तीरभुक्ति  

तीरभुक्ति उत्तरी बिहार के तिरहुत प्रदेश को ही कहा जाता है। प्राचीन काल में यह प्रदेश मिथिला या विदेह जनपद में सम्मिलित था। उस समय तीरभुक्ति प्रान्त में ही वैशाली की स्थिति थी।

  • शक्ति संगम-तंत्र में तीरभुक्ति या विदेह का विस्तार गंडक से चंपारण्य तक माना गया है।
  • तीरभुक्ति का अनेक गुप्त कालीन अभिलेखों में उल्लेख है।
  • 'बसाढ़' (प्राचीन वैशाली) से प्राप्त मुद्राओं से सूचित होता है कि चंद्रगुप्त द्वितीय के समय तीरभुक्ति का अलग प्रान्त था, जिसका शासक गोविन्दगुप्त था।
  • गोविन्दगुप्त चंद्रगुप्त द्वितीय तथा महारानी धूम्रदेवी का पुत्र था और इसकी राजधानी वैशाली में थी।
  • मुद्राओं में तीरभुक्त 'युपरिकाघिकरण' अर्थात् तीरभुक्ति के शासक के कार्यालय का भी उल्लेख है।
  • गुप्त काल में भुक्ति एक प्रशासनिक एकक का नाम था।


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ऐतिहासिक स्थानावली |लेखक: विजयेन्द्र कुमार माथुर |प्रकाशक: राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी, जयपुर |पृष्ठ संख्या: 405 |


टीका टिप्पणी और संदर्भ

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