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आज का दिन - 2 जुलाई 2016 (भारतीय समयानुसार)
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भारतकोश हलचल

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गुरु पूर्णिमा (19 जुलाई) देवशयनी एकादशी (15 जुलाई) विश्व जनसंख्या दिवस (11 जुलाई) ईद उल फ़ितर (मीठी ईद) (7 जुलाई) जगन्नाथ रथयात्रा, पुरी (6 जुलाई) गुप्त नवरात्र प्रारम्भ (5 जुलाई) सोमवती अमावस्या (4 जुलाई) भारतीय स्टेट बैंक स्थापना दिवस (1 जुलाई) राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस (1 जुलाई) योगिनी एकादशी (30 जून) हूल क्रान्ति दिवस (30 जून) सांख्यिकी दिवस (29 जून) अंतर्राष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस (26 जून) विश्व संगीत दिवस (21 जून) अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) ज्येष्ठ पूर्णिमा (20 जून) कबीर जयंती (20 जून) विश्व शरणार्थी दिवस (20 जून) पितृ दिवस (19 जून) विश्व एथनिक दिवस (19 जून) गोवा क्रान्ति दिवस (18 जून) निर्जला एकादशी (16 जून)


जन्म
गुरु हर किशन सिंह (7 जुलाई) राघवजी (7 जुलाई) चन्द्रधर शर्मा गुलेरी (7 जुलाई) अनिल बिस्वास (7 जुलाई) महेन्द्र सिंह धोनी (7 जुलाई) श्यामा प्रसाद मुखर्जी (6 जुलाई) दलाईलामा तेनजिन ग्यात्सो (6 जुलाई) असग़र वजाहत (5 जुलाई) ज्योति खरे (5 जुलाई) अल्लूरी सीताराम राजू (4 जुलाई) गुलज़ारीलाल नन्दा (4 जुलाई) नसीम बानो (4 जुलाई) विमलेश कांति वर्मा (4 जुलाई) अभिनेता सुशील कुमार (4 जुलाई) हंसा मेहता (3 जुलाई) अदूर गोपालकृष्णन (3 जुलाई) आलोक धन्वा (2 जुलाई)
मृत्यु
विक्रम बत्रा (7 जुलाई) प्रताप नारायण मिश्र (6 जुलाई) चेतन आनंद (6 जुलाई) जगजीवन राम (6 जुलाई) धीरूभाई अंबानी (6 जुलाई) मणि कौल (6 जुलाई) तोरु दत्त (5 जुलाई) अनुग्रह नारायण सिन्हा (5 जुलाई) स्वामी विवेकानन्द (4 जुलाई) पिंगलि वेंकय्या (4 जुलाई) भरत व्यास (4 जुलाई) राज कुमार (3 जुलाई) मोहम्मद उस्मान (3 जुलाई) मनोज कुमार पांडेय (3 जुलाई)

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भारतकोश सम्पादकीय

भारतकोश सम्पादकीय -आदित्य चौधरी
शहीद मुकुल द्विवेदी के नाम पत्र
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        हमारे देश में किसी भी सेना या बल के जवान की जान की क़ीमत कितनी कम है इसका अंदाज़ा तुमको बख़ूबी होगा। हमारे जवान, सन् 62 की चीन की लड़ाई में बिना रसद और हथियारों के लड़ते रहे, कुछ वर्ष पहले मिग-21 जैसे कबाड़ा विमानों में एयरफ़ोर्स के पायलट बेमौत मरते रहे, पड़ोसी देश के दरिंदे हमारे सिपाहियों के सर काटकर ले जाते रहे, कश्मीर के साथ न्याय करने के बहाने भयानक अन्याय को सहते रहे, घटिया स्तर के नेताओं की जान बचाने के लिए अपनी जानें क़ुर्बान करते रहे, इन जवानों की शहादत इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण था कि हमारी सरकारें देश के नौनिहालों को लेकर किस क़दर लापरवाह है। पूरा पढ़ें

पिछले सभी लेख हिन्दी के ई-संसार का संचार · ये तेरा घर ये मेरा घर

एक आलेख

एक आलेख
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        रंग [शुद्ध: रङ्‌ग] अथवा वर्ण का हमारे जीवन में बहुत महत्त्व है। रंग हज़ारों वर्षों से हमारे जीवन में अपनी जगह बनाए हुए हैं। प्राचीनकाल से ही रंग कला में भारत का विशेष योगदान रहा है। मुग़ल काल में भारत में रंग कला को अत्यधिक महत्त्व मिला। रंगों से हमें विभिन्न स्थितियों का पता चलता है। हम अपने चारों तरफ़ अनेक प्रकार के रंगों से प्रभावित होते हैं। रंग, मानवी आँखों के वर्णक्रम से मिलने पर छाया सम्बंधी गतिविधियों से उत्पन्न होते हैं। मूल रूप से इंद्रधनुष के सात रंगों को ही रंगों का जनक माना जाता है, ये सात रंग लाल, नारंगी, पीला, हरा, आसमानी, नीला तथा बैंगनी हैं। रंग से विभिन्न प्रकार की श्रेणियाँ एवं भौतिक विनिर्देश वस्तु, प्रकाश स्रोत इत्यादि के भौतिक गुणधर्म जैसे प्रकाश विलयन, समावेशन, परावर्तन जुड़े होते हैं ... और पढ़ें

पिछले आलेख सिंधु घाटी सभ्यता दीपावली रामलीला श्राद्ध

एक व्यक्तित्व

एक व्यक्तित्व
नज़ीर अकबराबादी

        नज़ीर अकबराबादी उर्दू में नज़्म लिखने वाले पहले कवि माने जाते हैं। समाज की हर छोटी-बड़ी ख़ूबी को नज़ीर साहब ने कविता में तब्दील कर दिया। ककड़ी, जलेबी और तिल के लड्डू जैसी वस्तुओं पर लिखी गई कविताओं को आलोचक कविता मानने से इनकार करते रहे। बाद में नज़ीर साहब की 'उत्कृष्ट शायरी' को पहचाना गया और आज वे उर्दू साहित्य के शिखर पर विराजमान चन्द नामों के साथ बाइज़्ज़त गिने जाते हैं। लगभग सौ वर्ष की आयु पाने पर भी इस शायर को जीते जी उतनी ख्याति नहीं प्राप्त हुई जितनी कि उन्हें आज मिल रही है। नज़ीर की शायरी से पता चलता है कि उन्होंने जीवन-रूपी पुस्तक का अध्ययन बहुत अच्छी तरह किया है। भाषा के क्षेत्र में भी वे उदार हैं, उन्होंने अपनी शायरी में जन-संस्कृति का, जिसमें हिन्दू संस्कृति भी शामिल है, दिग्दर्शन कराया है और हिन्दी के शब्दों से परहेज़ नहीं किया है। उनकी शैली सीधी असर डालने वाली है और अलंकारों से मुक्त है। शायद इसीलिए वे बहुत लोकप्रिय भी हुए। ... और पढ़ें

पिछले लेख पांडुरंग वामन काणे बिस्मिल्लाह ख़ाँ लाला लाजपत राय

एक रचना

एक रचना
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         पृथ्वीराज रासो हिन्दी भाषा में लिखा गया एक महाकाव्य है, जिसमें पृथ्वीराज चौहान के जीवन-चरित्र का वर्णन किया गया है। यह महाकवि चंदबरदाई की रचना है, जो पृथ्वीराज के अभिन्न मित्र तथा राजकवि थे। इसमें दिल्लीश्वर पृथ्वीराज के जीवन की घटनाओं का विशद वर्णन है। यह तेरहवीं शती की रचना है। डॉ. माताप्रसाद गुप्त इसे 1400 विक्रमी संवत के लगभग की रचना मानते हैं। इसमें पृथ्वीराज व उनकी प्रेमिका संयोगिता के परिणय का सुन्दर वर्णन है। यह ग्रंथ ऐतिहासिक कम काल्पनिक अधिक है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने 'हिन्दी साहित्य का इतिहास' में लिखा है- 'पृथ्वीराज रासो ढाई हज़ार पृष्ठों का बहुत बड़ा ग्रंथ है जिसमें 69 समय (सर्ग या अध्याय) हैं। प्राचीन समय में प्रचलित प्राय: सभी छंदों का व्यवहार हुआ है। मुख्य छंद हैं कवित्त (छप्पय), दूहा, तोमर, त्रोटक, गाहा और आर्या। ...और पढ़ें

पिछले लेख रामचरितमानस वंदे मातरम् पद्मावत

एक त्योहार

एक त्योहार
दुर्गा देवी

        नवरात्र हिन्दू धर्म ग्रंथ एवं पुराणों के अनुसार माता भगवती की आराधना का श्रेष्ठ समय होता है। भारत में नवरात्र का पर्व, एक ऐसा पर्व है जो हमारी संस्कृति में महिलाओं के गरिमामय स्थान को दर्शाता है। वर्ष में चार नवरात्र चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ महीने की शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक नौ दिन के होते हैं, परंतु प्रसिद्धि में चैत्र और आश्विन के नवरात्र ही मुख्य माने जाते हैं। इनमें भी देवीभक्त आश्विन के नवरात्र अधिक करते हैं। इनको यथाक्रम वासन्ती और शारदीय नवरात्र भी कहते हैं। मान्यता है कि नवरात्र में महाशक्ति की पूजा कर श्रीराम ने अपनी खोई हुई शक्ति पाई, इसलिए इस समय आदिशक्ति की आराधना पर विशेष बल दिया गया है। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, दुर्गा सप्तशती में स्वयं भगवती ने इस समय शक्ति-पूजा को महापूजा बताया है। संस्कृत व्याकरण के अनुसार नवरात्रि कहना त्रुटिपूर्ण है। नौ रात्रियों का समाहार, समूह होने के कारण से द्वन्द समास होने के कारण यह शब्द पुल्लिंग रूप 'नवरात्र' में ही शुद्ध है। ... और पढ़ें


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सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी

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महत्त्वपूर्ण आकर्षण

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स्वतंत्र लेखन

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समाचार

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RLV-TD अर्थात रीयूजेबल लॉन्च वीइकल- टेक्नॉलजी डेमॉनस्ट्रेटर
मनोज कुमार को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित करते हुए महामहिम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी
भारतकोश संस्थापक श्री आदित्य चौधरी जी को माननीय गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह 'विश्व हिन्दी सम्मान' से सम्मानित करते हुए


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लक्ष्मण मंदिर, खजुराहो की मूर्तिकला

शानदार मूर्तिकला, लक्ष्मण मंदिर, खजुराहो



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