कलकत्ता विश्वविद्यालय

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परिचय

कलकत्ता विश्वविद्यालय, कोलकाता

कलकत्ता का नाम बदलकर कोलकाता हो चुका है, लेकिन 1857 में स्थापित प्रसिद्ध कलकत्ता विश्वविद्यालय का नाम अब भी पहले वाला ही बना हुआ है।

प्रसिद्ध नाम

इसके छात्र इसे सी यू ही कहते हैं।

स्थापना

ब्रिटिश राज्य में स्थापित इस विश्वविद्यालय को दूनिया के सबसे पुराने आधुनिक विश्वविद्यालयों में से एक माना जाता है। जैसे ही ट्राम विश्वविद्यालय परिसर के पास से होकर गुजरती है, वैसे ही अंग्रेज़ी राज्य के दिन एक बार फिर से ज़िंदा हो जाते हैं।

छात्र

हर साल 80,000 छात्र सी यू के 153 अंडर-ग्रेजुएट कॉलेजों में दाख़िला लेते हैं और 12,000 छात्र पोस्ट-ग्रेजुएट स्तर पर दाख़िला पाते हैं।

विषय

सी यू के कुलपति प्रोफ़ेसर सुरंजन दास कहते हैं, 'हम मानविकी, साहित्य, सामाजिक विज्ञान, फाइन आर्ट जैसे पारम्परिक विषयों और बायोटेक्नोलाजी, बायोकेमिस्ट्री, मालिक्यूलर बायोलाजी और नैनोटेक्नोलाजी जैसे उभरते क्षेत्रों के बीच संतुलन बैठाने में पूरी तरह से सक्षम हैं।

शिक्षा का उच्च स्तर

भारत में सर्वाधिक नोबेल विजेता तैयार करने का श्रेय भी सीयू को ही जाता है। इनमें रोनाल्ड रास, रवीन्द्रनाथ टैगोर, सी. वी. रामन और अमर्त्य सेन सभी इससे जुड़े रहे हैं। यहाँ के प्रथम दो ग्रेजुएट बंकिम चंद्र चटर्जी और जुद्दोनाथ बोस जैसी महान हस्तियाँ थीं, जो तमाम छात्रों के लिए अनुकरणीय आदर्श रहे हैं।

यू जी सी और अनुसंधान केन्द्र

  1. एक 'कोलकाता के इंस्टीट्यूट आफ डेवलपमेंट स्डटीज' के साथ यूजीसी से सहयोग प्राप्त 'रवीन्द्रनाथ टैगोर सेंटर फार ह्यूमन डेवलपमेंट' और
  2. दूसरा, विदेश मंत्रालय तथा भारत सरकार द्वारा प्रायोजित 'इंस्टीट्यूट आफ फ़ॉरेन पालिसी स्टडीज़'।

पोस्ट ग्रेजुएट और डिप्लोमा कोर्स

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