एशियाई खेल  

2014 में आयोजित एशियाई खेलों का प्रतीक चिह्न

एशियाई खेल प्रत्येक चार वर्ष बाद आयोजित होने वाली बहु-खेल प्रतियोगिता है जिसमें केवल एशिया के विभिन्न देशों के खिलाड़ी भाग लेते हैं। एशियाई खेलों को एशियाड के नाम से भी जाना जाता है। इन खेलों का नियामन एशियाई ओलम्पिक परिषद द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय ओलम्पिक परिषद के पर्यवेक्षण में किया जाता है। प्रत्येक प्रतियोगिता में प्रथम स्थान के लिए स्वर्ण, दूसरे के लिए रजत और तीसरे के लिए कांस्य पदक दिए जाते हैं, जिस परम्परा का शुभारम्भ 1951 में हुआ था।

खेल प्रतियोगिताएँ

एशियाई खेलों में निम्नलिखित खेल प्रतियोगिताएँ होती हैं-

  • जलक्रीड़ा – गोताखोरी
  • जलक्रीड़ा – तैराकी
  • जलक्रीड़ा – लयबद्ध तैराकी
  • जलक्रीड़ा – वाटर पोलो
  • तीरंदाज़ी
  • दंगल
  • बैडमिंटन
  • बेसबॉल
  • बॉस्केटबॉल
  • बोर्ड क्रीड़ाएँ
  • बॉक्सिंग
  • डोंगीयन
  • क्रिकेट
  • क्यू क्रीड़ाएँ
  • साइक्लिंग
  • नृत्य क्रीड़ाएँ
  • ड्रैगन नौका
  • घुड़सवारी
  • असिक्रीड़ा
  • फुटबॉल
  • गोल्फ
  • जिम्नास्टिक
  • हैंडबाल
  • हॉकी
  • जूडो
  • कबड्डी
  • कराटे
  • रोलर क्रीड़ाएँ
  • रग्बी यूनियन
  • पाल नौकायन
  • सेपाक्टाक्रौ
  • निशानेबाज़ी
  • सॉफ़्टबॉल
  • सॉफ़्ट टेनिस
  • स्क्वैश
  • टेबल टेनिस
  • ताइक्वाण्डो
  • टेनिस
  • वॉलीबॉल
  • भारोत्तोलन
  • कुश्ती
  • वूशू

एशियाई खेलों का इतिहास

प्रथम एशियाई खेलों का आयोजन नई दिल्ली, भारत में किया गया था, जिसने 1982 में पुनः इन खेलों की मेज़बानी की। 16वें एशियाई खेलों का आयोजन 12 नवंबर से 27 नवंबर, 2010 के बीच किया गया, जिनकी मेज़बानी ग्वांगझोउ, चीन ने की। 17वें एशियाई खेलों का आयोजन 17 सितम्बर से 4 अक्तूबर 2014 में दक्षिण कोरिया के इंचियोन में हुआ।

एशियाई खेलों का आयोजन[1]
वर्ष मेज़बान देश संक्षिप्त विवरण
1951 नई दिल्ली, भारत पहले एशियाई खेल 4 से 11 मार्च 1951 के बीच नई दिल्ली में आयोजित हुए थे। ये खेल पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 1950 में होने थे मगर तैयारियों में देरी के चलते इन्हें 1951 तक के लिए टाल दिया गया। हालाँकि जापान को लंदन में 1948 में हुए ओलिम्पिक में हिस्सा लेने नहीं दिया गया था और एशियाई खेल महासंघ की संस्थापक बैठक में भी वो शामिल नहीं हुआ, मगर इन खेलों में उसने हिस्सा लिया। इन खेलों का उद्‍घाटन भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने किया था।
1954 मनीला, फिलीपीन्स दूसरे एशियाई खेल फिलीपीन्स की राजधानी मनीला में 1 से 9 मई 1954 के बीच आयोजित हुए। इन खेलों के उद्‍घाटन की घोषणा राष्ट्रपति रैमन मैगसायसाय ने की थी और ये रिजाल मेमोरियल स्टेडियम में आयोजित हुए।
1958 टोकियो, जापान तीसरे एशियाई खेलों का आयोजन जापान की राजधानी टोकियो में हुआ। 24 मई से 1 जून 1958 के बीच ये आयोजन हुआ, जिसमें 20 देशों के 1820 एथलीट्स ने 13 स्पर्धाओं में हिस्सा लिया। पिछली बार के मुकाबले इस बार पाँच स्पर्द्धाएँ ज्यादा थीं। एशियाई खेलों में पहली बार मशाल की परंपरा भी शुरू की गई।
1962 जकार्ता, इंडोनेशिया चौथे एशियाई खेल 24 अगस्त से 4 सितंबर 1962 के बीच इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित हुए। इसराइल और ताइवान के एथलीट्स इन खेलों में हिस्सा नहीं ले सके। अरब देशों और चीन के दबाव के चलते इंडोनेशिया सरकार ने इसराइली और ताइवानी प्रतिनिधियों को वीजा देने से इनकार कर दिया। 16 देशों के 1460 एथलीट्स ने एशियाड में हिस्सा लिया और बैडमिंटन इन खेलों में शामिल किया गया। राष्ट्रपति सुकर्णो ने इन खेलों के उद्‍घाटन की घोषणा की थी।
1966 बैंकॉक, थाईलैंड पाँचवें एशियाई खेल 9 से 20 दिसंबर, 1966 के बीच थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में आयोजित हुए। ताइवान और इसराइल की खेलों में वापसी हुई। कुल 18 देशों के ढाई हजार एथलीट और अधिकारी इन खेलों में शामिल हुए। महिलाओं के वॉलीबॉल को इन खेलों में शामिल किया गया। थाईलैंड के महाराज भूमिबोल अदुल्यदेज ने इन खेलों का उद्‍घाटन किया था।
1970 बैंकॉक, थाईलैंड छठे एशियाई खेल 24 अगस्त से 4 सितंबर 1970 के बीच बैंकॉक में ही आयोजित हुए। शुरुआती योजना के मुताबिक दक्षिण कोरिया के सोल को इसका आयोजन करना था मगर उत्तर कोरिया से सुरक्षा को धमकी को देखते हुए उसने दावेदारी छोड़ दी। 18 देशों के 2400 एथलीट्स और अधिकारी इन खेलों में शामिल हुए। यॉटिंग पहली बार इन खेलों में शामिल हुआ और एक बार फिर भूमिबोल अदुल्यदेज ने खेलों का उद्‍घाटन किया।
1974 तेहरान, ईरान सातवें एशियाई खेल 1 से 16 सितंबर 1974 के बीच ईरान की राजधानी तेहरान में आयोजित किए गए थे। इन खेलों के लिए आजादी खेल परिसर बनवाया गया था और पहली बार मध्य पूर्व के किसी देश ने इसका आयोजन किया। तेहरान में हुए इस आयोजन में 25 देशों के 3010 एथलीट शामिल हुए जो कि खेलों की शुरुआत से लेकर तब तक का सबसे बड़ा आयोजन साबित हुआ। तलवारबाज़ी, जिम्नास्टिक्स और महिलाओं का बास्केटबॉल इन खेलों में शामिल हुआ। फ़लस्तीन से ख़तरों को देखते हुए सुरक्षा की ज़बरदस्त व्यवस्था की गई थी। मगर ये खेल राजनीति का भी शिकार हुए क्योंकि अरब मूल के देशों, पाकिस्तान, चीन और उत्तर कोरिया ने इसराइल के विरुद्ध टेनिस, तलवारबाज़ी, बास्केटबॉल और फ़ुटबॉल के मुकाबलों में उतरने से इनकार कर दिया।
1978 बैंकॉक, थाईलैंड आठवें एशियाई खेल 9 से 20 दिसंबर 1978 के बीच बैंकॉक में ही आयोजित हुए। बांग्लादेश और भारत के साथ तनाव के बाद पाकिस्तान ने एशियाई खेलों के आयोजन की योजना छोड़ दी। सिंगापुर ने वित्तीय कारणों से खेलों का आयोजन करने से मना कर दिया। इसके बाद एक बार फिर थाईलैंड ने मदद की पेशकश की और खेल बैंकॉक में आयोजित हुए। राजनीतिक कारणों से इसराइल को खेलों से बाहर कर दिया गया। 25 देशों के 3842 एथलीट इसमें शामिल हुए और तीरंदाज़ी के साथ ही बोलिंग को खेलों में शामिल किया गया।
1982 नई दिल्ली, भारत 9वें एशियाई खेल 19 नवंबर से 4 दिसंबर 1982 के बीच नई दिल्ली में आयोजित हुए। पहले खेलों के बाद दूसरी बार दिल्ली ने ये खेल आयोजित किए। ये एशियाई खेल एशियाई ओलिम्पिक परिषद के नेतृत्त्व में हुए। एशियाई खेल महासंघ को भंग करके ही एशियाई ओलिम्पिक परिषद का गठन हुआ। 33 देशों के 3411 एथलीट खेलों में शामिल हुए। घुड़सवारी, गोल्फ, हैंडबॉल, नौकायन और महिलाओं की हॉकी इन खेलों में शामिल हुआ। इससे पहले के खेलों में जापान सर्वाधिक पदक जीतने वाला देश था मगर इन खेलों में पहली बार चीन ने जापान की जगह ले ली और उसके बाद से उसे कोई हटा नहीं सका है। इन खेलों की तैयारी में भारत में बड़े पैमाने पर रंगीन टेलिविजन का प्रसार हुआ। इन खेलों का शुभंकर अप्पू नाम का हाथी था। राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने खेलों का उद्‍घाटन किया, पी.टी. उषा ने खिलाड़ियों की ओर से शपथ ली और ये खेल जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित किए गए थे।
1986 सोल, दक्षिण कोरिया दसवें एशियाई खेल 20 सितंबर से 5 अक्टूबर 1986 के बीच दक्षिण कोरिया के सोल में आयोजित किए गए। इन खेलों में 27 देशों के 4839 एथलीट्स शामिल हुए और कुल 25 स्पर्धाओं में पदक बाँटे गए। जूडो, ताइक्वांडो, महिलाओं की साइक्लिंग और महिलाओं की निशानेबाजी को इन खेलों में शामिल किया गया। इन खेलों में 83 एशियाई रिकॉर्ड और तीन विश्व रिकॉर्ड टूटे। पी.टी. उषा इन खेलों की स्टार एथलीट थी जिन्होंने चार स्वर्ण और एक रजत पदक जीता। दक्षिण कोरिया ने जापान को हटाकर पदक तालिका में दूसरा स्थान हासिल कर लिया।
1990 बीजिंग, चीन ग्यारहवें एशियाई खेलों का आयोजन 22 सितंबर से 7 अक्टूबर, 1990 के बीच चीन के बीजिंग में हुआ। चीन में बड़े पैमाने पर आयोजित हुआ ये पहला खेल आयोजन था। 37 देशों के कुल 6122 एथलीट उनमें शामिल हुए और 29 स्पर्धाएँ आयोजित हुईं। इन खेलों में सॉफ्टबॉल, सेपक टाकरॉ, वुशु, कबड्डी और कनूइंग पहली बार शामिल किए गए। कुवैत पर इराकी हमले में एशियाई ओलिम्पिक परिषद के प्रमुख शेख फहद अल-सबा भी मारे गए थे और ग्यारहवें एशियाड में यही चर्चा का बड़ा विषय था। इन खेलों में सात विश्व रिकॉर्ड और 89 एशियाई रिकॉर्ड टूटे।
1994 हिरोशिमा, जापान बारहवें एशियाई खेल 2 से 16 अक्टूबर 1994 के बीच जापान के हिरोशिमा में आयोजित हुए। इन खेलों का मुख्य संदेश एशियाई देशों में शांति और सौहार्द को बढ़ाना था। इस पर ख़ासा जोर दिया गया क्योंकि 1945 में इस जगह पर पहला परमाणु बम गिराया गया था। पूर्व सोवियत संघ से स्वतंत्र हुए कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उजबेकिस्तान को इन खेलों में शामिल किया गया। ये पहले एशियाई खेल थे जो किसी देश की राजधानी में आयोजित नहीं हुए थे। पहले खाड़ी युद्ध के बाद इराक को खेलों से निलंबित रखा गया था। 42 देशों के 6828 एथलीट ने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और कुल 34 स्पर्धाएँ आयोजित हुईं। बेसबॉल, कराटे और आधुनिक पेंटाथलन इन खेलों में शामिल हुए।
1998 बैंकॉक, थाईलैंड तेरहवें एशियाई खेल 6 से 20 दिसंबर, 1998 के बीच बैंकॉक में आयोजित हुए। इन खेलों में कुल 41 देशों ने हिस्सा लिया। बैंकॉक ने इस तरह चौथी बार एशियाई खेलों का आयोजन किया। इससे पहले 1966 में ये खेल बैंकॉक को दिए गए थे जबकि 1970 और 1978 में उसे दूसरे देशों के आयोजन नहीं कर पाने की वजह से ये आयोजन करना पड़ा था। एक बार फिर थाईलैंड के नरेश भूमिबोल अदुल्यदेज ने इन खेलों का उद्‍घाटन किया।
2002 बुसान, दक्षिण कोरिया चौदहवें एशियाई खेलों का आयोजन 29 सितंबर से 14 अक्टूबर 2002 के बीच दक्षिण कोरिया के बुसान में हुआ। 44 देशों के 6572 एथलीट्स ने इन खेलों में हिस्सा लिया। 38 खेलों में मुकाबले हुए जबकि 18 हजार पत्रकार, अधिकारी और एथलीट इसमें शामिल हुए। खेलों के इतिहास में पहली बार एशियाई ओलिम्पिक परिषद के सभी 44 सदस्य देश शामिल हुए। इनमें उत्तर कोरिया और अफ़ग़ानिस्तान भी शामिल हुए।
2006 दोहा, कतर 15वें एशियाई खेल कतर के दोहा में 1 से 15 दिसंबर 2006 के बीच आयोजित हुए। मध्य पूर्व क्षेत्र से दोहा दूसरा शहर बना जिसने एशियाड का आयोजन किया था। उससे पहले 1974 में तेहरान इन खेलों का आयोजन कर चुका था। 29 खेलों की 46 स्पर्धाएँ आयोजित हुईं। परिषद के सभी 45 देशों ने इन खेलों में हिस्सा लिया। खेलों के दौरान ही दक्षिण कोरियाई घुड़सवार किम ह्युंग चिल की मौत हो गई और उसकी खेलों के दौरान काफ़ी चर्चा रही थी।
2010 ग्वांगझू, चीन चीन के खूबसूरत शहर ग्वांगझू 16वें एशियाड की मेजबानी की। 12 से 29 नवम्बर 2010 तक समाप्त हुए इस खेलकुंभ में रेकॉर्ड 42 खेलों की 476 स्पर्धाओं में 14 हजार से एथलीट ने शिरकत की। मेजबान होने के नाते चीन का सबसे बड़ा दल (1454 एथलीट) ज्यादा से ज्यादा पदकों को जीतना चाहेगा। कतर (2006) में आयोजित 15वें एशियाड में चीन ने हमेशा की तरह 165 स्वर्ण पदक जीतकर पदक तालिका में अव्वल स्थान पाया था।

2014 एशियाई खेल

17वें एशियाई खेल 2014 में दक्षिण कोरिया के इंचियोन में आयोजित हुए। इनका आयोजन 17 सितम्बर से 4 अक्टूबर 2014 के मध्य हुआ। 17वें एशियाई खेलों का शनिवार 4 अक्टूबर 2014 को भव्य समारोह के साथ समापन हो गया। इस दौरान जहां प्रतिभागियों के बीच हर पदक के लिए बेहद कड़ा संघर्ष देखने को मिला वहीं देश-विदेश से आए दर्शकों ने बेहद दोस्ताना माहौल में प्रतिस्पर्धाओं का लुत्फ उठाया। अंततः चीन एक बार फिर सर्वाधिक पदकों (कुल पदक- 342) के साथ एशियाई खेलों में अपना दबदबा कायम रखने में कामयाब रहा, जबकि हमेशा की तरह साउथ कोरिया (कुल पदक- 234) दूसरे और जापान (कुल पदक- 200) ने तीसरे पायदान पर रहते हुए अभियान समाप्त किया। 17वें एशियाई खेलों में 439 स्वर्ण पदकों के लिए 45 देशों के 14,000 खिलाड़ियों ने 36 खेलों में हिस्सेदारी की। आर्चरी, वेटलिफ्टिंग और शूटिंग में जहां 14 नए वर्ल्ड रेकॉर्ड्स बने, वहीं बड़ी संख्या में गेम्स रेकॉर्ड भी टूटे। चीन 151 स्वर्ण पदक सहित कुल 342 पदक जीत एशिया में खेलों का सिरमौर बना रहा। मेजबान साउथ कोरिया ने 79 स्वर्ण सहित कुल 234 पदक हासिल किए, जबकि जापान ने 47 स्वर्ण पदक के साथ कुल 200 पदक अपनी झोली में डाले।[2]

आठवें स्थान पर रहा भारत

भारत ने इन खेलों में 11 स्वर्ण, 10 रजत और 36 कांस्य सहित कुल 57 पदक हासिल किए और आठवें स्थान पर रहा। भारत 2010 ग्वांग्झू खेलों के अपने 65 पदकों की संख्या में सुधार करने या इसकी बराबरी करने के इरादे से उतरा था। भारतीय दल हालांकि पिछली बार ही तुलना में कम ही पदक जीत पाया। भारत ने 11 स्वर्ण जीते, जो पिछली बार की तुलना में 3 कम हैं। इसके अलावा उसने 10 रजत और 36 कांस्य पदक सहित कुल 57 पदक जीते। भारत पदक तालिका में 8वें स्थान पर रहा, जो पिछली बार के चीन खेलों की तुलना में 2 स्थान नीचे है। ग्वांग्झू में भारत ने 14 स्वर्ण, 17 रजत और 34 कांस्य पदक जीतकर 6ठा स्थान हासिल किया था। भारत ने एथलेटिक्स और कबड्डी में 2-2 स्वर्ण पदक जीते जबकि तीरंदाजी, मुक्केबाजी, हॉकी, निशानेबाजी, स्क्वाश, टेनिस और कुश्ती में 1-1 स्वर्ण पदक मिला। भारत के पदकों की संख्या में यहां एशियाई खेलों के दौरान भले ही गिरावट आई हो लेकिन इसके बावजूद उसे जश्न मनाने के काफ़ी मौके मिले, जब पुरुष हॉकी टीम ने 16 वर्ष के बाद स्वर्ण पदक जीता जबकि महान् मुक्केबाज एम.सी. मैरीकॉम ने स्वर्ण पदक जीतकर अपने कद को और ऊँचा किया। देश के खिलाड़ियों का एशियाई खेलों में अभियान हालांकि मिश्रित सफलता वाला रहा।[3]

कबड्डी एवं हॉकी में भारत का शानदार प्रदर्शन

निशानेबाज जीतू राय और फ्रीस्टाइल पहलवान योगेश्वर दत्त इन खेलों के नायकों में शामिल रहे। वर्ष 2010 में भारत ने 609 प्रतिभागियों में मैदान में उतारा था जबकि इस दौरान 541 खिलाड़ियों ने चुनौती पेश की। भारत की ओर से पहला स्वर्ण पदक सेना के प्रतिभावना निशानेबाज जीतू राय ने पुरुष 50 मीटर पिस्टल स्पर्धा में प्रतियोगिताओं के पहले ही दिन जीता। भारत के लिए अंतिम स्वर्ण पदक कल महिला और पुरुष कबड्डी टीमों ने जीते। देश को कुछ स्वर्ण कबड्डी जैसे गैर ओलंपिक खेलों में मिले, जो एशियाई के अधिकांश हिस्सों में भी काफ़ी लोकप्रिय नहीं है। भारतीय मिशन प्रमुख आदिले सुमारिवाला ने भारतीय टीम के प्रदर्शन पर कहा कि पदकों की कुल संख्या उम्मीद के मुताबिक रही। उन्होंने कहा कि हमने 50 से 55 पदक की उम्मीद की थी और हमें 57 पदक मिले। वर्ष 2010 के बाद हम राह से भटक गए थे, नहीं तो और अधिक पदक जीतने में सफल रहते। इस बार भी भारत ग्लास्गो में राष्ट्रमंडल खेलों में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद यहां था और एक बार फिर राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों के स्तर में अंतर देखने को मिला। एशियाई खेलों में एक बार फिर चीन ने दबदबा बनाया। स्वर्ण पदकों की गिरती संख्या के बीच सरदार सिंह की अगुआई वाली भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने फाइनल में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को पेनल्टी शूट आउट में हराकर देश को जश्न बनाने का मौका दिया। फाइनल मुकाबला 4 क्वार्टर के बाद 1-1 से बराबर रहने के बाद भारत ने पेनल्टी शूटआउट में 4-2 से जीत दर्ज की थी। भारत ने पिछला स्वर्ण पदक 1998 बैंकॉक एशियाई खेलों के दौरान जीता था और टीम के लिए निश्चित तौर पर यह स्वर्ण काफ़ी महत्वपूर्ण साबित होगा। इसके साथ ही भारत 1966 के बाद पाकिस्तान को पहली बार फाइनल में हराकर 2016 रियो ओलंपिक की पुरुष हॉकी स्पर्धा के लिए भी क्वालीफाई कर गया। इसके अलावा भारत के लिए पुरुष कंपाउंड तीरंदाजी टीम, मैरीकॉम, योगेश्वर दत्त, पुरुष स्क्वॉश टीम, सानिया मिर्जा और साकेत माइनेनी की टेनिस मिश्रित युगल जोड़ी, महिला चक्का फेंक खिलाड़ी सीमा पूनिया और 4 गुना 400 मीटर रिले टीम ने भी स्वर्ण पदक जीते। योगेश्वर यहां स्वर्ण पदक जीतने के इरादे से आए थे और उन्होंने कुश्ती में भारत के 28 साल के स्वर्ण पदक के सूखे का अंत किया।[3]


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. एशियाड का इतिहास (हिंदी) वेबदुनिया हिंदी। अभिगमन तिथि: 5 अक्टूबर, 2014।
  2. इंचन एशियाई खेलों का भव्य समापन (हिंदी) नवभारत टाइम्स। अभिगमन तिथि: 5 अक्टूबर, 2014।
  3. 3.0 3.1 भारत को एशियाड में पिछली बार से कम पदक मिले (हिंदी) वेबदुनिया। अभिगमन तिथि: 5 अक्टूबर, 2014।

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