तैत्तिरीयोपनिषद शिक्षावल्ली अनुवाक-8  

व्यवस्थापन (वार्ता | योगदान) द्वारा परिवर्तित 19:33, 30 जून 2017 का अवतरण (Text replacement - " जगत " to " जगत् ")

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)

  • इस अनुवाक में '' को ही 'ब्रह्म' माना गया है और उसी के द्वारा 'ब्रह्म' को प्राप्त करने की बात कही गयी है।
  • आचार्य 'ॐ' को ही प्रत्यक्ष जगत् मानते हैं और उसके उच्चारण अथवा स्मरण के उपरान्त साम-गान तथा शस्त्र-सन्धान करते हैं।
  • 'ॐ' के द्वारा ही अग्निहोत्र किया जाता है।


पन्ने की प्रगति अवस्था
आधार
प्रारम्भिक
माध्यमिक
पूर्णता
शोध



टीका टिप्पणी और संदर्भ

बाहरी कड़ियाँ

संबंधित लेख

तैत्तिरीयोपनिषद ब्रह्मानन्दवल्ली

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः