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राजिंदर गोयल  

राजिंदर गोयल

राजिंदर गोयल (अंग्रेज़ी: Rajinder Goel, जन्म- 20 सितम्बर, 1942, पंजाब; मृत्यु- 21 जून, 2020, रोहतास, हरियाणा) भारतीय क्रिकेटर थे। क्रिकेट में उन्होंने एक गेंदबाज़ के रूप में अपनी ख़ास पहचान बनाई थी। राजिंदर गोयल ने हरियाणा और उत्तर क्षेत्र की तरफ से खेलते हुए 157 मैचों में 750 विकेट लिये। वह 1958-1959 से 1984-1985 तक क्रिकेट खेलते रहे, लेकिन उन्हें कभी भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका नहीं मिला, क्योंकि तब भारत के पास बिशन सिंह बेदी के रूप में बाएं हाथ के स्पिनर थे। अपने कॅरियर में उन्होंने 59 बार एक पारी में 5 विकेट और 18 बार 10 विकेट लेने का कारनामा किया। राजिंदर गोयल प्रथम श्रेणी क्रिकेट में आज भी सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज़ हैं।

परिचय

राजिंदर गोयल का जन्म 20 सितंबर, 1942 को पंजाब में हुआ था। उनके पिता भारतीय रेलवे में सहायक स्टेशन मास्टर के पद पर नियुक्त थे। राजिंदर गोयल के पुत्र नितिन गोयल हैं जो स्वयं प्रथम श्रेणी क्रिकेटर रहे हैं और घरेलू मैचों के मैच रेफरी हैं। राजिंदर गोयल बाएं हाथ के सर्वश्रेष्ठ स्पिनरों में से एक थे। संन्यास लेने के बाद भी उन्होंने इस खेल में बहुमूल्य योगदान दिया। उल्लेखनीय है कि घरेलू क्रिकेट में बाएं हाथ के इस स्पिनर का करियर काफी लंबा रहा। यह 'नेहरू युग' में शुरू हुआ और राजीव गांधी के समय तक चला।

कीर्तिमान

राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं मिलने के बावजूद राजिंदर गोयल 1958-59 से 1984-85 तक घरेलू क्रिकेट में खेलते रहे। इन 26 सत्र में उन्होंने हरियाणा की तरफ से रणजी ट्रॉफी में 637 विकेट लिए जो राष्ट्रीय चैंपियनशिप में रेकॉर्ड है। उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में कुल 157 मैच खेलकर 750 विकेट लिए। वह बिशन सिंह बेदी थे, जिन्होंने उन्हें बीसीसीआई पुरस्कार समारोह में सी. के. नायडु जीवनपर्यंत उपलब्धि सम्मान सौंपा।

इस कारण थे ख़ास

राजिंदर गोयल में लंबे स्पैल करने की अद्भुत क्षमता थी। जिस पिच से थोड़ी भी मदद मिल रही हो, उस पर उन्हें खेलना नामुमकिन होता था। वह इतने लंबे समय तक खेलते रहे इसका अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि वह विजय मांजरेकर के खिलाफ भी खेले और उनके बेटे संजय के खिलाफ भी। उन्हें 1974-1975 में वेस्टइंडीज के खिलाफ बेंगलुरु में टेस्ट मैच के लिए टीम में चुना गया था। वह 44 साल की उम्र तक प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलते रहे।

गावस्कर की किताब में जगह

सुनील गावस्कर ने अपनी किताब ‘आइडल्स’ में जिन खिलाड़ियों को जगह दी थी, उसमें राजिंदर गोयल भी शामिल थे। गावस्कर ने अपनी किताब में लिखा है कि- "गोयल अपने लिए नए जूते और किट लेकर आए, लेकिन उन्हें 12वां खिलाड़ी चुना गया। अगले टेस्ट मैच में बेदी की वापसी हो गई, लेकिन गोयल को फिर कभी देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका नहीं मिला।'

कपिल देव निश्चित तौर पर हरियाणा के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर रहे हैं, लेकिन उनसे पहले राजिंदर गोयल थे जिन्होंने इस राज्य की गेंदबाजी की कमान बखूबी संभाल रखी थी। कपिल देव की अगुवाई वाली हरियाणा ने जब 1991 में मुंबई को हराकर रणजी ट्रॉफी जीती थी, तब गोयल उसकी चयन समिति के अध्यक्ष थे। एक बार गोयल से पूछा गया कि क्या उन्हें इस बात का दु:ख है कि बेदी युग में होने के कारण उन्हें भारत की तरफ से खेलने का मौका नहीं मिला। उन्होंने कहा, ‘जी बिलकुल नहीं। बिशन बेदी बहुत बड़े गेंदबाज थे।’

गेंदबाज़ी विशेषता

राजिंदर गोयल की गेंदबाज़ी की एक विशेषता ये भी थी कि वह बल्लेबाज़ को ड्राइव के लिए कदमों का इस्तेमाल करने का मौका नहीं देते थे। उनकी कोशिश बल्लेबाज़ को बैकफुट पर खिलाने की रहती थी। गति परवर्तन उनकी गेंदबाज़ी की एक अन्य खासियत थी। कई बार तो स्पिन को बहुत अच्छा खेलने वाले बल्लेबाज़ भी उनके सामने फंस जाते थे। ऐसे ही स्पिन को अच्छा खेलने वाले विजय मांजरेकर भी उनके सामने बेहद सावधानी से खेलते थे और वो उन्हें भी इनसाइड एज पर नजदीकी फील्डर के हाथों लपकवा लेते थे। बाएं हाथ के एक अन्य लेफ्ट आर्म स्पिनर पदमाकर शिवाल्कर तो उन्हें अपने से ज़्यादा बड़ा स्पिनर मानते थे। दिलीप वेंगसरकर को उनके टाइम्स शील्ड में खेलने का इंतज़ार रहता था। एक स्तरीय स्पिनर को खेलकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय मैचों की तैयारी का अवसर रहता था। बिशन सिंह बेदी ने इस बात को स्वीकार किया है कि जब उन्हें टेस्ट में पहली बार मौका मिला था, तब राजिंदर गोयल उनसे बेहतर गेंदबाज़ थे।

मृत्यु

राजिंदर गोयल का निधन 21 जून, 2020 को रोहतास, हरियाणा में हुआ।

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