, सिंध और सुल्तान का प्रयोग किया जाता था। दक्षिण भारत में रेल की शुरुआत 1 जुलाई, 1856 को मद्रास रेलवे कम्पनी से हुई। 1951 में भारतीय रेल का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया । भारत की पहली विद्युत रेल ‘डेक्कन क्वीन’ थी, जिसे 1929 में कल्याण और पुणे के बीच चलाया गया था। आज सम्पूर्ण देश में रेलों का सघन जाल बिछा हुआ है। भारतीय रेल व्यवस्था के अन्तर्गत वर्तमान समय में कुल 63,465 किमी लम्बा रेलमार्ग है। 150 वर्ष के उपलक्ष्य में भारतीय रेल ने वर्ष 2002 में अपनी स्थापना का स्वर्ण जयंती मनाया।

रेलों की वृद्धि

देश में अनेक प्रकार की रेल लाइनें विद्यमान हैं और जिन क्षेत्रों में बड़ी लाइनें हैं, वहाँ प्राकृतिक संसाधनों की भी प्रचुरता है और आर्थिक उत्पादों एवं भारी खनिजों यथा-लौह-इस्पात, कोयला, खनिज, खनिज तेल एवं उर्वरक का अधिकांश परिवहन बड़ी लाइनों द्वारा ही किया जाता है। किन्तु औद्योगिक प्रतिष्ठानों द्वारा भारी कच्चे मालों का परिवहन छोटी लाइनों के माध्यम से ही सम्पन्न होता है। छोटी लाइनों का परिवहन अधिक समय लेने वाला तथा वाहनान्तरण होने वाला परिवहन ही है जो कि बहुत खर्चीला है। इन समस्याओं के निराकरण के लिए भारतीय रेलवे द्वारा ‘यूनीगेज प्रोजेक्ट’ या एक समान रेलवे लाइन परियोजना 1992 में प्रारम्भ की गयी हैं, जिसके अन्तर्गत देश की सभी छोटी लाइनों को बड़ी लाइनों में परिवर्तित कर दिया जाना है। वर्तमान में (31 मार्च, 2006 तक) रेलवे स्टेशनों की संख्या 7,133 और रेलमार्गों की कुल लम्बाई 63,465 किमी है। इस अवधि में भारतीय रेलवे के पास 8,025 इंजन, 44,090 यात्री गाड़ियाँ, 5,990 अन्य सवारी गाड़ियों के डिब्बे और 22,379 माल डिब्बे तथा 5,321 यात्री रेलगाड़ियां और 4,904 सवारी गाड़ियां उपलब्ध थी। विभिन्न गेज वाली रेल प्रणाली के तहत 63,332 किमी लम्बे रेलमार्ग उपलब्ध हैं। ध्यातव्य है कि वर्तमान में छोटी व मझोली लाइनों की लम्बाई देश की कुल रेल लाइनों की लम्बाई की लगभग 25 प्रतिशत है, जो देश की आर्थिक विकास में एक बाधा बनी हुई है क्योंकि जहां बड़ी लाइनों द्वारा प्रति किमी 90 प्रतिशत माल तथा 84 प्रतिशत यात्रियों का परिवहन जहां बड़ी लाइनों द्वारा प्रति किमी 90 प्रतिशत माल तथा 84 प्रतिशत यात्रियों का परिवहन किया जाता है, वही छोटी लाइनों का योगदान मात्र 9 प्रतिशत एवं 16 प्रतिशत ही है। भारत में समूची रेल प्रणाली को 16 जोनों (परिक्षेत्रों ) में बांटा गया है। प्रत्येक जोन में कई डिवीजन स्थापित हैं। ये डिवीजन ही मूलभूत संचालन इकाइयां है।


पन्ने की प्रगति अवस्था
आधार
प्रारम्भिक
माध्यमिक
पूर्णता
शोध

टीका टिप्पणी और संदर्भ


बाहरी कड़ियाँ

संबंधित लेख