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आज का दिन - 15 फ़रवरी 2016 (भारतीय समयानुसार)
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भारतकोश हलचल

भारतकोश हलचल

भीष्म अष्टमी (15 फ़रवरी) तारापुर शहीद दिवस (15 फ़रवरी) रथ सप्तमी (14 फ़रवरी) भानु सप्तमी (14 फ़रवरी) अचला सप्तमी (14 फ़रवरी) नर्मदा जयंती (14 फ़रवरी) विश्व रेडियो दिवस (13 फ़रवरी) बसंत पंचमी (12 फ़रवरी) विनायक चतुर्थी (11 फ़रवरी) गुप्त नवरात्र प्रारम्भ (9 फ़रवरी) सोमवती अमावस्या (8 फ़रवरी) मौनी अमावस्या (8 फ़रवरी) षटतिला एकादशी (4 फ़रवरी) विश्व कैंसर दिवस (4 फ़रवरी) तटरक्षक दिवस (1 फ़रवरी)


जन्म
मदन लाल ढींगरा (18 फ़रवरी) जयनारायण व्यास (18 फ़रवरी) रामकृष्ण परमहंस (18 फ़रवरी) रफ़ी अहमद क़िदवई (18 फ़रवरी) नलिनी जयवंत (18 फ़रवरी) निम्मी (18 फ़रवरी) कृष्णा सोबती (18 फ़रवरी) के. चन्द्रशेखर राव (17 फ़रवरी) जीवनानन्द दास (17 फ़रवरी) बुधु भगत (17 फ़रवरी) नरेश मेहता (15 फ़रवरी)
मृत्यु
वासुदेव बलवन्त फड़के (17 फ़रवरी) जे. कृष्णमूर्ति (17 फ़रवरी) रानी गाइदिनल्यू (17 फ़रवरी) कैलाश नाथ काटजू (17 फ़रवरी) पण्डित सीताराम चतुर्वेदी (17 फ़रवरी) दादा साहब फाल्के (16 फ़रवरी) मेघनाथ साहा (16 फ़रवरी) ग़ालिब (15 फ़रवरी) सुभद्रा कुमारी चौहान (15 फ़रवरी)

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भारतकोश सम्पादकीय

भारतकोश सम्पादकीय -आदित्य चौधरी
ये तेरा घर ये मेरा घर
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        जहाँ तक नारी विमर्श की बात है तो निश्चित रूप से गृहस्थ जीवन में संयुक्त परिवार एक गृहणी के लिए बंधनों से भरे रहे होंगे। नारी स्वतंत्रता जैसी स्थिति इन परिवारों में कितनी संभावना लेकर जीवित रहती होगी यह कहना कोई कठिन काम नहीं है। संयुक्त परिवार की व्यवस्था भारत के एक-आध राज्य को छोड़कर सामान्यत: पुरुष प्रधान थी। संयुक्त परिवार, एक परिवार न होकर एक कुटुंब होता था। जिसका मुखिया अपने या परंपराओं द्वारा निष्पादित नियमों को कुटुंब के सभी सदस्यों पर लागू करता था। … पूरा पढ़ें

पिछले सभी लेख अभिभावक · भारत की जाति-वर्ण व्यवस्था

भारतकोश संस्थापक श्री आदित्य चौधरी जी को माननीय गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह 'विश्व हिन्दी सम्मान' से सम्मानित करते हुए

भारतकोश संस्थापक श्री आदित्य चौधरी जी को 'विश्व हिन्दी सम्मान'

        भारतकोश संस्थापक श्री आदित्य चौधरी जी को दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन में भारतकोश का ऑनलाइन प्रकाशन एवं छात्रों को नि:शुल्क कम्प्यूटर शिक्षा देने के लिए भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा निमंत्रण मिला। भारत के माननीय गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 12 सितम्बर, 2015 को श्री आदित्य चौधरी जी को 'विश्व हिन्दी सम्मान' से सम्मानित किया। ...और पढ़ें


आदित्य चौधरी के सभी सम्पादकीय एवं कविताएँ पढ़ने के लिए क्लिक कीजिए

एक आलेख

एक आलेख
सिन्ध में मोहनजोदाड़ो में हड़प्पा संस्कृति के अवशेष

        सिंधु घाटी सभ्यता विश्व की प्राचीन नदी घाटी सभ्यताओं में से एक प्रमुख सभ्यता थी। आज से लगभग 76 वर्ष पूर्व पाकिस्तान के 'पश्चिमी पंजाब प्रांत' के 'माण्टगोमरी ज़िले' में स्थित 'हरियाणा' के निवासियों को शायद इस बात का किंचित्मात्र भी आभास नहीं था कि वे अपने आस-पास की ज़मीन में दबी जिन ईटों का प्रयोग इतने धड़ल्ले से अपने मकानों के निर्माण में कर रहे हैं, वह कोई साधारण ईटें नहीं, बल्कि लगभग 5,000 वर्ष पुरानी और पूरी तरह विकसित सभ्यता के अवशेष हैं। इस अज्ञात सभ्यता की खोज का श्रेय 'रायबहादुर दयाराम साहनी' को जाता है। उन्होंने ही पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग के महानिदेशक 'सर जॉन मार्शल' के निर्देशन में 1921 में इस स्थान की खुदाई करवायी। लगभग एक वर्ष बाद 1922 में 'श्री राखल दास बनर्जी' के नेतृत्व में पाकिस्तान के सिंध प्रान्त के 'लरकाना' ज़िले के मोहनजोदाड़ो में स्थित एक बौद्ध स्तूप की खुदाई के समय एक और स्थान का पता चला। ...और पढ़ें


पिछले आलेख दीपावली · रामलीला · श्राद्ध · गाँधी युग

एक व्यक्तित्व

एक व्यक्तित्व
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        पांडुरंग वामन काणे संस्कृत के एक विद्वान एवं प्राच्यविद्या विशारद थे। पांडुरंग वामन काणे का सबसे बड़ा योगदान उनका विपुल साहित्य है, जिसकी रचना में उन्होंने अपना महत्त्वपूर्ण जीवन लगाया। वे अपने महान ग्रंथों- 'साहित्यशास्त्र' और 'धर्मशास्त्र' पर 1906 ई. से कार्य कर रहे थे। इनमें 'धर्मशास्त्र का इतिहास' सबसे महत्त्वपूर्ण और प्रसिद्ध है। पाँच भागों में प्रकाशित बड़े आकार के 6500 पृष्ठों का यह ग्रंथ, भारतीय धर्मशास्त्र का विश्वकोश है। इसमें ईस्वी पूर्व 600 से लेकर 1800 ई. तक की भारत की विभिन्न धार्मिक प्रवृत्तियों का प्रामाणिक विवेचन प्रस्तुत किया गया है। हिन्दू विधि और आचार विचार संबंधी पांडुरंग वामन काणे का कुल प्रकाशित साहित्य 20,000 पृष्ठों से अधिक का है। डॉ. पांडुरंग वामन काणे की महान उपलब्धियों के लिए भारत सरकार द्वारा सन् 1963 में उन्हें 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया। ... और पढ़ें


पिछले लेख बिस्मिल्लाह ख़ाँ · लाला लाजपत राय · कवि प्रदीप

एक रचना

एक रचना
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रामचरितमानस तुलसीदास की सबसे प्रमुख कृति है। इसकी रचना संवत 1631 ई. की रामनवमी को अयोध्या में प्रारम्भ हुई थी किन्तु इसका कुछ अंश काशी (वाराणसी) में भी निर्मित हुआ था, यह इसके किष्किन्धा काण्ड के प्रारम्भ में आने वाले एक सोरठे से निकलती है, उसमें काशी सेवन का उल्लेख है। इसकी समाप्ति संवत 1633 ई. की मार्गशीर्ष, शुक्ल 5, रविवार को हुई थी किन्तु उक्त तिथि गणना से शुद्ध नहीं ठहरती, इसलिए विश्वसनीय नहीं कही जा सकती। यह रचना अवधी बोली में लिखी गयी है। इसके मुख्य छन्द चौपाई और दोहा हैं, बीच-बीच में कुछ अन्य प्रकार के भी छन्दों का प्रयोग हुआ है। प्राय: 8 या अधिक अर्द्धलियों के बाद दोहा होता है और इन दोहों के साथ कड़वक संख्या दी गयी है। ...और पढ़ें

पिछले लेख वंदे मातरम् · पद्मावत

एक नदी

एक नदी
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        नर्मदा नदी भारत के मध्यभाग में पूरब से पश्चिम की ओर बहने वाली एक प्रमुख नदी है, जो गंगा के समान पूजनीय है। नर्मदा का उद्गम विंध्याचल की मैकाल पहाड़ी शृंखला में अमरकंटक नामक स्थान में है। मैकाल से निकलने के कारण नर्मदा को 'मैकाल कन्या' भी कहते हैं। स्कंद पुराण में इस नदी का वर्णन 'रेवा खंड' के अंतर्गत किया गया है। कालिदास के ‘मेघदूतम्’ में नर्मदा को 'रेवा' का संबोधन मिला है, जिसका अर्थ है- पहाड़ी चट्टानों से कूदने वाली। अमरकंटक में सुंदर सरोवर में स्थित शिवलिंग से निकलने वाली इस पावन धारा को 'रुद्र कन्या' भी कहते हैं, जो आगे चलकर नर्मदा नदी का विशाल रूप धारण कर लेती हैं। पवित्र नदी नर्मदा के तट पर अनेक तीर्थ हैं, जहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। इनमें कपिलधारा, शुक्लतीर्थ, मांधाता, भेड़ाघाट, शूलपाणि, भड़ौंच उल्लेखनीय हैं। अमरकंटक की पहाड़ियों से निकल कर छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात से होकर नर्मदा क़्ररीब 1310 किमी का प्रवाह पथ तय कर भरौंच के आगे खंभात की खाड़ी में विलीन हो जाती है। ... और पढ़ें

सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी

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महत्त्वपूर्ण आकर्षण

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शानदर 'अमरावती मूर्तिकला'



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