रायसिंह  

रायसिंह (1574-1612 ई.) बीकानेर, राजस्थान का राठौड़ शासक था। वह राव कल्याणमल का पुत्र था।

  • 1570 ई. में जब मुग़ल बादशाह अकबर ने नागौर दरबार का आयोजन किया तो बीकानेर शासक राव कल्याणमल अपने पुत्र रायसिंह व पृथ्वीराज के साथ नागौर दरबार में उपस्थित हुआ तथा अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली। राव कल्याणमल बीकानेर का प्रथम शासक था, जिसने मुग़ल अधीनता स्वीकार की थी।[1]
  • रायसिंह 1574 ई. में बीकानेर का शासक बना।
  • वह बादशाह अकबर व जहाँगीर का विश्वसनीय सेनानायक रहा था।
  • रायसिंह ने महाराजा की उपाधि धारण कर अपने मंत्री कर्मचंद की देखरेख में बीकानेर दुर्ग का निर्माण करवाया तथा दुर्ग में एक प्रशस्ति लगाई।
  • महाराजा रायसिह विद्यानुरागी व धार्मिक प्रवृत्ति का था। उसने 'राय सिंह महोत्सव' व 'ज्योतिष रत्नमाला' जैसे ग्रंथों की रचना की।
  • 'कर्मचन्द वंशौत्कीर्तिम् काव्यम्' में महाराजा रायसिंह को 'राजेन्द्र' कहा गया है।
  • रायसिंह की दानशीलता के कारण मुंशीदेवी प्रसाद ने उसे राजपूतानें के करण की संज्ञा दी।
  • 1612 ई. में दक्षिण भारत के बुरहानपुर में रायसिंह की मृत्यु हुई।


पन्ने की प्रगति अवस्था
आधार
प्रारम्भिक
माध्यमिक
पूर्णता
शोध

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. बीकानेर के राठौड़ (हिन्दी) historicalsaga.com। अभिगमन तिथि: 24 फ़रवरी, 2017।

संबंधित लेख

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"https://bharatdiscovery.org/bharatkosh/w/index.php?title=रायसिंह&oldid=586026" से लिया गया