तत्त्व  

(अंग्रेज़ी:Element) रसायन विज्ञान में तत्त्व वह शुद्ध पदार्थ है, जिसे किसी भी ज्ञात भौतिक एवं रासायनिक विधियों से न तो दो या दो से अधिक पदार्थों में विभाजित किया जा सकता है, और न ही अन्य सरल पदार्थों के योग से बनाया जा सकता है। जैसे- सोना, चाँदी, ऑक्सीजन आदि।

शब्द संदर्भ

शब्द संदर्भ
हिन्दी वास्तविक स्वरूप, सार वस्तु, सृष्टि का मूल कारण, परमात्मा, ब्रह्म, यथार्थ सिद्धांत, यथार्थता, वास्तविकता, पंचभूत, वह पदार्थ जिसे सामान्य रासायनिक विधियों से सरलतर पदार्थों में विभाजित नहीं किया जा सकता, सब दृष्टियों से समान नाभिकीय आवेश वाले परमाणुओं से बना पदार्थ, जिन मूल पदार्थों के रासायनिक संयोग से अन्य सब पदार्थ बनते हैं, उनकी सामान्य संज्ञा

(आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी)

-व्याकरण    पुल्लिंग
-उदाहरण   वयं तत्त्वान्वेषान्मधुकर हतास्त्वं खलु कृती[1]
-विशेष    हाइड्रोजन, ऑक्सीजन आदि गैसीय तत्त्व हैं और ताँबा, लोहा आदि धात्विक तत्त्व हैं। (जैन.) वस्तु का स्वरूप / स्वभाव। विशेष; जैन दर्शन में सात तत्त्व हैं- जीव, अजीव, आस्रव, बन्ध, संवर, निर्जरा और मोक्ष
-विलोम   
-पर्यायवाची    पुद्गल, भूत, महाभूत, मूल तत्त्व, वास्तव, सत्त्व, सूक्ष्म भूत
संस्कृत तत्त्वम् (तन्+क्विप्, पृषो. तत्+त्व), (कभी-कभी ‘तत्त्वम्’ भी लिखा जाता है); सन्न्यासस्य महाबाहो तत्त्वमिच्छामि वेदितुम् [2], [3]; सम. अभियोगः असन्दिग्ध दोषारोप या घोषणा; विद् (वि.) दार्शनिक, ब्रह्मज्ञान का वेत्ता, न्यासः विष्णु की तंत्रोक्त पूजा में विहित एक अंगन्यास[4]
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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. शकुन्तला नाटक 1/24
  2. भगवद्-गीता 18/1, 3/28
  3. मनुस्मृति 1/3, 3/16, 5/42
  4. इसमें शरीर के विभिन्न अंगों पर गुह्म अक्षर या अन्य चिह्न बनाने के साथ कुछ प्रार्थनाएँ बोली जाती हैं।

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