"नैन सिंह रावत" के अवतरणों में अंतर

भारत डिस्कवरी प्रस्तुति
यहाँ जाएँ:भ्रमण, खोजें
पंक्ति 1: पंक्ति 1:
 +
{{नैन सिंह रावत विषय सूची}}
 
{{नैन सिंह रावत संक्षिप्त परिचय}}
 
{{नैन सिंह रावत संक्षिप्त परिचय}}
 
'''नैन सिंह रावत''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Nain Singh Rawat'', जन्म- [[21 अक्टूबर]], 1830, [[कुमाऊँ]]; मृत्यु- [[1 फ़रवरी]], [[1882]], [[मुरादाबाद]]) हिमालयी इलाकों की खोज करने वाले पहले भारतीय थे। वे 19वीं शताब्दी के उन पण्डितों में से थे, जिन्होंने [[अंग्रेज़|अंग्रेज़ों]] के लिये [[हिमालय]] के क्षेत्रों की खोजबीन की। नैन सिंह रावत [[कुमाऊँ|कुमाऊँ घाटी]] के रहने वाले थे। उन्होंने [[नेपाल]] से होते हुए [[तिब्बत]] तक के व्यापारिक मार्ग का मानचित्रण किया। उन्होंने ही सबसे पहले [[ल्हासा]] की स्थिति तथा ऊँचाई ज्ञात की और तिब्बत से बहने वाली मुख्य नदी त्सांगपो के बहुत बड़े भाग का मानचित्रण भी किया। नैन सिंह रावत को एक एक्सप्लोरर के रूप में ही याद नहीं किया जाता, बल्कि हिंदी में आधुनिक विज्ञान में "अक्षांश दर्पण" नाम की एक किताब लिखने वाले वह पहले भारतीय थे। यह पुस्तक शोध कार्य करने वाली पीढ़ियों के लिए एक ग्रंथ के समान है।
 
'''नैन सिंह रावत''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Nain Singh Rawat'', जन्म- [[21 अक्टूबर]], 1830, [[कुमाऊँ]]; मृत्यु- [[1 फ़रवरी]], [[1882]], [[मुरादाबाद]]) हिमालयी इलाकों की खोज करने वाले पहले भारतीय थे। वे 19वीं शताब्दी के उन पण्डितों में से थे, जिन्होंने [[अंग्रेज़|अंग्रेज़ों]] के लिये [[हिमालय]] के क्षेत्रों की खोजबीन की। नैन सिंह रावत [[कुमाऊँ|कुमाऊँ घाटी]] के रहने वाले थे। उन्होंने [[नेपाल]] से होते हुए [[तिब्बत]] तक के व्यापारिक मार्ग का मानचित्रण किया। उन्होंने ही सबसे पहले [[ल्हासा]] की स्थिति तथा ऊँचाई ज्ञात की और तिब्बत से बहने वाली मुख्य नदी त्सांगपो के बहुत बड़े भाग का मानचित्रण भी किया। नैन सिंह रावत को एक एक्सप्लोरर के रूप में ही याद नहीं किया जाता, बल्कि हिंदी में आधुनिक विज्ञान में "अक्षांश दर्पण" नाम की एक किताब लिखने वाले वह पहले भारतीय थे। यह पुस्तक शोध कार्य करने वाली पीढ़ियों के लिए एक ग्रंथ के समान है।
पंक्ति 11: पंक्ति 12:
 
नैन सिंह रावत को एक एक्सप्लोरर के रूप में ही याद नहीं किया जाता, बल्कि [[हिंदी]] में आधुनिक विज्ञान में "अक्षांश दर्पण" नाम की एक किताब लिखने वाले वह पहले भारतीय थे। यह पुस्तक सर्वेयरों की आने वाली पीढ़ियों के लिये भी एक ग्रंथ के समान है। ब्रिटिश राज में नैन सिंह रावत के कामों को काफी सराहा गया। ब्रितानी सरकार ने [[1977]] में [[बरेली]] के पास तीन गावों की जागीरदारी उन्हें पुरस्कार स्वरूप प्रदान की। इसके अलावा उनके कामों को देखते हुए 'कम्पेनियन आफ द इंडियन एम्पायर' का खिताब दिया गया। इसके अलावा भी अनेक संस्थाओं ने उनके काम को सराहा। [[एशिया]] का मानचित्र तैयार करने में उनका योगदान सर्वोपरि है।
 
नैन सिंह रावत को एक एक्सप्लोरर के रूप में ही याद नहीं किया जाता, बल्कि [[हिंदी]] में आधुनिक विज्ञान में "अक्षांश दर्पण" नाम की एक किताब लिखने वाले वह पहले भारतीय थे। यह पुस्तक सर्वेयरों की आने वाली पीढ़ियों के लिये भी एक ग्रंथ के समान है। ब्रिटिश राज में नैन सिंह रावत के कामों को काफी सराहा गया। ब्रितानी सरकार ने [[1977]] में [[बरेली]] के पास तीन गावों की जागीरदारी उन्हें पुरस्कार स्वरूप प्रदान की। इसके अलावा उनके कामों को देखते हुए 'कम्पेनियन आफ द इंडियन एम्पायर' का खिताब दिया गया। इसके अलावा भी अनेक संस्थाओं ने उनके काम को सराहा। [[एशिया]] का मानचित्र तैयार करने में उनका योगदान सर्वोपरि है।
 
==उपलब्धियाँ==
 
==उपलब्धियाँ==
#ब्रिटिश 19वीं शताब्दी में [[तिब्बत]] का नक्शा बनाना चाहते थे, लेकिन उस समय यूरोपीय लोगों का हर जगह स्वागत नहीं हुआ करता था। [[ब्रिटेन]] के लिए [[हिमालय]] के क्षेत्रों का अन्वेषण करने वाले वह शुरुआती भारतीयों में से थे।<ref>{{cite web |url=http://zeenews.india.com/hindi/india/5-key-points-about-nain-singh-rawat-google-celebrates-first-indian-who-explorer-himalayan/347401 |title=हिमालयी इलाकों की खोज करने वाले पहले भारतीय थे नैन सिंह रावत, जानें 5 खास बातें |accessmonthday=24 मई |accessyear=2017 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=zeenews.india.com |language=हिंदी }}</ref>
+
#ब्रिटिश 19वीं शताब्दी में [[तिब्बत]] का नक्शा बनाना चाहते थे, लेकिन उस समय यूरोपीय लोगों का हर जगह स्वागत नहीं हुआ करता था। [[ब्रिटेन]] के लिए [[हिमालय]] के क्षेत्रों का अन्वेषण करने वाले वह शुरुआती भारतीयों में से थे।<ref>{{cite web |url=http://zeenews.india.com/hindi/india/5-key-points-about-nain-singh-rawat-google-celebrates-first-indian-who-explorer-himalayan/347401|title=हिमालयी इलाकों की खोज करने वाले पहले भारतीय थे नैन सिंह रावत, जानें 5 खास बातें |accessmonthday=24 मई |accessyear=2017 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=zeenews.india.com |language=हिंदी }}</ref>
 
#नैन सिंह रावत ने सबसे पहले 1855-[[1857]] में अपनी यात्रा जर्मन लोगों के साथ शुरू की थी। उन्होंने [[कैलाश मानसरोवर|मानसरोवर]] और रकस ताल झील की यात्रा की। इसके बाद वे गारटोक और [[लद्दाख]] गए।
 
#नैन सिंह रावत ने सबसे पहले 1855-[[1857]] में अपनी यात्रा जर्मन लोगों के साथ शुरू की थी। उन्होंने [[कैलाश मानसरोवर|मानसरोवर]] और रकस ताल झील की यात्रा की। इसके बाद वे गारटोक और [[लद्दाख]] गए।
 
#तिब्बत का सर्वेक्षण करने वाले नैन सिंह रावत पहले व्यक्ति थे। तिब्बती भिक्षु के रूप में प्रसिद्ध रावत [[कुमाऊं मण्डल|कुमाऊं क्षेत्र]] के अपने घर से [[काठमांडू]], [[ल्हासा]] और [[तवांग]] तक गए।
 
#तिब्बत का सर्वेक्षण करने वाले नैन सिंह रावत पहले व्यक्ति थे। तिब्बती भिक्षु के रूप में प्रसिद्ध रावत [[कुमाऊं मण्डल|कुमाऊं क्षेत्र]] के अपने घर से [[काठमांडू]], [[ल्हासा]] और [[तवांग]] तक गए।
पंक्ति 24: पंक्ति 25:
 
*[https://khabar.ndtv.com/news/zara-hatke/google-doodle-on-indian-explorer-nain-singh-rawat-1765267 गूगल ने अपना डूडल नैन सिंह रावत को समर्पित किया, जानें कौन है यह शख्‍स]
 
*[https://khabar.ndtv.com/news/zara-hatke/google-doodle-on-indian-explorer-nain-singh-rawat-1765267 गूगल ने अपना डूडल नैन सिंह रावत को समर्पित किया, जानें कौन है यह शख्‍स]
 
==संबंधित लेख==
 
==संबंधित लेख==
 
+
{{नैन सिंह रावत विषय सूची}}
 
[[Category:भारतीय अन्वेषक]][[Category:भूगोलवेत्ता]][[Category:जीवनी साहित्य]][[Category:चरित कोश]][[Category:भूगोल कोश]]
 
[[Category:भारतीय अन्वेषक]][[Category:भूगोलवेत्ता]][[Category:जीवनी साहित्य]][[Category:चरित कोश]][[Category:भूगोल कोश]]
 
__INDEX__
 
__INDEX__

10:22, 24 अक्टूबर 2017 का अवतरण

नैन सिंह रावत विषय सूची


नैन सिंह रावत
नैन सिंह रावत
जन्म 21 अक्टूबर, 1830
जन्म भूमि कुमाऊँ,
मृत्यु 1 फ़रवरी, 1882
मृत्यु स्थान मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र अन्वेषण
मुख्य रचनाएँ 'अक्षांश दर्पण'
पुरस्कार-उपाधि 'कम्पेनियन आफ द इंडियन एम्पायर' का खिताब
प्रसिद्धि भारतीय अन्वेषक
नागरिकता भारतीय
विशेष नैन सिंह रावत ने ही सबसे पहले दुनिया को बताया कि ल्हासा की समुद्र तल से ऊंचाई कितनी है, उसके अक्षांश और देशांतर क्या हैं। यही नहीं उन्होंने दुनिया को यह भी बताया कि स्वांग पो और ब्रह्मपुत्र एक ही नदी है।
अन्य जानकारी तिब्बत का सर्वेक्षण करने वाले नैन सिंह रावत पहले व्यक्ति थे। ब्रिटेन के लिए हिमालय के क्षेत्रों का अन्वेषण करने वाले वह शुरुआती भारतीयों में से एक थे।

नैन सिंह रावत (अंग्रेज़ी: Nain Singh Rawat, जन्म- 21 अक्टूबर, 1830, कुमाऊँ; मृत्यु- 1 फ़रवरी, 1882, मुरादाबाद) हिमालयी इलाकों की खोज करने वाले पहले भारतीय थे। वे 19वीं शताब्दी के उन पण्डितों में से थे, जिन्होंने अंग्रेज़ों के लिये हिमालय के क्षेत्रों की खोजबीन की। नैन सिंह रावत कुमाऊँ घाटी के रहने वाले थे। उन्होंने नेपाल से होते हुए तिब्बत तक के व्यापारिक मार्ग का मानचित्रण किया। उन्होंने ही सबसे पहले ल्हासा की स्थिति तथा ऊँचाई ज्ञात की और तिब्बत से बहने वाली मुख्य नदी त्सांगपो के बहुत बड़े भाग का मानचित्रण भी किया। नैन सिंह रावत को एक एक्सप्लोरर के रूप में ही याद नहीं किया जाता, बल्कि हिंदी में आधुनिक विज्ञान में "अक्षांश दर्पण" नाम की एक किताब लिखने वाले वह पहले भारतीय थे। यह पुस्तक शोध कार्य करने वाली पीढ़ियों के लिए एक ग्रंथ के समान है।

परिचय

नैन सिंह रावत कुमाऊं क्षेत्र के रहने वाले थे। उनका जन्म 21 अक्टूबर सन 1830 में कुमाऊं के पिथौरागढ़ ज़िले के मिलम नामक गांव में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हासिल की थी, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह जल्द ही पिता के साथ भारत और तिब्बत के बीच चलने वाले पारंपरिक व्यापार से जुड़ गए। अपने पिता के साथ उन्हें तिब्बत के कई स्थानों पर जाने और उन्हें समझने का मौका मिला। उन्होंने तिब्बती भाषा सीखी, जिससे उन्हें काफी मदद मिली। हिन्दी और तिब्बती के अलावा उन्हें फ़ारसी और अंग्रेज़ी का भी अच्छा ज्ञान था। महान अन्वेषक, सर्वेक्षक और मानचित्रकार नैन सिंह रावत ने अपनी यात्राओं की डायरियां भी तैयार की थीं।

योगदान

19वीं शताब्दी में अंग्रेज़ भारत का नक्शा तैयार कर रहे थे और लगभग पूरे भारत का नक्शा बना चुके थे। अब वह आगे बढ़ने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन उनके आगे बढ़ने में सबसे बड़ा रोड़ा था तिब्बत। यह क्षेत्र दुनिया से छुपा हुआ था। न सिर्फ़ वहां की जानकारियां बेहद कम थीं बल्कि विदेशियों का वहां जाना भी सख़्त मना था। ऐसे में अंग्रेज़ कशमकश में थे कि वहां का नक्शा तैयार होगा कैसे? हालांकि ब्रितानी सरकार ने कई कोशिशें कीं, लेकिन हर बार नाकामी ही हाथ लगी। पंडित नैन सिंह रावत पर किताब लिख चुके और उन पर शोध कर रहे रिटार्यड आईएएस अधिकारी एसएस पांगती के अनुसार- "अंग्रेज़ अफसर तिब्बत को जान पाने में नाकाम हो गए थे।" कई बार विफल होने के बाद उस समय के सर्वेक्षक जनरल माउंटगुमरी ने ये फैसला लिया कि अंग्रेज़ों के बजाए उन भारतीयों को वहां भेजा जाए जो तिब्बत के साथ व्यापार करने वहां अक्सर आते जाते हैं। और फिर खोज शुरू हुई ऐसे लोगों की जो वहां की भौगोलिक जानकारी एकत्र कर पायें, और आखिरकार 1863 में कैप्टन माउंटगुमरी को दो ऐसे लोग मिल ही गए। 33 साल के पंडित नैन सिंह रावत और उनके चचेरे भाई माणी सिंह।

पुरस्कार व सम्मान

नैन सिंह रावत को एक एक्सप्लोरर के रूप में ही याद नहीं किया जाता, बल्कि हिंदी में आधुनिक विज्ञान में "अक्षांश दर्पण" नाम की एक किताब लिखने वाले वह पहले भारतीय थे। यह पुस्तक सर्वेयरों की आने वाली पीढ़ियों के लिये भी एक ग्रंथ के समान है। ब्रिटिश राज में नैन सिंह रावत के कामों को काफी सराहा गया। ब्रितानी सरकार ने 1977 में बरेली के पास तीन गावों की जागीरदारी उन्हें पुरस्कार स्वरूप प्रदान की। इसके अलावा उनके कामों को देखते हुए 'कम्पेनियन आफ द इंडियन एम्पायर' का खिताब दिया गया। इसके अलावा भी अनेक संस्थाओं ने उनके काम को सराहा। एशिया का मानचित्र तैयार करने में उनका योगदान सर्वोपरि है।

उपलब्धियाँ

  1. ब्रिटिश 19वीं शताब्दी में तिब्बत का नक्शा बनाना चाहते थे, लेकिन उस समय यूरोपीय लोगों का हर जगह स्वागत नहीं हुआ करता था। ब्रिटेन के लिए हिमालय के क्षेत्रों का अन्वेषण करने वाले वह शुरुआती भारतीयों में से थे।[1]
  2. नैन सिंह रावत ने सबसे पहले 1855-1857 में अपनी यात्रा जर्मन लोगों के साथ शुरू की थी। उन्होंने मानसरोवर और रकस ताल झील की यात्रा की। इसके बाद वे गारटोक और लद्दाख गए।
  3. तिब्बत का सर्वेक्षण करने वाले नैन सिंह रावत पहले व्यक्ति थे। तिब्बती भिक्षु के रूप में प्रसिद्ध रावत कुमाऊं क्षेत्र के अपने घर से काठमांडू, ल्हासा और तवांग तक गए।
  4. नैन सिंह रावत भौगोलिक अंवेषण में प्रशिक्षित, उच्च शिक्षित और बहादुर स्थानीय पुरुषों में से एक थे।
  5. ल्हासा के सटीक स्थान और ऊंचाई को नैन सिंह रावत ने निर्धारित किया, त्सांगपो का नक्शा बनाया और थोक जालुंग की सोने की खदानों के बारे में बताया।


पन्ने की प्रगति अवस्था
आधार
प्रारम्भिक
माध्यमिक
पूर्णता
शोध

टीका टिप्पणी और संदर्भ

बाहरी कड़ियाँ

संबंधित लेख

नैन सिंह रावत विषय सूची