ज्यूस  

ज्यूस को ग्रीक पुराणों में प्रधान देवता बताया गया है। वह क्रोनस और रिया का पुत्र था। ज्यूस को देवताओं में सबसे महान् विधि-विज्ञान और अनुशासन का स्थापक, अपराधों का दंड निर्णायक, शुभ कार्यों के लिय शुभ-फल-दाता, सर्वशक्तिमान, बुद्धि संपन्न और विश्व का उदार शासक माना जाता है। कालांतर में उसे एक स्थानीय देवता माना जाने लगा और इसी नाम से अनेक देवताओं की कहानियाँ प्रचलित हो गईं।

जन्म

कहा जाता है कि क्रोनस अपने बच्चों को जन्म के बाद तुरंत खा जाता था। जब ज्यूस उत्पन्न होने वाला था, रिया ने यूरेनस और जिया से सम्मति ली कि उत्पन्न होने वाला शिशु कैसे बचाया जाय। उन्होंने रिया को क्रीटी[1] भेज दिया। रिया ने ज्यूस को 'माउंट इडा' में छिपा दिया और एक पत्थर का टुकड़ा कपड़े में लपेट कर क्रोनस को खाने के लिये दे दिया। इडा और अडरास्टी नामक वनदेवियों ने शिशु ज्यूस की रक्षा की। 'अमाल्थी' नाम की बकरी उसे दूध पिलाती थी और मधुमक्खियाँ उसके लिये शहद एकत्र करती थीं।[2]

भाइयों की मुक्ति

जब ज्यूस बड़ा हुआ, तब उसने रिया और मेटिस की सहायता से अपने पिता को बाध्य किया कि वह सारे खाए हुए बच्चों को बाहर निकाले। इस प्रकार उसने अपने पिता को सिंहासनच्युत करने के लिय अपने भाइयों का एक संगठन बनाया। फलत: युद्ध हुआ, ज्यूस ने यूरेन्स और रिया के पुत्रों को, क्रोनस ने बंदी कर लिया था, कारागार से निकाल दिया, इस पर उन्होंने प्रसन्न होकर उसे मेघों की गरज और विद्युत की चमक प्रदान की। इसके अतिरिक्त उसने ब्रिअरोस, कोटस और गाइस को जिनके सौ-सौ हाथ थे, मुक्त किया। उन्होंने भी इसे कई वरदान दिए।

विश्व का स्वामी

रिया के दूसरा पुत्र उत्पन्न हुआ, जिसका नाम टाइफोअरस था, जिसने ज्यूस से भंयकर युद्ध किया। किंतु वे वज्र द्वारा परास्त हो गया। ज्यूस अब सारे संसार का स्वामी हो गया। उसमें से उसने अपने भाइयों 'नेपच्यून' (पोसीइद) और 'प्लूटो' (हाडीस) को भी कुछ भाग बाँट दिए। जूस ने अपने लिये स्वर्ग और संसार का ऊपरी भाग राज्य करने के लिये लिया, धरती पर सबका सामूहिक स्वत्व था। दूसरा भंयकर युद्ध देवताओं को उन दैत्यों से करना पड़ा, जो यूरेनस के रक्त से उत्पन्न हुए थे, किंतु इस युद्ध में देवताओं को एंथीन, अपोलों, हेराक्लीज तथा ज्यूस के अन्य बेटों ने सहायता दी और दैत्य पूर्णतया पराजित हुए।

विवाह

ज्यूस की तीन बहनें और तीन भाई थे। उसने पहले 'मेटिस' से विवाह किया, किंतु इस बात की भविष्यवाणी पहले ही हो चुकी थी कि मेटिस का पुत्र विश्वसम्रा होगा। इसलिये ज्यूस ने गर्भवती मेटिस को खा लिया, एथीन उसके सिर से उत्पन्न हुआ। इसके बाद उसने यूरेनस और रिया की पुत्री थीमिस से कुछ समय के लिये विवाह किया, किंतु उसने अंत में अपनी बहन हेरा से संबंध स्थापित किया, जिससे हीबी, आरिस और हैफास्टस नामक संताने उत्पन्न हुईं।[2]

महान देवता

ज्यूस देवताओं में सबसे महान् विधि-विज्ञान और अनुशासन का स्थापक, अपराधों का दंड निर्णायक, शुभ कार्यों के लिय शुभ-फल-दाता, दैवी शक्तियों का स्रोत, सभी सुंदर वस्तुओं का निर्माता, सर्वशक्तिमान, बुद्धि संपन्न और विश्व का उदार शासक माना जाता है। कालांतर में ज्यूस एक स्थानीय देवता माना जाने लगा और इसी नाम से अनेक देवताओं की कहानियाँ प्रचलित हो गईं। आर्केडियन और क्रीटन ज्यूस विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं।

पूजा

किंवदंतियों के अनुसार ज्यूस गारटिन के द्वीप में भी रहा, जहाँ हेकाटोंबियस उपनाम से उसकी पूजा होती थी। इस राष्ट्रीय देवता की पूजा, साँड़ों, गायों और बकरियों के बलिदानों द्वारा की जाती थी। ग्रीक में एथेंस और ओलंपिया, ये दोनों उसकी पूजा के विशिष्ट स्थान माने जाते हैं। उसी के सम्मान में ओलंपिया में यूनानी लोगों द्वारा खेलों का आयोजन होता था। यहीं पर एक बहुत सुंदर मंदिर था, जिसमें ज्यूस देवता की स्वर्ण और हाथी के दाँत की मूर्ति है, जिसे 'फिदियस' ने बनाया था और जो संसार के सात आश्चर्यों में एक है।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. कहीं कहीं ट्रोजन, इडा तथा अन्य स्थान भी दिए हुए हैं।
  2. 2.0 2.1 ज्यूस (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 2 जून, 2014।

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