अर्थशास्त्र सामान्य ज्ञान 225  

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1. जब मांग वक्र X-अक्ष के समानांतर एक सीधी रेखा के रूप में होता है, तो यह बताता है कि मांग की लोच-

शून्य है
इकाई से कम है
इकाई से अधिक है
अनंत है
जब मांग वक्र X-अक्ष के समानांतर एक सीधी रेखा के रूप में होता है, तो मांग की लोच अनंत (पूर्णतया लोचदार मांग) होती है। अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य- 1. जब मांग वक्र Y-अक्ष के समानांतर एक सीधी रेखा हो तो पूर्णतया बेलोचदार मांग होती है। 2. जब मांग उसी अनुपात में परिवर्तित होती है जिस अनुपात में मूल्य परिवर्तन होता है तो इसे 'समलोचदार या लोचदार मांग' कहते है।

2. निम्न में से कौन एक पूर्ण प्रतियोगिता की आवश्यक शर्त नहीं है?

वस्तु विभेद की पूर्ण अनुपस्थिति
उत्पत्ति के साधनों की पूर्ण गतिशीलता
परिवहन लागतों का अभाव
विक्रय लागतों की उपस्थिति
पूर्ण प्रतियोगिता में विक्रय लागतों की अनुपस्थिति होती है। 'विक्रय लागतों' का विचार चैम्बरलीन ने एकाधिकारात्मक प्रतियोगिता' के लिए दिया।

3. अपने लगान सिद्धांत में रिकार्डो ने भूमि की हस्तांतरण आय को माना है-

बहुत अधिक
बहुत कम
शून्य
इनमें से कोई नहीं
रिकार्डो ने अपने लगान सिद्धान्त में हस्तांतरण आय को शून्य माना है। रिकार्डो के अनुसार, भूमि का केवल एक ही प्रयोग संभव है या तो भूमि पर खेती की जाए या बेकार पड़ी रहे। इसलिए उसकी हस्तांतरण आय को शून्य माना।

4. उद्घाटित अधिमान सिद्धांत के प्रतिपादक कौन हैं?

मार्शल
कीन्स
एलन
सैमुएलसन
प्रो. सैमुएलसन का व्यक्त अधिमान दृष्टिकोण मांग के सिद्धांत के संबंध में एक युगान्तकारी घटना के रूप में स्वीकार किया जाता है, क्योंकि इसने मांग के सिद्धांत का प्रतिपादन, बिना अनधिमान वक्रों के प्रयोग तथा उपयोगिता के बिना संख्यात्मक या क्रमवाचक माप को विश्लेषण में लाए हुए प्रत्यक्ष रूप से व्यक्त अधिमान के आधार पर किया। सैमुएलसन यह प्रतिपादित करते हैं कि बाज़ार में उपभोक्ता अपने वास्तविक व्यवहार के ही माध्यम से यह व्यक्त कर देता है कि वह संस्थिति या अधिकतम संतुष्टि की स्थिति में वस्तुओं के विभिन्न संयोगों में से किस क्रय के संदर्भ में होगा।

5. तिरछी मांग से अभिप्राय एक वस्तु की मांग में परिवर्तन निम्न कारण के होने से होता है-

दूसरी वस्तु की उपयोगिता में अंतर।
दूसरी वस्तु की क़ीमत में परिवर्तन।
दूसरी वस्तु के स्वभाव में परिवर्तन।
दूसरी वस्तु के आकार में परिवर्तन
'तिरछी मांग' से अभिप्राय एक वस्तु की मांग में परिवर्तन दूसरी वस्तु की क़ीमत में परिवर्तन होने से होता है। ऐसा प्राय: स्थानापन्न और पूरक वस्तुओं के संबंध में होता है।

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