शबाना आज़मी  

शबाना आज़मी
शबाना आज़मी
पूरा नाम शबाना आज़मी
जन्म 18 सितम्बर, 1950
जन्म भूमि हैदराबाद, भारत
अभिभावक पिता- कैफ़ी आज़मी, माता- शौकत आज़मी
पति/पत्नी जावेद अख़्तर
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र हिन्दी सिनेमा
मुख्य फ़िल्में 'अंकुर', 'फ़ायर', 'पार', 'अमर अकबर अंथोनी', 'शतरंज के खिलाड़ी', 'अमरदीप', 'अतिथि', 'अर्थ', 'मासूम' तथा 'स्पर्श' आदि।
पुरस्कार-उपाधि 'गांधी इंटरनेशल अवार्ड फॉर पीस', सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का 'राष्ट्रीय पुरस्कार' (पाँच बार),
प्रसिद्धि अभिनेत्री
विशेष योगदान प्रयोगात्मक सिनेमा के भरण-पोषण में शबाना आज़मी का योगदान उल्लेखनीय है। 'फायर' जैसी विवादास्पद फ़िल्म में शबाना ने बेधड़क होकर अपनी अभिनय प्रतिभा का प्रमाण दिया।
नागरिकता भारतीय
संबंधित लेख जावेद अख़्तर
अन्य जानकारी शबाना आज़मी ने 1973 में अपने फ़िल्मी कॅरियर की शुरुआत की। उनकी पहली फ़िल्म थी श्याम बेनेगल की 'अंकुर'। अंकुर जैसी आर्ट फ़िल्म की सफलता ने शबाना आज़मी को बॉलिवुड में जगह दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
अद्यतन‎ 04:10, 11 नवम्बर-2016, (IST)

शबाना आज़मी (अंग्रेज़ी: Shabana Azmi, जन्म- 18 सितम्बर, 1950, हैदराबाद, भारत) हिन्दी सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्री हैं। वे एक ऐसी मंझी हुई अदाकारा हैं, जो हर अभिनय के अनुरूप उसी साँचे में ढल जातीं हैं। उन्होंने हिन्दी फ़िल्मों में तरह-तरह के रोल अदा किये हैं। वह आज भी फ़िल्मों में सक्रिय हैं। एक अभिनेत्री होने के साथ-साथ शबाना आज़मी सामाजिक कार्यों में भी समान रूप से जुड़ी रहतीं हैं। शबाना आज़मी हिन्दी सिनेमा के मशहूर लेखक और संगीतकार जावेद अख़्तर की पत्नी हैं। अपने दौर में शबाना आज़मी को स्मिता पाटिल की ही तरह श्रेष्ठ अभिनेत्रियों में गिना जाता था।

परिचय

शबाना आज़मी का जन्म 18 सितंबर, 1950 को हैदराबाद में हुआ था। उनके पिता कैफ़ी आज़मी प्रसिद्ध शायर थे। उनके भाई बाबा आज़मी एक सिनेमेटोग्राफर हैं। शबाना आज़मी का बचपन कलात्मक माहौल में बीता। पिता मशहूर शायर कैफ़ी आज़मी और माँ रंगमंच की अदाकारा शौकत आज़मी के सान्निध्य में शबाना आज़मी का सुहाना बचपन बीता। माँ से विरासत में मिली अभिनय प्रतिभा को सकारात्मक मोड़ देकर शबाना ने हिन्दी फ़िल्मों में अपने सफर की शुरुआत की।[1]

विवाह

शबाना आज़मी ने हिन्दी फ़िल्मों के मशहूर लेखक जावेद अख़्तर से विवाह किया। जावेद पहले से शादी-शुदा थे, लेकिन फिर भी शबाना के प्यार में उन्होंने तलाक लेकर शादी की। पति जावेद अख़्तर के सक्रिय सहयोग ने शबाना आज़मी के हौसले को बढ़ाया और वे फ़िल्मों में अभिनय के रंग भरने के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक मंचों पर देश और समाज से जुड़ी अपनी चिंताएं अभिव्यक्त करने लगीं।

फ़िल्मी कॅरियर

शबाना आज़मी ने 1973 में अपने फ़िल्मी कॅरियर की शुरुआत की। उनकी पहली फ़िल्म थी श्याम बेनेगल की 'अंकुर'। अंकुर जैसी आर्ट फ़िल्म की सफलता ने शबाना आज़मी को बॉलिवुड में जगह दिलाने में अहम भूमिका निभाई। अपनी पहली ही फ़िल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का 'राष्ट्रीय पुरस्कार' हासिल हुआ था। इसके बाद 1983 से 1985 तक लगातार तीन सालों तक उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया। 'अर्थ', 'खंडहर' और 'पार' जैसी फ़िल्मों के लिए उनके अभिनय को राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया, जो एक बेहतरीन अदाकारा के लिए सम्मान की बात है।

'अमर अकबर एंथोनी', 'परवरिश', 'मैं आजाद हूं' जैसी व्यावसायिक फ़िल्मों में अपने अभिनय के रंग भरकर शबाना आज़मी ने सुधी दर्शकों के साथ-साथ आम दर्शकों के बीच भी अपनी पहुंच बनाए रखी। प्रयोगात्मक सिनेमा के भरण-पोषण में उनका योगदान उल्लेखनीय है। 'फायर' जैसी विवादास्पद फ़िल्म में शबाना ने बेधड़क होकर अपनी अभिनय प्रतिभा का प्रमाण दिया। भारतीय सिनेमा जगत की सक्षम अभिनेत्रियों की सूची में शबाना आज़मी का नाम सबसे ऊपर आता है। जीवन के छठे दशक में प्रवेश करने के बाद भी शबाना आज़मी की ऊर्जा अतुलनीय है। वे आज भी रुपहले पर्दे पर अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराती हैं। '15 पार्क एवेन्यू' और 'हनीमून ट्रैवेल्स प्राइवेट लिमिटेड' जैसी फ़िल्मों में उनका अभिनय नई पीढ़ी की अभिनेत्रियों पर हावी रहा।[1]

प्रयोगात्मक सिनेमा में योगदान

प्रयोगात्मक सिनेमा के भरण-पोषण में शबाना आज़मी का योगदान उल्लेखनीय है। 'फायर' जैसी विवादास्पद फ़िल्म में शबाना ने बेधड़क होकर अपनी अभिनय प्रतिभा का प्रमाण दिया। वहीं, बाल फ़िल्म 'मकड़ी' में वे चुड़ैल की भूमिका निभाती हुई नजर आईं। यदि 'मासूम' में मातृत्व की कोमल भावनाओं को जीवंत किया तो वहीं, 'गॉड मदर' में प्रभावशाली महिला डॉन की भूमिका भी निभाकर लोगो को हैरत मे डाल दिया। भारतीय सिनेमा जगत की सक्षम अभिनेत्रियों की सूची में शबाना आज़मी का नाम सबसे ऊपर आता है।

प्रमुख फ़िल्में

शबाना आज़मी की प्रमुख फ़िल्में
क्र.सं. फ़िल्म क्र.सं. फ़िल्म
1. अंकुर 2. अमर अकबर अन्थोनी
3. निशांत 4. शतरंज के खिलाड़ी
5. खेल खिलाड़ी का 6. हिरा और पत्थर
7. परवरिश 8. किसा कुर्सी का
9. कर्म 10 आधा दिन आधी रात
11. स्वामी 12. देवता
13. जालिम 14. अतिथि
15. स्वर्ग-नरक 16. थोड़ी बेवफाई
17. स्पर्श 18. अमरदीप
19. बगुला-भगत 20. अर्थ
21. एक ही भूल 22. हम पांच
23. अपने पराये 24. मासूम
25. लोग क्या कहेंगे 26. दूसरी दुल्हन
27. गंगवा 28. कल्पवृक्ष
29. पार 30. कामयाब
31. द ब्यूटीफुल नाइट 32. मैं आजाद हूँ
33. इतिहास 34. मटरू की बिजली का मंडोला

सम्मान तथा पुरस्कार

मुंबई की झुग्गी बस्ती में रहने वाले लोगों के लिए कार्य करने के लिए शबाना आज़मी को 'गांधी इंटरनेशल अवार्ड फॉर पीस' प्रदान किया गया। वर्ष 1992-1994 तक वह 'चिल्ड्रन्स फ़िल्म सोसाइटी' की सभापति भी रह चुकी हैं। शबाना आज़मी को पांच बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के 'राष्ट्रीय पुरस्कार' से सम्मानित किया गया है, जो एक रिकॉर्ड है। उन्हें पहली बार 1975 में फ़िल्म 'अंकुर', फिर 1983 में 'अर्थ', 1984 में 'खंडहर', 1985 में 'पार' और 1999 में फ़िल्म 'गॉडफादर' के लिए यह सम्मान दिया गया था।

सामाजिक कार्यकर्ता

किसी ने सच ही कहा है कि जब भी कोई अभिनेत्री कामयाबी की मंजिल तक पहुंचती है तो उसके नाम को कई अभिनेताओं के नाम के साथ जोड़ा जाता है; पर बहुत कम ही अभिनेत्रियां ऐसी होती हैं जो बिना किसी की परवाह किए अपने अंदाज से जिन्दगी को जीती हैं। उन अभिनेत्रियों में से एक नाम शबाना आज़मी का भी है। सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी शबाना आज़मी ने अपनी नई पहचान बनाई। एड्स के प्रति जागरुकता फैलाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। वे 1997 में राज्य सभा की सदस्या मनोनीत की गईं। एक सांसद के रूप में अपनी जिम्मेदारी गंभीरता के साथ निभाने के साथ-साथ उन्होंने स्वयं को किसी राजनीतिक दल से नहीं जोड़ा। किसी भी गंभीर राष्ट्रीय, सामाजिक मुद्दे पर वे अपने विचार को लेकर मुखर रही हैं।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 अंकुर से अर्थ और खंडहर से हनीमून तक (हिंदी) days.jagranjunction.com। अभिगमन तिथि: 11 नवम्बर, 2016।

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