अनिल मनीभाई नाईक

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अनिल मनीभाई नाईक
अनिल मनीभाई नाईक
पूरा नाम अनिल मनीभाई नाईक
जन्म 9 जून, 1942
जन्म भूमि गुजरात, भारत
पति/पत्नी गीता नाईक
संतान दो
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड' के अध्यक्ष
शिक्षा बी. ई. (मैकेनिकल इंजीनियरिंग)
पुरस्कार-उपाधि पद्म विभूषण, 2019

पद्म भूषण, 2009

नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी साल 2003 में जब अनिल मनीभाई नाईक सीईओ बने, तब कंपनी की मार्केट वैल्यू लगभग 6 हजार करोड़ रुपए थी। उनकी देखरेख में कंपनी का मार्केट कैप 31 गुना तक बढ़ गया।
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अनिल मनीभाई नाईक (अंग्रेज़ी: Anil Manibhai Naik, जन्म- 9 जून, 1942) भारतीय उद्योगपति और भारतीय इंजीनियरिंग समूह 'लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड' के अध्यक्ष हैं। वह साल 2018 से 'राष्ट्रीय कौशल विकास निगम' के अध्यक्ष हैं। अनिल मनीभाई नाईक को 2009 में भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। इसके बाद 2019 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। वह वर्ष 2008 के लिए 'इकोनॉमिक टाइम्स-बिजनेस लीडर ऑफ द ईयर अवार्ड' के प्राप्तकर्ता भी हैं।


  • लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) के नॉन एक्जीक्यूटिव चेयरमैन अनिल मनीभाई नाईक 54 साल तक काम करने के बाद सेवानिवृत्त हुए। इन सालों में उन्होंने लगातार काम किया। इस दौरान उन्होंने जो छुट्टियां नहीं लीं, उसके लिए 19.4 करोड़ रुपए उन्हें दिए गए।
  • एलएंडटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक रिटायरमेंट पर अनिल मनीभाई नाईक को 137 करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान हुआ। इसमें उनकी आखिरी महीने की बेसिक सैलरी 2.7 करोड़ रुपए के अलावा ग्रेच्युटी और अन्य लाभ के करीब 100 करोड़ रुपए शामिल हैं।
  • अनिल मनीभाई नाईक ने लार्सन एंड टब्रो को 1965 में बतौर जूनियर इंजीनियर ज्वाइन किया था।
  • उन्होंने 80 के दशक में एलएंडटी को बचाने के लिए अकेले अंबानी परिवार और आदित्य बिड़ला ग्रुप से लड़ाई लड़ी। इतना ही नहीं उन्होंने इन दोनों कॉरपोरेट ग्रुप के हाथों कंपनी को बिकने से बचाने में भी कामयाबी हासिल की थी। उन्होंने कर्मचारियों को समझाया था कि हम सब इसके मालिक रहेंगे तो कोई भी बाहरी व्यक्ति दोबारा कंपनी को खरीदने की कोशिश नहीं करेगा।[1]
  • साल 2003 में जब अनिल मनीभाई नाईक सीईओ बने, तब कंपनी की मार्केट वैल्यू लगभग 6 हजार करोड़ रुपए थी। उनकी देखरेख में कंपनी का मार्केट कैप 31 गुना तक बढ़ गया। इस समय कंपनी का मार्केट कैप 1.82 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है।
  • अनिल मनीभाई नाईक ने अगस्त 2016 में शिक्षा और सेहत के लिए 'नायक मेमोरियल ट्रस्ट' बनाया। गरीबों को बेहतर शिक्षा और सेहत की सुविधाएं मिलती रहे, इसके लिए उन्होंने इस ट्रस्ट को अपनी 2.7 करोड़ रुपए की सैलरी का 75 प्रतिशत हिस्सा आजीवन देने का फैसला किया था। उनका कहना था कि स्कूल और अस्पताल बनाने का मकसद यह है कि हमारी आने वाली पीढ़ी दुनिया से मिलने वाली चुनौतियों का सामना कर सके।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. इस शख्स से सीखें नौकरी करने का तरीका (हिंदी) amarujala.com। अभिगमन तिथि: 02 मार्च, 2022।

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