पाल्यकीर्ति  

पाल्यकीर्ति का अपर नाम 'शाकटायन' था। ये प्राचीन आर्य शाकटायन व्याकरण के रचयिता थे। ये अर्वाचीन जैन शाकटायन हैं। इन्होंने भी व्याकरण रचना की है।

  • ये 'यापनी सम्प्रदाय' के प्रभावी लेखक माने गये हैं।
  • इनका समय लगभग विक्रम संवत 871-924 है।
  • इनकी महत्त्वपूर्ण अन्य रचनाएं-'स्त्रीमुक्ति' तथा 'केवलभुक्ति' हैं।
  • आपने निजी शब्दानुशासन से सम्बन्धित धातुपाठ पर 'धातुवितरण' नामक प्रवचन किया है।
  • शाकटायन का धातुपाठ पाणिनि के उदीच्य पाठ से अधिक मिलता है।[1]


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भारतीय संस्कृति कोश, भाग-2 |प्रकाशक: यूनिवर्सिटी पब्लिकेशन, नई दिल्ली-110002 |संपादन: प्रोफ़ेसर देवेन्द्र मिश्र |पृष्ठ संख्या: 489 |

  1. सं.वा.को. (द्वितीय खण्ड), पृष्ठ 372

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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