भारत का संविधान- छठी अनुसूची  

(अनुच्छेद 244(2) और अनुच्छेद 275(1)

(असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों) के जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन के बारे में उपबंध[1]

1. स्वशासी ज़िले और स्वशासी प्रदेश[2]

(1) इस पैरा के उपबंधों के अधीन रहते हुए, इस अनुसूची के पैरा 20 से संलग्न सारणी के [3][ [4] [ भाग 1, भाग 2 और भाग 2क] की प्रत्येक मद के और भाग 3] के जनजाति क्षेत्रों का एक स्वशासी ज़िला होगा।
(2) यदि किसी स्वशासी ज़िले में भिन्न-भिन्न अनुसूचित जनजातियां हैं तो राज्यपाल, लोक अधिसूचना द्वारा, ऐसे क्षेत्र या क्षेत्रों को, जिनमें वे बसे हुए हैं, स्वशासी प्रदेशों में विभाजित कर सकेगा।
(3) राज्यपाल, लोक अधिसूचना द्वारा,--
(क) उक्त सारणी के [5] [किसी भाग] में किसी क्षेत्र को सम्मिलित कर सकेगा;
(ख) उक्त सारणी के [6] [किसी भाग] में किसी क्षेत्र को अप वर्जित कर सकेगा;
(ग) नया स्वशासी ज़िला बना सकेगा;
(घ) किसी स्वशासी ज़िले का क्षेत्र बढ़ा सकेगा;
(ङ) किसी स्वशासी ज़िले का क्षेत्र घटा सकेगा;
(च) दो या अधिक स्वशासी ज़िलों या उनके भागों को मिला सकेगा जिससे एक स्वशासी ज़िला बन सके;
[7] [(चच) किसी स्वशासी ज़िले के नाम् में परिवर्तन कर सकेगा; ]
(छ) किसी स्वशासी ज़िले की सीमाएं परिनिश्चित कर सकेगा; परंतु राज्यपाल इस उपपैरा के खंड (ग), खंड (घ), खंड (ङ) और खंड (च) के अधीन कोई आदेश इस अनुसूची के पैरा 14 के उपपैरा (1) के अधीन नियुक्त आयोग के प्रतिवेदन पर विचार करने के पश्चात् ही करेगा, अन्यथा नहीं;
[8] [परंतु यह और कि राज्यपाल द्वारा इस उपपैरा के अधीन किए गए आदेश में ऐसे आनुषंगिक और पारिणामिक उपबंध (जिनके अंतगर्त पैरा 20 का और उक्त सारणी के किसी भाग की किसी मद का कोई संशोधन है) अंतर्विष्ट हो सकेंगे जो राज्यपाल को उस आदेश के उपबंधों को प्रभावी करने के लिए आवश्यक प्रतीत हों।

2. ज़िला परिषदों और प्रादेशिक परिषदों का गठन[9][10]

[11] [(1) प्रत्येक स्वशासी ज़िले के लिए एक जिलासपरिषद् होगी जो तीस से अनधिक सदस्यों से मिलकर बनेगी जिनमें से चार से अनधिक व्यक्ति राज्यपाल द्वारा नामनिर्देशित किए जाएंगे और शेष वयस्क मताधिकार के आधार पर निर्वाचित किए जाएंगे।
(2) इस अनुसूची के पैरा 1 के उपपौरा (2) के अधीन स्वशासी प्रदेश के रूप में गठित प्रत्येक क्षेत्र के लिए पृथक् प्रादेशिक परिषद होगी।
(3) प्रत्येक ज़िला परिषद् और प्रत्येक प्रादेशिक परिषद क्रमश: “(जिले का नाम) की ज़िला परिषद्” और “(प्रदेश का नाम) की प्रादेशिक परिषद” नामक निगमित निकाय होगी, उसका शाश्वत उत्तराधिकार होगा और उसकी सामान्य मुद्रा होगी और उक्त नाम से वह वाद लाएगी और उस पर वाद लाया जाएगा।
(4) इस अनुसूची के उपबंधों के अधीन रहते हुए, स्वशासी ज़िले का प्रशासन ऐसे ज़िले की ज़िला परिषद में वहां तक निहित होगा जहां तक वह इस अनूसूची के अधीन ऐसे ज़िले के भीतर किसी प्रादेशिक परिषद में निहित नहीं हैं और स्वशासी प्रदेश का प्रशासन ऐसे प्रदेश की प्रादेशिक परिषद में निहित होगा ।
(5) प्रादेशिक परिषद वाले स्वशासी ज़िले में प्रादेशिक परिषद के प्राधिकारी के अधीन क्षेत्रों के संबंध में ज़िला परिषद को, इस अनूसूची द्वारा ऐसे क्षेत्रों के संबंध में प्रदत्त शक्तियों के अतिरिक्त के केवल ऐसी शक्तियाँ होंगी जो उसे प्रादेशिक परिषद द्वारा प्रत्यायोजित की जाएं ।
(6) राज्यपाल, संबंधित स्वशासी ज़िलों या प्रदेशों के भीतर विद्यमान जनजाति परिषदों या अन्य प्रतिनिधि जनजाति संगठनों से परामर्श करके, ज़िला परिषदों और प्रादेशिक परिषदों के प्रथम गठन के लिए नियम बनाएगा और ऐसे नियमों में निम्नलिखित के लिए उपबंध किए जाएंगे, अर्थात् :--
(क) ज़िला परिषदों और प्रादेशिक परिषदों की संरचना तथा उनमें स्थानों का आबंटन;
(ख) उन परिषदों के लिए निर्वाचनों के प्रयोजन के लिए प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों का परिसीमन;
(ग) ऐसे नि र्वाचनों में मतदान के लिए अर्हताएं
और उनके लिए नि र्वाचक नामा वलियों की तैयारी;
(घ) ऐसे निर्वाचनों में ऐसी परिषदों के सदस्य निर्वाचित होने के लिए अर्हताएं ;
(ङ) [12] [प्रादेशिक परिषदों] के सदस्यों की पदावधि;
(च) ऐसी परिषदों के लिए निर्वाचन या नामनिर्देशन से संबंधित या संसक्त कोई अन्य विषय;
(छ) ज़िला परिषदों और प्रादेशिक परिषदों की प्रक्रिया और उनका कार्य संचालन [13] [(जिसके अंतर्गत किसी रिक्ति के होते हुए भी कार्य करने की शक्ति है)];
(ज) ज़िला और प्रादेशिक परिषदों के अधिकारियों और कर्मचारिवृंद की नियुक्ति।
[14](6क) [जिला परिषद के निर्वाचित सदस्य, यदि ज़िला परिषद पैरा 16 के अधीन पहले ही विघटित नहीं कर दी जाती है तो, परिषद के लिए साधारण निर्वाचन के पश्चात् परिषद् के प्रथम अधि वेशन के लिए नियत तारीख से पांच वर्ष की अवधि तक पद धारण करेंगे और नामनिर्देशित सदस्य राज्यपाल के प्रसाद पर्यंत पद धारण करेगा; परंतु पांच वर्ष की उक्त अवधि को, जब आपात की उद्घोषणा प्रवर्तन में है तब या यदि ऐसी परिस्थितियां विद्यमान हैं जिनके कारण निर्वाचन कराना राज्यपाल की राय में असाध्य है तो, राज्यपाल ऐसी अवधि के लिए बढ़ा सकेगा जो एक बार में एक वर्ष से अधिक नहीं होगी और जब आपात की उद्घोषणा प्रवर्तन में है तब उद्घोषणा के प्रवृत्त न रह जाने के पश्चात् किसी भी दशा में उसका विस्तार छह मास की अवधि से अधिक नहीं होगा; परंतु यह और कि आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए नि र्वाचित सदस्य उस सदस्य की, जिसका स्थान वह लेता है, शेष पदावधि के लिए पद धारण करेगा।]
(7) ज़िला परिषद् या प्रादेशिक परिषद् अपने प्रथम गठन के पश्चात् [15] [राज्यपाल के अनुमोदन से] इस पैरा के उपपैरा (6) में विनिर्दिष्ट विषयों के लिए नियम बना सकेगी और [16] [वैसे ही अनुमोदन से]-
(क) अधीनस्थ स्थानीय परिषदों या बोर्डों के बनाए जाने तथा उनकी प्रक्रिया और उनके कार्य संचालन का, और
(ख) यथास्थिति, ज़िले या प्रदेश के प्रशासन विषयक कार्य करने से संबंधित साधारणतया सभी विषयों का विनियमन करने वाले नियम भी, बना सकेगी;
परंतु जब तक ज़िला परिषद या प्रादेशिक परिषद् द्वारा इस उपपैरा के अधीन नियम नहीं बनाए जाते हैं तब तक राज्यपाल द्वारा इस पैरा के उपपैरा (6) के अधीन बनाए गए नियम, प्रत्येक ऐसी परिषद के लिए निर्वाचनों, उसके
अधिकारियों और कर्मचारियों तथा उसकी प्रक्रिया और उसके कार्य संचालन के संबंध में प्रभावी होंगे।

  • आसाम पुनर्गठन (मेघालय) अधिनियम, 1969 (1969 का 55) की धारा 74 और चौथी अनुसूची द्वारा (2-4-1970 से) द्वितीय परंतुक का लोप किया गया।

[17]
[18]3. विधि बनाने की ज़िला परिषदों और प्रादेशिक परिषदों की शक्ति--
(1) स्वशासी प्रदेश की प्रादेशिक परिषद को ऐसे प्रदेश के भीतर के सभी क्षेत्रों के संबंध में और स्वशासी ज़िले की ज़िला परिषद को ऐसे क्षेत्रों का छोड़कर जो उस ज़िले के भीतर की प्रादेशिक परिषदों के, यदि कोई हों, प्राधिकार के अधीन हैं, उस ज़िले के भीतर के अन्य सभी क्षेत्रों के संबंध में निम्नलिखित विषयों के लिए विधि बनाने की शक्ति होगी, अर्थात्:-
(क) किसी आरक्षित वन की भूमि से भिन्न अन्य भूमि का, कृषि या चराई के प्रयोजनों के लिए अथवा निवास के या कृषि से भिन्न अन्य प्रयोजनों के लिए अथवा किसी ऐसे अन्य प्रयोजन के लिए जिससे किसी ग्राम या नगर के निवासियों के हितों की अभिवृद्धि संभाव्य है, आंबटन, अधिभोग या उपयोग अथवा अलग रखा जाना: परंतु ऐसी विधियों की कोई बात [19] [संबंधित राज्य की सरकार को] अनिवार्य अर्जन
प्राधिकृत करने वाली तत्समय प्रवृत्ति विधि के अनुसार किसी भूमि का, चाहे वह अधिभोग में हो या नहीं, लोक प्रयोजनों के लिए अनिवार्य अर्जन करने से निवारित नहीं करेगी;
(ख) किसी ऐसे वन का प्रबंध जो आरक्षित वन नहीं है;
(ग) कृषि के प्रयोजन के लिए किसी नहर या जलसरणी का उपयोग;
(घ) झूम की पद्धति का या परिवर्ती खेती की अन्य पद्धतियों का विनियमन;
(ङ) ग्राम या नगर समितियों या परिषद की स्थापना और उनकी शक्तियाँ ;
(च) ग्राम या नगर प्रशासन से संबंधित कोई अन्य विषय जिसके अंतर्गत ग्राम
या नगर पुलिस और लोक स्वास्थ्य और स्वच्छता है;
(छ) प्रमुखों या मुखियों की नियुक्ति या उत्तराधिकार;
(ज) संपत्ति की विरासत;
[20][ (झ) विवाह और विवाह-विच्छेद]
(ञ) सामाजिक रूढ़ियाँ।
(2) इस पैरा में, “आरक्षित वन” से ऐसा क्षेत्र अभिप्रेत है जो असम वन वनियम, 1891 के अधीन या प्रश्नगत क्षेत्र में तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन आरक्षित वन है।
(3) इस पैरा के अधीन बनाई गई सभी विधियां राज्यपाल के समक्ष तुरंत प्रस्तुत की जाएंगी और जब तक वह उन पर अनुमति नहीं दे देता है तब तक प्रभावी नहीं होंगी।
[21]4. स्वशासी ज़िलों और स्वशासी प्रदेशों में न्याय प्रशासन-
(1) स्वशासी प्रदेश की प्रादेशिक परिषद ऐसे प्रदेश के भीतर के क्षेत्रों के संबंध में और स्वशासी ज़िले की ज़िला परिषद ऐसे क्षेत्रों से भिन्न जो उस ज़िले के भीतर की प्रादेशिक परिषदों के, यदि कोई हों, प्राधिकार के अधीन हैं, उस ज़िले के भीतर के अन्य क्षेत्रों के संबंध में, ऐसे वादों और मामलों के विचारण के लिए जो ऐसे पक्षकारों के बीच हैं जिनमें से सभी पक्षकार ऐसे क्षेत्रों के भीतर की अनुसूचित जनजातियों के हैं तथा जो उन वादों और मामलों से भिन्न हैं जिनको इस अनुसूची के पैरा 5 के उपपैरा (1) के उपबंध लागू होते हैं, उस राज्य के किसी न्यायालय का अप वर्जन करके ग्राम परिषदों या न्यायालयों का गठन कर सकेगी और उपुयक्त व्यक्तियों को ऐसी ग्राम परिषद के सदस्य या ऐसे न्यायालयों के पीठासीन अधिकारी नियुक्त कर सकेगी और ऐसे अधिकारी भी नियुक्त कर सकेगी जो इस अनुसूची के पैरा 3 के अधीन बनाई गई विधियों के प्रशासन के लिए आवश्यक हों ।
(2) इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी, स्वशासी प्रदेश की प्रादेशिक परिषद या उस प्रादेशिक परिषद द्वारा इस निमित्त गठित कोई न्यायालय यदि किसी स्वशासी ज़िले के भीतर के किसी क्षेत्र के लिए कोई प्रादेशिक परिषद नहीं है तो, ऐसे ज़िले की ज़िला परिषद या उस ज़िला परिषद द्वारा इस निमित्त गठित कोई न्यायालय ऐसे सभी वादों और मामलों के संबंध में जो, यथास्थिति, ऐसे प्रदेश या क्षेत्र के भीतर इस पैरा के उपपैरा (1) के अधीन गठित किसी ग्राम परिषद या न्यायालय द्वारा विचारणीय हैं तथा जो उन वादों और मामलों से भिन्न हैं जिनको इस अनुसूची के पैरा 5 के उपपैरा (1) के उपबंध लागू होते हैं अपील न्यायालय की शक्तियों का प्रयोग करेगा तथा उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय से भिन्न किसी अन्य न्यायालय को ऐसे वादों या मामलों में अधिकारिता नहीं होगी।
(3)[22] उच्च न्यायालय को, उन वादों और मामलों में जिनको इस पैरा के उपपैरा (2) के उपबंध लागू होते हैं, ऐसी अधिकारिता होगी और वह उसका प्रयोग करेगा जो राज्यपाल समय-समय पर आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करे।
(4) यथास्थिति, प्रादेशिक परिषद या ज़िला परिषद राज्यपाल के पूर्व अनुमोदन से निम्नलिखित के विनियमन के लिए नियम बना सकेगी, अर्थात्:
(क) ग्राम परिषदों और न्यायालयों का गठन और इस पैरा के अधीन उनके द्वारा प्रयोक्तत्व शक्तियाँ;
(ख) इस पैरा के उपपैरा (1) के अधीन वादों और मामलों के विचारण में ग्राम परिषदों या न्यायालयों द्वारा अनुसरण की जाने वाले प्रक्रिया;
(ग) इस पैरा के उपपैरा (2) के अधीन अपीलों और अन्य कार्यवाहियों में प्रादेशिक परिषद या ज़िला परिषद अथवा ऐसी परिषद द्वारा गठित किसी न्यायालय द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया;
(घ) ऐसी परिषद और न्यायालयों के विनिश्चयों और आदेशों का प्रवर्तन;
(ङ) इस पैरा के उपपैरा (1) और उपपैरा (2) के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए अन्य सभी आनुषंगिक विषय।
[23][ (5) उस तारीख को और से जो राष्ट्रपति [24][ सबंधित राज्य की सरकार से परामर्श करने के पश्चात] अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त नियत करे, यह पैरा ऐसे स्वशासी ज़िले या स्वशासी प्रदेश के संबंध में, जो उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, इस प्रकार प्रभावी होगा मानो--
(i) उपपैरा (1) में, “जो ऐसे पक्षकारों के बीच हैं जिनमें से सभी पक्षकार ऐसे क्षेत्रों के भीतर की अनुसूचित जनजातियों के हैं तथा जो उन वादों और मामलों से भिन्न हैं जिनको इस अनुसूची के पैरा 5 के उपपैरा (1) के उपबंध लागू होते हैं,” शब्दों के स्थान पर, “जो इस अनुसूची के पैरा 5 के उपपैरा (1) में विनिर्दिष्ट प्रकृति के ऐसे वाद और मामले नहीं है जिन्हें राज्यपाल इस निमित्त विनिर्दिष्ट करें,” शब्द रख दिए गए हों;
(ii) उपपैरा (2) और उपपैरा (3) का लोप कर दिया गया हो;
(iii) उपपैरा (4) में--
(क) “यथास्थिति, प्रादेशिक परिषद या ज़िला परिषद, राज्यपाल के पूर्व अनुमोदन से, निम्नलिखित के विनियमन के लिए नियम बना सकेगी, अर्थात्;” शब्दों के स्थान पर, “राज्यपाल निम्नलिखित के विनियमन के लिए नियम बना सकेगा, अर्थात्”:
शब्द रख दिए गए हों ; और
(ख) खंड (क) के स्थान पर, निम्नलिखित् खंड रख दिया गया हो, अर्थात्:
(क) ग्राम परिषदों और न्यायालयों का गठन, इस पैरा के अधीन उनके द्वारा प्रयोक्तव्य शक्तियां और वे न्यायालय जिनको ग्राम परिषदों और न्यायालयों के विनिश्चयों से अपीलें हो सकेंगी;
(ग) खंड (ग) के स्थान पर, निम्नलिखित् खंड रख दिया गया हो, अर्थात्:
“(ग) प्रादेशिक परिषद या ज़िला परिषद अथवा ऐसी परिषद द्वारा गठित किसी न्यायालय के समक्ष उपपैरा (5) के अधीन राष्ट्रपति द्वारा नियत तारीख से ठीक पहले लंबित अपीलों और अन्य कार्य वाहियों का अंतरण”,
और
(घ) खंड (ङ) में “उपपैरा (1) और उपपैरा (2)” शब्दों, कोष्ठकों और अंकों के स्थान पर, “उपपैरा (1)” शब्द, कोष्ठक और अंक रख दिए गए हों।]
5. कुछ वादों, मामलों और अपराधों के विचारण के लिए प्रादेशिक परिषद और ज़िला परिषदों को तथा किन्हीं न्यायालयों और अधिकारियों को सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 और दंड प्रक्रिया संहिता, 1898[25] के अधीन शक्तियों का प्रदान किया जाना--
(1) राज्यपाल, किसी स्वशासी ज़िले या स्वशासी प्रदेश में किसी ऐसी प्रवृत्त विधि से, जो ऐसी वधि है जिसे राज्यपाल इस निमित्त विनिर्दिष्ट, उद्भूत वादों या मामलों के विचारण के लिए अथ वा भारतीय दंड संहिता के अधीन या ऐसे ज़िले या प्रदेश में तत्समय लागू किसी अन्य विधि के अधीन मृत्यु से, आजीवन निर्वासन से या पांच वर्ष से अन्यून अवधि के लिए कारावास् से दंडनीय अपराधों के विचारण के लिए, ऐसे ज़िले या प्रदेश पर प्राधिकार रखने वाली ज़िला परिषद या प्रादेशिक परिषद को अथवा ऐसी ज़िला परिषद द्वारा गठित न्यायालयों को अथवा राज्यपाल द्वारा इस निमित्त नियुक्त किसी अधिकारी को, यथास्थिति, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 या दंड प्रक्रिया संहिता, 1898[26] के अधीन ऐसी शक्तियां प्रदान कर सकेगा जो वह समुचित समझे और तब उक्त परिषद, न्यायालय या अधिकारी इस प्रकार प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए वादों, मामलों या अपराधों का विचारण करेगा।
(2) राज्यपाल, इस पैरा के उपपैरा (1) के अधीन किसी ज़िला परिषद, प्रादेशिक परिषद, न्यायालय या अधिकारी को प्रदत्त शक्तियों में से किसी शक्ति को वापस ले सकेगा या उपांतरित कर सकेगा।
(3) इस पैरा में अभिव्यक्त रूप से यथा उपबंधित के सिवाय, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 और दंड प्रक्रिया संहिता, 18981 किसी स् वशासी ज़िले में या किसी स्वशासी प्रदेश में, जिसको इस पैरा के उपबंध लागू होते हैं, किन्हीं वादों, मामलों या अपराधों के विचारण को लागू नहीं होगी।
[27][ (4) राष्ट्रपति द्वारा किसी स्वशासी ज़िले या स्वशासी प्रदेश के संबंध में पैरा 4 के उपपैरा (5) के अधीन नियत तारीख को और से, उस ज़िले या प्रदेश को लागू होने में इस पैरा की किसी बात के बारे में यह नहीं समझा जाएगा कि वह किसी ज़िला परिषद या प्रादेशिक परिषद को या ज़िला परिषद द्वारा गठित न्यायालयों को इस पैरा के उपपैरा (1) में निर्दिष्ट शक्तियों में से कोई शक्ति प्रदान करने के लिए राज्यपाल को प्राधिकृत करती है।]
[28][6. प्राथमिक विद्यालय आदि स्थापित करने की ज़िला परिषद की शक्ति--
(1) स्वशासी ज़िले की ज़िला परिषद ज़िले में प्राथमिक विद्यालयों, औषधालयों, बाज़ारों, [29][कांजी हाउसों], फेरी, मीन क्षेत्रों, सड़कों, सड़क परिवहन और जलमार्गों की स्थापना, निर्माण और प्रबंध कर सकेगी तथा राज्यपाल के पूर्व अनुमोद न से, उनके विनियमन और नियंत्रण के लिए विनियम बना सकेगी और, विशिष्टतया, वह भाषा और वह रीति विहित कर सकेगी, जिससे ज़िले के प्राथमिक विद्यालयों में प्राथमिक शिक्षा दी जाएगी।
(2) राज्यपाल, ज़िला परिषद की सहमति से उस परिषद को या उसके अधिकारियों को कृषि, पशुपालन, सामुदायिक परियोजनाओं, सहकारी सोसाइटियों, समाज कल्याण, ग्राम योजना या किसी अन्य ऐसे विषय के संबंध में, जिस पर[30] राज्य की कार्यपालिका शक्ति विस्तार है, कृत्य सशर्त या बिना शर्त सौंप सकेगा।]
7. ज़िला और प्रादेशिक निधियां--
(1) प्रत्येक स् वशासी ज़िले के लिए एवं ज़िला निधि और प्रत्येक स्वशासी प्रदेश के लिए एक प्रादेशिक निधि गठित की जाएगी जिसमें क्रमश: उस ज़िले की ज़िला परिषद द्वारा और उस प्रदेश की प्रादेशिक परिषद द्वारा इस संविधान के उपबंधों के अनुसार, यथास्थिति, उस ज़िले या प्रदेश के प्रशासन के अनुक्रम में प्राप्त सभी धनराशियां जमा की जाएंगी ।
[31] [(2) राज्यपाल, यथास्थिति, ज़िला निधि या प्रादेशिक निधि के प्रबंध के लिए और उक्त निधि में धन जमा करने, उसमें से धनराशियां निकालने, उसके धन की अभिरक्षा और पूर्वोक्त विषयों से संबंधित या आनुषंगिक किसी अन्य विषय के संबंध में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया के लिए नियम बना सकेगा।
(3) यथास्थिति, ज़िला परिषद या प्रादेशिक परिषद के लेखे ऐसे प्रारूप में रखे जायेंगे जो भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक राष्ट्रपति के अनुमोदन से, विहित करे।
(4) नियंत्रक-महालेखापरीक्षक ज़िला परिषदों और प्रादेशिक परिषदों के लेखाओं की संपरीक्षा ऐसी रीति से कराएगा जो वह ठीक समझे और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के ऐसे लेखाओं से संबंधित प्रतिवेदन राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे जो उन्हें परिषद के समक्ष रखवाएगा।]
8. भू-राजस्व का निर्धारण और संग्रहण करने तथा कर का अधिरोपण करने की शक्तियां--
(1) स्वशासी प्रदेश के भीतर की सभी भूमियों के संबंध में ऐसे प्रदेश की प्रादेशिक परिषद को और यदि ज़िले में कोई प्रादेशिक परिषद हैं तो उनके प्राधिकार के अधीन आने वाले क्षेत्रों में स्थित भूमियों को छोड़कर ज़िले के भीतर की सभी भूमियों के संबंध में स्वशासी ज़िले की ज़िला परिषद को ऐसी भूमियों की बाबत, उन सिद्धांतों के अनुसार राजस्व का निर्धारण और संग्रहण करने की शक्ति जिनका [32][ साधारणतया राज्य में भू-राजस्व के प्रयोजन के लिए भूमि के निर्धारण में राज्य की सरकार द्वारा तत्समय अनुसरण किया जाता है]
(2) स्वशासी प्रदेश के भीतर के क्षेत्रों के संबंध में ऐसे प्रदेश की प्रादेशिक परिषद को और यदि ज़िले में कोई प्रादेशिक परिषद हैं तो उनके प्राधिकार के अधीन आने वाले क्षेत्रों को छोड़कर ज़िले के भीतर के सभी क्षेत्रों के संबंध में स्वशासी ज़िले की ज़िला परिषद को, भूमि और भवनों पर करों का तथा ऐसे क्षेत्रों में निवासी व्यक्तियों पर पथकर का उद्ग्रहण और संग्रहण करने की शक्ति होगी।
(3) स्वशासी ज़िले की ज़िला परिषद को ऐसे ज़िले के भीतर निम्नलिखित् सभी या किन्हीं करों का उद्ग्रहण और संग्रहण करने की शक्ति होगी, अर्थात्;
(क) वृत्ति, व्यापार, आजीविका और नियोजन पर कर;
(ख) जीव जंतुओं, यानों और नौकाओं पर कर;
(ग) किसी बाज़ार में विक्रय के लिए माल के प्रवेश पर कर और फेरी से ले जाए जाने वाले यात्रियों और माल पर पथकर;
और
(घ) विद्यालयों, औषधालयों या सड़कों को बनाए रखने के लिए कर।
(4) इस पैरा के उपपैरा (2) और उपपैरा (3) में विनिर्दिष्ट करों में से किसी कर
के उद्ग्रहण और संग्रहण का उपबंध करने के लिए, यथास्थिति, प्रादेशिक परिषद या ज़िला परिषद विनियम बना सकेगी और [33][ऐसा प्रत्येक विनियम राज्यपाल के समक्ष तुरंत प्रस्तुत किया जाएगा और जब तक वह उस पर अनुमति नहीं दे देता है तब तक उसका कोई प्रभाव नहीं होगा।]
[34][9. खनिजों के पूर्वेक्षण या निष्कर्षण के प्रयोजन के लिए अनुज्ञप्तियां या पट्टे—
(1) किसी स्वशासी ज़िले के भीतर के किसी क्षेत्र के संबंध में [35][राज्य की सरकार] द्वारा खनिजों के पूर्वेक्षण या निष्कर्षण के प्रयोजन के लिए दी गई अनुज्ञप्तियों या पट्टों से प्रत्येक वर्ष प्रोद्भूत होने वाले स्वामिस्व का ऐसा अंश, ज़िला परिषद को दिया जाएगा जो उस 4[राज्य की सरकार] और ऐसे ज़िले की ज़िला परिषद के बीच करार पाया जाए।
(2) यदि ज़िला परिषद को दिए जाने वाले ऐसे स्वामिस्व के अंश के बारे में कोई विवाद उत्पन्न होता है तो वह राज्यपाल को अवधारण के लिए निर्देशित किया जाएगा और राज्यपाल द्वारा अपने विवेक के अनुसार आधारित रकम इस पैरा के उपपैरा (1) के अधीन ज़िला परिषद को संदेय रकम समझी जाएगी और राज्यपाल का विनिश्चय अंतिम होगा।
[36][37]
10. जनजातियों से भिन्न व्यक्तियों की साहूकारी और व्यापार के नियंत्रण के लिए विनियम बनाने की ज़िला परिषद की शक्ति--
(1) स्वशासी ज़िले की ज़िला परिषद उस ज़िले में निवासी जनजातियों से भिन्न व्यक्तियों की उस ज़िले के भीतर साहूकारी या व्यापार के विनियमन और नियंत्रण के लिए विनियम बना सकेगी।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम--
(क) विहित कर सकेंगे कि उस निमित्त दी गई अनुज्ञप्ति के धारक के अतिरिक्त और कोई साहूकारी का कारोबार नहीं करेगा;
(ख) साहूकार द्वारा प्रभारित या वसूल किए जाने वाले ब्याज की अधिकतम दर विहित कर सकेंगे ;
(ग) साहूकारों द्वारा लेखे रखे जाने का और ज़िला परिषदों द्वारा इस निमित्त नियुक्तु अधिकारियों द्वारा ऐसे लेखाओं के निरीक्षण का उपबंध कर सकेंगे ;
(घ) विहित कर सकेंगे कि कोई व्यक्ति, जो ज़िले में निवासी अनुसूचित जनजातियों का सदस्य नहीं है, ज़िला परिषद द्वारा इस निमित्त दी गई अनुज्ञप्ति के अधीन ही किसी वस्तु का थोक या फुटकर कारबार करेगा, अन्यथा नहीं : परंतु इस पैरा के अधीन ऐसे विनियम तब तक नहीं बनाए जा सकेंगे जब तक वे ज़िला परिषद की कुल सदस्य संख्या के कम से कम तीन चौथाई बहुमत द्वारा पारित नहीं कर दिए जाते हैं : परंतु यह और कि ऐसे किन्हीं विनियमों के अधीन किसी ऐसे साहूकार या व्यापारी को जो ऐसे विनियमों के बनाए जाने के पहले से उस ज़िले के भीतर कारबार करता रहा है, अनुज्ञप्ति देने से इंकार करना सक्षम नहीं होगा।
(3) इस पैरा के अधीन बनाए गए सभी विनियम राज्यपाल के समक्ष तुरंत प्रस्तुत किए जाएंगे और जब तक वह उन पर अनुमति नहीं दे देता है तब तक उनका कोई प्रभाव नहीं होगा।
11. अनुसूची के अधीन बनाई गई विधियों, नियमों और विनियमों का प्रकाशन--
जिला परिषद या प्रादेशिक परिषद द्वारा इस अनुसूची के अधीन बनाई गई सभी विधियों, नियम और विनियम राज्य के राजपत्र में तुरंत प्रकाशित किए जाएंगे और ऐसे प्रकाशन पर विधि का बल रखेंगे ।
[38][39]
12. [40][असम राज्य में स्वशासी ज़िलों और स्वशासी प्रदेशों को संसद के और असम राज्य के विधान-मंडल के अधिनियमों का लागू होना]--
(1) इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी,--
(क) [41][असम राज्य के विधान-मंडल] का कोई अधिनियम, जो ऐसे विषयों में से किसी विषय के संबंध में है जिनको इस अनुसूची के पैरा 3 में ऐसे विषयों के रूप में विनिर्दिष्ट किया गया है, जिनके संबंध में ज़िला परिषद या प्रादेशिक परिषद विधियां बना सकेगी और [42] [असम राज्य के विधान-मंडल] का कोई
अधिनियम, जो किसी अनासुत ऐल्कोहाली लिकर के उपभोग को प्रतिषिद्ध या निर्बंधित करता है, [43] [उस राज्य में] किसी स्वशासी ज़िले या स्वशासी प्रदेश को तब तक लागू नहीं होगा जब तक दोनों दशाओं में से हर एक में ऐसे ज़िले की परिषद या ऐसे प्रदेश पर अधिकारिता रखने वाली ज़िला परिषद, लोक अधिसूचना द्वारा, इस प्रकार निदेश नहीं दे देती है और ज़िला परिषद किसी अधिनियम के संबंध में ऐसा निदेश देते समय यह निदेश दे सकेगी कि वह अधिनियम ऐसे ज़िले या प्रदेश या उसके किसी भाग को लागू होने में ऐसे अपवादों या उपांतरणों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगा जो वह ठीक समझती है;
(ख) राज्यपाल, लोक अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकेगा कि संसद् का या [44][असम राज्य के विधान-मंडल] का कोई अधिनियम, जिससे इस उपपैरा के खंड (क) के उपबंध लागू नहीं होते हैं [45][उस राज्य में] किसी स्वशासी ज़िले या स्वशासी प्रदेश को लागू नहीं होगा अथवा ऐसे ज़िले या प्रदेश या उसके किसी भाग को ऐसे अपवादों या उपांतरणों के अधीन रहते हुए लागू होगा जो वह उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करे।
(2) इस पैरा के उपपैरा (1) के अधीन दिया गया कोई निदेश इस प्रकार दिया जा सकेगा कि उसका भूतलक्षी प्रभाव हो।
[46]12क. मेघालय राज्य में स्वशासी ज़िलों और स्वशासी प्रदेशों को संसद के और मेघालय राज्य के विधान-मंडल के अधिनियमों का लागू होना--
इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी--
(क) यदि इस अनुसूची के पैरा 3 के उपपैरा (1) में विनिर्दिष्ट विषयों में से किसी विषय के संबंध में मेघालय राज्य में किसी ज़िला परिषद या प्रादेशिक परिषद द्वारा बनाई गई किसी विधि का कोई उपबंध या यदि इस अनूसूची के पैरा 8 या पैरा 10 के अधीन उस राज्य में किसी ज़िला परिषद या प्रादेशिक परिषद द्वारा बनाए गए किसी विनियम का कोई उपबंध, मेघालय राज्य के विधान-मंडल द्वारा उस विषय के संबंध में बनाई गई किसी विधि के किसी उपबंध के विरुद्ध है तो, यथास्थिति, उस ज़िला परिषद या प्रादेशिक परिषद द्वारा बनाई गई विधि या बनाया गया विनियम, चाहे वे मेघालय राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई विधि से पहले बनाया गया हो या उसके पश्चात् उस विरोध की मात्रा तक शून्य होगा और मेघालय राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई विधि अभिभावी होगी ;
(ख) राष्ट्रपति, संसद के किसी अधिनियम के संबंध में, अधिसूचना द्वारा निदेश दे सकेगा कि वह मेघालय राज्य में किसी स्वशासी ज़िले या स्वशासी प्रदेश को लागू नहीं होगा अथवा ऐसे ज़िले या प्रदेश या उसके किसी भाग को ऐसे अपवादों या उपांतरणों के अधीन रहते हुए लागू होगा जो वह अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करे और ऐसा कोई निदेश इस प्रकार दिया जा सकेगा कि उसका भूतलक्षी प्रभाव हो।
[47][12कक, त्रिपुरा राज्य में स्वशासी ज़िलों और स्वशासी प्रदेशों को संसद के और त्रिपुरा राज्य के विधान-मंडल के अधिनियमों का लागू होना—
इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी,--
(क) त्रिपुरा राज्य के विधान-मंडल को कोई अधिनियम, जो ऐसे विषयों में से किसी विषय के संबंध में है जिनको इस अनुसूची के पैरा 3 में ऐसे विषयों के रूप में विनिर्दिष्ट किया गया है जिनके संबंध में ज़िला परिषद या प्रादेशिक परिषद विधियां बना सकेगी, और त्रिपुरा राज्य के विधान-मंडल का कोई अधिनियम जो किसी अनासुत ऐल्कोहाली लिकर के उपभोग को प्रतिषिद्ध या निर्बंधित करता है, उस राज्य में किसी स्वशासी ज़िले या स्वशासी प्रदेश को तब तक लागू नहीं होगा जब तक, दोनों दशाओं में से हर एक में, उस ज़िले की ज़िला परिषद या ऐसे प्रदेश पर अधिकारिता रखने वाली ज़िला परिषद लोक अधिसूचना द्वारा, इस प्रकार निदेश नहीं दे देती है और ज़िला परिषद किसी अधिनियम के संबंध में ऐसा निदेश देते समय यह निदेश दे सकेगी कि वह अधिनियम उस ज़िले या प्रदेश या उसके किसी भाग को लागू होने में ऐसे अपवादों या उपांतरणों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगा जो वह ठीक समझती है;
(ख) राज्यपाल, लोक अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकेगा कि त्रिपुरा राज्य के विधान-मंडल को कोई अधिनियम, जिसे इस उपपैरा के खंड (क) के उपबंध लागू नहीं होते हैं, उस राज्य में किसी स्वशासी ज़िले या स्वशासी प्रदेश को लागू नहीं होगा अथवा ऐसे ज़िले या प्रदेश या उसके किसी भाग को ऐसे अपवादों या उपांतरणों के अधीन रहते हुए लागू होगा जो वह उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करे;
(ग) राष्ट्रपति, संसद के किसी अधिनियम के संबंध में, अधिसूचना द्वारा निदेश दे सकेगा कि वह त्रिपुरा राज्य में किसी स्वशासी ज़िले या स्वशासी प्रदेश को लागू नहीं होगा अथवा ऐसे ज़िले या प्रदेश या उसके किसी भाग को ऐसे अपवादों या उपांतरणों के अधीन रहते हुए लाग् होना जो वह अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करे और ऐसा कोई निदेश इस प्रकार दिया जा सकेगा कि उसका भूतलक्षी प्रभाव हो ।
12ख. मिजोराम राज्य में स्वशासी ज़िलों और स् वशासी प्रदेशों को संसद के और मिजोरम राज्य के विधान-मंडल के अधिनियमों को लागू होना—
इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी,--
(क) मिजोरम राज्य के विधान-मंडल का कोई अधिनियम जो ऐसे विषयों में से किसी विषय के संबंध में है जिनको इस अनुसूची के पैरा 3 में ऐसे विषयों के रूप में विनिर्दिष्ट किया गया है जिनके संबंध में ज़िला परिषद या प्रादेशिक परिषद विधियां बना सकेगा, और मिजोरम राज्य के विधान-मंडल का कोई अधिनियम, जो किसी अनासुत ऐल्कोहली लिकर के उपभोग को प्रतिषिद्ध या निर्बंधित करता है, उस राज्य में किसी स्वशासी ज़िले या स्वशासी प्रदेश को तब तक लागू नहीं होगा, जब तक, दोनों दशाओं में से हर एक में, उस ज़िले की ज़िला परिषद या ऐसे प्रदेश पर आधिकारिता रखने वाली ज़िला परिषद, लोक अधिसूचना द्वारा, इस प्रकार निदेश नहीं दे देती है और ज़िला परिषद किसी अधिनियम के संबंध में ऐसा निदेश देते समय यह निदेश दे सकेगी कि वह अधिनियम उस ज़िले या प्रदेश या उसके किसी भाग के लागू होने में ऐसे अपवादों या उपांतरणों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगा जो वह ठीक समझती है;
(ख) राज्यपाल, लोक अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकेगा कि मिजोरम राज्य के विधान-मंडल का कोई अधिनियम, जिसे इस उपपैरा के खंड (क) के उपबंध लागू नहीं होते हैं, उस राज्य में किसी स्वशासी ज़िले या स्वशासी प्रदेश को लागू नहीं होगा अथवा ऐसे ज़िले या प्रदेश या उसके किसी भाग को ऐसे अपवादों या उपांतरणों के अधीन रहते हुए लागू होगा जो वह उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करे ;
(ग) राष्ट्रपति, संसद् के किसी अधिनियम के संबंध में, अधिसूचना द्वारा निदेश दे सकेगा कि वह मिजोरम राज्य में किसी स्वशासी ज़िले या स्वशासी प्रदेश को लागू नहीं होगा अथवा ऐसे ज़िले या प्रदेश या उसके किसी भाग को ऐसे अपवादों या उपांतरणों के अधीन रहते हुए लागू होगा जो वह अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करे और ऐसा कोई निदेश इस प्रकार दिया जा सकेगा कि उसका भूतलक्षी प्रभाव हो ।
13. स्वशासी ज़िलों से संबंधित प्राक्कलित प्राप्तियों और व्यय का वार्षिक वित्तीय विवरण में पृथक् रूप से दिखाया जाना—
किसी स्वशासी ज़िले से संबंधित प्राक्कलित प्राप्तियां और व्यय, जो [48] राज्य की संचित निधि में जमा होनी हैं या उसमें से किए जाने हैं, पहले ज़िला परिषद के समक्ष विचार-विमर्श के लिए रखे जाएंगे और फिर ऐसे विचार-विमर्श के पश्चात् अनुच्छेद 202 के अधीन राज्य के विधान-मंडल के समक्ष रखे जाने वाले वार्षिक वित्तीय विवरण में पृथक् रूप से दिखाए जाएंगे।
[49]14. स्वशासी ज़िलों और स्वाशासी प्रदेशों के प्रशासन की जांच करने और उस पर प्रतिवेदन देने के लिए आयोग की नियुक्ति—
(1) राज्यपाल, राज्य में स्वशासी ज़िलों और स्वशासी प्रदेशों के प्रशासन के संबंध में अपने द्वारा विनिर्दिष्ट किसी विषय की, जिसके अंतर्गत इस अनुसूची के पैरा 1 के उपपैरा (3) के खंड (ग), खंड (घ), खंड (ङ) और खंड (च) में विनिर्दिष्ट हैं, जांच करने और उस पर प्रतिवेदन देने के लिए किसी भी समय आयोग नियुक्त कर सकेगा, या राज्य में स्वशासी ज़िलों और स्वशासी प्रदेशों के साधारणतया प्रशासन की और विशिष्टतया--
(क) ऐसे ज़िलों और प्रदेशों में शिक्षा और चिकित्सा सुविधाओं की और संचार की व्यवस्था की,
(ख) ऐसे ज़िलों और प्रदेशों के संबंध में किसी नए या विशेष संविधान की आवश्यकता की, और
(ग) ज़िला परिषदों और प्रादेशिक परिषदों द्वारा बनाई गई विधियों, नियमों और विनियमों के प्रशासन की, समय-समय पर जांच करने और उस पर प्रतिवेदन देने के लिए आयोग नियुक्त कर सकेगा और ऐसे आयोग द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया परिनिश्चित कर सकेगा।
(2) संबंधित मंत्री, प्रत्येक ऐसे आयोग के प्रति वेदन को, राज्यपाल की उससे संबंधित सिफारिशों के साथ, उस पर [50][राज्य की सरकार] द्वारा की जाने के लिए प्रस्तावित कार्रवाई के संबंध में स्पष्टीकारक ज्ञापन सहित, राज्य के विधान-मंडल के समक्ष रखेगा।
(3) राज्यपाल राज्य की सरकार के कार्य का अपने मंत्रियों में आबंटन करते समय अपने मंत्रियों में से एक मंत्री को राज्य के स् वशासी ज़िलों और स्वशासी प्रदेशों के कल्याण का विशेषतया भारसाधक बना सकेगा ।
[51]15. ज़िला परिषदों और प्रादेशिक परिषदों के कार्यों और संकल्पों का निष्प्रभाव या निलंबित किया जाना---(1) यदि राज्यपाल का किसी समय यह समाधान हो जाता है कि ज़िला परिषद या प्रादेशिक परिषद के किसी कार्य या संकल्प से भारत सुरक्षा का संकटापन्न होना संभाव्य है [52][ या लोक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना संभाव्य है] तो वह ऐसे कार्य या संकल्प को निष्प्रभाव या निलंबित कर सकेगा और ऐसी कार्रवाई (जिसके अंतर्गत परिषद का निलंबन और परिषद में निहित या उसके द्वारा प्रयोक्तव्य सभी या किन्हीं शक्तियों को अपने हाथ में ले लेना है) कर सकेगा जो वह ऐसे कार्य को किए जाने या उसके चालू रखे जाने का अथवा ऐसे संकल्प को प्रभावी किए जाने का निवारण करने के लिए आवश्यक समझे।
(2) राज्यपाल द्वारा इस पैरा के उपपैरा (1) के अधीन किया गया आदेश, उसके लिए जो कारण है उनके सहित, राज्य के विधान-मंडल के समक्ष यथासंभव शीघ्र रखा जाएगा और आदि वह आदेश, राज्य के विधान-मंडल द्वारा प्रतिसंहृत नहीं कर दिया जाता है तो वह उस तारीख से, जिसको वह इस प्रकार किया गया था, बारह मास की अवधि तक प्रवृत्त बना रहेगा: परन्तु यदि और जितनी बार, ऐसे आदेश को प्रवृत्त बनाए रखने का अनुमोदन करने वाला संकल्प राज्य के विधान-मंडल द्वारा पारित कर दिया जाता है तो और उतनी बार वह आदेश, यदि राज्यपाल द्वारा रद्द नहीं कर दिया जाता है तो, उस तारीख से, जिसके वह इस पैरा के अधीन अन्यथा प्रवर्तन में नहीं रहता, बारह मास की और अवधि तक प्रवृत्त बना रहेगा।
[53]16. ज़िला परिषद या प्रादेशिक परिषद का विघटन---
[54] [(1)] राज्यपाल, इस अनुसूची के पैरा 14 के अधीन नियुक्त आयोग की सिफारिश पर, लोक अधिसूचना द्वारा, किसी ज़िला परिषद या प्रादेशिक परिषद का विघटन कर सकेगा, और—
(क) निदेश दे सकेगा कि परिषद के पुनर्गठन के लिए नया साधारण निर्वाचन तुरंत कराया जाए;
या
(ख) राज्य के विधान-मंडल के पूर्व अनुमोदन से ऐसी परिषद के प्राधिकार के अधीन आने वाले क्षेत्र का प्रशासन बारह मास से अनधिक अवधि के लिए अपने हाथ में ले सकेगा अथवा ऐसे क्षेत्र का प्रशासन ऐसे आयोग को जिसे उक्त पैरा के अधीन नियुक्त किया गया है या अन्य ऐसे किसी निकाय को जिसे वह उपयुक्त समझता है, उक्त अवधि के लिए दे सकेगा: परन्तु जब इस पैरा के खंड (क) के अधीन कोई आदेश किया गया है तब राज्यपाल प्रश्नगत क्षेत्र के प्रशासन के संबंध में, नया साधारण निर्वाचन होने पर परिषद के पुनर्गठन के लंबित रहने तक, इस पैरा के खंड (ख) में निर्दिष्ट कार्रवाई कर सकेगा: परन्तु यह और कि, यथास्थिति, ज़िला परिषद या प्रादेशिक परिषद को राज्य के विधान-मंडल के समक्ष अपने विचारों को रखने का अवसर दिए बिना उस पैरा के खंड (ख) के अधीन कोई कार्रवाई नहीं का जाएगी।
[55] [(2) यदि राज्यपाल का किसी समय यह समाधान हो जाता है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें स्वशासी ज़िले या स्वशासी प्रदेश का प्रशासन उस अनुसूची के उपबंधों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता है तो वह, यथास्थिति, ज़िला परिषद या प्रादेशिक परिषद में निहित या उसके द्वारा प्रयोक्तव्य सभी या कोई कृत्य या शक्तियां, लोक अधिसूचना द्वारा, छह मास से अनधिक अवधि के लिए अपने हाथ में ले सकेगा और यह घोषणा कर सकेगा कि ऐसे कृत्य या शक्तियां उक्त अवधि के दौरान ऐसे व्यक्ति या प्राधिकारी द्वारा प्रयोक्तव्य होंगी जिसे वह इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे : परन्तु राज्यपाल आरंभिक आदेश का प्रवर्तन, अतिरिक्त आदेश या आदेशों द्वारा, एक बार में छह मास से अनधिक अवधि के लिए बढ़ा सकेगा।
(3) इस पैरा के उपपैरा (2) के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, उसके लिए जो कारण हैं उनके सहित, राज्य के विधान-मंडल के समक्ष रखा जाएगा और वह आदेश उस तारीख से जिसको राज्य विधान-मंडल उस आदेश के किए जाने के पश्चात् प्रथम बार बैठता है, तीस दिन की समाप्ति पर प्रवर्तन में नहीं रहेगा यदि उस अवधि की समाप्ति से पहले राज्य विधान-मंडल द्वारा उसका अनुमोदन नहीं कर दिया जाता है।]
[56]17. स्वशासी ज़िलों में निर्वाचन-क्षेत्रों के बनाने में ऐसे ज़िलों से क्षेत्रों का अपवर्जन--राज्यपाल, [57] [असम या मेघालय [58][ या त्रिपुरा [59][ या मिजोरम]] की विधान सभा] के निर्वाचनों के प्रयोजनों के लिए, आदेश द्वारा, यह घोषणा कर सकेगा कि, [60][यथास्थिति, असम या मेघालय [61] [या त्रिपुरा [62][ या मिजोरम]] राज्य में] किसी स्वशासी ज़िले के भीतर का कोई क्षेत्र ऐसे किसी ज़िले के लिए विधान सभा में आरक्षित स्थान या स्थानों को भरने के लिए किसी निर्वाचन-क्षेत्र का भाग नहीं होगा, किन्तु विधान सभा में इस प्रकार आरक्षित न किए गए ऐसे स्थान या स्थानों को भरने के लिए आदेश में विनिर्दिष्ट निर्वाचन-क्षेत्र का भाग होगा।[63]
[64][19. संक्रमणकालीन उपबंध--
(1) राज्यपाल, इस संविधान के प्रारंभ के पश्चात् यथासंभव शीघ्र, इस अनुसूची के अधीन राज्य में प्रत्येक स्वशासी ज़िले के लिए ज़िला परिषद के गठन के लिए कार्रवाई करेगा और जब तक किसी स्वशासी ज़िले के लिए ज़िला परिषद इस प्रकार गठित नहीं की जाती है तब तक ऐसे ज़िले का प्रशासन राज्यपाल में निहित होगा और ऐसे ज़िले के भीतर के क्षेत्रों के प्रशासन को इस अनुसूची के पूर्वगामी उपबंधों के
स्थान पर निम्नलिखित उपबंध लागू होंगे, अर्थात्:--
(क) संसद का या उस राज्य के विधान-मंडल का कोई अधिनियम ऐसे क्षेत्र को तब तक लागू नहीं होगा जब तक राज्यपाल, लोक अधिसूचना द्वारा, इस प्रकार निदेश नहीं दे देता है और राज्यपाल किसी अधिनियम के संबंध में ऐसा निदेश देते समय यह निदेश दे सकेगा कि वह अधिनियम ऐसे क्षेत्र या उसके किसी विनिर्दिष्ट भाग को लागू होने में ऐसे अप वादों या उपांतरणों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगा जो वह ठीक समझता है ;
(ख) राज्यपाल ऐसे किसी क्षेत्र की शांति और सुशासन के लिए विनियम बना सकेगा और इस प्रकार बनाए गए विनियम संसद के या उस राज्य के विधान-मंडल के किसी अधिनियम का या किसी विद्यमान विधि का, जो ऐसे क्षेत्र को तत्समय लागू हैं, निरसन या संशोधन कर सकेंगे।
(2) राज्यपाल द्वारा इस पैरा के उपपैरा (1) के खंड (क) के अधीन दिया गया कोई निदेश इस प्रकार दिया जा सकेगा कि उसका भूतलक्षी प्रभाव हो ।
(3) इस पैरा के उपपैरा (1) के खंड (ख) के अधीन बनाए गए सभी विनियम राष्ट्रपति के समक्ष तुरंत प्रस्तुत किए जाएंगे और जब तक वह उन पर अनुमति नहीं दे देता है तब तक उनका कोई प्रभाव नहीं होगा।
[65][20. जनजाति क्षेत्र—
(1) नीचे दी गई सारणी के भाग 1, भाग 2 [66][,भाग 2क] और भाग 3 में विनिर्दिष्ट क्षेत्र क्रमश: असम राज्य, मेघालय राज्य [67][, त्रिपुरा राज्य] और मिजोरम [68][राज्य] के जनजाति क्षेत्र होंगे।
(2) [69][नीचे दी गई सारणी के भाग 1, भाग 2 या भाग 3 में] किसी ज़िले के प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 की धारा 2 के खंड (ख) के अधीन नियत किए गए दिन से ठीक पहले विद्यमान उस नाम के स्वशासी ज़िले में समाविष्ट राज्यक्षेत्रों के प्रति निर्देश हैं:
परन्तु इस अनुसूची के पैरा 3 के उपपैरा (1) के खंड (ङ) और खंड (च), पैरा 4, पैरा 5, पैरा 6, पैरा 8 के उपपैरा (2), उपपैरा (3) के खंड (क), खंड (ख) और खंड (घ) और उपपैरा (4) तथा पैरा 10 के उपपैरा (2) के खंड (घ) के प्रयोजनों के लिए, शिलांग नगरपालिका में समाविष्ट क्षेत्र के किसी भाग के बारे में यह नहीं समझा जाएगा कि वह [70][खासी पहाड़ी जिले] के भीतर है।
[71][(3) नीचे दी गई सारणी के भाग 2क में “त्रिपुरा जनजाति क्षेत्र जिला” के प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह त्रिपुरा जनजाति क्षेत्र स्वशासी ज़िला परिषद अधिनियम, 1979 की पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट जनजाति क्षेत्रों में समाविष्ट राज्यक्षेत्र के प्रति निर्देश है।]

सारणी
भाग 1
  1. उत्तरी कछार पहाड़ी ज़िला
  2. [72][73][कार्बी आंगलांग ज़िला]
भाग 2
  1. [74][खासी पहाड़ी ज़िला]
  2. जयंतिया पहाड़ी ज़िला
  3. गारो पहाड़ी ज़िला
[75][भाग 2क
  1. त्रिपुरा जनजाति क्षेत्र ज़िला
भाग 3
  1. [76][77]चकमा ज़िला
  2. [78]मारा ज़िला
  3. लई ज़िला

[79][ 20क. मिजो ज़िला परिषद का विघटन--
(1) इस अनुसूची में किसी बात के होते हुए भी, विहित तारीख से ठीक पहले विद्यमान मिजो ज़िले की ज़िला परिषद (जिसे इसमें इसके पश्चात् मिजो ज़िला परिषद कहा गया है) विघटित हो जाएगी और विद्यमान नहीं रह जाएगी।
(2) मिजोरम संघ राज्यक्षेत्र का प्रशासक, एक या अधिक आदेशों द्वारा, निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेगा, अर्थात्:--
(क) मिजो ज़िला परिषद की आस्तियों, अधिकारों और दायित्वों का (जिनके अतंर्गत उसके द्वारा की गई किसी संविदा के अधीन अधिकार और दायित्व है) पूर्णत: या भागत: संघ को या किसी अन्य प्राधिकारी को अंतरण;
(ख) किन्हीं ऐसी विधिक कार्य वाहियों में, जिनमें मिजो ज़िला परिषद एक पक्षकार है, मिजो ज़िला परिषद के स्थान पर संघ का या किसी अन्य प्राधिकारी का पक्षकार के रूप में रखा जाना अथवा संघ का या किसी अन्य प्राधिकारी का पक्षकार के रूप में जोड़ा जाना;
(ग) मिजो ज़िला परिषद के किन्हीं कर्मचारियों का संघ को या किसी अन्य प्राधिकारी को अथवा उसके द्वारा अंतरण या पुनर्नियोजना, ऐसे अंतरण या पुनर्नियोजन के पश्चात् उन कर्मचारियों को लागू होने वाले सेवा के निबंधन और शर्तें;
(घ) मिजो ज़िला परिषद द्वारा बनाई गई और उसके विघटन से ठीक पहले प्रवृत्त किन्हीं विधियों का, ऐसे अनुकूलनों और उपांतरणों के, चाहे वे निरसन के रूप में हों या संशोधन के रूप में, अधीन रहते हुए जो प्रशासक द्वारा इस निमित्त किए जाएं, तब तक प्रवृत्त बना रहना जब तक किसी सक्षम विधान-मंडल द्वारा या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा ऐसी विधियों में परि वर्तन, निरसन या संशोधन नहीं कर दिया जाता है;
(ङ) ऐसे आनुषंगिक, पारिणामिक और अनुपूरक विषय जो प्रशासक आवश्यक समझे।
स्पष्टीकरण--इस पैरा में और इस अनुसूची के पैरा 20ख में, “विहित तारीख” पद से वह तारीख अभिप्रेत है जिसको मिजोरम संघ राज्यक्षेत्र की विधान सभा का, संघ राज्यक्षेत्र शासन अधिनियम, 1963 के उपबंधों के अधीन और उनके अनुसार, सम्यक रूप से गठन होता है।
[80]-[81] 20ख. मिजोरम संघ राज्यक्षेत्र में स्वशासी प्रदेशों का स्वशासी ज़िले होना और उसके पारिणामिक संक्रमणकालीन उपबंध--
(1) इस अनुसूची में किसी बात के होते हुए भी,--
(क) मिजोरम संघ राज्यक्षेत्र में विहित तारीख से ठीक पहले विद्यमान प्रत्येक स्वशासी प्रदेश उस तारीख को और से उस संघ राज्य क्षेत्र का स्वशासी ज़िला (जिसे इसमें इसके पश्चात्, तत्स्थानी नया ज़िला कहा गया है) हो जाएगा और उसका प्रशासक, एक या अधिक के आदेशों द्वारा, निदेश दे सकेगा कि इस अनुसूची के पैरा 20 में (जिसके अंतर्गत उस पैरा से संलग्न सारणी का भाग 3 है) ऐसे पारिणामिक संशोधन किए जाएंगे जो इस खंड के उपबंधों को प्रभावी करने के लिए आवश्यक हैं और तब उक्त पैरा और उक्त भाग 3 के बारे में यह समझा जाएगा कि उनका तद्नुसार संशोधन कर दिया गया है;
(ख) मिजोरम संघ राज्यक्षेत्र में विहित तारीख से ठीक पहले विद्यमान स्वशासी प्रदेश की प्रत्येक प्रादेशिक परिषद (जिसे इसमें इसके पश्चात् विद्यमान प्रादेशिक परिषद कहा गया है) उस तारीख को और से और जब तक तत्स्थानी नए ज़िले के लिए परिषद का सम्यक रूप से गठन नहीं होता है तब तक, उस ज़िले की ज़िला परिषद (जिसे इसमें इसके पश्चात् तत्स्थानी नई ज़िला परिषद कहा गया है) समझी जाएगी।
(2) विद्यमान प्रादेशिक परिषद का प्रत्येक निर्वाचित या नामनिर्देशित सदस्य तत्स्थानी नई ज़िला परिषद के लिए, यथास्थिति, नि र्वाचित या नामनिर्देशित समझा जाएगा और तब तक पद धारण करेगा जब तक इस अनुसूची के अधीन तत्स्थानी नए ज़िले के लिए ज़िला परिषद का सम्यक रूप से गठन नहीं होता है।
(3) जब तक तत्स्थानी नई ज़िला परिषद द्वारा इस अनुसूची के पैरा 2 के उपपैरा (7) और पैरा 4 के उपपैरा (4) के अधीन नियम नहीं बनाए जाते हैं तब तक विद्यमान प्रादेशिक परिषद द्वारा उक्त उपबंधों के अधीन बनाए गए नियम, जो विहित तारीख से ठीक पहले प्रवृत्त हैं, तत्स्थानी नई ज़िला परिषद के संबंध में ऐसे अनुकूलनों और उपांतरणों के अधीन रहते हुए प्रभावी होंगे जो मिजोरम संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासक द्वारा उनमें किए जाए।
(4) मिजोरम संघ राज्यक्षेत्र का प्रशासक, एक या अधिक आदेशों द्वारा, निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेगा, अर्थात:--
(क) विद्यमान प्रादेशिक परिषद की आस्तियों, अधिकारों और दायित्वों का (जिनके अंतर्गत उसके द्वारा की गई किसी संविदा के अधीन अधिकार और दायित्व हैं) पूर्णत: या भागत: तत्स्थानी नई ज़िला परिषद को अंतरण ;
(ख) किन्हीं ऐसी विधिक कार्यवाहियों में, जिनमें विद्यमान प्रादेशिक परिषद एक पक्षकार है, विद्यमान प्रादेशिक परिषद के स्थान पर तत्स्थानी नई ज़िला परिषद का पक्षकार के रूप में रखा जाना;
(ग) विद्यमान प्रादेशिक परिषद के किन्हीं कर्मचारियों का तत्स्थानी नई ज़िला परिषद को अथवा उसके द्वारा अंतरण या पुनर्नियोजन; ऐसे अंतरण या पुनर्नियोजन के पश्चात् उन कर्मचारियों को लागू होने वाले सेवा के निबंधन और शर्तें;
(घ) विद्यमान प्रादेशिक परिषद द्वारा बनाई गई और विहित तारीख से ठीक पहले प्रवृत्त किन्हीं विधियों का, ऐसे अनुकूलनों और उपांतरणों के, चाहे वे निरसन के रूप में हों या संशोधन के रूप में, अधीन रहते हुए जो प्रशासक द्वारा इस निमित्त किए जाएं, तब तक प्रवृत्त बना रहना जब तक सक्षम विधान-मंडल द्वारा या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा ऐसी विधियों में परिवर्तन, निरसन या संशोधन नहीं कर दिया जाता है;
(ङ) ऐसे आनुषंगिक, पारिणामिक और अनुपूरक विषय जो प्रशासक आवश्यक समझे।
20ग. निर्वचन-- इस निमित्त बनाए गए किसी उपबंध के अधीन रहते हुए, इस अनुसूची के उपबंध मिजोरम संघ राज्यक्षेत्र को उनके लागू होने में इस प्रकार प्रभावी होंगे--
(1) मानो राज्य के राज्यपाल और राज्य की सरकार के प्रति निर्देश अनुच्छेद 239 के अधीन नियुक्त संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासक के प्रति निर्देश हों ;
(“राज्य की सरकार”) पद के सिवाय) राज्य के प्रति निर्देश मिजोरम संघ राज्यक्षेत्र के प्रति निर्देश हों और राज्य विधान-मंडल के प्रति निदेश मिजोरम संघ राज्यक्षेत्र की विधान सभा के प्रति निर्देश हों;
(2) मानो--
(क) पैरा 4 के उपपैरा (5) में संबंधित राज्य की सरकार से परामर्श करने के उपबंध का लोप कर दिया गया हो ;
(ख) पैरा 6 के उपपैरा (2) में, “जिस पर राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार है” शब्दों के स्थान पर “जिसके संबंध में मिजोरम संघ राज्यक्षेत्र की विधान सभा को विधियां बनाने की शक्ति है” शब्द रख दिए गए हों;
(ग) पैरा 13 में, “अनुच्छेद 202 के अधीन” शब्दों और अंकों का लोप कर दिया गया हो।
21. अनुसूची का संशोधन--
(1) संसद, समय-समय पर विधि द्वारा, इस अनुसूची के उपबंधों में से किसी का, परिवर्धन, परिवर्तन या निरसन के रूप में संशोधन कर सकेगी और जब अनुसूची का इस प्रकार संशोधन किया जाता है तब इस संविधान में इस अनुसूची के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह इस प्रकार संशोधित ऐसी अनुसूची के प्रति निर्देश है।
(2) ऐसी कोई विधि जो इस पैरा के उपपैरा (1) में उल्लिखित है, इस संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजनों के लिए इस संविधान का संशोधन नहीं समझी जाएगी।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. मिजोरम राज्य अधिनियम, 1986 (1986 का 34) की धारा 39 द्वारा कुछ शब्दों के स्थान पर (20-2-1987 से) प्रतिस्थापित ।
  2. संविधान (छठी अनुसूची) संशोधन अधिनियम, 2003 (2003 का 44) की धारा 2 द्वारा असम में लागू होने के लिए पैरा 1 में उपपैरा (2) के पश्चात् निम्नलिखित परंतुक अंत:स्थापित कर संशोधित किया गया, अर्थात् "परन्तु इस उपपैरा की कोई बात, बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र ज़िले को लागू नहीं होगी।"
  3. पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 (1971 का 81) की धारा 71 (i) और आठ वीं अनुसूची द्वारा (21-1-1972 से) 'भाग क' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
  4. संविधान (उनचासवां संशोधन) अधिनियम, 1984 की धारा 4 द्वारा (1-4-1985 से) "भाग 1 और भाग 2" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
  5. पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 (1971 का 81) की धारा 71 (i) और आठ वीं अनुसूची द्वारा (21-1-1972 से) 'भाग क' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
  6. पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 (1971 का 81) की धारा 71 (i) और आठ वीं अनुसूची द्वारा (21-1-1972 से) 'भाग क' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
  7. आसाम पुनर्गठन (मेघालय) अधिनियम, 1969 (1969 का 55) की धारा 74 और चौथी अनुसूची द्वारा (2-4-1970 से) अंत:स्थापित।
  8. पूर्वोत्तर क्षेत्र पुनर्गठन अधिनियम, 1971 (1971 का 81) की धारा 71 (i) और आठवीं अनुसूची द्वारा (21-1-1972 से) अंत:स्थापित
  9. संविधान छठी अनुसूची (संशोधन) अधिनियम, 2003 (2003 का 44) की धारा 2 द्वारा असम में लागू होने के लिए पैरा 2 में उपपैरा (1) के पश्चात् तथा उपपैरा (3) में परन्तुक के पश्चात् क्रमश: निम्नलिखित परंतुक अंत:स्थापित कर संशोधित किया गया, अर्थात्: परंतु यह कि बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद छियालीस से अनधिक सदस्यों से मिलकर बनेगी जिनमें से चालीस सदस्यों को वयस्क मताधिकार के आधार पर निर्वाचित किया जाएगा, जिनमें से तीस अनुसूचित जनजातियों के लिए, पांच गैर जनजातीय समुदायों के लिए, पांच सभी समुदायों के लिए आरक्षित होंगे तथा शेष छह राज्यपाल द्वारा नामनिर्देशित किए जाएंगे जिनके अधिकार और विशेषाधिकार, जिनके अंतर्गत मत देने के अधिकार भी हैं, वही होंगे जो अन्य सदस्यों के हैं, बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र ज़िले के उन समुदायों में से, जिनका प्रतिनिधित्व नहीं है, कम से कम दो महिलाएं होंगी”। “परंतु यह और कि बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र ज़िले के लिए गठित ज़िला परिषद् बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद् कहलाएगी।“
  10. संविधान छठी अनुसूची (संशोधन) अधिनियम, 1995 (1995 का 42) की धारा 2 द्वारा असम में लागू होने के लिए पैरा 2 में उपपैरा (3) के पश्चात् निम्नलिखित परंतुक अंत:स्थापित किया गया, अर्थात् :-- “परंतु उत्तरी कछार पहाड़ी ज़िले के लिए गठित ज़िला परिषद, उत्तरी कछार प हाड़ी स्वशासी परिषद् कहलाएगी और कार्बी आलांग ज़िले के लिए गठित ज़िला परिषद, कार्बी आलांग स्वशासी परिषद् कहलाएगी।“
  11. आसाम पुनर्गठन (मेघालय) अधिनियम, 1969 (1969 का 55) की धारा 74 और चौथी अनुसूची द्वारा (2-4-1970 से) उपपैरा (1) के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  12. आसाम पुनर्गठन (मेघालय) अधिनियम, 1969 (1969 का 55) की धारा 74 और चौथी अनुसूची द्वारा (2-4-1970 से) ऐसी परिषदों के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  13. आसाम पुनर्गठन (मेघालय) अधिनियम, 1969 (1969 का 55) की धारा 74 और चौथी अनुसूची द्वारा (2-4-1970 से) अंत:स्थापित
  14. आसाम पुनर्गठन (मेघालय) अधिनियम, 1969 (1969 का 55) की धारा 74 और चौथी अनुसूची द्वारा (2-4-1970 से) अंत:स्थापित ।
  15. आसाम पुनर्गठन (मेघालय) अधिनियम, 1969 (1969 का 55) की धारा 74 और चौथी अनुसूची द्वारा (2-4-1970 से) अंत:स्थापित।
  16. आसाम पुनर्गठन (मेघालय) अधिनियम, 1969 (1969 का 55) की धारा 74 और चौथी अनुसूची द्वारा (2-4-1970 से) अंत:स्थापित।
  17. संविधान छठी अनुसूची (संशोधन) अधिनियम, 2003 (2003 का 44) की धारा 2 द्वारा पैरा 3 असम राज्य को लागू करने में निम्नलिखित रूंप से संशोधित किया गया जिससे उपपैरा (3) निम्नलिखित रूंप से प्रतिस्थापित हो सके, अर्थात् :-- “(3) पैरा 3क के उपपैरा (2) या पैरा 3ख के उपपैरा (2) में जैसा अन्यथा उपबंधित है, उसके सि वाय इस पैरा या पैरा 3क के उपपैरा (1) या पैरा 3ख के उपपैरा (1) के अधीन बनाई गई सभी विधियां राज्यपाल के समक्ष तुरंत प्रस्तुत की जाएंगी और जब तक वह उन पर अनुमति नहीं दे देता है तब तक प्रभावी नहीं होंगी”।
  18. संविधान (छठी अनुसूची) संशोधन अधिनियम, 1995 (1995 का 42) की धारा 2 द्वारा असम में लागू होने के लिए पैरा 3 के पश्चात् तथा संविधान छठी अनुसूची (संशोधन) अधिनियम, 2003 की धारा 2 द्वारा पैरा 3क के पश्चात् क्रमश: निम्नलिखित अंत:स्थापित किया गया, अर्थात्;
    3क. उत्तरी कछार पहाड़ी स्वशासी परिषद और कार्बी आलांग स्वशासी परिषद की विधि बनाने की अतिरिक्त शक्तियां--
    (1) पैरा 3 के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभा व डाले बिना, उत्तरी कछार पहाड़ी/स्वशासी परिषद और कार्बी आलांग स्वशासी परिषद को, संबंधित ज़िलों के भीतर निम्नलिखित की बाबत विधियां बनाने की शक्ति होगी, अर्थात्;
    (क) सातवीं अनुसूची की सूची 1 की प्रविष्टि 7 और प्रविष्टि 52 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उद्योग;
    (ख) संचार, अर्थात्, सड़कें, पुल, फेरी और अन्य संचार साधन, जो सातवीं अनुसूची की सूची 1 में विनिर्दिष्ट नहीं हैं, नगरपालिक ट्राम, राज्जुमार्ग, अंतर्देशीय जलमार्गों के संबंध में सातवीं अनुसूची की सूची 1 और सूची 3 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, अंतर्देशीय जलमार्ग और उन पर यातायात, यंत्र नोदित यानों से भिन्न यान;
    (ग) पशुधन का परिरक्षण, संरक्षण और सुधार तथा जीव वजंतुओं के रोगों का निवारण, पशु चिकित्सा प्रशिक्षण और व्यवसाय; कांजी हाउस;
    (घ) प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा ;
    (ङ) कृषि जिसके अंतर्गत कृषि शिक्षा और अनुसंधान, नाशक जीवों से संरक्षण और पादप रोगों का निवारण है;
    (च) मत्स्य उद्योग;
    (छ) सातवीं अनुसूची की सूची 1 की प्रविष्टि 56 के उपबंधों के अधीन रहते हुए,
    जल, अर्थात्, जल प्रदाय, सिंचाई और नहरें, जल निकासी और तटबंध, जल भंडारण और जल शक्ति ;
    (ज) सामाजिक सुरक्षा और सामाजिक बीमा ;
    नियोजन और बेकारी;
    (झ) ग्रामों, धान के खेतों, बाज़ारों, शहरों आदि के संरक्षण के लिए बाढ़ नियंत्रण स्कीमें (जो तकनीकी प्रकृति की न हों) ;
    (ञ) नाट्यशाला और नाट्य प्रदर्शन; सातवीं अनुसूची की सूची 1 की प्रविष्टि 60 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, सिनेमा, खेल-कूद, मनोरंजन और आमोद;
    (ट) लोक स्वास्थ्य और स्वच्छता, अस्पताल और औषधालय;
    (ठ) लघु सिंचाईं;
    (ड) खाद्य पदार्थ, पशुओं के चारे, कच्ची कपास और कच्चे जूट का व्यापार और वाणिज्य तथा उनका उत्पादन, प्रदाय और वितरण;
    (ढ) राज्य द्वारा नियंत्रित वित्तपोषित पुस्तकालय, संग्रहालय और वैसी ही अन्य संस्थाएं संसद द्वारा बनाई गई विधि द्वारा या उसके अधीन राष्ट्रीय महत्व के घोषित किए गए प्राचीन और ऐतिहासिक संस्मारकों और अभिलेखों से भिन्न प्राचीन और ऐतिहासिक संस्मारक और अभिलेख; और
    (ण) भूमि का अन्य संक्रामण।
    (2) पैरा 3 के अधीन या इस पैरा के अधीन उत्तरी कछार पहाड़ी स्वशासी परिषद और कार्बी आलांग स्वशासी परिषद द्वारा बनाई गई सभी विधियां, जहां तक उनका संबंध सातवीं अनुसूची की सूची 3 में विनिर्दिष्ट विषयों से है, राज्यपाल के समक्ष तुरंत प्रस्तुत की जाएंगी, जो उन्हें राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रखेगा ।
    (3) जब कोई विधि राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रख ली जाती है तब राष्ट्रपति घोषित करेगा कि वह उक्त विधि पर अनुमति देता है या अनुमति रोक लेता है :
    परंतु राष्ट्रपति राज्यपाल को यह निदेश दे सकेगा कि वह विधि को, यथास्थिति, उत्तरी कछार पहाड़ी स्वशासी परिषद या कार्बी आलांग स्वशासी परिषद को ऐसे संदेश के साथ यह अनुरोध करते हुए लौटा दे कि उक्त परिषद विधि या उसके किन्हीं विनिर्दिष्ट उपबंधों पर पुनर्विचार करे और विशिष्टतया , किन्हीं ऐसे संशोधनों के पुर:स्थापन की वांछनीयता पर विचार करे जिनकी उसने अपने संदेश में सिफारिश की है और जब विधि इस प्रकार लौटा दी जाती है तब ऐसा संदेश मिलने की तारीख से छह मास की अवधि के भीतर परिषद ऐसी विधि पर तदनुसार विचार करेगी और यदि विधि उक्त परिषद द्वारा संशोधन सहित या उसके बिना फिर से पारित कर दी जाती है तो उसे राष्ट्रपति के समक्ष उसके विचार के लिए फिर से प्रस्तुत किया जाएगा”।
    3ख- बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद् की विधियां बनाने की अतिरिक्त शक्तियां --
    (1) पैरा 3 के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद को, अपने क्षेत्रों में, निम्नलिखित के संबंध में विधियां बनाने की शक्ति होगी, अर्थात्;
    (i) कृषि, जिसके अंतर्गत कृषि शिक्षा और अनुसंधान, नाशक जीवों से संरक्षण और पादप रोगों का निवारण है;
    (ii) पशुपालन और पशु चिकित्सा अर्थात् पशुधन का परिरक्षण, सरंक्षण और सुधार तथा जीव जंतुओं के रोगों का निवारण, पशु चिकित्सा प्रशिक्षण और व्यवसाय, कांजी हाऊस;
    (iii) सहकारिता;
    (iv) सांस्कृतिक कार्य;
    (v) शिक्षा अर्थात् प्राइमरी शिक्षा, उच्चतर माध्यमिक शिक्षा जिसमें वृत्तिक प्रशिक्षण, प्रौढ़ शिक्षा, महाविद्यालय शिक्षा (साधारण) भी है;
    (vi) मत्स्य उद्योग;
    (vii) ग्राम, धान के खेतों, बाज़ारों और शहरों के संरक्षण के लिए बाढ़ नियंत्रण (जो तकनीकी प्रकृति का न हो);
    (viii) खाद्य और सिविल आपूर्ति;
    (ix) वन (आरक्षित वनों को छोड़कर);
    (x) हथकरघा और वस्त्र;
    (xi) स्वास्थ्य और परिवार कल्याण;
    (xii) सातवीं अनुसूची की सूची 1 की प्रविष्टि 84 के उपबंधों के अधीन रहते हुए मादक लिकर, अफीम और युत्पन्न;
    (xiii) सिंचाई;
    (xiv) श्रम और रोजगार;
    (xv) भूमि और राजस्व;
    (xvi) पुस्तकालय सेवाएं (राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित और नियंत्रित);
    (xvii) लाटरी (सातवीं अनुसूची की सूची 1 की प्रविष्टि 40 के उपबंधों के अधीन रहते हुए), नाट्यशाला, नाट्य प्रदर्शन और सिनेमा (सातवीं अनुसूची की सूची 1 की प्रविष्टि 60 के उपबंधों के अधीन रहते हुए) ;
    (xviii) बाज़ार और मेले ;
    (xix) नगर निगम, सुधार न्यास, ज़िला बोर्ड और अन्य स्थानीय प्राधिकारी;
    (xx) राज्य द्वारा नियंत्रित या वित्तपोषित संग्रहालय और पुरातत्व विज्ञान संस्थान, संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि द्वारा या उसके राष्ट्रीय महत्व के घोषित किए गए प्राचीन और ऐतिहासिक संस्मारकों और अभिलेखों से भिन्न, प्राचीन
    और ऐतिहासिक संस्मारक और अभिलेख;
    (xxi) पंचायत और ग्रामीण विकास;
    (xxii) योजना और विकास;
    (xxiii) मुद्रण और लेखन सामग्री;
    (xxiv) लोक स्वास्थ्य इंजीनियरी ;
    (xxv) लोक निर्माण विभाग;
    (xxvi) प्रचार और लोक संपर्क ;
    (xxvii) जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रीकरण ;
    (xxviii) सहायता और पुनर्वास;
    (xxix) रेशम उत्पादन;
    (xxx) सातवीं अनुसूची की सूची 1 की प्रविष्टि 7 और प्रविष्टि 52 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, लघु, कुटीर और ग्रामीण उद्योग;
    (xxxi) समाज कल्याण;
    (xxxii) मृदा संरक्षण ;
    (xxxiii) खेलकूद और युवा कल्याण;
    (xxxiv) सांख्यिकी ;
    (xxxv) पर्यटन;
    (xxxvi) परिवहन (सड़कें, पुल, फेरी और अन्य संचार साधन, जो सातवीं अनुसूची की सूची 1 में विनिर्दिष्ट नहीं हैं, नगरपालिका ट्राम, रज्जुमार्ग, अन्तरदेशीय जलमार्गों के संबंध में सातवीं अनुसूची की सूची 1 और सूची 3 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, अन्तरदेशीय जलमार्ग और उन पर यातायात, यंत्र नोदित यानों से भिन्न यान;
    (xxxvii) राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित और वित्तपोषित जनजाति अनुसंधान संस्थान;
    (xxxviii) शहरी विकास-नगर और ग्रामीण योजना;
    (xxxix) सातवीं अनुसूची की सूची 1 की प्रविष्टि 50 के उपबंधों के अधीन रहते हुए बाट और माप;
    और
    (xl) मैदानी जनजातियों और पिछड़े वर्गों का कल्याण;
    परंतु ऐसी विधियों की कोई बात,--
    (क) इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख पर किसी नागरिक के उसकी भूमि के संबंध में विद्यमान अधिकारों और विशेषाधिकारों को समाप्त या उपांतरित नहीं करेगी;
    और
    (ख) किसी नागरिक को विरासत, आबंटन, व्यवस्थापान के रूप में या अंतरण की किसी अन्य रीति से भूमि अर्जित करने से अनुज्ञात करने से अनुज्ञात नहीं करेगी यदि ऐसा नागरिक बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र ज़िले के भीतर भूमि के ऐसे अर्जन के लिए अन्यथा पात्र है।
    (2) पैरा 3 के अधीन या इस पैरा के अधीन बनाई गई सभी विधियां, जहां तक उनका संबंध सातवीं अनुसूची की सूची 3 में विनिर्दिष्ट विषयों से है, राज्यपाल के समक्ष तुरंत प्रस्तुत की जाएंगी जो उन्हें राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रखेगा।
    (3) जब कोई विधि राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रख ली जाती है, तब विचार घोषित करेगा कि वह उक्त विधि पर अनुमति देता है या अनुमति रोक लेता है;
    परंतु राष्ट्रपति राज्यपाल को यह संदेश दे सकेगा कि वह विधि को, बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद को ऐसे संदेश के साथ यह अनुरोध करते हुए लौटा दे कि उक्त परिषद विधि या उसके किन्हीं विनिर्दिष्ट उपबंधों पर पुनिर्वचार करे और वशिष्टियाँ, किन्हीं ऐसे संशोधनों को पुर:स्थापित करने की वांछनीयता पर विचार करे जिनकी उसने अपने संदेश में सिफारिश की है और जब विधि इस प्रकार लौटा दी जाती है तब उक्त परिषद, ऐसे संदेश की प्राप्ति की तारीख से छह मास की अवधि के भीतर ऐसी विधि पर तदनुसार विचार करेगी और यदि विधि उक्त परिषद द्वारा, संशोधन सहित या उसके बिना, फिर से पारित कर दी जाती है तो उसे राष्ट्रपति के समक्ष उसके विचार के लिए फिर से प्रस्तुत किया जाएगा ।
  19. पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 (1971 का 81) की धारा 71 (i) और आठवीं अनुसूची द्वारा (21-1-1972 से) कुछ शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  20. आसाम पुनर्गठन (मेघालय) अधिनियम, 1969 (1969 का 55) की धारा 74 और चौथी अनुसूची द्वारा (2-4-1970 से) खंड (झ) के स्थान पर प्रतिस्थापित।
  21. संविधान छठी अनुसूची (संशोधन) अधिनियम, 2003 (2003 का 44) की धारा 2 द्वारा पैरा 4 असम राज्य को लागू करने में निम्नलिखित रूंप से संशोधित किया गया जिससे उपपैरा (5) के पश्चात् निम्नलिखित अंत:स्थापित् किया जा सके, अर्थात्: - “ (6) इस पैरा की कोई बात, इस अनुसूची के पैरा 2 के उपपैरा (3) के परंतुक के अधीन गठित बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद को लागू नहीं होगी”।
  22. पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 (1971 का 81) की धारा 71 (i) और आठवीं अनुसूची द्वारा (21-1-1972 से) “आसाम के” शब्दों का लोप किया गया
  23. आसाम पुनर्गठन (मेघालय) अधिनियम, 1969 (1969 का 55) की धारा 74 और चौथी अनुसूची द्वारा (2-4-1970से) अंत:स्थापित ।
  24. पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 (1971 का 81) की धारा 71 (i) और आठवीं अनुसूची द्वारा (21-1-1972 से) कुछ शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
  25. अब दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) देखें ।
  26. अब दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) देखें ।
  27. आसाम पुनर्गठन (मेघालय) अधिनियम, 1969 (1969 का 55) की धारा 74 और चौथी अनुसूची द्वारा (2-4-1970 से) अंत:स्थापित ।
  28. आसाम पुनर्गठन (मेघालय) अधिनियम, 1969 (1969 का 55) की धारा 74 और चौथी अनुसूची द्वारा (2-4-1970 से) पैरा 6 के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  29. निरसन और संशोधन अधिनियम, 1974 (1974 का 56) की धारा 4 द्वारा “कांजी हाउस” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  30. पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 (1971 का 81) की धारा 71(i) और आठवीं अनुसूची द्वारा (21-1-1972 से) “यथास्थिति, आसाम या मेघालय” शब्दों का लोप किया गया।
  31. आसाम पुनर्गठन (मेघालय) अधिनियम, 1969 (1969 का 55) की धारा 74 और चौथी अनुसूची द्वारा (2-4-1970 से) उपपैरा (2) के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  32. पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 (1971 का 81) की धारा 71(i) और आठवीं अनुसूची द्वारा (21-1-1972 से) कुछ शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
  33. आसाम पुनर्गठन (मेघालय) अधिनियम, 1969 (1969 का 55) की धारा 74 और चौथी अनुसूची द्वारा (2-4-1970 से) अंत:स्थापित ।
  34. संविधान (छठी अनुसूची) संशोधन अधिनियम, 1988 (1988 का 67) की धारा 2 द्वारा पैरा 9 त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों को लागू करने में निम्नलिखित रूप से संशोधित किया गया जिससे उपपैरा (2) के पश्चात् निम्नलिखित उपपैरा अंत:स्थापित किया जा सके, अर्थात्: “(3) राज्यपाल, आदेश द्वारा, यह निदेश दे सकेगा कि इस पैरा के अधीन ज़िला परिषद को दिया जाने वाला स्वामिस्व का अंश उस परिषद को, यथास्थिति, उपपैरा (1) के अधीन किसी करार या उपपैरा (2) के अधीन किसी अवधारण की तारीख से एक वर्ष की अवधि के भीतर किया जाएगा”।
  35. पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 (1971 का 81) की धारा 71 (i) और आठवीं अनुसूची द्वारा (21-1-1972 से) “असम सरकार” के स्थान पर प्रतिस्थापित।
  36. संविधान (छठी अनुसूची) संशोधन अधिनियम, 1988 (1988 का 67) की धारा 2 द्वारा पैरा 10 त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों को लागू करने में निम्नलिखित रूप से संशोधित किया गया; --
    ‘(क) शीर्षक में से जनजातियों से भिन्न व्यक्तियों की’ शब्दों का लोप किया जाएगा;
    (ख) उपपैरा (1) में से “जनजातियों से भिन्ना” शब्दों का लोप किया जाएगा;
    (ग) उपपैरा (2) में, खंड (घ) के स्थान पर, निम्नलिखित खंड रखा जाएगा, अर्थात्;
    “(घ) विहित कर सकेंगे कि कोई व्यक्ति, जो ज़िले में निवासी है ज़िला परिषद द्वारा इस निमित्त दी गई अनुज्ञप्ति के अधीन कोई थोक या फुटकर व्यापार करेगा अन्यथा नहीं”।
  37. संविधान छठी अनुसूची (संशोधन) अधिनियम, 2003 (2003 का 44) की धारा 2 द्वारा पैरा 10 असम राज्य को लागू करने में निम्नलिखित रूप से संशोधित किया गया जिससे उपपैरा (3) के पश्चात् निम्नलिखित अंत:स्थापित किया जा सके, अथवा;
    “(4) इस पैरा की कोई बात, इस अनुसूची के पैरा 2 के उपपैरा (3) के परंतुक के अधीन गठित बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद को लागू नहीं होगी”।
  38. संविधान (छठी अनुसूची) संशोधन अधिनियम, 1995 (1995 का 42) की धारा 2 द्वारा पैरा 12 असम राज्य को लागू होने के लिए निम्नलिखित रूप से संशोधित किया गया, अर्थात्: ‘पैरा 12 के उपपैरा (1) में “इस अनुसूची के पैरा 3 में ऐसे विषयों” शब्दों और अंक के स्थान पर, इस अनुसूची के पैरा 3 या पैरा 3क में ऐसे विषयों शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे’।
  39. संविधान छठी अनुसूची (संशोधन) अधिनियम, 2003 (2003 का 44) की धारा 2 द्वारा पैरा 12 असम राज्य को लागू करने में निम्नलिखित रूप से संशोधित किया गया, अर्थात्; ‘पैरा 12 के उपपैरा (1) के खंड (क) में, “इस अनुसूची के पैरा 3 या पैरा 3क में ऐसे विषयों के रूप में विनिर्दिष्ट किया गया है” शब्दों, अंकों और अक्षर के स्थान पर, “इस अनुसूची के पैरा 3 या पैरा 3क या पैरा 3ख में ऐसे विषयों के रूप में विनिर्दिष्ट किया गया है” शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे;
  40. पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 (1971 का 81) की धारा 71 और आठवीं अनुसूची द्वारा (21-1-1972 से) शीर्षक के स्थान पर प्रतिस्थापित।
  41. पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 (1971 का 81) की धारा 71 और आठवीं अनुसूची द्वारा (21-1-1972 से) “राज्य का विधान-मंडल” के स्थान पर प्रतिस्थापित।
  42. पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 (1971 का 81) की धारा 71 और आठवीं अनुसूची द्वारा (21-1-1972 से) “राज्य का विधान-मंडल” के स्थान पर प्रतिस्थापित।
  43. पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 (1971 का 81) की धारा 71 और आठवीं अनुसूची द्वारा (21-1-1972 से) अंत:स्थापित।
  44. पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 (1971 का 81) की धारा 71 और आठ वीं अनुसूची द्वारा (21-1-1972 से) “राज्य का विधान-मंडल” के स्थान पर प्रतिस्थापित।
  45. पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 (1971 का 81) की धारा 71 और आठवीं अनुसूची द्वारा (21-1-1972 से) अंत:स्थापित।
  46. पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 (1971 का 81) की धारा 71 और आठ वीं अनुसूची द्वारा (21-1-1972 से) पैरा 12क के स्थान पर प्रतिस्थापित।
  47. संविधान छठी अनुसूची (संशोधन) अधिनियम, 1988 (1988 का 76) की धारा 2 द्वारा पैरा 12कक और 12ख के स्थान पर प्रतिस्थापित। पैरा 12कक संविधान (उनचास वां संशोधऩ) अधिनियम, 1984 की धारा 4 द्वारा (1-4-1985 से) अंत:स्थापित किया गया था।
  48. पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 (1971 का 81) की धारा 71 और आठवीं अनुसूची द्वारा (21-1-1972 से) “असम” शब्द का लोप किया गया।
  49. संविधान छठी अनुसूची (संशोधन) आधिनियम, 1995 (1995 का 42) की धारा 2 द्वारा पैरा 14 “असम” राज्य में लागू होने के लिए निम्नलिखित रूप से संशोधित किया गया, अर्थात्:-‘पैरा 14 के उपपैरा (2) में, “राज्यपाल की उससे संबंधित सिफारिशों के साथ” शब्दों का लोप किया जाएगा’।
  50. पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 (1971 का 81) की धारा 71 और आठवीं अनुसूची द्वारा (21-1-1972 से) “असम सरकार” के स्थान पर प्रतिस्थापित।
  51. संविधान छठी अनुसूची (संशोधन) अधिनियम, 1988 (1988 का 67) की धारा 2 द्वारा पैरा 15 त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों को लागू करने में निम्नलिखित रूप से संशोधित किया गया है:--- ‘(क) आरंभिक भाग में, “राज्य के विधान-मंडल” द्वारा शब्दों के स्थान पर “राज्यपाल द्वारा” शब्द रखे जाएंगे; (ख) परन्तुक का लोप किया जाएगा’।
  52. आसाम पुनर्गठन (मेघालय) अधिनियम, 1969 (1969 का 55) की धारा 74 और चौथी अनुसूची द्वारा (2-4-1970से) अंत:स्थापित।
  53. संविधान छठी अनुसूची (संशोधन) अधिनियम, 1988 (1988 का 67) की धारा 2 द्वारा पैरा 16 त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों को लागू करने में निम्नलिखित रूप से संशोधित किया गया है:--- ‘(क) उपपैरा (1) के खंड (ख) में आने वाले राज्य के विधान-मंडल के पूर्व अनुमोदन से शब्दों और दूसरे परन्तुक का लोप किया जाएगा; (ख) उपपैरा (3) के स्थान पर निम्नलिखित उपपैरा रखा जाएगा, अर्थात् :--- “(3) इस पैरा के उपपैरा (1) या उपपैरा (2) के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, उसके लिए जो कारण है उनके सहित, राज्य के विधान-मंडल के समक्ष रखा जाएगा’”।
  54. आसाम पुनर्गठन (मेघालय) अधिनियम, 1969 (1969 का 55) की धारा 74 और चौथी अनुसूची द्वारा (2-4-1970 से) पैरा 16 को उपपैरा (1) के रूप में पुनर्संख्यांकित किया गया ।
  55. आसाम पुनर्गठन (मेघालय) अधिनियम, 1969 (1969 का 55) की धारा 74 और चौथी अनुसूची द्वारा (2-4-1970 से ) अंत:स्थापित।
  56. संविधान छठी अनुसूची (संशोधन) अधिनियम, 2003 (2003 का 44) की धारा 2 द्वारा पैरा 17 असम राज्य को लागू करने में निम्नलिखित अंत:स्थापित किया गया, अर्थात:-- “परन्तु इस पैरा की कोई बात बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र ज़िला को लागू नहीं होगी”।
  57. पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 (1971 का 81) की धारा 71 और आठवीं अनुसूची द्वारा (21-1-1972 से ) “असम की विधान सभा” के स्थान पर प्रतिस्थापित।
  58. संविधान (उनचासवां संशोधन) अधिनियम, 1984 की धारा 4 द्वारा (1-4-1985 से) अंत:स्थापित।
  59. मिजोरम राज्य अधिनियम, 1986 (1986 का 34) की धारा 39 द्वारा (20-2-1987 से ) अंत:स्थापित ।
  60. पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 (1971 का 81) की धारा 71 और आठवीं अनुसूची द्वारा (21-1-1972 से ) अंत:स्थापित।
  61. संविधान (उनचासवां संशोधन) अधिनियम, 1984 की धारा 4 द्वारा (1-4-1985 से) अंत:स्थापित।
  62. मिजोरम राज्य अधिनियम, 1986 (1986 का 34) की धारा 39 द्वारा (20-2-1987 से ) अंत:स्थापित ।
  63. पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 (1971 का 81) की धारा 71 और आठवीं अनुसूची द्वारा (21-1-1972 से ) पैरा 18 का लोप किया गया।
  64. संविधान छठी अनुसूची (संशोधन) अधिनियम, 2003 (2003 का 44) की धारा 2 द्वारा पैरा 19 असम राज्य को लागू करने में निम्नलिखित रूप से संशोधित किया गया जिससे उपपैरा (3) के पश्चात् निम्नलिखित अंत:स्थापित किया गया अर्थात्:- ‘(4) इस अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात्, यथाशीघ्र असम में बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र ज़िले के लिए एवं अंतरिम कार्यपालक परिषद, राज्यपाल द्वारा बोडो आन्दोलन के नेताओं में से, जिनके अंतर्गत समझौते के ज्ञापन के हस्ताक्षरकर्ता भी हैं, बनाई जाएगी और उसमें उस क्षेत्र के गैर जनजातीय समुदायों को भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जाएगा : परंतु अन्तरिम परिषद छह मास की अवधि के लिए होगी जिसके दौरान परिषद का निर्वाचन कराने का प्रयास किया जाएगा। स्पष्टीकरण-- इस उपपैरा के प्रयोजनों के लिए, “समझौते का ज्ञापन” पद से भारत सरकार, असम सरकार और बोडो लिबरेशन टाइगर्स के बीच 10 फरवरी, 2003 को हस्ताक्षारित ज्ञापन अभिप्रेत है।
  65. पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 (1971 का 81) की धारा 71 और आठवीं अनुसूची द्वारा (21-1-1972 से ) “पैरा 20 और 20क के” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  66. संविधान (उनचासवां संशोधन) अधिनियम, 1984 की धारा 4 द्वारा (1-4-1985 से) अंत:स्थापित।
  67. संविधान (उनचासवां संशोधन) अधिनियम, 1984 की धारा 4 द्वारा (1-4-1985 से) अंत:स्थापित।
  68. मिजोरम राज्य अधिनियम, 1986 (1986 का 34) की धारा 39 द्वारा (20-2-1987 से) “संघ राज्यक्षेत्र” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  69. संविधान (उनचास वां संशोधन) अधिनियम, 1984 की धारा 4 द्वारा (1-4-1985 से) “नीचे दी गई सारणी में” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  70. 6 मेघालय सरकार के अधिसूचना सं0 डी.सी.ए. 31/72/11, तारीख 14 जून, 1973, मेघालय का राजपत्र, भाग V क, तारीख 23-6-1973 पृ. 200 द्वारा प्रतिस्थापित।
  71. असम सरकार द्वारा तारीख 14-10-1976 की अधिसूचना सं. टी.ए.डी / आर 115/74/47 द्वारा “मिकीर पहाडी जिला” के स्थान पर प्रतिस्थापित।
  72. संविधान छठी अनुसूची (संशोधन) अधिनियम, 2003 (2003 का 44) की धारा 2 द्वारा असम राज्य को लागू करने में पैरा 20 की सारणी के भाग 1 में प्रविष्टि 2 के पश्चात् निम्नलिखित प्रविष्टि अंत:स्थापित की गई, अर्थात्:-- “ 3. बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र जिला”।
  73. असम सरकार द्वारा तारीख 14-10-1976 की अधिसूचना सं. टी.ए.डी / आर 115/74/47 द्वारा “मिकीर पहाडी जिला” के स्थान पर प्रतिस्थापित।
  74. मेघालय सरकार की अधिसूचना सं. डी.सी.ए. 31/72/11 तारीख 14 जून, 1973 मेघालय का राजपत्र, भाग V क, तारीख 23-6-1973 पृष्ठ 200 द्वारा प्रतिस्थापित ।
  75. संविधान उनचासवां सशोधन अधिनियम 1984 की धारा 4 द्वारा (1-4-1985 से) अन्त:स्थापित ।
  76. संघ राज्यक्षेत्र शासन (संशोधन) अधिनियम, 1971 (1971 का 83) की धारा 13 द्वारा (29-4-1972 से) “मिजो जिला” शब्दों का लोप किया गया।
  77. मिजोरम का राजपत्र 1972, तारीख 5 मई, 1972, जिल्द 1, भाग II, पृ0 17 में प्रकाशित मिजोरम ज़िला परिषद (प्रकीर्ण उपबंध) आदेश, 1972 द्वारा (29-4-1972 से) अंत:स्थापित।
  78. संविधान छठी अनुसूची (संशोधन) अधिनियम, 1988 (1988 का 67) की धारा 2 द्वारा क्रम सं0 2 और 3 तथा उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
  79. संघ राज्यक्षेत्र सासन (संशोधन) अधिनियम, 1971 (1971 का 83) की धारा 13 द्वारा (29-4-1972 से), पैरा 20क के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  80. संविधान छठी अनुसूची (संशोधन) अधिनियम, 1995 (1995 का 42) की धारा 2 द्वारा असम में लागू होने के लिए पैरा 20ख के पश्चात् निम्नलिखित पैरा अंत:स्थापित किया गया, अर्थात् : - “20खक. राज्यपाल द्वारा अपने कृत्यों के निर्वहन में वैवेकिक शक्तियों का प्रयोग--राज्यपाल, इस अनुसूची के पैरा 1 के उपपैरा (2) और उपपैरा (3), पैरा 2 के उपपैरा (1), उपपैरा (6), उपपैरा (6क) के पहले परन्तुक को छोड़कर और उपपैरा (7), पैरा 3 के उपपैरा (3), पैरा 4 के उपपैरा (4), पैरा 5, पैरा 6 के उपपैरा (1), पैरा 7 के उपपैरा (2), पैरा 8 के उपपैरा (4), पैरा 9 के उपपैरा (3), पैरा 10 के उपपैरा (3), पैरा 14 के उपपैरा (1), पैरा 15 के उपपैरा (1) और पैरा 16 के उपपैरा (1) और उपपैरा (2) के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन में, मंत्रिपरिषद और, यथास्थिति, उत्तरी कछार पहाड़ी स्वशासी परिषद या कार्बी आंगलांग पहाड़ी स्वशासी परिषद से परामर्श करने के पश्चात् ऐसी कार्रवाई करेगा, जो वह स्व विवेकानुसार आवश्यक मानता है”।
  81. संविधान छठी अनुसूची (संशोधन) अधिनियम, 1988 (1988 का 67) की धारा 2 द्वारा त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों को लागू करने में, पैरा 20ख के पश्चात् निम्नलिखित पैरा अंत:स्थापित किया गया है, अर्थात् :- “20खख. राज्यपाल द्वारा अपने कृत्यों के निर्वहन में वैवेकिक शक्तियों का प्रयोग--राज्यपाल, इस अनुसूची के पैरा 1 के उपपैरा (2) और उपपैरा (3), पैरा 2 के उपपैरा (1) और उपपैरा (7), पैरा 3 का उपपैरा (3), पैरा 4 का उपपैरा (4), पैरा 5, पैरा 6 का उपपैरा (1), पैरा 7 का उपपैरा (2), पैरा 9 का उपपैरा (3), पैरा 14 के उपपैरा (1) और पैरा 16 का उपपैरा (1) और उपपैरा (2) के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन में, मंत्रिपरिषद से और यदि वह आवश्यक समझे तो संबंधित ज़िला परिषद या प्रादेशिक परिषद से परामर्श करने के पश्चात्, ऐसी कार्रवाई करेगा, जो वह स्वविवेकानुसार आवश्यक समझे”।

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