नव रत्न  

सामान्य तौर पर ग्राहों-नक्षत्रों के अनुसार ज्योतिष में मात्र नवरत्नों को ही लिया जाता है। इन रत्नों के उपलब्ध न होने पर इनके उपरत्न या समान प्रभावकारी रत्नों का प्रयोग किया जाता है। भारतीय मान्यता के अनुसार कुल 84 रत्न पाए जाते हैं, जिनमें माणिक्य, हीरा, मोती, नीलम, पन्ना, मूँगा, गोमेद, तथा वैदूर्य (लहसुनिया) को नवरत्न माना गया है। ये रत्न ही समस्त सौरमण्डल के प्रतिनिधि माने जाते हैं। यही कारण है कि इन्हें धारण करने से शीघ्र फल की प्राप्ति होती है।

क़ीमती पत्थर को रत्न कहा जाता है अपनी सुंदरता की वजह से यह क़ीमती होते हैं। रत्न कोई भी हो अपने आपमें प्रभावशाली होता है। मनुष्य अनादिकाल से ही रत्नों की तरफ आकर्षित रहा है, वर्तमान में भी है तथा भविष्य में भी रहेगा। रत्न शरीर की शोभा आभूषणों के रूप में तो बढ़ाते ही हैं और कुछ लोगों का मानना है की रत्न अपनी दैवीय शक्ति के प्रभाव के कारण रोगों का निवारण भी करते हैं। इन रत्नों से जहाँ स्वयं को सजाने-सँवारने की स्पर्धा लोगों में पाई जाती है वहीं संपन्नता के प्रतीक ये अनमोल रत्न अपने आकर्षण तथा उत्कृष्टता से सबको वशीभूत कर विश्व व्यापी से बखाने जाते हैं। रत्न और जवाहरात के नाम से जाने हुए ये खनिज पदार्थ विश्व की बहुमूल्य राशी हैं, जो युगों से अगणित मनों को मोहते हुए अपनी महत्ता बनाए हुए हैं। रत्नों में मुख्यतः नौ ही रत्न ज़्यादा पहने जाते हैं।

नव ग्रहों और रत्नों की स्थिति

नवग्रह और रत्न ग्रहों के अनुसार रत्नों की अनुकूलता
ग्रह संबंधित रत्न उपयुक्त धातु
सुर्य माणिक्य स्वर्ण
चंद्र मोती चाँदी
मंगल मूँगा स्वर्ण
बुध पन्ना स्वर्ण,काँसा
बृहस्पति पुखराज चाँदी
शुक्र हीरा चाँदी
शनि नीलम लोहा, सीसा
राहु गोमेद चाँदी, सोना, ताँबा, लोहा, काँसा
केतु लहसुनिया चाँदी, सोना, ताँबा, लोहा, काँसा
लग्न साशि स्वामी ग्रह अनुकूल
मेष मंगल मूँगा
वृषभ शुक्र हीरा
मिथुन बुध पन्ना
कर्क चंद्र मोती
सिंह सूर्य माणिक्य
कन्या बुध पन्ना
तुला शुक्र हीरा
वृश्चिक मंगल मूँगा
धनु गुरु पुखराज
मकर शनि नीलम
कुंभ शनि नीलम
मीन गुरु पुखराज

माणिक्य

माणिक्य सूर्य ग्रह का रत्न है। माणिक्य को अंग्रेज़ी में 'रूबी' कहते हैं। यह गुलाबी की तरह गुलाबी सुर्ख श्याम वर्ण का एक बहुमूल्य रत्न है और यह काले रंग का भी पाया जाता है। इसे सूर्य-रत्न की संज्ञा दी गई है। अरबी में इसको 'लाल बदख्शां' कहते हैं। यह कुरुंदम समूह का रत्न है। गुलाबी रंग का माणिक्य श्रेष्ठ माना गया है।

पन्ना

पन्ना बुध ग्रह का रत्न है। पन्ना को अंग्रेज़ी में 'एमेराल्ड' कहते हैं जो कई रंगों में पाया जाता है। यह हरा रंग लिए सफ़ेद लोचदार या नीम की पत्ती जैसे रंग का पारदर्शक होता है। नवरत्न में पन्ना भी होता है। हरे रंग का पन्ना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। पन्ना अत्यंत नरम पत्थर होता है तथा अत्यंत मूल्यवान पत्थरों में से एक है। रंग, रूप, चमक, वजन, पारदर्शिता के अनुसार इसका मूल्य निर्धारित होता है।[1]

हीरा

हीरा शुक्र ग्रह का रत्न है। अंग्रेज़ी में हीरा को 'डायमंड' कहते हैं। हीरा एक प्रकार का बहुमूल्य रत्न है जो बहुत चमकदार और बहुत कठोर होता है। यह भी कई रंगों में पाया जाता है, जैसे- सफ़ेद, पीला, गुलाबी, नीला, लाल, काला आदि। इसे नौ रत्नों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। हीरा रत्न अत्यन्त महंगा व दिखने में सुन्दर होता है। सफ़ेद हीरा सर्वोत्तम है और हीरा सभी प्रकार के रत्नों में श्रेष्ठ है। हीरे को हीरे के कणों के द्वारा पॉलिश करके ख़ूबसूरत बनाया जाता है।[2]

नीलम

नीलम शनि ग्रह का रत्न है। नीलम का अंग्रेज़ी नाम 'सैफायर' है। नीलम रत्न गहरे नीले और हल्के नीले रंग का होता है। यह भी कई रंगों में पाया जाता है; मसलन- मोर की गर्दन जैसा, हल्का नीला, पीला आदि। मोर की गर्दन जैसे रंग वाला नीलम उत्तम श्रेणी का माना जाता है। नीलम पारदर्शी, चमकदार और लोचदार रत्न है। नवरत्न में नीलम भी होता है। शनि का रत्न नीलम एल्यूमीनियम और ऑक्सिजन के मेल से बनता है। इसे कुरुंदम समूह का रत्न माना जाता है।[3]

मोती

मोती चन्द्र ग्रह का रत्न है। मोती को अंग्रेज़ी में 'पर्ल' कहते हैं। मोती सफ़ेद, काला, आसमानी, पीला, लाला आदि कई रंगों में पाया जाता है। मोती समुद्र से सीपों से प्राप्त किया जाता है। मोती एक बहुमूल्य रत्न जो समुद्र की सीपी में से निकलता है और छूटा, गोल तथा सफ़ेद होता है। मोती को उर्दू में मरवारीद और संस्कृत में मुक्ता कहते हैं।

लहसुनिया

लहसुनिया केतु ग्रह का रत्न है। लहसुनिया रत्न में बिल्लि की आँख की तरह का सूत होता है। इसमें पीलापन्, स्याही या सफ़ेदी रंग की झाईं भी होती है। लहसुनिया रत्न को वैदूर्य भी कहा जाता है।

मूँगा

पुखराज की अंगूठी
Topaz Ring

मूँगा मंगल ग्रह का रत्न है। मूँगा को अंग्रेज़ी में 'कोरल' कहा जाता है, जो आमतौर पर सिंदूरी लाल रंग का होता है। मूँगा लाल, सिंदूर वर्ण, गुलाबी, सफ़ेद और कृष्ण वर्ण में भी प्राप्य है। मूँगा का प्राप्ति स्थान समुद्र है। वास्तव में मूँगा एक किस्म की समुद्री जड़ है और मूँगा समुद्री जीवों के कठोर कंकालों से निर्मित एक प्रकार का निक्षेप है। मूँगा का दूसरा नाम प्रवाल भी है। इसे संस्कृत में विद्रुम और फ़ारसी में मरजां कहते हैं।

गोमेद

गोमेद राहु ग्रह का रत्न है। गोमेद का अंग्रेज़ी नाम 'जिरकॉन' है। सामान्यतः इसका रंग लाल धुएं के समान होता है। रक्त-श्याम और पीत आभायुक्त कत्थई रंग का गोमेद उत्त्म माना जाता है। नवरत्न में गोमेद भी होता है। गोमेद रत्न पारदर्शक होता है। गोमेद को संस्कृत में गोमेदक कहते हैं।

पुखराज

पुखराज गुरु ग्रह का रत्न है। पुखराज को अंग्रेज़ी में 'टोपाज' कह जाता हैं। पुखराज एक मूल्यवान रत्न है। पुखराज रत्न सभी रत्नों का राजा है। यह अमूनन पीला, सफ़ेद, तथा नीले रंगों का होता है। वैसे कहावत है कि फूलों के जितने रंग होते हैं, पुखराज भी उतने ही रंग के पाए जाते हैं। पुखराज रत्न एल्युमिनियम और फ्लोरीन सहित सिलिकेट खनिज होता है। संस्कृत भाषा में पुखराज को पुष्पराग कहा जाता है। अमलतास के फूलों की तरह पीले रंग का पुखराज सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. लाभकारी है पन्ना धारण करना (हिन्दी) वेबदुनिया। अभिगमन तिथि: 17 जुलाई, 2010
  2. हीरा है शुक्र का रत्न (हिन्दी) नवभारत टाइम्स। अभिगमन तिथि: 19 जुलाई, 2010।
  3. नीलम है शनि का रत्न (हिन्दी) नवभारत टाइम्स। अभिगमन तिथि: 17 जुलाई, 2010

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