कला-संस्कृति और धर्म सामान्य ज्ञान 107  

सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी
राज्यों के सामान्य ज्ञान


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बाँसुरी वादक
ओडिसी नर्तक
शास्त्रीय गायक
सितार वादक
भीमसेन जोशी
भारत रत्न सम्मानित पंडित भीमसेन जोशी (जन्म-14 फ़रवरी, 1922, गड़ग, कर्नाटक; मृत्यु- 24 जनवरी, 2011 पुणे, महाराष्ट्र) किराना घराने के महत्त्वपूर्ण शास्त्रीय गायक हैं। उन्होंने 19 साल की उम्र से ही गायन शुरू किया था और वह सात दशकों तक शास्त्रीय गायन करते रहे। भीमसेन जोशी ने कर्नाटक को गौरवान्वित किया है। भारतीय संगीत के क्षेत्र में इससे पहले एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी, उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ान, पंडित रविशंकर और लता मंगेशकर को 'भारत रत्न' से सम्मानित किया जा चुका है।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-भीमसेन जोशी

2. गायन की ध्रुपद शैली का आरम्भ किसने किया था?

अमीर खुसरो
मानसिंह तोमर
तानसेन
विष्णु दिगम्बर पलुस्कर
अभी तक सर्व सम्मति से यह निश्चित नहीं हो पाया है कि ध्रुपद का अविष्कार कब और किसने किया था। इस सम्बन्ध में विद्वानों के कई मत हैं। बहुसंख्य विद्वानों के अनुसार पन्द्रहवीं शताब्दी में ग्वालियर के राजा मानसिंह तोमर ने इसकी रचना की थी। इतना तो निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि राजा मानसिंह तोमर ने ध्रुपद के प्रचार में बहुत हाथ बंटाया था। मुग़ल बादशाह अकबर के समय में तानसेन और उनके गुरु स्वामी हरिदास डागर, नायक बैजू और गोपाल जैसे प्रख्यात गायक ही इसे गाया करते थे।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-ध्रुपद

3. बेगम अख़्तर कला की किस विधा से सम्बन्धित हैं?

नृत्य
चित्रकला
गायन
लोककला
बेगम अख़्तर
बेगम अख़्तर भारत की प्रसिद्ध ग़ज़ल और ठुमरी गायिका थीं जिन्हें कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन 1968 में पद्म श्री और सन 1975 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। बेगम अख़्तर को मल्लिका-ए-ग़ज़ल भी कहा जाता है।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-बेगम अख़्तर

4. तानसेन, स्वामी हरिदास तथा बैजू बावरा हिन्दुस्तानी संगीत शैली के किस रूप से सम्बद्ध थे?

तराना
धमार
ध्रुपद
तिल्लाना
आज तक सर्व सम्मति से यह निश्चित नहीं हो पाया है कि ध्रुपद का अविष्कार कब और किसने किया। इस सम्बन्ध में विद्वानों के कई मत हैं। बहुसंख्य विद्वानों के अनुसार पन्द्रहवीं शताब्दी में ग्वालियर के राजा मानसिंह तोमर ने इसकी रचना की। इतना तो निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि राजा मानसिंह तोमर ने ध्रुपद के प्रचार में बहुत हाथ बंटाया। अकबर के समय में तानसेन और उनके गुरु स्वामी हरिदास डागर, नायक बैजू और गोपाल आदि प्रख्यात गायक ही इसे गाते थे। ध्रुपद गंभीर प्रकृति का गीत है। इसे गाने में कण्ठ और फेफड़े पर बल पड़ता है। इसलिये लोग इसे 'मर्दाना गीत' कहते हैं।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-ध्रुपद

5. 'कर्नाटक संगीत का पितामह' किसे कहा जाता है?

त्यागराज
पुरन्दर दास
स्वाति तिरुपाल
मुत्तुस्वामी दीक्षितर

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