अभ्रम्‌

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अभ्रम् [अभ्+अच् या अप्+भृ अपो विभर्ति-भृ+क]

1. बादल
2. वायुमंडल, आकाश
3. चिल-चिल, अबरक
4. (गण.) शून्य


सम.-अवकाशः (पुल्लिंग) बचाव के लिए केवलमात्र बादल, बारिश होना,-अवकाशिक, -अवकाशिन् (विशेषण) बारिश में रहकर (तपस्या करने वाला), बारिश से बचाव का कोई उपाय न करने वाला-उत्यः (पुं.) आकाश में उत्पन्न इन्द्र का वज्र,-नागः (पु.) ऐरावत नाम का हाथी जो धरती को धारण किए हुए है।-पथ (पुल्लिंग) 1. वायुमंडल, गुब्बारा,-पिशाच,पिशाचका (पुल्लिंग) राहु की उपाधि, मेघासुर,-पुष्प एक प्रकार की बेत,-पुष्पम् (नपुं.)

1. पानी
2. असंभव बात, हवाई किला,-मातंगः (पुल्लिंग) इन्द्र का हाथी ऐरावत,-माला (स्त्रीलिंग),-वृन्दम् (नपुं.) बादलों की पंक्ति या समूह।[1]


इन्हें भी देखें: संस्कृत-हिन्दी शब्दकोश (संकेताक्षर सूची), संस्कृत-हिन्दी शब्दकोश (संकेत सूची) एवं संस्कृत-हिन्दी शब्दकोश


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. संस्कृत-हिन्दी शब्दकोश |लेखक: वामन शिवराम आप्टे |प्रकाशक: कमल प्रकाशन, नई दिल्ली-110002 |पृष्ठ संख्या: 89 |

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