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गूढ़पुरुष

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गूढ़पुरुष मौर्य कालीन शासन व्यवस्था में गुप्तचरों को कहा जाता था। मौर्य शासन प्रबन्ध में गूढ़पुरुषों काफ़ी महत्त्वपूर्ण स्थान था।

  • विशाल मौर्य साम्राज्य के सुशासन के लिए यह आवश्यक था कि उनके अमात्यों, मंत्रियों, राजकर्मचारियों और पौरजनपदों पर दृष्टि रखी जाए, उनकी गतिविधियों और मनोभावनाओं का ज्ञान प्राप्त किया जाए और पड़ोसी राज्यों के विषय में भी सारी जानकारी प्राप्त होती रहे।
  • मौर्य साम्राज्य में दो प्रकार के गुप्तचर थे-
  1. संस्था
  2. संचार
  • संस्था वे गुप्तचर थे, जो एक ही स्थान पर संस्थाओं में संगठित होकर कापटिकक्षात्र, उदास्थित, गृहपतिक, वैदेहक (व्यापारी) तापस (सिर मुंडाय या जटाधारी साधु) के वेश में काम करते थे। इन संस्थाओं में संगठित होकर ये राजकर्मचारियों के शौक़ या भ्रष्टाचार का पता लगाते थे।
  • संचार ऐसे गुप्तचर थे, जो एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमते रहते थे। ये अनेक वेशों में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाकर सूचना एकत्रित कर राजाओं तक पहुँचाते थे।


इन्हें भी देखें: मौर्यकालीन भारत, मौर्य काल का शासन प्रबंध, मौर्ययुगीन पुरातात्विक संस्कृति एवं मौर्यकालीन कला


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

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