इतिहास सामान्य ज्ञान 207  

सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी
राज्यों के सामान्य ज्ञान


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1. 'श्रीनगर' की स्थापना किस शासक ने की थी?

बिन्दुसार
स्कन्दगुप्त
अशोक
दशरथ
अशोक का स्तम्भ, वैशाली
'अशोक' प्राचीन भारत के मौर्य सम्राट बिंदुसार का पुत्र था, जिसका जन्म लगभग 304 ई. पूर्व में माना जाता है। भाइयों के साथ हुए गृह-युद्ध के बाद 272 ईसा पूर्व अशोक को राजगद्दी मिली और 232 ईसा पूर्व तक उसने शासन किया। आरंभ में अशोक भी अपने पितामह चंद्रगुप्त मौर्य और पिता बिंदुसार की भाँति युद्ध के द्वारा साम्राज्य विस्तार करता चला गया। कश्मीर, कलिंग तथा कुछ अन्य प्रदेशों को जीतकर उसने संपूर्ण भारत में अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया था, जिसकी सीमाएँ पश्चिम में ईरान तक फैली हुई थीं। दक्षिण में मौर्य प्रभाव के प्रसार की जो प्रक्रिया चंद्रगुप्त मौर्य के काल में आरम्भ हुई थी, वह अशोक के नेतृत्व में और भी अधिक पुष्ट हुई।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-अशोक

2. निम्न में से किसने अपनी राजधानी मुर्शिदाबाद से मुंगेर स्थानान्तरित की?

अलीवर्दी ख़ाँ
सिराजुद्दौला
मीर ज़ाफ़र
मीर क़ासिम
मीर क़ासिम
'मीर क़ासिम' 1760 ई. से 1764 ई. तक बंगाल का नवाब रहा था। उसका पूरा नाम 'मीर मुहम्मद क़ासिम अली ख़ान' था। मीर क़ासिम को ब्रिटिश 'ईस्ट इंडिया कम्पनी' की सहायता से नवाब बनाया गया था। शासन कार्यों में मीर क़ासिम, मीर ज़ाफ़र से अधिक योग्य तथा अधिक दृढ़ व्यक्ति था। उसने मालगुज़ारी की वसूली के नियम अधिक कठोर बना दिए और राज्य की आय लगभग दूनी कर दी। उसने फ़ौज का भी संगठन किया और कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) के अनुचित हस्तक्षेप से अपने को दूर रखने के लिए राजधानी मुर्शिदाबाद से उठाकर मुंगेर ले गया।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-मीर क़ासिम

3. किस ग्रन्थ में शूद्रों के लिए आर्य शब्द का प्रयोग हुआ है?

अर्थशास्त्र
मुद्राराक्षस
अष्टाध्यायी
वृहत्कथामंजरी

4. पुरुषपुर’ निम्नलिखित में से किसका प्राचीन नाम था?

पटना
पाटलिपुत्र
पेशावर
पंजाब
बाला हिसार क़िला, पेशावर
'पेशावर' पाकिस्तान का एक प्रमुख शहर है। प्राचीन समय में पेशावर का नाम 'पुरुषपुर' हुआ करता था। ऐतिहासिक परम्परा के अनुसार सम्राट कनिष्क ने 'पुरुषपुर' को द्वितीय शती ई. में बसाया था और सर्वप्रथम कनिष्क के बृहत साम्राज्य की राजधानी बनने का सौभाग्य भी इसी नगर को प्राप्त हुआ था। पुरुषपुर प्राचीन समय में 'गाँधार मूर्तिकला' का मुख्य और ख्याति प्राप्त केन्द्र माना जाता था। तृतीय बौद्ध संगीति कनिष्क के शासन काल में पुरुषपुर में ही हुई थी। जबकि कुछ विद्वानों के मत में यह 'बौद्ध संगीति' कुंडलवन, कश्मीर में हुई थी। इसके सभापति आचार्य अश्वघोष थे, जिन्हें कनिष्क पाटलिपुत्र की विजय के पश्चात् अपने साथ पुरुषपुर ले आया था।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-पेशावर

5. गुप्तकाल के सिक्कों का सबसे बड़ा ढेर कहाँ से प्राप्त हुआ है?

'बयाना' (भरतपुर) से
'देवगढ़' (झाँसी) से
'भूमरा' (मध्य प्रदेश) से
'तिगवा' (मध्य प्रदेश) से
चन्द्रगुप्त मौर्य
'बयाना' राजस्थान के भरतपुर ज़िले में स्थित एक महत्त्वपूर्ण स्थान है। इस स्थान का प्राचीन नाम 'बाणपुर' कहा जाता है। इसके अतिरिक्त इसके अन्य नाम 'वाराणसी', 'श्रीप्रस्थ' या 'श्रीपुर' भी उपलब्ध हैं। 'ऊखा मन्दिर' से प्राप्त 956 ई. के एक अभिलेख से ज्ञात होता है कि यहाँ का राजा उस समय लक्ष्मण सेन था। बयाना से 1821 ई. में सोने के सिक्कों का भारी ढेर प्राप्त हुआ है, जो गुप्तकालीन हैं। इससे गुप्त शासकों की आर्थिक समृद्धि का प्रमाण मिलता है। इनमें अधिक सिक्के चन्द्रगुप्त द्वितीय के हैं। इन सिक्कों में कई नये प्रकार के सिक्के हैं, जो गुप्त शासकों की विविधता प्रमाणित करते हैं। इन सिक्कों से गुप्तवंशीय कुमारगुप्त द्वितीय के इतिहास पर नया प्रकाश पड़ता है। अनुमान लगाया है कि लगभग 540 ई. के आस-पास हूणों के आक्रमण के समय इस खज़ाने को ज़मीन में गाड़ दिया गया था।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-बयाना

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