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अरुण गोविल  

अरुण गोविल
अरुण गोविल
पूरा नाम अरुण गोविल
जन्म 12 जनवरी, 1958
जन्म भूमि मेरठ, उत्तर प्रदेश
अभिभावक पिता- चंद्र प्रकाश गोविल
पति/पत्नी श्रीलेखा गोविल
संतान पुत्र- अमल गोविल, पुत्री- सोनिका गोविल
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र अभिनय
मुख्य फ़िल्में 'सावन को आने दो', 'सांच को आंच नहीं', 'इतनी सी बात', 'हिम्मतवाला', 'दिलवाला', 'हथकड़ी' और 'लव कुश' आदि।
प्रसिद्धि 'रामायण' सीरियल में राम की भूमिका के रूप में।
नागरिकता भारतीय
संबंधित लेख रामायण, दीपिका चिखालिया, सुनील लहरी, दारा सिंह, रामानन्द सागर
अन्य जानकारी राम का किरदार निभाने के बाद अरुण गोविल ने रामानन्द सागर के एक और मशहूर सीरियल ‘विक्रम और बेताल’ में राजा विक्रमादित्य का किरदार निभाया।
अद्यतन‎
अरुण गोविल (अंग्रेज़ी: Arun Govil, जन्म- 12 जनवरी, 1958, मेरठ, उत्तर प्रदेश) भारतीय सिनेमा में हिंदी फ़िल्म और टीवी अभिनेता हैं। अपने समय के ख्यातिप्राप्त धारावाहिक 'रामायण' में श्रीराम की भूमिका निभाने के बाद वे भारत के हर एक घर में अपनी पहचान बना चुके हैं। सीरियल 'रामायण' को रामानन्द सागर ने निर्देशित किया था। जब भी श्रीराम का ज़िक्र होता है तो जो छवि सामने आती है, उसमें अरुण गोविल का ही चेहरा नज़र आ जाता है। मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम के किरदार को अरुण गोविल ने छोटे पर पर कुछ इस तरह निभाया कि घर-घर में लोग उन्हें राम की तरह पूजने लगे। बिज़नेस करने से पहले ही उन्हें अभिनय करने का प्रस्ताव 1977 में ताराचंद बडजात्या की फिल्म 'पहेली' में मिला। इसके बाद अरुण गोविल ने 'सावन को आने दो', 'सांच को आंच नहीं', 'इतनी सी बात', 'हिम्मतवाला', 'दिलवाला', 'हथकड़ी' और 'लव कुश' जैसी कई फिल्मों में काम किया। 'रामायण' सीरियल करने से पहले अरुण गोविल ख़ुद को एक अच्छे अभिनेता के रूप में साबित कर चुके थे। 'रामायण' के बाद लोगों ने उन्हें 'विक्रम और बेताल' धारावाहिक में राजा विक्रमादित्य के रोल में ख़ूब पसंद किया था।

परिचय

अरुण गोविल का जन्म 12 जनवरी, 1958 को उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में हुआ था। उनके पिता का नाम चंद्र प्रकाश गोविल था। भाई का नाम विजय गोविल है, जिन्होंने बाद में अभिनेत्री तबस्सुम से विवाह किया। जब ये पांचवी कक्षा में थे, तभी से नाटकीय कार्यक्रमों में भाग लिया करते थे। रामलीला में राम का किरदार भी निभाते थे। अरुण गोविल के पिता भी हर पिता की भांति यही चाहते थे कि उनका बेटा भी सरकारी नौकरी करे। अरुण गोविल ने श्रीलेखा से विवाह किया, जिनसे उनके एक बेटा- अमल गोविल और एक बेटी- सोनिका गोविल है। अरुण के भाई विजय गोविल का मुंबई में बिज़नेस था। इसलिए अरुण 1974 में मुंबई चले आये। वैसे तो वह मुंबई बिजनेस करने आए थे, लेकिन उनका मन उस कार्य में बिलकुल नहीं लगता था। उन पर अभिनय का जुनून सवार हो गया और उन्होंने एक्टिंग का दामन थाम लिया। हालांकि, अभिनय में कॅरियर बनाने के बारे में उन्होंने कभी नहीं सोचा था। उनको लगने लगा की अभिनय के छेत्र में मैं अपना अलग मुकाम बना सकता हूँ।[1]

फ़िल्मी शुरुआत

फ़िल्मी कॅरियर की शुरुआत के लिए अरुण गोविल फिल्म निर्माताओं के पास भटकने लगे। भटकते-भटकते तीन साल बीत गए। 1977 मैं इन्हें पहली बार मौका मिला राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म 'पहेली' में। इस फिल्म में इनके अभिनय से प्रभावित होकर ताराचन्द बड़जात्या ने उन्हें तीन और फिल्मो के लिए साइन कर लिया। फिर 1979 में आयी फिल्म 'सावन को आने दो'। यह फ़िल्म बेहद सफल रही और अपने समय की हिट साबित हुई। इस फ़िल्म के गीतों ने सुनने वालों के दिल में अपनी ख़ास जगह बना ली। फ़िल्म 'सावन को आने दो' के गीत आज भी सुने जाते हैं। इनके फ़िल्मी कॅरियर का सितारा चमक गया था। 80 के दशक के अंत तक लगातार कई फिल्मों, जैसे- 'इतनी सी बात', 'जुदाई', 'हथकड़ी', 'दिलवाला', 'श्रद्धांजलि', 'हिम्मतवाला', 'शत्रु', 'आसमान', 'अय्याश' आदि ने इन्हें प्रसिद्धि दिला दी थी।

'राम' की भूमिका

राम की भूमिका में अरुण गोविल

अरुण गोविल पहले ही कुछ शोज और फिल्मों में रामानन्द सागर के कैंप में काम कर चुके थे। जब उन्हें खबर मिली कि सागर साहब रामायण बनाने जा रहे हैं तो उन्हें खुद ही ऐसा लगा कि उन्हें राम बनना चाहिए। अरुण गोविल ने बताया कि- "मैं उनके पास चला गया। मैंने कहा- मैं राम का किरदार करना चाहता हूं। उन्होंने चश्मा ठीक करते हुए मुझे देखा और कहा- ठीक है जब टाइम आएगा, तब देखेंगे। टाइम आया और उन्होंने मेरा ऑडीशन लिया और आउटराइट रिजेक्ट कर दिया।[2] एक रोज मुझे सागर साहब का फोन आया। उन्होंने कहा क्या कर रहे हो? मैंने कहा कुछ नहीं तो उन्होंने मुझे कहा कि जरा मिलने आ जाओ। मैं उनसे मिलने उनके घर गया तो उन्होंने कहा कि हमारी सिलेक्शन कमेटी ने ये तय किया है कि तेरे जैसा राम नहीं मिल रहा है।" अरुण गोविल का कहना था कि- "शायद हर मोड़ पर इंसान की मर्जी नहीं चलती, उसकी जब चलती है ना तो किसी की नहीं चलती।"

रामानन्द सागर चाहते थे कि जो व्यक्ति राम का किरदार निभाए, उसमें किसी भी प्रकार का दुर्गुण न हो। अरुण गोविल को सिगरेट की लत थी, जिसके चलते उन्हें काम देने से मना कर दिया था। अब रामानन्द सागर ने उनके सामने शर्त रखी कि जिंदगी भर सिगरेट को हाथ नहीं लगाओगे और जब तक तुम रामायण सीरियल में काम करोगे, तब तक तुम्हें अपनी छवि राम की तरह ही बनाकर रखनी पड़ेगी; और इस तरह इन्हें मिला राम का किरदार। इस किरदार ने अरुण गोविल को हमेशा हमेशा के लिए अमर कर दिया।

प्रसिद्धि

राम और सीता के रूप में अरुण गोविल व दीपिका चिखालिया

राम का किरदार निभा कर अरुण गोविल ने दर्शकों के मन मस्तिष्क पर कुछ ऐसी छाप छोड़ी कि दर्शक इनकी तस्वीर की पूजा करने लगे। जब भी ये घर से बाहर निकलते तो लोग इनके पैरों में गिर जाते। समस्याएं सुनाने लगते। एक किस्सा ये भी है कि दिल्ली में एक सख्श ने पार्टी रखी थी, जिसमे अरुण गोविल भी आमंत्रित थे। अरुण गोविल अपने साथी कलाकारों के साथ डिनर कर रहे थे। तभी पार्टी के आयोजक अपनी माँ को वहां लेकर आ गए और बताया कि माँ यही वो राम हैं, जिन्हें आप पूजती हैं। वह महिला 80 के आसपास की उम्र की थी। महिला अरुण गोविल को देखते ही उनके पैरों पर लेट गयी। अरुण गोविल ये सब देखकर अचंभित हो गए और उन महिला को उठने के लिए कहा।

एक बार रामायण धारावाहिक प्रसारण के दौरान अरुण गोविल उत्तर प्रदेश के किसी गाँव से गुजर रहे थे। उन्होंने अपनी कार रोककर सड़क किनारे एक घर में गए, जहाँ एक सख्श अकेला बैठे टीवी पर रामायण देख रहा था। वे वहीं बैठकर रामायण देखने लगे। उस व्यक्ति को किसी के आने का आभास हुआ। उसने पीछे मुड़कर देखा और पुनः रामायण देखने लगा, लेकिन अचानक से उसे कुछ शक हुआ और दोबारा देखा और अरुण गोविल का चेहरा राम से मिलाने लगा। जैसे ही उसने पहचाना वो तुरंत गावं में भागा और चिल्लाने लगा मेरे घर भगवान् राम आये हैं।

एक किस्सा अरुण गोविल के साथ भी 2014 में हुआ। वह किसी की सगाई कार्यक्रम में मेरठ के पास एक गाँव में गये और एक घर में रुके। जिस घर में रुके, वहां दीवार पर अरुण गोविल की राम रूप में हाथ की बनी अद्भुत पेंटिंग लगी हुई थी। जिस पर रोज पुष्प भी चढ़ाये जाते थे। इससे पता चलता है कि आज भी अरुण गोविल के उस राम रूप की पूजा होती है।

अभिनय से दूरी

लगातार तीन साल रामायण सीरियल को पूरा करने के बाद जब अरुण गोविल ने फ़िल्मी दुनिया में वापसी की तो दर्शकों ने इन्हें अन्य किसी रूप में स्वीकार नहीं किया। इसके बाद इन्हें लगातार धार्मिक सीरियल और फिल्मों में काम के ऑफर आने लगे, लेकिन अरुण गोविल अपनी इस छवि से बाहर निकलना चाहते थे। इसलिए कई फिल्मों में बोल्ड और नेगेटिव किरदार भी निभाए, लेकिन अपनी राम वाली छवि को दर्शकों के मस्तिक से नहीं हटा पाए।[1]

'विक्रम और बेताल' में अरुण गोविल

राम का किरदार निभाने के बाद अरुण गोविल ने रामानन्द सागर के एक और मशहूर सीरियल ‘विक्रम और बेताल’ में राजा विक्रमादित्य का किरदार निभाया। हालांकि यह कहा जाता है कि इसकी तैयारी रामायण सीरियल से पहले की जा चुकी थी। राम का किरदरा निभाने के बाद अरुण ने ‘लव कुश’, ‘कैसे कहूं’, ‘बुद्धा’, ‘अपराजिता’, ‘वो हुए न हमारे’ और ‘प्यार की कश्ती में’ जैसे कई पॉपुलर टीवी सीरियल में काम किया। जिसे हर घर में पहचाना जाने लगा हो, उसे काम मिलना बेहद मुश्किल हो रहा था। अरुण गोविल को लोग राम के रूप में ही देख रहे थे, इसलिए उन्हें कोई और किरदार नहीं मिल रहे थे। जिस वजह से उनका एक्टिंग कॅरियर खत्म हो गया। उसके बाद वह करीब 9 से 10 सालों तक टीवी की दुनिया से दूर रहे।

अरुण गोविल एक चमकते सितारे थे, लेकिन उनके पास काम नहीं था, जिस वजह से उन्होंने प्रोडक्शन का काम संभाला। अपने को- स्टार सुनील लाहिड़ी यानि रामायण के लक्ष्मण के साथ मिलकर उन्होंने अपनी एक टीवी कंपनी बनाई, जिसके तहत वह कार्यक्रमों के निर्माण से जुड़े रहे और इसमें उन्होंने मुख्य रूप से दूरदर्शन के लिए कार्यक्रम बनाए। अरुण गोविल ने राम की छवि से बाहर निकलने की भी काफी कोशिश की, फिल्मों में बोल्ड सीन्स किए, कुछ धारावाहिकों में नेगेटिव किरदार निभाया, लेकिन अफसोस वह राम की छवि से कभी बाहर नहीं निकल पाए। भले ही ‘रामायण’ को लगभग तीन दशक हो गए हों, पर अरुण गोविल जहाँ कहीं जाते हैं, वह आज भी राम के रूप में पूजे जाते हैं। राम को मानने वाले उनमें ही राम को देखते हैं।

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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 रामायण धारावाहिक के राम अरुण गोविल की जीवनी (हिंदी) biographies.lekhakkilekhni.in। अभिगमन तिथि: 28 मार्च, 2020।
  2. रामायण: राम के रोल के लिए पहले रिजेक्ट हो गए थे अरुण गोविल (हिंदी) aajtak.intoday.in। अभिगमन तिथि: 28 मार्च, 2020।

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