पर्यावरण डाइजेस्ट  

आवरण पृष्ठ, पर्यावरण डाइजेस्ट

पर्यावरण डाइजेस्ट हिन्दी की एक मासिक पत्रिका है। पर्यावरण और उससे जुडे पहलुओं को लेकर निकलने वाली यह पत्रिका विरली हैं, जो लगातार प्रकाशित भी हो रही है तथा लोक चेतना का संवाहक बनकर अपने सामाजिक दायित्व का निर्वहन भी करती हैं। पिछले दो-तीन दशकों के इतिहास को देखें तो ऐसी पत्रिकाएं दो-चार ही देखने को मिलेंगी। इनमे प्रमुखता से पर्यावरण डाइजेस्ट का नाम उभरकर सामने आता है। पर्यावरण डाइजेस्ट एक अव्यावसायिक कार्य होकर सामाजिक दायित्व के बोध से संचालित है।

इतिहास

मध्यप्रदेश के रतलाम शहर से जनवरी 1987 से सतत् प्रकाशित हो रही मासिक पर्यावरण डाइजेस्ट ने बेहद सीमित संसाधनों और प्रबल इच्छाशक्ति के बलबूते पच्चीस बरसों का लम्बा सफर तय किया। हिन्दी पत्रकारिता में पर्यावरण डाइजेस्ट ने एक नई परम्परा क़ायम कर अपना विशिष्ट स्थान बनाया है। पत्रिका ने क्षेत्रीय होते हुए भी राष्ट्रीय स्तर को छुआ है।

विशेषताएँ

  • मध्य प्रदेश के पत्रकारिता इतिहास में पर्यावरण पत्रकारिता के आगाज का श्रेय इस पत्रिका के नाम लिखा जा सकता है। पर्यावरण के जिस विचार को मुश्किल समझा जाता है, पत्रिका उसका सरलीकरण करने में सफल हुई है। इसमें आलेखों की सारगर्भिता, सरलता, संक्षिप्तता और भाषा की प्रवाहमयता अपने आप में अनूठी है। प्रकृति और मानवीय सरोकार से ओतप्रोत पत्रिका की प्रतिबद्धता हर वक्त पाठकों के प्रति रही है।
  • युग मनीषी साहित्यकार डॉ. शिवमंगलसिंह सुमन ने अपनी टिप्पणी में लिखा था कि पर्यावरण डाइजेस्ट के संपादक खुशालसिंह पुरोहित के संपादन में पत्रिका नैरन्तर्य के साथ ही स्तरीयता के मानक को बनाए रख सकी है, जो आज के समय को देखते हुए मूल्य आधारित पत्रकारिता का द्योतक है।
  • प्रकृति और मानवीय संबंधों की अभिव्यक्तियों से ओतप्रोत यह पत्रिका पर्यावरण की असंख्य सूचनाओं, जानकारियों से भरी हुई है, जो आंखे खोलने के लिए ही नहीं बल्कि दुनिया के पर्यावरण की सही स्थिति से अवगत कराते हुए आमजन को भागीदारी के लिये उकसाती है।
  • पर्यावरण डाइजेस्ट की विशेषता है कि इसमें समाचार, विचार और दृष्टिकोण का समन्वय है जो पत्रिका की पठनीयता को बढ़ाता है। समसामयिक मुद्दों ऊर्जा, स्वास्थ्य, रहन-सहन, वन्य जीवन, स्थायी विकास, प्रौद्योगिकी जैसे मुद्दों से जुड़ी वैचारिक सामग्री के प्रचार-प्रसार में पत्रिका अग्रणी रही है।
  • पर्यावरणीय वैचारिक प्रचार-प्रसार की सफलता के लिए यह ज़रूरी है कि सच्चे मायनों में जनजागृति और लोक शिक्षा से जन्मा और जगा स्वयंसेवी समझदार प्रयास हो।
  • विगत 25 बरसों की प्रकाशन यात्रा के महत्त्वपूर्ण पड़ावों की सचित्र झलक पाठकों को मिल सके इस हेतु हमनें निम्न पच्चीस छायाचित्रों का चयन किया है , ये छायाचित्र केवल अतीत की स्मृति ही नहीं है अपितु ये पत्रिका के लिए भविष्य के सोपान भी हैं। 
  • ढाई दशकों से प्रकाशित हो रही मासिक पत्रिका पर्यावरण डाइजेस्ट ने पर्यावरण के प्रश्नों को मनुष्य और उसके सरोकारों से जोडते हुए मानव और प्रकृति के प्रेमपूर्ण रिश्तों में सामन्जस्य बैठाने की भरपूर कोशिश की है।
  • आम लोगों को जागरुक, सचेत और सूचना सम्पन्न बनाने के लिए पर्यावरण डाइजेस्ट गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ गुणवत्तापूर्ण सामग्री प्रकाशित कर रही है।
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टीका टिप्पणी और संदर्भ

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