सुमात्रा  

सुमात्रा इंडोनेशिया गणतंत्र के पाँच बड़े द्वीपों में से एक है तथा मलाया द्वीप समूह का सुदूर पश्चिमी द्वीप है। इसे उत्तर पूर्व में मलैका जलसंधि मलाया से तथा दक्षिण पूर्व में सुंडा जलसंधि जावा से पृथक् करती है। द्वीप का पश्चिमी किनारा हिंद महासागर की ओर है। यह संसार के बड़े द्वीपों में छठा है। इस द्वीप का क्षेत्रफल 4,13,440 वर्ग किमी तथा जनसंख्या 1,57,39,000 (1962) है।

ऐतिहासिक उल्लेख

महाभारत सभापर्व 18 दाक्षिणात्य पाठ के अनुसार एक द्वीप जिसे शक्तिशाली सहस्रबाहु ने जीता था।

'इंद्रद्वीपं कशेरुं च ताम्रद्वीपं गभस्तिमत, गांधर्व वारुणं द्वीपं सौम्याक्षमिति च प्रभु:'।

इसमें संभवत: ताम्रद्वीप लंका और वरुण बोर्नियो है। सौम्याक्ष इंडोनिजिया का कोई द्वीप (सुमात्रा) हो सकता है। इंद्रद्वीप संभवत: सुमात्रा का वह भाग था जिसकी राजधानी इंद्रपुरी थी।[1]

भौगोलिक विशेषताएँ

द्वीप की अधिकतम लंबाई 1696 किमी तथा अधिकतम चौड़ाई 396 किमी है। इस द्वीप में दक्षिण पश्चिम की ओर समांतर पर्वतमालाओं की श्रेणी है। सामूहिक रूप से इन पर्वतमालाओं का नाम बारिसान है और इनमें 12 सक्रिय तथा 78 निष्क्रिय ज्वालामुखी हैं। सर्वोच्च चोटी केरिंची है जिसकी ऊँचाई 3,782 मी. है। पूर्वी तट दलदली निम्नभूमि है जिसमें से होकर कांपार, इंद्रागिरि तथा मिशि नदियाँ बहती हैं और यह भूभाग घने जंगलों से आच्छादित है। इन जंगलों से टीक की लकड़ी, बाँस, रबर और मूल्यवान गोंद प्राप्त होता है। इन जंगलों में रबर के वृक्ष लगाए गए हैं जिसके कारण यह द्वीप विश्व के प्रमुख रबर उत्पादकों में से एक हो गया है। दक्षिणी पूर्वी और उत्तरी पूर्वी छोरों को छोड़कर शेष द्वीप की मृदा कृषि के लिए उपयुक्त है।[2]

कृषि एवं जलवायु

सुमात्रा की जलवायु उष्ण एवं आर्द्र है। अधिकांश वर्षा उन क्षेत्रों में होती है। जहाँ नियमित मानसून बारिसान पर्वतों द्वारा रोक लिए जाते हैं। टोबा झील के क्षेत्र में 152 सेंमी. से कम वर्षा होती है। लबंग क्षेत्र में 508 सेमी से अधिक वर्षा होती है। निम्न भूमि के मैदानों में ताप 21° सेंटीग्रेड 31° सेंटीग्रेड तक रहता है। धान यहाँ की प्रमुख फसल है। कॉफी, कालीमिर्च, तंबाकू, चाय, कपास, खजूर, अमरीकी धीकुँवार, सुपारी, मूँगफली, सिनकोना, नारियल और रबर आदि की खेती निर्यात के लिए की जाती है। [2]

जीव जंतु

इस द्वीप के उष्ण कटिबंधी जंगलों में बाघ, हाथी, जंगली सुअर, दो सींगवाले राइनोसिरस, हरिण, कपि एवं बंदर मिलते हैं। इस द्वीप पर सर्वत्र चमकीले पक्षति वाले पक्षी मिलते हैं। यहाँ अनेक प्रकार के विषैले साँप जिनमें नाग एवं पिट वाइपर भी हैं तथा भीमाकार अजगर पाए जाते हैं।

उद्योग एवं व्यापार

इस द्वीप में सीसा, रजत, गंधक एवं कोयले के निक्षेप हैं। पूर्वी तट का दलदली निम्न भूमि क्षेत्र पेट्रोलियम में धनी है। पालमबंग क्षेत्र में कोयला एवं लिग्नाइट मिलते हैं। पेट्रोलियम पूर्वी मैदान में अचीन से पलेमबांग तक के क्षेत्र में मिलता है। बेनकूलेन के समीप सोने एवं रजत का खनन होता है। मछली मारना यहाँ का प्रमुख व्यवसाय है। द्वीप का पूर्वी भाग इस कार्य के लिए विशेष उपयोगी है। यहाँ अधिकांश उद्योग कृषि से संबंधित है। पादांग के समीप सीमेंट का बहुत बड़ा कारखाना है।[2]

परिवहन और यातायात

द्वीप के एक सिरे से दूसरे सिरे तक जाने के लिए सड़कें हैं। यहाँ लगभग 1,227 मील लंबा रेलमार्ग भी है। मेडान और पलेमबांग नगरों में हवाई अड्डे हैं। ब्लावान, पलेमबांग एमाहैवन, सूसू तथा सबांग प्रमुख बंदरगाह हैं। पलेमबांग सुमात्रा का प्रमुख नगर है।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. पुस्तक- ऐतिहासिक स्थानावली | लेखक- विजयेंद्र कुमार माथुर | प्रकाशक- वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग (मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार | पृष्ठ संख्या- 997
  2. 2.0 2.1 2.2 सुमात्रा (हिंदी) भारतखोज। अभिगमन तिथि: 24 मई, 2014।

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