इतिहास सामान्य ज्ञान 251  

सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी
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1. मराठों से पूर्व गुरिल्ला (छापामार) युद्ध पद्धति का प्रयोग किसने किया?

महावत ख़ाँ
राणा प्रताप
मलिक अम्बर
इनमें से कोई नहीं
'मलिक अम्बर' एक हब्शी ग़ुलाम था, जो अपनी योग्यता के बल पर तरक़्क़ी करके वज़ीर के पद तक पहुँचा था। मलिक अम्बर ने काफ़ी बड़ी मराठा सेना इकट्ठी की थी। मराठे तेज़ गति वाले थे और दुश्मन की रसद काटने में काफ़ी होशियार थे। मलिक अम्बर ने मराठों को गुरिल्ला युद्ध में भी निपुणता प्रदान कर दी थी। यह गुरिल्ला युद्ध प्रणाली दक्कन के मराठों के लिए परम्परागत थी और अम्बर के सहयोग से वे इसमें और भी निपुण हो गए थे। किंतु मुग़ल इस युद्ध कौशल से अपरिचित ही थे।ध्यान दें अधिक जानकारी के लिए देखें:-मलिक अम्बर

2. फ़र्रुख़सियर किसके सहयोग से मुग़ल बादशाह बना था?

ज़ुल्फ़िक़ार ख़ाँ
सैय्यद बन्धु
मुहम्मद अमीर ख़ाँ
मीर जुमला
भारतीय इतिहास में हुसैन अली और उसका भाई अब्दुल्ला, सैयद बन्धुओं के नाम से प्रसिद्ध हैं। सैयद बन्धु भारतीय इतिहास में 'राजा बनाने वाले' के नाम से प्रसिद्ध थे। वे अवध के एक उच्च परिवार में उत्पन्न हुए और सम्राट बहादुरशाह प्रथम के राज्यकाल के अन्तिम वर्षों में उच्च पदाधिकारी हो गए थे। ये लोग 'हिन्दुस्तानी दल' के नेता थे। इन्होंने चार मुग़ल बादशाहों- फ़र्रुख़सियर, रफ़ीउद्दाराजात, रफ़ीउद्दौला और मुहम्मद शाह को सत्तारूढ़ करने में उनकी सहायता की थी।ध्यान दें अधिक जानकारी के लिए देखें:-सैय्यद बन्धु

3. किस सन्धि के बाद पेशवा बाजीराव द्वितीय अंग्रेज़ों के पूर्ण अधीन हो गया?

बसीन की सन्धि
सालबाई की सन्धि
बड़गाँव की सन्धि
पूना की सन्धि
'बसई की सन्धि' अथवा 'बसीन की सन्धि' 31 दिसम्बर, 1802 में भारत में पूना के मराठा पेशवा बाजीराव द्वितीय और अंग्रेज़ों के मध्य हुई थी। अक्टूबर, 1802 में यशवन्तराव होल्कर ने पेशवा को पराजित किया तथा धर्मभाई को पूना की गद्दी पर बैठाया। बाजीराव द्वितीय भागकर बसई चला गया और अंग्रेज़ों से मदद की गुहार की। बसई की सन्धि के तहत पेशवा अंग्रेज़ों की सेना की छह बटालियनों का ख़र्च वहन करने को राज़ी हुआ, जिसका ख़र्च उठाने के लिए एक इलाक़ा प्रत्यर्पित किया गया।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-बसीन की सन्धि

4. सिहाबुद्दीन मुहम्मद गोरी ने 1175 में भारत पर पहला आक्रमण किस राज्य के ख़िलाफ़ किया?

मुल्तान एवं उच्छ
पंजाब
गुजरात
उज्जैन
सखी सुल्तान का मक़बरा, मुल्तान
'मुल्तान' अथवा 'मुलतान' आधुनिक पश्चिमी पाकिस्तान में चिनाब नदी के तट पर स्थित पश्चिमी पंजाब का एक महत्त्वपूर्ण प्राचीन नगर है। यह सिन्ध से पंजाब जाने वाले राजमार्ग पर स्थित है। सैनिक दृष्टि से भी इसकी स्थिति अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। 1175 ई. में मुहम्मद ग़ोरी का पहला आक्रमण मुल्तान पर हुआ था। इस पर उस समय 'करमाथी' लोग शासन करते थे। मुहम्मद ग़ोरी ने नगर पर अधिकार कर उसे अपने सूबेदार के सुपुर्द कर दिया था।ध्यान दें अधिक जानकारी के लिए देखें:-मुल्तान

5. प्रारम्भिक तुर्क या आदि तुर्क शासकों में किसे उसकी उदारता के कारण 'लाखबख्श' कहा गया?

इल्तुतमिश
क़ुतुबुद्दीन ऐबक
बलबन
रज़िया सुल्तान
ऐबक का मक़बरा, लाहौर
'क़ुतुबुद्दीन ऐबक' (1206-1210 ई.) तुर्क जनजाति का व्यक्ति था। 'ऐबक' एक तुर्की शब्द है, जिसका अर्थ होता है- "चन्द्रमा का देवता।" क़ुतुबुद्दीन ऐबक का जन्म तुर्किस्तान में हुआ था। ऐबक को अपनी उदारता एवं दानी प्रवृत्ति के कारण 'लाखबख्श' अर्थात् 'लाखों का दान करने वाला' कहा गया है। इतिहासकार मिनहाज ने उसकी दानशीलता के कारण ही उसे 'हातिम द्वितीय' की संज्ञा दी है। फ़रिश्ता (यात्री) के अनुसार उस समय केवल किसी दानशील व्यक्ति को ही ऐबक की उपाधि दी जाती थी।ध्यान दें अधिक जानकारी के लिए देखें:-क़ुतुबुद्दीन ऐबक

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