"मुखपृष्ठ": अवतरणों में अंतर

भारत डिस्कवरी प्रस्तुति
यहाँ जाएँ:नेविगेशन, खोजें
No edit summary
No edit summary
पंक्ति 7: पंक्ति 7:
|-
|-
{{आज का दिन}}
{{आज का दिन}}
|-
{{एक व्यक्तित्व}}
|-
|-
{{विशेष आलेख}}
{{विशेष आलेख}}
पंक्ति 21: पंक्ति 19:
{{समाचार-चयनिका}}
{{समाचार-चयनिका}}
|-
|-
{{साहित्य-चयनिका}}
{{एक व्यक्तित्व}}
{{इतिहास-चयनिका}}
|- valign=top
{{भारत गणराज्य संरचना-चयनिका}}
{{पर्यटन-चयनिका}}
|-
{{समाज-चयनिका}}
{{कोश-चयनिका}}
|-
{{भूगोल-चयनिका}}
{{चरित्र और मिथक}}
|-
|-
{{मुख्य चयनित चित्र}}
{{मुख्य चयनित चित्र}}

13:59, 12 दिसम्बर 2010 का अवतरण

'भारत डिस्कवरी' विभिन्न भाषाओं में निष्पक्ष एवं संपूर्ण ज्ञानकोश उपलब्ध कराने का अलाभकारी शैक्षिक मिशन है। कृपया यह भी ध्यान दें कि यह सरकारी वेबसाइट नहीं है और हमें कहीं से कोई आर्थिक सहायता प्राप्त नहीं है।


ज्ञान का हिन्दी-महासागर

कुल पृष्ठ- 1,96,252   •   देखे गये पृष्ठ- साँचा:NUMBEROFVIEWS
कुल लेख- 63,514   •   कुल चित्र- 19,875
सदस्यों को सम्पादन सुविधा उपलब्ध है।

आज का दिन - 20 जून 2026 (भारतीय समयानुसार)


एक आलेख

        संसद भवन नई दिल्ली में स्थित सर्वाधिक भव्य भवनों में से एक है, जहाँ विश्व में किसी भी देश में मौजूद वास्तुकला के उत्कृष्ट नमूनों की उज्ज्वल छवि मिलती है। राजधानी में आने वाले भ्रमणार्थी इस भवन को देखने ज़रूर आते हैं जैसा कि संसद के दोनों सभाएं लोक सभा और राज्य सभा इसी भवन के अहाते में स्थित हैं। संसद भवन संपदा के अंतर्गत संसद भवन, स्वागत कार्यालय भवन, संसदीय ज्ञानपीठ (संसद ग्रंथालय भवन) संसदीय सौध और इसके आस-पास के विस्तृत लॉन, जहां फ़व्वारे वाले तालाब हैं, शामिल हैं। संसद भवन की अभिकल्पना दो मशहूर वास्तुकारों - सर एडविन लुटय़न्स और सर हर्बर्ट बेकर ने तैयार की थी जो नई दिल्ली की आयोजना और निर्माण के लिए उत्तरदायी थे। संसद भवन की आधारशिला 12 फ़रवरी, 1921 को महामहिम द डय़ूक ऑफ कनाट ने रखी थी । इस भवन के निर्माण में छह वर्ष लगे और इसका उद्घाटन समारोह भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड इर्विन ने 18 जनवरी, 1927 को आयोजित किया। इसके निर्माण पर 83 लाख रुपये की लागत आई। ... और पढ़ें

पिछले आलेख राष्ट्रपति रसखान की भाषा मौर्य काल


सूक्ति और कहावत
  • जीवन अविकल कर्म है, न बुझने वाली पिपासा है। जीवन हलचल है, परिवर्तन है; और हलचल तथा परिवर्तन में सुख और शान्ति का कोई स्थान नहीं। -भगवती चरण वर्मा (चित्रलेखा, पृ. 24)
  • सत्य, आस्था और लगन जीवन-सिद्धि के मूल हैं। -अमृतलाल नागर (अमृत और विष, पृ. 437) .... और पढ़ें

भारतकोश हलचल

निर्जला एकादशी(25 जून) संयुक्त राष्ट्र लोक सेवा दिवस (23 जून) अन्तरराष्ट्रीय विधवा दिवस (23 जून) महेश नवमी (23 जून) दुर्गाष्टमी (22 जून) दशाश्वमेध घाट स्नान प्रारम्भ (वाराणसी) (21 जून) अंतरराष्ट्रीय योग दिवस(21 जून) पितृ दिवस (21 जून) विश्व संगीत दिवस (21 जून) विश्व शरणार्थी दिवस (20 जून) अरण्य षष्ठी (20 जून) विश्व एथनिक दिवस (19 जून) गोवा क्रान्ति दिवस (18 जून) गणेश चतुर्थी (18 जून) सोमवती अमावस्या (15 जून) मिथुन संक्रांति (15 जून) विश्व रक्तदान दिवस (14 जून) देवपितृकार्य अमावस्या (14 जून) मासिक शिवरात्रि (13 जून) प्रदोष व्रत (12 जून) विश्व बालश्रम निषेध दिवस (12 जून) विश्व नेत्रदान दिवस (10 जून) अन्तरराष्ट्रीय अभिलेख दिवस (9 जून) विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस (8 जून) विश्व महासागर दिवस (8 जून) विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) संकष्टी चतुर्थी (4 जून) विश्व साइकिल दिवस (3 जून) अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस (1 जून) विश्व दुग्ध दिवस (1 जून) विश्व धूम्रपान निषेध दिवस (31 मई) गोवा स्थापना दिवस (30 मई) हिंदी पत्रकारिता दिवस (30 मई) एमनेस्टी इंटरनेशनल डे (28 मई) ईद उल ज़ुहा (27 मई) एकादशी (27 मई) गंगा दशहरा (25 मई)


जन्म
गणेश घोष (22 जून) अमरीश पुरी (22 जून) टॉम अल्टर (22 जून) अनीता पौलदुरई (22 जून) मुद्राराक्षस (21 जून) बी. जी. वर्गीज़ (21 जून) विष्णु प्रभाकर (21 जून) एस. पी. सिंह बघेल (21 जून) साहित्यकार भुवनेश्वर (20 जून) लक्ष्मण काशीनाथ किर्लोस्कर (20 जून) गौर किशोर घोष (20 जून) विश्वनाथ प्रसाद तिवारी (20 जून) द्रौपदी मुर्मू (20 जून)
मृत्यु
जगन्नाथदास 'रत्नाकर' (22 जून) एल. वी. प्रसाद (22 जून) केदारनाथ अग्रवाल (22 जून) भदन्त आनन्द कौसल्यायन (22 जून) केशव बलिराम हेडगेवार (21 जून) जीत सिंह नेगी (21 जून) राजिंदर गोयल (21 जून) वेंकटेश नारायण तिवारी (20 जून)


समाचार

अंडर-19 विश्वकप ट्रॉफी 2018 के साथ भारतीय क्रिकेट टीम
सुशील कुमार

एक व्यक्तित्व

        महापण्डित राहुल सांकृत्यायन को हिन्दी यात्रा साहित्य का जनक माना जाता है। वे एक प्रतिष्ठित बहुभाषाविद थे और 20वीं सदी के पूर्वार्द्ध में उन्होंने यात्रा वृतांत तथा विश्व-दर्शन के क्षेत्र में साहित्यिक योगदान किए। बौद्ध धर्म पर उनका शोध हिन्दी साहित्य में युगान्तरकारी माना जाता है, जिसके लिए उन्होंने तिब्बत से लेकर श्रीलंका तक भ्रमण किया था। बौद्ध धर्म की ओर जब झुकाव हुआ तो पाली, प्राकृत, अपभ्रंश, तिब्बती, चीनी, जापानी, एवं सिंहली भाषाओं की जानकारी लेते हुए सम्पूर्ण बौद्ध ग्रन्थों का मनन किया और सर्वश्रेष्ठ उपाधि 'त्रिपिटिका चार्य' की पदवी पायी। साम्यवाद के क्रोड़ में जब राहुल जी गये तो कार्ल मार्क्स, लेनिन तथा स्तालिन के दर्शन से पूर्ण परिचय हुआ। प्रकारान्तर से राहुल जी इतिहास, पुरातत्त्व, स्थापत्य, भाषाशास्त्र एवं राजनीति शास्त्र के अच्छे ज्ञाता थे। ... और पढ़ें

पिछले लेख पण्डित ओंकारनाथ ठाकुर जे. आर. डी. टाटा आर. के. लक्ष्मण


चयनित चित्र

हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध रिवालसर झील
हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध रिवालसर झील

रिवालसर झील, मंडी, हिमाचल प्रदेश

<script async src="//pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js"></script> <script> (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); </script>

वर्णमाला क्रमानुसार पन्ने की खोज कर सकते हैं

अं
क्ष त्र ज्ञ श्र अः