कला-संस्कृति और धर्म सामान्य ज्ञान 25  

सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी
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1. निम्नलिखित में से कौन-सा नगर 'तीर्थराज' के नाम से प्रसिद्ध है?

मथुरा
प्रयाग
काशी
उज्जैन
प्रयाग
'प्रयाग' का आधुनिक नाम इलाहाबाद है। प्रयाग उत्तर प्रदेश का प्राचीन तीर्थस्थान है, जिसका नाम अश्वमेध आदि अनेक यज्ञ होने से पड़ा था। यह गंगा-यमुना के संगम पर स्थित है तथा यहाँ का स्नान "त्रिवेणी स्नान" कहा जाता है। प्रयाग का मुस्लिम शासन में 'इलाहाबाद' नाम कर दिया गया था, परंतु 'प्रयाग' नाम आज भी प्रचलित है। यहाँ उत्तर प्रदेश का उच्च न्यायालय और एजी कार्यालय भी है। रामायण में इलाहाबाद, प्रयाग के नाम से वर्णित है। ब्रह्मपुराण का कथन है- 'प्रकृष्टता के कारण यह 'प्रयाग' है और प्रधानता के कारण यह 'राज' शब्द अर्थात् 'तीर्थराज' से युक्त है। ऐसा माना जाता है कि इस संगम पर भूमिगत रूप से सरस्वती नदी भी आकर मिलती है। इलाहाबाद का उल्लेख भारत के धार्मिक ग्रन्थों में भी मिलता है।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-प्रयाग, कुम्भ मेला, कल्पवास

2. निम्न में से किस राज्य में 'जगन्नाथ रथयात्रा' निकाली जाती है?

उड़ीसा
मध्य प्रदेश
राजस्थान
महाराष्ट्र
जगन्नाथ रथयात्रा
'उड़ीसा' या 'ओडिशा' भारत का एक प्रान्त है, जो भारत के पूर्वी तट पर बसा है। ओडिशा उत्तर में झारखण्ड, उत्तर-पूर्व में पश्चिम बंगाल, दक्षिण में आंध्र प्रदेश और पश्चिम में छत्तीसगढ़ से घिरा हुआ है। इसके पूर्व में 'बंगाल की खाड़ी' है। भौगोलिक लिहाज़ से इसके उत्तर में छोटा नागपुर का पठार है, जो अपेक्षाकत कम उपजाऊ है, लेकिन दक्षिण में महानदी, ब्राह्मणी, कालिंदी और वैतरणी नदियों का उपजाऊ मैदान है। यहाँ पुरी में जगन्नाथ मंदिर है, जो भारत के सर्वाधिक प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यहाँ होने वाली वार्षिक 'जगन्नाथ रथयात्रा' लाखों लोगों को आकृष्ट करती है। यहाँ से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर भगवान सूर्य के रथ के आकार में बना 'कोणार्क मंदिर' भी है।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-उड़ीसा, जगन्नाथ रथयात्रा

3. मुस्लिम आक्रमणकारी महमूद ग़ज़नवी ने किस ज्योतिर्लिंग को लूटा था?

सोमनाथ
केदारनाथ
रामेश्वर
महाकालेश्वर
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग
'सोमनाथ मन्दिर' जिसे 'सोमनाथ ज्योतिर्लिंग' भी कहा जाता है, गुजरात (सौराष्ट्र) के काठियावाड़ क्षेत्र के अन्तर्गत प्रभास में विराजमान हैं। इसी क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने यदु वंश का संहार कराने के बाद अपनी नर लीला समाप्त कर ली थी। प्राचीन भारतीय इतिहास में सोमनाथ मन्दिर को सन 1024 में मुस्लिम आक्रमणकारी महमूद ग़ज़नवी ने नष्ट कर दिया था। मूर्ति भंजक होने के कारण तथा सोने-चाँदी को लूटने के लिए महमूद ने मन्दिर में तोड़-फोड़ की। मन्दिर के हीरे-जवाहरातों को लूट कर वह अपने देश ग़ज़नी लेकर चला गया। उक्त सोमनाथ मन्दिर का भग्नावशेष आज भी समुद्र के किनारे विद्यमान है।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-सोमनाथ ज्योतिर्लिंग

4. निम्नलिखित में से 'मूलशंकर' किसके बचपन का नाम था?

राजा राममोहन राय
मध्वाचार्य
रामकृष्ण परमहंस
दयानन्द सरस्वती
दयानन्द सरस्वती
'स्वामी दयानन्द सरस्वती' आर्य समाज के प्रवर्तक और प्रखर सुधारवादी संन्यासी थे। प्राचीन ऋषियों के वैदिक सिद्धांतों के पक्षपाती दयानन्द सरस्वती का जन्म गुजरात की छोटी-सी रियासत 'मोरवी' के टंकारा नामक गाँव में हुआ था। मूल नक्षत्र में पैदा होने के कारण ही इनका नाम 'मूलशंकर' रखा गया था। स्वामी दयानंद सरस्वती ने अपने विचारों के प्रचार के लिए हिन्दी भाषा को अपनाया। उनकी सभी रचनाएँ और सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण ग्रंथ 'सत्यार्थ प्रकाश' मूल रूप में हिन्दी भाषा में लिखा गया है। स्वामीजी का कहना था- "मेरी आँख तो उस दिन को देखने के लिए तरस रही है, जब कश्मीर से कन्याकुमारी तक सब भारतीय एक ही भाषा बोलने और समझने लग जाएँगे।"ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-दयानन्द सरस्वती

5. ब्रह्मा के मुख से किस देवी की उत्पत्ति मानी जाती है?

महालक्ष्मी
पार्वती
सरस्वती
दुर्गा
सरस्वती देवी
माँ सरस्वती विद्या और वाणी की अधिष्ठात्री देवी हैं। इनका जन्म ब्रह्मा के मुख से माना गया है। ब्रह्मा अपनी पुत्री सरस्वती पर ही आसक्त हो गये थे। वे उसके पास गमन के लिए तत्पर हुए। इसी समय सभी प्रजापतियों ने अपने पिता ब्रह्मा को न केवल समझाया, अपितु उनके विचार की हीनता की ओर भी संकेत किया। ब्रह्मा ने लज्जावश वह शरीर त्याग दिया, जो कुहरा अथवा अंधकार के रूप में दिशाओं में व्याप्त हो गया। वाल्मीकि, बृहस्पति, भृगु इत्यादि को क्रमश: नारायण, मरीचि तथा ब्रह्मा आदि ने सरस्वती पूजन का बीजमन्त्र दिया था।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-सरस्वती

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