जशपुर पाट  

जशपुर पाट छत्तीसगढ़ राज्य, मध्य भारत में जशपुर ज़िले तक फैला हुआ है और छोटा नागपुर के पठार का हिस्सा है। यह अपनी भू-वैज्ञानिक संरचना, विवर्तनिक (टेक्टॉनिक) इतिहास और अपेक्षाकृत नम जलवायु के कारण आसपास के क्षेत्रों से अलग है। यह पठार उत्तरी बाहरी छोर से उभरता है और इसकी सबसे ऊँची स्थलीप्राय सतह पश्चिम छोर पर स्थित है। यह छोटे, समतल शीर्ष वाले पठारों और पहाड़ियों से बना है, जो एक-दूसरे से कगारों और नदी घाटियों के ज़रिये अलग-अलग हैं।

भौगोलिक विशेषता

यहाँ का जल निकास मुख्यत: उत्तरी और दक्षिणी कोइल तथा दामोदर नदियों द्वारा होता है। उत्तर में 'ऊपरी पाट'[1] की ऊंचाई लगभग 750 मीटर से 1,006 मीटर तक है। दक्षिण में 'निचला पाट'[2] की ऊंचाई लगभग 274 मीटर से 503 मीटर तक है। जशपुर पाट गंगा और महानदी जल-निकास तंत्र के बीच विभाजक का काम करता है। पाट के शीर्ष भाग आमतौर पर बंजर है या घास के मैदान से ढके हैं, और इनके ढलान वनाच्छादित हैं।[3]

शिखर व नदियाँ

'गाश पहाड़' (988मीतर) और 'लाकी पहाड़' (1,013 मीटर) जशपुर पाट के दो ऊंचे शिखर हैं। 'मैनी', 'इब', 'मांड' और 'कुस्कल' नदियों के कारण संकरी व पथरीली घाटियों का निर्माण होता है।

वनस्पति

यहाँ की उष्ण, नम मानसूनी जलवायु पठार की ऊंचाई के कारण कुछ हद तक परिवर्तित हो गई है। पलाश, खैर, हरड़ा, आबनूस और सागौन के शुष्क पर्णपाती वन पठार की ढलानों पर स्थित हैं। इसके बीच-बीच में बांस और सबई घास, महत्त्वपूर्ण भारतीय रेशेदार घास, जिसे स्थानीय भाषा में 'भाबर' कहते है; भी पाई जाती हैं। शुष्क क्षेत्रों में साल (शोरिया) के वृक्ष पाये जाते हैं। ये जंगल स्थानीय संथाल, उराँव, हो और खरिया जनजातियों को आवास क्षेत्र प्रदान करते हैं।

खनिज पदार्थ

18वीं शताब्दी के मध्य तक रामगढ़, खरदिघा और कांडी यहां की तीन सत्ताधारी स्थानीय रियासते थीं। बंगाल से इस क्षेत्र में ब्रिटिश शासन का विस्तार हुआ। कोयले व अन्य खनिजों के कारण यहां सड़क और रेलमार्ग बनाए गए। यह क्षेत्र कोयला, लौह अयस्क और अभ्रक जैसे खनिज पदार्थों में काफ़ी समृद्ध है। यहां चूना-पत्थर, चीनी मिट्टी, मैंगनीज़, बॉक्साइट, बलुआ पत्थर, निर्माण सामग्री और डोलोमाइट का भी खनन होता है।[3]

कृषि तथा व्यवसाय

छोटा नागपुर पठार के इस हिस्से का अधिकांश भाग अब भी ग्रामीण है। यहां कपास, चावल, मक्का, गन्ना, मूंगफली, तोरी, सरसों, ज्वार-बाजरा और फलों की खेती की जाती है। यह क्षेत्र आटा, तिलहन, आरा मिल और इमारती लकड़ी को सुखाने, लोहे, पीतल और एल्युमिनियम के औज़ार तथा बर्तन बनाने व टसर रेशम के उत्पादन संबंधी उद्योगों का केंद्र है। यहां अन्य गतिविधियां भी पनप रही हैं, जैसे- लाख और चपड़ा संग्रहण, कृषि आधारित उद्योग, जैसे- चावल मिल और वनोत्पादों का प्रसंस्करण विशेषकर सबई घास का। आर्थिक गतिविधियां मुख्य रेल व सड़क मार्गो के आसपास होती हैं और अधिकांश अंदरूनी हिस्से में।

यातायात

यहाँ आवागमन की बहुत कम सुविधाएं उपलब्ध हैं। ऊपरी क्षेत्र की जनसंख्या का अधिकांश हिस्सा उरांव, कंवर, गोंड, कोरवा और अन्य जनजातीय लोगों का है, जो जंगलों को साफ़ करके बनाए गए कुछ हिस्सों में रहते हैं। इस क्षेत्र का एकमात्र महत्त्वपूर्ण शहर जशपुर नगर है।[3]


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. स्थानीय रूप से ऊपरघाट के नाम से ज्ञात
  2. स्थानीय नाम निचघाट
  3. 3.0 3.1 3.2 भारत ज्ञानकोश, खण्ड-2 |लेखक: इंदू रामचंदानी |प्रकाशक: एन्साइक्लोपीडिया ब्रिटेनिका प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली |संकलन: भारतकोश पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 235 |

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