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दार्जिलिंग की यात्रा का एक ख़ास आकर्षण हरे भरे चाय के बागान हैं। हज़ारों देशों में निर्यात होने वाली दार्जिलिंग की चाय सबको खूब भाती हैं। समुद्र तल से लगभग 6812 फुट की उंचाई पर स्थित इस शहर की सुन्दरता को शब्दों में बयां करना बहुत कठिन हैं। पश्चिम बंगाल में स्थित दार्जिलिंग की यात्रा न्यू जलपाईगुड़ी नामक शहर से शुरू होती है। बर्फ़ से ढके सुंदर पहाड़ो का दृश्य अतिमनोहरिय होता हैं। टॉय ट्रेन में यात्रा इसमें चार चांद लगा देती है। यह ट्रेन दार्जिलिंग के प्रसिद्ध हिल स्टेशन की सुंदर वादियों की सैर कराती है। दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे को [[1999]] में यूनेस्को | दार्जिलिंग की यात्रा का एक ख़ास आकर्षण हरे भरे चाय के बागान हैं। हज़ारों देशों में निर्यात होने वाली दार्जिलिंग की चाय सबको खूब भाती हैं। समुद्र तल से लगभग 6812 फुट की उंचाई पर स्थित इस शहर की सुन्दरता को शब्दों में बयां करना बहुत कठिन हैं। पश्चिम बंगाल में स्थित दार्जिलिंग की यात्रा न्यू जलपाईगुड़ी नामक शहर से शुरू होती है। बर्फ़ से ढके सुंदर पहाड़ो का दृश्य अतिमनोहरिय होता हैं। टॉय ट्रेन में यात्रा इसमें चार चांद लगा देती है। यह ट्रेन दार्जिलिंग के प्रसिद्ध हिल स्टेशन की सुंदर वादियों की सैर कराती है। दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे को [[1999]] में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोंहरों की सूची में शामिल कर लिया गया था। इस सुन्दर पहाड़ी क्षेत्र के बहुत से गांव रेलपथ के निकट ही हैं। दार्जिलिंग जाते समय रास्ते में पडने वाले जंगल, तीस्ता और रंगीत नदियों का संगम देखने योग्य है। [[चाय उद्यान दार्जिलिंग|चाय के बगान]] और [[देवदार]] के जंगल भी अच्छा दृश्य बनाते हैं। टाइगर हिल पर ठहरकर समय व्यतीत करना, चाय बगान, नैचुरल हिस्ट्री म्यूजियम जैसी बहुत आर्कषण जगह है जो मन को मोह लेती है। | ||
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10:22, 13 अक्टूबर 2017 के समय का अवतरण
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A View Of Darjeeling
दार्जिलिंग की यात्रा का एक ख़ास आकर्षण हरे भरे चाय के बागान हैं। हज़ारों देशों में निर्यात होने वाली दार्जिलिंग की चाय सबको खूब भाती हैं। समुद्र तल से लगभग 6812 फुट की उंचाई पर स्थित इस शहर की सुन्दरता को शब्दों में बयां करना बहुत कठिन हैं। पश्चिम बंगाल में स्थित दार्जिलिंग की यात्रा न्यू जलपाईगुड़ी नामक शहर से शुरू होती है। बर्फ़ से ढके सुंदर पहाड़ो का दृश्य अतिमनोहरिय होता हैं। टॉय ट्रेन में यात्रा इसमें चार चांद लगा देती है। यह ट्रेन दार्जिलिंग के प्रसिद्ध हिल स्टेशन की सुंदर वादियों की सैर कराती है। दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे को 1999 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोंहरों की सूची में शामिल कर लिया गया था। इस सुन्दर पहाड़ी क्षेत्र के बहुत से गांव रेलपथ के निकट ही हैं। दार्जिलिंग जाते समय रास्ते में पडने वाले जंगल, तीस्ता और रंगीत नदियों का संगम देखने योग्य है। चाय के बगान और देवदार के जंगल भी अच्छा दृश्य बनाते हैं। टाइगर हिल पर ठहरकर समय व्यतीत करना, चाय बगान, नैचुरल हिस्ट्री म्यूजियम जैसी बहुत आर्कषण जगह है जो मन को मोह लेती है।
टाइगर हिल
- टाइगर-हिल जिसकी ऊँचाई 2,770 मीटर है, दार्जिलिंग से चौदह किलोमीटर दूरी पर है।
- दार्जिलिंग के दर्शनीय स्थानों में 8,482 फीट पर स्थित टाइगर हिल है जहाँ से सूर्योदय का मनोरम दृश्य देखा जा सकता है।
टॉय ट्रेन
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टाइगर हिल, दार्जिलिंग |
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टॉय ट्रेन, दार्जिलिंग |
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चाय उद्यान, दार्जिलिंग |
- दार्जिलिंग टॉय ट्रेन पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा केंद्र है और छोटी लाइन की पटरियों पर यह दार्जिलिंग से न्यूजलपाईगुड़ी तक का सफ़र करती है।
- टाइगर हिल का मुख्य आनंद टॉय ट्रेन पर चढ़ाई करने में है। आपको हर सुबह पर्यटक इस पर चढ़ाई करते हुए मिल जाएंगे।
- दार्जिलिंग शहर की एक पहचान और भी है। वह है विश्व धरोहरों की सूची में शामिल टॉय ट्रेन यानी खिलौना गाड़ी।
चाय उद्यान
- एक समय दार्जिलिंग अपने मसालों के लिए प्रसिद्ध था और अब चाय के लिए ही दार्जिलिंग विश्व स्तर पर जाना जाता है।
- प्रत्येक चाय उद्यान का अपना-अपना इतिहास है। इसी तरह प्रत्येक चाय उद्यान के चाय की किस्म अलग-अलग होती है।
- दूर-दूर तक फैले हरी चाय के खेत मानो ज़मीन पर हरी चादर फैली हो। दार्जिलिंग की पहाड़ी वादियों की स्वच्छ हवा और निर्मल आसमान बरबस ही दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र की मनोरम छटा को देखकर सैलानी एक बार आह भरे बिना नहीं रह सकते।
जैविक उद्यान
- पदमाजा नायडू हिमालयन जैविक उद्यान माउंटेंनिग संस्थान के दायीं ओर स्थित है।
- यह उद्यान बर्फीले तेंदुआ तथा लाल पांडे के प्रजनन कार्यक्रम के लिए प्रसिद्ध है।
- आप यहाँ साइबेरियन बाघ तथा तिब्बतियन भेडिया को भी देख सकते हैं।
तिब्बतियन रिफ्यूजी कैंप
- तिब्बतियन रिफ्यूजी कैंप की स्थापना 1959 ई. में की गई थी। इससे एक वर्ष पहले 1958 ईं में दलाई लामा ने भारत से शरण मांगा था।
- इसी कैंप में 13वें दलाई लामा(वर्तमान में 14 वें दलाई लामा हैं) ने 1910 से 1912 तक अपना निर्वासन का समय व्यतीत किया था।
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टीका टिप्पणी और संदर्भ
संबंधित लेख