भर्तु प्रपंच  

भर्तु प्रपंच वेदांत के एक भेदाभेदवादी प्राचीन व्याख्याता थे। इन्होंने कठ और बृहदारण्यक उपनिषदों पर भी भाष्य रचना की थी। भर्तुप्रपंच का सिद्धान्त ज्ञान-कर्म-समुच्चयवाद था।

  • दार्शनिक दृष्टि से इनका मत द्वैताद्वैत, भेदाभेद, अनेकान्त आदि अनेक नामों से प्रसिद्ध था। इसके अनुसार परमार्थ एक भी है और नाना भी; वह ब्रह्मा रूप एक है और जगद्रूप में नाना है। इसीलिए इस मत में एकान्तत: कर्म अथवा ज्ञान को स्वीकार न कर दोनों की सार्थकता मानी गई है।
  • भर्तुप्रपंच प्रमाण समुच्चय वादी थे। इनके मत में लौकिक प्रमाण और गम्य भेद को और वेदगम्य अभेद को सत्य रूप में माना जाता है। इसी कारण इनके मत में जैसे केवल कर्म मोक्ष का साधन नहीं हो सकता, वैसे ही केवल ज्ञान भी मोक्ष का साधन नहीं हो सकता। मोक्ष प्राप्ति के लिए ज्ञान-कर्म-समुच्च ही प्रकृष्ट साधन है।


पन्ने की प्रगति अवस्था
आधार
प्रारम्भिक
माध्यमिक
पूर्णता
शोध

कृष्णा सोबती · निर्मला जैन · मन्नू भंडारी · उषा प्रियंवदा · मृणाल पाण्डे · ममता कालिया · मृदुला गर्ग · राजी सेठ · पुष्पा भारती · चित्रा मुद्गल · नासिरा शर्मा · सूर्यबाला · मैत्रेयी पुष्पा · चंद्रकांता · सुनीता जैन · रमणिका गुप्ता · अलका सरावगी · मालती जोशी · कृष्णा अग्निहोत्री · मेहरुन्निसा परवेज · सरोजनी प्रीतम · गगन गिल · सुषम बेदी · प्रभा खेतान ·नीलम सक्सेना चंद्रा · निर्मला देशपांडे · अचला नागर · सरस्वती प्रसाद · पूर्णिमा वर्मन · रश्मि प्रभा · कमला दास · सुमित्रा कुमारी सिन्हा · स्नेहमयी चौधरी · वेदवती वैदिक


अनामिका · फ़िरदौस ख़ान · ज्योत्स्ना मिलन · प्रीति सिंह · वंदना गुप्ता · किरण मिश्रा · कीर्ति चौधरी · सीमा सिंघल 'सदा' · डेम अगाथा क्रिस्टी

टीका टिप्पणी और संदर्भ

संबंधित लेख