बास्केटबॉल  

बास्केटबॉल
Basketball

हवा भरी हुई गेंद से पांच-पांच खिलाड़ियों के दो दलों के मध्य एक आयताकार मैदान पर खेला जाने वाला खेल है। प्रत्येक टीम गेंद को विपक्षी के गोल, एक ऊँचे व क्षैतिज गोले व जाल, जिसे बास्केट कहा जाता है, के मध्य से निकालकर अंक पाने का प्रयास करती है। बास्केटबॉल सामान्यत: आजकल विश्व भर के दर्शकों में सर्वाधिक लोकप्रिय खेलों में से एक माना जाता हैं।

ओलिंपिक खेल

1936 में बास्केटबॉल के ओलिंपिक खेलों में शामिल होने के साथ ही इस खेल की ओर सारे विश्व का ध्यान आकर्षित हुआ।

फेडरेशन इंटरनेशनल द बास्केटबॉल एमेच्योर

फेडरेशन इंटरनेशनल द बास्केटबॉल एमेच्योर का गठन 1932 में अंतर्राष्ट्रीय खेल के नियमन हेतु हुआ था, जिसने पुरुषों के लिये विश्व प्रतियोगिता 1950 में व महिलाओं के लिये 1953 में आरंभ की। ओलिंपिक खेलों में संयुक्त राज्य अमेरिका के पुरुषों के दल ने अपना वर्चस्व बनाये रखा है।

ओलिंपिक खेल में महिलायें

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बास्केटबॉल की महिला ओलिंपिक प्रतियोगिता में 1976 से संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ के दल सबसे अधिक सफल रहे हैं।

भारत में बास्केटबॉल

  • भारत में इस खेल की शुरुआत 1900 के आरंभिक वर्षो में अमेरिकी धर्म प्रचारकों के माध्यम से हुई, लेकिन इसे एक प्रतिस्पर्द्धात्मक खेल के रूप में मान्यता इसे 1920 के दशक के आरम्भ में ही मिली।
  • फोरमेन क्रिश्चियन कॉलेज (लाहौर), ईविंग क्रिश्चियन कॉलेज, लखनऊ, वाई.एम.सी.ए. और शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय मद्रास (वर्तमान चेन्नई) और कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) का वाई.एम.सी.ए. इस खेल को अपने नियमित खेलों की सूची में शामिल करने वाले पहले महाविद्यालय थे।
  • 20वीं शाताब्दी के आरंभ में मद्रास, पंजाब, महाराष्ट्र, कर्नाटक और बंगाल ऐसे लोकप्रिय केन्द्र थे, जहां बास्केटबॉल ने गहरी जड़ें पकड़ ली थीं।

पुरुषों की प्रतियोगिता

पुरुषों के लिये पहली भारतीय राष्ट्रीय स्पर्द्धा दिल्ली में 1934 में हुई, जिसमे पंजाब, बंगाल व उत्तर प्रदेश ने भाग लिया था। इसका आयोजन भारतीय ओलिंपिक संगठन ने किया था, जो जनवरी 1950 तक इन प्रतियोगिताओं को नियंत्रित और आयोजित करता था।

भारतीय बास्केटबॉल फ़ेडरेशन

भारतीय बास्केटबॉल फ़ेडरेशन (बी.एफ.आई.) की स्थापना 20 अक्तूबर 1949 को हुई। इसे औपचारिक रूप से भारत में बास्केटबॉल के खेल को नियंत्रित व आयोजित करने वाले स्वतंत्र निकाय के रूप में 10 फ़रवरी 1950 को मान्यता मिली। बी.एफ.आई. के संस्थापक अध्यक्ष सी.सी. अब्राहम थे।

एशियाई खेलों में पहला अंतराष्ट्रीय अनुभव

बास्केटबॉल के नियम
Rules of Basketball
  • 1951 में, इंडिया केजर्स को नयी दिल्ली के एशियाई खेलों में पहला अंतराष्ट्रीय अनुभव मिला। यद्यपि वह हार गये, फिर भी भारतीय खिलाड़ियों ने नंगे पैर खेलते हुये फ़िलीपींस और जापान की टीमों के विरुद्ध अपने पहले अनुभव से बहुत कुछ सीखा।
  • 1953 में मैसूर के विजयराघवन के नेतृत्व में एक भारतीय टीम पाकिस्तान के छोटे से दौरे पर गई, जहां उन्होंने अधिकांश मुक़ाबले जीते ।
  • 1960 के दशक में, भारतीयों ने एशियाई प्रतियोगिता में चौथा स्थान हासिल किया और विजराघवन, खुशी राय जैसे खिलाड़ियों ने भारत की एशियाई प्रतियोगिओं में पांचवें से आठवें स्थान के बीच रहने में मदद की। पहले चार स्थान चीन, फ़िलीपींस, कोरिया व जापान के कब्जे में थे।
  • कलकत्ता में 1987 के दक्षिण एशियाई महासंघ खेलों में बास्केटबॉल को पहली बार शामिल किये जाने पर, भारत ने पुरुषों का स्वर्ण पदक जीता।
  • भारत ने 1991 के कोलंबो खेलों में स्वर्ण पर क़ब्ज़ा बरकरार रखा।
  • पुरुषों की पहली भारतीय अंतर्विश्वविद्यालय बास्केटबॉल स्पर्धा 1947-48 में आयोजित की गई। अंतिम मुक़ाबले में मैसूर विश्वविद्यालय ने लखनऊ विश्वविद्यालय को हराया।
  • महिलाओं की पहली अंतर्विश्वविद्यालय बास्केटबॉल प्रतियोगिता 1963-64 में आयोजित हुई व पंजाब विश्वविद्यालय द्वारा जीती गई।
  • लड़कों व लड़कियों, दोनों के लिये विभिन्न आयु वर्गो में भारतीय राष्ट्रीय स्पर्द्धा भी अब प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है।


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