संजयंती  

संजयंती दक्षिण भारत की एक प्राचीन नगरी, जिसका महाभारत, सभापर्व[1] में हुआ है।

  • इस नगरी पर पाण्डव सहदेव ने अपनी दक्षिण दिशा की दिग्विजय यात्रा में विजय प्राप्त की थी-
'नगरीं संजयंतीं च पाखंडं करहाटकम् दूतैरेव वशे चक्रे करं चैनानदापयत्।'
  • संजयंती का अभिज्ञान वर्तमान 'संजन' या 'संजान' से किया गया है, जो ज़िला थाना, महाराष्ट्र में स्थित है।
  • कहा जाता है कि इसी स्थान पर ख़ुरासान से भारत आने वाले पारसियों का सर्वप्रथम उपनिवेश 735 ई. में बसाया गया था।[2][3]


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. सभापर्व 31,70
  2. इंडियन एंटिक्विटी, 1912, पृ. 174
  3. ऐतिहासिक स्थानावली |लेखक: विजयेन्द्र कुमार माथुर |प्रकाशक: राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी, जयपुर |संकलन: भारतकोश पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 928 |

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