आर्देशिर गोदरेज  

आर्देशिर गोदरेज
आर्देशिर गोदरेज
पूरा नाम आर्देशिर बुर्जोरजी सोराबजी गोदरेज
अन्य नाम आर्देशिर बुर्जोरजी गोदरेज
जन्म 1868
मृत्यु 1936
कर्म भूमि भारत
प्रसिद्धि उद्योगपति
विशेष योगदान गोदरेज ने भारतीयों की उस मानसिक दासता को समाप्त किया, जो उनके मन में विदेशी माल की श्रेष्ठता के सम्बंध में बैठी हुई थी।
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी गोदरेज भारत में एक नया परिवर्तन लाने वाले महत्त्वपूर्ण उद्योगपति माने जाते हैं।

आर्देशिर बुर्जोरजी सोराबजी गोदरेज (अंग्रेज़ी:Ardeshir Burjorji Sorabji Godrej, जन्म- 1868; मृत्यु- 1936) एक भारतीय व्यापारी थे। उन्होंने अपने भाई पिरोज्शा बुर्जोरजी के साथ गोदरेज ब्रदर्स कंपनी की स्थापना की, जो आधुनिक गोदरेज समूह की पूर्ववर्ती थी।

परिचय

उनका पूरा नाम आर्देशिर बुर्जोरजी सोराबजी गोदरेज था। उन्होंने देशप्रेम की भावना के कारण अपनी वकालत का त्याग किया। वकालत छोड़कर 1897 में उन्होंने गोदरेज एंड बायस मैन्युफैक्चरिंग कम्पनी की स्थापना की। इस कम्पनी ने सबसे पहले ताला बनाया। उन्होंने पूर्णतया भारतीय स्वदेशी वस्तुओं का तो उत्पादन किया ही, परंतु उनका सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य था कि उन्होंने भारतीयों की उस मानसिक दासता को समाप्त किया जो उनके मन में विदेशी माल की श्रेष्ठता के सम्बंध में बैठी हुई थी। उनके उत्पादनों की तुलना किसी भी बढ़िया विदेशी माल से की जा सकती है।[1]

कम्पनी की शरुआत एवं उत्पादन

कुछ व्यक्ति ऐसे होते हैं, जिन्हें किसी एक सीमा में नहीं बाँधा जा सकता। वह दो युगों के बीच पुल का काम करते दिखाई देते हैं। गोदरेज एक ऐसा ही नाम है। इसका कारण यह है कि जब ‘मेड इन इंग्लैण्ड’ की किसी भी वस्तु को बेच लेना बहुत ही सरल काम था, उस समय गोदरेज ने घरों की सुरक्षा में काम आने वाले उपकरणों का उत्पादन आरम्भ किया। इसके अतिरिक्त व्यक्तिगत देखभाल, कार्यालयों के काम आने वाला सामान, मशीनरी, औज़ार और साबुन आदि अनेक वस्तुएं भी गोदरेज कम्पनी समूह द्वारा बनाई जाने लगीं और उन वस्तुओं में शीघ्र ही बाज़ार में अपनी गुणवत्ता की धाक जमा ली। गोदरेज का यह कार्य भारत में एक नवीन परिवर्तन का प्रमाण था। इस प्रकार गोदरेज भारत में एक नया परिवर्तन लाने वाले महत्त्वपूर्ण उद्योगपति माने जाते हैं। कारण यह है कि उनमें स्वदेशी उत्पादन की भावना काम कर रही थी। परंतु उनके स्वदेशी का अर्थ विदेशी वस्तुओं का बहिस्कार नहीं था, वरन् उनके लिए स्वदेशी का अर्थ भारतीयों के लिए ऐसी उपयोगी वस्तुओं का निर्माण था, जो वास्तव में भारतीय हों। उन्होंने यह कार्य देशभक्ति की भावना से प्रेरित होकर ही किया था।

निधन

आर्देशिर गोदरेज का वर्ष 1936 में निधन हो गया।


पन्ने की प्रगति अवस्था
आधार
प्रारम्भिक
माध्यमिक
पूर्णता
शोध

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. भारतीय चरित कोश |लेखक: लीलाधर शर्मा 'पर्वतीय' |प्रकाशक: शिक्षा भारती, मदरसा रोड, कश्मीरी गेट, दिल्ली |पृष्ठ संख्या: 244 |

संबंधित लेख

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"https://bharatdiscovery.org/bharatkosh/w/index.php?title=आर्देशिर_गोदरेज&oldid=611716" से लिया गया