इतिहास सामान्य ज्ञान 211  

सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी
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1. बुद्ध के वर्षाकालीन निवास के लिए 'बेलुवन' एवं 'जेतवन' का निर्माण क्रमश: किन लोगों ने करवाया था?

बिम्बिसार एवं अशोक ने
अजातशत्रु एवं बिम्बिसार ने
बिम्बिसार एवं जेत कुमार ने
अशोक एवं जेत कुमार ने
बुद्ध प्रतिमा, राष्ट्रीय संग्रहालय, दिल्ली
मगध के राजा बिम्बिसार की राजधानी राजगीर थी। बिम्बिसार गौतम बुद्ध का सबसे बड़े प्रश्रयदाता था। वह 15 वर्ष की आयु में राजा बना और अपने पुत्र 'अजातसत्तु' (संस्कृत- अजातशत्रु) के लिए राज-पाट त्यागने से पूर्व 52 वर्ष उसने राज्य किया। बुद्ध और उनके अनुयायी राजकीय अतिथियों की भाँति राजगीर आए थे। बुद्ध और उनके अनुयायियों के लिए 'बेलुवन उद्यान' दान में देने के अपने प्रण की पूर्ति दर्शाने के लिए बिम्बिसार ने बुद्ध के हाथ स्वर्ण-कलश के जल से धुलवाए। आगामी तीस वर्षों तक बिम्बिसार बौद्ध धर्म के विकास में बहुत सहायक हुआ।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-बिम्बिसार

2. सर्वप्रथम किस उपनिषद में देवकी पुत्र एवं अंगिरा के शिष्य के रूप में कृष्ण का उल्लेख मिलता है?

बृहदारण्यकोपनिषद
कठोपनिषद
छांदोग्य उपनिषद
तैत्तिरीयोपनिषद
सामवेद की तलवकार शाखा में छांदोग्य उपनिषद को मान्यता प्राप्त है। इसमें दस अध्याय हैं। इसके अन्तिम आठ अध्याय ही इस उपनिषद में लिये गये हैं। यह उपनिषद पर्याप्त बड़ा है। अंगिरस ऋषि ने देवकी के पुत्र श्रीकृष्ण को तत्त्वदर्शन का उपदेश दिया था, उससे वे सभी तरह की पिपासाओं से मुक्त हो गये थे। साधक को मृत्युकाल में तीन मन्त्रों का स्मरण करना चाहिए।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-छांदोग्य उपनिषद

3. चन्द्रगुप्त द्वितीय ने कब ‘विक्रमादित्य’ की उपाधि धारण की थी?

शकों का उन्मूलन करने के बाद।
गुप्त सिंहासन पर बैठने के बाद।
चाँदी के सिक्के जारी करने के बाद।
इनमें से कोई नहीं
चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य की मुद्राएँ
चन्द्रगुप्त द्वितीय अथवा चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य (शासन: 380-412 ईसवी) गुप्त राजवंश का सबसे प्रतापी राजा था। समुद्रगुप्त का पुत्र चन्द्रगुप्त द्वितीय समस्त गुप्त राजाओं में सर्वाधिक शौर्य एवं वीरोचित गुणों से सम्पन्न था। शकों पर विजय प्राप्त करने के उपरांत उसने 'विक्रमादित्य' की उपाधि धारण की थी। इसे 'शकारि' कहकर भी पुकारा गया है। मालवा, काठियावाड़, गुजरात और उज्जयिनी को अपने साम्राज्य में मिलाकर उसने अपने पिता के राज्य का और भी विस्तार किया।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-चन्द्रगुप्त द्वितीय

4. बौद्ध धर्म ग्रहण करने वाली महिला कौन थी?

महामाया
यशोधरा
बिम्बा
गौतमी

5. बुद्ध के 'अष्टांगिक मार्ग' के बारे में प्रथम जानकारी कहाँ से मिलती है?

छांदोग्य उपनिषद
तैत्तिरीयोपनिषद
केनन उपनिषद
कठोपनिषद
सामवेद की 'तलवकार' शाखा में छांदोग्य उपनिषद को मान्यता प्राप्त है। इसमें दस अध्याय हैं। इसके अन्तिम आठ अध्याय ही इस उपनिषद में लिये गये हैं। यह उपनिषद पर्याप्त बड़ा है। नाम के अनुसार इस उपनिषद का आधार 'छन्द' है, इसका यहाँ व्यापक अर्थ के रूप में प्रयोग किया गया है। इसे यहाँ 'आच्छादित करने वाला' माना गया है। साहित्यिक कवि की भांति ऋषि भी मूल सत्य को विविध माध्यमों से अभिव्यक्त करता है। वह प्रकृति के मध्य उस परमसत्ता के दर्शन करता है।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-छांदोग्य उपनिषद

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