"प्रयोग:Asha": अवतरणों में अंतर
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10:38, 10 मई 2010 का अवतरण
| नागालैंड प्रदेश के ज़िले |
दीमापुर ज़िला . कोहिमा ज़िला . मोकोक्चुन्ग ज़िला . मोन ज़िला . फेक ज़िला . ट्वेनसांग ज़िला . वोखा ज़िला . ज़ुन्हेबोटो ज़िला |
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कहावत लोकोक्ति मुहावरे वर्णमाला क्रमानुसार खोजें
| कहावत लोकोक्ति मुहावरे | अर्थ | |||
|---|---|---|---|---|
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1- काग घोंसला मारिये, मसि भींजत परिहार। |
अर्थ - कौआ, परिहार, जाट और खंगार ये चारों चतुर और चालक दुश्मन होते हैं। अगर इनसे दुश्मनी हो जाए तो कौए को उसके घोंसले में, राजपूत को मूंछ निकलने से पहले , जाट को जब भी अवसर मिले और खंगार(जाति) को जब वह बच्चा हो,घुटनों चलता हो, तब ही मार देना चाहिए अन्यथा देर हो जाएगी। | |||
| 2- कहे कबीर जमाना छानियाँ, भक्त ना देखे सुनार बानियाँ। |
अर्थ - कबीरदास जी कहते हैं कि पूरी दुनिया देख ली पर सुनार और बनिया लोग कभी भक्त नहीं होते। | |||
| 3- काठ की हंडी बार बार नहीं चढ़ती। |
अर्थ - लकड़ी की हंडिया बार बार नहीं चढ़ती। किसी व्यक्ति को एक बार ही मूर्ख बनाया जा सकता है, बार-बार नहीं। | |||
| 4- कंगाली में आटा गीला। |
अर्थ - नुकसान पर नुकसान होना। | |||
| 5- कहने से कुम्हार गधे पर नहीं चढ़ता। |
अर्थ - स्वयं को अक्लमंद समझने वाला किसी को कुछ नहीं मानता। | |||
| 6- काहे पंडित पढ़ि पढ़ि भरो, पूस अमावस की सुधि करो। |
अर्थ - यदि पूस माह की दशमी को घटा छायी हो तो सावन माह की दशमी को चारों दिशाओं में वर्षा होगी। | |||
| 7- कन्या धान मीनै जौ। जहां चाहै तहंवै लौ।। |
अर्थ - कन्या राशि की संक्रान्ति होने पर धान (कुमारी) और मीन राशि की संक्रान्ति होने पर जौ की फसल काटनी चाहिए। | |||
| 8- कुलिहर भदई बोओ यार। तब चिउरा की होय बहार।। |
अर्थ - कुलिहर (पूस-माघ में जोते हुए) खेत में भादों में पकने वाला धान बोने से चिउड़े का आनन्द आता है- अर्थात वह धान उपजता है। | |||
| 9- एक गंदी मछली सारे तालाब को गंदा कर देती है। |
अर्थ - कौआ चला हंस की चाल, भूल गया अपनी भी चाल। | |||
| 10- कंगाली में आटा गीला। |
अर्थ - एक मुसीबत पर दूसरी मुसीबत आ जाना। | |||
| 11- ककड़ी के चोर को फाँसी नहीं दी जाती। |
अर्थ - छोटे अपराध के लिए बहुत कड़ा दंड उचित नहीं होता है। | |||
| 12- कचहरी का दरवाजा खुला है। |
अर्थ - सभी के लिए न्याय का रास्ता खुला है,न्याय के लिए न्यायालय में जाना चाहिए। | |||
| 13- कड़ाही से गिरा चूल्हे में पड़ा। |
अर्थ - छोटी विपत्ति से छूटकर बड़ी विपत्ति में पड़ जाना। | |||
| 14- कबीर दास की उलटी बानी, बरसे कंबल भीगे पानी। |
अर्थ - उलटी बात करना। | |||
| 15- कब्र में पाँव लटकाए बैठा है । |
अर्थ - मरणासन्न । | |||
| 16- कभी दिन बड़े कभी रात। |
अर्थ - सब दिन एक समान नहीं होते। | |||
| 17- कभी नाव गाड़ी पर, कभी गाड़ी नाव पर। |
अर्थ - हालात बदलते रहते हैं। | |||
| 18- कमली ओढ़ने से फकीर नहीं होता। |
अर्थ - ऊपरी वेशभूषा से किसी के अवगुण नहीं छिप जाते। | |||
| 19- कमान से निकला तीर और मुँह से निकली बात वापस नहीं आती। |
अर्थ - बात सोच- समझकर करनी चाहिए। | |||
| 20- करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान |
अर्थ - प्रयत्न करते रहना चाहिए, सफलता अवश्य मिलेगी। | |||
| 21- करम के बलिया, पकाई खीर हो गया दलिया। |
अर्थ - | |||
| 22- करमहीन खेती करे, बैल मरे या सूखा पड़े। |
अर्थ - दुर्भाग्य हो तो किसी न किसी कारण से काम खराब होता रहता है। | |||
| 23- कर ले सो काम ,भज ले सो राम। |
अर्थ - कर्म करने और पूजा-पाठ करने में आनाकानी नहीं करनी चाहिए। | |||
| 24- कर सेवा तो खा मेवा। |
अर्थ - सेवा करने वाले को अच्छा फल मिलता है। | |||
| 25- करे कोई भरे कोई। |
अर्थ - किसी की करनी का फल कोई और भोगे। | |||
| 26- करे दाढ़ीवाला, पकड़ा जाए जाए मुंछोंवाला। |
अर्थ - किसी के अपराध के लिए किसी दूसरे को दोषी ठहराया जाता है। | |||
| 27- कल किसने देखा है। |
अर्थ - भविष्य में क्या होगा , कौन जानता है। कोई नहीं जानता कि कल क्या होने वाला है। | |||
| 28- कलाल की दुकान पर पानी पियो तो भी शराब का शक होता है। |
अर्थ - बुरी संगत में कलंक लगता ही है। शराब की दुकान पर जाओ तो सभी सोचते हैं कि शराब पीने गया होगा। | |||
| 29- कहने से धोबी गधे पर नहीं चढ़ता। |
अर्थ - मनमनी करने वाला दूसरों की बात नहीं मानता। | |||
| 30- कहाँ राम–राम, कहाँ टाँय-टाँय। |
अर्थ - उच्च कोटि की वस्तु से किसी निम्न- कोटि की वस्तु की तुलना नहीं की जा सकती। | |||
| 31- कहीं की ईंट, कहीं का रोड़ा, भानुमती ने कुनबा जोड़ा। |
अर्थ - बेमेल चीजें को जोड़-जोड़कर इकट्ठा कर लेना। | |||
| 32- कहीं गधा भी घोड़ा बन सकता है। |
अर्थ - बुरा या छोटा आदमी कभी अच्छा या बड़ा नहीं बन सकता। | |||
| 33- कहें खेत की, सुने खलिहान की। |
अर्थ - कहा कुछ गया और कुछ समझा कुछ गया। | |||
| 34- कागज़ की नाव नहीं चलती। |
अर्थ - बेईमानी या धोखेबाज़ी ज़्यादा दिन तक नहीं चल सकती। | |||
| 35- काजल की कोठरी में कैसो हू सयानो जाय, एक लीक काजल की लगि है सो लागि है। |
अर्थ - बुरी संगत में रहने से कभी न कभी कलंक अवश्य लग ही जाता है। | |||
| 36- काज़ी जी दुबले क्यों शहर के अंदेशे से। |
अर्थ - अपनी चिन्ता न करके दूसरों की चिन्ता करना। | |||
| 37- काठ की हाँडी एक ही बार चढ़ती है। |
अर्थ - धोखेबाजी हर बार नहीं चल सकती है। | |||
| 38- कान में तेल डाले बैठे हैं। |
अर्थ - कुछ सुनते ही नहीं , दुनिया की खबर ही नहीं। | |||
| 39- काम का ना काज का , दुश्मन अनाज का। |
अर्थ - निकम्मा आदमी। | |||
| 40- काबुल में क्या गधे नहीं होते। |
अर्थ - कुछ न कुछ बुराई सब जगह होती है। | |||
| 41- काम को काम सिखाता है। |
अर्थ - काम करते-करते अनुभव से आदमी होशियार हो जाता है। | |||
| 42- काल के हाथ कमान, बूढ़ा बचे न जवान, काल न छोड़े राजा, न छोड़े रंक। |
अर्थ - मृत्यु सब को आती है। | |||
| 43- काला अक्षर भैंस बराबर। |
अर्थ - पढ़ा लिखा ना होना। | |||
| 44- काली के ब्याह को सौ जोखो। |
अर्थ - एक दोष होने पर लोग अनेक दोष निकाल देते हैं। | |||
| 45- किया चाहे चाकरी राखा चाहे मान। |
अर्थ - स्वाभिमान की रक्षा नौकरी में नहीं हो सकती। | |||
| 46- किस खेत का बथुआ है, किस खेत की मूली है। |
अर्थ - अरे ,वह तो किसी कीमत का नहीं है अर्थात नगण्य है। | |||
| 47- किसी का घर जले कोई तापे। |
अर्थ - किसी के दु:ख और परेशनी से दूसरे का खुश होना। | |||
| 48- कुंजड़ा अपने बेरों को खट्टा नहीं बताता। |
अर्थ - कोई अपने माल को खराब नहीं बताता। | |||
| 49- कुँए की मिट्टी कुँए में ही लगती है। |
अर्थ - लाभ जहाँ से होता है वहीं खर्च भी हो जाता है। | |||
| 50- कुतिया चोरों से मिल जाए तो पहरा कौन दे। |
अर्थ - जब रक्षक ही बेईमान हो जाए तो क्या रास्ता है ? | |||
| 51- कुत्ता भी दुम हिलाकर बैठता है। |
अर्थ - सफ़ाई सब को पसंद होती है। | |||
| 52- कुत्ते की दुम बारह बरस नली में रखो तो भी टेढ़ी की टेढ़ी। |
अर्थ - लाख प्रयत्न करो, कुटिल व्यक्ति अपनी कुटिलता नहीं छोड़ता। | |||
| 53- कुत्ते को घी नहीं पचता। |
अर्थ - नीच आदमी उच्चे पद पाकर दूसरों को बेवकूफ समझने लगता है। | |||
| 54- कुत्ते के भौकनें से हाथी नहीं डरते। |
अर्थ - महापुरूष नीच व्यक्ति के द्वारा निंदा करने से नहीं घबराते हैं। | |||
| 55- कुम्हार अपना ही घड़ा सराहता है। |
अर्थ - हर कोई अपनी वस्तु की प्रशंसा करता है। | |||
| 56- कै हंसा मोती चुगे, कै भूखा मर जाय। |
अर्थ - प्रतिष्ठित व्यक्ति अपनी मर्यादा में रहता है। स्वाभिमान को छोड़कर नहीं जीना पसंद करता। | |||
| 57- कोई मरे कोई जीवे, सुथरा घोल बताशा गावे। |
अर्थ - सबको अपने सुख-दु:ख से मतलब होता है। दूसरों के दु:ख की कोई चिन्ता नहीं करता। | |||
| 58- कोई माल मस्तख़, कोई हाल मस्तत। |
अर्थ - कोई अमीरी से संतुष्ट, कोई गरीबी में भी संतुष्ट है। | |||
| 59- कोठी वाला रोवे, छप्पर वाला सोवे। |
अर्थ - धनवान धन होने पर भी चिंतित रहता है, गरीब धन ना होने पर भी निश्चिंत रहता है। | |||
| 60- कोयल होय न उजली, सौ मन साबुन लाइ। |
अर्थ - कोशिश करने पर भी स्वभाव नहीं बदलता है। | |||
| 61- कोयलों की दलाली में हाथ काले। |
अर्थ - बुरों की संगत से भले आदमी को भी कलंक लग जाता है। | |||
| 62- कौड़ी नहीं गाँठ, चले बाग की सैर। |
अर्थ - पूरे साधन नहीं और काम शुरू कर दिया। | |||
| 63- कौन कहे राजा जी नंगे हैं। |
अर्थ - बड़े लोगों की बुराई करने कि हिम्मत किसी की नहीं होती। | |||
| 64- कौआ चला हंस की चाल, भूल गया अपनी भी चाल। |
अर्थ - दूसरों की नकल करने से व्यक्ति अपना व्यक्तित्व भी खो बैठता है। | |||
| 65- क्या पिद्दी और क्या पिद्दी का शोरबा। |
अर्थ - तुच्छ वस्तु या व्यक्ति से बड़ा काम नहीं हो सकता है। | |||
| 66- का वर्षा जब कृषि सुखानी। |
अर्थ - अवसर निकलने जाने पर सहायता मिलना व्यर्थ होता है। | |||
| 67- कच्ची गोली नहीं खेलना। |
अर्थ - अनुभवहीन नही होना , पारंगत होना। | |||
| 68- कट जाना। |
अर्थ - शर्मिंदा होना, शर्मिंदा होकर सामने ना पड़ना। | |||
| 69- कटे पर नमक छिड़कना। |
अर्थ - दु:खी व्यक्ति को और अधिक दु:खी करना। | |||
| 70- कढ़ी का सा उबाल। |
अर्थ - मामूली से जोश में आना। |
_ | 71- कदम उखड़ना। |
अर्थ - भाग खड़े होना। |
| 72- कन्नी काटना। |
अर्थ - सामने ना पड़ना, कतरा कर निकल जाना। | |||
| 73- कमर कसना। |
अर्थ - पूरी तरह तैयार हो जाना। | |||
| 74- कलम का धनी। |
अर्थ - अच्छा लेखक होना, भाषा पर पकड़ होना। | |||
| 75- कलम तोड़ना। |
अर्थ - बहुत बढ़िया लिखना। | |||
| 76- कली खिलना। |
अर्थ - बहुत खुश होना। | |||
| 77- कलेजा ठंडा होना। |
अर्थ - मन को सुख, शांति और सकून मिलना। | |||
| 78- कलेजा धक से रह जाना। |
अर्थ - डर जाना, घबरा जाना। | |||
| 79- कलेजा मुँह को आना। |
अर्थ - दु:ख होना, परेशान होना। | |||
| 80- कलेजा का टुकड़ा। |
अर्थ - बहुत प्यारा बेटा होना। | |||
| 81- कलेजे पर साँप लोटना। |
अर्थ - डाह से कुढ़ना, जलन होना। | |||
| 82- कहा-सुनी होना। |
अर्थ - लड़ाई झगड़ा होना। | |||
| 83- काँटा दूर होना। |
अर्थ - बाधा दूर होना, रूकावटें हट जाना। | |||
| 84- काँटे बिछाना। |
अर्थ - रूकावटें और अड़चने पैदा करना। | |||
| 85- काँटों पर लेटना। |
अर्थ - बेचैन होना, परेशान होना। | |||
| 86- काँटों पर घसीटना। |
अर्थ - संकट, मुसीबत में डालना। | |||
| 87- कागजी घोड़े दौड़ाना। |
अर्थ - केवल लिखा-पढ़ी करते रहना। | |||
| 88- काजल की कोठरी। |
अर्थ - कलंक लगने का स्थान। | |||
| 89- काठ का उल्लू। |
अर्थ - महामूर्ख होना, बुद्धि ना होना। | |||
| 90- काठ मार जाना। |
अर्थ - हतप्रभ हो जाना, अचम्भित होना। | |||
| 91- कान कतरना। |
अर्थ - मात देना, बेवकूफ बनाना। | |||
| 92- कान खड़े होना। |
अर्थ - चौकन्ना होना। | |||
| 93- कान खोलना। |
अर्थ - सावधान कर देना। | |||
| 94- कान गरम करना। |
अर्थ - पिटाई करना। | |||
| 95- कान देना। |
अर्थ - ध्यान से सुनना। | |||
| 96- कान पकड़ना। |
अर्थ - गलती मान लेना। | |||
| 97- कान पर जूँ तक न रेंगना। |
अर्थ - कुछ भी परवाह न करना। | |||
| 98- कान भरना। |
अर्थ - चुगली करना। | |||
| 99- कान में बात डाल देना। |
अर्थ - सुना देना, कह देना। | |||
| 100- कान में तेल डालकर बैठना। |
अर्थ - सुनकर भी सुनी हुई बात पर ध्यान न देना। | |||
| 101- कान में फूँकना। |
अर्थ - चुपचाप से कह देना। | |||
| 102- कान लगाना। |
अर्थ - ध्यान देकर सुनना। | |||
| 103- काफूर होना। |
अर्थ - गायब हो जाना। | |||
| 104- काम आना। |
अर्थ - शत्रु के हाथों मारा जाना। | |||
| 105- काम तमाम करना। |
अर्थ - मार डालना। | |||
| 106- काया पलट जाना। |
अर्थ - बदल कर दूसरा ही रूप हो जाना। | |||
| 107- काल कवलित होना। |
अर्थ - मर जाना। | |||
| 108- काल के गाल में जाना। |
अर्थ - मर जाना। | |||
| 109- काला नाग। |
अर्थ - खोटा या घातक व्यक्ति । | |||
| 110- काला मुँह करना। |
अर्थ - बदनामी करना, नाम खराब करना। | |||
| 111- काले कोसों। |
अर्थ - बहुत दूर। | |||
| 112- क़िताबी कीड़ा होना। |
अर्थ - केवल पढ़ने में ही लगे रहना। | |||
| 113- किरकिरी हो जाना। |
अर्थ - विघ्न पड़ना। | |||
| 114- किस दर्द या मर्ज़ की दवा। |
अर्थ - किसी भी काम का न होना। | |||
| 115- किस्मत फूटना। |
अर्थ - बुरे दिन आना। | |||
| 116- कीचड़ उछालना। |
अर्थ - निंदा करना। | |||
| 117- कुआँ खोदना। |
अर्थ - किसी को हानि पहुँचाने की कोशिश करना। | |||
| 118- कुएँ में गिरना। |
अर्थ - विपत्ति में पड़ जाना। | |||
| 119- कुएँ में भाँग पड़ना। |
अर्थ - सबकी बुद्धि मारी जाना। | |||
| 120- कुछ उठा न रखना। |
अर्थ - कोई कसर या कमी न छोड़ना। | |||
| 121- कुत्ते की दुम। |
अर्थ - जैसा है वैसा ही रहना, बदलाव ना आना। | |||
| 122- कुत्ते की मौत मरना। |
अर्थ - बुरी तरह मरना। | |||
| 123- कूच कर जाना। |
अर्थ - चले जाना। | |||
| 124- कूप मंडूक होना। |
अर्थ - सीमित ज्ञान या अनुभव वाला होना। | |||
| 125- कोई दम भर का मेहमान होना। |
अर्थ - मरने के क़रीब होना। | |||
| 126- कोढ़ में खाज होना। |
अर्थ - दु:ख में और दु:ख होना। | |||
| 127- कोर दबना। |
अर्थ - दबाव में होना। | |||
| 128- कोल्हू का बैल। |
अर्थ - दिन रात काम में लगे रहने वाला। | |||
| 129- कौए उड़ाना। |
अर्थ - घटिया या छोटे काम करना। | |||
| 130- कौड़ी-कौड़ी पर जान देना। |
अर्थ - कंजूस होना। | |||
| 131- कंधे से कंधा छिलना। |
अर्थ - भारी भीड़ का होना, मेलों में यात्रियों का कंधे से कंधे छिलता है। | |||
| 132- ककड़ी-खीरा समझना। |
अर्थ - किसी व्यक्ति को नगण्य या तुच्छ समझना। | |||
| 133- कच्चा चिट्ठा खोलना। |
अर्थ - सबके सामने सब भेद खोल देना। |
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