आईएनएस विक्रमादित्य  

आईएनएस विक्रमादित्य
भारतीय विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य
विवरण 'आईएनएस विक्रमादित्य' भारत का विशाल विमान वाहक पोत है। भारतीय नौसेना के समुद्री पोतों में इस पोत का महत्त्वपूर्ण स्थान है।
देश भारत
स्वामी भारतीय नौसेना
निर्माता ब्लैक ‍सी शिपयार्ड, माइकोलयीव
वर्ग युद्धपोत
प्रकार विमान वाहक पोत
लम्बाई, ऊँचाई व वजन लम्बई- 283.5 मीटर, ऊँचाई- 20 मंजिला ऊँचा, वजन- 44,500 टन भारी।
संबंधित लेख भारतीय नौसेना, विमान वाहक पोत, पनडुब्बी, आईएनएस चक्र 2
अन्य जानकारी आईएनएस विक्रमादित्य पर 6 डीजल जनरेटर लगे हैं, जिससे 18 मेगावॉट बिजली मिलती है। 18 मेगावॉट बिजली से आराम से एक छोटा शहर रौशन हो सकता है। इस पर एक वक्त में 1600 से 1800 नौसैनिक मौजूद रहते हैं।

भारतीय नौसेना पोत विक्रमादित्य (संक्षिप्त नाम- 'आईएनएस विक्रमादित्य', अंग्रेज़ी: INS Vikramaditya) भारतीय नौसेना का सबसे लम्बा और विशाल युद्धपोत है। इस पोत के भारतीय नौसेना में शामिल होने से नौसेना की ताकत में जबरदस्त इजाफ़ा हुआ है। आईएनएस विक्रमादित्य पूर्व सोवियत विमान वाहक 'एडमिरल गोर्शकोव' का नया नाम है, जो भारत द्वारा हासिल किया गया है।

विशेषताएँ

आईएनएस विक्रमादित्य समुद्र पर चलता-फिरता अभेद्य क़िला है। 283.5 मीटर लंबा-यानी फ़ुटबॉल के तीन मैदान के बराबर, 20 मंजिला इमारत जितना ऊंचा, 44,500 टन भारी यह पोत भारतीय नौसेना का सबसे लंबा और विशाल युद्धपोत है।

  • 16 नवंबर, 2013 को आईएनएस विक्रमादित्य रूस के सेवमास शिपयार्ड में भारतीय नौसेना में कमीशन किया गया था। रूस ने डी-कमीशंड हो चुके एडमिरल गोर्शकोव नाम के अपने जहाज़ को भारतीय नौसेना की ज़रूरत के हिसाब से एक ताकतवर हथियार में बदल दिया।
  • विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य 30 लड़ाकू जहाज़ ले जाने की क्षमता से लैस है। इस पर मौजूद चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमान मिग-29के इसका सबसे बड़ा हथियार हैं। इस पर छह कोमोव-31 हेलीकॉप्टर भी तैनात रहते हैं, जो इसे पनडुब्बी हमले से भी बचा सकते हैं। विक्रमादित्य 6 नली वाली AK-630 तोप से लैस है। जमीन से हवा पर मार करने वाली बराक मिसाइल इसे दुश्मन के लड़ाकू जहाज़ से बचाने में सक्षम है।
  • 30 नॉट यानी 56 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से आईएनएस विक्रमादित्य बहुत तेजी से युद्धक्षेत्र तक पहुंच सकता है। इस पर लंबी दूरी के अत्याधुनिक एयर सर्विलेंस रडार लगे हुए हैं, जो इसे दुश्मन के हमले से सावधान करते हैं। अपने रडार प्रणाली से विक्रमादित्य अपने चारो तरफ़ 500 किलोमीटर के इलाके पर नज़र रख सकता है।
  • 500 किलोमीटर के रेडियस में समुद्र की दसों दिशाओं पर नज़र रखने, मिग-29के विमानों के जरिए आसमान पर 2000 किलोमीटर की दूरी तक दबदबा बनाये रखने और समुद्र में एक बार में 45 दिन तक रहने की क्षमता आईएनएस विक्रमादित्य में है। आईएनएस विक्रमादित्य समुद्र में जिस जगह खड़ा हो जाता है, वहाँ उसका राज कायम हो जाता है। यही वजह है कि आईएनएस विक्रमादित्य को गेम चेंजर यानी तस्वीर बदल देने वाली ताकत के तौर पर देखा जाता है।
  • आईएनएस विक्रमादित्य पर 6 डीजल जनरेटर लगे हैं, जिससे 18 मेगावॉट बिजली मिलती है। 18 मेगावॉट बिजली से आराम से एक छोटा शहर रौशन हो सकता है। इस पर एक वक्त में 1600 से 1800 नौसैनिक मौजूद रहते हैं, जिनके लिए एक लाख अंडे, 20 हज़ार लीटर दूध, 16 टन चावल की खपत हर महीने होती है।


अपनी इसी विशालता और ताकतवर प्रणाली की वजह से आईएनएस विक्रमादित्य नौसेना के लिए सबसे खास बन गया है। यही वजह है कि भारत के किसी भी रक्षा प्रतिष्ठान की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली यात्रा के लिए आईएनएस विक्रमादित्य को चुना गया था।


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