भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान  

भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (आई.आई.आर.एस), 'भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन' (इसरो), अन्तरिक्ष विभाग, भारत सरकार का एक यूनिट है और यह सुदूर संवेदन, भू-सूचना, अवस्थिति और नौवहन प्रौद्योगिकी और उसके उपयोगों के क्षेत्र में क्षमता निर्माण के लिए प्रमुख शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान है। भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (आई.आई.आर.एस.), पहले भारतीय फोटो-निर्वचन संस्थान (आई.पी.आई) के नाम से जाना जाता था, जिसकी स्थापना 1996 में भारतीय सर्वेक्षण के तत्वावधान में, उभरती प्रौद्योगिकी के अनुभवी लोगों के साथ विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए की गयी थी। इस संस्थान को जुलाई, 1976 में 'राष्ट्रीय सुदूर संवेदन एजेन्सी' (एन.आर.एस.ए.) के साथ विलीन किया गया और वर्ष 1980 में एन.आर.एस.ए. अन्तरिक्ष विभाग (भारत सरकार) की छत्रछाया में आ गयी। 1 सितम्बर, 2008 से आई.आई.आर.एस. को एन.आर.एस.सी. के भाग के रूप में इसरो की छत्रछाया में लाया गया और 1 अप्रैल, 2011 से आई.आई.आर.एस. को इसरो के एक अलग निकाय के रूप में मान्यता मिली है।

प्रशिक्षण तथा पाठ्यक्रम

आई.आई.आर.एस. का प्रयास 'प्रौद्योगिकि अंतरण' और प्रयोक्ता जागरूकता के समग्र लक्ष्य के साथ सुदूर संवेदन और जी.आई.एस. प्रौद्योगिकी के उपयोग में स्नातकोत्तर स्तर पर शैक्षिक संस्थाओं सहित प्रयोक्ता समुदाय से विषयवस्तु विशेषज्ञों को प्रशिक्षण देना रहा है। इस संस्थान ने कई कार्यक्रम विकसित किये हैं, जो विभिन्न लक्ष्य समूह के विविध आवश्यकताओं के अनुकूल हैं। आई.आई.आर.एस. नये स्नातकोत्तर विद्यार्थियों सहित विभिन्न प्रयोक्ता वर्ग के लिए विविध पाठ्यक्रम चलाता है, यानि एम.टेक, एम.एस.सी, स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम, विश्वविद्यालय के संकाय के लिए 2 महीने का एन.एन.आर.एम.एस. प्रायोजित पाठ्यक्रम, 2 सप्ताह का माँग विशिष्ट पाठ्यक्रम और 1 सप्ताह का निर्णय लेने वालों के लिए समग्र पाठ्यक्रम।

सुविधाएँ

आई.आई.आर.एस., एशिया और अफ़्रीका के 77 देशों से 750 से अधिक छात्र सहित लगभग 8000 छात्रों को प्रशिक्षित किया गया है। ये छात्र 'इसरो शेयर्स फ़ेलोशिप कार्यक्रम', विदेश मंत्रालय, भारत सरकार की आई.टी.ई.सी/एस.सी.ए.ए.पी. फ़ेलोशिप योजना और अन्य फ़ेलोशिप योजना आदि का लाभ उठाते हैं। इसके साथ, आई.आई.आर.एस. में सुदूर संवेदन और जी.आई.एस. दोनों के लिए अत्याधुनिक अवसंरचना सुविधाएँ हैं। यहाँ सुदूर संवेदन, जी.आई.एस. और जी.पी.एस. प्रौद्योगिकी और उसके उपयोगों में अनुभवी और अंतर्राष्ट्रीय प्रसिद्ध शिक्षा संकाय सदस्य हैं। आई.आई.आर.एस. मेजबान संस्थान है और साथ ही संयुक्त राष्ट्रों के तहत् एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए अन्तरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी शिक्षा केन्द्र (सी.एस.एस.टी.ई-ए.पी.) का मुख्यालय भी है। यह इस क्षेत्र में स्थापित पहला संस्थान है और 1996 से प्रति वर्ष सुदूर संवेदन और जी.आई.एस. में नियमित स्नातकोत्तर और अल्पावधि पाठ्यक्रम आयोजित करता है।

मान्यता

आई.आई.आर.एस. , स्नातकोत्तर स्तर पर विश्वविद्यालय के संकाय को प्रति वर्ष 8 सप्ताह की अवधि के लिए विशिष्ट पाठ्यक्रम आयोजित करने के लिए 'राष्ट्रीय प्राकृतिक संसाधन प्रबन्धन प्रणाली' (एन.एन.आर.एम.एस.) द्वारा मान्यता प्राप्त कर ली है, ताकि वे अपने विशिष्ट क्षेत्र में सुदूर संवेदन और जी.आई.एस. के विशिष्ट विषयों पर शिक्षा प्रदान कर सकें और अपनी संस्थान में सुदूर संवेदन और जी.आई.एस. उपयोग पर एम.टेक/एम.एस.सी/स्नातकोत्तर डिप्लोमा जैसे नये कार्यक्रमों की शुरूआत कर सकें। आई.आई.आर.एस. ने पूरे भारत में फैले लगभग 800 विश्वविद्यालय के संकाय को प्रशिक्षित किया है। कई विश्वविद्यालय आई.आई.आर.एस. के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से लाभान्वित हुए हैं और आई.आई.आर.एस. से संस्थागत सहायता के साथ स्नतकोत्तर स्तर पर सुदूर संवेदन और जी.आई.एस. पाठ्यक्रम शुरू किये हैं।

दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम

आई.आई.आर.एस. ने पहली बार दूर शिक्षा कार्यक्रम की शुरूआत की है, यानि सुदूर संवेदन, जी.आई.एस. और जी.पी.एस. की मूलभूत जानकारी पर एडुसैट आधारित कार्यक्रम और 4000 से अधिक विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करते हुए पूरे भारत में फैले स्नातकोत्तर स्तर के साठ से अधिक विश्वविद्यालयों और संस्थानों के लिए 2007 से 2011 तक ऐसे छह कार्यक्रम (भू सूचना में प्रगति पर एक विशेष पाठ्यक्रम सहित) आयोजित किया। विश्वविद्यालय के विद्यार्थी, जो मूलभूत डिग्री पाने के लिए अपने निजी विषय में स्नातक पूर्व/स्नातकोत्तर शिक्षा ले रहे हैं, वे भी समानान्तर में आई.आई.आर.एस. आऊटरीच प्रमाणपत्र कार्यक्रम में भी भाग ले सकते है और भू सूचना के इस नये और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में अपना कार्यक्षेत्र बढ़ा सकते हैं।


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