गंगानगर  

गंगानगर भूतपूर्व श्रीगंगानगर शहर, सुदूर उत्तरी राजस्थान राज्य, पश्चिमोत्तर भारत में स्थित है। श्रीगंगानगर शहर गंगानगर ज़िला का मुख्यालय है। यह राजस्थान प्रदेश का सबसे उत्तरी जनपद है जिसके उत्तर में फ़िरोजपुर एवं हनुमानगढ़, दक्षिण में बीकानेर तथा चूरू (राजस्थान), तथा पश्चिम में पाकिस्तान है। पहले यह बीकानेर राज्य का एक भाग था।

नामकरण

गंगानगर जनपद का प्रमुख प्रशासकीय केंद्र तथा विकासशील नगर भी है। इसका नामकरण बीकानेर के महाराज गंगासिंह के नाम पर हुआ है। यह ज़िले के सर्वाधिक समुन्नत तथा सिंचित कृषिक्षेत्र में स्थित होने के कारण प्रमुख व्यापारिक मंडी तथा यातायात केंद्र हो गया है। यहाँ जनपदीय प्रशासनिक कार्यालयों तथा न्यायालयों के अतिरिक्त कई स्नातक महाविद्यालय तथा अन्य सांस्कृतिक संस्थान हैं। यह नगर पूर्णतया 20वीं शताब्दी की देन है। प्रारंभिक दशाब्दियों में यह अज्ञात ग्राम रहा। लेकिन गंगा-नहर सिंचाई परियोजना द्वारा क्षेत्र में कृषि का विकास होने के कारण इसकी जनसंख्या अधिक बढ़ गई है। यहाँ 1945 में चीनी का कारख़ाना खोला गया। यहाँ एक औद्योगिक संस्थान की भी स्थापना हुई है।

जलवायु

श्री गंगानगर की जलवायु बहुत गर्म है। गर्मी में तापमान 52 सेल्सियस पहुंचता है और शीतकालीन में -2 सेल्सियस के आसपास गिर जाता है। औसत वार्षिक वर्षा केवल 20 सेमी होती है। वर्षा की मात्रा, जलवायु तथा जलपूर्ति की दृष्टि से यह जनपद राजस्थान के रेतीले एवं शुष्क क्षेत्र में पड़ता है। इस संपूर्ण क्षेत्र में जल का धरातलीय प्रवाह (Surface run off) नहीं के बराबर है। संपूर्ण जनपद बृहद बालुकामय मैदान है। एकमात्र नदी घग्घर है जिसका प्रवाह हनुमानगढ़ के पास ही रेत में समाप्त प्राय हो जाता है। जनवरी का अधिकतम ताप 20.70 सेल्सियस तथा निम्नतम 2.40 सेल्सियस रहता है। ग्रीष्म के जून महीने में अधिकतम ताप 43.0 सेल्सियस तक हो जाता है किंतु गंगानगर में 50.0 सेल्सियस तक की संभावना रहती है। ज़िले में औसत वार्षिक वर्षा 8.580 सेल्सियस होती है और वर्षा के कुल दिन 15.2 हैं। अधिकांश वर्षा (6.690 सेल्सियस) जून-जुलाई-अगस्त महीनों में हो जाती है। राजस्थान में सर्वाधिक रेत के तूफान गंगानगर ज़िले में ही आते हैं।

कृषि और उद्योग

1970 के दशम में यह एक कृषि वितरण केंद्र के रूप में तेज़ी से विकसित हुआ। इस शहर में वस्त्र, चीनी और चावल की मिलें हैं। ज़िले की रेतीली भूमि में जलपूर्ति करने पर उत्पादन शक्ति बहुत अधिक हो जाती है। घग्घर-घाटी की मटियार भूमि तथा वर्षा ऋतु में भर जाने वाले तालाब तथा झीलों के तल में प्राप्य मटियार दोमट गेहूँ एवं चने की फसलों के लिए प्रसिद्ध हैं। न केवल भाखड़ा नांगल परियोजना के जल द्वारा (संभाव्य सिंचनक्षेत्र 7,70,000 एकड़), प्रत्युत हनुमानगढ़ से विकसित विशाल राजस्थान-नहर-परियोजना द्वारा, जो विश्व में अपने ढंग की सर्वाधिक लंबी नहर है, जनपद का सर्वागीण विकास किया जा रहा है। ज़िले का गंगा-नहर-उपनिवेशक्षेत्र भारत का सबसे कोरा क्षेत्र है जहां सर्वाधिक ट्रैक्टर प्रयुक्त हो रहे हैं। सिंचाई की वृद्धि के साथ कृषि के यांत्रिक साधनों का अधिक उपयोग होता जा रहा है। जनपद में स्थित सूरतगढ़ फार्म एशिया महादेश का वृहत्तम सुनियोजित 30,670 एकड़ का फार्म है जिसमें यांत्रिक कृषि होती है। यह कृषिक्षेत्र प्रयोगशाला सदृश है जिसमें शुष्क प्रदेश के उपयुक्त कृषि का विकास करने, समुन्नत बीज उत्पन्न करने, पशुओं की नस्लें समुन्नत करने आदि के प्रयोग किए जा रहे हैं। अत: जनपद की कृषिव्यवस्था जीविकायापन कृषि की स्थिति से निकलकर वाणिज्य कृषि की ओर तीव्र गति से अग्रसर हो रही है। खाद्यान्नों के अतिरिक्त गन्ना एवं कपास का उत्पादन बढ़ रहा है। कृषि पदार्थों पर आधारित उद्योग-धंधे पनप रहे हैं। गंगानगर में चीनी का कारख़ाना तथा औद्योगिक संस्थान, हनुमानगढ़ में उर्वरक कारख़ाना, रायसिंहनगर में औद्योगिक, प्राविधक तथा शैक्षणिक संस्थान आदि जनपद की विकासशीलता के सूचक हैं। भाखड़ा-नांगल योजना द्वारा जनपद के प्रमुख स्थानों को बिजली प्राप्त हो रही है।

शिक्षण संस्थान

यहाँ एक मौसम विज्ञान केंद्र तथा राजस्थान विश्वविद्यालय से संबद्ध कई महाविद्यालय हैं।

जनसंख्या

2001 की जनगणना के अनुसार गंगानगर शहर की कुल जनसंख्या 2,10,788 है; और गंगानगर ज़िले की कुल जनसंख्या 17,88,427 है।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

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